रविवार, 29 दिसंबर 2019

मंत्रियों में घबराहट


29 दिसंबर 2019
नगरीय निकाय चुनाव में जिन इलाकों में सत्ताधारी पार्टी का परफारमेंस पुअर रहा, उन क्ष़्ोत्रों के मंत्रियों की हालत खराब हो रही है। कई मंत्री घबराए हुए हैं। सरकार का वैसे भी एक साल कंप्लीट हो गया है। काम के लिए अब सिर्फ तीन साल बचे हैं। जाहिर है, पांचवे साल में चुनाव की तैयारी शुरू हो जाती है। लिहाजा, सरकार अब कोई एक्सपेरिमेंट नहीं करेगी। वैसे भी, सीएम भूपेश बघेल भी कई बार मंत्रियों को परफारमेंस को लेकर आगाह कर चुके हैं। नगरीय निकाय चुनाव में ओवरऑल पार्टी का प्रदर्शन भी बढ़ियां रहा। राहुल गांधी सीएम की पीठ थपथपा ही गए हैं। सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ल और देवती कर्मा जैसे कई लोग तैयार बैठे हैं। यह सब सोचकर कई मंत्रियों का दिल बैठा जा रहा है। आखिर, दाउ का क्या भरोसा….पुअर परफारमेंस पर कहीं बाहर का रास्ता न दिखा दें?

मंत्रालय में बड़ी सर्जरी

मंत्रालय में सचिव स्तर पर बहुत जल्द एक अहम बदलाव हो सकता है। इसमें सचिव स्तर के कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदलेंगी। कुछ सचिवों के पास कई-कई विभाग हैं। उनके लोड कम किए जाएंगे तो कुछ के दायित्व बढाएं जाएंगे। प्रसन्ना आर जैसे कुछ सिकरेट्री के पास कोई खास काम नहीं है। सरकार उन्हें कोई दूसरी जिम्मेदारी दे सकती है। कुछ मंत्री भी दुखी हैं कि उनके सिकरेट्री ठीक से काम नहीं कर रहे। फेरबदल में सरकार निश्चित तौर पर इसका भी ध्यान रखेगी। वैसे, पीडब्लूडी में भी कुछ चेंजेस हो सकते हैं। कोई आश्चर्य नहीं, पीएस होम सुब्रत साहू को कोई और अहम जिम्मेदारी मिल जाए। प्रिंसिपल सिकरेट्री डा0 आलोक शुक्ला को भी महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जाना लगभग तय लग रहा है। कुल मिलाकर मंत्रालय की सर्जरी अबकी इस हिसाब से की जाएगी कि वह कम-से-कम दो साल तक चले। सीएम भूपेश की काम करने वाली यही असली टीम होगी। वजह यह कि किसी भी नई सरकार का पहला साल अफसरो को परखने में निकल जाता है। एक साल में सीएम भी समझ गए हैं कि कौन काम करने वाले अफसर हैं और कौन जुबानी जमा खर्च वाले।

वेटिंग चेयरमैन

रिटायर आईपीएस गिरधारी नायक मानवाधिकार आयोग के मेम्बर बन गए हैं। जाहिर है, उनकी नजर प्रभारी चेयरमैन की कुर्सी पर रही होगी। क्योंकि, डीजी से रिटायर हुआ अफसर सिर्फ मेम्बर तो बनेगा नहीं। लेकिन, नायक को इसके लिए अभी वेट करना पड़ेगा। आयोग में अभी डिस्ट्रिक्ट जज रैंक के प्रभारी चेयरमैन हैं। उनके रिटायरमेंट में अभी छह-सात महीने का टाईम है। तब तक नायक को सदस्य बनकर काम करना होगा। हालांकि, प्रभारी चेयरमैन बनने के बाद भी नायक के सामने इस बात की खतरा हमेशा रहेगा कि सरकार कभी किसी हाईकोर्ट जस्टिस को चेयरमैन बना दिया तो? जाहिर है, चेयरमैन का पद वस्तुतः हाईकोर्ट के जस्टिस का है। जस्टिस की नियुक्ति न होने पर सरकार प्रभारी चेयरमैन बनाकर अपने लोगों को उपकृत करती है।

शुक्ला की बिदाई नहीं

करीब चार साल बाद मंत्रालय लौटे सीनियर आईएएस डा0 आलोक शुक्ला का जून 2020 में रिटायरमेंट है। याने सिर्फ छह महीने बाद। आलोक आईएएस से जरूर रिटायर हो जाएंगे। लेकिन, सरकार से नहीं। ताजा अपडेट यह है कि जब तक भूपेश सरकार रहेगी, आलोक सरकारी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहेंगे। बताते हैं, सीएम भूपेश बघेल ने भी उन्हें दो टूक कह दिया है, आपको रिटायर नहीं होना है। सरकार का मानना है, जब पिछली सरकार में रिटायमेंट के दस-दस साल बाद बाहरी अधिकारी जमे रहे तो फिर रिजल्ट देने वाले छत्तीसगढ़ियां आईएएस क्यों नहीं। वैसे ठीक भी है। सूबे में सीनियर लेवल पर अफसरों का वैसे ही टोटा है। आलोक तो काबिल अधिकारी माने जाते हैं। फूड और हेल्थ में उन्होंने काफी काम किया है।

व्यापम में आईएएस

आईएफएस उमा देवी के डेपुटेशन पर भारत सरकार जाने से व्यापम चेयरमैन का पद खाली हो गया है। पीएमटी पर्चा कांड के बाद विवादों में रहे इस भर्ती बोर्ड को सरकार मजबूत करने पर विचार कर रही है। इसके लिए जल्द ही किसी आईएएस को व्यापक का नया चेयरमैन अपाइंट किया जा सकता है। आईएएस भी सीनियर होगा। उन्हें टास्ट दिया जाएगा कि खाली पड़े सैकड़ों पदों पर अगले चार साल में ज्यादा-से-ज्यादा भर्तियां पूरी कर लें।

आईपीएस के प्रमोशन

कुछ साल पहिले तक आईपीएस में परंपरा रही कि एक जनवरी को प्रमोशन मिल जाता था। इसकी तैयारी पहले ही पूरी कर ली जाती थी। और, 31 दिसंबर की शाम को आर्डर निकल जाता था। 2009 के बाद यह परंपरा बंद हो गई। लेकिन, इस बार यह सुनने में आ रहा है कि प्रमोशन को लेकर सरकार संजीदा है। गृह विभाग में इसको लेकर कई बैठकें हो चुकी है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही आईपीएस में प्रमोशन हो जाएगा। हालांकि, इस बार संख्या काफी कम है। आईजी से एडीजी प्रमोट होने वाले सिर्फ प्रदीप गुप्ता हैं। वे बिलासपुर के आईजी हैं। प्रमोशन के बाद उन्हें वहीं कंटीन्यू कर दिया जाएगा। डीआईजी टीआर पैकरा आईजी बनेंगे। चूकि वे हाल ही में ट्रांसपोर्ट में आए हैं। लिहाजा, उन्हें भी बदलने की कोई संभावना नहीं है। एसपी से डीआईजी बनने वालों में जरूर चार आईपीएस हैं। इनमें एक राजनांदगांव के एसपी बीएस धु्रव भी शामिल हैं। उनके अलावा आरएन दास, मयंक श्रीवास्तव और टी एक्का भी डीआईजी बनेंगे।

महिला अफसरों पर भरोसा

भारत निर्वाचन आयोग ने आईएएस रीना बाबा कंगाले को राज्य निर्वाचन पदाधिकारी बनाने के लिए ओके कर दिया है। हालांकि, जीएडी से उनका अभी आर्डर नहीं निकला है। सरकार चाह रही है कि रीना के पास एडिशनल चार्ज के रूप में मंत्रालय का चार्ज बना रहे। इसके लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी गई है। बहरहाल, निधि छिब्बर के बाद रीना दूसरी महिला आईएएस होंगी, जिन्हें भारत निर्वाचन आयोग ने इस पद पर पोस्टिंग दी है। दिलचस्प यह है कि निधि छिब्बर का नाम जब निर्वाचन आयोग को भेजा गया था तब तीन सदस्यीय पेनल में उनका नाम सबसे उपर था। आयोग ने उनके नाम को टिक कर दिया था। इस बार भी तीन नाम भेजे गए, उनमें रीना कंगाले, अविनाश चंपावत और सुबोध सिंह के नाम थे। हालांकि, सुबोध का नाम कोरम पूरा करने के लिए भेजा गया होगा, क्योंकि उन्हें डेपुटेशन पर जाने राज्य सरकार एनओसी दे चुकी है।

मंत्रियों में टकराव?

नगरीय निकाय चुनाव में राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने पार्टी के पिछड़ने का ठीकरा पुलिस पर फोड़ा है। अग्रवाल का आरोप है कि पुलिस ने कांग्रेस पार्टी के पार्षदों को हराने के लिए काम किया। राजस्व मंत्री के इस आरोप के बाद गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने अपनी पुलिस का बचाव करने में देर नहीं लगाई। उन्होंने कहा, पता नहीं मंत्रीजी ने ये कैसे कह दिया। पुलिस ऐसा काम नहीं कर सकती….पुलिस हराने और जिताने का काम नहीं करती। तो क्या इसे मंत्रियों में टकराव की शुरूआत मानी जाए।

विभाग छोटा, काम बड़ा

गर ढंग से काम किया जाए तो छोटा विभाग भी अहम बन जाता है। जैसा संस्कृति विभाग अभी हुआ है। आदिवासी डांस महोत्सव से पहिले भला कौन जानता था कि पुछल्ला सा विभाग राज्य और राज्य सरकार की इस तरीके से ब्रांडिंग करा देगा। नेशनल मीडिया में यह आयोजन सुर्खियों में रहा। इस आयोजन की खासियत यह है कि सरकार का इसमें एक रुपया नहीं लगा। बारह-तेरह करोड़ रुपए में में से साढ़े सात करोड़ एनएमडीसी दे दिया। बाकी पैसा लोकल इंडस्ट्री देने वाली है। इस आयोजन से संस्कृति सचिव सिद्धार्थ परदेशी का नम्बर बढ़ गया है। सरकार में बैठे लोग भी बोल रहे, सिद्धार्थ ने जबर्दस्त मेहनत किया। हालांकि, अगला साल पर्यटन विभाग के लिए भी अहम होगा। रामपथ गमन के साथ ही कोरबा के बांगो को नेशनल लेवल का टूरिस्ट सेंटर बनाने पर काम प्रारंभ हो गया है। बांगो के बारे में बताते हैं, वैसा लंबा झील देश में कहीं नहीं है। भोपाल से भी बड़ा। करीब 40 किमी में पसरा। सिकरेट्री टूरिज्म अंबलगन पी इसके लिए बांगो का मुआयना करके आ चुके हैं। मंत्रालय में इस मास्टर प्लान पर काम प्रारंभ हो चुका है। याने टूरिज्म भी कुछ बड़ा करने वाला है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. नए साल में सैर-सपाटे पर जाने सरकार से छुट्टी मांगने से ब्यूरोक्रेट्स घबरा क्यों रहे हैं?
2. दुर्ग सांसद विजय बघेल क्या भारतीय जनता पार्टी के अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे?

शनिवार, 28 दिसंबर 2019

फिर आचार संहिता



22 दिसंबर 2019
नगरीय निकाय चुनाव के नतीजे 24 दिसंबर को आएंगे। इससे पहिले राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल, आयोग के पास टाईम भी नहीं है। 15 फरवरी तक ग्राम पंचायत, जनपद और जिला पंचायतों के पदाधिकारियों को शपथ दिलाने की प्रक्रिया निबटानी पड़ेगी। खबर है, नगरीय निकाय के रिजल्ट के एक-दो दिन के भीतर ही आयोग पंचायत चुनाव का ऐलान कर देगा। इसके साथ ही कोड ऑफ कंडक्ट फिर प्रभावशील हो जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि आचार संहिता की वजह से डेढ़ महीने से सरकारी कामधाम ठप पड़ा है, वो 20 फरवरी तक फुरसत समझिए। छत्तीसगढ़ के साथ यही बिडंबना है, राज्य सरकार के पांच साल में से सवा साल आचार संहिता में गुजर जाता है। विधानसभा चुनाव के लिए पिछले साल 6 अक्टूबर को कोड ऑफ कंडक्ट लगा था। वह दिसंबर एंड में खतम हुआ। जनवरी नया साल में निकल गया। फरवरी में लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई। मई एंड में लोस चुनाव संपन्न हुआ तो जून में बरसात शुरू हो गई। अक्टूबर बरसात, दशहरा और दिवाली में निकल गया। नवंबर में ठाकुर राम सिंह ने नगरीय निकाय चुनाव का बिगुल फूंक दिया। और, अब पंचायत चुनाव। वैसे, कम-से-कम इस साल तो ये ठीक है, फरवरी में बजट पेश हो जाएगा। इसके बाद नया बजट, नया काम।

अफसरों को अभयदान

यह बात स्पष्ट है, नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों से जिलों के कलेक्टर्स एवं नगर निगम कमिश्नरों का न केवल परफारमेंस आंका जाएगा….बल्कि इसी से उनका भविष्य तय होगा। अधिकांश कलेक्टरों एवं निगम कमिश्नरों का जिलों में एक बरस पूरा हो गया है। ऐसे में, कोई कलेक्टर या कमिश्नर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। कलेक्टर वैसे भी जिले में सरकार के प्रतिनिधि होते हैं। रिजल्ट अनुकूल नहीं आने का मतलब होगा, उन्होंने सरकार की योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं कराया। कलेक्टर्स और कमिश्नर्स भी इस चीज को समझ रहे हैं। तभी 25 दिसंबर का डेट उन्हें काफी डराया हुआ है। इस दिन चुनाव के रिजल्ट आएंगे। लेकिन, रिजल्ट अच्छा आए या खराब। पंचायत चुनाव के चलते उन्हें अब फरवरी तक के लिए अभयदान मिल जाएगा। आचार संहिता की वजह से अफसरों को हटाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि, कलेक्टर डिस्ट्रिक्ट रिटर्निंग आफिसर होते हैं। उसी तरह निगम कमिश्नर असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट रिटर्निंग आफिसर।

अब बजट के बाद

पंचायत चुनाव के चलते लगता है, मेगा प्रशासनिक फेरबदल अब बजट के बाद ही हो पाएगा। फरवरी में मुख्यमंत्री एवं भारसाधक वित्त मंत्री भूपेश बघेल अपना दूसरा बजट पेश करेंगे। तब तक धान खरीदी का काम भी पूरा हो जाएगा। तब जिलों में थोक में ट्रांसफर होंगे। हां, मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय में जरूर कुछ अहम बदलाव हो सकते हैं…. ऐसी खबरें आ रही हैं।

डीजी का प्रमोशन

भारत सरकार ने संजय पिल्ले और आरके विज को फिर से डीजी बनाने के लिए अनुमति दे दी है। फिर से का मतलब आप समझते होंगे….दोनों को पिछले साल 6 अक्टूबर को पिछली सरकार ने डीजी बनाया था। नई सरकार ने पदोन्नति को निरस्त कर पिल्ले, विज और मुकेश गुप्ता को डिमोट कर दिया। मुकेश गुप्ता चूकि सस्पेंड हैं, लिहाजा राज्य सरकार ने दो पदों के लिए डीपीसी करने की अनुमति मांगी थी। इस दौरान 30 नवंबर को डीजी बीके सिंह के रिटायर हो जाने के बाद तीसरा पद भी खाली हो गया है। एडीजी अशोक जुनेजा इस तीसरे पद के इकलौते दावेदार हैं। अब प्रश्न यह है कि सरकार दो पदों पर डीपीसी कर देगी या फिर जुनेजा के लिए भारत सरकार से अनुमति आने का वेट करेगी। हालांकि, पिछली सरकार ने बिना अनुमति ही तीनों को डीजी बना दिया था। जुनेजा का प्रमोशन जनवरी से ड्यू है। कुल मिलाकर संजय पिल्ले के ग्रह-नक्षत्र कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। पिछले साल पोस्ट होने के बाद भी उन्हें प्रमोशन के लिए 10 महीना वेट करना पड़ा। क्योंकि, सरकार विज और गुप्ता के बगैर उन्हें डीजी बनाने के लिए तैयार नहीं थी। पिल्ले डीजी बने और बिना कसूर के डिमोट हो गए। उनके लिए एक पोस्ट तो खाली थी ही। लेकिन, एक ही आदेश में तीनों का प्रमोशन हुआ था इसलिए तीनों का निरस्त करना पड़ गया।

सीएस की क्लास

चीफ सिकरेट्री की कुर्सी संभालने के डेढ़ महीने के भीतर आरपी मंडल 23 दिसंबर को तीसरी बार कलेक्टरों से मुखातिब होंगे। उन्होंने कलेक्टरों के साथ जिला पंचायत सीईओ और डीएफओ को भी वीडियोकांफें्रंसिंग में मौजूद रहने के लिए कहा है। सीएस जिलों में चल रहे मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का रिव्यू करेंगे। मंडल के बारे में कलेक्टरों का कहना है कि एजेंडा सिर्फ कहने के लिए होता है, सीएस पूरी क्लास ले डालते हैं। इसलिए, पूरी तैयारी करनी पड़ती है। न जाने किस योजना के बारे में पूछ दें। ऐसे में, नए सीएस से जिले के अधिकारी थोड़ा असहज महसूस करने लगे हैं। पहले महीने में एक वीडियोकांफें्रसिंग होती थी। अब 15 दिन में वीडियोकांफें्रसिंग तो हो ही रही है सीएस खुद ही दौरे पर निकल जा रहे हैं। नवंबर में कलेक्टर कांफ्रेंस के बाद वे संभाग मुख्यालयों में जाकर अफसरों की क्लास ले चुके हैं।

कलेक्टर का बंगला

ब्यूरोक्रेसी का भी अजीब आलम है…राजधानी में एक महिला कलेक्टर के घर पर चोरी हुई तो चोरी पर चिंता जताने की बजाए अफसरों के बीच खुसुर-पुसुर शुरू हो गई….कलेक्टर को राजधानी में आवास कैसे मिल गया है। दरअसल, कलेक्टर को सरकार ने विशेष केस में दो महीने बंगला अपने पास रखने की इजाजत दी थी। नवबंर फर्स्ट वीक में यह पीरियड खतम हो गया था। सिर्फ डेढ़ महीना लेट हुआ आवास खाली करने में। तब तक चोरों ने हाथ साफ कर दिया। उधर, कलेक्टर का आदेश निकलते ही एडीजी पवनदेव ने सितंबर में ही यह बंगला अपने नाम पर अलॉट करा लिया था। नया अपडेट यह है कि महिला कलेक्टर ने बंगला खाली कर दिया है। पीडब्लूडी ने उसकी चाबी पवनदेव को सौंप दी है। बिलासपुर आईजी बनने से पहिले पवनदेव इसी बंगले में रहते थे। जाहिर है, इस बंगले से उनका लगाव तो रहेगा ही।

अंत में दो सवाल आपसे

1. पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए अफसर आजकल अपने सर्विस के स्टे्टस का ध्यान क्यों नहीं रख रहे?
2. नगरीय निकाय चुनाव के बाद बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां होगी या पंचायत चुनाव के बाद?

रविवार, 8 दिसंबर 2019

कलेक्टर्स, कमिश्नर्स और स्कूटी

8 दिसंबर 2019
नौकरशाहों के लिए सबसे प्रिय कोई चीज होती है तो वह है गाड़ी और बंगला। अफसर बिरादरी में इसी से उनकी हैसियत आंकी जाती है। उनके बंगले में कम-से-कम तीन गाड़ियां तो खड़ी होनी ही चाहिए। लेकिन, छत्तीसगढ़ में पता नहीं अफसरों को किसकी नजर लग गई, पहले पीली बत्ती उतर गई। और अब चीफ सिकरेट्री ने ऐसा कर दिया है कि सरकारी गाड़ियों का मोह छोड़ कलेक्टरों, निगम कमिश्नरों को अब मोटरसायकिलों पर घूमना पड़ रहा है। उनमें भी नम्बर बढ़ाने के लिए स्कूटर में बैठे फोटो वायरल करने की मजबूरी। सुबह की ठंड में टू व्हीलर वाली फोटो शेयर करने वाले अफसरों का दर्द आप समझ सकते हैं।

वाट्सएप पर अपडेट पाने के लिए कृपया क्लीक करे

आईपीएस में उलटफेर

पुलिस मुख्यालय में सरकार जल्द ही बड़ी उलटफेर कर सकती है। संकेत हैं, डीजी के लिए होने जा रही डीपीसी के बाद सरकार अहम आदेश निकालेगी। इसमें पीएचक्यू समेत जेल, होमगार्ड, नक्सल आपरेशन, लोक अभियोजन, सबमें बदलाव किया जा सकता है। नए फेरबदल में आईपीएस अशोक जुनेजा को अहम पोस्टिंग मिल सकती है तो एडीजी पवनदेव को पीएचक्यू में और जिम्मेदारी मिलेगी। अशोक जुनेजा रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर तीनों बड़े जिलों के एसपी रह चुके हैं। बिलासपुर और दुर्ग के आईजी भी। ट्रांसपोर्ट में भी रहे हैं और युवा और खेल में भी। मंत्रालय में सिकरेट्री होम भी। पीएचक्यू में प्रशासन और छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स, पुलिस ट्रेनिंग, पुलिस भरती अभी हैं ही। याने पूरा तजुर्बा है उनके पास। नए फेरबदल में एसआरपी कल्लूरी को भी कोई विभाग दिया जाएगा। ट्रांसपोर्ट से हटने के बाद कल्लूरी के पास अभी कोई विभाग नहीं है।

डीजी के लिए डीपीसी

संजय पिल्ले और आरके विज को एडीजी से डीजी बनाने राज्य सरकार ने भारत सरकार को लेटर लिखा था, उसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। और, महीना भर हो भी गया है। नियम यह है कि भारत सरकार महीने भर के भीतर कोई आपत्ति नहीं करती या कोई रिप्लाई नहीं आता तो राज्य सरकार प्रमोशन कर सकती है। हाल ही में 2004 बैच के आईएएस को सिकरेट्री बनाया गया, उसमें भी ऐसा ही हुआ। आदेश के नीचे में जीएडी ने इसका हवाला देते हुए बताया था कि भारत सरकार को एक महीने पहले अनुमति के लिए पत्र भेजा गया और एक महीने की अवधि पूरी हो गई, इसलिए प्रमोशन किया जाता है। ऐसे में, पिल्ले और विज की किसी भी दिन डीपीसी हो सकती है। साथ में, एडीजी अशोक जुनेजा की भी डीपीसी होने की खबर है। क्योंकि, डीजी जेल बीके सिंह के रिटायर होने के बाद डीजी के तीन पद खाली हो गए हैं। और, मुकेश गुप्ता सस्पेंड हैं, लिहाजा उनका प्रमोशन अब हो नहीं सकता। मुकेश के बाद सीनियरिटी में जुनेजा आते हैं। और, जनवरी 2019 से उनका प्रमोशन ड्यू भी हो गया है।

मंत्रालय में भी चेंज

हालांकि, 31 अक्टूबर को नए चीफ सिकरेट्री की पोस्टिंग के साथ ही कुछ सचिवों के प्रभार में बदलाव किया गया था। बावजूद इसके संकेत मिल रहे हैं, मंत्रालय में सिकरेट्री की एक और लिस्ट निकल सकती है। इसमें कुछ अहम विभागों के सचिवों को इधर-से-उधर किया जाएगा। प्रिंसिपल सिकरेट्री होम एंड जेल सुब्रत साहू को एकाध विभाग और मिल सकता है।

कलेक्टरों की बढ़ी धड़कनें

धान खरीदी प्रारंभ होने के बाद सूबे के सीमाई जिलों के कलेक्टरों की धड़कनें तेज हो गई है….पता नहीं किस दिन आर्डर निकल जाए। दरअसल, सरकार की नोटिस में है कि हर साल छत्तीसगढ़ में लगभग पांच लाख मीट्रिक टन अवैध धान दूसरे प्रदेशों से आता है। लगभग 12 सौ करोड़ का। इस साल बिचौलियों के लिए तो लाटरी निकलने जैसा था…भूपेश बघेल सरकार 25 सौ में धान खरीद रही है। लिहाजा, अवैध धान को नहीं रोका गया तो सरकारी खजाने पर चपत बैठनी तय है। इसे रोकना सरकार के लिए चुनौती से कम नहीं है। चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल ने इसके लिए कलेक्टर, एसपी का अलग से व्हाट्सएप ग्रुप बना दिया है। वे सुबह से पूछना चालू कर देते हैं, किसने, कितना धान पकड़ा। इसके बाद फूड सिकरेट्री कमलप्रीत और मार्कफेड एमडी शम्मी आबिदी का दिन भर कलेक्टरों को फोन। हालांकि, कलेक्टरों ने अभी तक पिछले साल की तुलना में सिर्फ सात दिन में चार गुना अधिक अवैध धान पकड़ लिया है। फिर भी, कोरिया, बलरामपुर, धमतरी, राजनांदगांव, कवर्धा, गरियाबंद समेत दस सीमाई जिलों के कलेक्टरों के लिए मुसीबत तो है, पता नहीं कब क्या हो जाए।

खेतान, सुब्रत भी लपेटे में

आईएएस अफसर विधानसभा में सवाल उठाने को लेकर भले ही भड़के हुए हों लेकिन, क्लास ये भी है कि सवाल के जवाब तैयार करने के तरीके से आईएएस एसोसियेशन के प्रेसिडेंट सीके खेतान और पीए होम सुब्रत साहू भी लपेटे में आ गए हैं। मंत्रालय से विधानसभा को भेजे गए जवाब में खेतान को तीन देश और सुब्रत को दो देशों की निजी यात्रा की जानकारी दी गई। जबकि, खेतान का दो दौरा टोटली सरकारी था। एक तो ऑस्ट्रेलिया में वे नरवा, गरवा पर उन्होंने भाषण दिया था। और, दूसरा आक्सफोर्ड में दो हफ्ते का स्टडी टूर। उन्होंने दो-दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी ले ली और उन्हीं के बिरादरी वाले अफसरों ने उसे प्रायवेट यात्रा करार देकर विधानसभा को जानकारी भेज दी। ऐसा ही कुछ सुब्रत साहू के साथ हुआ। ऐसे में, आईएएस लॉबी का जज्बाती होकर न्याय की बात करना, कितना लाजिमी है। आईएएस लॉबी का कहना है, निजी यात्राओं के लिए अनुमति लेना आवश्यक नहीं है। तो उनसे पूछना चाहिए…फिर खेतान और सुब्रत के सरकारी दौरे को निजी क्यों बता डाले।

रियल इस्टेट को राहत

रियल इस्टेट को भूपेश बघेल सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। अभी तक रियल इस्टेट के लिए कोई विभाग नहीं था। कुछ काम टाउन एंड कंट्री में होता था, तो कुछ नगर निगम से। कलेक्टरों को भी बिल्डरों को परिक्रमा लगानी पड़ती थी। अब रियल इस्टेट के लिए आवास पर्यावरण को नोडल विभाग बना दिया है। उनके कामों के लिए सिंगल विंडों सिस्टम प्रारंभ किया जा रहा है। पहले बिल्डरों को प्रोजेक्ट की सरकारी प्रक्रिया पूरी करने में दो साल तक लग जाते थे। बिल्डरों ने सीएम को बताया था कि इसके चलते प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाती है। सीएम ने इसके बाद अफसरों को निर्देश दिए कि ऐसी व्यवस्था बनाएं कि दो महीने में बिल्डरों का काम निबट जाए। इसी तरह उद्योगों के लिए भी सिंगल विंडो सिस्टम प्रारंभ किया जा रहा। अभी तक सिंगल विंडो तो था मगर सिर्फ नाम के लिए। अब इसे धरातल पर उतारा जा रहा है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. विदेश यात्राओं पर भड़कने वाली आईएएस लॉबी पिछली सरकार में जब आईएएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो चुप्पी क्यों साधे रही?
2. दूसरा सवाल,,,,
2. संजय पिल्ले को एडीजी जेल बनाने के बाद एडीजी आरके विज को भी क्या किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जायेगा?

शनिवार, 7 दिसंबर 2019

मंत्री को भी चाहिए न्याय

सूबे के युवा आदिवासी मंत्री का बेटा दुर्ग के इंजीनियरिंग काॅलेज से बीई कर रहे हैं। वहां किसी बात को लेकर हाॅस्टल में कुछ छात्रों से विवाद हो गया। छात्रों के समर्थन में एनएसयूआई के नेता हाॅस्टल पहुंचे और मंत्रीजी के बेटे की जमकर पिटाई कर दी। अब बेटा पिट जाए, किसी भी पिता को भला बर्दाश्त कैसे हो सकता है। वो भी पिता जब मंत्री हों। गुस्से में तमतमाते हुए मंत्रीजी ने फौरन दुर्ग के सीनियर पुलिस अधिकारियों को फोन लगाया। बोले, बेटे के साथ मारपीट करने वालों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भिजवाओ, वरना खैर नहीं….विधानसभा चालू होने वाला है…समझ जाना। मगर मंत्रीजी की इस घुड़की का पुलिस अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ। मंत्रीजी इसके बाद दुर्ग गए और बेटे को साथ लेकर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के पास न्याय मांगने पहुंचे। गृह मंत्रीजी बोले, निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी। मगर क्लास यह है कि घटना के एक हफ्ते बाद गिरफ्तारी तो छोड़िये, अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। सुना है, अब मंत्रीजी कार्रवाई के लिए डीजीपी डीएम अवस्थी से मिलने वाले हैं। ऐसे में, समझा जा सकता है, सूबे में पोलिसिंग की क्या हालत है। मंत्री रिपोर्ट लिखाने भटक रहे हैं, तो आम आदमी का क्या होगा?

अफसर, पुलिस और चोर

एक अफसर के घर में चोरी हुई। पुलिस में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई। चूकि, बड़े अफसर का मामला था, पुलिस हरकत में आई और हाईप्रोफाइल चोर को पकड़ लिया गया। अब आई पैसे और जेवरात की बरामदगी की बारी। चोरी की रिपोर्ट में जो नगदी और गहने का ब्यौरा दिया गया था, चोरों के पास माल उससे कहीं अधिक ज्यादा मिला। रिपोर्ट जितने की लिखाई गई है, पुलिस उससे अधिक भला बरामदगी कैसे दिखा सकती है। चोरों ने भी मीडिया की खबरों को पढ़ लिया था कि इतनी राशि की चोरी हुई है। लिहाजा, पुलिस और चोरों ने मिलकर आपस में समझ लिया और जितनी रकम और जेवरात अफसर द्वारा बताई गई थी, उतना लौटा दिया गया। व्हाट इज आइडिया!

आईएएस में एक, आईपीएस में जीरो

डीजी जेल और होमगार्ड बीके सिंह के रिटायर होने के बाद आईपीएस में सीनियर लेवल पर शून्यता की स्थिति निर्मित हो जाएगी। राज्य बनने के बाद यह पहली बार होगा कि डीजी लेवल पर डीजीपी के अलावा एक भी अफसर नहीं होगा। जबकि, सूबे में डीजी के चार पोस्ट हैं। लेकिन, इस साल डीजी लेवल के तीन आईपीएस रिटायर हो गए। पहले गिरधारी नायक, फिर एएन उपध्याय और अब बीके सिंह। इससे पहिले डीजी लेवल पर अफसरों की संख्या इतनी होती थी कि स्पेशल डीजी बनाना पड़ता था। संतकुमार पासवान स्पेशल डीजी रह चुके हैं। यानि पोस्ट न रहने के बाद भी भारत सरकार से अनुमति लेकर प्रमोशन दे दिया जाता था। मगर इस बार मामला ही उल्टा है। डीजी लेवल पर कोई अफसर ही नहीं है। पूरे तीन पद खाली हैं। कमोवेश इसी तरह के हालात आईएएस में भी है। चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के बाद मंत्रालय में सिर्फ एक एडिशनल चीफ सिकरेट्री हैं। अमिताभ जैन। ऐसा कभी नहीं हुआ कि सरकार के पास एक एसीएस हो। एक समय तो छह-छह एसीएस हो गए थे। स्वीकृति पद से भी अधिक। और अभी मात्र एक। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सीएस 87 बैच के हैं। उनसे नीचे 88 बैच में केडीपी राव थे। वे 31 अक्टूबर को रिटायर हो गए। 89 बैच में भी एक ही आईएएस हैं। अमिताभ जैन। 90 बैच के शैलेष पाठक नौकरी छोड़ दिए। 91 बैच में रेणु पिल्ले, 92 बैच में सुब्रत साहू और 93 बैच में अमित अग्रवाल हैं। याने सभी बैच में एक-एक अफसर। 94 बैच में जरूर चार-पांच आईएएस हैं। मगर दिक्कत यह है कि 2024 या बहुत हुआ तो 2023 के एंड में ये एसीएस बन पाएंगे। तब मंत्रालय में यही स्थिति रहनी है।

सीएस के ग्रुप में एसपी

अवैघ धान पकड़ने में जिले के पुलिस कप्तान कितने सजग हैं, चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल इस पर नजर रख रहे हैं। इसके लिए चीफ सिकरेट्री ने एक अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हैं। उन्होंने इस ग्रुप में सभी 27 जिलों के कलेक्टरों को जोड़कर सभी को एडमिन बना दिया। कलेक्टरों को उन्होंने अपने-अपने जिलों के एसपी को जोड़ने का मैसेज भेजा। अब सारे कलेक्टर, एसपी सीएस के व्हाट्सएप ग्रुप में हैं। हालांकि, कलेक्टर तो सीएस के ग्रुप में रहते ही हैं, पहला मौका होगा जब सीएस के व्हाट्सएप ग्रुप में एसपी भी जोड़े गए हैं। सीएस लगातार व्हाट्सएप के जरिये धान के अवैध ढुलाई को वाॅच कर रहे हैं।

डीएम भी अब सड़क पर

डीजीपी डीएम अवस्थी भी अब पुलिस मुख्यालय से निकलकर फील्ड में उतर गए हैं। पिछले हफ्ते अचानक वे धमतरी जिलों के कई थानों में धमक गए। एक थाने में डीजीपी जब पहुंचे तो वहां जश्न की तैयारी चल रही थी। थाने में एक भी स्टाफ बर्दी में नहीं था। कोई जिंस में था तो कोई टीशर्ट में। डीएम ने थानेदार समेत सात पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

अजय अध्यक्ष?

विधानसभा के शीत सत्र में विधायक अजय चंद्राकर गजब फर्म में दिखे। लगा पूरी पार्टी एक तरफ और अजय एक तरफ। विपक्ष की ओर से सत्ता पक्ष पर हमला बोलने का जिम्मा अकेले ही संभाले रहे। उनकी आक्रमकता ने मंत्रियों को भी कई बार असहज किया। पता चला है, बीजेपी में नया अध्यक्ष अपाइंट होने वाला है। उसमें अजय चंद्राकर का भी नाम है। चंद्राकर के साथ सिर्फ एक रोड़ा है वह कुर्मी होना। असल में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी उन्हीं के समुदाय से आते हैं। अब एक ही वर्ग से दो बड़े पदों पर नियुक्ति तो हो नहीं सकती। लेकिन, यह अवश्य है कि अजय चंद्राकर तगड़े दावेदार हैं अध्यक्ष पद के। भाजपा भी चाह रही है कि सूबे में अगर सीएम भूपेश बघेल जैसे नेता से अगर टक्कर लेना है, तो आक्रमक नेता को ही पार्टी की कमान सौंपनी होगी। शिवप्रताप सिंह, रामसेवक पैकरा, विष्णुदेव साय, विक्रम उसेंडी….अब बहुत हो गया।

बनवारीलाल की चूक

भाजपा नेता बनवारीलाल अग्रवाल की एक राजनीतिक चूक ने छत्तीसगढ़ में विपक्ष को विधानसभा का उपाध्यक्ष पद देने की परंपरा ही खतम कर दी। अजीत जोगी सरकार के समय बनवारी लाल अग्रवाल डिप्टी स्पीकर थे। उन्होंने सरकार से किसी बात पर अनबन होने पर इस पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद तत्कालीन सीएम अजीत जोगी ने कांग्रेस के धरमजीत सिंह को विस उपाध्यक्ष बनवा दिया। कांग्रेस के बाद बीजेपी के कार्यकाल में भी ऐसा ही हुआ। भाजपा ने अपनी ही पार्टी के नारायण चंदेल और बद्रीधर दीवान को विस उपाध्यक्ष बनाया। अब कांग्रेस भी मनोज मंडावी को उपाध्यक्ष बनाने जा रही है।

अंत में दो सवाल आपसे

नगरीय निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन न करने पर कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नरों को क्या बदला जाएगा?
राजस्व सचिव एनके खाखा रिटायर हो रहे हैं, क्या उन्हें कोई पोस्ट रिटायरमेेेंट पोस्टिंग मिलेगी?