शनिवार, 20 मई 2017

चुनावी टीम

चुनावी टीम

21 मई
संजय दीक्षित
23 मई को कलेक्टरों की वीडियोकांफ्रेंसिंग है। उनके परफारमेंस का अंतिम आंकलन करने के बाद हो सकता है, 23 की देर शाम तक या फिर अगले दिन कलेक्टरों की लिस्ट निकल जाए। क्योंकि, कलेक्टरों के काम तो खुद सीएम उनके जिले में देखकर आ चुके हैं। उन्हें सब पता है कि कौन कितना पानी में हैं। फिर, पिछले कलेक्टर कांफ्रेंस में सीएम ने जो टास्क दिए थे, उसके आउटपुट का ब्यौरा सरकार पहले से ही मंगा चुकी है। बहरहाल, लंबी प्रतीक्षा के बाद ट्रांसफर हो रहे हैं, तो जाहिर है लिस्ट भी लंबी ही होगी। हो सकता है, फिगर दर्जन तक पहुंच जाएं। सलेक्शन भी चुनावी होंगे। याने यही कलेक्टर अगले साल विधानसभा का चुनाव कराएंगे। इसलिए, सरकार ठोक-बजाकर ही अपाइंटमेंट करेगी। हालांकि, एक फायनल लिस्ट अगले साल फरवरी, मार्च तक और निकलेगी। इनमें जो डिरेल्ड होंगे या हिट विकेट, उन्हें फायनल टीम से हटा लिया जाएगा।

भूल-चूक, लेनी-देनी!

यह पहला मौका होगा, जब कलेक्टरों को ट्रांसफर का टेंटेटिव टाईम पता है। 23 की शाम से लेकर दो-एक दिन के भीतर। अधिकांश को ये भी पता है, उनका क्या होने जा रहा? लिहाजा, कई कलेक्टर्स अपना बोरिया-बिस्तर समेटने लगे हैं। कुछ तो ठेकेदारो, सप्लायरों से भूल-चूक, लेनी-देनी में व्यस्त हो गए हैं। वैसे भी, लोक सुराज भी अब खतम हो गया है। ट्रांसफर में जो जिले प्रभावित होने वाले हैं, वहां तीन-चार दिन काम ठप्प ही रहेंगे।

तीन क्वांरे विधायक

छत्तीसगढ़ में चार क्वांरे विधायक थे। सभी बीजेपी से। लेकिन, संख्या अब एक कम हो जाएगी। आरंग विधायक नवीन मार्केण्डेय सरला जोशी के साथ दांपत्य सूत्र में बंध गए हैं। बच गए देवजी भाई पटेल, अवधेश चंदेल और अशोक साहू। सरकार की कई कन्यादान योजनाएं चल रही हैं…..सरकार को उन्हें मोटिवेट करना चाहिए कि वे भी घर बसा लें। वरना, अगले साल चुनाव के चक्कर में 2018 भी निकल जाएगा।

आईएफएस के लिए गुड

भारतीय वन सेवा के अफसरों के लिए के लिए मई गुड रहा। अल्पज्ञात आईएफएस एसएल साव को सरकार ने झाड़-पोंछकर पीएससी में बिठा दिया। पीसीसीएफ के सुब्रमण्यिम छत्तीसगढ़ साइंस एन टेक्नालॉजी कौंसिल के डीजी बन गए। वहां रिटायरमेंट का एज 70 साल है। याने सरकार कहीं रिपीट हो गई तो फिर 2023 तक कोई हिला नहीं पाएगा। एडिशनल पीसीसीएफ केसी यादव स्टेट रुरल इंस्टिट्यूट से बैक हुए तो उन्हें फॉरेस्ट प्रोटेक्शन का चार्ज मिल गया। दो और आईएफएस पोस्टिंग की लाइन में हैं। चलिये, बढ़ियां है।

पीएस होम की तलाश

पीएस होम बीबीआर सुब्रमण्यिम तीन महीने की छुट्टी पर अमेरिका गए हैं। उनके लौटने से पहिले हो सकता है, उनका होम खिसक जाए। सरकार ने सुब्रमण्यिम के विकल्प की तलाश शुरू कर दी है। सबसे पहला नाम एसीएस सुनील कुजूर का लिया जा रहा है। लेकिन, अभी ये सिर्फ चर्चा है। ऐन वक्त पर कोई नया चेहरा भी आ जाए, तो अचरज नहीं।

इंवेस्टर्स मीट में नक्सल

हेडिंग से आप चौंकिएगा मत! इंवेस्टर्स मीट में इतनी सुरक्षा होती है कि वहां नक्सली नहीं पहुंच सकते। हम बात कर रहे हैं, इंवेस्टर्स में नक्सलियों को लेकर बेचैनी की। पिछले हफ्ते अहमदाबाद में इंवेस्टर्स मीट हुआ। इंडस्ट्री मिनिस्टर अमर अग्रवाल, चेयरमैन छगन मूंदड़ा समेत उनका पूरा अमला पहुंचा था। अमर अग्रवाल को आधा वक्त तो यह समझाने में लग गया कि नक्सली रायपुर के आसपास नहीं, 400 किलोमीटर दूर हैं। तब जाकर इंवेस्टर्स छत्तीसगढ़ आने के लिए उत्साहित हुए।

निधि के बाद अमित

निधि छिब्बर के बाद अमित कटारिया भी जल्द दिल्ली के लिए कूच कर सकते हैं। सरकार ने उनके डेपुटेशन के लिए हरी झंडी देने में देर नहीं लगाई। उनका एनओसी डीओपीटी को भेज दिया गया है। संकेत हैं, निधि की तरह अमित को भी डिफेंस में पोस्टिंग मिल सकती है। सो, बस्तर से हटाने के बाद अमित को हल्की-फुल्की पोस्टिंग ही मिलेगी। जिससे उन्हें रिलीव करने में सोचना न पड़े।

निहारिका बैक होंगी

बिलासपुर कमिश्नर निहारिका बारिक सिंह रायपुर बैक हो सकती है। मंत्रालय में सिकरेट्री की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इस महीने ही तीन कम हो जाएंगे। निधि छिब्बर दिल्ली चली गई हैं। एसीएस एनके असवाल 31 मई को रिटायर हो जाएंगे। सिकरेट्री पीआर संतोष मिश्रा का भी इसी महीने डेपुटेशन पूरा हो जाएगा। निर्वाचन में भी किसी की पोस्टिंग करनी होगी। लिहाजा, निहारिका को रायपुर बुलाने पर विचार चल रहा है। वैसे भी, कमिश्नर की पनिशमेंट पोस्टिंग हो गई है। चार में से सिर्फ निहारिका ही डायरेक्ट आईएएस हैं। बाकी, तीन के तो भगवान ही मालिक हैं। 97 बैच की आईएएस निहारिका को भी बिलासपुर नहीं भेजा जाता। आखिर, एम गीता और रीचा शर्मा भी तो लंबे समय बाद डेपुटेशन से लौटीं थीं। लेकिन, निहारिका ब्यूरोक्रेसी की पालीटिक्स का शिकार हो गई।

2010 बैच की पोस्टिंग

कलेक्टरों की पोस्टिंग में 2010 बैच का भी इस बार नंबर लगेगा। इस बैच में यहां चार आईएएस हैं। जेपी मौर्य, कार्तिकेय गोयल, सारांश मित्तर और रानू साहू। इनमें से मौर्य और गोयल को कलेक्टर बनने की संभावना सबसे अधिक है। रानू साहू जेपी मौर्य की पत्नी है। लिहाजा, दोनों को एक साथ सरकार शायद ही कलेक्टर बनाएं। पति-पत्नी कलेक्टर वाला छत्तीसगढ़ में अभी दो ही पेयर है। एक बार विकास शील बिलासपुर और निधि छिब्बर जांजगीर कलेक्टर थी। और, दूसरा वर्तमान में अंबलगन पी बिलासपुर और अलरमेल मंगई डी रायगढ़ में कलेक्टर हैं।

सीईओ में इक्के-दुक्के

जिला पंचायत सीईओ में इक्के-दुक्के ही ट्रांसफर होंगे। बिलासपुर जिला पंचायत के सीईओ जेपी मौर्य को चूकि कलेक्टरी ड्यू है और अपने बैच में सबसे सीनियर भी हैं। इसलिए, उनका जिले में जाना लगभग तय समझा जा रहा है। एकाध के परफारमेंस से सरकार अगर नाराज होगी, तो उन्हें बदला जाएगा। बाकी, पीएम अवास से लेकर कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे में, ट्रांसफर होने पर काम प्रभावित होंगे। लिहाजा, सरकार ने तय किया है कि सीईओ को डिस्टर्ब नहीं किया जाएगा।

होटल पर गाज

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामकृपाल यादव को भूखे रहने का खामियाजा होटल को भुगतना पड़ रहा है। होटल का भुगतान रोक दिया है। दरअसल, केंद्रीय मंत्री बीजेपी की बैठक लेने आए थे। बैठक समाप्त होने के बाद वे फ्रेश होने गए, तब तक भाजपाइयों ने रायपुर के नामी होटल के लजीज नाश्ते को सफाचट कर दिया। मंत्रीजी पहुंचे तो प्लेटे बिखरी पड़ी थी। इस पर रायपुर के एक मंत्री ने पहले तो होटल के स्टाफ को अपने अंदाज में जमकर हड़काया। होटल वाले को अब पेमेंट के लिए चक्कर काटना पड़ रहा है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. जनसंपर्क का अगला सिकरेट्री क्या कोई ज्वाइंट सिकरेट्री लेवल का आईएएस होगा?
2. सत्ताधारी पार्टी में महिला नेत्रियों की संख्या क्यों बढ़ती जा रही है?

शनिवार, 13 मई 2017

भावी सीएस का ट्रेलर


14 मई
संजय दीक्षित
एसीएस टू सीएम बैजेंद्र कुमार का चीफ सिकरेट्री बनने की चर्चा बड़ी तेज है। उनकी ताजपोशी कब होगी, इसी जून में होगी या फिर अगले साल, ये तो डाक्टर साब बताएंगे। मगर बैजेंद्र ने आज दस का दम दिखाया। आपको बता दें, सूबे की सीमेंट कंपनियां इतनी ताकतवर हो गई थी कि मंत्रालय में होने वाली हाई प्रोफाइल मीटिंगों में आना उन्हें गवारा नहीं था, वो शनिवार को बैजेंद्र कुमार के दरवाजे पर घूटनों के बल खड़ी थीं….मिन्नतें कर रही थीं, आप जैसा कहेंगे, वैसे हम करेंगे। दरअसल, रेट को लेकर मनमानी पर उतर आई सीमेंट कंपनियों ने कारटेल बनाकर रेट 270 कर दिया है। चिल्हर में तो 280 तक बिक रहा है। यहीं नहीं, कंपनियां इस कोशिश में थी कि रेट 300 से उपर ले जाया जाए। लेकिन, जब मीडिया का प्रेशर बढ़ा तो सरकार ने बैजेंद्र को फ्री हैंड दे दिया। और, उन्होंने सीमेंट प्लांटों की ऐसी नस दबाई कि शनिवार छुट्टी का दिन होने के बाद भी त्राहि माम करते हुए कंपनियों के अफसर उनके बंगले पर पहुंच गए। दरअसल, अल्ट्राटेक और एसीसी को सरकार ने आज बंद कर दिया था और एक नई कंपनी की भी माइनिंग लीज खतम करने का आदेश जारी होने वाला था। कंपनी ने माईनिंग में बड़ा गड़बड़झाला किया है। चलिये, सीमेंट कंपनियों की गलतफहमी दूर हो गई….आखिर, सरकार, सरकार होती है। सरकार जब कुछ करने पर आ जाएं तो किसी की कोई मजाल नहीं।

रांग नम्बर डायल

लोक सुराज में बिलासपुर के एक ब्लॉक कांग्र्रेस अध्यक्ष रांग नम्बर डायल कर पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दरअसल, एसीएस पंचायत एमके राउत बेलगहना के पास चौपाल लगाए थे। ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष नया लड़का है, वह राउत के ओहरा से वाकिफ नहीं था। सो, उसने नेतागिरी चालू कर दी। राउत ने पहले उसे प्रेम से चौपाल में बिठाया। मगर, वह सुनने के लिए तैयार नहीं था। जब उसकी नेतागिरी की पराकाष्ठा हो गई तो राउत भृकुटी चढ़ाते हुए पुलिस अधिकारियों पर भड़के….लोक सुराज को डिस्टर्ब किया जा रहा है….तुमलोग क्या कर रहे हो…? इस पर वहां मौजूद तमाम अफसर सकपका गए। पुलिस वाले ने तुरंत कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई का कांग्रेस की ओर से इसलिए विरोध नहीं हुआ कि रायपुर, बिलासपुर के बीजेपी और कांग्रेस के जितने नेता है, सभी राउत के सामने बड़े हुए हैं। राउत उस समय दोनों जिलों के कलेक्टर रहे, जब बिलासपुर में कोरबा, जांजगीर, मुंगेली और रायपुर में धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद शामिल था।

मजबूरी का नाम डीडी सिंह

सिकरेट्री जीएडी निधि छिब्बर सेंट्रल डेपुटेशन के लिए रिलीव हो गईं। उनके पास निर्वाचन के साथ जीएडी में आईएएस सेक्शन का चार्ज था। आईएएस काफी संजीदा विभाग माना जाता है। आईएएस के खिलाफ जांच से लेकर नोटिस-वोटिस सब इसी में आता है। इसलिए, हमेशा इसमें रेगुलर रिक्रट्ड याने आरआर आईएएस को ही पोस्ट किया जाता था। वैसे भी, इस पोस्ट पर ज्यादातर महिला आईएएस रही हैं। इशिता राय से लेकर शहला निगार, रेणु पिल्ले, रितू सेन, निधि छिब्बर तक लंबी फेहरिश्त है। निधि के डेपुटेशन पर जाने के बाद राज्य में पहली बार आईएएस सेक्शन का जिम्मा राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोट होकर आईएएस बने डीडी िंसंह को दिया गया है। बताते हैं, जीएडी के आईएएस सेक्शन देखने के लिए अबकी कोई आईएएस तैयार नहीं हुआ। जीएडी वैसे भी माल-मसाला वाला विभाग है नहीं। उपर से आईएएस सेक्शन का मतलब चीफ सिकरेट्री के सीधे नियंत्रण में। लिहाजा, मजबूरी का नाम डीडी सिंह….सरकार ने इस विभाग को डीडी सिंह के हवाले कर दिया।

उल्टी गिनती

कलेक्टरों के ट्रांसफर की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। 20 को लोक सुराज खतम होगा। 23 को कलेक्टरों का परफारमेंस परखने के लिए सीएम कलेक्टर कांफ्रेंस करने जा रहे हैं। इसी रोज कैबिनेट भी है। जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, 23 की शाम को ही कलेक्टरों के आर्डर जारी हो जाएंगे। कलेक्टर कांफ्रेंस के तुरंत बाद कलेक्टरों का उनका रिपोर्ट कार्ड बताया जाएगा। अत्यधिक संभावना इस बात की भी है कि कांफ्रेंस के बाद कलेक्टर अपने जिले में पहुंचेंगे, उससे पहिले उनका आर्डर पहुंच जाएगा। सो, कलेक्टरों में बेचैनी लाजिमी है।

ईमानदारी को ईनाम

आईएफएस के सुब्रमण्यिम किन्हीं कारणों से भले ही सीएम सचिवालय से बाहर हो गए हों मगर सीएम ने अपने साथ काम करने और उनकी ईमानदारी को पुरस्कृत किया। छत्तीसगढ़ साइंस एन टेक्नालॉजी कौंसिल के डीजी का पद हाल ही में खाली हुआ है। बताते हैं, सीएम ने इसके लिए सुब्रमण्यिम को बुलाकर उन्हें इस पद पर पोस्ट करने की सूचना दी। राज्य में ऐसी पोस्टिंग शायद ही हुई होगी, जिसे सीएम ने खुद ऑफर किया हो। सुब्रमण्यिम वन विभाग में दो-एक गिने चुने अफसरों में शामिल हैं, जिनकी आनेस्टी की चर्चा होती है।

अब हिंदी भाषी प्रभारी

दिग्विजय सिंह के बाद कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी बीके हरिप्रसाद की किसी भी दिन छुट्टी हो सकती है। दिल्ली गए कांग्रेस नेताओं को राहुल गांधी ने इसके संकेत दिए हैं। बताते हैं, पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने पार्टी आलाकमान से अबकी किसी हिन्दी बेल्ट के नेता को प्रभारी बनाने का आग्रह किया है। सो, यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश या राजस्थान जैसे किसी प्रदेश के तेज-तर्रार कांग्रेस नेता को यह जिम्मा मिल जाए, तो आश्चर्य नहीं। असल में, पार्टी नेता चाहते हैं कि अगले साल चुनाव को देखते किसी गरजने वाले नेता को छत्तीसगढ़ की कमान दी जाए।

अब पछता रहे कांग्रेसी

राहुल गांधी से मिलने दिल्ली गए कांग्रेस नेताओं को ये पता नहीं था कि राहुल गांधी से वन-टू-वन मिलने का इस तरह मौका मिल जाएगा। राहुल ने पहले पार्टी दफ्तर में मिलने का टाईम दिया था। लेट हुआ तो घर बुला लिया। भूपेश और टीएस के साथ कांग्रेस के लोग बंगले पहुंचे तब तक सबको यही भान था कि जैसे पहले राहुल दो मिनट में हाउ डू यू करते आगे बढ़ जाते थे, वैसा ही कुछ इस बार भी होगा। लेकिन, विजिटर्स रुम में जैसे ही राहुल आए, बोले, वन-टू-वन मिल लेते हैं…इस पर पहले तो सभी सकपका गए। फिर, मोतीलाल वोरा बोले, पहले मैं मिलता हूं। तब लोगों ने चुटकी भी ली….काका! आप तो रोज ही मिलते हो। बहरहाल, जो नेता दिल्ली नहीं गए वे अब पछता रहे हैं….उन्हें भी मन का गुबार निकालने का मौका मिल जाता।

अंत में दो सवाल आपसे

1. भूपेश बघेल के खिलाफ ईओडब्लू में एफआईआर से सत्ताधारी पार्टी को फायदा होगा या नुकसान?
2. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की बैठक में मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह किस केंद्रीय मंत्री पर भड़क गए?

शुक्रवार, 12 मई 2017

डाक्टर ने गरमी खराब कर दी!


7 मई
संजय दीक्षित
सरकार को पहले शराब ना पीने वालों का गुस्सा झेलना पड़ा। अब, पीने वाले लोग नाराज हैं…..डॉक्टर ने गरमी खराब कर दी। चिल्ड बीयर का आनंद लेने के लिए लोग गरमी का इंतजार करते थे। लेकिन, पूरा वॉट लगा दिया। सरकारी दुकानों में एक तो पसंदीदा ब्रांड की बीयर मिल नहीं रही, और जो मिल रही, वह भी गरम। पीना है, तो घर के फ्रीज में ले जाकर ठंडा करो और बोनस में पत्नी की दो-चार ताने भी सुनो। वैसे, वहीस्की पीने वाले लोग भी कम परेशां नहीं हैं। उनका मनपसंद ब्रांड सरकारी दुकानों में एवेलेवल नहीं है। मंत्रियों, नेताओं और अफसरों के लिए सप्लायर, ठेकेदार गोंदिया से कैरेट मंगवा दे रहे हैं। मगर सबको ऐसी गॉड गिफ्टेड फैसिलिटी कहां? बेचारों को अनाप-शनाप दाम पर बाहर से मंगवाना पड़ रहा है। जाहिर है, लोग सरकार को कोसेंगे ही।

बैड मई

रमन सरकार के शराब बेचने के फैसले से सिर्फ पीने वाले ही दुखी नहीं हैं, जिनके संरक्षण में शराब ठेकेदारों का काम फल-फूल रहा था, उनके घरों में भी अवसाद पसरा है। आबकारी विभाग से लेकर आईजी, एसपी, एसडीएम, तहसीलदार, थानेदार और सिपाही। सबका बंधा था। एक से पांच तारीख तक सबके लिफाफे घर, आफिस या थानों में पहुंच जाते थे। इस बार पांच तारीख निकल गई। अब, घरवालियां पूछ रही….क्या हुआ। दरअसल, रेट सबका तय था। शराब दुकान वाले थाने के प्रत्येक सिपाही को कम-से-कम पांच हजार। थानेदार को 50 हजार। और अगर सिपाही, थानेदार सरकार से ज्यादा शराब ठेकेदार की ड्यूटी बजाते दिए, तो यह एमाउंट बढ़ भी जाता था। बड़े जिलों के एसपी को 2 से पांच लाख। कलेक्टर्स को महीना नहीं एकमुश्त मिल जाता था। ठेके के समय चाहे ऑनलाइन हो या मैन्यूल कलेक्टरों को बंधा था। ए केटेगरी के जिलों के कलेक्टरों को 75 लाख से एक करोड़ और छोटे जिलों के कलेक्टर्स को 25 से 50 लाख। ये राशि ठेका होते ही मिल जाती थी। वह भी बिना मांगे। अब, सभी कलेक्टर्स एवं एसपी शराब ठेकेदारो की सेवा को ग्रहण करते होंगे, ये मैं नही कह रहा। बट, रेट यही था। दिक्कत राजनेताओं को भी कम नहीं हो रही। पहले कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने के लिए 100 रुपए के साथ एक पौवा दे दो तो लोग दौड़े चले आते थे। आखिर, एक फोन पर ठेकेदार कार्टून-के-कार्टून पहुंचवा देता था। अब ये अतीत की बात हो गई। दुखी मीडिया वाले भी कम नहीं हैं। खासकर, मीडिया का लेवल लगाए पत्रकारों को पर्ची मिल जाती थी….फलां दुकान में चले जाइये। सरकार ने सबकी मई बैड कर दी।

दावा प्रबल

एसीएस टू सीएम एन बैजेंद्र कुमार भारत सरकार में सिकरेट्री के समकक्ष पोस्ट के लिए इम्पैनल हो गए हैं। याने प्रदेश के चीफ सिकरेट्री के बराबर। ऐसे में, बैजेंंद्र का सीएस का दावा जाहिर है, अब और मजबूत हो जाएगा। बैजेंद्र 85 बैच के आईएएस हैं। सीएस के लिए उनका तगड़ा कांपीटिशन अजय सिंह से हैं। अजय सिंह 83 बैच के आईएएस हैं। बैजेंद्र से दो बैच सीनियर। मगर सीएस के सलेक्शन में सीएम का वीटो चलता है। आखिर, शिवराज सिंह के बीके कपूर, बीकेएस रे और पी राघवन को पार करते हुए सीएस बनने का दृष्टांत है ही। बैजेंद्र को तो अब भारत सरकार ने भी चीफ सिकरेट्री के समकक्ष मान लिया है।

10 में से चार पीएस

छत्तीसगढ़ में सिकरेट्री, प्रिंसिपल सिकरेट्री लेवल पर अफसरों का टोटा हो गया है। खासकर, पीएस लेवल पर तो स्थिति और खराब हो गई है। स्टेट कैडर में कहने के लिए वैसे 10 पीएस हैं। इसमें से तीन डिरेल्ड हो गए हैं। अजयपाल सिंह, डॉ0 आलोक शुक्ला और बीएल अग्रवाल। बीएल कल तिहाड़ जेल से छूटे हैं। अजयपाल और आलोक को सरकार ने कोई काम नहीं दिया है। बचे सात। इनमें सीके खेतान दिल्ली डेपुटेशन पर हैं। केडीपी राव राजस्व बोर्ड में हैं। बीबीआर सुब्रमण्यिम तीन महीने की छुटटी पर कल ही निकले हैं। इस तरह 10 में से चार बचे। आरपी मंडल, रेणु पिल्ले, अमिताभ जैन और सुब्रत साहू। इनके उपर ही सरकार के मीडिल क्रम का पूरा दारोमदार रहेगा।

घर बिठा कर तनखा क्यों?

डॉ0 आलोक शुक्ला, अजयपाल सिंह और अनिल टुटेजा को सरकार घर बिठाकर पैसा दे रही है। तीनों के पास कोई काम नहीं है। आलोक और अनिल को नॉन घोटाले की वजह से सरकार ने कोई विभाग नहीं दिया है। अजयपाल को जनशिकायत जैसा एक ऐसा विभाग है, जिसके होने न होने का कोई मतलब नहीं। अलबत्ता, बड़े सम्मान के साथ हर महीने करीब दो लाख रुपए उनके खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। आलोक और अनिल को नॉन घोटाले की वजह से सरकार ने कोई काम नहीं दिया है। भारत सरकार ने दोनों के खिलाफ चालान पेश करने की मंजूरी दे दी है। लेकिन, सरकार ने कोई कार्रवाई कर रही और ना ही उन्हें कोई काम दिया जा रहा। आलोक को हर महीने दो लाख और अनिल को लगभग इसका आधा उनके एकाउंट में ट्रांसफर कर देती है सरकार। ऐसे में, दो साल का हिसाब लगा लीजिए। कायदे से दोनों को वेतन दिया जा रहा है तो काम भी लेना चाहिए। राज्य में अफसरों की वैसे भी कमी है। दोनों की काबिलियत पर कोई संशय भी नहीं। फिर, मुफ्त का वेतन क्यों?

नारी की जगह नारी

चीफ इलेक्शन आफिसर एवं सिकरेट्री जीएडी निधि छिब्बर डेपुटेशन पर दिल्ली जा रही हैं। वहां उनको डिफेंस में पोस्टिंग मिली है….एज ए ज्वाइंट सिकरेट्री। लिहाजा, ब्यूरोक्रेसी में चर्चा खूब है, निर्वाचन में निधि की जगह कौन लेगा। निर्वाचन में सबसे ज्यादा समय गुजारने वाले सुनील कुजूर अब एसीएस हो गए हैं। उन्हें सरकार भेजेगी नहीं। पीएस में अफसर वैसे भी कम हैं। सिकरेट्री में भी कमोवेश वही स्थिति है। लेकिन, किसी को तो अपाइंट करना ही होगा। वो भी रेगुलर रिक्रूट्ड आईएएस होना चाहिए। ऐसे में, किसी महिला सिकरेट्री को सरकार निर्वाचन की जिम्मेदारी सौंप दें, तो आश्चर्य नहीं। क्योंकि।

अंत में दो सवाल आपसे

1. छत्तीसगढ़ का अगला मुख्य निर्वाचन अधिकारी कौन होगा?
2. छत्तीसगढ़ में किस आईपीएस को बाहुबलि और किसे कटप्पा बताया जा रहा है?

एक और रिहैबिलिटेशन पोस्ट

30 अप्रैल
संजय दीक्षित
कैबिनेट द्वारा रियल एस्टेट अथॉरिटी को हरी झंडी देने के बाद इसके गठन का रास्ता अब साफ हो गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के रिटायर नौकरशाहों के पुनर्वास का एक और मलाईदार ठिकाना तैयार हो गया है। इस अथारिटीका हेड चीफ सिकरेट्री या इसके समकक्ष ऑल इंडिया सर्विसेज के अफसर होंगे। सीएस, एसीएस से रिटायर होने वाले आईएएस के लिए सूबे में अभी तक दो ही जगह थी। सूचना आयोग या फिर इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन। हालांकि, शिवराज सिंह बिजली कंपनियों के चेयरमैन हैं। लेकिन, उनको अपवाद ही समझिए। रही बात सूचना आयोग की तो इसमें सुख-सुविधाओ का पूरा बंदोबस्त है मगर महात्मा गांधी वाला स्कोप खतम हो जाता है। अलबत्ता, इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी की तरह रियल एस्टेट की पोस्टिंग पांचों उंगली घी की तरह होगी। सारे बिल्डर्स अब अथॉरिटी के अंतगर्त इनरोल होंगे। अथॉरिटी जब चाहे, तब बिल्डरों के कान मरोड़ सकता है। इससे बढ़ियां और क्या चाहिए….जय हो!

तारीफ के मायने

हमसफर एक्सप्रेस के हरी झंडी दिखाने के कार्यक्रम में सीएम ने लोकल एमपी रमेश बैस की इतनी तारीफ कर दी कि लोग सोच में पड़ गए….ये हुआ कैसे। बैस की गिनती अभी तक ऐसे असंतुष्ट नेता के तौर पर होती थी, जो सरकार के क्रियाकलाप पर खुलकर असहमति जताते हैं। मगर रेल मंत्री की मौजूदगी में सीएम ने राजधानी के विकास का पूरा क्रेडिट बैस को दे डाला। बोले, रायपुर में जो भी काम हुए हैं, सब बैसजी ने कराया है। ध्यान रहे, इस समारोह में रायपुर के दोनों मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत आमंत्रित नहीं थे। रायपुर में शायद ही कोई बड़ा समारोह हो, जिसमें बृजमोहन न रहते हां। नया रायपुर में पीएचक्यू के उद्घाटन में न बुलाने पर उन्होंने स्पष्ट तौर पर नाराजगी जाहिर कर दी थी। बहरहाल, लोग अपने-अपने हिसाब से राजनीति के उलझे तारों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

कलेक्टर को दुर्ग पसंद है

कलेक्टर्स इन वेटिंग की संख्या को देखते सरकार अब 2004 बैच को क्लोज करने पर विचार कर रही है। इस बैच के अभी तीन कलेक्टर्स हैं। अमित कटारिया बस्तर, अंबलगन पी बिलासपुर और अलरमेल मंगई रायगढ़। इनमें से एक कलेक्टर की कलेक्टरी की अभी मन भरा नहीं है। वे सरकार में लगातार एप्रोच करवा रहे हैं कि एक बार उन्हें दुर्ग जिला मिल जाए। इसके बाद वे फिर जिले की माग नहीं करेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कलेक्टर की पसंद को तवज्जो देते हुए 2004 बैच को कंटीन्यू करती है या फिर अगले महीने रायपुर बुला लेगी।

जब अफसर दौड़े विधानसभा

जीएसटी बिल पर विधानसभा में हो रही चर्चा के दौरान अफसर दीर्घा खाली रहा। सिर्फ फायनेंस और टैक्सेशन के चार-पांच अफसर बैठे थे। जबकि, सीट 25 से ज्यादा है। विपक्ष कहीं हंगामा न कर दें, इसलिए संसदीय कार्य विभाग के अफसरों से कहा गया फौरन सभी अफसरों को मैसेज कर हाउस पहुंचने के लिए कहा जाए। और, एक लाइन के व्हाट्सएप पर अफसर रायपुर और नया रायपुर से विधानसभा के लिए दौड़ पड़े। बता दें, विधानसभा के अफसर दीर्घा में आमतौर पर वे ही अफसर बैठते हैं, जिनके विभाग की चर्चा रहती है। जीएसटी चूकि फायनेंस और टैक्सेशन से जुड़ा सब्जेक्ट है, इसलिए अधिकांश आफिसर्स विधानसभा नहीं गए। लिहाजा, आफिसर दीर्घा काफी देर तक खाली रहा।

कलेक्टर्स, एसपी का जमावड़ा

बुर्कापाल नक्सली हमले के बाद बस्तर के कमिश्नर, आईजी, डीआईजी समेत सातों जिले के कलेक्टर, एसपी 2 मई को रायपुर में रहेंगे। मंत्रालय में भारत सरकार के र्शीर्ष अफसरों के साथ उनकी वीडियोकांफ्रेंसिंग होगी। दिल्ली में नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल भी वीसी में बैठेंगे। इससे 2 मई की बैठक की अहमियत बढ़ गई है।

फ्लैट वाला डीजीपी

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने योगी जैसे ही अपना डीजीपी चुना। सुलखान सिंह के पास संपत्ति के नाम पर लखनउ में एक तीन कमरों वाला फ्लैट है। माता-पिता आज भी गांव के खपरैल मकान में रहते हैं। इस खबर को देश के मीडिया में खूब माइलेज मिला। हालांकि, अपने डीजीपी भी योगी से कम नहीं हैं। ईमानदारी और लिविंग में तो एएन उपध्याय का जवाब नहीं है। आज भी उनके पास 1200 रुपए वाला दो इंच स्क्रीन का मोबाइल है। घर-परिवार भी आज भी साधारण ही है। लेकिन, वह यूपी है ये छत्तीसगढ़। यहां की खबरों की दिल्ली में टीआरपी नहीं होती।

सीएम जब भड़के

मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह भड़क भी सकते हैं….यकबयक कोई यकीन नहीं करेगा। लेकिन, गुरूवार को आदिवासी विभाग के रिव्यू मीटिंग में जो कुछ हुआ, उस पर एतबार करना पड़ेगा। बताते हैं, आदिवासी इलाके के विकास के लिए भारत सरकार ने 700 करोड़ रुपए दिए हैं। लेकिन, तीन साल में एक ढेला का काम नहीं हुआ है। विभाग के अफसरों और मंत्री के कुछ करीबी स्टाफ के पचड़े में यह फंड फंस गया है। रिव्यू में मुख्यमंत्री बिगड़ पड़े। बोले,….तो मंत्री क्या कर रहे हैं। विभागीय मंत्री उनके बगल में ही बैठे थे। वे भी सकपका गए। 15 साल में किसी मंत्री को उसके मुह पर सीएम ने ऐसा नहीं बोला था। जाहिर है, सीएम हाउस के कांफ्रेंस हॉल में सन्नाटा पसर गया।

स्टेपनी या….

कुछ दिन से ऐसा हो रहा है, सूबे से कोई आईएएस डेपुटेशन पर जाए या फिर छुट्टी पर उसका विभाग प्रिंसिपल सिकरेट्री अमिताभ जैन को टिका दिया जा रहा है। अमित अग्रवाल डेपुटेशन पर दिल्ली गए तो उनका फायनेंस अमिताभ को सौंप दिया गया। अब, पीएस होम बीबीआर सुब्रमण्यिम 5 मई से तीन महीने की लंबी छुट्टी पर जा रहे हैं तो होम का प्रभार अमिताभ को दिया गया है। अविनाश चंपावत के साथ भी कुछ दिन तक ऐसी हुआ था। यही वजह रहा कि दो साल में चंपावत के चार-पांच पोस्टिंग मिल गई थी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. स्पेशल डीजी नक्सल बनना डीएम अवस्थी के लिए फायदे का सौदा रहा या नुकसान का ?
2. पीएस होम बीबीआर सुब्रमण्यिम ने तीन महीने की छुट्टी पर जा रहे हैं। इसके पीछे कोई वजह है या नार्मल छुट्टी है?

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

तेरी साड़ी सफेद क्यों


23 अप्रैल
संजय दीक्षित
दसवीं बोर्ड के नतीजे आने के बाद आईएएस के व्हाट्सएप ग्रुप में बवाल मच गया। हुआ ऐसा कि कल एक स्मार्ट ज्वाइंट सिकरेट्री ने छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक 80 फीसदी रिजल्ट आने के लिए दंतेवाड़ा जिले को एप्रीसियेट कर दिया। इसके बाद तो पूछिए मत! पहले कुछ महिला कलेक्टर्स कूदीं…..हाट टॉक हुआ….मेरी साड़ी से तेरी साड़ी सफेद क्यों। फिर कलेक्टर्स की लाइन लग गई…नहीं हमने…., नहीं हमारे यहां का रिजल्ट तुमसे बढ़ियां आया है। नहीं, तुम्हारा फिगर गलत है। इस व्हाट्सएप ग्रुप में चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड समेत सीनियर आईएएस, कलेक्टर्स, सीईओज हैं। बच्चों के रिजल्ट पर कलेक्टरों को झगड़ते देख मंत्रालय में लोगों ने खूब चटखारे लिए। अलबत्ता, ये अच्छा साइन है। काम को लेकर कम-से-कम कलेक्टरों में इतना कांपिटिशन तो हो गया है।

23 साल पहिले

सीएम ने दो कलेक्टरों को चना-मुर्रा की तरह चलता कर दिया। हेलीपैड पर मीडिया के जरिये कोरिया और सूरजपुर कलेक्टर्स की छुट्टी कर दी। इसको देखकर 23 साल पुराना वाकया याद आ गया। 94 में एडी मोहिले रायपुर के कमिश्नर थे। उस समय मध्यप्रदेश था और सीएम थे दिग्विजय सिंह। दिग्गी रायपुर आए थे। उनसे कैरोसिन तेल के वितरण को लेकर शिकायतें हुई। दिग्विजय को जब बोलने का मौका आया तो उन्होंने पहली लाइन बोली, आपके बीच जल्द ही नए कमिश्नर होंगे। अगले दिन कमिश्नर का आर्डर निकल गया था। हालांकि, मोहिले ने इस एपीसोड के बाद वीआरएस ले लिया था।

 कुर्सी का भय

माध्यमिक शिक्षा मंडल के चेयरमैन का पोस्ट चीफ सिकरेट्री लेवल का है। सीएस ना हों तो कम-से-कम प्रिंसिपल सिकरेट्री लेवल का तो होना चाहिए। केडीपी राव भी पीएस थे। मगर कुछ दिनों से इसे एडिशनल चार्ज में रखा गया है। स्कूल एजुकेशन सिकरेट्री विकास शील इसके इंचार्ज चेयरमैन हैं। सरकार ने इस पोस्ट को प्रभार में क्यों रखा है, इसको लेकर एसीएस लेवल के अफसरों को डरना स्वाभाविक है। याद होगा, 2007 में शिवराज सिंह जब सीएस बने थे, तो उनसे सीनियर बीकेएस रे को मंत्रालय से हटाकर माशिमं भेज दिया गया था। रे की नाराजगी को दूर करने के लिए ही चेयरमैन के पद को चीफ सिकरेट्री के बराबर घोषित किया गया था। ऐसे में, भय की वजह आप समझ सकते हैं।

लेटर वार

सत्ताधार पार्टी बैठक-पर-बैठक कर अपना घर मजबूत कर रही है तो कांग्रेस लेटर वार में उलझी हुई है। रेणु जोगी ने सोनिया गांधी को खत भेज कर भूपेश बघेल की शिकायत की। बघेल ने फेसबुक पर अजीत जोगी को लंबी पाती लिख डाली। पाती की लच्छेदार भाषा और सधी हुई प्रस्तुतिकरण से लगता है, भूपेश को उसे लिखने में कम-से-कम दो-तीन घंटे तो लगे ही होंगे। भूपेश के फेसबुकिया पाती का जवाब देने में जोगी कैम्प ने भी देर नहीं लगाई। भूपेश पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिख डाला, हम गरीबों की लड़ाई सरकार से लड़ रहे हैं और भूपेश मेरे परिवार से। चलिये, सत्ताधारी पार्टी को और क्या चाहिए।

डैमेज कंट्रोल

बाबूलाल अग्रवाल के तिहाड़ जेल जाने से छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी की पूरे देश में भद पिटी थी। लोग मजाक उड़ा रहे थे…..आईएएस रिश्वत लेता है, ये देने वाला आईएएस छत्तीसगढ़ में कहां से आ गया। मगर आईएएस रजत कुमार के हावर्ड में सलेक्शन और दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार के पीएम अवार्ड मिलने से ब्यूरोक्रेसी पर जो दाग लगे थे, उससे हद तक डैमेज कंट्रोल हुआ है।

हार्ड लक

पीएम अवार्ड के लिए तीन नाम थे। ओपी चौधरी, नीरज बंसोड़ और सौरभ कुमार। ओपी का नाम फायनल 30 के लिए जरूर लिस्टेड हो गया था मगर इस तरह के पुरस्कार दूसरी बार मिलते नहीं। बचे नीरज और सौरभ। नक्सल प्रभावित एरिया में कैशलेस का कमाल दिखाने वाले सौरभ पीएम अवार्ड चुन लिए गए। बट नीरज का सुकमा में वर्क भी आउटस्टैंडिंग था। अगर दोनों का जिला अगल-बगल नहीं होता तो यकीन मानिये छत्तीसगढ़ को दो पीएम अवार्ड मिलते। दंतेवाड़ा में एजुकेशन सिटी के जो काम हुए हैं, नीरज ने सुकमा में उसे उतार दिया हैं। बल्कि, बोल सकते हैं, उससे भी बढ़ियां। सीएम किसी कलेक्टर के काम से सबसे अधिक प्रसन्न रहते हैं तो वो हैं सकमा कलेक्टर। बावजूद इसके पीएम अवार्ड से नीरज चूक गए तो तकलीफ तो होगी ही। हार्ड लक नीरज!

दंतेवाड़ा की लगेगी बोली

पहले ओपी चौधरी ने दंतेवाड़ा का क्रेज बढ़ाया और अब सौरभ कुमार ने। कहीं ऐसा न हो कि दंतेवाड़ा का कलेक्टर बनने के लिए बोली लगने लगे। आखिर, सौरभ को भी दंतेवाड़ा जाने के लिए कितना फाइट करना पड़ा था। उस दंतेवाड़ा में, जिसके नाम से लोग घबराते थे। लेकिन, एजुकेशन सिटी में काम करके ओपी ने दंतेवाड़ा की रेटिंग बढ़ा दी थी। यही वजह है कि 2009 बैच के आईएएस को जब कलेक्टर बनने का मौका आया तो लोग टूट पड़े। सौरभ के रिश्ते उपर में एक खास अफसर से थे, इसलिए गाड़ी निकल गई। वरना, सामने वालों ने भी बड़े-बड़े जैक लगा रखे थे।

….तो सैल्यूट कीजिए

सूबे के कुछ कलेक्टर्स एजुकेशन और हेल्थ में आउटस्टैंडिंग काम कर रहे हैं। तभी तो मुंगेली जैसा ढाई ब्लॉक वाले छोटे जिले में पांच-पांच लड़के मेरिट में आ गए। जशपुर जैसे रिमोट ट्राईबल डिस्ट्रिक्ट में दो मेरिट में और वो भी चौथे नम्बर पर। दो लड़के एक-एक नम्बर से मेरिट में छूट गए। वरना, चार हो गए होते। मुंगेली पिछले बार 27वें नम्बर पर था, इस बार सातवें पर आ गया। दंतेवाड़ा 80 फीसदी रिजल्ट लाकर प्रदेश में सबसे उपर पहुंच गया। कवर्धा का रिजल्ट पिछले साल से 15 फीसदी बढ़कर दूसरे पायदान पर आ गया। सुकमा दूसरा एजुकेशन सिटी बन गया है। रायपुर में आरटीई में ऐसा काम हो रहा है कि प्रायवेट स्कूलों की शामत आ गई है। अब हेल्थ की बात करें। बलरामपुर में टेलीमेडिसिन, मोबाइल हेल्थ यूनिट रन करने लगा है। बीजापुर में तो हेल्थ के सेक्टर में ऐसा काम हुआ है कि यहां लिखने में जगह कम पड़ जाएगी। एक लाइन में आपको बता देते हैं, रायपुर के प्रायवेट अस्पताल से बढ़ियां चिकित्सा सुविधाएं बीजापुर के सरकारी अस्पतालों में मिल रही हैं। सफाई तो पूछिए मत! छत्तीसगढ़ शिक्षा और हेल्थ की दृष्टि से बेहद पिछड़ा हुआ है। इस फील्ड में कोई कलेक्टर अगर मन तन-मन से काम कर रहा है तो उन्हें सैल्यूट करना चाहिए…..अगर अवार्ड पाने के लिए वे नहीं कर रहे हों तो।

अंत में दो सवाल आपसे

1. अंबिकापुर जेल में भूपेश बघेल के कैदी से मिलने के मामले में क्लीन चिट देने में सरकार ने जल्दी क्यों दिखाई?
2. रिव्यू कमेटी की खबर को मिसफिड करने वाले किस आईपीएस अधिकारी से पीएचक्यू नाराज है?

रविवार, 16 अप्रैल 2017

दुआ कीजिए!


16 अप्रैल
संजय दीक्षित
ब्यूरोक्रेसी की सबसे प्रतिष्ठित पीएम अवार्ड के लिए देश के 600 से अधिक कलेक्टरों में से फायनल 30 में छत्तीसगढ़ के तीन कलेक्टरों ने स्थान बनाया है। रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी, सुकमा कलेक्टर नीरज बंछोड़ और दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार। रायपुर ने तो स्टैंड अप इंडिया में देश के मेट्रो सिटी वाले जिलों को पछाड़कर अपना पोजिशन बनाया है। सो, दुआ कीजिए। तीनों कलेक्टर्स को ये अवार्ड हासिल हो जाए। इससे छत्तीसगढ़ का ही सिर उंचा होगा। आखिर, छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य से तीन-तीन कलेक्टरों का चुना जाना…..। ओपी तो रिकार्ड ही बनाएंगे। सब कुछ ठीक रहा तो उन्हें दूसरी बार पीएम अवार्ड मिलेगा।

लफड़ा ही खतम!

ऑल इंडिया सर्विसेज रिव्यू कमेटी ने एक आईएएस की बर्खास्तगी की सिफारिश करके एक तरह से कहें तो सरकार का हेडेक कम कर दिया है। क्योंकि, आने वाले समय में आईएएस सरकार के सिरदर्द बन जाते। सरकार पर निलंबन समाप्त करने का चौतरफा प्रेशर आता। और, गर रिस्टेट होते तो लोग सरकार पर उंगली उठाते। जाहिर है, रिव्यू कमेटी की सिफारिश से सरकार को राहत ही मिली है।

दुखिया आईपीएस

बस्तर में दुखिया आईपीएस अफसरों का जमावड़ा लगते जा रहा है। संतोष सिंह और अभिषेक मीणा बस्तर में ही परिक्रमा लगवाने से खुश नहीं हैं। जगदलपुर एसपी शेख आरिफ का दर्द तो मत पूछिए! बलौदा बाजार में तीन महीने भी पूरे नहीं कर पाए कि बस्तर भेज दिया गया। आरिफ को रात में नींद इसलिए भी नहीं आ रही है कि उन्हें अपनों ने ही मारा। राजेंद्र दास को बलौदा बाजार में ताजपोशी करने के लिए आरिफ की गिल्लियां उड़ा दी गई। डीआईजी सुंदरराज पी का तो पिछले तरकश में बताया ही था कि वे न घर के रहे, न घाट के। यहां एसआईबी में 50 फीसदी सेलरी अधिक मिलती थी। वो भी गया और आईजी भी नहीं रहे। लांग कुमेर की तरह सरकार ने सुंदरराज को भी गो किया तो उत्साहित होकर मैदान में कूद पड़े। अंतर इतना ही है कि लांग कुमेर के समय सरकार ने आरके विज को आईजी बनाकर भेज दिया था और इस बार विवेकानंद का। लांग कुमेर नाराज होकर बिना छुट्टी लिए नागालैंड चले गए थे। सुंदरराज शरीफ और अनुशासनप्रिय आईपीएस हैं, सो बेचारे कुर्सी छिन जाने के बाद भी उफ! नहीं किए। अब बात नए आईजी विवेकानंद की। विवेकानंद ने न जाने कितनी कोशिश की होगी। नवरात्रि में पूजा-पाठ भी। मगर कुछ काम नहीं आया। अब ऐसे दुखी अफसरों के नेतृत्व में नक्सलियों के खिलाफ अभियान कैसे चलाया जाएगा, सरकार को सोचना चाहिए।

बंगला अभिशप्त-1

देवेंद्र नगर आफिसर्स कालोनी में बंगला आसानी से मिलता नहीं। उपर में अगर जैक ना हो तो नामुमकिन ही समझिए। मगर एक बंगला ऐसा है, जो अरसे से खाली है। वह बंगला आईपीएस बीएस मरावी को मिला था। 2012 में मरावी के डेथ के बाद कुछ साल तक उनके परिवार के लोग उसमें रहे। उनके जाने के बाद से बंगला खाली है। उस पर मरावी का नेम प्लेट लटका हुआ है। बताते हैं, आईपीएस की मौत के चलते कोई भी नौकरशाह उसे लेने के लिए तैयार नहीं हो रहा।

अभिशप्त बंगला-2

बिलासपुर आईजी का बंगला भी अभिशप्त-सा ही हो गया है। अशोक जुनेजा को छोड़कर वहां किसी आईजी को सुकून नहीं मिला। जीपी सिंह ने रंग-रोगन कराना शुरू ही किया था कि राहुल शर्मा एपीसोड हो गया। उनके बाद बीएस मरावी आईजी बनकर गए। उनका हर्ट अटैक से निधन हो गया। पवनदेव किन मुसीबतों में फंस गए, यह बताने की जरूरत नहीं। ताजा मामला विवेकानंद सिनहा का है। करीब नौ महीने वे पुलिस आफिसर्स मेस में रहे। बंगले का काम-वाम कराकर जैसे ही वहां शिफ्थ हुए हफ्ते भर में सरकार ने उन्हें बस्तर की रवानगी डाल दी। पीएचक्यू में इस पर विचार किया जा रहा है कि बिलासपुर आईजी बंगला अब चेंज कर दिया जाए। क्योंकि, जिस तरह की घटनाएं वहां हो रही हैं, नए आईजी पीएस गौतम बंगले में रहेंगे नहीं।

छोटा विवेक नेता बनेगा

लोक सुराज में डाक्टर साब अबकी खूब एनज्वॉय कर रहे हैं….कभी चुटकी तो कभी हास-परिहास। कभी लता के आटो रिक्शा में सफर तो कभी राजमिस्त्री बन उर्मिला के घर की ईंट जोड़ाई। कोंडागांव के कोडोभट गांव में एक बच्चे को डाक्टर साब ने गोद में उठा लिया। उन्होंने बच्चे से नाम पूछा। बोला-विवेक। बगल में खड़े सीएस से सीएम बोले, तुम्हारा सहनाव है….तुमको भी इसे पाना होगा। सीएस से तुरंत सीएम से विवेक को अपने गोद में ले लिया। इस बीच पीछे से किसी ने कमेंट पास किया, सर बच्चा काफी हिम्मती है…प्रदेश के दोनों ताकतवर व्यक्ति के गोद में जाने के बाद भी रोया नहीं! इस पर सीएम ने चुटकी ली….विवेक पक्का नेता बनेगा। इस पर ठहाके तो लगे बट वहां चर्चा होने लगी कि सीएम ने किसी विवेक को नेता बनने की भविष्यवाणी की है। छोटे विवेक को या बड़े का।

आफिसर्स इन वेटिंग

यूपी में योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद वेटिंग आफिसरों की फेहरिश्त लंबी होती जा रही है। हर दूसरे रोज दो-चार आईएएस, आईपीएस को वेटिंग में डाला जा रहा है। हालांकि, वेटिंग में छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं है। डा0 आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा दो साल से वेटिंग में हैं। इसमें नया नाम एसआरपी कल्लूरी का जुड़ गया है। वैसे, प्रिंसिपल सिकरेट्री अजयपाल सिंह को भी वेटिंग ही मान कर चलिये। मंत्रालय में जीएडी से लेकर बड़े अफसर्स तक नहीं बता पाएंगे कि अजयपाल के पास विभाग क्या है, तो कोई बता नहीं पाएगा।

घर बांधने की राजनीति?

जोगी कांग्रेस ने आखिरकार जिला अध्यक्षों का ऐलान कर दिया। पूरे 40 अध्यक्ष। जाहिर तौर पर कौतूकता तो होगी ही……जिले 27 फिर 40 अध्यक्ष कैसे। पता चला, अधिक-से-अधिक एडजस्ट करने के लिए जोगीजी ने यह दांव खेला। नेताओं को एडजस्ट करने के हिसाब से कई जिलों को दो-दो जिलों में बांट दिया। मसलन, जांजगीर में दो-दो जिला अध्यक्ष। सक्ती भी नया जिला। यहीं नहीं, 19 उप जिला अध्यक्ष भी। सियासी गलियारों में चर्चा है, घर बांधकर रखने के लिए जोगीजी ने रेवड़ियां बांट दी।

कांग्रेस भी पीछे नहीं

नेटवर्क मजबूत करने के लिए कांग्रेस भी अब ब्लाक इकाइयों की संख्या बढ़ाने जा रही है। अभी तक सरकारी ब्लॉक के हिसाब से कांग्रेस की भी ब्लॉक इकाइयां थी। जबकि, बीजेपी एक-एक ब्लॉक में दो-दो, तीन-तीन मंडल बना रखा है। रायपुर में ही चार मंडल हैं। कांग्रेस भी इसी रास्ते को अब पकड़ने जा रही है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एसीएस बैजेंद्र कुमार से मिलने वाले अफसरों की संख्या इन दिनों क्यों बढ़ गई है?
2. पीसीसीएफ की डीपीसी करके सरकार पोस्टिंग भूल गई है या कोई अदृश्य ताकत पोस्टिंग को रोक रही है?

घर के रहे, न…..


9 अप्रैल
संजय दीक्षित
छत्तीसगढ़ के आईपीएस अफसरों से राहू-केतू का साया हटने का नाम नहीं ले रहा है। जनवरी में राजकुमार देवांगन की वर्दी उतरने से बुरे दिन शुरू हुए थे, वो अभी भी जारी है। अलबत्ता, पीड़ितों की सूची लंबी होती जा रही है…..एसआरपी कल्लूरी, पवनदेव, जशपुर एसपी गिरिजाशंकर जायसवाल, सुकमा एसपी एलासेना, विवेकानंद सिनहा, सुंदरराज पी। विवेकानंद को बिलासपुर गए नौ महीने भी नहीं हुए थे। इसी नवरात्रि के प्रथम दिन विधिवत पूजा-पाठ कराकर बंगले में शिफ्थ हुए थे कि उन्हें सरकार ने बस्तर जाने का फरमान दे दिया। उधर, सुंदरराज पी के लिए तो न घर के रहे, न घाट जैसी स्थिति हो गई। अच्छा भला एसआईबी में डीआईजी थे। एसआईबी के कारण 50 फीसदी वेतन भी ज्यादा मिल रहा था। जनवरी एंड में अचानक एक दिन उनका बस्तर का आर्डर निकल गया। कल्लूरी का असर कम करने के लिए प्रभारी आईजी के तौर पर सरकार ने सुंदरराज को इर्म्पोटेंस भी दिया….लगा वे अब फुलफ्लैश आईजी हो गए। देश भर से बैच मेट्स की बधाइयां मिलनी शुरू हो गई….अरे! तूने तो लंबा हाथ मार दिया। इतनी जल्दी आईजी? वो भी बस्तर का। सुंदरराज की सल्तनत मजबूत करने के लिए सरकार ने जगदलपुर और सुकमा के एसपी की छुट्टी कर दी। लेकिन, लोक सुराज शुरू होने से एक रोज पहिले सरकार ने विवेकानंद को आईजी बनाकर भेज दिया। सुंदरराज के लिए तो कुर्सी से औंधे मुंह गिरने वाली ही घटना होगी। आईजी से डीआईजी बनकर बेचारे दंतेवाड़ा चले गए।

पारी समाप्त?

पीएचक्यू में डीआईजी एडमिनिस्ट्रेशन सोनल मिश्रा को सरकार ने चंदखुरी पुलिस एकेडमी का डायरेक्टर अपाइंट किया है। रिटायर आईपीएस आनंद तिवारी की 30 मार्च को संविदा समाप्त होने के बाद सरकार ने यह आर्डर निकाला। तिवारी 2012 में आईपीएस से रिटायर हुए थे। इसके बाद पिछले पांच साल से संविदा में एकेडमी के डायरेक्टर थे।

डिप्टी कलेक्टर बेचेंगी शराब?

पिछले हफ्ते चीफ सिकरेट्री की वीडियोकाफ्रेंसिंग में कुछ कलेक्टरों ने शराब बिकवाने में मदद करने के लिए डिप्टी कलेक्टरों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया था। सीएस ने जीएडी को निर्देश दिया। जीएडी ने बिलासपुर, दुर्ग को एक-एक जेंस और रायपुर के लिए दो लेडीज डिप्टी कलेक्टर्स का आर्डर निकाल दिया। रायपुर एडमिनिस्ट्रेशन के लिए तो यह सिर पकड़ने वाली बात होगी।

कलेक्टर्स की कुंडली

21 मई को ट्रांसफर की लिस्ट निकलने से पहिले सरकार कलेक्टरों की कुंडली तैयार करा रही है। कलेक्टरों से तीन उपलब्धियों तो मांगी ही गई है, कामों के डिस्पोजल के जरिये भी पारफारमेंस का आंकलन किया जा रहा है। सरकार ने इसका जिम्मा एसीएस बैजेंद्र कुमार को दिया है। जाहिर है, कलेक्टरों के ट्रांसफर में कुंडली की भूमिका अहम होगी।

आर्डर में चूक!

बीएल अग्रवाल के तिहाड़ जाने के बाद एडिशनल चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर को सालों बाद ऐसा कोई विभाग मिला, जिसे वे अब बाहर में बताने में दिक्कत महसूस नहीं करेंगे। हालांकि, हायर एजुकेशन को कोई बड़ा या मलाईदार विभाग नहीं माना जाता। मगर सम्मानजनक तो है। कुजूर को लंबे अरसे से ढंग की पोस्टिंग नहीं मिली थी। वे ग्रामोद्योग, निर्वाचन और राजभवन में घूमते रहे। अब जीएडी की विडंबना देखिए। हायर एजुकेशन को एडिशनल कर दिया और ग्रामोद्योग को मूल पोस्टिंग। कायदे से हायर एजुकेशन को मूल पोस्टिंग करना चाहिए था और ग्रामोद्योग को एडिशनल। इसमें किसी को छटाक भर का नुकसान नहीं था। सिर्फ सम्मान की बात थी। लेकिन, जीएडी में सम्मान की किसको पड़ी है।

ठाकुर के बाद ब्रेक

पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग पर सरकार ने एक तरह से कहें तो ब्रेक ही लगा दिया है। पिछले साल सात आईएएस रिटायर हुए थे। दिनेश श्रीवास्तव, डीएस मिश्रा, एसएल रात्रे, ठाकुर राम सिंह, बीएस अनंत और राधाकृष्ण्न। इनमें से सिर्फ राम सिंह की ताजपोशी हुई। डीएस मिश्रा, राधाकृष्णन और राधाकृष्णन का जोर भी काम नहीं आया। अब इनकी फाइल क्लोज ही समझिए। वैसे, 2015 में रिटायर एमएस परस्ते, ब्राम्हणे घर में आराम ही कर रहे हैं। इस साल रिटायरमेंट में पहला नम्बर लगने वाला है एसीएस एनके असवाल का। वे 31 मई को सेवानिवृत्त होंगे। असवाल अगर लोकल होते तो चुनावी दृष्टि से उनकी पोस्टिंग निश्चित मानी जाती। लेकिन, वे राजस्थान से हैं। 2013 विस चुनाव से पहिले सरजियस मिंज की सूचना आयोग में इसलिए पोस्टिंग मिल गई थी कि वे स्थानीय थे। बाकि तो किस्मत अपनी-अपनी। हां, ये तय है कि अगले एक साल में रिटायर होने वाले तीन आफिसर्स तगड़े दावेदार होंगे।

डीआईजी इम्पेनल

2003 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के तीनों आईपीएस भारत सरकार में डीआईजी इम्पेनल हो गए हैं। रतन डांगी, सुंदरराज पी और ओपी पाल। डांगी फिलहाल पीएचक्यू में डीआईजी एसएएफ एवं कमांडेंट सेकेंड बटालियन हैं। वहीं, सुंदरराज डीआईजी दंतेवाड़ा और पाल एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर। इन तीनों में किस्मत के धनी तो पाल ही हैं। बिना कुछ किए, पांचों उंगली घी में।
अंत में दो सवाल आपसे
1. लोक सुराज अभियान में फिर ऐसा क्या हो रहा है कि चीफ सिकरेट्री के दावेदार सशंकित हो गए हैं?
2. हेलिकाप्टर खरीदी का खंडन करने में जोगी कांग्रेस को 24 घंटे क्यों लग गए?