मंगलवार, 19 जनवरी 2021

तरकश : सूरा प्रेमियों…बुरी खबर!

 संजय के दीक्षित

तरकश के तीर, 17 जनवरी 2021

सूरा प्रेमियों…बुरी खबर!

कोरोना की वैक्सिन लगनी शुरू हो गई है। जाहिर तौर पर लोगों में राहत के साथ खुशी के भाव हैं। लेकिन, जिन डाॅक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगाए गए हैं, उनमें से कुछ लोगों पर क्या गुजर रही, उनका दर्द कोई समझ नहीं सकता। टीका लगाने से पहले उन्हें दो टूक बताया गया…अगला टीका 28 दिन बाद 13 फरवरी को लगेगी। और इसके चार हफ्ते बाद तक आप ड्रिंक नहीं कर सकते। यानी 16 जनवरी से लेकर 13 मार्च तक। लगभग दो महीने। जो ड्रिंक नहीं करते उनके लिए भले ही यह मामूली बात होगी। लेकिन, जो शौकीन हैं या रोज वाले….? उनका क्या होगा? लाॅकडाउन में दोगुने-तीगुने रेट पर अपने ब्रांड का इंतजाम कर लेने वाले सूरा प्रेमियों के लिए यह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं होगा। इससे इतर चिंता की बात ये भी है, ड्रिंक की बंदिशों की वजह से कुछ हेल्थ अफसर और वर्कर ऐन वक्त पर गायब हो गए। ये ठीक नहीं। उन्हें समझना होगा शराब बड़ी नहीं, जान बड़ी है। ऐसे लोगों को उन परिवारों से मिलना चाहिए, जिन्होंने कोरोना में अपने प्रिये को खो दिया।

नाम का चक्कर

सेम नाम भी कई बार मुसीबत का सबब बन जाता है। 11 जनवरी को राजधानी में ऐसा ही कुछ हुआ कि दो साल से ठंडी पड़ी ब्यूरोक्रेसी में उबाल आ गया। दरअसल, फायनेंस सर्विसेज की एडिशनल डायरेक्टर गीता सोनी के बेटे के खिलाफ राजधानी के एक थाने में मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ। सोशल मीडिया ने अतिउत्साह में इसे महिला आईएएस के बेटे के नाम से खबर चला दी। जाहिर है, इस पर बवाल तो मचना ही था। आईएएस के व्हाट्सएप ग्रुप में इंक्लाब जैसी स्थिति निर्मित हो गई। महिला आईएएस ने लिखा, साजिशतन मेरी छबि खराब करने की कोशिश की जा रही। इसके बाद कुछ काॅमरेड आईएएस अधिकारियों ने पूरा ठीकरा पुलिस पड़ फोड़ दिया। चलिये, नाम के फेर में ही सही, आईएएस जागे तो। वरना, दो साल से व्हाट्सएप ग्रुप पर जन्मदिन के विश के अलावा अभिव्यक्ति की आजादी दिखाई नहीं पड़ रही थी।

बड़ा और छोटा

ब्यूरोक्रेसी में एक नाम के चक्कर में गफलत होना नई बात नहीं है। हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रसन्न्ना पी की जगह प्रसन्ना आर की पोस्टिंग कर दी थी। कुछ घंटे बाद जब चूक का अहसास हुआ तो फिर संशोधित आदेश प्रसन्ना पी के नाम से निकाला गया। इन दोनों अधिकारियों के नाम पर बड़ा कंफ्यूजन होता है। इसीलिए, जल्दी समझने के लिए लोग बड़ा प्रसन्ना, छोटा प्रसन्ना कहते हैं। बड़ा प्रसन्ना मतलब प्रसन्ना आर। और, छोटा….प्रसन्ना पी। छोटा का आशय जूनियर से है। इसी तरह पहले डीएस मिश्रा और जीएस मिश्रा में होता था। जल्दी बोलने पर लोग एक बार में समझ नहीं पाते थे। फिर डीएस मतलब दाढ़ी वाले और जीएस याने जी फाॅर गणेश।

आईएफएस में ऐसा क्यों

रिटायर पीसीसीएफ केसी यादव की कोरोना से मौत हो गई। जाहिर तौर पर इतने बड़ी घटना अगर आईएएस में हुई होती तो उनके घर वालों को भटकना नहीं पड़ता। लेकिन, केसी यादव की पत्नी सुनिति कई महीने से अफसरों का चक्कर लगा रही हैं कि कोई उनकी मदद कर दें तो पेंशन और पीएफ, ग्रेच्यूटी निकल जाए। असल में, रिटायरमेंट के चंद महीने बाद ही यादव को कोरोना ने अपना शिकार बना लिया। रिटायरमेंट के बाद जो पैसा मिलता है, वो भी पूरा नहीं मिला था। उपर से उनकी मौत को छह महीने से उपर होने जा रहा, मगर अभी भी पेंशन की फाइल भटक रही है।

सीएम की घोषणा और…

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नगरनार स्टील प्लांट को केद्र द्वारा निजी हाथों में बेचे जाने के खिलाफ बड़ा फैसला लेते हुए उसे खरीदने का ऐलान किया। लेकिन, बस्तर के जनप्रतिनिधि सीएम के इस गंभीर फैसले को समझने के लिए लगता है तैयार नहीं। हाल यह है कि बाहर से प्लांट की कमीशनिंग के लिए आ रहे एक्सपर्ट को गेट से भीतर नहीं घुसने दिया जा रहा। वो भी तब, जब मुख्यमंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है। ऐसे में, नगरनार प्लांट के प्रति एक स्वाभाविक लगाव बढ़ जाता है। बहरहाल, भिलाई स्टील प्लांट से भी वृहद और अतिआधुनिक नगरनार संयंत्र अब आखिरी स्टेज पर है। 20 हजार करोड़ के इस प्लांट में अगर बाधाएं खड़ी की गईं तो निश्चित तौर पर इसका नुकसान छत्तीसगढ़ और बस्तर का होगा। क्योंकि, सरकार ने अगर उसे खरीदना तय कर लिया है तो पहला मौका राज्य को ही मिलेगा।

चोर की दाढ़ी में तिनका

पिछले तरकश में एक सवाल था….एक रिटायर आईएएस प्रेम की गहराइयों में गोते लगा रहे हैं। इसके बाद रिटायर नौकरशाहों में जाहिर है बेचैनी बढ़नी ही थी। बताते हैं, कुछ के घर में सुबह से गृह युद्ध छिड़ गया तो कुछ की घरवाली अभी भी मुंह फुलाई हुई हैं….सवाल एक ही है….मैंने तुम्हारे लिए क्या नहीं किया। एक अफसर ने चोर की दाढ़ी में तिनका की की तरह खुद ही पत्नी को तरकश पढ़वा दिया….बाबा मैं नहीं हूं। इसमें इंटरेस्टिंग यह रहा कि सवाल किसी एक रिटायर आईएएस के बारे में था लेकिन, बाद में स्तंभकार के पास फोन करके कई और अफसरों के बारे में भी लोगों ने सनसनीखेज सूचनाएं दे डाली।

एक और आयोग

29 जनवरी को बाल संरक्षण आयोग की चेयरमैन प्रभा दुबे का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। प्रभा भाजपा शासन काल में चेयरमैन बनी थी। चूकि एक्ट के तहत यह आयोग बना है, इसलिए बिना किसी गंभीर मामलों के आयोग के चेयरमैन को हटाया नहीं जा सकता। लिहाजा, सरकार बदलने के बाद भी प्रभा दुबे अपने पद पर कायम रहीं। लाल बत्ती के दावेदारों के लिए एक वैकेंसी और मिल जाएगी।

छत्तीसगढ़ स्वर्ग कैसे?

अफसरों को खुश कर सरकार को चूना लगाने वाली कंपनियों के लिए छत्तीसगढ़ किस तरह स्वर्ग है, ये आज आपको बताते हैं। झारखंड की आईटी कंपनी को छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री आफिस का काम मिला है। कंपनी ने चार साल पहले करीब 10 करोड़ लगाकर आफिस में कंप्यूटरीकरण का काम किया है। और इसके एवज मेें हर साल लगभग 50 करोड़ ऐंठ रही है। वो ऐसे हुआ कि कंपनी ने पिछले सरकार में अधिकारियों से रजिस्ट्री के एक पेज का 60 रुपए रेट तय करवा लिया। जमीन की एक रजिस्ट्री में लगभग 20 पेज का कागज बनता है। यानी एक रजिस्ट्री पर करीब 12 सौ रुपए का सेवा कर कंपनी को देना पड़ता है। सूबे में साल में लगभग चार लाख जमीन की रजिस्ट्री होती है। इस हिसाब से एक साल में 48 करोड़ का भुगतान कर रही सरकार। जबकि, रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी चाहें तो अपना साफ्टवेयर बनवा सकते हैं। डा0 आलोक शुक्ला जब इतने बड़े लेवल पर धान खरीदी का साफ्टवेयर दो महीने में बनवा सकते हैं तो रजिस्ट्री विभाग क्यों नहीं। मगर अधिकारी नकारे और भ्रष्ट हों तो क्या किया जा सकता है। दिलचस्प यह है झारखंड की इस कंपनी को झारखंड में भी काम मिला था। वहां 20 रुपए रेट था। लेकिन, विरोधों के बाद झारखंड सरकार ने कंपनी से करार खतम करते हुए खुद का कंप्यूटराइजेशन कर लिया। दूसरा, तत्कालीन चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड एक बार रजिस्ट्री आफिस का मुआयना करने पहुंचे थे तो कंपनी के रेट पर हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा था, इतना मार्जिन ठीक नहीं। रेट कम किया जाए। फिर भी रेट कम नहीं किया गया।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एसपी की लिस्ट पहले निकलेगी या एसपी से डीआईजी का प्रमोशन पहले होगा?

2. एक मंत्री को किस वजह से हर फ़ोटो फ्रेम में जगह मिल जाती है?

शनिवार, 9 जनवरी 2021

ब्यूरोक्रेसी में कोरोना

संजय के दीक्षित
तरकश, 10 दिसंबर 2021
कोरोना पीड़ितों की संख्या भले ही इस समय पहले की तुलना में कम हुई हो लेकिन, अब ब्यूरोक्रेसी के लोग ज्यादा शिकार होने लगे हैं। चीफ सिकरेट्री अमिताभ जैन समेत मंत्रालय के आधा दर्जन से अधिक आईएएस इस समय कोरोना से पीड़ित हैं। समझा जाता है, विधानसभा के शीतकालीन सत्र दौरान अधिकारी इंफेक्टेड हुए होंगे। सत्र के दौरान मंत्रियों के यहां लगातार ब्रीफिंग हुई। अधिकांश मंत्रियों के बंगले में कोरोना के प्रोटोकाॅल का कोई पालन होता नहीं। जाहिर है, विधायकों में भी एक तिहाई से अधिक कोरोना से संक्रमित हैं। ये वे विधायक हैं, जिन्होंने टेस्ट कराया है। बाकी विधायकों ने मानसून सत्र में ही टेस्ट कराने से दो टूक इंकार कर दिया था। अगर सभी का टेस्ट हो तो विधायकों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती है। बहरहाल, अभी तो आईएएस मुश्किल में हैं।


25 करोड़ का क्लब

नया रायपुर की रंगत बढ़ाने एनआरडीए अब कई स्तर पर काम शुरू कर दिया है। मंत्रियों, नौकरशाहों के बंगले का काम अब अंतिम चरण में है….इसके साथ शाही सुख-सुविधाओं वाला एक भव्य क्लब बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। 25 करोड़ में बनने वाले इस क्लब का डिजाइन तैयार करने एनआरडीए आजकल में टेंडर जारी करने वाला है। अफसरों का दावा है, ऐसा क्लब मेट्रो सिटी में भी नहीं होगा। इसमें दिन भर इंगेज करने वाली सुविधाएं होंगी। इंटरनेशनल लेवल की लायब्रेरी, जीम, योगा सेंटर, स्वीमिंग पुल, सैलून, मसाज, थियेटर, बीयर-बार, रेस्टोरेंट, कांफ्रेंस हाॅल के साथ टहलने के लिए बड़ा सा रोज गार्डन। ठीक भी है। इस तरह का क्लब बन जाने के बाद सरकारी अमला और उनके घर वाले नया रायपुर जाने में आगे-पीछे नहीं होंगे। नया रायपुर में रहने का क्रेज बढ़ेगा, सो अलग।

होटल पर मेहरबानी

एनआरडीए के पास एक तरफ कर्मचारियों को वेतन बांटने के लिए पैसे नहीं हैं। उधर, फोर स्टार होटल परिसर के झील और सड़क के सौंदर्यीकरण के लिए एनआरडीए ने 29 करोड़ रुपए का टेंडर जारी कर दिया है। जबकि, होटल को इसी शर्त पर रियायती दर से लैंड दिया गया था कि वो झील को भी डेवलप करेगा। तो फिर बड़े लोगों के होटल पर एनआरडीए की इतनी मेहरबानी क्यों? ये सवाल तो उठते ही हैं।

बिहार पीछे क्यों?

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिलों के दौरे में लोगों से मेल-मुलाकात के साथ ही वहां के अधिकारियों से आत्मीय चर्चा कर रहे हैं। इसमें उनके गांव, घर-परिवार, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई जैसी तमाम बातें होती हैं। मुख्यमंत्री इस समय हलके मूड में होते हैं। इसी हफ्ते की बात है….मुख्यमंत्री जांजगीर में थे। उनका संवाद शुरू हुआ तो कुछ प्रशासनिक अफसर अटेंशन में डायरी खोलकर जेब से पेन निकाल लिए। इस पर सीएम मुस्कुराते हुए बोले…डायरी, पेन को अलग रख तन और को हल्का कर लो। संवाद के दौरान मुख्यमंत्री अधिकारियों से कई मामलों में उनकी राय भी पूछते हैं। जैसे रायगढ़ में प्रोबेशनर आईपीएस पुष्कर शर्मा से उन्होंने पूछा, ये बताओ बिहार देश को इतनी बड़ी संख्या में हर साल आईएएस, आईपीएस देता है, फिर विकास के मामले में वो इतना कैसे पिछड़ गया। पुष्कर बिहार से आते हैं।

विश्वस्त आईपीएस

वैसे तो सरकार अपने भरोसेमंद आईपीएस को ही खुफिया चीफ बनाती है। मगर डाॅ0 आनंद छाबड़ा की बात कुछ और है। वे छत्तीसगढ़ के पहले खुफिया चीफ होंगे, जो मुख्यमंत्री के साथ हेलिकाप्टर में जिलों के दौरे में जा रहे हैं। और, पूरे समय उनके साथ होते हैं। चतुर अधिकारी की तरह वे फोटो फ्रेम से दूर रहते हैं, लेकिन पूरी चीजें उनकी निगरानी में होती हैं। इससे पहिले छत्तीसगढ़ में बड़े-बड़े कद्दावर खुफिया चीफ हुए लेकिन, सीएम के साथ हेलिकाप्टर में जाने का मौका किसी को नहीं मिला। पहले सीएम के सिर्फ बस्तर विजिट में खुफिया चीफ जाते थे, वो भी सीएम के साथ नहीं। सरकार से जुड़़े लोग भी मान रहे कि मुख्यमंत्री आनंद पर काफी भरोसा करते हैं। बता दें, हिमांशु गुप्ता के बाद आनंद को जब खुफिया की कमान सौंपी गई थी तो लोग यह मानकर चल रहे थे कि ये टेंटेटिव व्यवस्था है। कुछ दिन बाद खुफिया चीफ बदल जाएंगे। क्योंकि, उनसे कई सीनियर रेंज में आईजी हैं। लेकिन, आज की तारीख में आनंद सरकार के विश्वस्त अफसर बन गए हैं।

विवेकानंद का विकल्प

96 बैच के आईपीएस विवेकानंद सिनहा एडीजी के पद प्रमोशन के पात्र हो गए हैं। वीवीआईपी रेंज के आईजी हैं, इसलिए हो सकता है जल्द ही उनका प्रमोशन हो भी जाए। लेकिन, उनके बाद दुर्ग रेंज का आईजी कौन होगा, ये बड़ा सवाल है। दुर्ग से सीएम सहित पांच-पांच मंत्री हैं। राजनांदगांव जैसा संवेदनशील जिला भी इसी में आता है। सरकार के पास आईजी दूसरा कोई है नहीं। पुलिस मुख्यालय में एक आईजी हैं केसी पैकरा। दूसरे, दिपांशु काबरा को सरकार ने एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाया है। इनके अलावे पांच रेंज और पांच ही आईजी हैं। अशोक जुनेजा की जगह पर सरकार विवेकानंद को एडीजी नक्सल बना सकती है। ऐसे में, फिर किसी डीआईजी को सरकार दुर्ग का प्रभारी आईजी बनाएगी। क्योंकि, इसके अलावा सरकार के पास और कोई विकल्प नहीं है।

सात एडीजी

विवेकानंद के प्रमोशन के बाद छत्तीसगढ़ में सात एडीजी हो जाएंगे। राजेश मिश्रा, पवनदेव, अरुणदेव गौतम, जीपी सिंह, एसआरपी कल्लूरी, हिमांशु गुप्ता, प्रदीप गुप्ता और विवेकानंद। राजेश का नाम इसलिए, क्योंकि उनके डेपुटेशन से लौटने की चर्चा है। इनमें पांच इतने दमदार हैं कि वे ठीक से लग जाएं तो छत्तीसगढ़ पुलिस का नाम हो सकता है। लेकिन, पता नहीं क्यों….पुलिस महकमे को ग्रह-नक्षत्र की शांति के लिए कोई पूजा-पाठ करानी चाहिए।

ट्रांसपोर्ट में दिपांशु

राज्य सरकार ने केसी पैकरा को हटाकर दिपांशु काबरा को ट्रांसपोर्ट की कमान सौंपी है। 97 बैच के आईपीएस दिपांशु आधा दर्जन से अधिक जिलों के एसपी रह चुके हैं और चार रेंज के आईजी। ट्रांसपोर्ट में आरके विज, संजय पिल्ले, अशोक जुनेजा जैसे सीनियर आईपीएस पोस्टेड रहे हैं। अब सरकार ने दिपांशु पर भरोसा करते हुए अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

कमिश्नरी बंद

पिछले हफ्ते तरकश में एक सवाल था….सरकार को क्या कमिश्नर सिस्टम बंद कर देना चाहिए, बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय भेजी। अधिकांश लोगों का मत था कि कमिश्नर सिस्टम सरकार पर एक बोझ बन गया है। अधिकांश कमिश्नरी में अपील की सुनवाई के नाम पर सिर्फ वसूली चल रही। राजस्व बोर्ड बन जाने के बाद इसका कोई औचित्य भी नहीं है। कलेक्टर कमिश्नर की सुनते नहीं। गरियाबंद के एक व्यक्ति ने तंज कसा…सरकार भी इसे बोझ मानकर ही चल रही। रायपुर और बस्तर संभाग का चार्ज चुरेंद्र जैसे तेज-तर्राट अधिकारी को दे दिया गया था। अभी केए टोप्पो को रायपुर और दुर्ग का कमिश्नर बनाया गया है। टोप्पो हाल ही में कोरोना के प्रकोप से बाहर आए हैं। स्थिति बिगड़ने पर उनकी प्लाज्मा थेेेरेपी की गई थी। सार ये कि कमिश्नरी का कोई तुक नहीं।

पुराना इतिहास

बिलासपुर में विधायक से दुव्र्यवहार की खबर के बीच पुराने लोगों को मध्यप्रदेश के समय की घटना याद आ गई। 1998 में मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बिलासपुर आए थे। इंदिरा विहार के हेलिपैड पर उनके सामने पूर्व विधायक अरुण तिवारी की कांग्रेसियों ने ऐसी पिटाई कर दी कि खून से तिवारी का कुर्ता सन गया। दिग्गी हेलिकाप्टर पर बैठने जा रहे थे, तब ये घटना हुई। वे तुरंत मुडे…औऱ नहीं..नहीं….करते बचाने के लिए आगे बढ़े तब तक तो काम हो चुका था। कहने का आशय यह है कि बिलासपुर के कांग्रेस नेताओं का इतिहास पुराना है। कांग्रेस के कैडर में बिलासपुर मजबूत है तो मसल्स पावर में भी कम नहीं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एक रिटायर आईएएस का नाम बताइये, जो इन दिनों प्रेम की गहराईयों मे गोते लगा रहे हैं?

2. राजधानी के किस सीनियर आईपीएस की मुश्किलें बढ़ती जा रही है? 


रविवार, 3 जनवरी 2021

आईपीएस की शादी

 संजय के दीक्षित

तरकश, 3 जनवरी 2021
2019 बैच के आईपीएस योगेश पटेल आईएएस रोमा श्रीवास्तव के साथ परिणय सूत्र में बंध गए हैं। भिलाई पुलिस बटालियन के मंदिर में उन्होंने रोमा के साथ सात फेरे लिए। इस अवसर पर दुर्ग आईजी विवेकानंद सिनहा, राजनांदगांव एसपी डी श्रवण, कमांडेंट गोवर्द्धन ठाकुर समेत वर-वधु को आर्शीवाद देने के लिए मौजूद थे। उनके अलावा कोई और नहीं। महासमुंद के रहने वाले योगेश फिलहाल राजनांदगांव में प्रोबेशनर हैं। रोमा वैसे हैं तो झारखंड की मगर उनके पैरेंट्स कोरबा में रहे…पढ़ाई भी एनआईटी रायपुर से हुई। पहली बार आईपीएस के लिए सलेक्ट हुई रोमा को तमिलनाडू कैडर मिला था। दोबारा उन्होंने फिर से यूपीएससी दिया और इस साल आईएएस मिल गया। उन्हें अभी कैडर अलाॅट नहीं हुआ है। बताते हैं, योगेश और रोमा एक साथ आईपीएस बने थे। दोनों ने फिर से यूपीएससी दिया। इसमें रोमा आईएएस बन गई। योगेश का हार्ड लक ये रहा कि दूसरी बार भी उन्हें आईपीएस मिला। चलिये, योगेश आईएएस नहीं बन पाए लेकिन, आईएएस से शादी कर छत्तीसगढ़ कैडर की एक संख्या तो बढ़ा दिए।


हार्ड लक!

2002 बैच के दोनों आईएएस डाॅ0 रोहित यादव और डाॅ0 कमलप्रीत सिंह पिछले साल भारत सरकार में ज्वाइंट सिकरेट्री के लिए इम्पेनल हुए थे। इस लिहाज से समझा जा रहा था कि इस साल 2003 बैच के कम-से-कम आधे आईएएस तो जेएस के लिए इम्पेनल हो ही जाएंगे। मगर पता नहीं भारत सरकार ने कौन सा फार्मूला अपनाया कि छत्तीसगढ़ से एक भी आईएएस को इसमें जगह नहीं मिल सकी। इस बैच में डायरेक्ट और प्रमोटी को मिलाकर कुल 9 आईएएस हैं। इनमें कुछ तो काफी ठीक-ठाक हैं। उम्मीद करते हैं केंद्र सरकार शायद सेकेंड लिस्ट जारी करें और उसमें अपने कैडर के अफसरों को भी जगह मिल जाए।

डेपुटेशन पर हिमांशु

एडीजी हिमांशु गुप्ता डेपुटेशन पर राजस्थान जाने की खबर आ रही हैं। पता चला है सरकार ने उन्हें एनओसी देने के लिए सहमति दे चुकी है। एनओसी मिलने के बाद आवश्यक प्रक्रिया उपरांत हिमांशु जयपुर की फ्लाइट पकड़ लेंगे। राजस्थान हिमांशु का गृह प्रदेश है। हिमांशु जा रहे हैं तो एडीजी राजेश मिश्रा BSF की प्रतिनियुक्ति से रायपुर लौटने की चर्चा है। राजेश 90 बैच के आईपीएस हैं। वे दुर्ग में एसपी रहे और बिलासपुर में आईजी। डीजी अशोक जुनेजा के बाद सीनियरिटी में राजेश का नम्बर है। नियमानुसार इस साल उन्हें डीजी बन जाना चाहिए। बहरहाल, हिमांशु के डेपुटेशन पर जाने के बाद समझा जाता है एसआरपी कल्लूरी को पीएचक्यू में प्रशासन का जिम्मा दिया जाए।

अंकित गर्ग को एक्सटेंशन

आईपीएस अंकित गर्ग को भारत सरकार ने दो साल का एक्सटेंशन दे दिया है। वे 2015 में डेपुटेशन पर एनआईए में गए थे। एनआईए में उनके पास नक्सल सेल का जिम्मा है। पांच साल की समयवधि पूरी होने के बाद एमएचए ने उन्हें दो साल की सेवावृद्धि दे दी है। यानी अब वे 2022 में छत्तीसगढ़ लौटेंगे।

पुरंदेश्वरी की हिंदी

बीजेपी की नई प्रभारी डी0 पुरंदेश्वरी साउथ से आती हैं, लिहाजा उनकी हिंदी पर लोगों के मन में कई तरह के सवाल होंगे। लेकिन, ऐसा नहीं….उनकी हिंदी इतनी अच्छी है कि भाषण में इस्तेमाल किए गए कई शब्दों से बीजेपी नेता आवाक रह गए। हां ये जरूर हुआ कि अधिकांश बीजेपी नेता अपने उद्बोधन में डी. पुरंदेश्वरी का उच्चारण एक बार में नहीं कर सकें। कुछ बीच में अटक गए….तो कुछ पुरंदे…पुरंदेश्व करते हुए आगे बढ़ गए। बीजेपी के कई नेता अब एक बार में पुरंदेश्वरी बोल जाने की प्रैक्टिस कर रहे हैं।

झटका-1

आईएएस अभिजीत सिंह को कलेक्टरी से हटा दिया गया। वे मई में कलेक्टर बनकर नारायणपुर गए थे। वे अपने पहले जिले में मात्र छह महीने ही रह पाए। सरकार ने उन्हें पाठ्य पुस्तक निगम का एमडी अपाइंट किया है। आईएएस के लिए यह पोस्टिंग बहुत अच्छी नहीं मानी जाती। आप इससे समझ सकते हैं कि राज्य बनने के बाद कोई डायरेक्ट आईएएस इस पद पर नहीं रहा है। आईएफएस जरूर पापुनि के एमडी रहे हैं। अभिजीत का लगता है, ग्रह-नक्षत्र ठीक नहीं चल रहा। पिछली सरकार में ग्राम सुराज के समय तब के सीएम रमन सिंह ने उन्हें कोंडागांव जिपं सीईओ से हटा दिया था। और अब कलेक्टरी से।

झटका-2

एडिशनल पीसीसीएफ अरुण पाण्डेय को सरकार ने पोस्टिंग के नौ दिनों मेें ही वन मुख्यालय में विकास और योजना से हटा दिया। उनकी जगह पर जैव विविधता बोर्ड के मेम्बर सिकरेट्री तपेश झा को भेजा गया है और अरुण को झा की जगह पर। ये कैसे हुआ…क्यों हुआ, वन महकमा सकते में है। महत्वपूर्ण यह है कि इस ट्रांसफर के बारे में वन महकमे के किसी को भनक तक नहीं लग सकी। पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी राजधानी से बाहर थे। दो लाईन का नोट आया और आदेश जारी हो गया।

पुलिस का नम्बर

नये साल में जवानों के साथ मुख्यमंत्री का लंच और मुलाकात कार्यक्रम काफी हिट रहा। इसके लिए सीएम सचिवालय से 30 दिसंबर को एक लाइन का मैसेज आया था…इसे करना है। और खुफिया चीफ आनंद छाबड़ा ने 24 घंटे में इसका आयोजन कर दिया। जाहिर है, इससे पुलिस का नम्बर बढ़ा है…नक्सल एरिया में तैनात पैरा मिलिट्री जवानों ने भी छत्तीसगढ़ पुलिस के कोआर्डिनेशन की तारीफ की।

तीन साल में 5 जिला

आईएएस डोमन सिंह ने कलेक्टरी का रिकार्ड बना दिया है… कम समय में ज्यादा जिले के कलेक्टर बनने का। ताजा फेरबदल में उन्हें महासमुंद जिले की कमान सौंपी गई है। 2018 मध्य में उन्होंने मंुगेली से कलेक्टरी की पारी शुरू की थी। इसके बाद कांकेर, फिर कोरिया और गौरेला-पेंड्रा। और अब महासमंद। हालांकि, कांकेर में उन्हें कम समय रहने का मौका मिला। लोकसभा चुनाव के दौरान गृह जिला होने के कारण उन्हें हटना पड़ गया था। प्रमोटी आईएएस में पांच जिला करने वाले डोमन सिंह छत्तीसगढ़ के पहले कलेक्टर होंगे। प्रमोटी में अभी तक चार जिला करने का रिकार्ड ठाकुर राम सिंह के पास है। हालांकि, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और रायगढ़ जैसे बड़े जिले का कलेक्टर रहने का ठाकुर राम सिंह का रिकार्ड टूटेगा, इसमें अब संशय है। अब कलेक्टर छह महीने, एक साल में पेवेलियन लौट जा रहे हैं। फिर, अब आईएएस में संख्या भी काफी हो गई है। पहले संख्या काफी कम होती थी। एक बैच में छत्तीसगढ़ को इक्का-दुक्का आईएएस मिलते थे।

एक और लिस्ट

सरकार ने तीन कलेक्टरों को बदल दिया। नारायणपुर, महासमंुद में प्रमोटी आईएएस को मौका दिया गया तो गौरेला में डायरेक्ट आईएएस नम्रता गांधी को। नम्रता 2013 बैच में सबसे उपर थीं। इस बैच के विनीत नंदनवार पहले ही कलेक्टर बन चुके हैं। 2013 बैच के अभी चार आईएएस क्यूं में हैं। जाहिर है, उन्हें भी कलेक्टर बनाया जाएगा। साथ ही दो-तीन बड़े जिले के कलेक्टर भी आने वाले समय में बदलेंगे। एक बड़े जिले के कलेक्टर का लास्ट मोमेेंट में कैच छूट गया, वरना वे आउट हो गए होते।

अंत में दो सवाल आपसे

1. आधा दर्जन सीनियर आईपीएस की पोस्टिंग के बाद क्या अब पुलिस अधीक्षकों की लिस्ट निकलेगी ?
2. जब कमिश्नर बनाने के लिए अफसर नहीं मिल रहे तो सरकार को इस सिस्टम को बंद करने पर विचार क्यों नहीं करना चाहिए?

 

सोमवार, 21 दिसंबर 2020

निशाने पर कलेक्टर

 संजय के दीक्षित

तरकश, 20 दिसंबर 2020
डिस्ट्रिक्ट माईनिंग फंड के दुरुपयोग को लेकर सूबे के कई कलेक्टर नए चीफ सिकरेट्री अमिताभ जैन के निशाने पर हैं। बताते हैं, सरकार को रिपोर्ट मिली है कि सूबे के कई कलेक्टर डीएमएफ में बड़ा गोलमाल कर रहे हैं। पिछली सरकार में निर्माण कार्यों में खेल किया गया। भूपेश बघेल सरकार ने डीएमएफ से निर्माण कार्यों पर रोक लगाई तो कलेक्टर अब इस फंड से स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए ब़ड़े पैमाने पर अनाप-शनाप खरीदी प्रारंभ कर दिए हैं। सरकार की नोटिस में ये बात भी है कि कुछ सप्लायर कलेक्टरों के साथ फेविकोल की तरह चिपक गए हैं। कलेक्टरों का ट्रांसफर होने पर सप्लायर भी कलेक्टर के साथ नए जिले में पहुंच जा रहे हैं डीएमएफ का खेल करने। तभी चीफ सिकरेट्री ने कलेक्टरों को चेताया है….अब शिकायत आई तो खैर नहीं!


एसपी भी पीछे नहीं

बदले हालात में सूबे के पुलिस अधीक्षकों की स्थिति भी ठीक नहीं है। शराब दुकानों को पिछली सरकार ने सरकारी कर दी। आरटीओ चेक पोस्ट खुल तो गए हैं लेकिन पुराना सिस्टम अभी पटरी पर नहीं आ पाया है। एसपी के लिए अब बच गया है सिर्फ कबाड़ी और गांजा, कोकिन। कबाड़ी वाले भी इन दिनों पहुंच वाले हो गए हैं…उन्हें ज्यादा दबाया नहीं जा सकता। ऐसे में, पुलिस का पूरा फोकस गांजा, कोकिन, चरस जैसे नशीले पदार्थ पर है। कुछ चतुर पुलिस अधीक्षकों का जरूर ठेकेदारों के साथ एमओयू हो गया है। वे जिस जिले में जाते हैं, ठेकेदार उनके साथ होते हैं। फिर उनके संरक्षण में ठेकेदारी होती है। खासकर, नक्सली इलाके में ये कुछ ज्यादा हो रहा। नक्सली एरिया में एसपी के सहयोग के बगैर कोई काम हो नहीं पाता। ठेकेदारों के साथ ये गठबंधन पिछली सरकार से चल रहा है।

हैंड नहीं

कलेक्टर्स तभी अच्छे रिजल्ट दे पाते हंै, जब उनके पास डिप्टी कलेक्टरों के रूप में अच्छे हैंड हों। लेकिन, छत्तीसगढ़ में इस समय जितने भी ठीक-ठाक डिप्टी कलेक्टर हैं, वे या तो जिला पंचायत के सीईओ बन गए हैं या फिर नगर निगम कमिश्नर। जाहिर सी बात है कि डिप्टी कलेक्टरों के कैडर में सब तो रिजल्ट देने वाले होते नहीं। और जो डेढ़-दो दर्जन डिप्टी कलेक्टर हैं, वे सभी इंगेज हैं। पहले के जमाने में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग जैसे बड़े जिलों में कलेक्टरों के पास दो-दो एडिशनल कलेक्टर होते थे। इनमें भी एक आईएएस। बाकी आधा दर्जन के करीब डिप्टी कलेक्टर। वो भी सिस्टम को समझने वाले। अभी तो हाल बुरा है। अच्छे अफसर जिला प्रशासन से खिसक लिए हैं। जो बचे हैं, उनमें वो माद्दा नहीं। जाहिर है, इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ेगा।

अमिताभ के तेवर

हर अफसर का काम करने का अपना तरीका होता है। नए चीफ सिकरेट्री अमिताभ जैन ने भी मीटिंग का तरीका अब बदल दिया है। बैठक से पहिले कलेक्टरों या सचिवों से उनके विभागों की पूरी जानकारी मंगाई जा रही है। उसके बाद फिर मीटिंग। इसमें अफसरों के फंसने का भारी खतरा है। एक तो मीटिंग की जानकारी भेजना और फिर उसके बाद सामने बाॅस को फेस करना। अमिताभ जैन लंबे समय तक फायनेंस सिकरेट्री रहे हैं। फायनेंस अफसरों के पास एक तरह से कहा जाए तो विभागों और उसके अधिकारियों की पूरी कुंडली होती है। किस विभाग के अधिकारी या कलेक्टर ने कितना काम किया और कितना पैसा लेप्स किया, अमिताभ को बखूबी पता है। लिहाजा, अधिकारी उन्हें घूमा भी नहीं सकते। सो, अमिताभ के आने से कलेक्टर से लेकर सिकरेट्री तक असहज महसूस कर रहे हैं। फिर जो कम बोलता है, उसे समझना जरा कठिन होता है। अमिताभ टू द प्वाइंट बात करते हैं…मंत्रालय में पूरा समय भी देते हैं।

आईएएस अवार्ड

एलायड सर्विस से आईएएस अवार्ड के एक पद के लिए पांच नाम भारत सरकार को भेजे गए हैं, उसका जल्द ही नोटिफिकेशन होने की खबर है। इनमें गोपाल वर्मा का नाम सबसे उपर है। उनके बाद विनय गुप्ता, सुश्री अल्पना घोष, राजेश सिंगी और गजपाल सिंह सिकरवार का नाम है। गोपाल वर्मा का नाम चूकि सबसे उपर है, इसलिए आईएएस बनने की संभावना उनकी अधिक है। बहरहाल, जीएडी ने भारत सरकार को पांच नाम भेजें हैं, उनमें एक नाम पर आश्चर्य जताया जा रहा है। वे पेनल में शामिल होने के योग्य ही नहीं थे।

राजाओं के गढ़ में सीएम

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पिछले हफ्ते सरगुजा में पूरे चार रात बिताए। उससे एक हफ्ते पहले जशपुर में नाइट हाल्ट किए थे। इससे पहले कोई मुख्यमंत्री राजधानी के बाहर इतना लंबा समय तक नहीं रहा। चार रात की बात तो दूर है, दो रात भी नहीं। वो भी जशपुर, सूरजपुर, कोरिया जैसे छोटे जिलों में। सीएम के दौरे की खास बात ये रही कि उन्होंने इत्मीनान के साथ एक-एक कार्यकर्ता से वन-टू-वन मिले। पूछ-पूछकर…और कोई है मिलने वाला। मुलाकात के दौरान सीएम के साथ न कोई मंत्री और न ही कोई अफसर होता था। ऐसा इसलिए किया गया कि कार्यकर्ता खुलकर अपनी बात मुख्यमंत्री के समक्ष रख सकें। जशपुर के सोगड़ा के प्रसिद्ध भगवान राम अघोर पीठ में मुख्यमंत्री दो करीब दो घंटे बिताए। वहां उन्होंने भोजन भी किया। जशपुर दौरे के बाद युद्धवीर सिंह जुदेव ने सीएम के सम्मान में कसीदें गढ़कर बीजेपी को चौंका दिया।

मंत्रिमंडल में सर्जरी नहीं

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के दो बरस पूरे होने पर मंजे हुए टीम लीडर की तरह अपने कैबिनेट के सभी साथियों का मजबूती से बचाव किया। संपादकों से मुलाकात में जब मंत्रियों के परफारर्मेस और सर्जरी पर सवाल हुआ तो मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि किसी भी मंत्री के कामकाज से उन्हें शिकायत नहीं….बल्कि कोरोना के बाद भी उनके सारे मंत्रियों ने बढ़ियां काम किया है। कई विभागों के उल्लेखनीय कामों को उन्होंने गिना दिया। सीएम का इशारा साफ था कि फिलहाल मंत्रिमंडल में सर्जरी की आवश्यकता नहीं है। लेकिन, ये ध्यान रखना जरूरी है कि राजनीति में हां का मतलब ना और ना का मतलब कई बार हां भी होता है। इसलिए, मंत्री बेफिकर न हो जाएं। सीएम के जबरदस्त बचाव के बाद भी ये सर्वविदित है कि दो-तीन मंत्रियों का सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। क्षेत्र की दृष्टि से मंत्रिमंडल में असंतुलन भी है। बस्तर से सिर्फ एक विधायक को मंत्री बनने का मौका मिल पाया तो सरगुजा से तीन को। जबकि, पहले के सरकारों में बस्तर से कम-से-कम दो मंत्री रहे हैं।

सीईओ और वीडियो गेम

एक बड़े जिला पंचायत के सीईओ के वीडियो गेम खेलने से पूरा आफिस परेशान है। सीईओ के टेबल पर फाइलों का अंबार लगा रहता हैं और साब वीडियो गेम खेलने में मगन रहते हैं। जिला पंचायत के अध्यक्ष और वहां के एक विधायक ने सरकार से आग्रह किया है कि वीडियोगेम प्रेमी सीईओ से काम प्रभावित हो रहा है…उन्हेें हटाना बेहतर होगा।

बड़े अफसर की पेशी

सूचना आयोग बनने के बाद यह पहली बार हुआ कि एडिशनल पीसीसीएफ लेवल के आईएफएस जेएससी राव को सूचना आयोग में पेश होना पड़ा। राव ने वाईल्डलाइफ से संबंधित जानकारी न देने पर सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल के समक्ष जाकर खेद व्यक्त किए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस जिले के कलेक्टर को चीफ सिकरेट्री अमिताभ जैन ने वीडियोकांफ्रेंसिंग में कहा, धान में अबकी गड़बड़ी हुई तो निबटा दूंगा?
2. एक मंत्री का नाम बताइये, जो दो नाव पर सवारी करने की वजह से मुश्किल में पड़ सकते हैं?

 

रविवार, 13 दिसंबर 2020

आईएएस की शादी

 संजय के दीक्षित

तरकश, 13 दिसंबर 2020
छत्तीसगढ़ के 2013 बैच के आईएएस जगदीश सोनकर आखिरकार परिणय सूत्र में बंध गए। उन्होंने आईआरटीएस अफसर परिणिता के साथ सात फेरे लिए। दुर्ग के रहने वाले जगदीश फिलहाल वाटरशेड में सीईओ हैं। लोकल होने के बाद भी जगदीश के साथ विडंबना ये रही कि उन्हें कभी अच्छी पोस्टिंग नहीं मिल पाई। बीजेपी के समय भी ऐसा ही हुआ और अभी भी। चलिये, जगदीश की अब शादी हो गई है। अपने यहां माना ही जाता है पत्नी के भाग्य से....। उम्मीद करते हैं, परिणिता के जिंदगी में आने के बाद उन्हें जल्द ही कलेक्टरी करने का अवसर मिलेेगा। विनीत नंदनवार ने कलेक्टर बनकर उनके बैच में खाता खोल ही दिया है।

एक आईएएस और...?

2018 बैच के आईएएस संबित मिश्रा आंध्रप्रदेश कैडर की अपने बैचमेट आईएएस से शादी करने जा रहे हैं। संबित फिलहाल धरमजयगढ़ के एसडीएम हैं। शादी करने के बाद जाहिर है, दोनों में से कोई एक अपना कैडर चेंज कराएगा। पति-पत्नी के बेस पर डीओपीटी एक बार कैडर चेंज करने की इजाजत देता है। ऐसे में, शादी के बाद संबित या तो अपना कैडर चेंज कराकर आंध्र जाएंगे या फिर उनकी होने वाली धर्मपत्नी छत्तीसगढ़ आ जाएंगी। यानी, छत्तीसगढ़ में आईएएस के कैडर में एक का इजाफा होगा या फिर एक घट जाएगा। बहरहाल, बैचमेट से शादी करने वाले संबित छत्तीसगढ़ के पांचवे आईएएस होंगे। पहले नम्बर पर हैं, विकास शील और निधि छिब्बर। वे 94 बैच के आईएएस हैं। दूसरे, 95 बैच के गौरव द्विवेदी और मनिंदर कौर। तीसरे, अंबलगन पी और अलरमेल मंगई डी 2004 बैच। चैथे 2010 बैच के जयप्रकाश मौर्य और रानू साहू। उसके बाद 2018 बैच के संबित मिश्रा दंपति।

मोस्ट एलिजेबल....

विलंब से ही सही, 2013 बैच के आईएएस जगदीश सोनकर की शादी हो गई। 2018 बैच के यंग अफसर संबित की भी परिणय सूत्र में बंधने वाले हैं। मगर 2012 बैच के आईएएस रीतेश अग्रवाल अभी भी मोस्ट एलिजेबल.....बने हुए हैं। फिलहाल, वे बीजापुर कलेक्टर हैं। आईएएस की शादियों में इतना लेट होता नहीं। ज्यादतर रिश्ते मसूरी ट्रेनिंग के दौरान तय हो जाते हैं या फिर प्रोबेशन और नीेचे की पोस्टिंग के दौरान। छत्तीसगढ़ में कलेक्टर बनने के बाद किसी आईएएस की शादी होने के सिर्फ एक उदाहरण है। ओपी चैधरी की जब शादी हुई तो उस समय वे जांजगीर के कलेक्टर थे। उससे पहले वे दंतेवाड़ा में कलेक्टरी कर चुके थे। अब देखना है, रीतेश कब तक मोस्ट एलिजेबल....बने रहते हैं।

सीएस की विनम्रता

अमिताभ जैन के चीफ सिकरेट्री बनने के बाद सीएस की मीटिंग में अब अधिकारियों को चाय सर्व होने लगी है। आरपी मंडल ने मीटिंग में डिस्टर्बेंस का हवाला देकर चाय बंद करा दिया था। हालांकि, खबर ये नहीं है....खबर है सुप्रीम पद पर बैठने के बाद भी सीनियर के सम्मान का। मुख्य सचिव का कार्यभार ग्रहण करने के बाद अमिताभ जैन ने मंत्रालय में सचिवों की पहली बैठक ली। बैठक में स्कूल और तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डाॅ0 आलोक शुक्ला भी मौजूद थे। 86 बैच के आईएएस आलोक अमिताभ से तीन बैच सीनियर हैं। मीटिंग के बीच में जब चाय आई तो परंपरा के अनुसार काॅफी हाउस के वेटर ने पहले चीफ सिकरेट्री की ओर चाय बढ़ाई। लेकिन, उन्होंने इशारा करते हुए पहले आलोक शुक्ला को चाय देने कहा। फिर, सचिवों से विभागों के कामकाज के बारे में पूछताछ के दौरान जब आलोक शुक्ला का नम्बर आया तो सीएस विनम्रता से बोले....सर आपसे तो हमलोगों ने ट्रेनिंग ली है, आपसे मैं क्या पूछूं। वैसे, आईएएस में एक चीज होती है, वो है सीनियरों को वे जल्दी भूलते नहीं। पद से हटने के बाद भी छह महीने, साल भर आईएएस का वजूद बना रहता है। सबसे बुरी स्थिति आईपीएस और आईएफएस में है। आईपीएस को रिटायर होने के घंटे भर बाद उनके जूनियर पहचानना बंद कर देते हैं। इससे बदतर स्थिति आईएफएस में है।

पापा कहते हैं....

एक्स पीसीसीएफ एवं सीजी काॅस्ट के डायरेक्टर जनरल मुदित कुमार के डाॅक्टर बेटे को कोविड के दौरान मुस्तैदी से मरीजों की सेवा करने के लिए दिल्ली में सम्मानित किया गया है। किसी पिता के लिए इससे बड़ी फख्र की बात क्या हो सकती है। वो भी ऐसे में, जब माना जाता है कि आॅल इंडिया सर्विसेज के अधिकांश आफिसरों के बाल-बच्चे अपने पापा का नाम आगे नहीं बढ़ा पाते। उल्टे एनजीओ, ठेकेदारी, सप्लायर बनकर खराब करने का काम करते हैं।

दो खिलाड़ी

एक वो भी समय था....जब खेल विभाग में मामूली से दो मुलाजिम बड़े-बड़े आईएएस, आईपीएस को उंगली पर नचाते थे। वो चाहे खेल विभाग के सिकरेट्री कोई आईएएस हो या फिर डायरेक्टर के रूप में कोई आईपीएस, दोनों मायावी संसार से ऐसा परिचित कराते कि उसके बाद अधिकारी उनके चंगुल से बाहर नहीं निकल पाते थे। लेकिन, उनके करतबों को जानने के बाद सरकार ने अब दोनों को सूबे के उत्तरी, दक्षिणी छोर पर भेज दिया है। चलिये, बढ़ियां है...खेल विभाग रैकेट से प्रभाव से उबरने लगा है।

पीसीसीएफ की गैरमौजूदगी

आरपी मंडल के चीफ सिकरेट्री रहने के दौरान आईएफएस अधिकारियों को काफी वेटेज मिला। यहां तक मंडल दौरे में जाते थे, तो बगल में पीसीसीएफ जरूर होते थे। आपने देखा भी होगा....वीडियोकांफ्रेंसिंग के दौरान भी सीएस मंडल के एक तरफ डीजीपी डीएम अवस्थी होते थे, तो दूसरी ओर पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी। लेकिन, अमिताभ जैन की आईजी, कलेक्टर्स, एसपी की पहली वीडियोकांफ्रेंसिंग में पीसीसीएफ नजर नहीं आए। डीजीपी जरूर थे।

बैड दिसंबर

नौकरशाहों का लगातार ये तीसरा दिसंबर है, जो खराब जा रहा। वरना, उससे पहिले कोई भी क्रिसमस ऐसा नहीं गया होगा, जिसमें वे न्यू ईयर मनाने किसी मनमोहक डेस्टिनेशन पर नहीं गए हों। सिंगापुर, बैंकाक जाना तो आम बात थी। दरअसल, 2018 इलेक्शन ईयर था। उसमें ऐहतियात के तौर पर नौकरशाहों ने एडवांस टिकिट नहीं कराया कि पहले रिजल्ट देख लें....सरकार रिपीट हो गई तो बल्ले-बल्ले और नहीं हुई तो नए सरकार से इक्वेशन ठीक करने की प्राथमिकता पहले। मगर चुनाव में तख्ता पलट गया। 17 दिसंबर को शपथ लेने के बाद सीएम भूपेश बघेल ने ऐसे तेवर दिखाए कि अफसरों को 2019 के दिसंबर में भी सैर-सपाटे के लिए छुट्टी मांगने की हिम्मत नहीं पड़ी। और, 2020 में कोरोना आ गया।

अंत में दो सवाल आपसे

1. स्पीकर चरणदास महंत को लेकर लोगों की उम्मीदें फिर क्यों बढ़ने लगी है?
2. एसपी के ट्रांसफर की बहुप्रतीक्षित सूची क्या अब निकलने वाली है?