रविवार, 29 अक्तूबर 2017

मूणत की असली कमाई!

29 अक्टूबर
छह हजार करोड़ रुपए के बजट वाले पीडब्लूडी विभाग और बोरियों में रुपिया आने वाले ट्रांसपोर्ट विभाग का मंत्री रहते हुए राजेश मूणत ने 14 बरस में क्या कुछ किया, पता नहीं। मगर एक कमाई तो उन्होंने अवश्य की, वह सरकार और संगठन का विश्वास जीतने की। सेक्स सीडी कांड में जिस तरह मूणत के समर्थन में सरकार, संगठन और ब्यूरोक्रेट्स खड़े हुए….भाजपा के लोग भी हैरान हैं। पार्टी मुख्यालय में 27 अक्टूबर की शाम एक कार्यक्रम में एक सीनियर मंत्री का साथी मंत्री से बात करते हुए दर्द छलक आया….मेरे समय एक आदमी सामने नहीं आया और आज राजेश के पक्ष में पूरी पार्टी आ गई है। बात सही भी है….याद होगा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री होने के बाद भी संजय जोशी आखिर सेक्स कांड में न केवल अकेले पड़ गए थे, बल्कि उनका कैरियर भी खतम हो गया। एमपी के राघवजी का मामला तो हाल का है। ऐसे ही एक मामले में राघवजी को फ्लैट का ताला तोड़कर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लेकिन, मूणत को बचाने के लिए सरकार के रणनीतिकार रात भर जागकर आपरेशन विनोद वर्मा की मानिटरिंग करते रहे। अगले दिन दोपहर पार्टी अध्यक्ष के साथ आधा दर्जन मंत्री थाना पहुंच गए। मूणत की असली कमाई शायद यही होगी।

भूपेश की होशियारी

सेक्स सीडी कांड में पीसीसी चीफ भूपेश बघेल द्वारा हड़बड़ी में बुलाई गई प्रेस कांफें्रस में जिस तरह उन्होंने होशियारी बरतते हुए मंत्री का नाम नहीं लिया, यहीं से शक की सुई घूमनी शुरू हो गई थी। जांच एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए कि भूपेश जैसे अग्रेसिव लीडर मंत्री का नाम लेने में आखिर क्यों हिचक रहे हैं। इसे ही अहम सूत्र मानते हुए पुलिस आगे बढ़ी। और, मंत्री राजेश मूणत के प्रति लोगों को लग रहा था कि मामले में कुछ गड़बड़ है।

नए सीएस की ट्रेनिंग?

बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी जाने के बाद 83 बैच के आईएएस अजय सिंह का अगला चीफ सिकरेट्री बनना लगभग तय है। लेकिन, पोस्टिंग कब होगी, सरकार इस पर से पर्दा नहीं उठा रही है। विवेक ढांड मार्च तक अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या फिर…..। ढांड ने हाल ही में पी जाय उम्मेन का सर्वाधिक समय तक सीएस रहने का रिकार्ड ब्रेक किया है। बहरहाल, आजकल सरकारी कार्यक्रमों में एडिशनल चीफ सिकरेट्री अजय सिंह की सक्रियता बढ़ गई है। सरकारी खरीदी के लिए जेम पोर्टल के एमओयू में उन्हें चीफ सिकरेट्री के बगल में बिठाया गया। जबकि, यह विशुद्ध रुप से इंडस्ट्री डिपार्टमेंट का प्रोग्राम था। अजय सिंह के खेती-किसानी वाली विभाग से इसका कोई ताल्लुकात नहीं था। न ही उनके अलावा कोई दीगर एसीएस थे। जेम के इस प्रोग्राम के बाद ब्यूरोक्रेसी में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सरकार अगले चीफ सिकरेट्री के रूप में अजय सिंह को ट्रेंड कर रही है। ये अलग बात है कि कलेक्टर कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री साफ कर चुके हैं कि सीएस अभी रिटायर नहीं हो रहे हैं। लेकिन, लोगों के पास इसका भी जवाब है….राजनीतिज्ञों के हर हां में ना छिपा होता है।

पीएचक्यू का सेंशर

24 अक्टूबर के एसपी कांफ्रेंस के बाद कई पुलिस अधीक्षक दुखी हैं। उनके कामों को जिस ढंग से प्रेजेंट किया जाना था, नहीं किया गया या उसे सेंशर कर दिया गया। दरअसल, पुलिस मुख्यालय में सीएम के समक्ष प्रेजेंटेशन दिया जाना था, इसलिए जिलों से पुलिस की उपलब्धियां मंगाई गई थीं। आरोप है कि मुख्यालय के सीनियर अफसरों ने कई एसपी के कामों को सेंशर करते हुए अपने चहेते पुलिस अधीक्षकों के काम को सीएम के सामने बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर डाला। अगर ऐसा है तो एसपीज का दुखी होना लाजिमी है।

शरारत की पोस्टिंग

व्हाट्सएप ग्रुपों में हफ्ते भर से एसपी की पोस्टिंग की लिस्ट मूव हो रही है। इसके अनुसार बिलासपुर, रायपुर, महासमुंद, रायगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, अंबिकापुर, जांजगीर, बालोद में नए एसपी के बकायदा नाम और जिला लिखा हुआ है। जाहिर है, जिनके नाम ट्रांसफर लिस्ट में वायरल हो रहे हैं, उनके हर्ट बिट्स बढ़े हुए हैं। लेकिन, वास्तव में ऐसा कुछ है नहीं। सिवाय फेक मैसेज के। सरकार में आईएएस, आईपीएस लेवल पर इस तरह ऐलान कर या किसी को बता कर ट्रांसफर नहीं किए जाते। वो भी 15 साल वाली सरकार में। बोनस तिहार, सेक्स सीडी और राज्योत्सव में व्यस्त सरकार के पास अभी इस पर सोचने के लिए वक्त नहीं है।

एक और सिकरेट्री की बिदाई

इरीगेशन सिकरेट्री गणेश शंकर मिश्रा 31 अक्टूबर याने सोमवार को रिटायर हो जाएंगे। मिश्रा के रिटायर होने के बाद सिकरेट्री लेवल पर एक और आईएएस की कमी हो जाएगी। जाहिर है, छत्तीसगढ़ में सिकरेट्री लेवल पर अफसरों पर काफी टोटा है। अफसर या तो रिटायर होते जा रहे हैं या फिर सरकार के मापदंड पर अनफिट हैं। लिहाजा, स्पेशल सिकरेट्री लेवल के आईएएस को सिकरेट्री की कमान दी जा रही है। अब देखना है, गणेश शंकर के बाद इरीगेशन का चार्ज किसी सीनियर सिकरेट्री को दिया जाता है या फिर किसी नए को अजमाया जाएगा।

नया पीसीसीएफ

प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरके टम्टा 30 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे। याने सिर्फ महीने भर बाद। टम्टा के रिटायरमेंट की चर्चा के साथ ही नए पीसीसीएफ के लिए वन महकमे में जोर आजमाइश शुरू हो गई है। टम्टा के बाद दो आईएफएस के नाम प्रमुखता से चल रहे हैं। पहला आरके सिंह और दूसरा, मुदित कुमार। आरके सिंह फिलहाल पीसीसीएफ वाईल्डलाइफ हैं और मुदित कुमार पीसीसीएफ लघु वनोपज संघ।

अंत में दो सवाल आपसे

1. चीफ सिकरेट्री को छह महीने का एक्सटेंशन देने की खबर प्लांट करने के पीछे क्या उद्देश्य हो सकते हैं?
2. सीडी कांड में सीबीआई जांच के ऐलान होने के बाद क्या पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं?

Like this:

अप्रिय एपीसोड

22 अक्टूबर
संजय दीक्षित
रायपुर के एक बेहद छोटे से पोस्ट असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शोयब काजी पर कार्रवाई को लेकर सरकार से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक उलझ गई है। शोयब को सीएम के फंक्शन से गायब रहने पर प्रिंसिपल सिकरेट्री लेबर आरपी मंडल ने सस्पेंड किया था। इसके लिए उन्होंने नोटशीट भेजकर सीएम से बकायदा अनुमोदन लिया था। लेकिन, पहले तो लेबर मिनिस्टर भैयालाल राजवाड़े ने मंडल को न केवल नोटिस थमा दी बल्कि अफसर का निलंबन भी अवैध करार दिया। चूकि, कार्रवाई के लिए हरी झंडी सीएम ने दी थी, लिहाजा सरकार हरकत में आई और अफसर के सस्पेंशन के लिए मंत्रालय से आर्डर जारी किया गया। मंत्रालय का आदेश मिलते ही रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने डिप्टी कलेक्टर सीमा ठाकुर को असिस्टेंट लेबर कमिश्नर का चार्ज सौंप दिया। लेकिन, लेबर कमिश्नर अविनाश चंपावत को यह नागवार गुजरा। बताते हैं, लेबर एक्ट के अनुसार डिप्टी कलेक्टर को यह चार्ज नहीं दिया जा सकता। लिहाजा, लेबर कमिश्नर ने डिप्टी कमिश्नर की पोस्टिंग को खारिज कर दिया। सरकार के अफसरों में इस तरह टकराव से मैसेज अच्छा नहीं गया है। सड़क पर इस तरह टकराव को आखिर अराजकता ही तो कहा जाएगा।

वाह विधायकजी!

सरगुजा के एक विधायक को सत्ता के मद में थानेदार से फोन पर दुर्व्यवहार करना महंगा पड़ गया। बताते हैं, विधायक ने थानेदार को किसी मुजरिम को छोड़ने के लिए कहा था। थानेदार ने नहीं सुनी। इस पर नेताजी भड़क गए….फोन पर अ-शालीन शब्दों की बरसात कर डाली। विधायकजी को पता नहीं था कि उनका फोन टेप हो रहा है। थानेदार ने जिले और सरगुजा रेंज के सीनियर अफसरों को वह टेप सुनवा दिया। पुलिस अधिकारियों ने नेताजी को बुलवाकर जब टेप सुनवाया तो उनकी हालत पूछिए मत! उन्होंने सीनियर अफसरों के सामने हाथ ही नहीं जोड़ा बल्कि थानेदार से भी माफी मांगने में देर नहीं लगाई।

सकते में भूपेश खेमा

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ एवं गंभीर नेता मोतीलाल वोरा के तेवर से पूरी कांग्रेस पार्टी सकते में है। पार्टी प्रभारी पीएल पुनिया के ऐलान के बाद भूपेश बघेल की दोबारा ताजपोशी एकदम तय मानी जा रही थी। लेकिन, वोरा ने यह कहकर कि भूपेश अभी पीसीसी चीफ है…आगे कौन होगा, नहीं बता सकता….कांग्रेस में खलबली मचा दी है। वोरा गुट ने जिस तरह से अबकी दिवाली मनाने आए वोराजी के स्वागत में शक्ति प्रदर्शन किया, उससे भी भूपेश खेमा हैरान है। स्वागत ऐसा हुआ, वोरा को एयरपोर्ट से राजधानी के गीतानगर बंगले में पहुंचने में ढाई घंटे से अधिक समय लग गए।

तीन दिन टाईट

मंत्री से लेकर सूबे के कलेक्टर, एसपी के लिए 22 से लेकर 24 अक्टूबर तक बड़ा टाईट रहने वाला है। 22 को बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक है। इसमें बताते है, मंत्रियों से पूछा जाएगा कि पार्टी प्रमुख अमित शाह के निर्देशों का वे कितना पालन कर रहे हैं। वहीं, 23 को कलेक्टर और 24 को एसपी कांफ्रेंस है। दोनों दिन कांफें्रस में सीएम दिन भर रहेंगे। जाहिर है, अब सरकार रिव्यू के लिए कलेक्टर्स, एसपी को तलब कर रही है तो टेंशन तो रहेगा ही।

एसपी के लिए सेपरेट टाईम

पिछले 9 एवं 10 जनवरी को कलेक्टर्स, एसपी कांफ्रेंस में एसपी का अलग से रिव्यू नहीं हुआ था। अलबत्ता, 10 को दोनों को एक साथ बिठाया गया। इस बार 24 को फर्स्ट हाफ में कलेक्टर्स, एसपी की सीएम ज्वाइंट मीटिंग लेंगे। इसके बाद सेकेंड हाफ में सिर्फ एसपी का रिव्यू होगा। एसपी का इसलिए अलग से रखा गया है क्योंकि, कलेक्टर्स के साथ एक तो एसपीज को टाईम नहीं मिलता। और, फिर कलेक्टरों के सामने खुलकर वे अपनी बात नहीं रख पाते। सो, तय किया गया है कि एसपी को एक हाफ अलग से दिया जाए। हालांकि, अच्छा होता कि एसपी को फर्स्ट हाफ में रखा जाता। दो साल पहले भी एसपी को अलग से बिठाया गया था। लेकिन, दिन भर कलेक्टर्स कांफ्रेंस में सरकार इतनी थक गई थी कि एसपी के साथ मीटिंग भाषणों में सिमट गई थी।

सरकार पर प्रेशर

11 साल बाद राज्योत्सव में फिर से राष्ट्रपति आ रहे हैं। सात नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समापन समारोह के चीफ गेस्ट होंगे। इससे पहिले 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे कलाम आए थे। समापन समारोह में राष्ट्रपति दो दर्जन से ज्यादा राज्य सम्मान भी प्रदान करेंगे। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना है, इसलिए सरकार पर प्रेशर तेज हो गए हैं। पुरस्कारों के लिए चौतरफा फोन आ रहे हैं। लेकिन, सरकार के सामने दिक्कत यह है कि 17 सालों में सभी ठीक-ठाक लोगों को पुरस्कार मिल गए हैं। अब जो नाम आ रहे हैं, सरकार के सामने माथा सिकोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डेढ़ साल से किसी खास मकसद के लिए मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी रिजर्व रखने के बाद सरकार अब किस उलझन में फंस गई है?
2. किस आईएएस पर सरकार की भृकुटी तनी है….हो सकता है, जल्द ही उसका बुरा समय आ जाए?

मंत्री से तगादा

15 अक्टूबर
सूबे के एक मंत्री ने 10 पेटी में एक आफिसर का ट्रांसफर किया। लेकिन, तबादले का आर्डर निकलते ही अफसर पर गाज गिर गई। कार्रवाई उपर से हुई है, इसलिए मन को मसोसने के अलावा मंत्रीजी कुछ कर भी नहीं सकते। अफसर अब मंत्रीजी से तगादा कर रहा है, साब मैं तो निबट गया। आपके बेटे को जो दिया था, उसे लौटवा दीजिए। लेकिन, मंत्रीजी कम थोड़े ही हैं। साफ कह दिया….तुम्हारा काम तो मैं करा ही दिया था….तुम्हारी किस्मत ही खराब निकली तो मैं क्या कर सकता हूं।

5 साल में 6 कलेक्टर

कोंडागांव ने कलेक्टर बदलने के मामले में नया रिकार्ड कायम किया है…..शायद देश में भी यह पहला भी हो। वहां पांच साल में छह कलेक्टर बदले हैं। नवंबर 2012 में हेमंत पहाडे को कोंडागांव से हटाया गया था। उनके बाद विजय धुर्वे, धनंजय देवांगन, शिखा राजपूत, समीर विश्नोई और अब नीलकंठ टेकाम। याने हर 10 महीने में एक कलेक्टर बदल गए।

अभी और होंगे चेंज

सरकार ने 12 अक्टूबर को कोंडागांव कलेक्टर समीर विश्नोई को हटाकर राप्रसे से आईएएस बने नीलकंठ टेकाम को वहां की कमान सौंप दी। लोगों को भले ही यह अप्रत्याशित लगा हो मगर ये तो होना ही था। समीर ही नहीं, अगले दो-तीन महीने में इसी तरह एक-एक, दो-दो करके छह-से-सात जिलों के कलेक्टर बदलेंगे। 23 अक्टूबर को कलेक्टर कांफें्रस में जिन कलेक्टरों का पारफारमेंस पुअर होगा, उनके भी नम्बर लगेंगे। दरअसल, सूबे में प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या बेहद कम है। यूपी, पंजाब जैसे राज्यों में आधे से अधिक प्रमोटी आईएएस कलेक्टर एवं एसपी होते हैं। सियासी गणित में प्रमोटी ज्यादा मुफीद बैठते हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव के समय भी 11 जिलों में प्रमोटी आईएएस कलेक्टर थे। नीलकंठ टेकाम को मिलाकर अभी सात पहुंचे हैं। हालांकि, राज्य में आरआर आईएएस की संख्या बढ़ गई है, फिर भी चार-से-पांच और प्रमोटी को जिले में भेजा जाएगा। कांडागांव के बाद दंतेवाड़ा और बीजापुर में भी प्रमोटी पोस्ट किए जाएंगे। दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार को जांजगीर का कलेक्टर बनाए जाने की चर्चा है।

वक्त-वक्त की बात!

एक वो भी वक्त रहा, जब 2011 में 87 बैच के आईएएस सीके खेतान और आरपी मंडल टाईम से पांच महीने पहिले प्रमोशन पाकर प्रिंसिपल सिकरेट्री बन गए थे। उनके साथ बीबीआर सुब्रमण्यिम को दिल्ली में ही प्रोफार्मा प्रमोशन मिल गया था। और आज वक्त ऐसा है कि जनवरी से तीनों का प्रमोशन ड्यू है…..एडिशनल चीफ सिकरेट्री बनने के लिए वे टकटकी लगाए बैठे हैं। जबकि, दो पोस्ट भी खाली हैं। एक एनके असवाल के रिटायर होने से और दूसरा बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी जाने के बाद। तीसरा पोस्ट भी नवंबर में एमके राउत के सेवानिवृत होने के बाद खाली हो जाएगा। जीएडी चाहे तो हफ्ते भर का काम है। सीएम के बोलने के बाद आखिर सुनील कुजूर का डीपीसी करके पांचवें दिन एसीएस का आर्डर निकल गया था। 87 बैच में कहीं गेहूं के साथ घुन पिसने का मामला तो आड़े नहीं आ रहा है। क्योंकि, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह इसी बैच के एक अफसर पर बेहद उखड़े थे, जब विभागीय मंत्री होने के बाद भी वे उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं पहुंचे। लेकिन, बाकी दो का क्या कुसूर। दोनों जब एक-दूसरे से मिलते हैं, तो पूछते हैं…मेरा क्या होगा कालिया।

जीएस की पारी अब करीब

सिंचाई विभाग के सचिव गणेश शंकर मिश्रा की पारी इस महीने 31 तारीख को समाप्त हो जाएगी। राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में आने वाले मिश्रा पोस्टिंग के मामले में इतने किस्मती रहे हैं कि उनके मित्र भी उनसे ईर्ष्या रखते हैं। वे लंबे समय तक एक्साइज में रहे। जनसंपर्क के डायरेक्टर के साथ उसके सचिव भी रहे। वीआईपी डिस्ट्रिक्ट राजनांदगांव का कलेक्टर रहने का भी उन्हें मौका मिला। मिश्रा को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए रेरा का मेम्बर बनाए जाने की अटकलें लगाई जा रही है।

भूपेश का फेवीकोल

भूपेश बघेल को दूसरी बार पीसीसी चीफ बनने से रोकने के लिए पार्टी के उनके मित्रों ने क्या नहीं किया। आलाकमान तक तगड़ा मैसेज पहुंचाने के लिए पीएल पुनिया के पहिले दौरे में त्रिफला के नए एडिशन को लांच किया गया….रामदयाल उईके को बगावती सूर के साथ बैटिंग करने भेजा गया। मगर इनमें से कोई भी नुख्सा काम नहीं आया। अलबत्ता, पुनिया को भी छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेताओं के शह-मात के खेल को समझने में देर नहीं लगा। तभी तो लफड़ा खतम करने के लिए पुनिया ने आलाकमान से पहले ही भूपेश को अध्यक्ष बनाने का स्पष्ट संकेत दे डाला। अब, कांग्रेस के लोग फेवीकोल की उस कंपनी का पता लगा रहे हैं कि आखिर राहुलजी से ये आदमी इतना बुरी तरह कैसे चिपक गया है….त्रिफला से लेकर आदिवासी विधायक के तेवर भी काम नहीं आए।

कार्यकारी अध्यक्ष नहीं

भूपेश बघेल को सेकेंड इनिंग देने के साथ ही कांग्रेस छत्तीसगढ़ में कार्यकारी अध्यक्ष भी नहीं बनाएगी। प्रभारी महासचिव पीएल पुनिया के पहले दौरे से पहिले रामदयाल उईके ने बगावती तेवर दिखाए थे, तब पुनिया ने उन्हें तलब किया था। रामदयाल ने उनसे दो टूक कहा था कि छत्तीसगढ़ में अगर कांग्रेस की सरकार बनानी है तो अनुसूचित जाति और जनजाति से एक-एक कार्यकारी अध्यक्ष बनाना चाहिए। लेकिन, कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर पार्टी का अनुभव ठीक नहीं रहा है। छत्तीसगढ़ में भी चरणदास महंत और सत्यनारायण शर्मा को 2007 में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। तब धनेंद्र साहू पीसीसी चीफ थे। तब कांग्रेस तीन खेमों में बंट गई थी। पार्टी अब फिर से इस तरह की स्थिति नहीं लाना चाहती। बताते हैं, राहुल गांधी ने भी कार्यकारी अध्यक्ष के कंसेप्ट को खारिज कर दिया है।

गुड न्यूज

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का रायगढ़ मॉडल अब प्रदेश के सभी जिलों में लागू किए जाएंगे। रायगढ़ पहिला जिला है, जहां बिटिया के जन्म लेने पर माता-पिता को तोहफा दिया जाता है….बुके भेंट कर अभिनंदन भी। इस जिले में न केवल बालिकाओं का अनुपात बढ़ा है बल्कि डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के प्रयासों से स्कूलों में बालिकाओं की उपस्थिति भी बढ़ी है। 12 अक्टूबर को चीफ सिकरेट्री ने वीडियोकांफ्रेंसिंग में रायगढ़ कलेक्टर शम्मी आबिदी को बेटी बचाओं में आउटस्टैंडिंग काम के लिए एप्रीसियेट किया….ग्रेट शम्मी!

अंत में दो सवाल आपसे

1. चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड ने रेरा चेयरमैन के लिए अप्लाई कर दिया है या करने वाले हैं?
2. जीएस मिश्रा के बाद ईरीगेशन सिकरेट्री किसी यूथ आईएएस को बनाया जाएगा या किसी सीनियर अफसरों को टिकाया जाएगा?

गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

लोभी आईएएस!

संजय दीक्षित
 8 अक्टूबर

राबर्ट हरंगडौला को उपर वाले ने क्या नहीं दिया। आईएएस में सलेक्ट हुए। करोड़ में एकाध तो चुने जाते हैं....ढाई करोड़ वाले छत्तीसगढ़ में अबकी एक का ही नम्बर लग सका। बात राबर्ट की....उसने बिलासपुर में कमिश्नर रहते करोड़ों की मिल्कियत बनाई। यहां से रिटायर होने के बाद भी किस्मत ने साथ नहीं छोड़ा। मिजोरम में चीफ इंफारमेशन कमिश्नर की कुर्सी पा गए। लेकिन, धन का अनियंत्रित लोभ ने उन्हें कहीं का नहीं रखा। ड्रग तस्करी में जेल चले गए। अब नाम बदनाम हो रहा है छत्तीसगढ़ का। देश के सारे मीडिया में छप रहा है....छत्तीसगढ़ कैडर का रिटायर आईएएस ड्रग तस्करी में जेल गया।


नस्ल खराब


राज्य बंटवारे के समय दिग्विजय सिंह ने छांट-छांट कर राबर्ट नस्ल के अधिकांश आफिसर्स छत्तीसगढ़ को टिका दिया। इन अफसरों ने 2005-06 तक छत्तीसगढ़ को सिर्फ-और-सिर्फ लूटने का काम किया। असल में, सब भोपाल से अनुभव लेकर आए थे.....जानते थे, राजधानी के आसपास इंवेस्टमेंट का क्या मतलब होता है। रायपुर के चारों दिशाओं में आप पता कर लीजिए, आईएएस, आईपीएस के एकड़ों में जमीन मिलेंगी। इन अफसरों की देखादेखी डेपुटेशन पर आए एक आईएएस ने नया रायपुर के पास इकठ्ठे 70 एकड़ लैंड खरीद लिया। अब, उन्हें रात में नींद नहीं आ रही है कि इतने पैसों को आखिर वह क्या करेगा। बहरहाल, भ्रष्टाचार का ठीकरा नए आईएएस अफसरों पर नहीं फोड़ना चाहिए। दोष राबर्टों का है। राबर्ट जैसे आईएएस ही छत्तीसगढ़ का नस्ल खराब कर डाले।


सीनियर्स जिम्मेदार


सीएम के कार्यक्रमों के लिए अगर सीएम सचिवालय को मानिटरिंग करनी पड़ रही है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं , कलेक्टरों की क्या स्थिति है। हमारा मानना है, इसके लिए सीधे तौर पर सीनियर आईएएस....खासकर कलेक्टर जिम्मेदार हैं। यंग आईएएस की ट्रेनिंग ढंग से नहीं हो रही है। पहले के जमाने में कलेक्टरों के सामने प्रोबेशनरों की कुर्सी पर बैठने की हिम्मत नहीं होती थी। 89-90 का एक वाकया आपको बताते हैं। रायपुर के कलेक्टर आफिस में एक प्रोबेशनर एसडीएम की जीप में आ गया। कलेक्टर भड़क गए...कल के लड़के....प्रोबेशन में तुम जीप लेकर घूम रहे हो। और अब....कलेक्टर नए आईएएस के हमप्याला बन जा रहे हैं....। कमिश्नर और सीईओ कलेक्टरों के मुंंहलगा हो जा रहे हैं....यार टाईप। ऐसे में, भला-बुरा पर उन्हें टोके कौन।

किस्मत के धनी हैं जोगी


रेणु जोगी का एक बड़ा दिलचस्प बयान आया है....उन्होंने दो टूक कहा है कि वे कांग्रेस में बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस बनाते समय उनसे पूछा नहीं गया....उन्हें तो अखबारों में खबर देखकर पता चला। अगर ये सही है तो जोगीजी ने बिना रेणु भाभी को बताए, अपने राजनीतिक कैरियर का सबसे बड़ा दांव लगा दिया। रियली जोगीजी किस्मत के धनी हैं। रेणु भाभी की जगह कोई दूसरी होती तो आप समझ सकते हैं, क्या होता।

बजट बड़ा, दिल छोटा


आईजी एचके राठौर 30 सितंबर को रिटायर हुए। उस दिन उनकी बिदाई की औपचारिकताएं भी नहीं निभाई गई। अफसरां ने तय किया, 3 अक्टूबर को सीनियर सिटीजन हेल्पलाईन के कार्यक्रम में उन्हें बिदाई दे दी जाएगी। एक ही नाश्ते-पानी में दो काम निबट जाएगा। बाद में, किसी ने सलाह दी...मैसेज अच्छा नहीं जाएगा। तो फिर 4 अक्टूबर को दोपहर में बिदाई कार्यक्रम रखा गया। वहीं, पीएचक्यू के सर्वहारा वर्ग के कैंटीन से खाने का डिब्बा आया और बिदाई की रस्म अदा कर दी गई। जबकि, पहले यह परिपाटी रही कि किसी आईपीएस के रिटायरमेंट पर पुलिस आफिसर्स मेस में डिनर होता था। रिटायर आफिसर की पत्नी, बच्चों को भी बुलाया जाता था। लेकिन, एसएस मनी 45 लाख से बढ़कर नौ करोड़ पहुंच गया, पर दिल छोटा होता गया। एसएस मनी की बात हम इसलिए कर रहे हैं कि पुलिस महकमे में अलग से कोई बजट होता नहीं। पुलिस वालों को जेब से पैसा निकालने की आदत भी नहीं होती। आईपीएस को तो और नहीं। ट्रेन से लेकर प्लेन तक की टिकिट थानेदार कराते हैं। महकमे में चाय-पानी से लेकर जितने भी कार्यक्रम होते हैं, वो सिक्रेट सर्विस मनी से ही होते हैं। इस पैसे का कोई हिसाब नहीं होता। नो आडिट। एक पुराने डीजीपी ने इसका खूब सदुपयोग किया। किताब लेखन के साथ ही इसी पैसे से नेशनल, इंटरनेशनल वर्कशॉप करा डाले। लेकिन, 30-32 बरस सेवा करने वाले अफसर की बिदाई नहीं।

मंत्रियों को किया आगे


चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, सरकार आक्रमक होती जा रही है। पहले बड़े-से-बड़े विपक्षी हमलों पर मंत्री आगे नहीं आते थे लेकिन, अब आलम यह है कि नेता प्रतिपक्ष टीए सिंहदेव अंबिकापुर बोनस उत्सव में नाराज क्या हुआ, उन पर पलटवार करने के लिए आदिवासी सांसद और मंत्री को भिड़ा दिया गया। दोनों ने बयान जारी कर टीएस पर तंज कसा, राजा नाराज, जनता प्रसन्न।

जातिवाद पर व्हाट्सएप शो


छत्तीसगढ़ के आईएएस के व्हाट्सएप ग्रुप में 5 अक्टूबर को जातिवाद पर जमकर टॉक शो चला। हुआ यह कि एक अफसर ने दिल्ली के एक आईएएस के जातिवाद पर कमेंट को यह कहते हुए लोकल ग्रुप में शेयर कर दिया कि आईएएस अफसरों को अपना सरनेम हटा लेना चाहिए...इससे जातिवाद की बू आती है। इसके बाद तो कई आईएएस इसमें टूट पड़े। एक सीनियर अफसर ने लिखा...भाई! मैंने तो पहिले से ही हटा लिया है...वरना लोग मुझे सरकार का आदमी समझते थे। देर शाम जातिवाद पर ज्ञान झाड़-झाड़कर जब अफसर थक गए तो जाकर पोस्ट बंद हुआ।

सौरभ चले विलायत


दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार का देश के चुनिंदा चार आईएएस में सलेक्शन हुआ है, जो लोग लंदन के स्कूल ऑफ इकॉनोमिस में ई-गर्वनेंस का कोर्स करेंगे। इनमें तीन कलेक्टर हैं और एक राजस्थान के सिकरेट्री। कलेक्टरों में सौरभ के अलावा हैदराबाद और नालदां के कलेक्टर शामिल हैं। स्कूल ऑफ इकॉनोमिस पीएमओ अवार्ड वाले चार अफसरों को हर साल चुनता है। सौरभ आज दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वहां से कल दोपहर लंदन के लिए उड़ान भरेंगे।


काम कम, आफिस बड़ा


वन मुख्यालय 14 अक्टूबर से नया रायपुर में शिफ्थ हो जाएगा। न्यू बिल्डिंग में पूरे 300 कमरे हैं। इन तीन सौ कमरे का क्या करेंगे, फॉरेस्ट आफिसर भी नहीं समझ पा रहे हैं। क्योंकि, जंगल कटते जा रहे हैं, काम सिमटते जा रहे हैं....अफसरों की संख्या भी साल-दर-साल घटती जा रही है। वैसे, जरूरत 100 कमरे की भी नहीं थी। लेकिन, बड़ा नहीं बनता तो नगद नारायण ज्यादा कैसे मिलता। आजकल सरकारी योजनाएं बनाने के समय ही कैलकुलेट कर लिया जाता है, इसमें हमारा कितना बनेगा। ऐसा है.....तो फिर गलत नहीं है।         

अंत में दो सवाल आपसे


1. रुलिंग पार्टी से जुड़े किस राजा का एक पावरफुल लेडी अफसर के साथ रिश्तों को लेकर कानाफूसी हो रही है?
2. रेरा का मेम्बर बनने के लिए किस आईएएस ने अनुष्ठान कराया है?


शनिवार, 7 अक्तूबर 2017

छत्तीसगढ़ का अपमान!

संजय दीक्षित
 2 अक्टूबर

रुलिंग पार्टी की विचार धारा से जुड़े एक आईएएस ने तबाही मचा दी है....उन्हें छत्तीसगढ़ की मान-मर्यादा का भी खयाल नहीं....अपना छत्तीसगढ़ इतना तो गरीब नहीं है.....आईएएस दो-दो हजार की वसूली करने लगे। दरअसल, सरकार के पास एक जिला पंचायत सीईओ का कांप्लेन आया है। आडियो भी साथ में है। सीईओ का पीए फोन पर तगादा कर रहा है....सब जगह से पैसा आ गया है....सिर्फ तुम्हारे यहां का ही बचा है। मामला है, ग्राम पंचायत सचिवों की सेवा के रिनीवल का। जिले में करीब पांच सौ ग्राम पंचायत हैं। रिनीवल के लिए दो-दो हजार रेट तय किया गया है। दो-दो हजार का मतलब भी दस लाख होता है। पता चला है, सरकार की ओर से सीईओ को मैसेज करा दिया गया है। लेकिन, महिला कलेक्टर को सीईओ कितना सुनेंगे, इसमें संशय है।   
पोस्टिंग का रिकार्ड
एन बैजेंद्र कुमार के बाद राजेश टोप्पो दूसरे आईएएस होंगे, जिन्होंने जनसंपर्क में दो साल पूरा किया है। 24 सितंबर 2015 को राजेश डायरेक्टर पब्लिक रिलेशंस बने थे। उनसे पहिले बैजेंद्र कुमार करीब पांच साल कमिश्नर जनसंपर्क रहे। इन दोनों के अलावा कोई भी आईएएस सवा-डेढ़ साल से आगे नहीं बढ़ पाया। सीके खेतान जरूर दो साल के आसपास रहे मगर दो टेन्योर में। जनसंपर्क में सबसे कम समय तक रहने वालों में जीएस मिश्रा, बीएल तिवारी और अशोक अग्रवाल हैं। जनसंपर्क की पोस्टिंग बेहद रुतबेदार मानी जाती है। मध्यप्रदेश के समय हमेशा सीएम के क्लोज और हाई प्रोफाइल आईएएस को डीपीआर बनाया जाता था। अविभाजित मध्यप्रदेश में सुनील कुमार सबसे यंगेस्ट डीपीआर रहे। वे आईएएस में आने के आठ साल में डायरेक्टर पीआर बन गए थे। यह रिकार्ड अभी भी कायम है। पुराने लोगों को याद होगा, 87 में रायपुर में कलेक्टर रहने के दौरान सुनिल कुमार को तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने बुलाकर डीपीआर बनाया था। बहरहाल, राजेश टोप्पो जहां भी रहे हैं, पोस्टिंग का रिकार्ड बनाए हैं। बलौदा बाजार कलेक्टर रहे तो पौने चार साल। अब तो पावर जोन में पहुंच गए हैं। देखना दिलचस्प होगा, अगला कौन सा रिकार्ड बनाते हैं।     

उड़ीया आईएएस और राहू


छत्तीसगढ़ में उड़ीया आईएएस की कभी तूती बोलती थी। एसके मिश्रा अजीत जोगी के बाद रमन सरकार में भी सीएस बने रहे। लेकिन, उनके बाद राहू-केतु मंगल में ऐसे बैठे हैं कि जब भी बड़े पदों पर पोस्टिंग का मौका आता है, उसे बाधित कर देते हैं। बीकेएस रे को सीएस बनने के समय भी कुछ ऐसा ही हुआ और गिरधारी नायक के डीजीपी बनने के समय भी। अब रेरा के चेयरमैन की पोस्टिंग में भी एक उड़ीया अफसर को घेरने के लिए मारक ग्रह-नक्षत्र एक्टिव हो गए हैं। हालांकि, रेरा के दावेदार तो कई हैं, लेकिन उ़ड़ीया अफसर का पलड़ा ज्यादा भारी है। ऐसे में, एक नेशनल जांच एजेंसी की नोटिस को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल इस पर भी उठ रहे हैं कि जांच एजेंसी के अफसर 30 और 31 अगस्त को छुट्टी होने के बाद भी रायपुर आए....होटल में बैठकर नोटिस तैयार की और अफसर को देकर दिल्ली के लिए उड़ गए। अब पूरी ब्यूरोक्रेसी की नजर इस पर है कि इस आईएएस का भी वही हश्र होगा, जो बीकेएस रे और गिरधारी नायक का हुआ था। या फिर आईपीएस पवनदेव टाईप.....जिन्हें मीडिया में लगातार खबरों के प्लांट होने के बाद भी सरकार ने एडीजी प्रमोट कर दिया।   

सब फलाहारी


बुधवार को डीजीपी एएन उपध्याय ने सूबे के सात पुलिस अधीक्षकों को मुख्यालय में मीटिंग रखी थी। इश्यू था 24 अक्टूबर को एसपी कांफ्रेंस की तैयारी। इन सातों को सीएम के सामने प्रेजेंटेशन देना है। मीटिंग में एसपी के साथ मुख्यालय के सभी अफसर भी शामिल हुए। जब लांच का वक्त आया तो पता चला डीजीपी साब पूरे नौ दिन का उपवास रखे हैं। उनके साथ चुनिंदा अफसरों के लिए फलाहारी की व्यवस्था थी। अफसरों को लगा.....बॉस उपवास पर हैं और हमलोग थ्री स्टार होटल का लजीज भोजन उड़ाए, तो यह जमेगा नहीं। ठीक है, साब सीधे-साधे हैं....लेकिन, ट्रांसफर के समय प्रपोजल तो सरकार डीजी से ही मांगती है। इसलिए, 90 फीसदी आईपीएस प्लेट लेकर फलाहारी की लाईन में खड़े हो गए। इससे, जो सचमुच उपवास पर थे, उन्हें कम पड़ गया, और जो बढ़ियां नाश्ता सोंट कर आए थे, वे पौष्टिक फलाहारी भी खाए और डीजीपी की नजर में धरम-करम वाला बनकर अपना नंबर भी बढ़वा लिए।

बर्दी उतरने का खौफ


पुलिस मुख्यालय के एक एडिशनल डीजी इन दिनों राइट टाईम आफिस आने लगे हैं। ठीक साढ़े दस बजे उनकी
गाड़ी पीएचक्यू में लग जाती है। पहले वे हफ्ते में दो-एक दिन आते थे। आते भी थे तो दोपहर बाद। लेकिन, रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट पर भारत सरकार ने जब से डीजीपी को उनकी निगरानी करने कहा है, आईपीएस ने अपना टाईम टेबल बदल लिया है।

ज्वाइंट सिकरेट्री की पोस्टिंग


निर्वाचन आयोग से ज्वाइंट सीईओ डीडी सिंह रिलीव हो गए हैं। उनकी जगह पर किसी आईएएस को पोस्ट किया जाएगा। नीचे लेवल पर आईएएस की कमी नहीं है, लिहाजा, यह पक्का है, कोई डायरेक्ट आईएएस ही होगा। हो सकता है, 2008 या 09 बैच के किसी आईएएस से सरकार खुश न हो और उन्हें इस पोस्ट पर बिठाकर जून 2019 तक शंट कर दें।

अच्छे दिन


सीनियर आईएफएस राकेश चतुर्वेदी के अब अच्छे दिन आने वाले हैं। आरा मिल प्रकरण उनके लिए ऐसा गले का फांस बना कि कहां वो आज एडिशनल पीसीसीएफ होते लेकिन, सीएफ में ही अटके हुए हैं। पता चला है, उनका प्रकरण अब खातमे की ओर हैं। कभी भी उन्हें गुड न्यूज मिल सकता है। आरा मिल प्रकरण 2003 चुनाव के समय का है। चुनाव के लिए वन विभाग से संबंधित राजनेताआें को खरचा चाहिए था। इस खरचे का जुटाने में निबट गए कई आईएफएस।         

अंत में दो सवाल आपसे


1. डीजीपी एएन उपध्याय नवरात्रि में शक्ति की उपासना के लिए नौ दिन उपवास रहे...डीजीपी के दावेदारों को यह अच्छा क्यों नहीं लगा?
2. दिग्विजय सिंह के छत्तीसगढ़ दौरे में अबकी कांग्रेसियों की इतनी भीड़ क्यों जुटी?



शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

ब्यूरोक्रेसी में हलचल

17 सितंबर

एनएमडीसी के चेयरमैन बनने के बाद आईएएस एसोसियेशन ने जिस अंदाज में बैजेंद्र कुमार को ग्रेंड फेयरवेल दिया, उससे ऐसा मैसेज गया.... बैजेंद्र अब हमेशा के लिए जा रहे हैं.....आखिर, डेपुटेशन पर तो हर साल एक-दो अफसर जाते ही हैं....बिदाई कहां होती है। वैसे, ब्यूरोक्रेसी में चर्चा भी शुरू हो गई थी....बैजेंद्र अब शायद ही लौटे। लेकिन, सीएम ने नपे-तुले एक लाईन में नौकरशाही में हलचल मचा दी। सीएम ने बिदाई भाषण में कहा, बैजेंद्र जैसे अफसर का हम फिर स्वागत करना चाहेंगे। इससे पहिले बैजेंद्र बोले, छत्तीसगढ़ लौटकर उन्हें प्रसन्नता होगी। बैजेंद्र का जुलाई 2020 में रिटायरमेंट है। याने लगभग तीन साल। टाईम कम है, इसलिए अटकलें शुरू हो गई थी। लेकिन, सीएम ने साफ कर दिया है, बैजेंद्र के लिए चांस खतम नहीं हुआ है। अब बैजेंद्र लौटते हैं या नहीं.....ये तो वक्त बताएगा। मगर चीफ सिकरेट्री के दावेदारों को डाक्टर साब की ये बात अच्छी नहीं लगी होगी....ये तो जाहिर है।

जीएसटी और अमर 

जीएसटी से आम व्यापारी हलाकान हैं.....सरकार को कोस रहे हैं। लेकिन, यही जीएसटी एक मंत्री के प्रोफाइल को कहां से कहां पहुंचा दिया। बात कर रहे हैं, इंडस्ट्री मिनिस्टर अमर अग्रवाल की। भारत सरकार ने उन्हें जीएसटी की समस्याओं का समाधान करने वाली सुप्रीम कमेटी का सदस्य बनाया है, जिसमें देश से सिर्फ पांच लोग हैं। यूपी, मध्यप्रदेश जैसे सूबों से एक भी नहीं। यही नहीं, केंद्र में दूसरे नम्बर के कद्दावर मंत्री अरुण जेटली के क्लोज होने का मौका मिला, सो अलग। वो भी ऐसे वक्त में, जब रमन सिंह के मंत्री एक के बाद एक विवादों में घिरते जा रहे हैं, अमर का बढ़ता कद....खबर तो बनती ही है।

फुटबॉल की तरह

मंत्रालय में आईएफएस अफसर आशीष भट्ट की हालत फुटबॉल की तरह हो गई है। तब से और, जब सरकार ने जूनियर आईएएस को विभाग प्रमुख बनाना शुरू किया है। भट्ट 1984 बैच के आईएफएस हैं। इस साल के शुरू में वे ट्राईबल सिकरेट्री थे। 2003 बैच की आईएएस रीना बाबा कंगाले जब ट्राईबल में आई तो सरकार को उन्हें एनर्जी में शिफ्थ करना पड़ा। वहां सीनियर आईएएस बैजेंद्र कुमार थे, इसलिए चल गए। बैजेंद्र के जाने 2003 बैच के आईएएस सिद्धार्थ परदेशी एनर्जी सिकरेट्री बनें तो भट्ट को अब हायर एजुकेशन में भेजा गया है। पता नहीं, नवंबर में होने वाले फेरबदल में अब उन्हें कौन से विभाग टिकाया जाएगा।

एसपी के लिए सिरदर्द

छत्तीसगढ़ में एक तो पीएससी से थोक में डीएसपी अपाइंट होते जा रहे हैं। उपर से तुष्टिकरण के लिए सरकार 72 और स्पेशल डीएसपी नियुक्त करने जा रही है। डीएसपी की बढ़ती संख्या एसपी के लिए पहले से ही सिरदर्द बन गई है। आलम यह है कि जिन छोटे जिलों में मुश्किल से दो-तीन डीएसपी होते थे, अब पांच-पांच, छह-छह हो गए हैं। न उन्हें बिठाने की जगह है और न ही गाड़ी की व्यवस्था। अब और 72 को झेलना पड़ेगा।

मैडम ये क्या...?

राज्य महिला आयोग की चेयरमैन हर्षिता पाण्डेय का पिछले हफ्ते बर्थडे था। जलसा भी अच्छा हुआ....जाहिर है, अगले साल चुनाव है।  लेकिन, इंटरेस्टिंग यह रहा कि हर्षिता को जो भी बुके देता, बुदबुदाते हुए पूछता मैम ये क्या....इतना वजन कैसे कम कर लिया.....। लोगों के सवालों से लगा जैसे हर्षिता वजन कम करने की पार्टी दे रही हैं। दरअसल, उन्होंने दो महीने में 16 किलो वजन कम किया है। ऐसे में, लोगों की उत्सुकता स्वाभाविक है....वजन को लेकर कौर कंसस नहीं है।

साय की हैसियत

नंदकुमार साय का दर्जा भले ही केंद्रीय मंत्री का है। मगर बिलासपुर के छत्तीसगढ़ भवन के अटेंडर ने उनके कद को ऐसा नापा कि पूछिए मत! साय कल पहुंचे छत्तीसगढ़ भवन तो उन्हें दो नम्बर का कमरा दिया गया। साय ने पूछा, एक नम्बर क्यों नहीं? तो जवाब मिला, वो मंत्रियों के लिए है। सायजी के पीए ने बताया, साब केंद्रीय मंत्री लेवल के हैं। अटेंडर बोल, हमलोग लेवल वाले को मंत्री नहीं मानते। प्रोटाकॉल वाले साब ने कहा है, सिर्फ मंत्रियों के लिए खुलेगा एक नम्बर कमरा।  

रामदयाल के पीछे

आदिवासी सीएम पर कांग्रेस के ट्राईबल लीडर्स के एक होते सूर पीसीसी नेताओं के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। सबसे पहिले पाली-तानाखार के विधायक रामदयाल उईके ने मोर्चा संभाला। मनोज मंडावी और कवासी लकमा ने हां में हां मिला दिया। चार बार के विधायक उईके इतने अग्रेसिव हो गए हैं कि प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया की बंद कमरे में समझाइस पर भी नहीं रुके। दो दिन बाद फिर आदिवासी सीएम पर उनकी मुखरता सामने आ गई। पीसीसी नेताओं को ये तो मालूम है कि उईके बेहद महत्वकांक्षी हैं पर उनमें इतना कांफिडेंस कहां से आ गया....इसको लेकर हैरान हैं। पार्टी के लोग इस पता करने में जुट गए हैं....उईको को चाबी कहां से ऐंठी जा रही है।          

अत में दो सवाल आपसे

1. आदिवासी सीएम की मांग पर कांग्रेस विधायक रामदयाल उईके को सबसे पहिले बीजेपी के किस सीनियर ट्राईबल लीडर ने फोन कर बधाई दी?
2. मंत्रालय में गृह मंत्री की रिव्यू मीटिंग में अफसरों ने ऐसा क्या बताया कि मंत्रीजी बगले झांकने लगे?

 

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

त्रिफला का नया ब्रांड

10 सितंबर

त्रिफला का नया ब्रांड


पीएल पुनिया के छत्तीसगढ़ दौरे में सबसे हिट रहा त्रिफला का नया ब्रांड। नए में चरणदास महंत, रविंद्र चौबे और मोहम्मद अकबर शामिल हैं। तीनों ने कांग्रेस भवन में नए त्रिफला को लांच करते हुए बकायदा फोटो भी खिंचवाई। नया वाला त्रिफला कई मायने में पुराने से जुदा है। सबसे पहले 2012 में त्रिफला सामने आया था। उसमें प्योर संगठन के लोग थे.....तत्कालीन पीसीसी चीफ और नेता प्रतिपक्ष। नए में दोनों गायब हैं। लिहाजा, भूपेश बघेल को सर्तक हो जाना चाहिए.....त्रिफला उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, संगठन खेमा कम थोड़े ही हैं। त्रिफला का असर कम करने के लिए अगले दिन पुनिया से मिलाने कवर्धा से योगेश्वर राज सिंह को बुलवा लिया। योगेश्वर और अकबर के रिश्ते कैसे हैं, बताने की जरूरत नहीं। अब अकबर को तय करना है, त्रिफला का हिस्सा रहे या फिर अगले चुनाव के लिए टिकिट सुनिश्चित करें।

कांग्रेस का चौथा विकेट


कांग्रेस विधायक रामदयाल उईके के आदिवासी सीएम पर बागी बोल ने पार्टी को उलझन में डाल दिया है। पहली बार सीएम पद को लेकर कोई आदिवासी विधायक ने तीखे तेवर दिखाए हैं। कांग्र्रेस की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है कि जोगी कांग्रेस बनने के बाद उसके तीन विधायक पहले ही छिटक चुके हैं। अमित जोगी के अलावा सियाराम कौशिक और आरके राय। अब उईके जिस तरह की भाषा बोल रहें हैं, उससे पार्टी के नेताओं को खटका हो रहा है....उईके कहीं पुराने गुरू की शरण में तो नहीं जा रहे हैं। यही वजह है, पीएल पुनिया ने उईके को तलब कर बंद कमरे में उनसे चर्चा की।  

बिना प्रभार के मंत्री


भैयालाल राजवाड़े, महेश गागड़ा और दयालदास बघेल को मंत्री बने करीब दो साल होने जा रहे हैं। लेकिन, अब तक उन्हें किसी जिले का प्रभार नहीं मिला है। जबकि, कुछ मंत्रियों के पास दो-दो, तीन-तीन जिले का चार्ज है। पार्टी सुप्रीमो अमित शाह ने छत्तीसगढ़ दौरे में जब प्रभारी मंत्रियों को रात बिताने का फरमान जारी किया था तो भैयालाल राजवाड़े ने सीएम के सामने दुखड़ा रोया था....भाई साब! हम तीनों के पास जिला नहीं है। तब सीएम ने कहा था, बहुत जल्द उन्हें जिला मिल जाएगा। लेकिन, तीनों मंत्रियों का इंतजार खतम नहीं हो रहा।


कमजोर हुई आईएएस लॉबी?


बैजेंद्र कुमार के रिलीव होने के बाद ब्यूरोक्रेसी में माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की आईएएस लॉबी कमजोर होगी। एसीएस बनने के बाद बैजेंद्र ने 2014 में आईएएस एसोसियेशन की कमान संभाली थी। इसके बाद एसोसियेशन को उन्होंने चार्ज कर दिया था। हालांकि, साल के शुरूआत में उन्होंने एसोसियेशन की कमान छोड़ दी थी। अजय सिंह को नया अध्यक्ष बनाया गया। बावजूद इसके, एसोसियेशन बैजेंद्र पर निर्भर थी। जीएस मिश्रा-भूपेश बघेल एपीसोड में एसोसियेशन को जब सीएम से मुलाकात का टाईम नहीं मिल रहा था, तब भी बैजेंद्र कुमार का दरवाजा खटखटाया था अफसरों ने। सुनील कुजूर को एसीएस बनाने के लिए हल्ला बैजेंद्र ने ही किया था।
 

यूथ टीम

राज्य सचिवालय की जिम्मेदारी अब धीरे-धीरे यूथ टीम के हाथ में आती जा रही है। जिन विभागों को कभी दिग्गज अफसर संभालते थे, उन विभागों को अब स्पेशल सिकरेट्री देख रहे हैं। ताजा फेरबदल में 2003 बैच के आईएएस सिद्धार्थ कोमल परदेशी को पावर दिया गया है। इस विभाग को विवेक ढांड से लेकर अजय सिंह, अमन सिंह, बैजेंद्र कुमार जैसे अफसर संभाल चुके हैं। परदेशी अब स्पेशल सिकरेट्री के रूप में उर्जा विभाग के प्रमुख होंगे। वहीं, 2002 बैच के आईएएस डा0 कमलप्रीत को सरकार ने इंडस्ट्री का जिम्मा दिया है। कमलप्रीत भी अभी सिकरेट्री नहीं बनें हैं। इससे पहिले रीना बाबा कंगाले ट्राईबल, मुकेश बंसल एवियेशन, राजेश सुकुमार टोप्पो जनसंपर्क और आर संगीता जीएडी में आईएएस विंग संभाल रही हैं। ये सभी स्पेशल सिकरेट्री लेवल के अफसर हैं। जाहिर है, इससे सीनियर आफिसरों को पीड़ा तो हो रही होगी।   
फ्यूचर का सिनेरिया
बैजेंद्र कुमार के जाने के बाद जरूरी फेरबदल कर दिए गए। लेकिन, सत्ता के गलियारों में जिस तरह की खबरें निकल कर आ रही हैं, नवंबर में बड़े लेवल पर एक चेंजेस और होंगे। 30 नवंबर को एसीएस एमके राउत रिटायर होंगे। राउत का ग्रामीण और पंचायत विभाग आरपी मंडल को सौंपा जा सकता है। मंडल सरकार के फर्स्ट इनिंग में भी इस विभाग को संभाल चुके हैं। तब भी अजय चंद्राकर उनके मंत्री थे। और, अब भी होंगे। जाहिर है, समन्वय का कोई लफड़ा नहीं होगा। दोनों एक-दूसरे को बखूबी जानते हैं। मंडल के पंचायत में जाने के बाद उनका फारेस्ट और लेबर चित्तरंजन खेतान को मिल सकता है। इस बीच सरकार के साथ खेतान के तालमेल का सेतु मजबूत़ हो जाए, तो ऐसा भी हो सकता है कि नवंबर में उन्हें कोई और अहम विभाग मिल जाए।  
समय की मार
नॉन घोटाले में आईएफएस कौशलेंद्र सिंह बाल-बाल बच गए थे। मगर नान के दूसरे मामले में वे आरोपी बन गए। उन्होंने नियम-कायदों की परवाह किए बिना प्रमोशन दे दिया था। सिस्टम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता नहीं। मगर कानून ने उनकी गर्दन पकड़ ली। अदालत के निर्देश पर ईओडब्लू ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है। आपको याद होगा, एसीबी ने जब फारेस्ट अफसरों के यहां ताबड़तोड़ छापा मारा था, तब मंत्री महेश गागड़ा विरोध दर्ज कराने सीएम हाउस पहुंच गए थे। तब इसके पीछे कौशलेंद का ब्रेन माना गया था। अब उसी ईओडब्लू में कौशलेंद्र को चक्कर लगाना पड़ेगा। इसे ही कहते हैं समय की मार।
हफ्ते का व्हाट्सऐप
एमएसजी-मुझे माफ कर दीजिए जब साब!
जज-ठीक है, मगर तुम्हें खुद की मुवी दो बार देखनी होगी।
एमएसजी-ठीक है, जज साब। मुझे तुरंत फांसी दे दीजिए।
अंत में दो सवाल आपसे
1. पुरस्कार को लेकर एक ही बैच के दो आईएएस में खटास पैदा हो गई है....दोनों के नाम बताइये? 
2. सिकरेट्री लेवल के अफसर संजय शुक्ला को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग का डायरेक्टर क्यों बना दिया गया?