शनिवार, 22 अप्रैल 2017

तेरी साड़ी सफेद क्यों


23 अप्रैल
संजय दीक्षित
दसवीं बोर्ड के नतीजे आने के बाद आईएएस के व्हाट्सएप ग्रुप में बवाल मच गया। हुआ ऐसा कि कल एक स्मार्ट ज्वाइंट सिकरेट्री ने छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक 80 फीसदी रिजल्ट आने के लिए दंतेवाड़ा जिले को एप्रीसियेट कर दिया। इसके बाद तो पूछिए मत! पहले कुछ महिला कलेक्टर्स कूदीं…..हाट टॉक हुआ….मेरी साड़ी से तेरी साड़ी सफेद क्यों। फिर कलेक्टर्स की लाइन लग गई…नहीं हमने…., नहीं हमारे यहां का रिजल्ट तुमसे बढ़ियां आया है। नहीं, तुम्हारा फिगर गलत है। इस व्हाट्सएप ग्रुप में चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड समेत सीनियर आईएएस, कलेक्टर्स, सीईओज हैं। बच्चों के रिजल्ट पर कलेक्टरों को झगड़ते देख मंत्रालय में लोगों ने खूब चटखारे लिए। अलबत्ता, ये अच्छा साइन है। काम को लेकर कम-से-कम कलेक्टरों में इतना कांपिटिशन तो हो गया है।

23 साल पहिले

सीएम ने दो कलेक्टरों को चना-मुर्रा की तरह चलता कर दिया। हेलीपैड पर मीडिया के जरिये कोरिया और सूरजपुर कलेक्टर्स की छुट्टी कर दी। इसको देखकर 23 साल पुराना वाकया याद आ गया। 94 में एडी मोहिले रायपुर के कमिश्नर थे। उस समय मध्यप्रदेश था और सीएम थे दिग्विजय सिंह। दिग्गी रायपुर आए थे। उनसे कैरोसिन तेल के वितरण को लेकर शिकायतें हुई। दिग्विजय को जब बोलने का मौका आया तो उन्होंने पहली लाइन बोली, आपके बीच जल्द ही नए कमिश्नर होंगे। अगले दिन कमिश्नर का आर्डर निकल गया था। हालांकि, मोहिले ने इस एपीसोड के बाद वीआरएस ले लिया था।

 कुर्सी का भय

माध्यमिक शिक्षा मंडल के चेयरमैन का पोस्ट चीफ सिकरेट्री लेवल का है। सीएस ना हों तो कम-से-कम प्रिंसिपल सिकरेट्री लेवल का तो होना चाहिए। केडीपी राव भी पीएस थे। मगर कुछ दिनों से इसे एडिशनल चार्ज में रखा गया है। स्कूल एजुकेशन सिकरेट्री विकास शील इसके इंचार्ज चेयरमैन हैं। सरकार ने इस पोस्ट को प्रभार में क्यों रखा है, इसको लेकर एसीएस लेवल के अफसरों को डरना स्वाभाविक है। याद होगा, 2007 में शिवराज सिंह जब सीएस बने थे, तो उनसे सीनियर बीकेएस रे को मंत्रालय से हटाकर माशिमं भेज दिया गया था। रे की नाराजगी को दूर करने के लिए ही चेयरमैन के पद को चीफ सिकरेट्री के बराबर घोषित किया गया था। ऐसे में, भय की वजह आप समझ सकते हैं।

लेटर वार

सत्ताधार पार्टी बैठक-पर-बैठक कर अपना घर मजबूत कर रही है तो कांग्रेस लेटर वार में उलझी हुई है। रेणु जोगी ने सोनिया गांधी को खत भेज कर भूपेश बघेल की शिकायत की। बघेल ने फेसबुक पर अजीत जोगी को लंबी पाती लिख डाली। पाती की लच्छेदार भाषा और सधी हुई प्रस्तुतिकरण से लगता है, भूपेश को उसे लिखने में कम-से-कम दो-तीन घंटे तो लगे ही होंगे। भूपेश के फेसबुकिया पाती का जवाब देने में जोगी कैम्प ने भी देर नहीं लगाई। भूपेश पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिख डाला, हम गरीबों की लड़ाई सरकार से लड़ रहे हैं और भूपेश मेरे परिवार से। चलिये, सत्ताधारी पार्टी को और क्या चाहिए।

डैमेज कंट्रोल

बाबूलाल अग्रवाल के तिहाड़ जेल जाने से छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी की पूरे देश में भद पिटी थी। लोग मजाक उड़ा रहे थे…..आईएएस रिश्वत लेता है, ये देने वाला आईएएस छत्तीसगढ़ में कहां से आ गया। मगर आईएएस रजत कुमार के हावर्ड में सलेक्शन और दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार के पीएम अवार्ड मिलने से ब्यूरोक्रेसी पर जो दाग लगे थे, उससे हद तक डैमेज कंट्रोल हुआ है।

हार्ड लक

पीएम अवार्ड के लिए तीन नाम थे। ओपी चौधरी, नीरज बंसोड़ और सौरभ कुमार। ओपी का नाम फायनल 30 के लिए जरूर लिस्टेड हो गया था मगर इस तरह के पुरस्कार दूसरी बार मिलते नहीं। बचे नीरज और सौरभ। नक्सल प्रभावित एरिया में कैशलेस का कमाल दिखाने वाले सौरभ पीएम अवार्ड चुन लिए गए। बट नीरज का सुकमा में वर्क भी आउटस्टैंडिंग था। अगर दोनों का जिला अगल-बगल नहीं होता तो यकीन मानिये छत्तीसगढ़ को दो पीएम अवार्ड मिलते। दंतेवाड़ा में एजुकेशन सिटी के जो काम हुए हैं, नीरज ने सुकमा में उसे उतार दिया हैं। बल्कि, बोल सकते हैं, उससे भी बढ़ियां। सीएम किसी कलेक्टर के काम से सबसे अधिक प्रसन्न रहते हैं तो वो हैं सकमा कलेक्टर। बावजूद इसके पीएम अवार्ड से नीरज चूक गए तो तकलीफ तो होगी ही। हार्ड लक नीरज!

दंतेवाड़ा की लगेगी बोली

पहले ओपी चौधरी ने दंतेवाड़ा का क्रेज बढ़ाया और अब सौरभ कुमार ने। कहीं ऐसा न हो कि दंतेवाड़ा का कलेक्टर बनने के लिए बोली लगने लगे। आखिर, सौरभ को भी दंतेवाड़ा जाने के लिए कितना फाइट करना पड़ा था। उस दंतेवाड़ा में, जिसके नाम से लोग घबराते थे। लेकिन, एजुकेशन सिटी में काम करके ओपी ने दंतेवाड़ा की रेटिंग बढ़ा दी थी। यही वजह है कि 2009 बैच के आईएएस को जब कलेक्टर बनने का मौका आया तो लोग टूट पड़े। सौरभ के रिश्ते उपर में एक खास अफसर से थे, इसलिए गाड़ी निकल गई। वरना, सामने वालों ने भी बड़े-बड़े जैक लगा रखे थे।

….तो सैल्यूट कीजिए

सूबे के कुछ कलेक्टर्स एजुकेशन और हेल्थ में आउटस्टैंडिंग काम कर रहे हैं। तभी तो मुंगेली जैसा ढाई ब्लॉक वाले छोटे जिले में पांच-पांच लड़के मेरिट में आ गए। जशपुर जैसे रिमोट ट्राईबल डिस्ट्रिक्ट में दो मेरिट में और वो भी चौथे नम्बर पर। दो लड़के एक-एक नम्बर से मेरिट में छूट गए। वरना, चार हो गए होते। मुंगेली पिछले बार 27वें नम्बर पर था, इस बार सातवें पर आ गया। दंतेवाड़ा 80 फीसदी रिजल्ट लाकर प्रदेश में सबसे उपर पहुंच गया। कवर्धा का रिजल्ट पिछले साल से 15 फीसदी बढ़कर दूसरे पायदान पर आ गया। सुकमा दूसरा एजुकेशन सिटी बन गया है। रायपुर में आरटीई में ऐसा काम हो रहा है कि प्रायवेट स्कूलों की शामत आ गई है। अब हेल्थ की बात करें। बलरामपुर में टेलीमेडिसिन, मोबाइल हेल्थ यूनिट रन करने लगा है। बीजापुर में तो हेल्थ के सेक्टर में ऐसा काम हुआ है कि यहां लिखने में जगह कम पड़ जाएगी। एक लाइन में आपको बता देते हैं, रायपुर के प्रायवेट अस्पताल से बढ़ियां चिकित्सा सुविधाएं बीजापुर के सरकारी अस्पतालों में मिल रही हैं। सफाई तो पूछिए मत! छत्तीसगढ़ शिक्षा और हेल्थ की दृष्टि से बेहद पिछड़ा हुआ है। इस फील्ड में कोई कलेक्टर अगर मन तन-मन से काम कर रहा है तो उन्हें सैल्यूट करना चाहिए…..अगर अवार्ड पाने के लिए वे नहीं कर रहे हों तो।

अंत में दो सवाल आपसे

1. अंबिकापुर जेल में भूपेश बघेल के कैदी से मिलने के मामले में क्लीन चिट देने में सरकार ने जल्दी क्यों दिखाई?
2. रिव्यू कमेटी की खबर को मिसफिड करने वाले किस आईपीएस अधिकारी से पीएचक्यू नाराज है?

रविवार, 16 अप्रैल 2017

दुआ कीजिए!


16 अप्रैल
संजय दीक्षित
ब्यूरोक्रेसी की सबसे प्रतिष्ठित पीएम अवार्ड के लिए देश के 600 से अधिक कलेक्टरों में से फायनल 30 में छत्तीसगढ़ के तीन कलेक्टरों ने स्थान बनाया है। रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी, सुकमा कलेक्टर नीरज बंछोड़ और दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार। रायपुर ने तो स्टैंड अप इंडिया में देश के मेट्रो सिटी वाले जिलों को पछाड़कर अपना पोजिशन बनाया है। सो, दुआ कीजिए। तीनों कलेक्टर्स को ये अवार्ड हासिल हो जाए। इससे छत्तीसगढ़ का ही सिर उंचा होगा। आखिर, छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य से तीन-तीन कलेक्टरों का चुना जाना…..। ओपी तो रिकार्ड ही बनाएंगे। सब कुछ ठीक रहा तो उन्हें दूसरी बार पीएम अवार्ड मिलेगा।

लफड़ा ही खतम!

ऑल इंडिया सर्विसेज रिव्यू कमेटी ने एक आईएएस की बर्खास्तगी की सिफारिश करके एक तरह से कहें तो सरकार का हेडेक कम कर दिया है। क्योंकि, आने वाले समय में आईएएस सरकार के सिरदर्द बन जाते। सरकार पर निलंबन समाप्त करने का चौतरफा प्रेशर आता। और, गर रिस्टेट होते तो लोग सरकार पर उंगली उठाते। जाहिर है, रिव्यू कमेटी की सिफारिश से सरकार को राहत ही मिली है।

दुखिया आईपीएस

बस्तर में दुखिया आईपीएस अफसरों का जमावड़ा लगते जा रहा है। संतोष सिंह और अभिषेक मीणा बस्तर में ही परिक्रमा लगवाने से खुश नहीं हैं। जगदलपुर एसपी शेख आरिफ का दर्द तो मत पूछिए! बलौदा बाजार में तीन महीने भी पूरे नहीं कर पाए कि बस्तर भेज दिया गया। आरिफ को रात में नींद इसलिए भी नहीं आ रही है कि उन्हें अपनों ने ही मारा। राजेंद्र दास को बलौदा बाजार में ताजपोशी करने के लिए आरिफ की गिल्लियां उड़ा दी गई। डीआईजी सुंदरराज पी का तो पिछले तरकश में बताया ही था कि वे न घर के रहे, न घाट के। यहां एसआईबी में 50 फीसदी सेलरी अधिक मिलती थी। वो भी गया और आईजी भी नहीं रहे। लांग कुमेर की तरह सरकार ने सुंदरराज को भी गो किया तो उत्साहित होकर मैदान में कूद पड़े। अंतर इतना ही है कि लांग कुमेर के समय सरकार ने आरके विज को आईजी बनाकर भेज दिया था और इस बार विवेकानंद का। लांग कुमेर नाराज होकर बिना छुट्टी लिए नागालैंड चले गए थे। सुंदरराज शरीफ और अनुशासनप्रिय आईपीएस हैं, सो बेचारे कुर्सी छिन जाने के बाद भी उफ! नहीं किए। अब बात नए आईजी विवेकानंद की। विवेकानंद ने न जाने कितनी कोशिश की होगी। नवरात्रि में पूजा-पाठ भी। मगर कुछ काम नहीं आया। अब ऐसे दुखी अफसरों के नेतृत्व में नक्सलियों के खिलाफ अभियान कैसे चलाया जाएगा, सरकार को सोचना चाहिए।

बंगला अभिशप्त-1

देवेंद्र नगर आफिसर्स कालोनी में बंगला आसानी से मिलता नहीं। उपर में अगर जैक ना हो तो नामुमकिन ही समझिए। मगर एक बंगला ऐसा है, जो अरसे से खाली है। वह बंगला आईपीएस बीएस मरावी को मिला था। 2012 में मरावी के डेथ के बाद कुछ साल तक उनके परिवार के लोग उसमें रहे। उनके जाने के बाद से बंगला खाली है। उस पर मरावी का नेम प्लेट लटका हुआ है। बताते हैं, आईपीएस की मौत के चलते कोई भी नौकरशाह उसे लेने के लिए तैयार नहीं हो रहा।

अभिशप्त बंगला-2

बिलासपुर आईजी का बंगला भी अभिशप्त-सा ही हो गया है। अशोक जुनेजा को छोड़कर वहां किसी आईजी को सुकून नहीं मिला। जीपी सिंह ने रंग-रोगन कराना शुरू ही किया था कि राहुल शर्मा एपीसोड हो गया। उनके बाद बीएस मरावी आईजी बनकर गए। उनका हर्ट अटैक से निधन हो गया। पवनदेव किन मुसीबतों में फंस गए, यह बताने की जरूरत नहीं। ताजा मामला विवेकानंद सिनहा का है। करीब नौ महीने वे पुलिस आफिसर्स मेस में रहे। बंगले का काम-वाम कराकर जैसे ही वहां शिफ्थ हुए हफ्ते भर में सरकार ने उन्हें बस्तर की रवानगी डाल दी। पीएचक्यू में इस पर विचार किया जा रहा है कि बिलासपुर आईजी बंगला अब चेंज कर दिया जाए। क्योंकि, जिस तरह की घटनाएं वहां हो रही हैं, नए आईजी पीएस गौतम बंगले में रहेंगे नहीं।

छोटा विवेक नेता बनेगा

लोक सुराज में डाक्टर साब अबकी खूब एनज्वॉय कर रहे हैं….कभी चुटकी तो कभी हास-परिहास। कभी लता के आटो रिक्शा में सफर तो कभी राजमिस्त्री बन उर्मिला के घर की ईंट जोड़ाई। कोंडागांव के कोडोभट गांव में एक बच्चे को डाक्टर साब ने गोद में उठा लिया। उन्होंने बच्चे से नाम पूछा। बोला-विवेक। बगल में खड़े सीएस से सीएम बोले, तुम्हारा सहनाव है….तुमको भी इसे पाना होगा। सीएस से तुरंत सीएम से विवेक को अपने गोद में ले लिया। इस बीच पीछे से किसी ने कमेंट पास किया, सर बच्चा काफी हिम्मती है…प्रदेश के दोनों ताकतवर व्यक्ति के गोद में जाने के बाद भी रोया नहीं! इस पर सीएम ने चुटकी ली….विवेक पक्का नेता बनेगा। इस पर ठहाके तो लगे बट वहां चर्चा होने लगी कि सीएम ने किसी विवेक को नेता बनने की भविष्यवाणी की है। छोटे विवेक को या बड़े का।

आफिसर्स इन वेटिंग

यूपी में योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद वेटिंग आफिसरों की फेहरिश्त लंबी होती जा रही है। हर दूसरे रोज दो-चार आईएएस, आईपीएस को वेटिंग में डाला जा रहा है। हालांकि, वेटिंग में छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं है। डा0 आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा दो साल से वेटिंग में हैं। इसमें नया नाम एसआरपी कल्लूरी का जुड़ गया है। वैसे, प्रिंसिपल सिकरेट्री अजयपाल सिंह को भी वेटिंग ही मान कर चलिये। मंत्रालय में जीएडी से लेकर बड़े अफसर्स तक नहीं बता पाएंगे कि अजयपाल के पास विभाग क्या है, तो कोई बता नहीं पाएगा।

घर बांधने की राजनीति?

जोगी कांग्रेस ने आखिरकार जिला अध्यक्षों का ऐलान कर दिया। पूरे 40 अध्यक्ष। जाहिर तौर पर कौतूकता तो होगी ही……जिले 27 फिर 40 अध्यक्ष कैसे। पता चला, अधिक-से-अधिक एडजस्ट करने के लिए जोगीजी ने यह दांव खेला। नेताओं को एडजस्ट करने के हिसाब से कई जिलों को दो-दो जिलों में बांट दिया। मसलन, जांजगीर में दो-दो जिला अध्यक्ष। सक्ती भी नया जिला। यहीं नहीं, 19 उप जिला अध्यक्ष भी। सियासी गलियारों में चर्चा है, घर बांधकर रखने के लिए जोगीजी ने रेवड़ियां बांट दी।

कांग्रेस भी पीछे नहीं

नेटवर्क मजबूत करने के लिए कांग्रेस भी अब ब्लाक इकाइयों की संख्या बढ़ाने जा रही है। अभी तक सरकारी ब्लॉक के हिसाब से कांग्रेस की भी ब्लॉक इकाइयां थी। जबकि, बीजेपी एक-एक ब्लॉक में दो-दो, तीन-तीन मंडल बना रखा है। रायपुर में ही चार मंडल हैं। कांग्रेस भी इसी रास्ते को अब पकड़ने जा रही है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एसीएस बैजेंद्र कुमार से मिलने वाले अफसरों की संख्या इन दिनों क्यों बढ़ गई है?
2. पीसीसीएफ की डीपीसी करके सरकार पोस्टिंग भूल गई है या कोई अदृश्य ताकत पोस्टिंग को रोक रही है?

घर के रहे, न…..


9 अप्रैल
संजय दीक्षित
छत्तीसगढ़ के आईपीएस अफसरों से राहू-केतू का साया हटने का नाम नहीं ले रहा है। जनवरी में राजकुमार देवांगन की वर्दी उतरने से बुरे दिन शुरू हुए थे, वो अभी भी जारी है। अलबत्ता, पीड़ितों की सूची लंबी होती जा रही है…..एसआरपी कल्लूरी, पवनदेव, जशपुर एसपी गिरिजाशंकर जायसवाल, सुकमा एसपी एलासेना, विवेकानंद सिनहा, सुंदरराज पी। विवेकानंद को बिलासपुर गए नौ महीने भी नहीं हुए थे। इसी नवरात्रि के प्रथम दिन विधिवत पूजा-पाठ कराकर बंगले में शिफ्थ हुए थे कि उन्हें सरकार ने बस्तर जाने का फरमान दे दिया। उधर, सुंदरराज पी के लिए तो न घर के रहे, न घाट जैसी स्थिति हो गई। अच्छा भला एसआईबी में डीआईजी थे। एसआईबी के कारण 50 फीसदी वेतन भी ज्यादा मिल रहा था। जनवरी एंड में अचानक एक दिन उनका बस्तर का आर्डर निकल गया। कल्लूरी का असर कम करने के लिए प्रभारी आईजी के तौर पर सरकार ने सुंदरराज को इर्म्पोटेंस भी दिया….लगा वे अब फुलफ्लैश आईजी हो गए। देश भर से बैच मेट्स की बधाइयां मिलनी शुरू हो गई….अरे! तूने तो लंबा हाथ मार दिया। इतनी जल्दी आईजी? वो भी बस्तर का। सुंदरराज की सल्तनत मजबूत करने के लिए सरकार ने जगदलपुर और सुकमा के एसपी की छुट्टी कर दी। लेकिन, लोक सुराज शुरू होने से एक रोज पहिले सरकार ने विवेकानंद को आईजी बनाकर भेज दिया। सुंदरराज के लिए तो कुर्सी से औंधे मुंह गिरने वाली ही घटना होगी। आईजी से डीआईजी बनकर बेचारे दंतेवाड़ा चले गए।

पारी समाप्त?

पीएचक्यू में डीआईजी एडमिनिस्ट्रेशन सोनल मिश्रा को सरकार ने चंदखुरी पुलिस एकेडमी का डायरेक्टर अपाइंट किया है। रिटायर आईपीएस आनंद तिवारी की 30 मार्च को संविदा समाप्त होने के बाद सरकार ने यह आर्डर निकाला। तिवारी 2012 में आईपीएस से रिटायर हुए थे। इसके बाद पिछले पांच साल से संविदा में एकेडमी के डायरेक्टर थे।

डिप्टी कलेक्टर बेचेंगी शराब?

पिछले हफ्ते चीफ सिकरेट्री की वीडियोकाफ्रेंसिंग में कुछ कलेक्टरों ने शराब बिकवाने में मदद करने के लिए डिप्टी कलेक्टरों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया था। सीएस ने जीएडी को निर्देश दिया। जीएडी ने बिलासपुर, दुर्ग को एक-एक जेंस और रायपुर के लिए दो लेडीज डिप्टी कलेक्टर्स का आर्डर निकाल दिया। रायपुर एडमिनिस्ट्रेशन के लिए तो यह सिर पकड़ने वाली बात होगी।

कलेक्टर्स की कुंडली

21 मई को ट्रांसफर की लिस्ट निकलने से पहिले सरकार कलेक्टरों की कुंडली तैयार करा रही है। कलेक्टरों से तीन उपलब्धियों तो मांगी ही गई है, कामों के डिस्पोजल के जरिये भी पारफारमेंस का आंकलन किया जा रहा है। सरकार ने इसका जिम्मा एसीएस बैजेंद्र कुमार को दिया है। जाहिर है, कलेक्टरों के ट्रांसफर में कुंडली की भूमिका अहम होगी।

आर्डर में चूक!

बीएल अग्रवाल के तिहाड़ जाने के बाद एडिशनल चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर को सालों बाद ऐसा कोई विभाग मिला, जिसे वे अब बाहर में बताने में दिक्कत महसूस नहीं करेंगे। हालांकि, हायर एजुकेशन को कोई बड़ा या मलाईदार विभाग नहीं माना जाता। मगर सम्मानजनक तो है। कुजूर को लंबे अरसे से ढंग की पोस्टिंग नहीं मिली थी। वे ग्रामोद्योग, निर्वाचन और राजभवन में घूमते रहे। अब जीएडी की विडंबना देखिए। हायर एजुकेशन को एडिशनल कर दिया और ग्रामोद्योग को मूल पोस्टिंग। कायदे से हायर एजुकेशन को मूल पोस्टिंग करना चाहिए था और ग्रामोद्योग को एडिशनल। इसमें किसी को छटाक भर का नुकसान नहीं था। सिर्फ सम्मान की बात थी। लेकिन, जीएडी में सम्मान की किसको पड़ी है।

ठाकुर के बाद ब्रेक

पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग पर सरकार ने एक तरह से कहें तो ब्रेक ही लगा दिया है। पिछले साल सात आईएएस रिटायर हुए थे। दिनेश श्रीवास्तव, डीएस मिश्रा, एसएल रात्रे, ठाकुर राम सिंह, बीएस अनंत और राधाकृष्ण्न। इनमें से सिर्फ राम सिंह की ताजपोशी हुई। डीएस मिश्रा, राधाकृष्णन और राधाकृष्णन का जोर भी काम नहीं आया। अब इनकी फाइल क्लोज ही समझिए। वैसे, 2015 में रिटायर एमएस परस्ते, ब्राम्हणे घर में आराम ही कर रहे हैं। इस साल रिटायरमेंट में पहला नम्बर लगने वाला है एसीएस एनके असवाल का। वे 31 मई को सेवानिवृत्त होंगे। असवाल अगर लोकल होते तो चुनावी दृष्टि से उनकी पोस्टिंग निश्चित मानी जाती। लेकिन, वे राजस्थान से हैं। 2013 विस चुनाव से पहिले सरजियस मिंज की सूचना आयोग में इसलिए पोस्टिंग मिल गई थी कि वे स्थानीय थे। बाकि तो किस्मत अपनी-अपनी। हां, ये तय है कि अगले एक साल में रिटायर होने वाले तीन आफिसर्स तगड़े दावेदार होंगे।

डीआईजी इम्पेनल

2003 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के तीनों आईपीएस भारत सरकार में डीआईजी इम्पेनल हो गए हैं। रतन डांगी, सुंदरराज पी और ओपी पाल। डांगी फिलहाल पीएचक्यू में डीआईजी एसएएफ एवं कमांडेंट सेकेंड बटालियन हैं। वहीं, सुंदरराज डीआईजी दंतेवाड़ा और पाल एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर। इन तीनों में किस्मत के धनी तो पाल ही हैं। बिना कुछ किए, पांचों उंगली घी में।
अंत में दो सवाल आपसे
1. लोक सुराज अभियान में फिर ऐसा क्या हो रहा है कि चीफ सिकरेट्री के दावेदार सशंकित हो गए हैं?
2. हेलिकाप्टर खरीदी का खंडन करने में जोगी कांग्रेस को 24 घंटे क्यों लग गए?

मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

मशक्कत से मुलाकात

2 अप्रैल

संजय दीक्षित
आईएएस जीएस मिश्रा की पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की नोंक-झोंक के सिलसिले में आईएएस एसोसियेशन शुक्रवार को सीएम से मुलाकात की। मगर यह मुलाकात आसानी से नहीं हुई। एसोसियेशन ने सीएम से कई बार टाईम मांगा लेकिन, बात बनी नहीं। 25 दिन बाद समय मिला, जब एक सीनियर आईएएस मदद के लिए आगे आए। अफसरों ने मुख्यमंत्री से दुखड़ा रोया…..इसी तरह जनप्रतिनिधि सार्वजनिक तौर पर धमकाते रहे तो काम करना मुश्किल हो जाएगा। सीएम ने गंभीरता से अफसरों की बातें सुनीं। मगर कुछ बोले नहीं। पिछले हफ्ते एसोसियेशन के लोग सीएस के पास फरियाद लेकर गए थे। उन्होंने पानी पिलाया, और अपने कुछ निजी अनुभव शेयर कर बिदा कर दिया था।

फंस गए विवेकानंद?

सरकार ने बिलासपुर आईजी विवेकानंद सिनहा को बस्तर भेज ही दिया। एसआरपी कल्लूरी के इलाज के लिए छुट्टी पर जाने के दौरान उन्हें बस्तर का प्रभार दिया गया था। लेकिन, बायपास आपरेशन कराकर कल्लूरी के आनन-फानन में लौट आने के कारण विवेकानंद थैंक्स गॉड बोलकर बिलासपुर लौट आए थे। लेकिन, सरकार ने फायनली उन्हें जगदलपुर की रवानगी डाल दी। विवेकानंद को दो बातें कचोट रही होगी। पहला, बिलासपुर में वे साल भी पूरा नहीं कर पाए और दूसरा, सरकार ने ऐसे समय में बस्तर भेजा है, जब अगले साल विधानसभा चुनाव है। जाहिर है, चुनाव से पहिले उन्हें लौटने का कोई प्रश्न नहीं है। ठीक अरुणदेव गौतम की तरह। याद होगा, मई 2012 में जीरम नक्सली हमले के बाद आईजी हिमांशु गुप्ता को हटाकर सरकार ने गौतम को बस्तर भेजा था। वे भी चुनाव कराकर ही रायपुर लौटे थे। अब फंस गए का मतलब आपको बताते हैं। बस्तर कोई आईपीएस जाना नहीं चाहता। हाईप्रोफाइल के एक आईपीएस का नाम आप बता दें, जो वहां आईजी बनकर गया हो। एक-दो गए भी तो छह महीने में जोर-जुगाड़ लगाकर लौट आए। कल्लूरी अपवाद हो सकते हैं। मगर उन्हें हिट विकेट करार दिया जा रहा है।

अप्रैल फूल

सरकार ने बस्तर आईजी का आदेश ऐसे दिन निकाला, जब साहसा किसी को यकीं नहीं हुआ….लोगों को लगा कहीं अप्रैल फूल तो नहीं। लिहाजा, एक-दूसरे को फोन खटखटा वस्तुस्थिति जानने की कोशिश करते रहे। इस स्तंभकार के पास खबर को कंफर्म करने के लिए एक घंटे में 35 फोन आए। दरअसल, सीएम को आज जगदलपुर जाना था। उन्होंने बजट सत्र के दौरान कहा था कि जल्द ही बस्तर में पूर्णकालिक आईजी पोस्ट किया जाएगा। सो, जगदलपुर के लिए हेलिकाप्टर पर बैठने से पहिले वे आर्डर पर दस्तखत कर गए।

थाना लूटान आईपीएस

बिलासपुर के नए आईजी पीएस गौतम 99 बैच के आईपीएस हैं। गौतम को राज्य में इसके लिए जाना जाता है कि वे जहां भी पोस्टेड रहे, वहां थाना लूटा गया। दंतेवाड़ा एसपी रहने के दौरान ही गीदम थाना लूटा गया था। जशपुर एसपी रहने के दौरान भी थाना लूटा गया। और, वीवीआईपी जिले राजनांदगांव में एडिशनल एसपी रहने के समय भी नक्सलियों ने थाना लूट लिया था। जांजगीर में एसपी का कार्यकाल वहां के लोग आज भी याद करते हैं। शेख आरिफ को सरकार ने जब जांजगीर भेजा तो जाकर स्थिति सामान्य हो पाई।

नाइट वॉचमैन

नए आईजी को लेकर बिलासपुर के लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसी साल दिसंबर में उनका रिटायरमेंट है। याने मुश्किल से नौ महीने। और, कहीं अमित कुमार सीबीआई से जल्द लौट आए तो दो-एक महीने में भी आईजी लेवल पर उठापटक हो सकती है। बहरहाल, बिलासपुर रेंज के एसपी के अब बल्ले-बल्ले हैं।

कुछ और पोस्टिंग

लोक समाधान शिविर से पहिले आईएएस में इक्का-दुक्का आदेश निकलेंगे। मगर आईपीएस के शुरू हो गए हैं। पता चला है, कुछ एसपी भी बदले जाएंगे। खासकर, जिनका पारफारमेंस ठीक नहीं है या फिर टेन्योर दो साल से अधिक हो गया है। दो साल से अधिक वाले केटेगरी में आधा दर्जन के करीब एसपी हैं।

नो रेस्ट

महीने भर की थकाउॅ सत्र के बाद समझा जा रहा था कि सरकार एकाध दिन रेस्ट करेगी। मगर हुआ उल्टा। सत्र समाप्ति के अगले दिन याने 31 मार्च को सुबह 11 बजे सीएम मंत्रालय पहुंंच गए। गृह और स्वास्थ्य विभाग का तीन घंटे तक रिव्यू किया। डेढ़ घंटे से अधिक आदिवासी विकास परिषद की बैठक में रहे। बिजली विभाग के अफसरों की मीटिंग कर बिजली दर कम करने के प्रपोजल को ओके किया। पीडीएफ समझने आए यूपी के मंत्रियों के साथ उनकी बैठक हुई। रात 11 बजे तक विभिन्न प्रतिनिधिमडल से मुलाकातें की। आईएएस एसोसियेशन की भी आपबीती सुनी। आज सुबह उन्होंने अफसरों से चर्चा कर बस्तर आईजी के लिए नाम मंगाया। आर्डर पर साइन कर वे हेलिकाप्टर से जगदलपुर निकल गए। डाक्टर साब की इस एनर्जी का लोग अब राज जानने में जुट गए हैं।

इंतेहा हो गई…..

कलेक्टरी में तो वेटिंग वालों की इंतेहा हो गई….बेचारे नवंबर में खतम हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र से लिस्ट की बाट जोह रहे हैं। उस समय सत्र के बाद तो कलेक्टरों के चेंजेंस तय था। मगर सीएम को अमेरिका जाना था। इसलिए, उनकी वापसी तक मामला टल गया। सीएम जब लौटे मोदीजी का कैशलेस अभियान चालू हो गया था। वे एयरपोर्ट से कैशलेस का रिव्यू करने के लिए सीधे मंत्रालय गए थे। इसके कारण ट्रांसफर टल गया था। कैशलेस का मियाद पूरा होते ही 9 जनवरी को कलेक्टर कांफेंस आ गया। सरकार ने कलेक्टरों को तीन महीने का टारगेट दिया। ये टारगेट समाप्त होने वाला था कि लोक समाधान शिविर का ऐलान हो गया। समाधान शिविर 20 मई तक चलेगा। इसके बाद ही कलेक्टरों का समाधान होगा।

स्पीकर के तेवर!

बजट सत्र में स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल के तेवर अबकी तल्ख रहे। उन्होंने मंत्री रामसेवक पैकरा से लेकर भैयालाल राजवाड़े तक की क्लास ली। अमित जोगी, आरके राय तो उनके निशाने पर रहे ही। अमित को तो टी शर्ट पहनने से लेकर बॉडी लैग्वेज पर भी स्पीकर ने सुना दिया। 17 साल में यह पहला सत्र होगा, जिसमें दो विधायक दो दिन के लिए निलंबित किए गए। शराब अधिनियम को लेकर हाउस में गंगा जल छिड़़कने पर स्पीकर ने अमित और उनके हनुमान आरके राय को निलंबित कर दिया। शराबबंदी के मसले पर ही फटे कुर्ते में सायकिल से विस पहुंचने पर अध्यक्ष ने विमल चोपड़ा और बसपा के इकलौते विधायक केशव चंद्रा को निलंबित कर दिया। किसी एक सत्र में पहली बार इस तरह की कार्रवाई हुई। दिलचस्प यह रहा कि स्पीकर के सामने बैठने वाले विधायक ही सर्वाधिक अनुशासनहीनता की। और, उन्हें इसके लिए आसंदी से फटकार भी मिली।

अंत में दो सवाल आपसे

1. प्रमोटी आईएएस के लिए 17 साल में पहली बार आईएएस एसोसियेशन आगे आया है, इसके पीछे कोई पावर गेम है?
2. दिल्ली डेपुटेशन से सीनियर आईपीएस बीके सिंह की क्या बहुत जल्द वापसी हो रही है?

शनिवार, 18 मार्च 2017

प्रमोटी पर अंतर्द्वंद्व


19 मार्च
संजय दीक्षित
प्रमोटी आईएएस को जिलों में कलेक्टर बनाने के नाम पर सरकार के भीतर अंतर्द्वंद्व की स्थिति निर्मित हो गई है। कुछ लोग चाहते हैं पिछले दो चुनावों की भांति जिलों में अब प्रमोटी की संख्या बढ़ाई जाए। तो
कुछ यूपी और पंजाब का हवाला देते हुए रेगुलर रिक्रूट्ड आईएएस का ही प्रभुत्व कायम रखने की वकालत कर रहे हैं। यूपी और पंजाब में 60 फीसदी से अधिक जिलों में कलेक्टर और एसपी प्रमोटी थे। दोनों ही सूबों में सरकारें निबट गईं। छत्तीसगढ़ में भी एक वक्त था, जब एक समय में 12-13 प्रमोटी कलेक्टर हुआ करते थे। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ सरीखे जिलों में भी प्रमोटी कलेक्टर रहे। लेकिन, 2013 में बीजेपी की तीसरी बार सत्ता आने के बाद रेगुलर रिक्रूट आईएएस ने जिलों में कब्जा जमा लिया। अभी आलम यह है कि 27 में से महज पांच प्रमोटी कलेक्टर हैं। कवर्धा, बेमेतरा, महासमुंद, सूरजपुर और नारायणपुर। इनमें एक भी बड़ा जिला नहीं है। लोक समाधान शिविर के बाद सरकार प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या बढ़ाने का संकेत दे चुकी है। लेकिन, नए हालात में देखना दिलचस्प होगा कि सरकार चुनाव के समय प्रमोटी पर दांव लगाएगी या रेगुलर रिकू्रट की सत्ता कायम रखेगी।

आईएएस की बढ़ती तादात

छत्तीसगढ़ में आरआर और प्रमोटी की बात पहले इसलिए नहीं होती थी कि आरआर की संख्या में बेहद कम थी। पिछले कुछ साल से आईएएस के हर बैच में संख्या बढ़ती जा रही है। पांच-सात से कम आईएएस तो कभी आ नहीं रहे। यही वजह है, कलेक्टरी में भी छत्तीसगढ़ कैडर पिछड़ने लगा है। यूपी, बिहार, झारखंड में 2011 बैच कलेक्टर बन गया है। छत्तीसगढ़ में अभी 2010 बैच का नम्बर नहीं लगा है। एक दर्जन से अधिक आईएएस ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ एक जिला किया है। इसको देखकर लगता है, आने वाले समय में आरआर ने दो-से-तीन जिला कर लिया तो बहुत होगा।

सिकरेट्री का भी संकट

संकट सिकरेट्री लेवल पर है। खासकर, अगला दो-तीन साल काफी क्रायसिस वाला रहेगा। अगले मार्च तक सीएस विवेक ढांड एसीएस एनके असवाल, एसीएस एमके राउत, सिकरेट्री गणेश शंकर मिश्रा सेवानिवृत्त हो जाएंगे। सिकरेट्री पीआर एन टूरिज्म संतोष मिश्रा का मई में डेपुटेशन खतम हो जाएगा। निधि छिब्बर दिल्ली जा रही हैं। जाहिर है, उनके पीछे-पीछे विकास शील भी जाएंगे ही। बीएल अग्रवाल हिट विकेट हेकर तिहाड़ पहुंच गए हैं। ज्वाइंट सिकरेट्री टू सीएम रजत कुमार हॉवर्ड जा रहे हैं। उनके पास एनआरडीए और एवियेशन भी है। सरकार को एनआरडीए में भी ज्वाइंट या स्पेशल सिकरेट्री रैंक के आईएएस को पोस्ट करना होगा।

पोल खुली

गृह विभाग और एसआईबी का इंफारमेशन कितना स्ट्रांग है, 11 मार्च को सुकमा नक्सली हमले में इसकी पोल खुल गई। घटना के बाद गृह और पुलिस विभाग के अफसर सीएम को ब्रीफ करने के लिए सीएम हाउस में जुटे। एक तरफ सीएम सचिवालय के अफसर बैठे, दूसरी ओर गृह और पुलिस के अफसरान। राज्य के मुखिया को घटना की जानकारी देने पहुंचे अफसरों के पास न तो इनपुट थे और ना ही आगे का प्लान। सीएम ने पूछा, केजुअल्टी का एगजेक्ट फिगर क्या है? अफसर लगे एक-दूसरे से कानाफूसी करने। एक ने कहा….सर! अभी पूछकर बताता हूं तो दूसरे… मोबाइल खोलकर सोशल मीडिया की खबर पढ़ने लगे। इसी दौरान प्रधानमंत्री का फोन आ गया। सीएम ने उन्हें शहीदों की संख्या 11 बताई। जबकि, दिल्ली में 14 जवानों के शहीद होने की खबर वायरल हो गई थी। गृह विभाग के अफसरों ने अगर ढंग से सरकार को ब्रीफ किया होता और संख्या को लेकर कंफ्यूज्ड नहीं होते तो सीएम भी दमदारी से बोलते, संख्या 11 ही है। ऐसे में, सीएम का दुखी होना लाजिमी है।

मुकेश सीएम सचिवालय में?

राजनांदगांव कलेक्टर मुकेश बंसल की कलेक्टर की पारी राजनांदगांव में खतम हो सकती है। हालांकि, वीवीआईपी जिले में रहने वाले अफसरों की एक अच्छी पोस्टिंग बोनस मे मिलती है। लेकिन, खबर है मुकेश अब कलेक्टरी करने के पक्ष में नहीं हैं। उपर में भी उन्होंने अपनी इच्छा से अवगत करा दिया है। पता चला है, मुकेश सीएम सचिवालय में अपनी नई पारी शुरू करेंगे। उन्हें ज्वाइंट सिकरेट्री बनाया जाएगा। सीएम के यहां अभी एक ज्वाइंट सिकरेट्री हैं रजत कुमार। वे भी हॉवर्ड जा रहे हैं। यद्यपि, रजत के जाने से मुकेश की पोस्टिंग का कोई सरोकार इसलिए नहीं है कि रजत के हॉवर्ड में सलेक्शन से पहिले ही मुकेश का नाम सीएम सचिवालय के लिए चर्चा में था। वैसे भी, सीएम सचिवालय में दो ज्वाइंट सिकरेट्री की जरूरत है। रजत और मुकेश न केवल एक बैच के हैं बल्कि उनके बैच में ट्यूनिंग भी गजब की है। लिहाजा, रजत के अगले साल मई में लौटने पर दोनों एक साथ होंगे।

सिद्धार्थ का रिकार्ड

मुकेश बंसल की अगर कलेक्टरी की पारी राजनांदगांव में खतम हो गई तो 2003 बैच के आईएएस सिद्धार्थ कोमल परदेशी का रिकार्ड टूटना मुश्किल हो जाएगा। परदेशी लगातार चार जिलों में कलेक्टरी करने वाले छत्तीसगढ़ के पहिले आरआर आईएएस हैं। परदेशी कवर्धा, राजनांदगांव, रायपुर और बिलासपुर में कलेक्टर रहे। मुकेश का भी लगातार तीन जिला हो गया है। कवर्धा, रायगढ़ और राजनांदगांव। चौथा जिला करते तो वे परदेशी की बराबरी कर लेते। यद्यपि, रायगढ़ कलेक्टर अलरमेल ममगई डी भी रायगढ़ में लगातार तीसरा जिला कर रही हैं। लेकिन, 2004 बैच अब काफी सीनियर हो गया है। मई एंड में यह बैच संभवतः क्लोज हो जाएगा। वरना, अलरमेल के लिए चौथे जिले का स्कोप था।

अंत में दो सवाल आपसे

1. भूपेश बघेल को पीसीसी चीफ से हटाया जा रहा है, इस अफवाह को पंख लगाने में क्या कांग्रेस नेताओं का भी हाथ था?
2. एक जुनूनी कलेक्टर का नाम बताइये, जो अर्ली मॉरनिंग घर से निकल जाते हैं। और, समय बचाने के लिए आफिस के बाथरुम में नहाकर 10.30 बजे चेम्बर में बैठ जाते हैं?

रविवार, 12 मार्च 2017

सीएम हाउस में पंगा

13 मार्च

संजय दीक्षित
विवेक ढांड चीफ सिकरेट्री से कब चेंज होंगे, अभी कुछ पता नहीं। लेकिन, सीएस बनने के लिए सूबे के तीन सीनियर आईएएस में तलवारें खींच गई है। अफसर हैं, अजय सिंह, एमके राउत और एन बैजेंद्र कुमार। पिछले रविवार को सीएम हाउस में तीनों में पंगा हो गया। अजय बोले, सबसे सीनियर मैं…माटी पुत्र भी, कोई दाग भी नहीं। और, सीएस बनने के लिए तुम लोग बेचैन हो। इस पर बैजेंद्र भड़क गए….सर, काहे का माटी पुत्र। जब आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा फंसते हैं तो हल्ला मैं करता हूं। कुजूर के लिए मैं सबसे पंगा लिया। फिर, आजकल सीनियर-विनियर नहीं चलता। नौ साल से सीएम सचिवालय मैं संभाल रहा हूं। अर्जुन सिंहजी के साथ काम किया, दिग्विजय सिंहजी के साथ काम किया हूं….भारत सरकार में तीन बार रहा हूं। अजय सिंह की आंखों में देखते हुए सर, प्लीज….आप सीधे-साधे आदमी है, काहे के लिए सीएस-वीएस के चक्कर में पड़ते हैं। इस पर राउत की भृकुटी चढ़ गई। बोले, ये सीनियर क्या होता है। काम करना चाहिए….काम। मेरा काम बोलता है। सन् 2000 में रायपुर को राजधानी बनाने से लेकर अभी तक हमाली मैं कर रहा हूं। आईएलएफएस में लोग फंसते हैं तो राउत को बुलाओ। गणेश शंकर मिश्रा ने हाथ खड़ा कर दिया तो शौचालय बनाने का काम मुझे सौंप दिया गया। मैंने उसमें भी स्टेट को नम्बर वन ला दिया। हमर छत्तीसगढ प्रोग्राम चलाना है़….. राउत को दे दो। सारे सिकरेट्री चार बजे भाग जाते हैं, मैं सात बजे से पहले कभी मंत्रालय से नहीं लौटता। क्या मैं सिर्फ हमाली करने के लिए इस कैडर में आया हूं। तभी अमन सिंह और उनके पीछे रजत कुमार हाउस से बाहर निकले। गेट पर अरुण बिसेन मिल गए। पूछे, ये शोर क्यों हो रहा है। बिसेन, सर…..वो सीएस बनने के लिए…..। अमन मुस्कराए…..ढांड साब का तो अभी एक साल है। अमन की बात तीनों ने सुनी ली……एक सूर में बोले-देखो अमन….एक साल है या एक महीना, तुम इतना मासूम मत बनों….क्लियर तो करों, बनेगा कौन? अमन-देखिए, आपलोग सीनियर आफिसर्स हैं…..भली-भांति जानते हैं, बड़े लेवल की पोस्टिंग सीएम साब ही तय करते हैं। उसी समय सुबोध सिंह हाथों में फाइल लेकर वहां से गुजरे। माजरा भांपकर बोले, सीएस कोई भी बनें, हमें क्या फर्क पड़ता है….हमें तो काम करना है। तब तक बात अंदर सीएम तक पहुंच गई थी। सीएम अपनी परमानेंट गंभीर मुद्रा में बाहर आए। हूं….क्या हो रहा है….? तुम लोग कुछ चिंतित दिख रहे हो। चिंता-विंता की कोई जरूरत नहीं है। मैं बोलता कम हूं, इसका मतलब ये नहीं…. ध्यान सबका रखता हूं। राजेश टोप्पो को बोल दिया हूं, अगले टेन्योर में पांच साल कलेक्टरी करना। और, हां….होली है, जाओ खूब रंग-अबीर खेलो। ! जोगीजी के साथ भी होली खेल सकते हो, कोई दिक्कत नहीं। वे भी कांग्रेस मुक्त भारत के लिए ही काम कर रहे हैं। तीनों आईएएस भांप गए, सीएम साब बात टर्न कर रहे हैं। ही..ही….ही करते हुए बोले, कोई बात नहीं सर….। हम ढांड साब से भी होली खेल आएंगे। ढांड सर, बढ़ियां आदमी हैं। ठीक है, सर! एडवांस में हैप्पी होली।

हाउस की होली

होली सीएम हाउस में भी जमकर खेली जाती है। मन में क्यूरोसिटी हुई….देखें, क्या तैयारी चल रही है। सिक्यूरिटी चेकिंग के बाद अंदर गया। देखा, विक्रम निराकार भाव से खड़े हैं। उनसे पूछ लिया, आपका गेम कैसा चल रहा है। विक्रम बोले, भर पाए गेम से। जितना खेलना था, 2008 तक कर लिया। अब मैं अपने ओरिजिनल खेल पर ध्यान केंद्रित कर दिया हूं। गेम के बारे में दूसरे लोगों से पूछो। इसी बीच ओपी गुप्ता दिखे। पूछा, गुप्ताजी इस बार होली किसके साथ खेलोगे। वे भड़क गए, आप पत्रकारों को हमेशा उल्टा-पुल्टा ही सूझता है। उनका गुस्सा शांत करते हुए मैं बोला, आप हर बात दिल से ले लेते हो….मेरा कोई दूसरा आशय नहीं था। कैम्पस की ओर बढ़ा….सीएम तेज वॉक करते नजर आए। मैं भी उनके साथ हो लिया। कुछ दूर चलने पर धीरे से पूछ लिया, डाक्टर साब सरोज कुछ ज्यादा ही सक्रिय नहीं हो गई है, श्री श्री पर चेन्नई से बयान जारी कर दी। सीएम-होली के समय मौसम ठीक हो गया है। मैं समझ गया, सवाल जमा नहीं। मूड हल्का करने के लिए पूछा, होली किसके साथ खेलेंगे? वीणा के साथ….शादी के बाद से होली मैं वीणा के साथ ही खेलता हूं। लेकिन, भूपेश बघेल का कहना है…..। सीएम का चेहरा तमतमा गया। बोले, क्या भूपेश से पूछकर मैं होली खेलूंगा? वो अपने समान समझ लिया है क्या। मैं सिर्फ स्पीकर महोदय से…..ओह! सॉरी, वीणा से ही पूछता हूं। डाक्टर साब, वो भूपेश…..। ये भूपेश…..भूपेश क्या। मैं डर गया। पास में ही सिकरेट्री पीआर संतोष मिश्रा और राजेश डीपीआर राजेश टोप्पो मुझ पर नजर गड़ाए थे। एक हल्का-सा इशारा मुझ पर भारी पड़ सकता था। मैंने बात चेंज किया, वो 45 लाख स्मार्ट फोन। रमन-हां…हां…..मोदीजी के सपनों को साकार….35 हजार परिवारों को उज्जवला योजना….24 हजार आदिवासियों को चना, 45 बिजली कनेक्शन….। मन में ही बोला, डाक्टर साब होली के मौके पर भी लगे आंकड़े बताने। उन्हें होली का विश करते हुए आगे बढ़ा। शायद अमन दिख जाएं….आखिर, रमन से मिलने का मतलब तभी है जब अमन भी हो जाएं। तभी, वीणा भाभी दिखी। छूटते ही पूछा, भाभी होली…..। अरे! होली। हमलोग खूब खेलते हैं। पूरे मायके वाले यही चले आते हैं…..मायका हमारा बहुत बड़ा है….अमन, विक्रम भी आ जाते हैं…..अमन और अभिषेक में मैं कोई फर्क नहीं समझती। मैंने पूछा, भाभी आपका स्वास्थ्य कैसा है। बहुत अच्छा….। लेकिन, अब यहां के डाक्टर पर मैं भरोसा नहीं करती। किसी पर भी…? हां, हां…आखिर, मुझसे ज्यादा कौन भुगता होगा। इसी दौरान संविदा पोस्टिंग की एज 75 साल करने की फाइल लिए शिवराज सिंह अंदर आते दिखे। मैंने सोचा, अब निकल जाना चाहिए….फिर, भाभी को विश कर रवाना हो गया।

उद्योग छोड़ेंगे अमर

मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह ने अमर अग्रवाल को जब दूसरी बार उद्योग विभाग दिया था तो इसे अमर के बढ़ते कद से जोड़ कर देखा गया था। मगर जीएसटी की बैठकों से अमर इतने उकता गए हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री से उद्योग विभाग छोड़ने की पेशकश कर दी है। जीएसटी के संबंध में हर तीसरे दिन दिल्ली जाना पड़ता है। मोदी सरकार मीटिंग बुलाए तो उसमें ना-नुकुर करने का सवाल भी पैदा नहीं होता। इससे अमर का परिवार भी परेशान है। शशि भाभी बोलती है, जीएसटी के बहाने कोई दूसरा चक्कर तो नहीं चला रहे हो। इस पर अमर को एक दिन गुस्सा आ गया। उन्होंने सीधे रुख किया सीएम हाउस का। बोले, भाई साब उद्योग ले लो, भले ही उसके बदले में कोई छोटा-मोटा विभाग दे दीजिए। बताते हैं, अमर इसलिए भी परेशां है कि दारु बेचने का फैसला किया है सरकार ने। और, गाली खानी पड़ रही अमर को। बहरहाल, सीएम ने अमर को समझाया, विधानसभा खतम हो जाने दो। फिर, तुम्हारे लिए कुछ करते हैं। शशि को भी मैं समझाउंगा….तुम पर एतबार करें।

पियो लेकिन रखो हिसाब….

ठेकेदारों द्वारा शराब बेचने में पीने वालों को फायदा था और पिलाने वालों को भी। दरअसल, बीयर-बारों को शराब दुकानों से 40 से 50 परसेंट तक रिबेट मिलता था। यही वजह है कि पिछले दस साल में बारों की संख्या तीस गुना बढ़ गई। एक अप्रैल से सरकार शराब बेचने लग जाएगी तो जाहिर है, रिबेट का कोई स्कोप नहीं बचेगा। ऐसे में, एक अप्रैल से होटलों, बारों में आप जाएं, तो हिसाब से पिएं। वरना, जेब ढिली हो जाएंगे। वैसे हिसाब तो अब नॉन मलाईदार अफसरों को भी रखना होगा। क्योंकि, नीली बत्ती वाले अफसरों को तो शराब कभी खरीदना नहीं पड़ता। ठेकेदार, सप्लायर उनके यहां विदेशी ब्रांड भिजवा देते हैं। चिंता उनकी बढ़ गई है, जिनके पास कोई मलाईदार विभाग नहीं है। इन्हें सरकारी कुर्सी के चलते दुकानों से 30-35 परसेंट तक छूट मिल जाती थी। उन्हें भी पूरे रेट में अब खरीदने पड़ेगे।

हॉवर्ड रिटर्न

आईएएस रजत कुमार का हावर्ड में सलेक्शन हो गया है। सुनिल कुमार के बाद वे दूसरे आईएएस होंगे, जो पीजी की पढ़ाई करने यूएस जा रहे हैं। उनके लिए खुद सीएम और उनके पीएस अमन सिंह ने रिकमांड किया था। वो भी ऐसे समय में जब रजत ने सीएम सचिवालय में अपना कारोबार ठीक-ठाक जमा लिया था। इसमें अंदर की बात यह है कि रजत हावर्ड से मंज कर आएंगे तो 2018 में इसका लाभ सरकार को ही मिलेगा। अगले साल मई में तब लौटेंगे जब विकास यात्रा शुरू होने वाली रहेगी। और, आपको ये भी याद होगा, 2013 के पहले चरण में सरकार जब पिछड़ने लगी थी तो सीएम के संकटमोचक अफसरों ने ही कमान संभालकर बालदास का हेलिकाप्टर दौड़ा डाला था। इससे बाजी पलट गई थी। अब तो हावर्ड रिटर्न भी रहेंगे।

मुलायम मॉडल

यूपी के मुलायम-अखिलेश एपीसोड की तरह राजधानी रायपुर में भी एक दुश्य देखने को मिला। जोगी कांग्रेस के कार्यक्रम में मंच पर ही पिता-पुत्र भिड़ गए। दरअसल, विधानसभा घेराव से पहले मंडी गेट पर सभा चल रही थी। जोगीजी अपने पारंपरिक अंदाज में भाषण दे रहे थे। इसी बीच छोटे जोगी ने भीड़ को विधानसभा की ओर कुच करने के लिए इशरा कर दिया। इस पर जोगी भड़क गए। बोले, पार्टी मैं बनाया हूं, मेरे हिसाब से चलेगी। कुछ दिन से यह चर्चा आम है कि पार्टी को छोटे जोगी ने हाईजैक कर लिया है। जोगीजी की अब कुछ चलती नहीं। इससे कार्यकर्ताओं में बैड मैसेज जा रहा था। आखिर, जोगी कांग्रेस में जोगीजी को अलग कर दें तो बचेगा क्या। सो, इस प्रसंग को लोग मुलायम मॉडल से जोड़ कर देख रहे हैं। ऐसा मानने वालों की कमी नहीं कि लोगों में यह संदेश देने के लिए मंच पर वह सब हुआ कि पता चले कि पार्टी पर जोगीजी का ही नियंत्रण है। लेकिन, यूपी में मुलायम मॉडल फेल हो गया। जोगीजी को यह ध्यान रखना होगा।

भाई-भाई

विधानसभा में पहली बार ऐसा हुआ कि बीजेपी और कांग्रेस साथ-साथ खड़ी नजर आई। मौका था अमित जोगी के खिलाफ कार्रवाई का। अमित ने शराब नीति के विरोध में विधानसभा में गंगाजल छिड़का था। सत्ता पक्ष ने आसंदी से कार्रवाई की मांग की। इस पर भूपेश बघेल के साथ पूरी कांग्रेस बीजेपी के साथ खड़ी हो गई। चलिये, भाईचारा बनी रहे।

अंत में दो सवाल आपसे

1. सूबे के तीन आईएएस, दो आईपीएस, पांच आईएफएस के नाम बताइये, जो 2018 में पूर्ण शराबबंदी के बाद डेपुटेशन दीगर राज्यों में जाने का विचार कर रहे हैं?
2. मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी पर जिसके नाम का रुमाल रखा है, उसी की ताजपोशी होगी या रुमाल हटाकर कोई दूसरा भी बैठ सकता है?
नोट-होली के रंग में अगर स्तंभकार की कलम बहक गई हो तो बुरा न मानो होली है।

शनिवार, 4 मार्च 2017

हे राम!


5 मार्च
संजय दीक्षित
छत्तीसगढ़ के कलेक्टर्स इन दिनों शराब दुकानें बनाने में व्यस्त हैं। उन्हें कहीं लोगों को चमकाना पड़ रहा है तो कहीं मनुहार की मुद्रा में दिख रहे हैं। पिछले दिनों मंत्रालय से कलेक्टरों की वीडियोकांफ्रेंसिंग कर अपडेट मांगा गया। सवाल हुआ, फलां….तुमने कितनी बनवाई….और तुम……? एक महिला कलेक्टर ने बताया, मेरे यहां सात दुकानों का काम प्रारंभ हो गया है। साब बोले, वेरी गुड। दूसरी महिला कलेक्टर ने कहा, सर! हमारे यहां बड़ा विरोध हो रहा है। इस पर साब ने उन्हें ऐसे देखा कि पूछिए मत! इधर, कलेक्टरों की पत्नियां पूछ रही है, अजी! तुम तो कहते थे कि हमलोग देश चलाते हैं….तुम तो शराब दुकान बनवा रहे हो….मैं तो वैसे ही परेशां थी…..अब अपनी ही दुकान हो जाने पर तुम्हारा कहीं डोज न बढ़ जाएं….हे राम!
ये होना था-फटाफट कारपोरेशन बनाकर ठेका दे देना था। प्रायवेट पार्टी दुकानें बनाती तो कलेक्टरों की इस तरह छीछालेदर नहीं होती। लॉ एन आर्डर तो तहसीलदार भी देख लेता।

सुंदर का राज

बस्तर से आईजी एसआरपी कल्लूरी की बिदाई के बाद प्रभारी बनाकर भेजे गए सुंदरराज पी को एसपी सहयोग नहीं कर रहे थे। सरकार की नोटिस में भी ये बात लगातार आ रही थी कि उन्हें ओवरलुक किया जा रहा है। पिछले हफ्ते चीफ सिकरेट्री, डीजीपी, पीएस होम जगदलपुर गए थे। तीनों ने वहां लंबी बैठक लेकर इशारों में कह दिया था कि सुंदर को सपोर्ट करें। इसके बाद भी बस्तर के एसपी नहीं सुधरे तो सरकार ने चक्र चला दिया। चलिये, दो को बस्तर से बाहर और दो को इधर-से-उधर करने के बाद बस्तर में अब सुंदर का राज स्थापित हो गया है।

सजा या ताजपोशी?

बस्तर में कल्लूरी के हनुमान कहे जाने वाले आरएन दाश को सरकार ने हटा दिया है। पता चला है, आरएन दाश के उस बयान को सरकार ने गंभीरता से लिया, जिसमें उन्होंने कहा कि कल्लूरी के जाने के बाद मिशन अधूरा रह गया। लेकिन, बलौदा बाजार भेज कर उन्हें सजा दी गई है या इनाम? यह सवाल चर्चा में है। जाहिर है, बलौदा बाजार बस्तर से कहीं अधिक मलाईदार जिला है। आधा दर्जन से अधिक सिमेंट प्लांट हैं। भाटापार जैसे कारोबारी जगह भी बलौदा बाजार में है। कसडोल जैसा वीआईपी विधानसभा क्षेत्र भी बलौदा बाजार में ही है। बताते हैं, बड़ी चतुराई के साथ बलौदा बाजार के लिए दाश का नाम बढ़ाया गया और सत्ता में बैठे लोग इस गेम को समझ नहीं पाए। दाश की तो लाटरी निकल आई।

अंधा बांटे रेवड़ी….

आईपीएस की कल की पोस्टिंग को देखकर सवाल उठता है पुलिस में पोस्टिंग का कोई फार्मूला है भी या अंधा बांटे रेवड़ी, चिन्ह-चिन्ह को दें…..वाला चल रहा है। अभिषेक मीणा कोंडागांव से नारायणपुर गए थे और वहां से उन्हें कल सुकमा भेज दिया गया। याने बस्तर में लगातार तीन जिला। संतोष सिंह की पूरी जवानी बस्तर में ही निकल जाएगी। वहीं, एडिशनल एसपी रहे। फिर, एसपी कोंडागांव। अब उन्हें नारायणपुर भेज दिया गया। पराकाष्ठा तो शेख आरिफ के साथ हो गई…..दाश को एडजस्ट करने के लिए चार महीने में ही बलौदा बाजार से छुट्टी हो गई। कुल मिलाकर यह स्थापित हो गया है कि जिसका उपर में कोई जैक नहीं है, वह बस्तर या सरगुजा, जशपुर में घूमता रह जाएगा। आखिर, मैदानी इलाके में कई ऐसे एसपी हैं, जिन्होंने कभी बस्तर नहीं देखा।

उल्टा-पुल्टा

यह पहला मौका होगा…जंगल विभाग के अधिकारी को सरकार ने राज्य के लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा सौंपा है। आईएफएस अनिल साहू सिकरेट्री हेल्थ बनाए गए हैं। हेल्थ में जब जंगल विभाग के अफसर नहीं थे तब कभी मलेरिया में, तो कभी नसबंदी जैसे मामूली आपरेशन में लोग जान गंवा रहे थे। लोगों को अब डर सता रहा, अब क्या होगा? इससे पहिले एक एमबीबीएस डाक्टर को सरकार ने रोड बनाने का काम दिया था। तीन साल में एक ढेला काम नहीं हुआ। तब जाकर उन्हें हटाया गया। सरकार अब इस तरह उल्टा-पुल्टा करेगी तो ऐसा ही होगा।

डीएम की ताजपोशी?

सत्ता के गलियारों से संकेत कुछ और निकलते हैं। और आर्डर कुछ और। पीएससी चेयरमैन की पोस्टिंग में सबने देखा ही। बात प्रदीप पंत की चल रही थी। और, नियुक्ति केएम पिस्दा की हो गई। जबकि, पिस्दा का कहीं कोई चर्चा नहीं थी। फिलहाल, विषय डीएम अवस्थी हैं। डीजीपी के लिए इन दिनों उनके नाम की चर्चा बड़ी तेज है। पीएचक्यू में हर दूसरा अफसर डीएम के बारे में पत्तासाजी कर रहा है। बहरहाल, लाख टके का सवाल यह है कि क्या पुलिस के मुखिया चेंज होंगे? बस्तर के कड़वे एपीसोड को छोड़ दें तो पुलिस से सरकार को कोई दिक्कत नहीं है। हां, दिल्ली से बीके सिंह छत्तीसगढ़ लौटकर समीकरण बिगाड़ दें तो कोई आश्चर्य नहीं। क्योंकि, दिल्ली में उनकी सीएम से मुलाकातों की खबरें आती रहती है।

माटी पुत्र का दम

पेंड्रावन डेम में भूपेश बघेल से पंगा लेकर इरीगेशन सिकरेट्री फंस गए। भूपेश ने उनके पिता का नाम लेकर उतार दिया। उपर से विशेषाधिकार हनन की नोटिस भी इश्यू हो गई। जबकि, जीएस का दर्द कौन समझे। उन्होंने अल्ट्रा टेक सीमेंट को एनओसी देने के विरोध में डेढ़ पन्ने की नोटशीट लिखी थी। मगर अल्ट्राटेक के सामने सिस्टम ने घूटना टेक दिया तो जीएस क्या करें। अलबत्ता, इस बात के लिए उन्हें दाद देनी होगी कि जिस भूपेश बघेल के खिलाफ बोलने में सरकार के मंत्रियों को सोचना पड़ता है। बड़े-बड़े आईएएस भूपेश का नाम आते ही हाथ जोड़ लेते हैं। उनसे जीएस भिड़ गए। माटी पुत्र में दम तो है। दम तो हालांकि, एसआरपी कल्लूरी में भी था। भूपेश के खिलाफ खम ठोक दिया था। जाहिर है, कल्लूरी की स्थिति इससे और मजबूत हुई थी। आखिर, भूपेश के आरोपों का मतलब होता है, सरकार का प्रिय होना। लेकिन, कल्लूरी खुद ही अपने को थ्री इडियेट में शामिल कर लिए तो सरकार क्या करें।

सरोज का चौका

सरकार के निमंत्रण पर छत्तीसगढ़ आए श्री श्री सुदर्शन पर जब पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने हमला बोला तो बीजेपी संगठन का कोई पदाधिकारी मुंह खोला और ना ही सरकार के कोई मंत्री। ऐसे में, पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पाण्डेय ने शेरों-शायरी के जरिये भूपेश पर प्रहार कर पूरा क्रेडिट लूट ले गई। बताते हैंं, जब ये प्रसंग हुआ, सरोज चेन्नई में थी। वहीं से उन्होंने भूपेश पर तीर छोड़ा। लेकिन, मान गए भूपेश को भी। आमतौर पर वे आस्तिन चढ़ाते हुए आक्रमक अंदाज में जवाब देते हैं लेकिन बात सरोज पाण्डेय की थी और शेरों-शायरी के जरिये तो…..नेकियां खरीदी है हमने….शायरी के अंदाज में जवाब देकर भूपेश ने माहौल को शायराना बना दिया। बहरहाल, अशोक जुनेजा को ये पता करने के लिए लगाया गया है कि सरोज के खिलाफ भूपेश यकबयक शायर कैसे हो गए….जवाब देते समय उन्होंने महिला जानकर आस्तिन नहीं चढ़ाई या कोई और बात है।

पोस्टिंग गेम

दो सीनियर आईएफएस को पीसीसीएफ बनाने के लिए 21 फरवरी को डीपीसी हुई। मुदित कुमार और सुब्रमण्यिम। अभी तक उनका आर्डर नहीं निकला है। पीसीसीएफ जैसे शीर्ष पद के लिए आर्डर क्यों अटका है, इसकी वजह हम आपको बताते हैं। एक सीनियर आईएफएस इतने ताकतवर हो गए हैं कि जिस पोस्ट पर हैं, वहां से वे हटना नहीं चाहते। कोशिश हो रही है कि उसी पोस्ट को पीसीसीएफ लेवल में अपग्रेड कर दिया जाए। इस पावर गेम के चलते पीसीसीएफ की पोस्टिंग रुकवा दी गई है। लिहाजा, वन विकास निगम और मेडिसिनल प्लांट बोर्ड की कुर्सी खाली पड़ी है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि इस साल रिटायरमेंट के बाद आईएएस जीएस मिश्रा को लाल बत्ती मिलना अब तय है?
2. तिहाड़ी आईएएस की सूची में छत्तीसगढ़ का नाम शुमार होने पर आपका क्या मानना है?