शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

पहला सिकरेट्री?

 संजय के दीक्षित

तरकश, 14 फरवरी 2021
छत्तीसगढ़ के चीफ सिकरेट्री अमिताभ जैन भारत सरकार में सिकरेट्री इम्पेनल हो गए हैं। हालांकि, उनके पहिले तीन आईएएस और सिकरेट्री इम्पेनल हुए हैं। लेकिन, अभी तक इम्पेनल होने के बाद भी अभी तक छत्तीसगढ़ का कोई आईएएस केंद्र में सिकरेट्री नहीं बन पाया। 87 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस बीवीआर सुब्रमण्यिम पिछले साल सिकरेट्री इम्पेनल हुए हैं। वे अभी जम्मू-कश्मीर के चीफ सिकरेट्री हैं। चूकि, उनका अगले बरस रिटायरमेंट है, लिहाजा उनके केंद्र में सिकरेट्री बनने की संभावना कुछ कम होती जा रही है। इधर, अमिताभ जैन का अभी लंबा कार्यकाल है। वे जून 2025 में रिटायर होंगे। ऐसे में, माना जा रहा है कि वे केंद्र में इस पद तक पहुंच सकते हैं। वैसे भी, ऐसे अफसर कम होंगे, जो चीफ सिकरेट्री भी रह लिए और केंद्र में भी सेवा दे चुके हों। अमिताभ पोस्टिंग के मामले में किस्मती अफसर हैं। वे डीपीआर से लेकर सिकरेट्री पीडब्लूडी, वाणिज्यिक कर, आबकारी, फायनेंस, राजभवन जैसे कई जगहों पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा सेंट्रल डेपुटेशन भी।


2005 बैच का प्रमोशन

2005 बैच के आईएएस अधिकारियों के सिकरेट्री प्रमोशन की फाइल उपर पहुंच चुकी है। जल्द ही औपचारिकताओं के बाद प्रमोशन का आदेश जारी कर दिया जाएगा। इस बैच में पांच डायरेक्ट आईएएस हैं और दो प्रमोटी। इनमें से खबर है किसी एक आईएएस का प्रमोशन ड्राॅप होगा। बाकी छह सिकरेट्री बन जाएंगे। इस बैच में मुकेश बंसल, आर संगीता, रजत कुमार, राजेश टोप्पो, एस प्रकाश, टीपी वर्मा और नीलम एक्का हैं। ओपी चैधरी ने नौकरी छोड़कर सियासी पारी शुरू कर दी है।

छोटा जिला, बड़े अफसर

गरियाबंद भले ही छोटा जिला हो मगर अफसरों की पोस्टिंग की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण जिला। जनवरी 2012 में अस्तित्व मेें आए इस जिले की खास बात यह है कि वहां कलेक्टर, एसपी, जिपं सीईओ और डीएफओ, चारों रेगुलर रिक्रूट्ड अफसर हैं। नीलेश क्षीरसागर कलेक्टर, भोजराम पटेल एसपी, चंद्रकांत वर्मा जिपं सीईओ और मयंक अग्रवाल डीएफओ। छत्तीसगढ़ के 28 में से तीन-चार जिले ही ऐसे होंगे कि सभी डायरेक्ट अफसर हों। वरना, दीगर जिलों में प्रमोटी अफसर बराबरी में डटे हुए हैं।

यह भी रिकार्ड

आईपीएस रतनलाल डांगी छत्तीसगढ़ के ही नहीं बल्कि देश के संभवतः पहले ऐसे आईपीएस होंगे, जो आईजी प्रमोट हुए बिना तीसरा पुलिस रेंज संभाल रहे हैं। कांग्रेस सरकार बनने के बाद सबसे पहिले दुर्ग के आईजी बनें। फिर सरगुजा और उसके बाद अब बिलासपुर के आईजी हैं। बिलासपुर तो सबसे बड़ा पुलिस रेंज है। वैसे भी डांगी ने छत्तीसगढ़ के तीनों डीआईजी रेंज किया है। वे दंतेवाड़ा, कांकेर और राजनांदगांव के डीआईजी रह चुके हैं। स्वाभाविक तौर पर अब उनकी चिंता यह होगी कि मुकद्दर ने उन्हें इतना कुछ दे दिया है कि…आईजी प्रमोट होने के बाद उनके पास पोस्टिंग के लिए दो ही रेंज बचेगा। रायपुर और बस्तर। उसके बाद एडीजी प्रमोशन होने तक क्या करेंगे? वैसे, डांगी कोरबा में दो बार एसपी रहे हैं। आईजी भी रिपीट हो सकते हैं।

जीत का फार्मूला

जिन राज्यों के लिए विधानसभा चुनाव की रणभेड़ी बनजे वाली है, उनमें कांग्रेस को सबसे अधिक उम्मीद असम से है। असम में पिछली बार कांग्रेस को परास्त कर बीजेपी सत्ता में आई थी। इस बार असम में फिर से अपनी सल्तनत कायम करने कांग्रेस आलाकमान ने छत्तीसगढ़ को पूरा जिम्मा सौंप दिया है। विदित है, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को पर्यवेक्षक बनाया गया है। बूथ मैनेजमेंट की ट्रेनिंग से लेकर घोषणा पत्र तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ से कांग्रेस नेताओं का जत्था गोहाटी पहुंच चुका है। कुछ दिन बाद से मंत्रियों का असम दौरा शुरू हो जाएगा। पार्टी को उम्मीद है कि कांग्रेस ने भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जिस तरह एकतरफा जीत दर्ज की, असम में भी प्रयास करने पर कामयाबी मिल सकती है।

पूर्व मंत्री का गुस्सा

केंद्रीय बजट की खासियत को पार्टी नेताओं को ब्रीफ करने नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी इस हफ्ते रायपुर आए। इस मौके पर उन्होंने बिलासपुर से हवाई सेवा के डेट का भी ऐलान किया। बावजूद इसके केंद्रीय मंत्री के दौरे और हवाई सेवा की बजाए की बजाए पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर की नाराजगी की खबर को ज्यादा सुर्खिया मिल गई। दरअसल, अजय इसलिए भड़क गए कि उन्हें केंद्रीय मंत्री की बैठक की सूचना नहीं दी गई थी। हालांकि, ये पहली बार नहीं हुआ। रमन सरकार के अधिकांश पूर्व मंत्रियों का दर्द है कि मीटिंग में बुलाया नहीं जाता। बृजमोहन अग्रवाल कोर कमेटी के मेम्बर की हैसियत से, तो अजय चंद्राकर, राजेश मूणत प्रवक्ता के नाते बैठकों में पहुंच जाते हैं। लेकिन, प्रेमप्रकाश पाण्डेय, अमर अग्रवाल जैसे मंत्रियों को दो साल में एक बार भी नहीं बुलाया गया। अमर अग्रवाल तो बजट के बारे में छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक जानकारी रखने वाले नेता माने जाते हैं। वे वित मंत्री रहे हैं। और, केंद्र के जीएसटी मेम्बर भी। लेकिन, विडंबना यह है कि बजट पर चर्चा करने आए केंद्रीय मंत्री की मीटिंग में उन्हें बुलाने की जरूरत नहीं समझी गई। प्रेमप्रकाश और अमर जैसे स्वाभिमानी नेता अब बिना बुलाए तो जाएंगे नहीं।

पुरंदेश्वरी से उम्मीद

तीन साल बाद सरकार बनाने का सपने देख रही बीजेपी के भीतर सब कुछ बढ़ियां नहीं चल रहा। नियुक्तियों को लेकर संगठन में अंतरकलह बढ़ता जा रहा। बात यहां तक पहुंच गई है कि पार्टी नेता आरोप लगाने लगे हैं कि पैसे लेकर नियुक्तियां की जा रही है….सरगुजा संभाग के एक नेता को 10 पेटी लेकर बड़ा पद दिया गया है। तो युवा मोर्चा में 41 साल के एक व्यक्ति को बिठा दिया गया…इस पर भी पार्टी में बहुत कुछ कहा जा रहा है। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को अब प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी और सह प्रभारी नितिन नवीन से ही उम्मीद है…वे शायद कुछ कर सकें।

बड़ा मंत्रालय

बिहार के बीजेपी नेता नितिन नवीन को लगता है छत्तीसगढ़ का सह प्रभारी बनना फल गया। पटना से विधायक नितिन को मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री बनना तय था लेकिन, पीडब्लूडी जैसे महत्वपूर्ण विभाग मिल जाएगा, इसका किसी को अंदाजा नहीं था। नितिन के पिता नवीन किशोर सिनहा भी पटना से विधायक थे। नितिन 25 साल की उम्र में विधायक बन गए थे। वे सिक्किम के प्रभारी भी रह चुके हैं। वैसे, छत्तीसगढ़ बीजेपी नेताओं को फल जाता है। देख ही रहे हैं जगतप्रकाश नड्डा, रविशंकर प्रसाद, धमेंद्र प्रधान जैसे नेताओं को…ये सभी यहां के प्रभारी रह चुके हैं।

आईएफएस अवार्ड

इस बार राज्य वन सेवा के आठ अधिकारियों को आईएफएस अवार्ड होगा। इसके लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसके अलावा एडिशनल पीसीसीएफ, सीसीएफ का भी प्रमोशन होना है। एडिशनल पीसीसीएफ के लिए हालांकि, पहली बार ऐसा होगा कि पद अधिक है और दावेदार इकलौता। तीन पद के विरुद्ध सिर्फ सीसीएफ एसएसडी बड़गैया दावेदार हैं। इसी तरह सीसीएफ के पांच और सीएफ के सात पदों ंके लिए डीपीसी होने वाली है। संकेत हैं, बड़गैया को वाईल्डलाइफ चीफ बनाया जा सकता है। बड़गैया के पास अचानकमार टाईगर रिजर्व और बारनवापारा में वाईल्डलाइफ का लंबा अनुभव है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. 2009 बैच के किस आईएएस को एक बड़े जिले का कलेक्टर बनाकर भेजने की चर्चा है?
2. किस बड़े जिले के कलेक्टर के लचर कामकाज से सरकार बेहद नाराज है?

सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

मंत्रीजी को अब नाॅनवेज नहीं!

 संजय के दीक्षित

तरकश, 7 फरवरी 2021
मछली के कांटे आमतौर पर गले में फंसता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ के एक मंत्री के दांत में मछली का ऐसा कांटा फंसा कि उसकी तकलीफ से वे उबर नहीं पा रहे। मंत्रीजी गए थे डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी का दर्शन करने। रोपवे से उतरने के बाद वे रेस्ट हाउस पहुंचे। अफसरों ने उनकी खिदमत में कई तरह के मांसाहारी व्यंजनों का इंतजाम किया था। मंत्रीजी को पहले से भूख लगी थी…नानवेज देखने के बाद और तेज हो गई। बताते हैं, जल्दी के चक्कर में मछली का एक बड़ा कांटा उनके दांत में फंस गया। अब मामला मंत्री का था, सो वहां मौजूद अधिकारियों के हाथ-पांव फुल गए। आनन-फानन में डेटिस्ट को बुलाया गया। डेंटिस्ट ने काफी कोशिश की….नाकाम होने के बाद बोला, कांटा मसूड़े के बेस में घूस गया है…हास्पिटल में आपरेट कर निकालना पड़ेगा। मंत्रीजी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डेंटिस्ट ने हालांकि, कांटा निकाल दिया। किन्तु मंत्रीजी की तकलीफ दूर नहीं हुई है। अलबत्ता, मंदिर में दर्शन के बाद मछली खाने को लेकर सोशल मीडिया में मंत्रीजी का जमकर मजाक उड़ा। शायद यही वजह है कि मंत्रीजी के स्टाफ ने विभाग के अधिकारियों को फरमान जारी कर दिया है….मंत्रीजी अगर किसी मंदिर में दर्शन करने जाते हैं तो उसके बाद खाने में अनिवार्य रूप से शाकाहारी भोजन की व्यवस्था की जाए, मांसाहारी नहीं।


रोक्तिमा रिलीव, केडी कब?

आईएएस अवार्ड होने के बाद डिप्टी सिकरेट्री रोक्तिमा यादव राजभवन से रिलीव हो गई। उन्हें दो महीने पहिले राजभवन से हटाकर मंत्रालय भेजा गया था। मगर किन्हीं कारणों से इस पर अमल नहीं हो सका। जीएडी वाले आदेश निकालकर भूल गए और रोक्तिमा राजभवन में बनी रहीं। लेकिन, आईएएस अवार्ड होने के बाद रोक्तिमा की पोस्टिंग का आदेश निकला और वे मंत्रालय की रवानगी डाल दी। परन्तु, राजभवन में ज्वाइंट सिकरेट्री बनाए गए केडी कुंजाम का अभी कोई पता नहीं है। रोक्तिमा को राजभवन से हटाने वाले आदेश में ही कुंजाम को ज्वाइंट सिकरेट्री बनाया गया था। उस समय न रोक्तिम हटीं और न कुंजाम आए। लेकिन, अब रोक्तिमा हट गई हैं तो सवाल उठता है कुंजाम राजभवन का चार्ज कब लेंगे।

6 करोड़ का सफेद हाथी

छत्तीसगढ़ बनने के बाद फस्र्ट सीएम अजीत जोगी ने नए राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेेंट कारपोरेशन याने सीआईडीसी गठित किया था। बीजेपी सरकार मेें करीब 2005 तक यह कारपोरेशन ठीक-ठाक काम करता रहा। इसी ने टाटीबंध से तेलीबांधा तक और शास्त्री चैक से रेलवे स्टेशन तक फ्लाई ओवर का प्लान तैयार किया था। लेकिन, उसके बाद काडा और फिर एनआरडीए बनने के बाद सीआईडीसी को सरकार ने सफेद हाथी बनने पर मजबूर कर दिया। अमर अग्रवाल जब तक वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहे, सीआईडीसी में बैठते रहे। उनके बाद में कोई झांकने नहीं गया। आज इस निगम में 60 अधिकारी, कर्मचारी हैं। छह करोड़ का सलाना बजट है, जो सिर्फ वेतन पर खर्च होता है। लेकिन आपको यह जानकार ताज्जुब होगा कि यह छह करोड़ रुपए विशुद्ध तौर पर पानी में जा रहा है। क्योंकि, इस निगम के पास कोई काम नहीं है। अफसर, कर्मचारी आफिस आते हैं और हाजिरी लगाकर घर चल देते हैं। चीफ सिकरेट्री अमिताभ जैन कभी इसके एमडी रह चुके हैं। उन्हें सीआईडीसी के लिए कोई काम निकालने चाहिए ताकि, राज्य की जनता की जेब का पैसा इस तरह पानी में न जाए।

फर्स्ट आईएफएस

सब कुछ ठीक रहा तो कांकेर के सीसीएफ एसएसडी बड़गैया प्रमोट होकर जल्द ही एडिशनल पीसीसीएफ बन जाएंगे। राज्य वन सेवा से आईएफएस बनने वाले वे पहले अफसर होंगे, जो एडिशनल पीसीसीएफ की कुर्सी तक पहुंचेंगे। अभी तक कम-से-कम मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसी प्रमोटी आईएफएस को यह मौका नहीं मिला है। दरअसल, कम उम्र और फस्र्ट चांस में सलेक्शन होने के फायदे आखिरी समय में मिलते हैं। 96 बैच के आईएफएस बड़गैया अविभाजित मध्यप्रदेश में 20 साल की उम्र में एसीएफ सलेक्ट हो गए थे। इसी तरह आईपीएस राजीव श्रीवास्तव ने डीजी बनने का रिकार्ड बनाया था। राजीव डीजी के पद तक पहुंचने वाले देश के दूसरे प्रमोटी आईपीएस बन गए थे। ये रिकार्ड आज भी उनके नाम है।

कलेक्टरी के दावेदार

कलेक्टरों की लिस्ट निकलने की चर्चाएं तेज होती जा रही है। हालांकि, अभी ये हंड्रेड परसेंट नहीं है कि सरकार बजट सत्र के बाद लिस्ट निकालेगी या उससे पहिले। फिर भी दावेदारों में बेचैनी बढ़ रही है। अभी 2013 बैच पूरा नहीं हुआ है। छह में से सिर्फ विनीत नंदनवार और नम्रता गांधी कलेक्टर बन पाई हैं। चार बचे हैं। सीनियर लेवल पर बात करें तो 2006, 07 और 08 बैच के एक-एक आईएएस रायपुर, जांजगीर और रायगढ़ में कलेक्टर हैं। 2009 बैच में प्रियंका शुक्ला, सौरभ कुमार और समीर विश्नोई सिर्फ एक-एक जिले की कलेक्टरी किए हैं। समीर कोंडागांव में मात्र 11 महीने रह पाए। 2010 बैच में चार आईएएस हैं। इसमें से डाॅ0 सारांश मित्तर बिलासपुर और जयप्रकाश मौर्य धमतरी कलेक्टर हैं। कार्तिकेय गोयल हाल ही में महासमुंद कलेक्टर से रायपुर लौटे हैं। इस बैच की रानू साहू जरूर दो जिले की कलेक्टर रही हैं। लेकिन, दोनों जिले मिलाकर मुश्किल से डेढ़ साल। कांकेर में छह महीने और बालोद में करीब साल भर। 2011 बैच के भास्कर संदीपन एक महीने कलेक्टर रहे हैं। प्रमोटी में 2011 बैच में जितेंद्र शुक्ला भी हैं। बहरहाल, सवाल यह है कि लिस्ट में इनमें से कुछ अफसरों का नम्बर लग पाएगा?

फ्रंटफुट पर अफसर?

छत्तीसगढ़ में सरकार के दो बरस हो गए हैं। अब काम करने के लिए कुल जमा दो साल बचे हैं। पांचवा साल तो इलेक्शन ईयर होता है। उसमें काम होते नहीं। सिर्फ घोषणाएं होती हैं। वैसे भी, सरकार के दो साल में से एक साल महामारी में निकल गया। ऐसे में, अफसरों को अब फ्रंटफुट पर आकर बैटिंग करने की जरूरत है। खासकर कुछ चुनिंदा योजनाओं को लेकर। नरवा जैसी योजना छत्तीसगढ़ के लिए वरदान बन सकती है। छत्तीसगढ़ में 72 फीसदी से अधिक बारिश का पानी बहकर नदियों में चला जाता है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री पं0 श्यामाचरण शुक्ला के बाद छत्तीसगढ़ के वाटर रिसोर्सेज पर ध्यान नहीं दिया गया। नरवा योजना के तहत काम तो हो रहा मगर अभी उसे माॅडल के शेप में ही कहा जा सकता है। इससे काम नहीं चलेगा। भारत सरकार के पास वाटरशेड की कई योजनाएं होती हैं। सवाल है कि अफसर आगे बढ़े तब तो? इसके लिए कायदे से एक बोर्ड बना देना चाहिए। जब शौचालय बनाने के लिए आईएएस को डायरेक्टर बनाया जा सकता है तो नरवा जैसी योजना का जिम्मा किसी सीनियर आईएएस को क्यों नहीं दिया जा सकता।

अद्भुत नेता, अद्भुत काम

रायगढ़ के पूर्व विधायक रोशन अग्रवाल नहीं रहे। पत्रकार से नेता बने रोशन न केवल अद्भुत शख्शियत थे बल्कि होम वर्क भी उनका अद्भुत था। जो भी आदमी उनके आफिस गया, उनके फाइल वर्क को देखकर मुरीद बन गया। सीनियर पोजिशन से रिटायर एक आईएएस, जो रायगढ़ में एडिशनल कलेक्टर रह चुके हैं, उनकी माने तो रोशन जैसा जमीनी और फाइल वर्क वाले नेता उन्होंने नहीं देखा। वे बताते हैं, एक बार पूर्व सीएम डाॅ0 रमन सिंह रायगढ़़ के दौरे में रोशन के आफिस गए थे चाय पीने। रायपुर लौटकर उन्होंने कहा था….अपने विधानसभा क्षेत्र की कंप्लीट जानकारी रखने वाला रोशन जैसा आफिस मेरा भी नहीं है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. क्या बीजेपी के पुरंदेश्वरी के जवाब में कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया तीन दिनों के प्रवास पर छत्तीसगढ़ आए हैं?
2. बीजेपी सांसद सरोज पाण्डेय को केंद्र में मंत्री बनाया जाएगा, इस खबर में कितनी सत्यता है?

रविवार, 31 जनवरी 2021

बाबू से त्राहि माम आईपीएस

 संजय के दीक्षित

तरकश, 31 जनवरी 2021
राज्य पुलिस सेवा के 16 अधिकारियों को आईपीएस अवार्ड हुए ढाई साल गुजर गए। लेकिन, पराकाष्ठा देखिए…उनका अभी तक बैच अलाटमेंट नहीं हुआ है। अब बैच अलाट नहीं हुआ तो फिर पे फिक्शेसन और स्थायीकरण नहीं हो सकता। कायदे से भारत सरकार के मिनिस्ट्री आॅफ होम अफेयर से आईपीएस अवार्ड होने के दो-तीन महीने के भीतर बैच अलाट हो जाता है। इसके लिए संबंधित राज्य सरकार के गृह विभाग से भारत सरकार को लेटर लिखा जाता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ से ये लेटर अभी तक केंद्र को गया ही नहीं। जबकि, उन्हीं के साथ आईपीएस अवार्ड हुए यूपी, बिहार, झारखंड के अफसरों को कब का बैच अलाॅट हो गया। बताते हैं, मंत्रालय के एक बाबू पुलिस अधिकारियों की फाइल आगे बढ़ा नहीं रहा। उस भोपाली बाबू से पूरा पुलिस महकमा हलाकान है।


ओपी राठौर की याद

मंत्रालय में हाॅवी बाबूगिरी से दिवंगत डीजीपी ओपी राठौर की याद आ गई। नक्सल मोर्चे पर जाकर फोर्स को मोटिवेट करने वाले डीजीपी राठौर भी गृह विभाग के बाबुओें से बेहद परेशां रहते थे। उस समय छत्तीसगढ़ में सल्वा-जुडूम का आंदोलन बड़ा तेज था। बहुत सारी फाइलें मंत्रालय जाकर अटक जाती थी। तब राठौर खुद ही मंत्रालय के सेक्शन में बाबुओं के पास पहुंचकर फाइल ढूंढवाकर आगे बढ़वाते थे। खैर, वे डीजीपी थे, इसलिए बाबू उनके पहुुंचने पर काम कर देते थे। प्रमोटी आईपीएस अधिकारियों को वो दूसरा वाला आइडिया आजमाकर अपना काम करा लेना चाहिए। खामोख्वाह क्यों अपना नुकसान करवा रहे हैं।

आनंद को आनंद नहीं

तमाम चीजों के बाद भी राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आनंद मसीह को सरकार ने आईएएस अवार्ड कर दिया मगर पोस्टिंग के मामले में उनकी किस्मत काम नहीं कर रही। आईएएस अवार्ड होने के पांच महीने बाद भी सामान्य प्रशासन विभाग ने उनका आर्डर नहीं निकाला है। जबकि, 2005 बैच के डिप्टी कलेक्टरों की पोस्टिंग नोटिफिकेशन जारी होने के 15 दिनों के भीतर हो गई। बहरहाल, जाति प्रमाण पत्र केस में बर्खास्त हो चुके आनंद को बाद में हाईकोर्ट से स्टे मिल गया…उसके बाद आईएएस भी। लेकिन, आदेश न निकलने की वजह से वे रिकार्ड में अभी तक आईएएस नहीं बन पाए हैं। जाहिर है, आनंद को आईएएस बनने का आनंद नहीं आ रहा होगा।

ये ट्रेेंड ठीक नहीं

राजस्थान में एसीबी ने एसडीएम को रिश्वत लेते हुए ट्रेप कर जेल भेज दिया। मगर वहां कोई बवाल नहीं मचा। लेकिन, छत्तीसगढ़ में रिटायर एडिशनल कलेक्टर की गिरफ्तारी के विरोध में राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर लामबंद होने लगे हैं। आए दिन वे इसके लिए उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर रहे। इससे पहले एक फाॅरेस्ट अधिकारी के खिलाफ राप्रसे अधिकारी एकजुट हो गए थे। छत्तीसगढ़ में ये एक नई परंपरा की शुरूआत हो रही। इससे पहले पिछली सरकार में इसी तरह के वर्क कुछ आईएएस भी करते थे। शुक्र है, वे अभी शांत हैं।

किधर है एसीबी

राजस्थान एसीबी की बात निकली, तो कुछ दिन पहले वहां एक आईएएस को भी दिल्ली जाकर जांच एजेंसी के अफसरों ने गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, छत्तीसगढ़ की एसीबी और ईओडब्लू के अधिकारी किधर हैं, पता नहीं चल पा रहा। कार्रवाई के नाम पर पटवारी, बाबू जैसे इक्का-दुक्का कर्मचारियों को ट्रेप करने के अलावा एसीबी के खाते में 2020 में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं रही। छापे तो शायद एक भी नहीं पड़े। ये ठीक है कि एसीबी, ईओडब्लू के अफसर करप्शन को खत्म नहीं कर सकते।

कलेक्टरों की लिस्ट

धान खरीदी के बाद कलेक्टरों की एक लिस्ट निकलने की चर्चा है। धान खरीदी में जिन कलेक्टरों ने बढ़ियां काम किया है, उन्हें इसका ईनाम देते हुए और महत्वपूर्ण जिला दिया जा सकता है। हालांकि, सरकार से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि अभी इस पर विचार चल रहा कि कलेक्टरों का ट्रांसफर अभी किया जाए या बजट सत्र के बाद। वैसे भी धान खरीदी में सभी कलेक्टरों ने आउटस्टैंडिंग काम किया है। सरकार का सिर्फ एक लाइन का निर्देश था…धान खरीदी में कोई चूक नहीं होनी चाहिए….इसके अलावा कोई हस्तक्षेप और डांट-फटकार नहीं। फिर भी कलेक्टरों ने रिकार्ड बना डाला। वो भी बारदाना की समस्या के बाद भी। लिहाजा, अगर ट्रांसफर के लिए धान खरीदी आधार बनाया जाएगा तो सरकार की काफी मुश्किलें जाएगी। क्योंकि, इसमें मैदानी इलाकों के सभी कलेक्टरों ने बढ़-चढ़कर काम किया है।

एसपी, आईजी किसलिए?

कोरिया के मनचले टीआई की पत्नी कोरिया के एसपी, सरगुजा के आईजी के आगे न्याय के लिए गिड़गिड़ाती रही। लेकिन, एसपी, आईजी ने कोई कार्रवाई नहीं की। डीजीपी डीएम अवस्थी को हस्तक्षेप कर टीआई को सस्पेंड करना पड़ा। डीजीपी ने दो साल में दो दर्जन से अधिक टीआई को सस्पेंड किया है। चिंता की बात है….जो काम एसपी, आईजी को करनी चाहिए, वो पुलिस महकमे के मुखिया को करना पड़ रहा। सवाल यह भी है कि एसपी ऐसे खटराल इंस्पेक्टरों को संरक्षण क्यों दे रहे हैं?

नौकरशाहों से गलत आंकलन?

26 जनवरी को राजभवन की टी पार्टी में नौकरशाहों की उपस्थिति बेहद क्षीण रही। मंत्रालय से सिकरेट्री के नाम पर दो ही लोग पहुंचे। और, पीएचक्यू से भी यही कोई तीन-चार। हालांकि, अफसर जैसा समझ रहे हैं, वो अब पहले जैसा नहीं लगता….खारुन नदी में काफी पानी बह चुका है। राजधानी के पंडरी में स्मार्ट सिटी के कार्यक्रम में राज्यपाल गर्मजोशी से शिरकत की। महिला बाल विकास मंत्री, मेयर समेत तमाम लोग उपस्थित थे। खैर, नौकरशाहों को इतना कैलकुलेटिव नहीं होना चाहिए।

अच्छी खबर

मोबाइल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के दौर में जब पुस्तकें पढ़ने का चलन कम होता जा रहा है बिलासपुर में सेंट्रल लायब्रेरी के इनाॅग्रेशन के पांच दिन के भीतर साढ़े तीन हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया। वहां नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने मिलकर भव्य डिजिटल लायब्रेरी बनवाया है। जगदलपुर में भी नई लायब्रेरी बनी है। राजधानी में नालंदा परिसर पहले से बढ़ियां रन कर रहा है। कहने का आशय यह है कि अगर लायब्रेरी हो तो आज भी पढ़ने वाले लोग हैं। सरकार को कम-से-कम नगर निगमों को अनिवार्य करनी चाहिए कि एक लायब्रेरी बनवाए। वैसे भी, नगर निगमों का ये कर्तव्य है कि अपने नागरिकों को एजुकेट करने…उन्हें पढ़ने का वातावरण मुहैया कराएं। सिर्फ नाली तोड़ो, फिर बनाओ, फिर तोड़ो…और अवैध बिल्डिंगों को संरक्षण दें, यही काम थोड़े है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. निगम, मंडलों में लाल बत्ती की दूसरी लिस्ट किधर अटक गई है?
2. एक पुलिस कप्तान का नाम बताइये, जिनकी कीर्तिमानी पारी से लग रहा कि उन्हें अब दोबारा एसपी बनने का मौका नहीं मिलेगा?

शनिवार, 23 जनवरी 2021

एकेडमी या डंपिंग यार्ड?

 संजय के दीक्षित

तरकश, 24 जनवरी 2021
रायपुर से लगे चंदखुरी पुलिस अकादमी में कभी एसपी लेवल के एकाध अफसर होते थे। कई मर्तबा तो एडिशनल एसपी के हाथ में एकेडमी की कमान रही। लेकिन, इस समय एडीजी जीपी सिंह एकेडमी के डायरेक्टर हैं। डीआईजी संजीव शुक्ला डिप्टी डायरेक्टर और आईपीएस विजय अग्रवाल एसपी। पुलिस ट्रेनिंग इंस्ट्टियूट में इतने सीनियर अफसरों की तैनाती की दो ही वजह हो सकती है। या तो गृह विभाग पुलिस की ट्रेनिंग को और स्ट्रांग करना चाह रहा या फिर एकेडमी को आईपीएस का डंपिंग यार्ड बना रहा है।


अद्भुत रिकार्ड

आपको जानकर ताज्जुब होगा मगर यह सही है कि छत्तीसगढ़़ में एक ऐसे डायरेक्टर हैं, जो राज्य बनने के समय इस पद पर पहली पोस्टिंग पाए और आज भी उनकी कुर्सी कायम है। याने लगातार 20 बरसों से। आयुष विभाग के इस डायरेक्टर का नाम है डाॅ0 जीएस बदेशा। राज्य बनने के दौरान नवंबर 2000 में वे भोपाल से रायपुर आए थे। और क्रीज पर इस तरह जमे कि कोई उन्हें आउट नहीं कर सका। पिछली सरकार में भी उनकी कुर्सी सुरक्षित रही और इस सरकार के दो साल में भी उनका डायरेक्टर का पद बरकरार है। वाकई, अपने आप में यह अद्भुत रिकार्ड होगा। भारत में तो होगा ही। क्योंकि, विभाग प्रमुख के पद पर इतना लंबे समय तक कोई रहता नहीं। अधिक-से-अधिक चार साल, पांच साल। इसके बाद कोई-न-कोई दावेदार खड़ा हो ही जाता है। लंबे समय तक एक ही आदमी के कुर्सी पर जमे रहने का इफेक्ट तो पड़ता ही है। मध्यप्रदेश में आईएएस आयुष डायरेक्टर ने कोरोना के समय इतना काम किया कि हर जगह आयुष विभाग की तारीफ हुई। और छत्तीसगढ़ में…?

प्रमोशन के बाद

लगता है, पुलिस अधीक्षकों की लिस्ट अब प्रमोशन के बाद ही निकल पाएगी। प्रमोशन के लिए पुलिस मुख्यालय से गृह विभाग को फाइल भेजी जा चुकी है। इसमें पी सुंदरराज और रतनलाल डांगी डीआईजी से आईजी प्रमोट होंगे। हालांकि, दोनों फिलहाल बस्तर और बिलासपुर के प्रभारी रेंज आईजी हैं। प्रमोशन के बाद वे पूर्णकालिक आईजी बन जाएंगे। उनके अलावा बस्तर एसपी दीपक झा और बालोद एसपी जीतेंद्र मीणा के साथ कुछ प्रमोटी आईपीएस प्रमोट होकर डीआईजी बन जाएंगे। ये जरूर है कि इस बार पिछले साल की तरह आईपीएस के प्रमोशन में विलंब नहीं होगा। हालांकि, बाकी राज्यों में एक जनवरी को प्रमोशन हो जाता है। छत्तीसगढ़ में भी 2007-08 तक यह परिपाटी रही। इसके बाद इसमें लेट होता चला गया।

आईएएस का भी लोचा

दो दशक बाद यह पहला मौका है, जब आईएएस भी प्रमोशन में पिछड़ गए। वरना, साल खतम होने के दो-चार महीने पहले ही प्रमोशन हो जाता था। इस बार 2005 बैच को सिकरेट्री बनना है। सामान्य प्रशासन विभाग से फाईल मूव भी हो गई है। लेकिन, मामला कहीं पर रुक गया है। वैसे भी 2005 बैच के कुछ आईएएस हिट लिस्ट में हैं। इस बैच में कुल जमा आठ आईएएस हैं। इनमें छह डायरेक्ट हैं और दो प्रमोटी। छह में से ओपी चैधरी ने नौकरी छोड़कर सियासत में उतर आए हैं। मुकेश बंसल और रजत कुमार भारत सरकार में डेपुटेशन पर है। राजेश टोप्पो के खिलाफ जांच चल रही है। संगीता आर इस सरकार के शपथ लेने के बाद से लगातार छुट्टी पर हैं। वे कब लौटेंगी कोई बताने की स्थिति में नहीं है। बचे एस प्रकाश। प्रकाश के संदर्भ में गेहूं के साथ घून वाला मामला है। इसमें दिलचस्प यह है कि इस बैच में टीपी वर्मा और नीलम एक्का प्रमोटी आईएएस हैं। वे डायरेक्ट यानी आरआर आईएएस के फेर में लटक गए हैं। अभी तक होता ऐसा था कि डायरेक्ट के चलते प्रमोटी आईएएस वैतरणी पार कर जाते थे। पहली दफा होगा कि डायरेक्ट के चलते प्रमोटी अफसरों का प्रमोशन लटक गया है।

नो चेंज

सिकरेट्री प्रमोट होने वालों में राजनांदगांव कलेक्टर टीपी वर्मा भी शामिल हैं। संकेत हैं, वे प्रमोशन पाने के बाद भी कलेक्टर बने रहेंगे। वैसे भी राज्य सरकार पर ये निर्भर करता है कि प्रमोशन के बाद अफसर से क्या काम लेना है। आखिर, सीके खेतान, आरपी मंडल और हाल ही में डाॅ0 संजय अलंग सिकरेट्री बनने के बाद भी कलेक्टर बने रहे थे। लिहाजा, टीपी में भी कोई दिक्कत नहीं आएगी।

अहम फैसला

छत्तीसगढ़ में बिना आफिस खोले या जीएसटी नम्बर के ठेका, सप्लाई का काम करने वालों की अब मुसीबतें बढ़ने वाली है। सरकार ने एक मार्च से प्रदेश में जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। बाहरी सप्लायरों और ठेेकेदारों को अब छत्तीसगढ़ का जीएसटी नम्बर लेना होगा। इससे राज्य का रेवन्यू तो बढ़ेगा ही यहां डिस्ट्रीब्यूटर्स बनाने की अब विवशता हो जाएगी। इससे लोकल लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अभी होता ऐसा था कि अफसर दिल्ली, मुंबई और आंध्रप्रदेश के अपने जान-पहचान वाले सप्लायरों को बुलाकर वर्क आर्डर दे देते हैं। मगर अब जीएसटी नम्बर लेने के बाद ही उनका कुछ हो पाएगा।

अमर का राज

रमन सरकार के कई मंत्री घर में बैठने की वजह से ओवरवेट का शिकार होते जा रहे हैं मगर अमर अग्रवाल का फिटनेस देखकर लोग हैरान हैं। अमर ने न केवल 15 किलो वेट कम किया है बल्कि एकदम स्लिम कर लिया है। हालांकि, सूबे में वेट और भी कई लोग कम किए हैं लेकिन, उनके चेहरे पर इसका विपरीत असर साफ दिखता है। लेकिन, अमर अग्रवाल ने पता नहीं कौन सी बुटी खाई है कि वे और निखर गए हैं। अमर से मिलने वाले भाजपाई ही नहीं, कांग्रेसी भी पहला सवाल यही करते हैं, हमको भी इसका राज बताइये।

अंत में दो सवाल आपसे

1. नया रायपुर के 13 करोड़ के बाॅटनिकल गार्डन के घोटोले की जांच क्यों ठंडे बस्ते में डाल दी गई?
2. भाजपा आक्रमक हो रही है या फिर ये बीजेपी प्रभारी पुरंदेश्वरी का इम्पैक्ट है?

मंगलवार, 19 जनवरी 2021

तरकश : सूरा प्रेमियों…बुरी खबर!

 संजय के दीक्षित

तरकश के तीर, 17 जनवरी 2021

सूरा प्रेमियों…बुरी खबर!

कोरोना की वैक्सिन लगनी शुरू हो गई है। जाहिर तौर पर लोगों में राहत के साथ खुशी के भाव हैं। लेकिन, जिन डाॅक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगाए गए हैं, उनमें से कुछ लोगों पर क्या गुजर रही, उनका दर्द कोई समझ नहीं सकता। टीका लगाने से पहले उन्हें दो टूक बताया गया…अगला टीका 28 दिन बाद 13 फरवरी को लगेगी। और इसके चार हफ्ते बाद तक आप ड्रिंक नहीं कर सकते। यानी 16 जनवरी से लेकर 13 मार्च तक। लगभग दो महीने। जो ड्रिंक नहीं करते उनके लिए भले ही यह मामूली बात होगी। लेकिन, जो शौकीन हैं या रोज वाले….? उनका क्या होगा? लाॅकडाउन में दोगुने-तीगुने रेट पर अपने ब्रांड का इंतजाम कर लेने वाले सूरा प्रेमियों के लिए यह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं होगा। इससे इतर चिंता की बात ये भी है, ड्रिंक की बंदिशों की वजह से कुछ हेल्थ अफसर और वर्कर ऐन वक्त पर गायब हो गए। ये ठीक नहीं। उन्हें समझना होगा शराब बड़ी नहीं, जान बड़ी है। ऐसे लोगों को उन परिवारों से मिलना चाहिए, जिन्होंने कोरोना में अपने प्रिये को खो दिया।

नाम का चक्कर

सेम नाम भी कई बार मुसीबत का सबब बन जाता है। 11 जनवरी को राजधानी में ऐसा ही कुछ हुआ कि दो साल से ठंडी पड़ी ब्यूरोक्रेसी में उबाल आ गया। दरअसल, फायनेंस सर्विसेज की एडिशनल डायरेक्टर गीता सोनी के बेटे के खिलाफ राजधानी के एक थाने में मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ। सोशल मीडिया ने अतिउत्साह में इसे महिला आईएएस के बेटे के नाम से खबर चला दी। जाहिर है, इस पर बवाल तो मचना ही था। आईएएस के व्हाट्सएप ग्रुप में इंक्लाब जैसी स्थिति निर्मित हो गई। महिला आईएएस ने लिखा, साजिशतन मेरी छबि खराब करने की कोशिश की जा रही। इसके बाद कुछ काॅमरेड आईएएस अधिकारियों ने पूरा ठीकरा पुलिस पड़ फोड़ दिया। चलिये, नाम के फेर में ही सही, आईएएस जागे तो। वरना, दो साल से व्हाट्सएप ग्रुप पर जन्मदिन के विश के अलावा अभिव्यक्ति की आजादी दिखाई नहीं पड़ रही थी।

बड़ा और छोटा

ब्यूरोक्रेसी में एक नाम के चक्कर में गफलत होना नई बात नहीं है। हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रसन्न्ना पी की जगह प्रसन्ना आर की पोस्टिंग कर दी थी। कुछ घंटे बाद जब चूक का अहसास हुआ तो फिर संशोधित आदेश प्रसन्ना पी के नाम से निकाला गया। इन दोनों अधिकारियों के नाम पर बड़ा कंफ्यूजन होता है। इसीलिए, जल्दी समझने के लिए लोग बड़ा प्रसन्ना, छोटा प्रसन्ना कहते हैं। बड़ा प्रसन्ना मतलब प्रसन्ना आर। और, छोटा….प्रसन्ना पी। छोटा का आशय जूनियर से है। इसी तरह पहले डीएस मिश्रा और जीएस मिश्रा में होता था। जल्दी बोलने पर लोग एक बार में समझ नहीं पाते थे। फिर डीएस मतलब दाढ़ी वाले और जीएस याने जी फाॅर गणेश।

आईएफएस में ऐसा क्यों

रिटायर पीसीसीएफ केसी यादव की कोरोना से मौत हो गई। जाहिर तौर पर इतने बड़ी घटना अगर आईएएस में हुई होती तो उनके घर वालों को भटकना नहीं पड़ता। लेकिन, केसी यादव की पत्नी सुनिति कई महीने से अफसरों का चक्कर लगा रही हैं कि कोई उनकी मदद कर दें तो पेंशन और पीएफ, ग्रेच्यूटी निकल जाए। असल में, रिटायरमेंट के चंद महीने बाद ही यादव को कोरोना ने अपना शिकार बना लिया। रिटायरमेंट के बाद जो पैसा मिलता है, वो भी पूरा नहीं मिला था। उपर से उनकी मौत को छह महीने से उपर होने जा रहा, मगर अभी भी पेंशन की फाइल भटक रही है।

सीएम की घोषणा और…

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नगरनार स्टील प्लांट को केद्र द्वारा निजी हाथों में बेचे जाने के खिलाफ बड़ा फैसला लेते हुए उसे खरीदने का ऐलान किया। लेकिन, बस्तर के जनप्रतिनिधि सीएम के इस गंभीर फैसले को समझने के लिए लगता है तैयार नहीं। हाल यह है कि बाहर से प्लांट की कमीशनिंग के लिए आ रहे एक्सपर्ट को गेट से भीतर नहीं घुसने दिया जा रहा। वो भी तब, जब मुख्यमंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है। ऐसे में, नगरनार प्लांट के प्रति एक स्वाभाविक लगाव बढ़ जाता है। बहरहाल, भिलाई स्टील प्लांट से भी वृहद और अतिआधुनिक नगरनार संयंत्र अब आखिरी स्टेज पर है। 20 हजार करोड़ के इस प्लांट में अगर बाधाएं खड़ी की गईं तो निश्चित तौर पर इसका नुकसान छत्तीसगढ़ और बस्तर का होगा। क्योंकि, सरकार ने अगर उसे खरीदना तय कर लिया है तो पहला मौका राज्य को ही मिलेगा।

चोर की दाढ़ी में तिनका

पिछले तरकश में एक सवाल था….एक रिटायर आईएएस प्रेम की गहराइयों में गोते लगा रहे हैं। इसके बाद रिटायर नौकरशाहों में जाहिर है बेचैनी बढ़नी ही थी। बताते हैं, कुछ के घर में सुबह से गृह युद्ध छिड़ गया तो कुछ की घरवाली अभी भी मुंह फुलाई हुई हैं….सवाल एक ही है….मैंने तुम्हारे लिए क्या नहीं किया। एक अफसर ने चोर की दाढ़ी में तिनका की की तरह खुद ही पत्नी को तरकश पढ़वा दिया….बाबा मैं नहीं हूं। इसमें इंटरेस्टिंग यह रहा कि सवाल किसी एक रिटायर आईएएस के बारे में था लेकिन, बाद में स्तंभकार के पास फोन करके कई और अफसरों के बारे में भी लोगों ने सनसनीखेज सूचनाएं दे डाली।

एक और आयोग

29 जनवरी को बाल संरक्षण आयोग की चेयरमैन प्रभा दुबे का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। प्रभा भाजपा शासन काल में चेयरमैन बनी थी। चूकि एक्ट के तहत यह आयोग बना है, इसलिए बिना किसी गंभीर मामलों के आयोग के चेयरमैन को हटाया नहीं जा सकता। लिहाजा, सरकार बदलने के बाद भी प्रभा दुबे अपने पद पर कायम रहीं। लाल बत्ती के दावेदारों के लिए एक वैकेंसी और मिल जाएगी।

छत्तीसगढ़ स्वर्ग कैसे?

अफसरों को खुश कर सरकार को चूना लगाने वाली कंपनियों के लिए छत्तीसगढ़ किस तरह स्वर्ग है, ये आज आपको बताते हैं। झारखंड की आईटी कंपनी को छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री आफिस का काम मिला है। कंपनी ने चार साल पहले करीब 10 करोड़ लगाकर आफिस में कंप्यूटरीकरण का काम किया है। और इसके एवज मेें हर साल लगभग 50 करोड़ ऐंठ रही है। वो ऐसे हुआ कि कंपनी ने पिछले सरकार में अधिकारियों से रजिस्ट्री के एक पेज का 60 रुपए रेट तय करवा लिया। जमीन की एक रजिस्ट्री में लगभग 20 पेज का कागज बनता है। यानी एक रजिस्ट्री पर करीब 12 सौ रुपए का सेवा कर कंपनी को देना पड़ता है। सूबे में साल में लगभग चार लाख जमीन की रजिस्ट्री होती है। इस हिसाब से एक साल में 48 करोड़ का भुगतान कर रही सरकार। जबकि, रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी चाहें तो अपना साफ्टवेयर बनवा सकते हैं। डा0 आलोक शुक्ला जब इतने बड़े लेवल पर धान खरीदी का साफ्टवेयर दो महीने में बनवा सकते हैं तो रजिस्ट्री विभाग क्यों नहीं। मगर अधिकारी नकारे और भ्रष्ट हों तो क्या किया जा सकता है। दिलचस्प यह है झारखंड की इस कंपनी को झारखंड में भी काम मिला था। वहां 20 रुपए रेट था। लेकिन, विरोधों के बाद झारखंड सरकार ने कंपनी से करार खतम करते हुए खुद का कंप्यूटराइजेशन कर लिया। दूसरा, तत्कालीन चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड एक बार रजिस्ट्री आफिस का मुआयना करने पहुंचे थे तो कंपनी के रेट पर हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा था, इतना मार्जिन ठीक नहीं। रेट कम किया जाए। फिर भी रेट कम नहीं किया गया।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एसपी की लिस्ट पहले निकलेगी या एसपी से डीआईजी का प्रमोशन पहले होगा?

2. एक मंत्री को किस वजह से हर फ़ोटो फ्रेम में जगह मिल जाती है?