रविवार, 29 अक्तूबर 2017

मूणत की असली कमाई!

29 अक्टूबर
छह हजार करोड़ रुपए के बजट वाले पीडब्लूडी विभाग और बोरियों में रुपिया आने वाले ट्रांसपोर्ट विभाग का मंत्री रहते हुए राजेश मूणत ने 14 बरस में क्या कुछ किया, पता नहीं। मगर एक कमाई तो उन्होंने अवश्य की, वह सरकार और संगठन का विश्वास जीतने की। सेक्स सीडी कांड में जिस तरह मूणत के समर्थन में सरकार, संगठन और ब्यूरोक्रेट्स खड़े हुए….भाजपा के लोग भी हैरान हैं। पार्टी मुख्यालय में 27 अक्टूबर की शाम एक कार्यक्रम में एक सीनियर मंत्री का साथी मंत्री से बात करते हुए दर्द छलक आया….मेरे समय एक आदमी सामने नहीं आया और आज राजेश के पक्ष में पूरी पार्टी आ गई है। बात सही भी है….याद होगा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री होने के बाद भी संजय जोशी आखिर सेक्स कांड में न केवल अकेले पड़ गए थे, बल्कि उनका कैरियर भी खतम हो गया। एमपी के राघवजी का मामला तो हाल का है। ऐसे ही एक मामले में राघवजी को फ्लैट का ताला तोड़कर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लेकिन, मूणत को बचाने के लिए सरकार के रणनीतिकार रात भर जागकर आपरेशन विनोद वर्मा की मानिटरिंग करते रहे। अगले दिन दोपहर पार्टी अध्यक्ष के साथ आधा दर्जन मंत्री थाना पहुंच गए। मूणत की असली कमाई शायद यही होगी।

भूपेश की होशियारी

सेक्स सीडी कांड में पीसीसी चीफ भूपेश बघेल द्वारा हड़बड़ी में बुलाई गई प्रेस कांफें्रस में जिस तरह उन्होंने होशियारी बरतते हुए मंत्री का नाम नहीं लिया, यहीं से शक की सुई घूमनी शुरू हो गई थी। जांच एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए कि भूपेश जैसे अग्रेसिव लीडर मंत्री का नाम लेने में आखिर क्यों हिचक रहे हैं। इसे ही अहम सूत्र मानते हुए पुलिस आगे बढ़ी। और, मंत्री राजेश मूणत के प्रति लोगों को लग रहा था कि मामले में कुछ गड़बड़ है।

नए सीएस की ट्रेनिंग?

बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी जाने के बाद 83 बैच के आईएएस अजय सिंह का अगला चीफ सिकरेट्री बनना लगभग तय है। लेकिन, पोस्टिंग कब होगी, सरकार इस पर से पर्दा नहीं उठा रही है। विवेक ढांड मार्च तक अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या फिर…..। ढांड ने हाल ही में पी जाय उम्मेन का सर्वाधिक समय तक सीएस रहने का रिकार्ड ब्रेक किया है। बहरहाल, आजकल सरकारी कार्यक्रमों में एडिशनल चीफ सिकरेट्री अजय सिंह की सक्रियता बढ़ गई है। सरकारी खरीदी के लिए जेम पोर्टल के एमओयू में उन्हें चीफ सिकरेट्री के बगल में बिठाया गया। जबकि, यह विशुद्ध रुप से इंडस्ट्री डिपार्टमेंट का प्रोग्राम था। अजय सिंह के खेती-किसानी वाली विभाग से इसका कोई ताल्लुकात नहीं था। न ही उनके अलावा कोई दीगर एसीएस थे। जेम के इस प्रोग्राम के बाद ब्यूरोक्रेसी में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सरकार अगले चीफ सिकरेट्री के रूप में अजय सिंह को ट्रेंड कर रही है। ये अलग बात है कि कलेक्टर कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री साफ कर चुके हैं कि सीएस अभी रिटायर नहीं हो रहे हैं। लेकिन, लोगों के पास इसका भी जवाब है….राजनीतिज्ञों के हर हां में ना छिपा होता है।

पीएचक्यू का सेंशर

24 अक्टूबर के एसपी कांफ्रेंस के बाद कई पुलिस अधीक्षक दुखी हैं। उनके कामों को जिस ढंग से प्रेजेंट किया जाना था, नहीं किया गया या उसे सेंशर कर दिया गया। दरअसल, पुलिस मुख्यालय में सीएम के समक्ष प्रेजेंटेशन दिया जाना था, इसलिए जिलों से पुलिस की उपलब्धियां मंगाई गई थीं। आरोप है कि मुख्यालय के सीनियर अफसरों ने कई एसपी के कामों को सेंशर करते हुए अपने चहेते पुलिस अधीक्षकों के काम को सीएम के सामने बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर डाला। अगर ऐसा है तो एसपीज का दुखी होना लाजिमी है।

शरारत की पोस्टिंग

व्हाट्सएप ग्रुपों में हफ्ते भर से एसपी की पोस्टिंग की लिस्ट मूव हो रही है। इसके अनुसार बिलासपुर, रायपुर, महासमुंद, रायगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, अंबिकापुर, जांजगीर, बालोद में नए एसपी के बकायदा नाम और जिला लिखा हुआ है। जाहिर है, जिनके नाम ट्रांसफर लिस्ट में वायरल हो रहे हैं, उनके हर्ट बिट्स बढ़े हुए हैं। लेकिन, वास्तव में ऐसा कुछ है नहीं। सिवाय फेक मैसेज के। सरकार में आईएएस, आईपीएस लेवल पर इस तरह ऐलान कर या किसी को बता कर ट्रांसफर नहीं किए जाते। वो भी 15 साल वाली सरकार में। बोनस तिहार, सेक्स सीडी और राज्योत्सव में व्यस्त सरकार के पास अभी इस पर सोचने के लिए वक्त नहीं है।

एक और सिकरेट्री की बिदाई

इरीगेशन सिकरेट्री गणेश शंकर मिश्रा 31 अक्टूबर याने सोमवार को रिटायर हो जाएंगे। मिश्रा के रिटायर होने के बाद सिकरेट्री लेवल पर एक और आईएएस की कमी हो जाएगी। जाहिर है, छत्तीसगढ़ में सिकरेट्री लेवल पर अफसरों पर काफी टोटा है। अफसर या तो रिटायर होते जा रहे हैं या फिर सरकार के मापदंड पर अनफिट हैं। लिहाजा, स्पेशल सिकरेट्री लेवल के आईएएस को सिकरेट्री की कमान दी जा रही है। अब देखना है, गणेश शंकर के बाद इरीगेशन का चार्ज किसी सीनियर सिकरेट्री को दिया जाता है या फिर किसी नए को अजमाया जाएगा।

नया पीसीसीएफ

प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरके टम्टा 30 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे। याने सिर्फ महीने भर बाद। टम्टा के रिटायरमेंट की चर्चा के साथ ही नए पीसीसीएफ के लिए वन महकमे में जोर आजमाइश शुरू हो गई है। टम्टा के बाद दो आईएफएस के नाम प्रमुखता से चल रहे हैं। पहला आरके सिंह और दूसरा, मुदित कुमार। आरके सिंह फिलहाल पीसीसीएफ वाईल्डलाइफ हैं और मुदित कुमार पीसीसीएफ लघु वनोपज संघ।

अंत में दो सवाल आपसे

1. चीफ सिकरेट्री को छह महीने का एक्सटेंशन देने की खबर प्लांट करने के पीछे क्या उद्देश्य हो सकते हैं?
2. सीडी कांड में सीबीआई जांच के ऐलान होने के बाद क्या पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं?

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अप्रिय एपीसोड

22 अक्टूबर
संजय दीक्षित
रायपुर के एक बेहद छोटे से पोस्ट असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शोयब काजी पर कार्रवाई को लेकर सरकार से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक उलझ गई है। शोयब को सीएम के फंक्शन से गायब रहने पर प्रिंसिपल सिकरेट्री लेबर आरपी मंडल ने सस्पेंड किया था। इसके लिए उन्होंने नोटशीट भेजकर सीएम से बकायदा अनुमोदन लिया था। लेकिन, पहले तो लेबर मिनिस्टर भैयालाल राजवाड़े ने मंडल को न केवल नोटिस थमा दी बल्कि अफसर का निलंबन भी अवैध करार दिया। चूकि, कार्रवाई के लिए हरी झंडी सीएम ने दी थी, लिहाजा सरकार हरकत में आई और अफसर के सस्पेंशन के लिए मंत्रालय से आर्डर जारी किया गया। मंत्रालय का आदेश मिलते ही रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने डिप्टी कलेक्टर सीमा ठाकुर को असिस्टेंट लेबर कमिश्नर का चार्ज सौंप दिया। लेकिन, लेबर कमिश्नर अविनाश चंपावत को यह नागवार गुजरा। बताते हैं, लेबर एक्ट के अनुसार डिप्टी कलेक्टर को यह चार्ज नहीं दिया जा सकता। लिहाजा, लेबर कमिश्नर ने डिप्टी कमिश्नर की पोस्टिंग को खारिज कर दिया। सरकार के अफसरों में इस तरह टकराव से मैसेज अच्छा नहीं गया है। सड़क पर इस तरह टकराव को आखिर अराजकता ही तो कहा जाएगा।

वाह विधायकजी!

सरगुजा के एक विधायक को सत्ता के मद में थानेदार से फोन पर दुर्व्यवहार करना महंगा पड़ गया। बताते हैं, विधायक ने थानेदार को किसी मुजरिम को छोड़ने के लिए कहा था। थानेदार ने नहीं सुनी। इस पर नेताजी भड़क गए….फोन पर अ-शालीन शब्दों की बरसात कर डाली। विधायकजी को पता नहीं था कि उनका फोन टेप हो रहा है। थानेदार ने जिले और सरगुजा रेंज के सीनियर अफसरों को वह टेप सुनवा दिया। पुलिस अधिकारियों ने नेताजी को बुलवाकर जब टेप सुनवाया तो उनकी हालत पूछिए मत! उन्होंने सीनियर अफसरों के सामने हाथ ही नहीं जोड़ा बल्कि थानेदार से भी माफी मांगने में देर नहीं लगाई।

सकते में भूपेश खेमा

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ एवं गंभीर नेता मोतीलाल वोरा के तेवर से पूरी कांग्रेस पार्टी सकते में है। पार्टी प्रभारी पीएल पुनिया के ऐलान के बाद भूपेश बघेल की दोबारा ताजपोशी एकदम तय मानी जा रही थी। लेकिन, वोरा ने यह कहकर कि भूपेश अभी पीसीसी चीफ है…आगे कौन होगा, नहीं बता सकता….कांग्रेस में खलबली मचा दी है। वोरा गुट ने जिस तरह से अबकी दिवाली मनाने आए वोराजी के स्वागत में शक्ति प्रदर्शन किया, उससे भी भूपेश खेमा हैरान है। स्वागत ऐसा हुआ, वोरा को एयरपोर्ट से राजधानी के गीतानगर बंगले में पहुंचने में ढाई घंटे से अधिक समय लग गए।

तीन दिन टाईट

मंत्री से लेकर सूबे के कलेक्टर, एसपी के लिए 22 से लेकर 24 अक्टूबर तक बड़ा टाईट रहने वाला है। 22 को बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक है। इसमें बताते है, मंत्रियों से पूछा जाएगा कि पार्टी प्रमुख अमित शाह के निर्देशों का वे कितना पालन कर रहे हैं। वहीं, 23 को कलेक्टर और 24 को एसपी कांफ्रेंस है। दोनों दिन कांफें्रस में सीएम दिन भर रहेंगे। जाहिर है, अब सरकार रिव्यू के लिए कलेक्टर्स, एसपी को तलब कर रही है तो टेंशन तो रहेगा ही।

एसपी के लिए सेपरेट टाईम

पिछले 9 एवं 10 जनवरी को कलेक्टर्स, एसपी कांफ्रेंस में एसपी का अलग से रिव्यू नहीं हुआ था। अलबत्ता, 10 को दोनों को एक साथ बिठाया गया। इस बार 24 को फर्स्ट हाफ में कलेक्टर्स, एसपी की सीएम ज्वाइंट मीटिंग लेंगे। इसके बाद सेकेंड हाफ में सिर्फ एसपी का रिव्यू होगा। एसपी का इसलिए अलग से रखा गया है क्योंकि, कलेक्टर्स के साथ एक तो एसपीज को टाईम नहीं मिलता। और, फिर कलेक्टरों के सामने खुलकर वे अपनी बात नहीं रख पाते। सो, तय किया गया है कि एसपी को एक हाफ अलग से दिया जाए। हालांकि, अच्छा होता कि एसपी को फर्स्ट हाफ में रखा जाता। दो साल पहले भी एसपी को अलग से बिठाया गया था। लेकिन, दिन भर कलेक्टर्स कांफ्रेंस में सरकार इतनी थक गई थी कि एसपी के साथ मीटिंग भाषणों में सिमट गई थी।

सरकार पर प्रेशर

11 साल बाद राज्योत्सव में फिर से राष्ट्रपति आ रहे हैं। सात नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समापन समारोह के चीफ गेस्ट होंगे। इससे पहिले 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे कलाम आए थे। समापन समारोह में राष्ट्रपति दो दर्जन से ज्यादा राज्य सम्मान भी प्रदान करेंगे। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना है, इसलिए सरकार पर प्रेशर तेज हो गए हैं। पुरस्कारों के लिए चौतरफा फोन आ रहे हैं। लेकिन, सरकार के सामने दिक्कत यह है कि 17 सालों में सभी ठीक-ठाक लोगों को पुरस्कार मिल गए हैं। अब जो नाम आ रहे हैं, सरकार के सामने माथा सिकोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डेढ़ साल से किसी खास मकसद के लिए मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी रिजर्व रखने के बाद सरकार अब किस उलझन में फंस गई है?
2. किस आईएएस पर सरकार की भृकुटी तनी है….हो सकता है, जल्द ही उसका बुरा समय आ जाए?

मंत्री से तगादा

15 अक्टूबर
सूबे के एक मंत्री ने 10 पेटी में एक आफिसर का ट्रांसफर किया। लेकिन, तबादले का आर्डर निकलते ही अफसर पर गाज गिर गई। कार्रवाई उपर से हुई है, इसलिए मन को मसोसने के अलावा मंत्रीजी कुछ कर भी नहीं सकते। अफसर अब मंत्रीजी से तगादा कर रहा है, साब मैं तो निबट गया। आपके बेटे को जो दिया था, उसे लौटवा दीजिए। लेकिन, मंत्रीजी कम थोड़े ही हैं। साफ कह दिया….तुम्हारा काम तो मैं करा ही दिया था….तुम्हारी किस्मत ही खराब निकली तो मैं क्या कर सकता हूं।

5 साल में 6 कलेक्टर

कोंडागांव ने कलेक्टर बदलने के मामले में नया रिकार्ड कायम किया है…..शायद देश में भी यह पहला भी हो। वहां पांच साल में छह कलेक्टर बदले हैं। नवंबर 2012 में हेमंत पहाडे को कोंडागांव से हटाया गया था। उनके बाद विजय धुर्वे, धनंजय देवांगन, शिखा राजपूत, समीर विश्नोई और अब नीलकंठ टेकाम। याने हर 10 महीने में एक कलेक्टर बदल गए।

अभी और होंगे चेंज

सरकार ने 12 अक्टूबर को कोंडागांव कलेक्टर समीर विश्नोई को हटाकर राप्रसे से आईएएस बने नीलकंठ टेकाम को वहां की कमान सौंप दी। लोगों को भले ही यह अप्रत्याशित लगा हो मगर ये तो होना ही था। समीर ही नहीं, अगले दो-तीन महीने में इसी तरह एक-एक, दो-दो करके छह-से-सात जिलों के कलेक्टर बदलेंगे। 23 अक्टूबर को कलेक्टर कांफें्रस में जिन कलेक्टरों का पारफारमेंस पुअर होगा, उनके भी नम्बर लगेंगे। दरअसल, सूबे में प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या बेहद कम है। यूपी, पंजाब जैसे राज्यों में आधे से अधिक प्रमोटी आईएएस कलेक्टर एवं एसपी होते हैं। सियासी गणित में प्रमोटी ज्यादा मुफीद बैठते हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव के समय भी 11 जिलों में प्रमोटी आईएएस कलेक्टर थे। नीलकंठ टेकाम को मिलाकर अभी सात पहुंचे हैं। हालांकि, राज्य में आरआर आईएएस की संख्या बढ़ गई है, फिर भी चार-से-पांच और प्रमोटी को जिले में भेजा जाएगा। कांडागांव के बाद दंतेवाड़ा और बीजापुर में भी प्रमोटी पोस्ट किए जाएंगे। दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार को जांजगीर का कलेक्टर बनाए जाने की चर्चा है।

वक्त-वक्त की बात!

एक वो भी वक्त रहा, जब 2011 में 87 बैच के आईएएस सीके खेतान और आरपी मंडल टाईम से पांच महीने पहिले प्रमोशन पाकर प्रिंसिपल सिकरेट्री बन गए थे। उनके साथ बीबीआर सुब्रमण्यिम को दिल्ली में ही प्रोफार्मा प्रमोशन मिल गया था। और आज वक्त ऐसा है कि जनवरी से तीनों का प्रमोशन ड्यू है…..एडिशनल चीफ सिकरेट्री बनने के लिए वे टकटकी लगाए बैठे हैं। जबकि, दो पोस्ट भी खाली हैं। एक एनके असवाल के रिटायर होने से और दूसरा बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी जाने के बाद। तीसरा पोस्ट भी नवंबर में एमके राउत के सेवानिवृत होने के बाद खाली हो जाएगा। जीएडी चाहे तो हफ्ते भर का काम है। सीएम के बोलने के बाद आखिर सुनील कुजूर का डीपीसी करके पांचवें दिन एसीएस का आर्डर निकल गया था। 87 बैच में कहीं गेहूं के साथ घुन पिसने का मामला तो आड़े नहीं आ रहा है। क्योंकि, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह इसी बैच के एक अफसर पर बेहद उखड़े थे, जब विभागीय मंत्री होने के बाद भी वे उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं पहुंचे। लेकिन, बाकी दो का क्या कुसूर। दोनों जब एक-दूसरे से मिलते हैं, तो पूछते हैं…मेरा क्या होगा कालिया।

जीएस की पारी अब करीब

सिंचाई विभाग के सचिव गणेश शंकर मिश्रा की पारी इस महीने 31 तारीख को समाप्त हो जाएगी। राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में आने वाले मिश्रा पोस्टिंग के मामले में इतने किस्मती रहे हैं कि उनके मित्र भी उनसे ईर्ष्या रखते हैं। वे लंबे समय तक एक्साइज में रहे। जनसंपर्क के डायरेक्टर के साथ उसके सचिव भी रहे। वीआईपी डिस्ट्रिक्ट राजनांदगांव का कलेक्टर रहने का भी उन्हें मौका मिला। मिश्रा को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए रेरा का मेम्बर बनाए जाने की अटकलें लगाई जा रही है।

भूपेश का फेवीकोल

भूपेश बघेल को दूसरी बार पीसीसी चीफ बनने से रोकने के लिए पार्टी के उनके मित्रों ने क्या नहीं किया। आलाकमान तक तगड़ा मैसेज पहुंचाने के लिए पीएल पुनिया के पहिले दौरे में त्रिफला के नए एडिशन को लांच किया गया….रामदयाल उईके को बगावती सूर के साथ बैटिंग करने भेजा गया। मगर इनमें से कोई भी नुख्सा काम नहीं आया। अलबत्ता, पुनिया को भी छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेताओं के शह-मात के खेल को समझने में देर नहीं लगा। तभी तो लफड़ा खतम करने के लिए पुनिया ने आलाकमान से पहले ही भूपेश को अध्यक्ष बनाने का स्पष्ट संकेत दे डाला। अब, कांग्रेस के लोग फेवीकोल की उस कंपनी का पता लगा रहे हैं कि आखिर राहुलजी से ये आदमी इतना बुरी तरह कैसे चिपक गया है….त्रिफला से लेकर आदिवासी विधायक के तेवर भी काम नहीं आए।

कार्यकारी अध्यक्ष नहीं

भूपेश बघेल को सेकेंड इनिंग देने के साथ ही कांग्रेस छत्तीसगढ़ में कार्यकारी अध्यक्ष भी नहीं बनाएगी। प्रभारी महासचिव पीएल पुनिया के पहले दौरे से पहिले रामदयाल उईके ने बगावती तेवर दिखाए थे, तब पुनिया ने उन्हें तलब किया था। रामदयाल ने उनसे दो टूक कहा था कि छत्तीसगढ़ में अगर कांग्रेस की सरकार बनानी है तो अनुसूचित जाति और जनजाति से एक-एक कार्यकारी अध्यक्ष बनाना चाहिए। लेकिन, कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर पार्टी का अनुभव ठीक नहीं रहा है। छत्तीसगढ़ में भी चरणदास महंत और सत्यनारायण शर्मा को 2007 में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। तब धनेंद्र साहू पीसीसी चीफ थे। तब कांग्रेस तीन खेमों में बंट गई थी। पार्टी अब फिर से इस तरह की स्थिति नहीं लाना चाहती। बताते हैं, राहुल गांधी ने भी कार्यकारी अध्यक्ष के कंसेप्ट को खारिज कर दिया है।

गुड न्यूज

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का रायगढ़ मॉडल अब प्रदेश के सभी जिलों में लागू किए जाएंगे। रायगढ़ पहिला जिला है, जहां बिटिया के जन्म लेने पर माता-पिता को तोहफा दिया जाता है….बुके भेंट कर अभिनंदन भी। इस जिले में न केवल बालिकाओं का अनुपात बढ़ा है बल्कि डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के प्रयासों से स्कूलों में बालिकाओं की उपस्थिति भी बढ़ी है। 12 अक्टूबर को चीफ सिकरेट्री ने वीडियोकांफ्रेंसिंग में रायगढ़ कलेक्टर शम्मी आबिदी को बेटी बचाओं में आउटस्टैंडिंग काम के लिए एप्रीसियेट किया….ग्रेट शम्मी!

अंत में दो सवाल आपसे

1. चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड ने रेरा चेयरमैन के लिए अप्लाई कर दिया है या करने वाले हैं?
2. जीएस मिश्रा के बाद ईरीगेशन सिकरेट्री किसी यूथ आईएएस को बनाया जाएगा या किसी सीनियर अफसरों को टिकाया जाएगा?

गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

लोभी आईएएस!

संजय दीक्षित
 8 अक्टूबर

राबर्ट हरंगडौला को उपर वाले ने क्या नहीं दिया। आईएएस में सलेक्ट हुए। करोड़ में एकाध तो चुने जाते हैं....ढाई करोड़ वाले छत्तीसगढ़ में अबकी एक का ही नम्बर लग सका। बात राबर्ट की....उसने बिलासपुर में कमिश्नर रहते करोड़ों की मिल्कियत बनाई। यहां से रिटायर होने के बाद भी किस्मत ने साथ नहीं छोड़ा। मिजोरम में चीफ इंफारमेशन कमिश्नर की कुर्सी पा गए। लेकिन, धन का अनियंत्रित लोभ ने उन्हें कहीं का नहीं रखा। ड्रग तस्करी में जेल चले गए। अब नाम बदनाम हो रहा है छत्तीसगढ़ का। देश के सारे मीडिया में छप रहा है....छत्तीसगढ़ कैडर का रिटायर आईएएस ड्रग तस्करी में जेल गया।


नस्ल खराब


राज्य बंटवारे के समय दिग्विजय सिंह ने छांट-छांट कर राबर्ट नस्ल के अधिकांश आफिसर्स छत्तीसगढ़ को टिका दिया। इन अफसरों ने 2005-06 तक छत्तीसगढ़ को सिर्फ-और-सिर्फ लूटने का काम किया। असल में, सब भोपाल से अनुभव लेकर आए थे.....जानते थे, राजधानी के आसपास इंवेस्टमेंट का क्या मतलब होता है। रायपुर के चारों दिशाओं में आप पता कर लीजिए, आईएएस, आईपीएस के एकड़ों में जमीन मिलेंगी। इन अफसरों की देखादेखी डेपुटेशन पर आए एक आईएएस ने नया रायपुर के पास इकठ्ठे 70 एकड़ लैंड खरीद लिया। अब, उन्हें रात में नींद नहीं आ रही है कि इतने पैसों को आखिर वह क्या करेगा। बहरहाल, भ्रष्टाचार का ठीकरा नए आईएएस अफसरों पर नहीं फोड़ना चाहिए। दोष राबर्टों का है। राबर्ट जैसे आईएएस ही छत्तीसगढ़ का नस्ल खराब कर डाले।


सीनियर्स जिम्मेदार


सीएम के कार्यक्रमों के लिए अगर सीएम सचिवालय को मानिटरिंग करनी पड़ रही है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं , कलेक्टरों की क्या स्थिति है। हमारा मानना है, इसके लिए सीधे तौर पर सीनियर आईएएस....खासकर कलेक्टर जिम्मेदार हैं। यंग आईएएस की ट्रेनिंग ढंग से नहीं हो रही है। पहले के जमाने में कलेक्टरों के सामने प्रोबेशनरों की कुर्सी पर बैठने की हिम्मत नहीं होती थी। 89-90 का एक वाकया आपको बताते हैं। रायपुर के कलेक्टर आफिस में एक प्रोबेशनर एसडीएम की जीप में आ गया। कलेक्टर भड़क गए...कल के लड़के....प्रोबेशन में तुम जीप लेकर घूम रहे हो। और अब....कलेक्टर नए आईएएस के हमप्याला बन जा रहे हैं....। कमिश्नर और सीईओ कलेक्टरों के मुंंहलगा हो जा रहे हैं....यार टाईप। ऐसे में, भला-बुरा पर उन्हें टोके कौन।

किस्मत के धनी हैं जोगी


रेणु जोगी का एक बड़ा दिलचस्प बयान आया है....उन्होंने दो टूक कहा है कि वे कांग्रेस में बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस बनाते समय उनसे पूछा नहीं गया....उन्हें तो अखबारों में खबर देखकर पता चला। अगर ये सही है तो जोगीजी ने बिना रेणु भाभी को बताए, अपने राजनीतिक कैरियर का सबसे बड़ा दांव लगा दिया। रियली जोगीजी किस्मत के धनी हैं। रेणु भाभी की जगह कोई दूसरी होती तो आप समझ सकते हैं, क्या होता।

बजट बड़ा, दिल छोटा


आईजी एचके राठौर 30 सितंबर को रिटायर हुए। उस दिन उनकी बिदाई की औपचारिकताएं भी नहीं निभाई गई। अफसरां ने तय किया, 3 अक्टूबर को सीनियर सिटीजन हेल्पलाईन के कार्यक्रम में उन्हें बिदाई दे दी जाएगी। एक ही नाश्ते-पानी में दो काम निबट जाएगा। बाद में, किसी ने सलाह दी...मैसेज अच्छा नहीं जाएगा। तो फिर 4 अक्टूबर को दोपहर में बिदाई कार्यक्रम रखा गया। वहीं, पीएचक्यू के सर्वहारा वर्ग के कैंटीन से खाने का डिब्बा आया और बिदाई की रस्म अदा कर दी गई। जबकि, पहले यह परिपाटी रही कि किसी आईपीएस के रिटायरमेंट पर पुलिस आफिसर्स मेस में डिनर होता था। रिटायर आफिसर की पत्नी, बच्चों को भी बुलाया जाता था। लेकिन, एसएस मनी 45 लाख से बढ़कर नौ करोड़ पहुंच गया, पर दिल छोटा होता गया। एसएस मनी की बात हम इसलिए कर रहे हैं कि पुलिस महकमे में अलग से कोई बजट होता नहीं। पुलिस वालों को जेब से पैसा निकालने की आदत भी नहीं होती। आईपीएस को तो और नहीं। ट्रेन से लेकर प्लेन तक की टिकिट थानेदार कराते हैं। महकमे में चाय-पानी से लेकर जितने भी कार्यक्रम होते हैं, वो सिक्रेट सर्विस मनी से ही होते हैं। इस पैसे का कोई हिसाब नहीं होता। नो आडिट। एक पुराने डीजीपी ने इसका खूब सदुपयोग किया। किताब लेखन के साथ ही इसी पैसे से नेशनल, इंटरनेशनल वर्कशॉप करा डाले। लेकिन, 30-32 बरस सेवा करने वाले अफसर की बिदाई नहीं।

मंत्रियों को किया आगे


चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, सरकार आक्रमक होती जा रही है। पहले बड़े-से-बड़े विपक्षी हमलों पर मंत्री आगे नहीं आते थे लेकिन, अब आलम यह है कि नेता प्रतिपक्ष टीए सिंहदेव अंबिकापुर बोनस उत्सव में नाराज क्या हुआ, उन पर पलटवार करने के लिए आदिवासी सांसद और मंत्री को भिड़ा दिया गया। दोनों ने बयान जारी कर टीएस पर तंज कसा, राजा नाराज, जनता प्रसन्न।

जातिवाद पर व्हाट्सएप शो


छत्तीसगढ़ के आईएएस के व्हाट्सएप ग्रुप में 5 अक्टूबर को जातिवाद पर जमकर टॉक शो चला। हुआ यह कि एक अफसर ने दिल्ली के एक आईएएस के जातिवाद पर कमेंट को यह कहते हुए लोकल ग्रुप में शेयर कर दिया कि आईएएस अफसरों को अपना सरनेम हटा लेना चाहिए...इससे जातिवाद की बू आती है। इसके बाद तो कई आईएएस इसमें टूट पड़े। एक सीनियर अफसर ने लिखा...भाई! मैंने तो पहिले से ही हटा लिया है...वरना लोग मुझे सरकार का आदमी समझते थे। देर शाम जातिवाद पर ज्ञान झाड़-झाड़कर जब अफसर थक गए तो जाकर पोस्ट बंद हुआ।

सौरभ चले विलायत


दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार का देश के चुनिंदा चार आईएएस में सलेक्शन हुआ है, जो लोग लंदन के स्कूल ऑफ इकॉनोमिस में ई-गर्वनेंस का कोर्स करेंगे। इनमें तीन कलेक्टर हैं और एक राजस्थान के सिकरेट्री। कलेक्टरों में सौरभ के अलावा हैदराबाद और नालदां के कलेक्टर शामिल हैं। स्कूल ऑफ इकॉनोमिस पीएमओ अवार्ड वाले चार अफसरों को हर साल चुनता है। सौरभ आज दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वहां से कल दोपहर लंदन के लिए उड़ान भरेंगे।


काम कम, आफिस बड़ा


वन मुख्यालय 14 अक्टूबर से नया रायपुर में शिफ्थ हो जाएगा। न्यू बिल्डिंग में पूरे 300 कमरे हैं। इन तीन सौ कमरे का क्या करेंगे, फॉरेस्ट आफिसर भी नहीं समझ पा रहे हैं। क्योंकि, जंगल कटते जा रहे हैं, काम सिमटते जा रहे हैं....अफसरों की संख्या भी साल-दर-साल घटती जा रही है। वैसे, जरूरत 100 कमरे की भी नहीं थी। लेकिन, बड़ा नहीं बनता तो नगद नारायण ज्यादा कैसे मिलता। आजकल सरकारी योजनाएं बनाने के समय ही कैलकुलेट कर लिया जाता है, इसमें हमारा कितना बनेगा। ऐसा है.....तो फिर गलत नहीं है।         

अंत में दो सवाल आपसे


1. रुलिंग पार्टी से जुड़े किस राजा का एक पावरफुल लेडी अफसर के साथ रिश्तों को लेकर कानाफूसी हो रही है?
2. रेरा का मेम्बर बनने के लिए किस आईएएस ने अनुष्ठान कराया है?


शनिवार, 7 अक्तूबर 2017

छत्तीसगढ़ का अपमान!

संजय दीक्षित
 2 अक्टूबर

रुलिंग पार्टी की विचार धारा से जुड़े एक आईएएस ने तबाही मचा दी है....उन्हें छत्तीसगढ़ की मान-मर्यादा का भी खयाल नहीं....अपना छत्तीसगढ़ इतना तो गरीब नहीं है.....आईएएस दो-दो हजार की वसूली करने लगे। दरअसल, सरकार के पास एक जिला पंचायत सीईओ का कांप्लेन आया है। आडियो भी साथ में है। सीईओ का पीए फोन पर तगादा कर रहा है....सब जगह से पैसा आ गया है....सिर्फ तुम्हारे यहां का ही बचा है। मामला है, ग्राम पंचायत सचिवों की सेवा के रिनीवल का। जिले में करीब पांच सौ ग्राम पंचायत हैं। रिनीवल के लिए दो-दो हजार रेट तय किया गया है। दो-दो हजार का मतलब भी दस लाख होता है। पता चला है, सरकार की ओर से सीईओ को मैसेज करा दिया गया है। लेकिन, महिला कलेक्टर को सीईओ कितना सुनेंगे, इसमें संशय है।   
पोस्टिंग का रिकार्ड
एन बैजेंद्र कुमार के बाद राजेश टोप्पो दूसरे आईएएस होंगे, जिन्होंने जनसंपर्क में दो साल पूरा किया है। 24 सितंबर 2015 को राजेश डायरेक्टर पब्लिक रिलेशंस बने थे। उनसे पहिले बैजेंद्र कुमार करीब पांच साल कमिश्नर जनसंपर्क रहे। इन दोनों के अलावा कोई भी आईएएस सवा-डेढ़ साल से आगे नहीं बढ़ पाया। सीके खेतान जरूर दो साल के आसपास रहे मगर दो टेन्योर में। जनसंपर्क में सबसे कम समय तक रहने वालों में जीएस मिश्रा, बीएल तिवारी और अशोक अग्रवाल हैं। जनसंपर्क की पोस्टिंग बेहद रुतबेदार मानी जाती है। मध्यप्रदेश के समय हमेशा सीएम के क्लोज और हाई प्रोफाइल आईएएस को डीपीआर बनाया जाता था। अविभाजित मध्यप्रदेश में सुनील कुमार सबसे यंगेस्ट डीपीआर रहे। वे आईएएस में आने के आठ साल में डायरेक्टर पीआर बन गए थे। यह रिकार्ड अभी भी कायम है। पुराने लोगों को याद होगा, 87 में रायपुर में कलेक्टर रहने के दौरान सुनिल कुमार को तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने बुलाकर डीपीआर बनाया था। बहरहाल, राजेश टोप्पो जहां भी रहे हैं, पोस्टिंग का रिकार्ड बनाए हैं। बलौदा बाजार कलेक्टर रहे तो पौने चार साल। अब तो पावर जोन में पहुंच गए हैं। देखना दिलचस्प होगा, अगला कौन सा रिकार्ड बनाते हैं।     

उड़ीया आईएएस और राहू


छत्तीसगढ़ में उड़ीया आईएएस की कभी तूती बोलती थी। एसके मिश्रा अजीत जोगी के बाद रमन सरकार में भी सीएस बने रहे। लेकिन, उनके बाद राहू-केतु मंगल में ऐसे बैठे हैं कि जब भी बड़े पदों पर पोस्टिंग का मौका आता है, उसे बाधित कर देते हैं। बीकेएस रे को सीएस बनने के समय भी कुछ ऐसा ही हुआ और गिरधारी नायक के डीजीपी बनने के समय भी। अब रेरा के चेयरमैन की पोस्टिंग में भी एक उड़ीया अफसर को घेरने के लिए मारक ग्रह-नक्षत्र एक्टिव हो गए हैं। हालांकि, रेरा के दावेदार तो कई हैं, लेकिन उ़ड़ीया अफसर का पलड़ा ज्यादा भारी है। ऐसे में, एक नेशनल जांच एजेंसी की नोटिस को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल इस पर भी उठ रहे हैं कि जांच एजेंसी के अफसर 30 और 31 अगस्त को छुट्टी होने के बाद भी रायपुर आए....होटल में बैठकर नोटिस तैयार की और अफसर को देकर दिल्ली के लिए उड़ गए। अब पूरी ब्यूरोक्रेसी की नजर इस पर है कि इस आईएएस का भी वही हश्र होगा, जो बीकेएस रे और गिरधारी नायक का हुआ था। या फिर आईपीएस पवनदेव टाईप.....जिन्हें मीडिया में लगातार खबरों के प्लांट होने के बाद भी सरकार ने एडीजी प्रमोट कर दिया।   

सब फलाहारी


बुधवार को डीजीपी एएन उपध्याय ने सूबे के सात पुलिस अधीक्षकों को मुख्यालय में मीटिंग रखी थी। इश्यू था 24 अक्टूबर को एसपी कांफ्रेंस की तैयारी। इन सातों को सीएम के सामने प्रेजेंटेशन देना है। मीटिंग में एसपी के साथ मुख्यालय के सभी अफसर भी शामिल हुए। जब लांच का वक्त आया तो पता चला डीजीपी साब पूरे नौ दिन का उपवास रखे हैं। उनके साथ चुनिंदा अफसरों के लिए फलाहारी की व्यवस्था थी। अफसरों को लगा.....बॉस उपवास पर हैं और हमलोग थ्री स्टार होटल का लजीज भोजन उड़ाए, तो यह जमेगा नहीं। ठीक है, साब सीधे-साधे हैं....लेकिन, ट्रांसफर के समय प्रपोजल तो सरकार डीजी से ही मांगती है। इसलिए, 90 फीसदी आईपीएस प्लेट लेकर फलाहारी की लाईन में खड़े हो गए। इससे, जो सचमुच उपवास पर थे, उन्हें कम पड़ गया, और जो बढ़ियां नाश्ता सोंट कर आए थे, वे पौष्टिक फलाहारी भी खाए और डीजीपी की नजर में धरम-करम वाला बनकर अपना नंबर भी बढ़वा लिए।

बर्दी उतरने का खौफ


पुलिस मुख्यालय के एक एडिशनल डीजी इन दिनों राइट टाईम आफिस आने लगे हैं। ठीक साढ़े दस बजे उनकी
गाड़ी पीएचक्यू में लग जाती है। पहले वे हफ्ते में दो-एक दिन आते थे। आते भी थे तो दोपहर बाद। लेकिन, रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट पर भारत सरकार ने जब से डीजीपी को उनकी निगरानी करने कहा है, आईपीएस ने अपना टाईम टेबल बदल लिया है।

ज्वाइंट सिकरेट्री की पोस्टिंग


निर्वाचन आयोग से ज्वाइंट सीईओ डीडी सिंह रिलीव हो गए हैं। उनकी जगह पर किसी आईएएस को पोस्ट किया जाएगा। नीचे लेवल पर आईएएस की कमी नहीं है, लिहाजा, यह पक्का है, कोई डायरेक्ट आईएएस ही होगा। हो सकता है, 2008 या 09 बैच के किसी आईएएस से सरकार खुश न हो और उन्हें इस पोस्ट पर बिठाकर जून 2019 तक शंट कर दें।

अच्छे दिन


सीनियर आईएफएस राकेश चतुर्वेदी के अब अच्छे दिन आने वाले हैं। आरा मिल प्रकरण उनके लिए ऐसा गले का फांस बना कि कहां वो आज एडिशनल पीसीसीएफ होते लेकिन, सीएफ में ही अटके हुए हैं। पता चला है, उनका प्रकरण अब खातमे की ओर हैं। कभी भी उन्हें गुड न्यूज मिल सकता है। आरा मिल प्रकरण 2003 चुनाव के समय का है। चुनाव के लिए वन विभाग से संबंधित राजनेताआें को खरचा चाहिए था। इस खरचे का जुटाने में निबट गए कई आईएफएस।         

अंत में दो सवाल आपसे


1. डीजीपी एएन उपध्याय नवरात्रि में शक्ति की उपासना के लिए नौ दिन उपवास रहे...डीजीपी के दावेदारों को यह अच्छा क्यों नहीं लगा?
2. दिग्विजय सिंह के छत्तीसगढ़ दौरे में अबकी कांग्रेसियों की इतनी भीड़ क्यों जुटी?



शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

ब्यूरोक्रेसी में हलचल

17 सितंबर

एनएमडीसी के चेयरमैन बनने के बाद आईएएस एसोसियेशन ने जिस अंदाज में बैजेंद्र कुमार को ग्रेंड फेयरवेल दिया, उससे ऐसा मैसेज गया.... बैजेंद्र अब हमेशा के लिए जा रहे हैं.....आखिर, डेपुटेशन पर तो हर साल एक-दो अफसर जाते ही हैं....बिदाई कहां होती है। वैसे, ब्यूरोक्रेसी में चर्चा भी शुरू हो गई थी....बैजेंद्र अब शायद ही लौटे। लेकिन, सीएम ने नपे-तुले एक लाईन में नौकरशाही में हलचल मचा दी। सीएम ने बिदाई भाषण में कहा, बैजेंद्र जैसे अफसर का हम फिर स्वागत करना चाहेंगे। इससे पहिले बैजेंद्र बोले, छत्तीसगढ़ लौटकर उन्हें प्रसन्नता होगी। बैजेंद्र का जुलाई 2020 में रिटायरमेंट है। याने लगभग तीन साल। टाईम कम है, इसलिए अटकलें शुरू हो गई थी। लेकिन, सीएम ने साफ कर दिया है, बैजेंद्र के लिए चांस खतम नहीं हुआ है। अब बैजेंद्र लौटते हैं या नहीं.....ये तो वक्त बताएगा। मगर चीफ सिकरेट्री के दावेदारों को डाक्टर साब की ये बात अच्छी नहीं लगी होगी....ये तो जाहिर है।

जीएसटी और अमर 

जीएसटी से आम व्यापारी हलाकान हैं.....सरकार को कोस रहे हैं। लेकिन, यही जीएसटी एक मंत्री के प्रोफाइल को कहां से कहां पहुंचा दिया। बात कर रहे हैं, इंडस्ट्री मिनिस्टर अमर अग्रवाल की। भारत सरकार ने उन्हें जीएसटी की समस्याओं का समाधान करने वाली सुप्रीम कमेटी का सदस्य बनाया है, जिसमें देश से सिर्फ पांच लोग हैं। यूपी, मध्यप्रदेश जैसे सूबों से एक भी नहीं। यही नहीं, केंद्र में दूसरे नम्बर के कद्दावर मंत्री अरुण जेटली के क्लोज होने का मौका मिला, सो अलग। वो भी ऐसे वक्त में, जब रमन सिंह के मंत्री एक के बाद एक विवादों में घिरते जा रहे हैं, अमर का बढ़ता कद....खबर तो बनती ही है।

फुटबॉल की तरह

मंत्रालय में आईएफएस अफसर आशीष भट्ट की हालत फुटबॉल की तरह हो गई है। तब से और, जब सरकार ने जूनियर आईएएस को विभाग प्रमुख बनाना शुरू किया है। भट्ट 1984 बैच के आईएफएस हैं। इस साल के शुरू में वे ट्राईबल सिकरेट्री थे। 2003 बैच की आईएएस रीना बाबा कंगाले जब ट्राईबल में आई तो सरकार को उन्हें एनर्जी में शिफ्थ करना पड़ा। वहां सीनियर आईएएस बैजेंद्र कुमार थे, इसलिए चल गए। बैजेंद्र के जाने 2003 बैच के आईएएस सिद्धार्थ परदेशी एनर्जी सिकरेट्री बनें तो भट्ट को अब हायर एजुकेशन में भेजा गया है। पता नहीं, नवंबर में होने वाले फेरबदल में अब उन्हें कौन से विभाग टिकाया जाएगा।

एसपी के लिए सिरदर्द

छत्तीसगढ़ में एक तो पीएससी से थोक में डीएसपी अपाइंट होते जा रहे हैं। उपर से तुष्टिकरण के लिए सरकार 72 और स्पेशल डीएसपी नियुक्त करने जा रही है। डीएसपी की बढ़ती संख्या एसपी के लिए पहले से ही सिरदर्द बन गई है। आलम यह है कि जिन छोटे जिलों में मुश्किल से दो-तीन डीएसपी होते थे, अब पांच-पांच, छह-छह हो गए हैं। न उन्हें बिठाने की जगह है और न ही गाड़ी की व्यवस्था। अब और 72 को झेलना पड़ेगा।

मैडम ये क्या...?

राज्य महिला आयोग की चेयरमैन हर्षिता पाण्डेय का पिछले हफ्ते बर्थडे था। जलसा भी अच्छा हुआ....जाहिर है, अगले साल चुनाव है।  लेकिन, इंटरेस्टिंग यह रहा कि हर्षिता को जो भी बुके देता, बुदबुदाते हुए पूछता मैम ये क्या....इतना वजन कैसे कम कर लिया.....। लोगों के सवालों से लगा जैसे हर्षिता वजन कम करने की पार्टी दे रही हैं। दरअसल, उन्होंने दो महीने में 16 किलो वजन कम किया है। ऐसे में, लोगों की उत्सुकता स्वाभाविक है....वजन को लेकर कौर कंसस नहीं है।

साय की हैसियत

नंदकुमार साय का दर्जा भले ही केंद्रीय मंत्री का है। मगर बिलासपुर के छत्तीसगढ़ भवन के अटेंडर ने उनके कद को ऐसा नापा कि पूछिए मत! साय कल पहुंचे छत्तीसगढ़ भवन तो उन्हें दो नम्बर का कमरा दिया गया। साय ने पूछा, एक नम्बर क्यों नहीं? तो जवाब मिला, वो मंत्रियों के लिए है। सायजी के पीए ने बताया, साब केंद्रीय मंत्री लेवल के हैं। अटेंडर बोल, हमलोग लेवल वाले को मंत्री नहीं मानते। प्रोटाकॉल वाले साब ने कहा है, सिर्फ मंत्रियों के लिए खुलेगा एक नम्बर कमरा।  

रामदयाल के पीछे

आदिवासी सीएम पर कांग्रेस के ट्राईबल लीडर्स के एक होते सूर पीसीसी नेताओं के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। सबसे पहिले पाली-तानाखार के विधायक रामदयाल उईके ने मोर्चा संभाला। मनोज मंडावी और कवासी लकमा ने हां में हां मिला दिया। चार बार के विधायक उईके इतने अग्रेसिव हो गए हैं कि प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया की बंद कमरे में समझाइस पर भी नहीं रुके। दो दिन बाद फिर आदिवासी सीएम पर उनकी मुखरता सामने आ गई। पीसीसी नेताओं को ये तो मालूम है कि उईके बेहद महत्वकांक्षी हैं पर उनमें इतना कांफिडेंस कहां से आ गया....इसको लेकर हैरान हैं। पार्टी के लोग इस पता करने में जुट गए हैं....उईको को चाबी कहां से ऐंठी जा रही है।          

अत में दो सवाल आपसे

1. आदिवासी सीएम की मांग पर कांग्रेस विधायक रामदयाल उईके को सबसे पहिले बीजेपी के किस सीनियर ट्राईबल लीडर ने फोन कर बधाई दी?
2. मंत्रालय में गृह मंत्री की रिव्यू मीटिंग में अफसरों ने ऐसा क्या बताया कि मंत्रीजी बगले झांकने लगे?

 

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

त्रिफला का नया ब्रांड

10 सितंबर

त्रिफला का नया ब्रांड


पीएल पुनिया के छत्तीसगढ़ दौरे में सबसे हिट रहा त्रिफला का नया ब्रांड। नए में चरणदास महंत, रविंद्र चौबे और मोहम्मद अकबर शामिल हैं। तीनों ने कांग्रेस भवन में नए त्रिफला को लांच करते हुए बकायदा फोटो भी खिंचवाई। नया वाला त्रिफला कई मायने में पुराने से जुदा है। सबसे पहले 2012 में त्रिफला सामने आया था। उसमें प्योर संगठन के लोग थे.....तत्कालीन पीसीसी चीफ और नेता प्रतिपक्ष। नए में दोनों गायब हैं। लिहाजा, भूपेश बघेल को सर्तक हो जाना चाहिए.....त्रिफला उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, संगठन खेमा कम थोड़े ही हैं। त्रिफला का असर कम करने के लिए अगले दिन पुनिया से मिलाने कवर्धा से योगेश्वर राज सिंह को बुलवा लिया। योगेश्वर और अकबर के रिश्ते कैसे हैं, बताने की जरूरत नहीं। अब अकबर को तय करना है, त्रिफला का हिस्सा रहे या फिर अगले चुनाव के लिए टिकिट सुनिश्चित करें।

कांग्रेस का चौथा विकेट


कांग्रेस विधायक रामदयाल उईके के आदिवासी सीएम पर बागी बोल ने पार्टी को उलझन में डाल दिया है। पहली बार सीएम पद को लेकर कोई आदिवासी विधायक ने तीखे तेवर दिखाए हैं। कांग्र्रेस की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है कि जोगी कांग्रेस बनने के बाद उसके तीन विधायक पहले ही छिटक चुके हैं। अमित जोगी के अलावा सियाराम कौशिक और आरके राय। अब उईके जिस तरह की भाषा बोल रहें हैं, उससे पार्टी के नेताओं को खटका हो रहा है....उईके कहीं पुराने गुरू की शरण में तो नहीं जा रहे हैं। यही वजह है, पीएल पुनिया ने उईके को तलब कर बंद कमरे में उनसे चर्चा की।  

बिना प्रभार के मंत्री


भैयालाल राजवाड़े, महेश गागड़ा और दयालदास बघेल को मंत्री बने करीब दो साल होने जा रहे हैं। लेकिन, अब तक उन्हें किसी जिले का प्रभार नहीं मिला है। जबकि, कुछ मंत्रियों के पास दो-दो, तीन-तीन जिले का चार्ज है। पार्टी सुप्रीमो अमित शाह ने छत्तीसगढ़ दौरे में जब प्रभारी मंत्रियों को रात बिताने का फरमान जारी किया था तो भैयालाल राजवाड़े ने सीएम के सामने दुखड़ा रोया था....भाई साब! हम तीनों के पास जिला नहीं है। तब सीएम ने कहा था, बहुत जल्द उन्हें जिला मिल जाएगा। लेकिन, तीनों मंत्रियों का इंतजार खतम नहीं हो रहा।


कमजोर हुई आईएएस लॉबी?


बैजेंद्र कुमार के रिलीव होने के बाद ब्यूरोक्रेसी में माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की आईएएस लॉबी कमजोर होगी। एसीएस बनने के बाद बैजेंद्र ने 2014 में आईएएस एसोसियेशन की कमान संभाली थी। इसके बाद एसोसियेशन को उन्होंने चार्ज कर दिया था। हालांकि, साल के शुरूआत में उन्होंने एसोसियेशन की कमान छोड़ दी थी। अजय सिंह को नया अध्यक्ष बनाया गया। बावजूद इसके, एसोसियेशन बैजेंद्र पर निर्भर थी। जीएस मिश्रा-भूपेश बघेल एपीसोड में एसोसियेशन को जब सीएम से मुलाकात का टाईम नहीं मिल रहा था, तब भी बैजेंद्र कुमार का दरवाजा खटखटाया था अफसरों ने। सुनील कुजूर को एसीएस बनाने के लिए हल्ला बैजेंद्र ने ही किया था।
 

यूथ टीम

राज्य सचिवालय की जिम्मेदारी अब धीरे-धीरे यूथ टीम के हाथ में आती जा रही है। जिन विभागों को कभी दिग्गज अफसर संभालते थे, उन विभागों को अब स्पेशल सिकरेट्री देख रहे हैं। ताजा फेरबदल में 2003 बैच के आईएएस सिद्धार्थ कोमल परदेशी को पावर दिया गया है। इस विभाग को विवेक ढांड से लेकर अजय सिंह, अमन सिंह, बैजेंद्र कुमार जैसे अफसर संभाल चुके हैं। परदेशी अब स्पेशल सिकरेट्री के रूप में उर्जा विभाग के प्रमुख होंगे। वहीं, 2002 बैच के आईएएस डा0 कमलप्रीत को सरकार ने इंडस्ट्री का जिम्मा दिया है। कमलप्रीत भी अभी सिकरेट्री नहीं बनें हैं। इससे पहिले रीना बाबा कंगाले ट्राईबल, मुकेश बंसल एवियेशन, राजेश सुकुमार टोप्पो जनसंपर्क और आर संगीता जीएडी में आईएएस विंग संभाल रही हैं। ये सभी स्पेशल सिकरेट्री लेवल के अफसर हैं। जाहिर है, इससे सीनियर आफिसरों को पीड़ा तो हो रही होगी।   
फ्यूचर का सिनेरिया
बैजेंद्र कुमार के जाने के बाद जरूरी फेरबदल कर दिए गए। लेकिन, सत्ता के गलियारों में जिस तरह की खबरें निकल कर आ रही हैं, नवंबर में बड़े लेवल पर एक चेंजेस और होंगे। 30 नवंबर को एसीएस एमके राउत रिटायर होंगे। राउत का ग्रामीण और पंचायत विभाग आरपी मंडल को सौंपा जा सकता है। मंडल सरकार के फर्स्ट इनिंग में भी इस विभाग को संभाल चुके हैं। तब भी अजय चंद्राकर उनके मंत्री थे। और, अब भी होंगे। जाहिर है, समन्वय का कोई लफड़ा नहीं होगा। दोनों एक-दूसरे को बखूबी जानते हैं। मंडल के पंचायत में जाने के बाद उनका फारेस्ट और लेबर चित्तरंजन खेतान को मिल सकता है। इस बीच सरकार के साथ खेतान के तालमेल का सेतु मजबूत़ हो जाए, तो ऐसा भी हो सकता है कि नवंबर में उन्हें कोई और अहम विभाग मिल जाए।  
समय की मार
नॉन घोटाले में आईएफएस कौशलेंद्र सिंह बाल-बाल बच गए थे। मगर नान के दूसरे मामले में वे आरोपी बन गए। उन्होंने नियम-कायदों की परवाह किए बिना प्रमोशन दे दिया था। सिस्टम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता नहीं। मगर कानून ने उनकी गर्दन पकड़ ली। अदालत के निर्देश पर ईओडब्लू ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है। आपको याद होगा, एसीबी ने जब फारेस्ट अफसरों के यहां ताबड़तोड़ छापा मारा था, तब मंत्री महेश गागड़ा विरोध दर्ज कराने सीएम हाउस पहुंच गए थे। तब इसके पीछे कौशलेंद का ब्रेन माना गया था। अब उसी ईओडब्लू में कौशलेंद्र को चक्कर लगाना पड़ेगा। इसे ही कहते हैं समय की मार।
हफ्ते का व्हाट्सऐप
एमएसजी-मुझे माफ कर दीजिए जब साब!
जज-ठीक है, मगर तुम्हें खुद की मुवी दो बार देखनी होगी।
एमएसजी-ठीक है, जज साब। मुझे तुरंत फांसी दे दीजिए।
अंत में दो सवाल आपसे
1. पुरस्कार को लेकर एक ही बैच के दो आईएएस में खटास पैदा हो गई है....दोनों के नाम बताइये? 
2. सिकरेट्री लेवल के अफसर संजय शुक्ला को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग का डायरेक्टर क्यों बना दिया गया?

बुधवार, 6 सितंबर 2017

मैदान खाली…

3 सितंबर

संजय दीक्षित
एन बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी के चेयरमैन बनने से छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक समीकरण बदल गए हैं। 83 बैच के आईएएस अजय सिंह का चीफ सिकरेट्री बनने का रास्ता साफ समझिए। मौजूदा सीएस विवेक ढांड अगर मार्च में रिटायर होंगे तो एक अप्रैल को अजय सिंह सीएस बन जाएंगे। या कहीं, सरकार ने अगर ढांड को केंद्र से एक्सटेंशन दिला दिया तो ताजपोशी कुछ आगे-पीछे खिसक सकती है। वैसे, छह महीने एक्सटेंशन के प्रावधान हैं। चुनावी साल में कम-से-कम तीनेक महीने का एक्सटेंशन मिल ही सकता है। वैसे, रास्ता को 87 बैच के लिए क्लियर हो गया है। इस बैच में तीन आईएएस हैं। बीबीआर सुब्रमण्यिम, सीके खेतान और आरपी मंडल। एनके असवाल के रिटायर होने से सिर्फ एक पोस्ट खाली था। दावेदार थे तीन। अब नवंबर में एसीएस एमके राउत रिटायर हो जाएंगे। बैजेंद्र एनएमडीसी जा रहे हैं। याने अब तीनों एसीएस बन जाएंगे। यही नहीं, ढांड के रिटायर होने के बाद अब पीएस केडीपी राव भी अगले साल एसीएस प्रमोट हो जाएंगे। वरना, राव के लिए खतरा था।

बुलेट स्पीड

बैजेंद्र कुमार की एनएमडीसी में पोस्टिंग की चकरी 31 अगस्त को इतनी तेजी से घूमी कि राज्य सरकार से एनओसी लेकर भारत सरकार ने महज चार घंटे में नोटशीट क्लियर कर दी। दोपहर 12 बजे कैबिनेट सिकरेट्री ने सीएस को फोन करके बैजेंद्र के नाम पर सहमति मांगी और चार बजे नोटशीट पर प्रधानमंत्री ने हस्ताक्षर कर दिया। और, रात आठ बजे आदेश भी जारी हो गया। बैजेंद्र ने देर रात कहीं लिखा भी…इट जस्ट हैपेन्ड इन बुलेट स्पीड….मे बी इट इज गॉड्स विश! बिन मांगे 80 हजार करोड़ की नवरत्न कंपनी मिल गई तो ईश्वर का शुक्रगुजार तो रहना ही चाहिए। वैसे भी, भारत सरकार ने जिन 15 आईएएस अफसरों को नई पोस्टिंग दी, उस लिस्ट पर आप अगर गौर करें तो सबसे दमदार पोस्टिंग बैजेंद्र की ही होगी।

मौके पर न्याय

मानवाधिकार संगठन भले ही इस पर कोहराम मचा सकते हैं। लेकिन, इस मौके पर न्याय की इन दिनों खूब चर्चा है। माजरा दुर्ग का है….एडिशनल एसपी अजाक्स का रीडर बेहद सामान्य मामले को खतम करने के लिए दो लाख का डिमांड किया था। इसकी जानकारी एक आईपीएस को हो गई। उन्होंने आव देखा, न ताव, पहुंच गए एडिशनल एसपी के दफ्तर। पकड़ लिया रंगे हाथ रीडर को। इसके बाद रीडर की तो लात-घूसों से ऐसी सोटाई की, पूछिए मत! जी नहीं भरा तो पास खड़े पुलिस वाले से डंडा भी ले लिया। मीडिया वालों ने पूछा, साब आपको जांच कराना चाहिए था। आईपीएस ने जवाब भी उसी अंदाज में दिया….जेब में पैसा नहीं मिलता तो जांच कराता….पैसा बरामद होने के बाद जांच काहे का। जनाब कोरबा में भी पुलिस वालों की खूब ठुकाई की थी। आलम यह हुआ कि ट्रांसफर के बाद पुलिस वाले बजरंग बलि को लड्डू चढ़ाए थे। लेकिन, जरा बचके…. पवनदेव ने भी बिलासपुर में पुलिस वालों की खूब निलंबन और बर्खास्तगी की थी। जाल बिछाकर पवनदेव को पुलिस वालों ने ही ठिकाने लगा दिया।

निगरानी…. आईपीएस

अभी तक आपने निगरानीशुदा बदमाश सुना होगा….निगरानीशुदा आईपीएस नहीं। लेकिन, छत्तीसगढ़ में एक निगरानी आईपीएस हैं। दरअसल, आईपीएस की रिव्यू कमेटी ने तीन अफसरों के नाम भारत सरकार को भेजा था। इनमें से दो की भारत सरकार ने छुट्टी कर दी। एएम जुरी और केसी अग्रवाल को। मगर एडीजी महोदय को इस नोटिंग के साथ बख्श दिया….फिलहाल, पुलिस महकमा इन पर निगरानी रखें। अब, एडीजी पर नजर कौन रखेगा? बराबर या नीचे के अफसर तो नहीं ना। जाहिर तौर पर, डीजीपी को एडीजी की निगरानी करनी पड़ रही होगी। लेकिन, क्लास यह है कि जिस रिव्यू कमेटी ने एडीजी को निकाल बाहर करने की अनुशंसा की थी, डीजीपी भी उसके हिस्सा थे। याने उनकी कमिटी पहिले ही रिकमांड कर चुकी हैं…..एडीजी गड़बड़ है….निकाला जाए। तो अब वे निगरानी क्या करेंगे। लेकिन, मिनिस्ट्री आफ होम का आर्डर को क्या किया जा सकता है।

नई पोस्टिंग

बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी चेयरमैन बनने के घटनाक्रम के बाद प्रिंसिपल सिकरेट्री चित्तरंजन खेतान को ठीक-ठाक पोस्टिंग की संभवनाएं बढ़ गई है। भारत सरकार से लौटने के बाद सरकार ने उन्हें प्रशासन अकादमी का डीजी पोस्ट किया था। जाहिर है, बैजेंद्र के पास सीएम सचिवालय के साथ उर्जा और उद्योग विभाग था। ये दोनों विभाग पीएस अमन सिंह और सिकरेट्री सुबोध सिंह संभाल चुके हैं। मगर अब दोनों के पास इतना वर्क लोड है कि फिर से इन विभागों को चलाना उनके लिए संभव नहीं होगा। इसमें दो बातें सामने आ रही है। या तो दो महीने के लिए टेम्पोरेरी तौर पर अमन और सुबोध को इन विभागों को सरकार सौंप दें। और, नवंबर में होने वाले मेगा फेरबदल में विभागों का पुनर्गठन किया जाए। या फिर, किसी स्पेशल सिकरेट्री को उर्जा और सीएम सचिवालय के लिए पोस्ट किया जाए। अगर ऐसा हुआ तो साफ-सुथरी छबि के सिद्धार्थ कोमल परदेशी को सरकार मंत्रालय बुला सकती है। परदेशी कवर्धा और राजनांदगांव के कलेक्टर रह चुके हैं। जाहिर है, सरकार के लिए वे टेस्टेड अफसर होंगे। लेकिन, ये सिर्फ अटकलें हैं।

गो माता कहां हो?

गायों को लेकर कांग्रेस की सियासत तो सफल रही मगर इसके लिए उन्हें रायपुर में कितने पापड़ बेलने पड़े पूछिए मत! असल में, कांग्रेस को लगा था कि गाये ंतो यूं ही रोड चलते मिल जाएंगी….पकड़ लेंगे। मगर हुआ ऐसा कि नगर निगम के अमले ने सुबह चार बजे से ही सड़क पर छुट्टा घूमने वाली गायों को उठाना चालू कर दिया था। सात बजते तक सारी गायें गायब थीं। पार्टी ने गायों के लिए महापौर को लगाया। दिलचस्प दृश्य था….मेयर और उनकी टीम गायों के लिए मशक्कत कर रही थीं और निगम कर्मी गायों को गायब कर रहे थे। ले देकर लाखे नगर चौक पर कुछ गायें मिलीं तो पकड़ लाए। कांग्रेस को अफसोस इसलिए भी रहा कि पुलिस के चलते प्रदर्शन भी आधा-अधूरा रहा, उपर से गायों के चारा-चोकर पर भी जेब से हजारों रुपए निकल गए। चलिये, गायों को लेकर ऐसे प्रदर्शन होते रहने चाहिए….उन्हें सड़कों पर कागज और झिल्ली की बजाए एकाध दिन चारा-चोकर खाने को मिल जाएंगे।

अंत में दो सवाल आपसे

1. विभाग बदलने की आशंका से किन दो मंत्रियों की रात की नींद उड़ी हुई है?
2. किस महिला कलेक्टर ने एक कंपनी से तीन लाख रुपए महीना फिक्स करवा लिया है?  

शनिवार, 2 सितंबर 2017

सीएम का जन्मदिन गिफ्ट


27 अगस्त
संजय दीक्षित
क्रवार को सीएम डा0 रमन सिंह राजधानी के आंबेडकर हास्पिटल में डायबिटिक पीड़ित बच्चों को डायबिटिक किट बांटने पहुंचे थे। एक बच्ची किट लेने के बाद कुछ कदम चलकर पीछे पल्टी….सीएम से बोली, सर, आज मेरा बर्थडे है….डायबिटिक पीड़ित बच्ची….खुद बता रही है…मेरा जन्मदिन है….कुछ क्षण के लिए माहौल भावमय हो गया….सीएम भी ठिठके….क्या दें। जेब की ओर हाथ गया….लेकिन, पाकिट में वे पैसा रखते नहीं। फिर, ध्यान आया उपर की जेब में पेन तो है। झट से उन्होंने पार्कर पेन निकाल कर बच्ची के हाथ में दे दिया….लो तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट।

विदेश…ना बाबा

मंत्री अमर अग्रवाल ने जर्मनी जाने का प्लान स्थगित कर दिया है। मंत्री के साथ अफसरों की टीम जाने वाली थी…..स्पेशल सिकरेट्री अरबन रोहित यादव, डायरेक्टर इंडस्ट्री अलरमेल मंगई, एमडी सीएसआईडीसी सुनील मिश्रा। इन्हें कांफ्रेंस में हिस्सा लेने 18 सितंबर को जर्मनी रवाना था। बताते हैं, अमर अग्रवाल ने कल सुनील मिश्रा को बोलकर जीएडी से फाइल वापस मंगा ली। अमर चतुर पालीटिशियन हैं….जानते हैं, एक मंत्री के विदेश घूमने पर किरकिरी हो रही है…विधायकों का विदेश दौरा निरस्त हो गया है। सूखे से किसानों में मचे हाहाकार के बीच विदेश जाने का मैसेज अच्छा नहीं जाएगा।
संवैधानिक संकटराज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल के शपथ में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। सूचना आयोग के नार्म के मुताबिक राज्यपाल मुख्य सूचना आयुक्त को शपथ दिलाते हैं और मुख्य सूचना आयुक्त फिर सूचना आयुक्त को। लेकिन, छत्तीसगढ़ सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद पिछले डेढ़ साल से खाली है। सरमियस मिंज अप्रैल 2016 में रिटायर हुए थे। इसके बाद से मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी खाली पड़ी है। खाली क्यों रखी गई है, सरकार बता सकती है। फिलहाल लाख टके का सवाल अशोक अग्रवाल को शपथ कौन दिलाएगा….सूचना आयोग के अफसर किताबें खंगाल रहे हैं।

13 साल से एक ही व्यक्ति

राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल आंबेडकर चिकित्सालय में चार बच्चों की मौत हो गई। मौत की वजह को लेकर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है। मगर एक सवाल मौजूं है….एक ही व्यक्ति पिछले 13 साल से क्यों? हम बात कर रहे हैं, डा0 विवेक चौधरी की। आंबेडकर के सुपरिटेंडेंट। 2004 से इस पोस्ट पर बैठे हैं। चौधरी जब अस्पताल की कमान संभाले थे…उसी समय आरपी मंडल रायपुर के कलेक्टर पोस्ट हुए थे। मंडल के बाद आठ कलेक्टर बदल चुके हैं। लेकिन, आंबेडकर का अधीक्षक नहीं बदला। हम चौधरी की काबिलियत पर सवाल नहीं कर रहे हैं। वे कैंसर के एक्सपर्ट बताए जाते हैं। लेकिन, प्रशासन का अपना नार्म होता है। एक ही पद पर लंबे समय तक काबिज रहने पर जाहिर है, प्रशासन में जड़ता आ जाती है। पिछले तीन-चार साल मेंं आंबेडकर की घटनाएं विचलित कर रही है। सरकार और उसके हेल्थ मिनिस्टर को इस पर सोचना चाहिए।

गृह विभाग ने फंसवाया

एक झटके में 47 पुलिस वालों को फोर्सली रिटायर कर गृह विभाग ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। वजह है, सूची में 35 से अधिक पुलिस वालों का रिजर्व केटेगरी का होना। प्रदेश में वैसे ही आदिवासी एक्सप्रेस दौड़ाने की कोशिश हो रही है….गृह विभाग ने उसे ईंधन-पानी मुहैया करा दिया। पता चला है, अफसरों ने सरकार को विश्वास में नहीं लिया। गृह विभाग ने डीजीपी एएन उपध्याय, डीजी नक्सल डीएम अवस्थी और गृह विभाग के उप सचिव डीके माथुर की कमेटी बनाई थी। कमेटी ने रिकमांड किया और गृह विभाग ने यह कहते हुए उसे मंत्री रामसेवक पैकरा से दस्तखत करा लिया कि मोदी आईएएस, आईपीएस की छुट्टी कर रहे हैं, इसे रोकना ठीक नहीं होगा। बताते हैं, मोदीजी का नाम सुनते ही गृह मंत्री ने चिड़िया बिठा दिया। जबकि, ऐसे फैसले सरकार की बिना सहमति के होते नहीं। और बात बहुत साफ है, सरकार की नोटिस में आती तो यह लिस्ट नहीं निकलती। क्योंकि, सरकारें राजनीतिक नफा-नुकसान को दृष्टिगत रखते हुए फैसले लेती हैं। वो भी जब विधानसभा चुनाव का माहौल बनने लगा है। हालांकि, लिस्ट गलत नहीं है। सूरजपुर के एक टीआई कुकर्म करके फरार है। अंबिकापुर के एक टीआई को वहां के आईजी पहले ही बर्खास्त कर चुके हैं। हल्ला मचाने वाली एक महिला टीआई को सिर्फ बर्खास्त आईजी राजकुमार देवांगन ने ईमानदार अफसर बताते हुए सीआर में टॉप ग्रेड दिया है। उनके अलावा 17 आईपीएस अफसरों ने सीआर में सबसे खराब कोडिंग की है…ग और घ। उनमें से 14 एससी और एसटी केटेगरी के आईपीएस हैं। लेकिन, गृह विभाग के अफसरों को वोट बैंक की संवदेनशीलता तो समझना चाहिए।

सरकार का ब्रेक

47 इंस्पेक्टर्स, सब इंस्पेक्टर्स की छुट्टी करने के बाद गृह विभाग इतना उतावला था कि डीएसपी की छंटनी के लिए मीटिंग कर डाली। यही नहीं, पांच डीएसपी को रिटायर करने की अनुशंसा भी। लेकिन, इंस्पेक्टरों की छुट्टी पर चौतरफा हमले से घबराए सरकार ने फिलहाल इस पर ब्रेक लगा दिया है। सो, राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को घबराने की जरूरत नहीं है।

किस्मत हो तो….

आईएएस अशोक अग्रवाल की सूचना आयुक्त बनाने के बाद ब्युरोक्रेसी चकित है….सिरे से मान रहे हैं…किस्मत हो तो अशोक अग्रवाल जैसा। अधिकांश पोस्टिंग रायपुर में की। इसके बाद कोरबा, रायगढ़ और बाद में वीवीआईपी जिला राजनांदगांव की कलेक्टरी। फिर, रायपुर और दुर्ग का कमिश्नर। वहां से फिर आबकारी में ताजपोशी….आबकारी कमिश्नर का मतलब बताने की जरूरत नहीं है। और अब सूचना आयुक्त। पूरे पांच साल के लिए। वो भी अभी आबकारी से रिलीव नहीं होंगे। अभी लगेंगे दो-एक महीने। सरकार ने सिर्फ सूचना आयोग की सीट बुक की है। ऐसी किस्मत आखिर कितनों को मिलती है। डायरेक्ट आईएएस डीएस मिश्रा डेढ़ साल चक्कर काटने के बाद सहकारिता निर्वाचन आयुक्त बन पाए हैं, जहां उन्हें बैठने के लिए कुर्सी-टेबल का बंदोबस्त करना होगा।

ननकीराम की याद

सरकार को पुराने मंत्री ननकीराम कंवर की बहुत याद आ रही है….वे हर साल बारिश के लिए यज्ञ कराते थे। इतेफाक कहें या….अकाल भी कभी नहीं पड़ा। मगर पिछले तीन साल से सूबे में बारिश कम होती जा रही है। इस साल तो इंतेहा हो गई….गंगरेल में मात्र 10 परसेंट पानी है। ऐसे में, रमन सिंह को ननकी की कमी खलना स्वाभाविक है।

आखिरी बात हौले से

अनाचारी बाबा राम रहीम को जेल भेजकर सिस्टम ने देश को कड़ा संदेश दिया है…अब लोगों में अंध श्रद्धा पैदा कर साम्राज्य चलाने और फतवा जारी करने वालों की अब खैर नहीं। हरियाण पंजाब में भले ही िंहंसा भड़क उठी, मगर अब बाबाओं और इमामों की सिट्टी-पिटी गुम हो गई है….बढ़ियां है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. भारत सरकार ने गैर हिन्दी भाषी आईपीएस को रिव्यू कमेटी की सिफारिश के बाद भी क्यों नहीं हटाया?
2. भूपेश बघेल नेता प्रतिपक्ष बनेंगे और टीएस सिंहदेव पीसीसी चीफ…इसमें कोई सच्चाई है या विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही महज अफवाह?

विधवा गाड़ी और झंडा

20 अगस्त

संजय दीक्षित
गाड़ियों से बत्ती उतरने से न तो मंत्रियों को कोई फर्क पड़ा है और न ही आईपीएस अफसरों को। मंत्रियों के आगे सायरन बजाती पुलिस की गाड़ियां दौड़ती हैं…..तो कैबिनेट और राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त बोर्ड और आयोगों के चेयरमैनों ने भी जोर-जुगाड़ लगाकर पायलेटिंग की व्यवस्था करा ली हैं। आईपीएस को दिक्कत इसलिए नहीं है कि उनकी गाड़ियों में पुलिस का झंडा के साथ ही उसमें स्टार लगे होते हैं…..एआईजी में एक, आईजी में दो और एडीजी, डीजी में तीन। झंका-मंका के लिए इतना काफी है। सबसे अधिक परेशानी आईएएस अफसरों को हो रही है। खासकर जो बोर्ड या आयोगों में पोस्टेड हैं…..उन्हें सीजी 02 नम्बर की जगह सीजी 04 नम्बर की वाहन मिलती हैं। वैसे भी, मंत्रालय के अधिकांश सीनियर अफसरों ने बोर्ड और आयोगों के मद से लग्जरी गाड़ियां ले रखी हैं। जाहिर है, वे सभी 04 नम्बर वाली हैं। पहले उसमें नीली बत्ती होती थी, तो पुलिस वाले सैल्यूट ठोकते थे। अब, तीस मार खां अफसर बगल से निकल जाते हैं, पुलिस वाले देखते तक नहीं। उपर से जगह-जगह रोक देते हैं। गाड़ियों के असमय विधवा हो जाने का नौकरशाहों का दर्द समझा जा सकता है। अलबत्ता, उन्हें पश्चिम बंगाल के आईएएस अफसरों से उम्मीद जगी है। वहां आईएएस एसोसियेशन ने सरकार से गाड़ियों में झंडा लगाने की अनुमति मांगी है। पश्चिम बंगाल में अगर झंडा लगाने की इजाजत मिल गई तो जाहिर है, छत्तीसगढ़ के आईएएस भी इसके लिए अवाज बुलंद करेंगे।

नारी सशक्तिकरण

स्कूल शिक्षा विभाग से संबंद्ध बोर्ड में पोस्टेड आल इंडिया सर्विसेज के एक अफसर मुश्किल में फंस गए हैं। उन्होंने हाल ही में एक लेडी स्टाफ का ट्रांसफर किया था। इसकी वजह थी, लेडी का शिक्षकों के साथ बुरा बर्ताव। इससे टीचर्स सड़क पर उतर आए थे। लिहाजा, लेडी को वहां से हटा दिया गया। लेकिन, उसे यह नागवार गुजर गया। उसने अफसर के खिलाफ यौन प्रताड़ना की शिकायत कर दी है। शिकायत मंत्री के यहां पहुंच गई है। अफसर की अब सिट्टी-पिटी गुम है। जाहिर है, यह मामला ही ऐसा है कि जो भी सुनेगा, कहेगा…. आग लगी होगी, तभी धुंआ उठा है।

जांच का संकट

सरकार ने आईएएस रेणु पिल्ले का बिलासपुर ट्रांसफर कर दिया है। पिल्ले के बिलासपुर जाने से इस बात का संकट खड़ा हो गया है कि बड़े अफसरों के खिलाफ अब सेक्सुअल ह्रासमेंट की जांच कौन करेगा। खासकर सिकरेट्री लेवल के आईएएस और आईजी, एडीजी स्तर के आईपीएस की। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार विशाखा कमेटी की चेयरमैन महिला होनी चाहिए….आरोपी अफसर से एक रैंक उपर। लेकिन, पीएचक्यू में डीआईजी लेवल से उपर कोई महिला नहीं हैं। तभी रेणु पिल्ले की मदद ली जाती है। सिकरेट्री लेवल पर भी यही प्राब्लम है। प्रिंसिपल सिकरेट्री स्तर पर रेणु पिल्ले अकेली आईएएस थीं। इनके उपर कोई महिला आईएएस है नहीं। इंदिरा मिश्रा 11 साल पहले रिटायर हुई थीं। इसके बाद महिला आईएएस में लंबा गैप हो गया। ऐसे में कोई सिकरेट्री फंसेगा तो….? हालांकि, आईएएस चतुराई से सब काम करते हैं…..फंसते हैं, आईपीएस। हाल-फिलहाल धमतरी की महिला और आईजी का मामला सामने है। अगर यह 180 डिग्री में टर्न ले लिया तो….फिर, खबर आ रही है…..एक एडीजी के भी जल्द कुछ खुलासे होने वाले हैं। प्रश्न उठता है, इसकी तहकीकात कौन करेगा?

बृजमोहन की मुश्किलें

कृषि एवं पशुपालन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जलकी जमीन विवाद अभी ठंडा ही हुआ था कि धमधा में बीजेपी नेता के गोशाले में ढाई सौ गायों की मौत हो गई। यहीं नहीं, गोशाला संचालक की क्रूरता ने तो पार्टी नेताओं को मुंह छुपाने को मजबूर कर दिया है। इसमें इम्पोर्टेंट यह है कि गोशाला संचालकों को पशुपालन विभाग ने आंख मूंदकर लाखों रुपए का अनुदान दिया था। अनुदान बांटने में दरियादिली क्यों दिखाई गई, जांच में इसका खुलासा होगा। बहरहाल, उन्होंने दो डिप्टी डायरेक्टरों समेत नौ वेटनरी डाक्टरों को सस्पेंड कर दिया है।

अजब-गजब

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग के कारनामों के किस्से तो अनेक हैं। मगर इस बार जो हुआ है, वह सबको पीछे छोड़ दिया। बताते हैं, सत्ताधारी पार्टी के मंडल अध्यक्ष ने एक शिक्षक के ट्रांसफर का रिकमांडेशन किया था। मगर लिस्ट निकली तो विभाग के अफसरों ने शिक्षक की जगह मंडल अध्यक्ष का ही ट्रांसफर कर दिया। शिक्षकों ने मंडल अध्यक्ष को जब लिस्ट दिखाई तो कुछ देर के लिए वे शून्य से हो गए। पता चला है,  उन्हांने सीएम से इसका कांप्लेन किया है। शुक्र है, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने मंडल अध्यक्ष का ही ट्रांसफर किया है। कहीं मंत्री, विधायक का ही ट्रांसफर कर दें, तो अचरज नहीं। क्योंकि, ट्रांसफर के लिए रिकमांड तो सभी करते हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. जलकी के बाद अब कौन-सा जमीन घोटाला उजागर होने वाला है, जिसमें बड़ी संख्या में ब्यूरोक्रेट्स एक्सपोज होंगे?
2. जिलों के प्रभारी मंत्रियों के पुनर्गठन की फाइल क्यों लटक गई है? 

बुधवार, 16 अगस्त 2017

लक्ष्मी पुत्रों के दिन खराब


13 अगस्त
संजय दीक्षित
आमतौर पर लोग कहते हैं, छत्तीसगढ़ में अग्रवालों की सरकार है….अच्छी पोस्टिंग के लिए वैश्य होना जरूरी है। मगर राहु एवं गुरू के गोचर होने के कारण वैश्य नेताओं और अफसरों के अब बुरे दौर शुरू हो गए हैं। सबसे पहिले मोहन भैया की बात करें। राहु और गुरू के एक साथ आने का कुप्रभाव कहें कि उनके जैसे मैच्योर लीडर खम ठोककर लगा ललकारने…..सुन लो….तुम्हारे भी बाल-बच्चे हैं। राहु का दूसरा शिकार बनें डीआईजी केसी अग्रवाल। 5 अगस्त को दिन भर पीएचक्यू में नौकरी बजा कर शाम सात बजे भिलाई स्थित घर पहुंचे थे। अगले दिन संडे था। डिनर के बाद परिवार के साथ संडे का प्लान बना रहे थे कि कॉल बेल बजा। दरवाजा खोले तो देखा एआईजी अभिषेक पाठक हाथ में लिफाफा लिए गमगीन मुद्रा में खड़े हैं। पाठक से लिफाफा लेकर जब उसे खोला तो केसी के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उन्हेंं नौकरी से रिटायर कर दिया गया था। केसी के खिलाफ आरोप क्या है, किसी को नहीं मालूम। ना कोई डीई, ना ही जांच….फिर भी निबट गए। 11 अगस्त को प्रिंसिपल सिकरेट्री रैंक के आईएएस बाबूलाल अग्रवाल की छुट्टी हो गई। और, इसी दिन धमतरी की अग्रवाल महिला ने जिन आईपीएस अफसरों के साथ अपने रिश्ते जोड़े हैं, वे भी आखिर लक्ष्मीपुत्र ही हैं। ऐसे में, दीगर अग्रवाल नेताओं और अफसरों को कोई नुकसान हो, इससे पहिले उन्हें राहु को ठंडा करने का कोई उपाय करा लेना चाहिए।

3-2 का स्कोर

5 अगस्त को दो डीआईजी को फोर्सली रिटायर करने की खबर ने आईपीएस बिरादरी को हिला दिया। कई अफसरों की तो सदमे जैसी स्थिति थी। 6 को रविवार था। पीएचक्यू के 90 परसेंट से अधिक अफसरों ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था। या फिर फोन पिक नहीं किया। बेचारे अपने मुंह से इस बुरी खबर की पुष्टि करना नहीं चाहते थे….लग रहा था, अपना कोई चला गया। गुस्सा भी था….आईपीएस ही क्यों….? तीन-तीन आईपीएस और आईएएस एक भी नहीं। ये तो पक्षपात है….आईएएस को बचाया जा रहा है। आईपीएस अफसरों के चेहरे पर चमक तब आई जब 11 अगस्त को सुबह अचानक स्कोर बोर्ड 3-2 बताने लगा। आईएएस अजयपाल और बाबूलाल पेवेलियन लौट चुके थे। चलिये, आईपीएस में कम-से-कम ये बात अच्छी है, वे अपने प्रमोटी आईपीएस के लिए भी दुखी होते हैं। आईएएस लॉबी प्रमोटी को बड़ा बाबू से ज्यादा नहीं समझती।

महिला होने का वेटेज

ऑल इंडिया सर्विस रिव्यू कमेटी ने तीन आईएएस के नाम भारत सरकार को भेजे थे। इनमें अजयपाल और बाबूलाल के अलावा एक महिला आईएएस भी थीं। महिला अफसर के खिलाफ जमीन से संबंधित कोई पुराना मामला है। महिला एक वर्ग विशेष से भी आती है। जाहिर है, उनकी छुट्टी होने पर मैसेज अच्छा नहीं जाता। लिहाजा, डीओपीटी ने उन्हें कंसीडर कर लिया।अब आईएफएस का नम्बरआईपीएस, आईएएस से पांच अफसरों की छंटनी के बाद अब ऑल इंडिया सर्विस में आईएफएस कैडर बच गया है। रिव्यू कमेटी ने आईएफएस अफसरों के नाम भी भारत सरकार को भेजा है। इस कैडर से भी कम-से-कम दो आफिसर्स के रिमूव होने की चर्चा है।

कलेक्टरी के दावेदार

राप्रसे के 9 अफसरों के आईएएस अवार्ड होने के बाद कलेक्टरी के दावेदारों की संख्या और बढ़ गई है। इनमें जितेंद्र शुक्ला को जिला मिलना इसलिए तय लग रहा है क्योंकि, उन्हें 2009 बैच मिला है। सूबे में 2010 बैच के चार में से तीन आईएएस कलेक्टर बन गए हैं। दूसरा, जितेंद्र सरकार के लिए टेस्टेड हैं। जोगी के समय उनके गृह जिले के एसडीएम रहे। और, बीजेपी सरकार में बिलासपुर, कोरबा और रायपुर जैसे निगम के कमिश्नर। लंबे समय से वे राजघानी में सरकार के नजदीक रहकर काम कर रहे हैं। हालांकि, रसूख के मामले में तारण सिनहा का जवाब नहीं है। मगर उनका बैच 2011 मिला है। इस बैच के आईएएस अभी कलेक्टर बने नहीं है। अगर समरथ को नहीं…..वाला मामला रहा तो तारण को भी मौका मिल सकता है।

 साब! 500 ले लो…

रायपुर नगर निगम ने खुले में शौच करने वालों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। कमिश्नर रजत बंसल से लेकर पूरा अमला सुबह पांच बजे निकल पड़ता है। इस दौरान निगम अफसरों को ऐसे वाकयों से साबका पड़ रहा है कि बताने में वे शरमा जा रहे हैं। जोन क्रमांक तीन के अफसरों को शुक्रवार को एक अधेर व्यक्ति से पाला पड़ा, जो काफी प्रेशर में था। अफसरों ने कहा, तूने अगर यहां……तो 500 रुपए जुर्माना देना होगा। जवाब मिला….साब! 500 ले लेना, मगर अभी तो मत रोको और वहीं बैठ गया। अफसरों को मुंह घुमाने के अलावा कोई चारा नहीं था। हालांकि, उसकी इमरजेंसी देखकर हेल्थ आफिसर ने उसे माफी दे दी। बहरहाल, लोगों को टायलेट का यूज करने के लिए प्रेरित करने में निगम अमले को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। समता कालोनी से लगे झुग्गी-झोपड़ी इलाके में अफसर जब समझाइस देने पहुंचे तो कुछ लोगों ने ऐसी व्यथा सुना दी कि अफसर निरुत्तर हो गए….साब, टॉयलेट तो बन गया है, लेकिन बंद जगह पर प्रे..श…..र बनता नहीं है। लगता है, मोदीजी के इस अभियान को सफल होने में अभी वक्त लगेगा।

आ बैल मुझे मार

दंतेवाडा के पालनार कन्या छात्रावास में जो कुछ हुआ, उसे पुलिस के लिए आ बैल मुझे मार से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। आला अफसरानों को इसकी जांच करनी चाहिए कि किसके निर्देश पर सीआरपीएफ के जवानों को लड़कियों के हॉस्टल में राखी बंधवाने के लिए भेज दिया गया। और, वो भी दो सौ से अधिक जवानों को। कॉमन सेंस होना चाहिए, इतनी अधिक संख्या में पैरा मिलिट्री फोर्स के जवानों को कंट्रोल नहीं किया जा सकता। दो-एक सिरफिरे निकल ही जाते हैं। फिर, राखी में डांस….इससे पहिले कभी नहीं हुआ। पालनार कन्या छात्रावास में दंतेवाड़ा के पुलिस अधिकारी, सीआरपीएफ अफसर नाचने में इतने मस्त हो गए कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनके जवान क्या कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़िया सबले बढ़ियां

देश में आईएएस, आईपीएस से जिन आठ अफसरों की भारत सरकार ने छुट्टी की है, उनमें पांच छत्तीसगढ़ से हैं। याने 27 राज्यों से तीन और ढाई करोड़ आबादी वाले छत्तीसगढ़ से पूरे पांच। आठ करोड़ वाले यूपी से एक भी नहीं। चीफ सिकरेट्री की अध्यक्षता वाली रिव्यू कमेटी ने पांच अफसरों को बर्खास्तगी की सिफारिश करके वाकई छत्तीसगढ़ का नाम उंचा कर दिया….पूरे देश में छत्तीसगढ़ की चर्चा हो रही है। ठीक ही कहते हैं, छत्तीसगढ़ियां सबले बढ़ियां।

चार माटी पुत्र

छत्तीसगढ़ से जिन पांच आईएएस, आईपीएस को नौकरी से हकाला गया है, इनमें चार माटी पुत्र हैं। सिर्फ अजयपाल सिंह बाहर से हैं। बाकि, आईपीएस में राजकुमार देवांगन जांजगीर, एएम जुरी कांकेर, केसी अग्रवाल बिलासपुर और आईएएस में बाबूलाल अग्रवाल रायपुर। दिलचस्प यह है कि माटी पुत्रों को मारने वाले भी माटी पुत्र हैं। गजब कि न्यायप्रियता है भाई! अपना-पराया कुछ नहीं…सिर्फ न्याय।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस आईजी ने अपनी महिला मित्र को रायपुर में फ्लैट खरीदकर दिया है उसके नाम पर स्वागत विहार के पास आठ एकड़ जमीन खरीदा है?
2. रिटायर आईएएस डीएस मिश्रा को साल भर पहिले जब सहकारी निर्वाचन आयुक्त का ऑफर दिया गया था, तो उन्होंने ठुकरा दिया था। अब कैसे तैयार हो गए?

सर्वज्ञानी अफसर


6 अगस्त
संजय दीक्षित
सतत् विकास और प्रशासकीय सुधार पर स्टेट प्लानिंग कमीशन ने नया रायपुर में नेशनल वर्कशॉप किया। इसमें देश भर से एक दर्जन से अधिक जाने-माने नौकरशाहों ने भी शिरकत की। 64 बैच के डा0 एनसी सक्सेना, 73 बैच के फार्मर सिकरेट्री सत्यानंद मिश्रा, तो तीन प्रधानमंत्रियों के ज्वाइंट सिकरेट्री रहे 68 बैच के एसएस मीनाक्षीसुंदरम भी। वर्कशॉप के समापन समारोह में सीएम डा0 रमन सिंह भी पहुंचे। कार्यक्रम में दिग्गज हस्तियां को देखकर सीएम ने अफसोस जाहिर किया…..दिग्गज ब्यूरोक्रेट्स एवं डिफरेंट फील्ड से देश के नामचीन विद्वान छत्तीसगढ़ आए हैं….काश! मैं दोनों दिन वर्कशॉप में मौजूद रहता तो मुझे और सीखने को मिलता। मगर हैरानी की बात ये कि इस वर्कशॉप में एक भी ब्यूरोक्रेट्स नजर नहीं आए। जबकि, विधानसभा भी एक दिन पहले दोपहर में समाप्त हो गया था। वैसे, छत्तीसगढ़ के सर्वज्ञानी नौकरशाहों को सीखने की जरूरत भी नहीं है। दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश से चुन-चुनकर छंटे हुए अफसरों को जो यहां भेजा है….।

 वेट फॉर सुटेबल आईएएस?

बिल्डरों पर लगाम लगाने के लिए बनाए जा रहे रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के गठन में अभी कुछ और वक्त लग सकते हैं। वजह? सुटेबल कंडिडेट नहीं मिल रहा है। सरकार ने जस्टिस प्रितिंकर दिवाकर की अध्यक्षता में कमिटी बना दी है। पीएस आवास एवं पर्यावरण अमन सिंह और पीएस लॉ आरके शर्मा इसके सदस्य हैं। चेयरमैन के लिए दो आवेदन भी आए हैं…..रिटायर एसीएस डीएस मिश्रा और एनके असवाल के। लेकिन, कमिटी की अभी एक भी बैठक नहीं हुई है। लिहाजा, माना जा रहा है, इस रसूखदार पद के लिए सरकार की तलाश अभी पूरी नहीं हुई है। चेयरमैन के लिए रिटायर प्रिंसिपल सिकरेट्री से लेकर चीफ सिकरेट्री तक अप्लाई कर सकते हैं। ऐसे में, सवाल तो उठते हैं….सरकार कहीं किसी सुटेबल आईएएस के रिटायर होने की प्रतीक्षा तो नहीं कर रही है?

बीजेपी डिफेंसिव

बीजेपी की थर्ड इनिंग में यह पहिला मौका होगा, जब सत्ताधारी पार्टी डिफेंसिव दिखी। प्रेमप्रकाश पाण्डेय और अजय चंद्राकर की सलामी जोड़ी ने पारी संभालने की भरपूर कोशिश की। मगर जिस तरह के कांफिडेंस पहले दिखते थे, वह नदारत था। कांग्रेस ने इसका लाभ उठाने में कोई गलती नहीं की। मुख्य विपक्षी पार्टी के लिए भी हॉवी होने का यह पहला मौका था। नेता प्रतिपक्ष का उत्साह देखिए, पार्टी से अलग लाइन लेने पर सियाराम कौशिक और आरके राय को उन्होंने विधानसभा की लॉबी में ही बोल दिया…..निष्कासित किए जाएंगे। और, अगले दिन नोटिस भी इश्यू हो गई। कांग्रेस ने अपना घर दुरुस्त करना शुरू कर दिया है तो सत्ताधारी पार्टी को सोचना चाहिए।

 हार्ड लक

यूपीएससी में अबकी छत्तीसगढ़ के लिए बड़ा हार्डलक रहा। सिर्फ एक आईएएस से संतोष करना पड़ा। डिप्टी कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा सलेक्ट हुए। सर्वाधिक अफसोस दंतेवाड़ा की नम्रता जैन के लिए हुआ। 99 रैंक आने के बाद भी वे आईएएस के लिए सलेक्ट नहीं हो पाईं। इस बार उन्होंने यूपीएससी भी नहीं दिया। शायद उन्हें पूरा भरोसा रहा होगा। लानत है, बस्तर में पोस्टेड आईएएस अफसरों को। आमतौर पर परिपाटी रही है, यूपीएससी में परफार्म करने वाले प्रतिभागियों से वहां पोस्टेड आईएएस बुलाकर मिलते थे….एंकरेज करते थे…..उन्हें बताते थे कि अगली बार ये चूक मत करना। लेकिन, बस्तर के किसी भी नौकरशाह ने नम्रता को नहीं बताया कि रिस्क लेने की बजाए यूपीएससी फिर कंपीट करो।

पोस्टिंग या वरदान

यूपीएससी के इंटरव्यू के हफ्ते भर पहिले चंद्रकांत वर्मा को सरकार ने जब जनपद सीईओ बनाकर कोंटा भेजा, तो जाहिर है, उन्हें बुरा लगा होगा….सरकार ने कहां आंध्र के बार्डर पर पटक दिया। मगर कोंटा की पोस्टिंग चंद्रकुमार वर्मा के लिए वरदान बन गई। धुर नक्सल प्रभावित बस्तर लाइमलाइट में है। जाहिर है, वहां नौकरी करने वालों के प्रति स्वाभाविक तौर पर एक अलग दृष्टिकोण बनता है। वरना, चंद्रकांत का 352 रैंक था। कह सकते हैं, एकदम बाउंड्री पर। ऐसे में, कुछ भी हो सकता था।

चोरी और सीनाजोरी

सर्वेश्वर एनईकट के टेंडर में सिंचाई विभाग के अफसरों ने 15 करोड़ का खेल कर दिया। 41 और 42 करोड़ रेट देने वाली पार्टियों को कितने डेसिंग के साथ बाहर किया गया, इसके सारे पेपर हैं। कंट्रक्शन कंपनियों को जिस आधार पर बाहर किया गया, उन्हें कुछ दिन बाद फिर उसी बेस पर टेंडर प्रदान किया गया। इसके बाद भी सिंचाई विभाग सफाई दे रहा है, तो ये चोरी और सीनाजोरी ही तो हुआ।

अंत में दो सवाल आपसे

1. कांग्रेस नेताओं की जमीन की जांच-पड़ताल, नापी-जोखी अब सरकार करवाएगी?
2. सरकार के किस मंत्री की आजकल जोगी कांग्रेस से खूब छन रही है?