शनिवार, 15 जुलाई 2017

वाह एसपी साब-1

16 जुलाई

संजय दीक्षित
पुलिस महकमे के लिए शर्मनाक है…..अफसर इतना नीचे उतर सकता है। खुला खेल फर्रुखाबादी स्टाईल में काम करने वाले सूबे के एक आईपीएस ने ट्रांसफर होने के बाद भी कमाल कर डाला। 11 जुलाई की शाम आर्डर निकलने के बाद 12 जुलाई को थानेदारों को एक प्रायवेट बैंक का एकाउंट नम्बर भेजा गया….इस खाते में 40 हजार रुपए ट्रांसफर करवा दें….नए साब को बोल दिया गया है। आपलोगों का खयाल रखेंगे। दरोगाजी लोग क्या करते। आईपीएस हैं। कुछ साल बाद कहीं आईजी बनकर पहुंच गए तो क्या होगा?

 वाह एसपी साब-2

राज्य सरकार के पास खासकर पुलिस में विकल्प का ऐसा टोटा होता जा रहा है कि थाना लूटवाने वाले आईपीएस आईजी बन जा रहे हैं और अपने रिवाल्वर की हिफाजत नहीं कर पाने वाले एसपी। 11 जुलाई को चार जिलों के लिए एसपी अपाइंट हुए, इनमें एक जनाब ऐसे भी हैं, जिनका कुछ साल पहिले सर्विस रिवाल्वर चोरी हो गई थी। मामले को पुलिस वालों ने ले-देकर रफा-दफा कराया। अब, आप ही बताइये, जो अफसर अपने सरकारी पिस्तौल की सुरक्षा नहीं कर पा रहा हो, वो जिले का प्रोटेक्शन क्या करेगा। इससे पहिले, सरकार ने एक ऐसे आईपीएस को अहम रेंज का आईजी बनाया है, जो जहां एसपी रहे थाना लूटा गया या फिर न्यूसेंस हुआ।

 प्रमोटी में आगे

स्टेट पुलिस सर्विस के अफसर एसपी बनने में प्रमोटी कलेक्टरों से आगे निकल गए हैं। फिलवक्त, 27 में से सिर्फ छह जिलों में प्रमोटी कलेक्टर्स हैं। दुर्ग, मुंगेली, कोरिया, नारायणपुर, कांकेर, और जगदलपुर। जबकि, अबकी फेरबदल में प्रमोटी एसपी नौ हो गए हैं। वीवीआईपी जिला कवर्धा और राजधानी रायपुर के अलावा धमतरी, कोरिया, जशपुर, अंबिकापुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर। दर्जन भर और आईपीएस अवार्ड होने हैं। याने चुनाव के पहिले तक प्रमोटी एसपी की संख्या जाहिर है, एक दर्जन से उपर पहुंच जाएगी। हालांकि, चुनाव के करीब आने पर प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या बढ़ेगी। लेकिन, कलेक्टरों में बड़ा टफ कंपीटिशन हैं। रेगुलर रिक्रूट्ड की तादात इतनी तेजी से बढ़ रही है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के लिए राह आसान नहीं होगा। प्रमोटी में अब वही कलेक्टर बनेंगे जो या तो उमेश अग्रवाल टाईप हों या फिर टामन सिंह सोनवाने जैसा। टामन सिंह विभागीय जांच के बाद भी बड़े जिले में कलेक्टर बनने में कैसे सफल हो गए, इसका कारण लिखना उचित नहीं होगा।

नया आइडिया

जाति विवाद में फंसे अजीत जोगी कैंप ने सोशल मीडिया में एक नया ट्रेंड चालू किया है, कार्टून्स एवं श्लोगन के जरिये विरोधियों पर हमला करने का। नंदकुमार साय का कार्टून बनाकर पहला निशाना अमित जोगी ने लगाया। यही नहीं, सोशल मीडिया में भी खूब श्लोगन चल रहे हैं….जोगी-जोगी जपते हो…..जोगी सरकार बन रही है…..इनकी नींद उड़ रही है। बताते हैं, इसके लिए जोगी हाउस में एक पूरी टीम है, जो नए-नए आइडियाज सोचकर कार्टून और श्लोगन बना रहे हैं।

नाम का गफलत

सरकार के दो कारपोरेशन हैं-सीएसआईडीसी और सीआईडीसी। दोनों का नाम लगभग मिलता-जुलता है। सिर्फ एस का फर्क है। यही वजह है, हमेशा गफलत हो जाती है। 11 जुलाई को कुछ आईएएस के ट्रांफसर में रीतू सेन को सीआईडीसी का एमडी बनाया गया। मीडिया में चल गया सीएसआईडीसी के एमडी बदले। सुनील मिश्रा का पूरा दिन निकल गया लोगों को सीएसआईडीसी और सीआईडीसी का मतलब समझाने में….यह बताने में कि मेरा ट्रांसफर नहीं हुआ है।

बड़ा सवाल

डिप्टी कलेक्टर सुधाकर खलको और भरतलाल बंजारे ने हाईकोर्ट में लड़कर आईएएस अवार्ड की डीपीसी में अपना नाम शामिल करवा लिया। लेकिन, उनकी राह अभी भी आसान नहीं है। सीआर के बेस पर उनका नाम कट गया था। हाईकोर्ट ने डीओपीटी को खलको और बंजारे के नाम पर विचार करने कहा है। लेकिन, जब सीआर का सवाल है तो आखिर डीओपीटी कितना कंसीडर करेगा? बहरहाल, 10 पोस्ट के लिए 17 जुलाई को दिल्ली में डीपीसी बैठेगी। इसमें चीफ सिकरेट्री भी मौजूद रहेंगे। सीनियर होने के कारण सुधाकर खलको और भरतलाल बंजारे का नाम सबसे उपर है। उनके ंबाद हैं जितेंद्र शुक्ला, जन्मजय मोहबे, जेके ध्रुव, रिमुजियेस एक्का, तारणप्रकाश सिनहा, इफ्फत आरा, दिव्या मिश्रा, पुष्पा साहू। खलको और बंजारे का नाम कटने की स्थिति में संजय अग्रवाल और पीएस ध्रुव अंडर टेन में आ जाएंगे। संजय नौंवे नम्बर पर और ध्रुव दसवें पर। संजय को अगर आईएएस अवार्ड हो जाता है, तो 10 में से चार बिलासपुर संभाग के होंगे। जितेन्द्र शुक्ला और जन्मजय मोहबे बिलासपुर के हैं और दिव्या और संजय रायगढ़ और खरसिया के। और, कहीं खलको और का नम्बर लग गया तो संजय और ध्रुव को इंतजार करना पड़ेगा।

वोटों का गणित

पीएल पुनिया को कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने की एक वजह दलित वोट भी माना जा रहा है। कांग्रेस के एक शीर्ष नेता ने माना, पार्टी पुनिया के जरिये दलितों को साधने की कोशिश करेगी। दलित कभी कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक थे। लेकिन, पिछले दो चुनावों में दलित वोट छिटककर बीजेपी के पाले में चले गए। 2013 में तो सत्ताधारी बीजेपी 10 में से नौ सीटें जीतने में कामयाब हो गई। कांग्रेस को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था। अलबत्ता, पुनिया की नियुक्ति से पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की डिमांड भी पूरी हो गई। मई फर्स्ट वीक में राहुल गांधी से जब छत्तीसगढ़ के नेताओं से वन-टू-वन मुलाकात की थी उस समय बताते हैं, भूपेश ने हिन्दी बेल्ट के नेता को प्रभारी बनाने का आग्रह किया था। पुनिया यूपी के तो हैं ही, आईएएस भी रहे हैं।

स्मार्टनेस का राज

बस्तर आईजी विवेकानंद सिनहा शांत चित के अफसर माने जाते हैं…..चाकलेटी भी। तभी तो सरकार ने उनका जब बस्तर का आर्डर निकाला तो लोगों के मुंह से निकल गया था….ओह! सरकार ने बेचारे को कहां फंसा दिया। वही विवेकानंद बस्तर में इतने एक्टिव हो गए हैं कि पूछिए मत! मिलिट्री ड्रेस में बिल्कुल कमांडर टाईप….स्मार्ट भी। आए दिन एक-दो नक्सली भी ढेर हो रहे हैं। विवेकानंद में आए इस बदलाव के पीछे जगदलपुर पुलिस आफिसर मेस का नया जिम बताया जा रहा है। आईजी, डीआईजी, एसपी समेत जिले के बड़े अफसर रोज सुबह सात से नौ बजे आना अनिवार्य है। जिम में दो घंटे पसीना बहाने का ही नतीजा है कि विवेकानंद से लेकर डीआईजी सुंदरराज, एसपी शेख आरिफ ने पांच से लेकर आठ किलो तक वजन कम कर लिया है। दूसरा फायदा यह है कि जिम में ही आज क्या करना है, उसकी स्टे्ज्डी बना ली जाती है। याने जिम के साथ पोलिसिंग भी। व्हाट एन आइडिया……।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डीएफओ के ट्रांसफर के आठ दिन बाद सरकार को आर्डर क्यों बदलना पड़ गया? 
2. किस आईएएस के बारे में चर्चा है कि वे एक जुलाई को वीआरएस के लिए नोटिस देंगे, लेकिन उन्होंने पल्टी मार दी?

सोमवार, 10 जुलाई 2017

रेरा का पेड़ा


संजय दीक्षित
9 जुलाई
रेरा का पेड़ारेरा बोले तो रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी। बिल्डरों को कसने के लिए भारत सरकार ने इस एक्ट को बनाया है। छत्तीसगढ़ में भी एक अगस्त से इसकी फंक्शनिंग चालू हो जाएगी। लिहाजा, जुलाई अंत तक चेयरमैन और मेम्बर्स की पोस्टिंग करनी होगी। सरकार ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। हाईकोर्ट के सीजे के नामनी के रूप में जस्टिस प्रितिंकर दिवाकर, पीएस आवास और पर्यावरण अमन सिंह और सिकरेट्री लॉ आरएस शर्मा इसके सदस्य बनाए गए हैं। चेयरमैन के लिए कम-से-कम प्रिंसिपल सिकरेट्री से रिटायर हुए अफसर पात्र होंगे। इस पोस्ट या इसके उपर से रिटायर होने वाले छत्तीसगढ़ में तीन आईएएस हैं। डीएस मिश्रा, आरएस विश्वकर्मा और एनके असवाल। विश्वकर्मा चूकि पीएसी चेयरमैन रह चुके हैं, इसलिए कोई और पोस्ट अब होल्ड नहीं कर सकते। डीएस को पहले सरकार ने कुछ नहीं दिया तो रेरा जैसी पोस्टिंग में संदेह है। मई में रिटायर होने के बाद असवाल ने जरूर अपने बंगले का एक्सटेंशन चार महीने के लिए करा लिया है। आवदेन भी अभी दो ही आए हैं। डीएस और असवाल का। इन दोनों में से किसी का नहीं हुआ तो सरकार या तो बाहर से किसी को लाएगी या फिर हो सकता है, कोई आला नौकरशाह इस पोस्ट के लिए वीआरएस ले लें। बहरहाल, जब तक कोई फैसला नहीं हो जाता, रेरा का कौन खाएगा पेड़ा….अटकलें गर्म रहेंगी।

 रेरा इज अल्टीमेट

पोस्ट रिटायरमेंट वाले राज्य में जितने पद हैं, उनमें सर्वाधिक मलाईदार रेरा होगा। बिल्डर्स ही नहीं, बल्कि हाउसिंग बोर्ड, एनआरडीए, आरडीए जैसी सरकारी हाउसिंग संस्थाएं भी इसके अंतगर्त आएंगी। रेरा को बिल्डरों को अधिकतम तीन साल के लिए जेल भेजने का पावर होगा, वहीं खामियां मिलने पर प्रोजेक्ट का 10 फीसदी जुर्माना भी कर सकता है। याने 50 करोड़ के प्रोजेक्ट हैं, तो सीधे पांच करोड़। ऐसे में पांचों उंगलियां घी में रहेंगी। रुतबे का तो पूछिए मत! बड़े लेवल में पोस्ट रिटायरमेंट वाले अभी चार पोस्ट हैं। बिजली नियामक आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग, सूचना आयोग और पीएससी। पीएससी में एज 62 साल है, इसलिए ब्यूरोक्रेट्स उधर देखते नहीं। सूचना आयोग में आरटीआई वालों की गाली खाने के अलावा कोई काम नहीं है। राज्य निर्वाचन में कुछ धरा नहीं है। बिजली नियामक में साल में एक बार रेट तय करते समय पूछपरख होती है, उसके बाद वहां भी वही हाल है। प्रायवेट पावर कंपनियों की हालत खराब होने के बाद इस आयोग की भी हालत खराब ही समझिए। ऐसे में, रेरा इज अल्टीमेट।

सरकार को बद्-दुआएं

सरकार ने एक झटके में बैरियर और चेक पोस्ट बंद कर दिए। जरा भी खयाल नहीं किया, उससे राज्य के कितने लोगों की मौज कट रही थीं। बैरियरों से सरकार को हर महीने 85 से 90 करोड़ का रेवन्यू आता था। और करीब 45 से 50 करोड़ उपर से। एक नंबर वाले 85-90 करोड़ खजाने में चले जाते थे। और, उपर वाले…..बोरियों में भरकर लाए जाते थे। फिर, चार आदमी की ड्यूटी थी….तीन दिन बैठकर लिफाफे और थैले में पैक करों….इसके बाद लिस्टेड लोगों तक पहुंचाना। ट्रांसपोर्ट से उपकृत होने वालों में रसूखदार लोगों के अलावा पुलिस मुख्यालय, मंत्रालय के संबंधित आला अधिकारी, कलेक्टर, एसपी, आईजी, एडीएम, सीएसपी, पत्रकार, छुटभैया नेता शामिल थे। पांच तारीख तक ये लिफाफे घर पहुंच जाते थे, सो लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता था। कुछ लोगों का घर का खर्चा इसी से चलता था….शायद यही वजह थी कि ट्रांसपोर्ट की लिस्ट में शामिल करने के लिए बड़े लेवल पर जैक लगाए जाते थे। पता नहीं, सरकार के रणनीतिकारों को क्या हो गया है। चुनाव के समय लिफाफों का वजन बढ़ाना था तो तीन दशक से चले आ रहे सिस्टम को यकबयक बंद कर दिया। जिनके लिफाफे बंद होंगे, वो सरकार को आखिर बद्-दुआएं ही तो देंगे।

 एसपी की लिस्ट

डीएफओ की लंबी लिस्ट के बाद अब एसपी की बारी है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और राष्ट्रपति के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के छत्तीसगढ़ दौरे के बाद संकेत मिले हैं, एसपी की लिस्ट निकल जाएगी। कलेक्टर और डीएफओ की तरह एसपी की लिस्ट बड़ी नहीं होगी। एसपी की लिस्ट में कुछ अड़चनें थीं। एक कु-ख्यात एसपी ने बड़ा जैक लगा दिया था। और दूसरा, बीजापुर एसपी केएल ध्रुव और दंतेवाड़ा एसपी कमललोचन कश्यप के ढाई साल से अधिक हो गए हैं। सरकार उन्हें चेंज करना चाह रही है। लेकिन, बस्तर आईजी विवेकानंद ने इन दोनों के लिए सरकार से आग्रह किया है। दरअसल, विवेकानंद के ज्वाईन करने से पहिले ही सुकमा, बस्तर, कोंडागांव और नारायणपुर के एसपी बदल गए थे। दो ही एसपी पुराने हैं। वो भी हट गए तो आईजी के लिए स्वाभाविक रूप से दिक्कतें तो होगी ही।

 डिप्टी कलेक्टर्स भी

डिप्टी कलेक्टरों के लिस्ट भी लगभग तैयार है। सीएम से सिर्फ अंतिम चर्चा भर बाकी है। समझा जाता है, अगले हफ्ते डिप्टी कलेक्टरों के आदेश भी निकल जाएंगे। इनमें ज्यादतर वे होंगे, जिनका दो साल से अधिक हो गया है या चुनाव के लिए आचार संहिता प्रभावशील होने तक दो साल हो जाएगा।

आईपीएस के लिए बस्तर

अफसरों के लिए बस्तर वैसे ही स्वर्ग माना जाता है। शराब का सरकारीकरण और ट्रांसपोर्ट बैरियर बंद होने के बाद खास तौर से एसपी के लिए मैदानी जिले में अब कुछ बच नहीं गया है। एसपी जब तक हाथ-पांव नहीं चलाए, कुछ नहीं मिलने वाला। बस्तर में नक्सल के अलावा नेतागिरी वाला कोई प्रेशर नहीं है। दूसरा, गृह विभाग ने एसएस मनी भी बढ़ाकर हर महीने पांच-पांच लाख रुपए कर दिया है। बस्तर में कागजों में ढेरों काम होते हैं, वह अलग है। सो, शाही सुख-सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। एसपी के बंगले के इंटिरियर के लिए नागपुर और मुंबई से आदमी बुलाए जा रहे हैं। चलिए, ठीक है। बस्तर में पोस्टिंग का चार्म बढ़े….यह अच्छी बात है।

नो कमेंट्स

बात बस्तर की हो तो सुकमा डीएफओ राजेश चंदेले का नाम जेहन में बरबस आ जाता है। चंदेले ने बंगले में स्वीमिंग पुल बनाकर सुर्खियां बटोरी थी। आय से अधिक संपति के मामले में चंदेले के खिलाफ राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने भारत सरकार से चालान पेश करने की अनुमति मांगी है। इसके लिए रिमाइंडर भी भेजे जा रहे हैं। इस बीच सरकार ने कल उन्हें धमतरी जैसे समृद्ध डिविजन का डीएफओ बना दिया है…..तो फिर नो कमेंट्स।

रिटायर्स की भीड़

पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए नौकरशाहों की भीड़ बढ़ती जा रही है। पिछले साल मार्च में दिनेश श्रीवास्तव रिटायर हुए थे। इसके बाद डीएस मिश्रा, ठाकुर राम सिंह, बीएल तिवारी, राधाकृष्णन, एसएल रात्रे, एनके असवाल। असवाल तो पिछले महीने ही सेवामुक्त हुए हैं। बहरहाल, इनमें से सिर्फ ठाकुर राम सिंह किस्मती निकले। सरकार ने उन्हें राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद नवाज दिया। बाकि, बाट जोह रहे हैं। सितंबर में सिकरेट्री इरीगेशन गणेश शंकर मिश्रा भी रिटायर होंगे। आईपीएस में राजीव श्रीवास्तव और आईएफएस में बीके सिनहा भी क्यूं में हैं। हालांकि, पोस्ट तो कई खाली है। लेकिन, सरकार मुठ्ठी बांधकर रखी है। मुख्य सूचना आयुक्त का पोस्ट को खाली हुए करीब डेढ़ साल हो गए हैं। मानवाधिकार आयोग में भी वैकेंसी है। सूचना आयुक्त का भी एक पद खाली होने वाला है। पुलिस जवाबदेह प्राधिकरण में भी पोस्ट वैकेंट हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. ईओडब्लू के खिलाफ मोर्चा खोलने का इरीगेशन डिपार्टमेंट ने दुःसाहस क्यों किया?
2. अजीत जोगी की जाति पर फैसले को लोग अमित शाह के दौरे से जोड़कर क्यों देख रहे हैं?

मुलाकात के मायने


संजय दीक्षित 
2 जुलाई 2017
मुलाकात के मायनेसीबीआई डायरेक्टर आलोक कुमार वर्मा 22 जून को रायपुर में थे। उन्होंने ब्यूरो के स्टेट आफिस का इनॉग्रेशन किया। वर्मा से मिलने दुर्ग के एसपी अमरेश मिश्रा रायपुर आए थे। सीबीआई डायरेक्टर ने अमरेश से अकेले में 25 तक चर्चा की। अब देश की र्शीर्ष जांच एजेंसी का मुखिया किसी एसपी से अकेले में लंबी मुलाकात करें तो इस पर भला बतकही कैसे नहीं होगी। ब्यूरोक्रेसी में अपने-अपने हिसाब से अटकलें लगाई जा रही हैं। कोई कह रहा है वर्मा ने अमरेश से किसी अहम विषय पर फीडबैक लिया है। तो कोई कह रहा है अमरेश ने सीबीआई में डेपुटेशन पर जाने के संबंध में बात की हैं। लेकिन, ये दोनों ही नहीं है। अमरेश दिल्ली जाना भी चाहें तो सरकार छोड़ेगी नहीं। सूबे में अमरेश जैसे गिने-चुने एसपी हैं। तभी तो दुर्ग भेजा गया। दरअसल, सीबीआई डायरेक्टर बिहार के मुजफ्फरपुर से हैं। और अमरेश बक्सर के। जाहिर है, एक इलाके के होने के कारण दोनों के पुराने संबंध हैं। चलिये, इस चक्कर में अमरेश का ओहरा और बढ़ गया।

डिजिटल वर्क, नो डंप

मंत्रालय में अब डिजिटल वर्क होगा। याने नो नोटशीट…..नो फाइल। सारा काम कंप्यूटर, लेपटॉप या मोबाइल पर। अंडर सिकरेट्री से डिजिटल नोटशीट आगे बढ़ेगी, फिर सिकरेट्री से होते हुए चीफ सिकरेट्री तक जाएगी। मंत्रालय में इसकी तैयारी शुरू हो गई है। जीएडी ने मंत्रालय के अफसरों को जल्द-से-जल्द हिन्दी टायपिंग सीखने कहा है। डिजिटल वर्किंग का फायदा यह होगा कि अफसरों के टेबल पर फाइलों का अंबार नहीं लगेगा। अफसर घर पर हों, गाड़ी में रहें या दौरे में। टाईम मिलते ही मोबाइल पर फाइलों को क्लियर कर देंगे। मंत्रालय दूर होने के चलते आने-जाने में कम-से-कम एक घंटा लगता है। इस दौरान मोबाइल पर बात करने या झपकी लेने के अलावा और कोई चारा नहीं होता। अब इसका बखूबी उपयोग किया जा सकेगा। और, नुकसान यह है कि ब्यूरोक्रेट्स कुछ फाइलों पर चर्चा लिखकर उसे लटका देते थे। ये ऐसी फाइलें होतीं थीं, जिनसे या तो कोई नाराजगी होती हैं या फिर हिस्सा कम दे रहा होगा, तो वह बढ़ा देगा। अब ऐसा नहीं हो पाएगा। कोई-न-कोई कमेंट लिखकर फाइल को डिस्पोज्ड करना होगा। अलबत्ता, मंत्रालय के अफसर इसका तोड़ निकालने में जुट गए हैं। क्योंकि, फाइलें अगर लटकाई नहीं गई तो फिर इतना परिश्रम करके ब्यूरोक्रेट्स बनने का मतलब क्या। बहरहाल…..सिस्टम इम्पू्रव करने की ये कोशिश अच्छी है।

नाश्ते में पोहा, तो सावधान!

नाश्ते में अगर आप पोहा लेते हैं तो जरा रुकिए…..! घर वाली को बोलिये, झकझक सफेद पोहा खरीदने से बचें। क्योंकि, पोहा की सफेदी के लिए लेड मिलाया जा रहा है। और, ये हम नहीं कर रहे हैं। बल्कि पोहा मिल वाले खुद स्वीकार किया है। दरअसल, भाटापारा से पोहा मिल मालिकों का एक प्रतिनिधिमंडल एक मंत्री से मिलने रायपुर आया था। इत्तेफाक से इस कॉलम का लेखक भी वहीं मौजूद था। पोहा वालों ने मंत्रीजी को बुके दिया। फिर, शरमाते हुए बोले, हमलोगों ने लेड मिलाना बंद कर दिया है। पोहा वालों को अपने मुंह से यह सफाई क्यों देनी पड़ी, ये भी जानना आवश्यक है। पिछले साल भाटापारा के पोहा मिलों के खिलाफ लेड मिलाने की शिकायत पर मंत्रीजी ने कुछ पोहा मिलों को बंद करा दिया था। लिहाजा, वे मंत्रीजी को भरोसा देने आए थे। लेकिन, उनके भरोसे पर आप कितना एतबार करेंगे। वे तो धंधा कर रहे हैं। धंधा का एक ही वसूल होता है। अत्यधिक मुनाफा। लेड के सेवन से कैंसर हो सकता है, इससे पोहा मिलों को क्या वास्ता?

नया तरीका

राज्य के संपदा विभाग ने बड़े-बड़ों से बंगला खाली कराने के लिए नायाब तरीका निकाला है। मकान खाली कर पहले संपदा विभाग से एनओसी ले आइये, इसके बाद ही पेंशन आदि का मामला आगे बढ़ेगा। यही नहीं, पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए भी अगर अप्लाई करना है तो पहले संपदा विभाग का अनापत्ति देना होगा। इसका फायदा यह हुआ है कि रिटायर होने वाले नौकरशाह बंगला खाली करने में देर नहीं कर रहे। हाल के दिनों में एनके असवाल एक अपवाद होंगे, जिन्हें रिटायर होने के बाद चार महीने के लिए सरकारी आवास में रहने का एक्सटेंशन मिला है। इससे पहिले, संपदा विभाग ने असवाल का बंगला अंबलगन पी दंपति को एलाट कर दिया था। लेकिन, अंबलगन को अब अक्टूबर तक वेट करना होगा।

समयदानी और अपराधी

बीजेपी का एक कार्यक्रम जोर-शोर से चल रहा है। समयदानी। समयदानी मतलब फील्ड में समय देने वाले। बताते हैं, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह का ये कंसेप्ट है। ताकि, पार्टी को और सुदृढ़ किया जा सकें। लेकिन, इसमें खबर यह है कि समयदानियों में कुछ गड़बड़ टाईप के लोगों का भी चयन हो गया है। बात करते हैं, सरगुजा इलाके का। सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पीडीएफ में अफरातफरी करने वाले बीजेपी के नेता के खिलाफ पुलिस ने हाल ही में चार सौ बीसी का मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर भी आसानी से नहीं हुई है। कलेक्टर भीम सिंह ने निर्देश दिया था। महीने भर बाद किरण कौशल से कांप्लेन हुआ तो जाकर उन्होंने एसपी को बुलाकर पूछा तब जाकर अपराध दर्ज हो पाया। सत्ताधारी पार्टी को ऐसे लोगों की पहचान होनी चाहिए। वरना, जिस विधानसभा में उक्त नेताजी की ड्यूटी लगाई गई है, वहां वे किस बात की शिक्षा देंगे, समझा जा सकता है।

 रीना बाबा और जोगी

आईएएस रीना बाबा कंगाले की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी ने अजीत जोगी की जाति पर रिपोर्ट दे दी है। यह काम रीना बाबा ही कर सकती थी। लेडी आईएएस हैं। दलित भी। नागपुर से कनेक्शन भी। फिर भी जोगी कांग्रेस ने रीना पर अटैक किया है। रीना के अलावा कोई पुरूष आईएएएस जोगी के खिलाफ ऐतिहासिक रिपोर्ट देने का शायद हौसला नहीं जुटाता। एसीएस एनके असवाल को ट्राईबल से हटाकर जब उनसे 20 बैच जूनियर रीना को सिकरेट्री बनाया गया था, तो अंदेशा हो गया था कि कोई बात है।

मारवाही पर चर्चा

अजीत जोगी की जाति वाली रिपोर्ट अभी सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुई है। रिपोर्ट को स्टे करने के लिए जोगी शीर्ष अदालत में फरियाद करेंगे। सुको के फैसले के बाद ही इस पर अंतिम तौर से कुछ कहा जा सकेगा। मगर अभी से मारवाही उपचुनाव पर अटकलें शुरू हो गई हैं। एक राजनीतिक पार्टी ने तो कंडिडेट पर बात शुरू कर दी है। हालांकि, अभी इसे  उति उत्साह कहना चाहिए। तस्वीर तो सुको के रुख पर साफ होगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. जोगी की जाति वाली रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देने में पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने देर क्यों लगाई?
2. पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर का कांफिडेंस लेवल बढ़ता जा रहा है, इसकी वजह क्या है?

महंतों का फेर

महंतों का फेर


25 जून
दो महंतों के फेर में जैजैपुर नगर पंचायत में कांग्रेस चारो खाने चित हो गई। जोगी कांग्रेस ने आश्चर्यजनक तौर से यह सीट अपने खाते में कर ली। कांग्रेस के लोग ही बताते हैं, प्रत्याशी चयन में अगर सबको साथ लिया गया होता तो आज ये दिन नहीं देखने पड़ते। दरअसल, जांजगीर जिले में दो महंत हैं। पीसीसी ने प्रत्याशी चयन में एक महंत से राय मशिवरा किया, दूसरे को नजरअंदाज कर दिया। इसका खामियाजा कांग्रेस प्रत्याशी को भुगतना पड़ा। एक महंत ने अपनी ही पार्टी को निबटाने के लिए चुटिया बांधी और जोगी कांग्रेस को इसका लाभ मिल गया…..कांग्रेस चौथे नम्बर पर लुढ़क गई। हालांकि, बीजेपी भी तीसरे नम्बर पर रही। मगर दोनों का वोट अंतर लगभग डबल का रहा। आखिर, ठीक ही कहा जाता है, कांग्रेस को हराने के लिए अपने ही काफी हैं। फिर भी, पार्टी को सबक लेना चाहिए। वरना, 2018 के चुनाव में जोगी की पार्टी कांग्रेस के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। क्योंकि, कांग्रेस में हर विधानसभा सीट पर दो-चार महंत तो हैं हीं। भूपेश बघेल को तो सबसे पहिले इन महंतों को साधना चाहिए।

 सरकार बड़ी या एसपी

कलेक्टरों की लंबी लिस्ट लोक सुराज खतम होने के दूसरे रोज ही निकल गई थी। मगर एसपी का मामला अटक गया है। सरकार के साउथ कोरिया से लौटे 17 दिन हो गए। लेकिन, इंतजार की घड़ी खतम नहीं हो रही है। बताते हैं, एसपी की छुट्टी वाली सूची में जिस एसपी का नाम सबसे उपर था, उसने ऐसा जैक लगा दिया कि सरकार का मन खराब हो गया। लिहाजा, लिस्ट को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

जीएडी का कमाल

आईएएस नरेंद्र शुक्ला को सरकार ने महीने भर के भीतर हेल्थ डायरेक्टर से हटाकर वेयर हाउस का एमडी बना दिया। उनके हटने का कारण हेल्थ कमिश्नर आर प्रसन्ना और शुक्ला का बैच सेम होना बताया जा रहा है। दोनों 2004 बैच के आईएएस हैं। मगर जीएडी ने दोनों को एक ही विभाग में उपर-नीचे कर दिया था। लेकिन, मान गए शुक्लाजी को। याद होगा, रमन सरकार की दूसरी पारी में उन्हें रायपुर जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया था। नौ साल पहले अनडिवाइडेड एमपी में वे रायपुर का सीईओ रह चुके थे। लिहाजा, उन्होंने ज्वाईन करने से इंकार कर दिया था। सरकार ने आदेश बदलकर उनका आबकारी में किया। और, इस बार भी ऐसा ही हुआ। दोनों में जीएडी का ही कमाल रहा। पर, पंडितजी ने दोनों बार आदेश बदलवाकर अपनी ताकत दिखा ही दी। आखिर, पृष्ठभूमि का लाभ मिलता ही है।

 महिला आईएएस और राहु का साया

छत्तीसगढ़ की दो महिला आईएएस पोस्टिंग से बड़ी दुखी थीं। 97 बैच की निहारिका बारिक और 2010 बैच की रानू साहू। निहारिका को दिल्ली डेपुटेशन से लौटने के बाद इसलिए बिलासपुर भेज दिया गया था कि वे दूर रहने के कारण परिवार के पास फ्रिक्वेंटली दिल्ली नहीं जा पाएंगी। दूसरा, रानू साहू। मैटरनिटी लीव से लौटते ही रानू को जब बिलासपुर से सरगुजा पटका गया तो ब्यूरोक्रेट्स भी नहीं समझ पाए कि ऐसा हुआ क्यों….दुधमुंह बच्चे पर भी रहम नहीं….? यही नहीं, रानू के हसबैंड जेपी मौर्य को बिलासपुर से सुकमा का कलेक्टर बनाकर भेज दिया गया। याने पति दक्षिण, पत्नी उत्तर। ऐसा पुख्ता इंतजाम कि दोनों चाह कर भी नहीं मिल सकें। मुख्यमंत्री की नोटिस में ये बात लाई गई। उन्हें बताया गया कि निहारिका और रानू पर राहु का प्रकोप है…..लाख चाहने के बाद भी वह हटने के लिए तैयार नहीं है। इस पर मुख्यम़ंत्री मुस्कराए। बोले, मैं कुछ करता हूं। अब 13 साल के सीएम हैं….राहु ने हाथ जोड़ लिया। इसके बाद एक-एक करके निहारिका और रानू को रायपुर मे ठीक-ठाक पोस्टिंग मिल गई।

भगवा सरकार और माइनरिटी अफसर

बीजेपी सरकारों पर भले ही अल्पसंख्यकों की उपेक्षा के आरोप लगते हां….कुछ अफसर इस बात का रोना भी रोते हैं….बीजेपी राज में उन्हें कौन पूछेगां। लेकिन,  छत्तीसगढ़ में इस समय चार अल्पसंख्यक कलेक्टर हैं। तीन मुस्लिम और एक ईसाई। रायगढ़, कोरबा और बीजापुर में मुस्लिम और मुंगेली में क्रिश्चियन कलेक्टर। एक जिले के एसपी भी मुस्लिम हैं। मंत्रालय में भी सरकार के अति महत्वपूर्ण पोस्ट पर एक माइनरिटी आईएएस तैनात हैं। कहने का आशय यह है कि नौकरशाहों का अगर काम बढ़ियां है तो सरकार कोई भी हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। और, वास्तव में होना भी यही चाहिए।

अमर को राहत

स्मार्ट सिटी में छत्तीसगढ़ के तीन शहर शामिल हो गए। रायपुर देश का पहला जिला होगा, जिसके दो शहर लिस्टेड होंगे। वैसे भी, छोटे से राज्य से तीन शहर का स्मार्ट सिटी में शामिल होना भी कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। लेकिन, स्मार्ट सिटी की खुशी कोई नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल से पूछे। बिलासपुर पहली सूची में शामिल नहीं हो सका था। इसके लिए वे विरोधियों के निशाने पर रहे। लेकिन, इस बार अमर ने दिल्ली में ऐसा फुलप्रूफ इंतजाम किया था कि पहले से उन्होंने लोगों से शेयर करना शुरू कर दिया था, इस बार बिलासपुर का नाम कट नहीं सकता। चलिये, वेंकैया नायडू से अमर के पारिवारिक संबंधों का लाभ बिलासपुर को मिल गया।

 मंडल स्टाईल

जांजगीर जिले में सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या जनवरी तक 52 थी। बस्तर के नारायणपुर से भी कम। सरकार ने जांजगीर के प्रभारी सचिव आरपी मंडल को इसे ठीक करने कहा। मंडल ने डाक्टरों की मीटिंग बुलाई। अपने ठेठ अंदाज में बोले, आदरणीय…मैं आप लोगों को सस्पेंड नहीं करूंगा। सस्पेंड करूंगा तो आधा वेतन यहां से लेकर आप लोग प्रायवेट हस्पिटल में बैठने लगोगे। मैं सिर्फ वेतन रोकूंगा। इसके बाद पिछले महीने मई में प्रसव की संख्या 258 पहुंच गई। ये है मंडल स्टाईल।

 बोरा का योग

सिकरेट्री, सोशल वेलफेयर सोनमणि बोरा का योग दिवस का आयोजन हंड्रेड वन परसेंट सफल रहा। दावा है, राज्य में 50 लाख लोगों ने योग किया….दो-दो वर्ल्ड रिकार्ड बने। इससे पहिले उन्होंने रायपुर में मैराथन दौड़ भी करा कर भी उन्होंने ध्यान खींचा था। लेकिन, पोस्टिंग को लेकर बोरा शायद ही खुश होंगे। रायपुर नगर निगम कमिशनर से कैरियर शुरू करने वाले बोरा की पदस्थापना से आईएएस भी कभी ईर्ष्या करते थे। जांजगीर, सीएम के गृह जिला कवर्धा, रायपुर, बिलासपुर जैसे जिले में कलेक्टरी की। डीपीआर रहे। लेकिन, इस समय जब सिकरेट्री लेवल पर जबर्दस्त टोटा है, बोरा के पास विभाग के नाम पर खेल और युवा कल्याण तथा समाज कल्याण हैं। ग्रामोद्योग के केटेगरी के ये विभाग काफी कमजोर माने जाते हैं। अब देखना है, योग दिवस का सफल आयोजन के बाद बोरा का योग बदलता है या….?

अंत में दो सवाल आपसे

1. कांग्रेस के एक नेता का नाम बताइये, जो राज्य से बाहर एक बाबा की शरण में गए हैं?
2. एंटी करप्शन ब्यूरो ने किस बड़े नौकरशाह की नस पकड़ ली है?

कलेक्टर की बिदाई!

कलेक्टर की बिदाई!

18 जून
संजय दीक्षित
एक कलेक्टर की बिदाई की आजकल खूब चटखारे लिए जा रहे है। बताते हैं, बिदाई को हाईप्रोफाइल बनाने के लिए मीटिंग के नाम पर संभाग के सभी कलेक्टरों को मुख्यालय बुलवाया गया। क्लास तो तब हुआ, जब जिस कमिश्नर ने कलेक्टरां को बुलाया, मीटिंग से वे ही गायब मिले। एक डिप्टी कलेक्टर ने कलेक्टरों को चाय पिलाकर मीटिंग की रस्म अदायगी पूरी की। इसके बाद कलेक्टरों को हौले से बताया गया, फलां कलेक्टर साब की बिदाई है….जिला पंचायत के सीईओ के बंगले पर पहुंचना है। वहां पुलिस के आईजी, डीआईजी, एसपी भी मौजूद थे। वहां क्या-क्या हुआ, हम लिख नहीं सकते। मगर बिदाई लेने का यह तरीका कई कलेक्टरों को बड़ा नागवार गुजरा।

फंस गए सुब्रत

प्रिंसिपल सिकरेट्री हेल्थ सुब्रत साहू बुरे ग्रह-दशा में फंस गए हैं। सरकार ने नए सीईओ के लिए तीन आईएएस के नाम भेजे थे, निर्वाचन आयोग ने सुब्रत के नाम को टिक कर दिया। और, उपर से पेंच लगा दिया, वे एडिशनल चार्ज में नहीं रह सकते। हालांकि, सरकार ने पुनर्विचार के लिए आयोग को लेटर लिखा है। लेकिन, इसमें राहत मिलने की संभावना कम है। अलबत्ता, निर्वाचन में अभी कोई काम भी नहीं है। अगले साल मतदाता सूची के पुनरीक्षण के समय जून-जुलाई से काम बढ़ेगा। तब तक पीएस लेवल का एक अफसर चुनाव में डंप रहेगा। और, यही नहीं, कम-से-कम जुलाई 2019 से पहिले इस पोस्ट से उन्हें छुटकारा भी नहीं मिलने वाला। क्योंकि, विधानसभा चुनाव के जस्ट बाद लोकसभा चुनाव आ जाता है।

कैरियर खराब!

राज्य बनने के बाद जितने चीफ इलेक्शन आफिसर बनें हैं, उनमें अपवाद के तौर पर केके चक्रवर्ती को छोड़ दें, तो सभी परेशानी में पड़े या फिर उनका कैरियर खराब हो गया। राज्य बनने के बाद चक्रवर्ती पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी बने थे। 2003 का चुनाव उन्होंने कराया था। इसके बाद सीईओ की कुर्सी की ग्रह-दशा की स्थिति इतनी खराब हो गई कि जो भी सीईओ बना, उसे काफी नुकसान उठाना पड़ा। बीजेपी सरकार की पहली पारी में बीएल अग्रवाल सीईओ बने थे। वे तिहाड़ से हाल ही में जमानत पर छूटे हैं। उनके बाद डा0 आलोक शुक्ला सीईओ रहे। प्रिंसिपल सिकरेट्री रैंक के इस तेज और काबिल अफसर की क्या गति हो गई है, बताने की जरूरत नहीं है। शुक्ला के बाद सुनील कुजूर सीईओ बने। वो तो आईपीएस राजीव श्रीवास्तव को उन्हें थैंक्स करना चाहिए, जिसके चलते वे एसीएस बन गए। वरना, हो सकता था, वे आज भी पीएस होते। इसके बाद आई निधि छिब्बर। निधि भी कम परेशान नहीं रहीं। पिछले साल उनका डिफेंस में पोस्टिंग मिल गई थी। मगर यहां से रिलीव न होने से डीओपीटी ने उन्हें डिबार कर दिया। निधि ने कैट में लड़ाई लड़ी। तब जाकर उन्हें न्याय मिला। लेकिन, इस चक्कर में एक साल निकल गया। अब, नम्बर है सुब्रत साहू का। दुआ कीजिए, सुब्रत 2019 में सही-सलामत मंत्रालय लौट जाएं।

रायपुर में सीबीआई

22 जून से रायपुर में सीबीआई का एंटी करप्शन आफिस चालू हो जाएगा। माना एयरपोर्ट के पास इसकी बिल्डिंग तैयार हो गई है। सीबीआई डायरेक्टर आलोक कुमार वर्मा इसका लोकार्पण करेंगे। अभी यह आफिस भिलाई में था। लेकिन, रायपुर कैपिटल है और करप्शन की स्थिति भी ठीक-ठाक है। इसलिए, सीबीआई अपने आफिस को रायपुर शिफ्थ कर रही है। जाहिर है, अब स्टेट के एसीबी को भी अलर्ट रहना होगा। एसीबी से जो बड़े मुर्गे बच जाएंगे, उसे हलाल करने के लिए सीबीआई रहेगी। ऐसे में, भ्रष्ट लोगों की नींद उड़नी लाजिमी है।

जवाब नहीं मंत्रीजी का

संस्कृति और पर्यटन मंत्री दयालदास बघेल का जवाब नहीं है। टूरिज्म के बारे में स्टडी करने मंत्रीजी विदेश गए थे। वहां से लौटे तो पत्रकारों को बताया कि किस तरह विदेशों में अंगूर से शराब बनती है…..छत्तीसगढ़ में भी ऐसा किया जा सकता है। मंत्रीजी को कौन बताएं कि छत्तीसगढ में खाने के लिए तो अंगूर होते नहीं, शराब बनाने के लिए अंगूर कहां से आएंगे। और, दूसरी अहम बात, सरकार शराब बंदी की दिशा में बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ की आबकारी टीम उन राज्यों के भ्रमण पर निकली है, जहां शराब बंद है। ऐसे में, राज्य के संस्कृति मंत्री शराब बनाने का आइडिया देंगे तो जाहिर है, सरकार तो नाराज होगी ही।

प्रायवेट हेलीपैड

इलेक्शन कैंपेन के लिए अजीत जोगी की उड़न चिड़ैया छत्तीसगढ़ पहुंच गई है। उड़न चिड़ैया किराये का है या…….नो कमेंट्स। मगर हेलीपैड जोगी का प्रायवेट होगा। दरअसल, रायपुर के माना एयरपोर्ट पर लैंडिंग और पार्किंग का प्राब्लम आ रहा है। जोगी को हेलिकाप्टर पार्क करने का अच्छा-खासा किराया देना होगा। उपर से एयर ट्रैफिक इतना अधिक है कि उनका हेलिकाप्टर अपने हिसाब से टेकऑफ नहीं कर पाएगा। लिहाजा, जोगी ने तय किया है कि अपनी जमीन पर ही हेलीपैड बनवाया जाए। इसके लिए जगह का चयन किया जा चुका है। जल्द ही जोगीजी के प्रायवेट हेलीपैड पर उनका हेलिकाप्टर लैंड करने लगेगा।

बैजेंद्र का इम्पेनलमेंट

एसीएस टू सीएम एन बैजेंद्र कुमार का पिछले महीने भारत सरकार में सिकरेट्री के इक्विवैलेंट पोस्ट के लिए इम्पेनलमेंट हुआ था। डीओपीटी से इसका आर्डर यहां पहुंच गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा, सरकार उन्हें दिल्ली जाने देती है या यहीं पर रखेगी। क्योंकि, दोनों के अपने निहितार्थ हैं।

2005 बैच का दबदबा

2005 बैच के आईएएस राजेश टोप्पो को सरकार ने जनसंपर्क सचिव का स्वतंत्र प्रभार दिया है। सिकरेट्री पीआर का पोस्ट कितना अहम है, इससे समझ सकते हैं, सुनील कुमार, एमके राउत, बैजेंद्र कुमार, अमन सिंह जैसे अफसर इस पोस्ट पर रह चुके हैं। ये सभी सचिव, प्रमुख सचिव स्तर के अफसर थे। जबकि, राजेश ज्वाइंट सिकरेट्री हैं। देश में कोई दृष्टांत नहीं है कि ज्वाइंट सिकरेट्री लेवल का आईएएस पीआर हेड बना हो। राजेश सिकरेट्री के साथ डायरेक्टर भी रहेंगे। कुल मिलाकर 2005 बैच ने सरकार में अपना दबदबा बना लिया है। रजत कुमार स्टडी के लिए हावर्ड गए तो उनकी जगह पर 05 बैच के मुकेश बंसल को बिठाया गया। सीएम सचिवालय से लेकर उनके पास जो-जो चार्ज थे, सभी मुकेश के हवाले कर दिए गए। जीएडी के सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन आईएएस विंग में इसी बैच की आर संगीता पोस्ट की गई है। और, सुनिये, सीएम ने कोरिया कलेक्टर एस प्रकाश को रायपुर के हेलीपैड पर हटाने का ऐलान किया, वे भी डायरेक्टर एजुकेशन बनने में कामयाब हो गए। रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी हैं ही। और, यह भी तय है, अगले साल मार्च, अप्रैल में ओपी चौधरी शिफ्थ होंगे तो उनकी जगह पर 05 बैच का ही कलेक्टर बनेगा। ये होती है बैच की यूनिटी।

अमित का डेपुटेशन

2004 बैच के आईएएस अमित कटारिया का भारत सरकार में डेपुटेशन का प्रॉसेज अंतिम चरण में है। कभी भी उनका आर्डर आ सकता है। बस्तर कलेक्टर से रिलीव होने के बाद सर्वशिक्षा अभियान में उन्होंने एक दिन के लिए ज्वाईन किया। इसके बाद वे छुट्टी पर दिल्ली चले गए हैं। जाहिर है, वे भी वेट ही कर रहे हैं। ऐसे में, सरकार को सर्वशिक्षा अभियान के लिए नए एमडी की तलाश शुरू कर देनी चाहिए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस आला आईपीएस पर नक्सल हिंसा में शहीद की विधवा को प्रताड़ित करने का आरोप लग रहा है?
2. ऐसा क्यों कहा जा रहा है, सचिवालय की रौनक बढ़ती जा रही है?

रविवार, 11 जून 2017

मंत्री को चक्कर!


11 जून
संजय दीक्षित
अमित शाह की मैराथन मीटिंग के चक्कर में कुशाभाउ ठाकरे परिसर में एक मंत्री को चक्कर आ गया। पीए को फोन कर दवाई बुलाई, तब जाकर उन्हें रिलीफ मिला। उधर, अमित शाह की स्टेमिना देखिए, मैराथन बैठकों के बाद भी चेहरे पर कोई शिकन नहीं थीं। पहले दिन की ही बात करें। रायपुर आने के लिए सुबह 6.20 में दिल्ली एयरपोर्ट पर वे पहुंच गए थे। जाहिर है, वे सुबह चार बजे उठे होंगे। रायपुर आने के बाद सुबह 8.50 बजे से रात 11.30 बजे तक वे मीटिंगों में व्यस्त रहे। तीनों दिन उनका यही रुटीन रहा। सीएम तो 47 डिग्री टेम्परेचर में लोक सुराज करके वार्मअप हो गए थे, लेकिन, बाकी नेताओं की हालत खराब रही।

सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट और….

डायल 112 सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट था। 10 जनवरी को एसपी कांफ्रेंस में उन्होंने इसे एक अप्रैल से लागू करने का कहा था। यही नहीं, इसके लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। लेकिन, पीएचक्यू और गृह विभाग के अफसरों की डेढ़ होशियारी ने इस प्रोजेक्ट का बेड़ा गर्क कर दिया। कहां अप्रैल डेडलाइन था…..जून आधा खतम होने वाला है, अफसर टेंडर क्लियर नहीं कर पाए। पराकाष्ठा तो तब हो गई, कम रेट और अनुभवी कंपनी को छोड़कर हैदराबाद की कंपनी को काम दे दिया। बाद में जब उसके लूज पोल पता चला तो अफसरों की बोलती बंद हो गई। बताते हैं, जिस पार्टी का टेंडर खारिज किया गया, उसका न केवल रेट कम था बल्कि, मध्यप्रदेश में 650 करोड़ रुपए का सेम वर्क कर रही है। वैसे भी, सीएम जब कोई टास्क देते हैं तो अफसरों की काबिलियत इससे परखी जाती है कि किसी भी सूरत में वह रिजल्ट दे। इस केस में दो ही कंपनियों ने टेंडर भरा। एक को खारिज कर दिया गया और दूसरी फर्जी निकल गई। अगर दो-तीन कंपनियों से और टेंडर जमा करा लिया गया होता तो ये स्थिति नहीं आती। टेंडर की प्रक्रिया में अब मानकर चलिय नवंबर, दिसंबर आ जाएगा। जाहिर है, सरकार के पास अब सिर पिटने के अलावा कोई चारा नहीं होगा। डायल 112 सरकार की एक अहम उपलब्धि होती। इस एक नम्बर पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार से लेकर फायर, हेल्थ, एक्सीडेंट की सूचना, सारा काम होता।

अमरेश के बाद उमेश

दुर्ग जिले पर सरकार की नजरे इनायत कुछ ज्यादा ही दिख रही है। पहले सख्त आईपीएस अमरेश मिश्रा को एसपी बनाकर भेजा गया। अब उमेश अग्रवाल को कलेक्टर पोस्ट कर दिया है। उमेश ने महासमुंद के स्टाईल में क्लास लेनी शुरू कर दी है। कलेक्ट्रेट से लेकर पूरे जिले में हड़कंप मच गया है….कलेक्टर किसी की सुनता नहीं। विरोधी पार्टी के नेता महासमुंंद से निर्दलीय विधायक विमल चोपड़ा से फीडबैक ले रहे हैं। विमल क्या फीडबैक देंगे, आप समझ सकते हैं। महासमुंद में चोपड़ा और उमेश के बीच पूरे समय तनातनी बनी रही। अलबत्ता, दुर्ग जिले से पीसीसी चीफ भूपेश बघेल के साथ ही अरुण वोरा विधायक हैं। ताम्रध्वज साहू सांसद हैं। सो, उमेश अग्रवाल के लिए भी चुनौती होगी।

एसपी की लिस्ट

अमित शाह के दौरे से सरकार के फ्री होने के बाद समझा जाता है, एसपी की लिस्ट आज-कल में निकल जाएगी। हालांकि, कलेक्टरों के समान लिस्ट लंबी नहीं होगी। मोटे तौर पर चार-पांच जिले के एसपी प्रभावित होंगे। धमतरी में मनीष शर्मा को ढाई साल से उपर हो गया है। रेलवे एसपी पारुल माथुर, कवर्धा एसपी डी रविशंकर, अंबिकापुर एसपी आरएस नायक, कोरिया से सुजीत कुमार को बदले जाने की चर्चा है। कवर्धा एसपी को सरकार कोई और चार्ज देना चाहती है। एसपी लेवल पर बड़ा फेरबदल अब जनवरी में होगा, जब 12 आईपीएस डीआईजी बनेंगे।

फॉरेन ट्रिप पक्का

डीपीआर बोले तो डायरेक्टर पब्लिक रिलेशंस….सरकार की छबि चमकाने वाला अफसर। साउथ कोरिया और जापान के दौरे में सरकार अबकी डीपीआर को भी साथ ले गई थी। इससे पहिले 13 साल में सरकार के साथ कभी डीपीआर को जाने का मौका नहीं मिला। लेकिन, अबकी विदेश दौरे का मीडिया में कवरेज इतना मिला कि सरकार अब जब भी विदेश जाएगी, डीपीआर कोई भी हो, उसकी एक सीट पक्की रहेगी।

पतंजलि और योग आयोग

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पहिले योग आयोग के चेयरमैन की नियुक्ति हो जाएगी। योग आयोग सूबे का पहला आयोग होगा, जिसमें गैर राजनीतिक व्यक्ति की पोस्टिंग की जाएगी। पता चला है, इस पोस्ट पर सरकार पतंजलि से जुड़े किसी शख्स को अपाइंट कर सकती है।
सुपरपावर….वाह-वाह!
भारतीय वन सेवा के एक सीनियर अधिकारी के जलवे से आईएफएस लॉबी वाह-वाह! कर रही है। गर्व करें क्यों नहीं, ऐसी ताकत की नुमाइश….किसी ने सोचा भी नहीं होगा। प्रमोशन होने के बाद अफसर ने चार महीने तक पोस्टिंग की फाइल दबवा दी, आर्डर नहीं होने दिया। और, सरकार ने डरते-सहमते आदेश निकाला भी तो अफसर को उस पोस्ट को एडिशनल तौर पर थमा दिया गया, जिस पद का वे पिछले आठ साल से सुख भोग रहे हैं। उनके आदेश में लिखा गया, अगली नियुक्ति तक फलाश्री इस पोस्ट पर बने रहेंगे। वन विभाग के इस सुपरपावर की चर्चा इन दिनों मंत्रालय के गलियारों में खूब हो रही है। जाहिर है, जलवे में तो आईएफएस ने आईएएस, आईपीएस को पीछे छोड़ दिया है।

नहले पर दहला

अमित जोगी रायपुर प्रेस क्लब के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे थे। बोलने की बारी आई तो विधानसभा की उनकी कसक बाहर आ गई। बोले, स्पीकर साब मुझे वहां पांच मिनट से अधिक टाईम नहीं देते। लेकिन, आज मैं ज्यादा बोलूंगा। इसके बाद स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल डायस पर आए तो उन्होंने अमित को जवाब दिया….अब आपकी बोलने का समय खतम होने वाला है। उनका इशारा चुनाव की ओर था। बता दें, पूरे बजट सत्र में अमित स्पीकर के निशाने पर रहे।

अंत में दो सवाल आपसे

1. बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह के साथ प्लेन से नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल दिल्ली क्यों गए?
2. जगदलपुर कलेक्टर से रिलीव होने के हफ्ते भर बाद भी अमित कटारिया ने यहां ज्वाईनिंग क्यों नहीं दी है?

रविवार, 28 मई 2017

बंद कमरा और वो डेढ़ घंटे


 28 मई
संजय दीक्षित
आईबी चीफ राजीव जैन पिछले हफ्ते रायपुर आए थे। उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके अलावा वे जिस तीसरे शख्स से वन-टू-वन मिले, वे थे पीएस टू सीएम अमन सिंह। अमन से मिलने वे खुद चलकर चिप्स आफिस गए। बंद कमरे में यह मुलाकात करीब डेढ़ घंटे चली। इस चक्कर में मिनट-टू-मिनट प्रोग्राम ही नहीं गड़बड़ाया बल्कि, उनका लंच भी डेढ़ घंटा लेट हो गया। लंच के लिए उन्हें सीआरपीएफ मेस में दोपहर एक बजे पहुंचना था। लेकिन, चिप्स में ही उन्हें ढाई बज गए। जाहिर है, इसको लेकर सत्ता के गलियारों में बेचैनी तो होनी ही थी। आईबी चीफ फोर स्टार वाले अफसर होते हैं। याने आर्मी चीफ के बराबर रुतबा। पावर भी कम नहीं। दिन में कम-से-कम एक बार पीएम को जरूर ब्रीफ करते हैं। ऐसे में, प्रोटोकॉल को दरकिनार करके उनका अमन से मिलना….मंत्रियों से लेकर राजनीतिज्ञों और ब्यूरोक्रेट्स को स्तब्ध कर दिया है….सबको यह सवाल परेशां कर रहा है कि बंद कमरे में आईबी चीफ ने आखिर अमन सिंह से राज्य के बारे में क्या फीडबैक लिया?

मंत्रिमंडल में चेंजेज

बीजेपी प्रमुख अमित शाह का छत्तीसगढ़ में तीन दिन का दौरा कई मंत्रियों की रात की नींद उड़ा दिया है। मंत्रिमंडल में कोई बदलाव होगा या नहीं यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है। लेकिन, शाह के आने का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, राजधानी में चर्चा जोर पकड़ती जा रही है कि एक-दो मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं तो एकाध मंत्री की छुट्टी हो सकती है।

असवाल और संतोष की बिदाई

एडिशनल चीफ सिकरेट्री एनके असवाल 31 मई को रिटायर हो जाएंगे। वे 83 बैच के आईएएस थे। छत्तीसगढ़ बनने के बाद वे यहां कई अहम विभागों में रहे। बिलासपुर के कमिश्नर समेत साढ़े आठ साल होम एवं ट्रांसपोर्ट भी संभाले। पीएचई एवं ट्राईबल भी उनके पास रहा। उनके रिटायरमेंट को देखते हाल ही में सरकार ने ट्राईबल लेकर उन्हें हल्का कर दिया था। उनके पास अभी प्रशासन अकादमी और 20 सूत्रीय कार्यक्रम जैसे विभाग हैं। किसी एसीएस लेवल के अफसर को डीजी प्रशासन अकादमी का चार्ज देना होगा। असवाल के अलावा सिकरेट्री पीआर एन कल्चर, टूरिज्म संतोष मिश्रा का भी 31 को डेपुटेशन पूरा हो जाएगा। वे भी यहां से तमिलनाडु के लिए रिलीव हो जाएंगे।

एक नीलम जरूरी 

यूं तो कहा जाता है, नाम में क्या रखा है। लेकिन, नाम को लेकर भी कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती है। मसलन, नीलम एक्का। राज्य बनने के समय जब वे छत्तीसगढ़ आए थे तो कई मीटिंगों में अफसर पूछते थे, नीलम नहीं आई क्या? बड़े अफसरों में उत्सुकता थी….कौन है नीलम, दिखती कैसी है। तब बताया जाता था, नीलम लेडी नहीं जेंस हैं। उन्हीं नीलम को मुंगेली का कलेक्टर बनाया गया है। सरकार ने बढ़ियां किया है…मुंगेली में कलेक्टर, एसपी, सीईओ, एसडीएम, डीएफओ सब महिलाएं थीं। सरकार भी गौरवान्वित होती थीं…..छत्तीसगढ़ में एक ऐसा जिला है, जहां सभी बड़े पदों पर महिलाएं पोस्टेड हैं….तो पुन्नूराम मोहले की पूछिए मत! अब कलेक्टर, सीईओ को सरकार ने हटा दिया। ऐसे में, महिला जिला का भ्रम बने रहने के लिए एक नीलम जरूरी थे।

किस्मत अपनी-अपनी

रीता शांडिल्य को सरगुजा का कमिश्नर बनाया गया है। राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस बनी रीता सिर्फ एक जिले की कलेक्टर रहीं हैं बेमेतरा की। सरगुजा में उनके अंदर में काम करेंगे कलेक्टर अंबिकापुर किरण कौशल और केसी देव सेनापति। किरण और सेनापति का यह दूसरा जिला है। सेनापति तो दंतेवाड़ा में तीन साल कलेक्टर रहे। अब सेनापति और किरण को रीता को रिपोर्ट करना होगा। हालांकि, सेनापति के लिए डबल झटका होगा, वे 2007 बैच के होने के बाद भी सूरजपुर कलेक्टर हैं और उनसे दो बैच जूनियर किरण कौशल अंबिकापुर जैसे बड़े जिले की। चलिये! किस्मत अपनी-अपनी….वरना, 2004 बैच के हाई प्रोफाइल आईएएस अमित कटारिया को एमडी राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान बनाया गया है और उनके उपर डायरेक्टर एजुकेशन एस प्रकाश हैं। प्रकाश 2005 बैच के आईएएस हैं। अमित का कहीं डेपुटेशन का आर्डर हो जाए तो ठीक, नहीं तो सरकार अब उनकी पोस्टिंग नहीं चेंज करने वाली।

सेकेंड डिस्ट्रिक्ट

श्रूति सिंह, सी प्रसन्ना और सेनापति के बाद इस लिस्ट में हिमशिखर गुप्ता और कैसर हक का सेकेंड डिस्ट्रिक्ट के लिए नंबर लगा। हिमशिखर का पहला जिला उनका जशपुर था। तो कैसर का बीजापुर। हिमशिखर महासमुंद जिले से हालांकि खुश नहीं होंगे…..काफी छोटा है। लेकिन, राहत होगी, रायपुर के नजदीक है। कैसर की जरूर निकल पड़ी। उन्हें कोरबा जैसा जिला मिल गया। हालांकि, एक, दो जिले करके रायपुर में बैठे कुछ आईएएस इस लिस्ट में भी कलेक्टर बनने से चूक गए। इनमें से दो आईएएस सिर्फ इसलिए जिले में नहीं जा रहे क्योंकि, सरकार उन्हें छोड़ना नहीं चाह रही। चलिये, अगली बार सरकार कहीं बन गई तो सिकरेट्री बनते तक ये कलेक्टरी करेंगे।

कलेक्टरी का चांस खतम

सरकार ने लोक सुराज में दो कलेक्टरों की छुट्टी की। फिर 16 को एक झटके में बदल दिया। याने महीना भर के भीतर 18। इसके बाद कलेक्टरी के लिए अब ठीक-ठाक में रायपुर और जांजगीर के अलावा कोई जिला बचा नहीं। अगले साल मार्च के आसपास ओपी चौधरी चेंज होंगे तो तय माना जा रहा है कि उनका एक बैचमेट ही रायपुर का कलेक्टर बनेगा। बचा सिर्फ जांजगीर। जांजगीर में भारतीदासन कलेक्टर हैं। अगले मार्च तक उनका भी लगभग दो साल हो जाएगा। लिहाजा, कलेक्टरी के लिए अब जांजगीर के लिए टफ कंपीटिशिन होगा। जिन्हें कलेक्टर बनने का मौका नहीं मिला है, जाहिर है, सरकार की इस तीसरी पारी में अब चांस मिलने से रहा। वे अब अगले चुनाव में कांग्रेस की कितनी सीटें आएंगी, इसके हिसाब-किताब में जुट गए हैं।

आईपीएस की छोटी लिस्ट

साउथ कोरिया से लौटने के बाद एसपी की एक छोटी लिस्ट निकलेगी। इसमें अधिक-से-अधिक दो-तीन नाम होंगे। फिर भी चेन बनेगा तो इनमें कुछ और नाम जुड़ जाएंगे। रेलवे एसपी पारुल माथुर भी चेंज हो सकती है। सरकार उन्हें पोस्ट करके लगता है, भूल गई है। बहरहाल, एसपी की मेजर लिस्ट निकलेगी अगले साल जनवरी में, जब दर्जन भर आईपीएस डीआईजी बनेंगे। इनमें रायगढ़, जांजगीर, महासमुंद जैसे जिलों के एसपी प्रमोट होंगे।

गुड न्यूज!

कुछ अफसर जिस विभाग में रहते हैं, वहां कुछ नया कर जाते हैं। आरपी मंडल को जब श्रम विभाग भेजा गया था तो शुरू में उन्हें भले ही अटपटा लगा होगा, मगर श्रमिकों के लिए जो उन्होंने योजना बनाई है, उसकी तारीफ करनी होगी। उनका विभाग साठ हजार श्रमिकों के लिए पौष्टिक और गरमागरम भोजन का बंदोबस्त करने जा रहा है। एक्सपेरिमेंट के तौर पर चार हजार श्रमिकों को खाना खिलाना शुरू भी हो गया है। कंसेप्ट यह है, अलसुबह से देर शाम तक खटने वाले श्रमिकों के पास न तो समय होते हैं और न पैसे। चावल-चटनी या चावल-कढ़ी लेकर वे काम पर निकल जाते हैं। ऐसे श्रमिकों को गरमागरम भोजन मिल जाए तो फिर क्या कहने। इस साल के अंत तक 60 हजार श्रमिकों को एक टाईम भोजन मुहैया कराने का टारगेट है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. छत्तीसगढ़ के किस हैवीवेट मंत्री की रात की नींद इन दिनों उड़ी हुई है और क्यों?
2. कलेक्टरों के ट्रांसफर के संदर्भ में सरकार को ऐसी क्या शिकायत मिली कि 23 मई की बजाए 21 मई को ही लिस्ट निकाल दी?

शनिवार, 20 मई 2017

चुनावी टीम

चुनावी टीम

21 मई
संजय दीक्षित
23 मई को कलेक्टरों की वीडियोकांफ्रेंसिंग है। उनके परफारमेंस का अंतिम आंकलन करने के बाद हो सकता है, 23 की देर शाम तक या फिर अगले दिन कलेक्टरों की लिस्ट निकल जाए। क्योंकि, कलेक्टरों के काम तो खुद सीएम उनके जिले में देखकर आ चुके हैं। उन्हें सब पता है कि कौन कितना पानी में हैं। फिर, पिछले कलेक्टर कांफ्रेंस में सीएम ने जो टास्क दिए थे, उसके आउटपुट का ब्यौरा सरकार पहले से ही मंगा चुकी है। बहरहाल, लंबी प्रतीक्षा के बाद ट्रांसफर हो रहे हैं, तो जाहिर है लिस्ट भी लंबी ही होगी। हो सकता है, फिगर दर्जन तक पहुंच जाएं। सलेक्शन भी चुनावी होंगे। याने यही कलेक्टर अगले साल विधानसभा का चुनाव कराएंगे। इसलिए, सरकार ठोक-बजाकर ही अपाइंटमेंट करेगी। हालांकि, एक फायनल लिस्ट अगले साल फरवरी, मार्च तक और निकलेगी। इनमें जो डिरेल्ड होंगे या हिट विकेट, उन्हें फायनल टीम से हटा लिया जाएगा।

भूल-चूक, लेनी-देनी!

यह पहला मौका होगा, जब कलेक्टरों को ट्रांसफर का टेंटेटिव टाईम पता है। 23 की शाम से लेकर दो-एक दिन के भीतर। अधिकांश को ये भी पता है, उनका क्या होने जा रहा? लिहाजा, कई कलेक्टर्स अपना बोरिया-बिस्तर समेटने लगे हैं। कुछ तो ठेकेदारो, सप्लायरों से भूल-चूक, लेनी-देनी में व्यस्त हो गए हैं। वैसे भी, लोक सुराज भी अब खतम हो गया है। ट्रांसफर में जो जिले प्रभावित होने वाले हैं, वहां तीन-चार दिन काम ठप्प ही रहेंगे।

तीन क्वांरे विधायक

छत्तीसगढ़ में चार क्वांरे विधायक थे। सभी बीजेपी से। लेकिन, संख्या अब एक कम हो जाएगी। आरंग विधायक नवीन मार्केण्डेय सरला जोशी के साथ दांपत्य सूत्र में बंध गए हैं। बच गए देवजी भाई पटेल, अवधेश चंदेल और अशोक साहू। सरकार की कई कन्यादान योजनाएं चल रही हैं…..सरकार को उन्हें मोटिवेट करना चाहिए कि वे भी घर बसा लें। वरना, अगले साल चुनाव के चक्कर में 2018 भी निकल जाएगा।

आईएफएस के लिए गुड

भारतीय वन सेवा के अफसरों के लिए के लिए मई गुड रहा। अल्पज्ञात आईएफएस एसएल साव को सरकार ने झाड़-पोंछकर पीएससी में बिठा दिया। पीसीसीएफ के सुब्रमण्यिम छत्तीसगढ़ साइंस एन टेक्नालॉजी कौंसिल के डीजी बन गए। वहां रिटायरमेंट का एज 70 साल है। याने सरकार कहीं रिपीट हो गई तो फिर 2023 तक कोई हिला नहीं पाएगा। एडिशनल पीसीसीएफ केसी यादव स्टेट रुरल इंस्टिट्यूट से बैक हुए तो उन्हें फॉरेस्ट प्रोटेक्शन का चार्ज मिल गया। दो और आईएफएस पोस्टिंग की लाइन में हैं। चलिये, बढ़ियां है।

पीएस होम की तलाश

पीएस होम बीबीआर सुब्रमण्यिम तीन महीने की छुट्टी पर अमेरिका गए हैं। उनके लौटने से पहिले हो सकता है, उनका होम खिसक जाए। सरकार ने सुब्रमण्यिम के विकल्प की तलाश शुरू कर दी है। सबसे पहला नाम एसीएस सुनील कुजूर का लिया जा रहा है। लेकिन, अभी ये सिर्फ चर्चा है। ऐन वक्त पर कोई नया चेहरा भी आ जाए, तो अचरज नहीं।

इंवेस्टर्स मीट में नक्सल

हेडिंग से आप चौंकिएगा मत! इंवेस्टर्स मीट में इतनी सुरक्षा होती है कि वहां नक्सली नहीं पहुंच सकते। हम बात कर रहे हैं, इंवेस्टर्स में नक्सलियों को लेकर बेचैनी की। पिछले हफ्ते अहमदाबाद में इंवेस्टर्स मीट हुआ। इंडस्ट्री मिनिस्टर अमर अग्रवाल, चेयरमैन छगन मूंदड़ा समेत उनका पूरा अमला पहुंचा था। अमर अग्रवाल को आधा वक्त तो यह समझाने में लग गया कि नक्सली रायपुर के आसपास नहीं, 400 किलोमीटर दूर हैं। तब जाकर इंवेस्टर्स छत्तीसगढ़ आने के लिए उत्साहित हुए।

निधि के बाद अमित

निधि छिब्बर के बाद अमित कटारिया भी जल्द दिल्ली के लिए कूच कर सकते हैं। सरकार ने उनके डेपुटेशन के लिए हरी झंडी देने में देर नहीं लगाई। उनका एनओसी डीओपीटी को भेज दिया गया है। संकेत हैं, निधि की तरह अमित को भी डिफेंस में पोस्टिंग मिल सकती है। सो, बस्तर से हटाने के बाद अमित को हल्की-फुल्की पोस्टिंग ही मिलेगी। जिससे उन्हें रिलीव करने में सोचना न पड़े।

निहारिका बैक होंगी

बिलासपुर कमिश्नर निहारिका बारिक सिंह रायपुर बैक हो सकती है। मंत्रालय में सिकरेट्री की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इस महीने ही तीन कम हो जाएंगे। निधि छिब्बर दिल्ली चली गई हैं। एसीएस एनके असवाल 31 मई को रिटायर हो जाएंगे। सिकरेट्री पीआर संतोष मिश्रा का भी इसी महीने डेपुटेशन पूरा हो जाएगा। निर्वाचन में भी किसी की पोस्टिंग करनी होगी। लिहाजा, निहारिका को रायपुर बुलाने पर विचार चल रहा है। वैसे भी, कमिश्नर की पनिशमेंट पोस्टिंग हो गई है। चार में से सिर्फ निहारिका ही डायरेक्ट आईएएस हैं। बाकी, तीन के तो भगवान ही मालिक हैं। 97 बैच की आईएएस निहारिका को भी बिलासपुर नहीं भेजा जाता। आखिर, एम गीता और रीचा शर्मा भी तो लंबे समय बाद डेपुटेशन से लौटीं थीं। लेकिन, निहारिका ब्यूरोक्रेसी की पालीटिक्स का शिकार हो गई।

2010 बैच की पोस्टिंग

कलेक्टरों की पोस्टिंग में 2010 बैच का भी इस बार नंबर लगेगा। इस बैच में यहां चार आईएएस हैं। जेपी मौर्य, कार्तिकेय गोयल, सारांश मित्तर और रानू साहू। इनमें से मौर्य और गोयल को कलेक्टर बनने की संभावना सबसे अधिक है। रानू साहू जेपी मौर्य की पत्नी है। लिहाजा, दोनों को एक साथ सरकार शायद ही कलेक्टर बनाएं। पति-पत्नी कलेक्टर वाला छत्तीसगढ़ में अभी दो ही पेयर है। एक बार विकास शील बिलासपुर और निधि छिब्बर जांजगीर कलेक्टर थी। और, दूसरा वर्तमान में अंबलगन पी बिलासपुर और अलरमेल मंगई डी रायगढ़ में कलेक्टर हैं।

सीईओ में इक्के-दुक्के

जिला पंचायत सीईओ में इक्के-दुक्के ही ट्रांसफर होंगे। बिलासपुर जिला पंचायत के सीईओ जेपी मौर्य को चूकि कलेक्टरी ड्यू है और अपने बैच में सबसे सीनियर भी हैं। इसलिए, उनका जिले में जाना लगभग तय समझा जा रहा है। एकाध के परफारमेंस से सरकार अगर नाराज होगी, तो उन्हें बदला जाएगा। बाकी, पीएम अवास से लेकर कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे में, ट्रांसफर होने पर काम प्रभावित होंगे। लिहाजा, सरकार ने तय किया है कि सीईओ को डिस्टर्ब नहीं किया जाएगा।

होटल पर गाज

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामकृपाल यादव को भूखे रहने का खामियाजा होटल को भुगतना पड़ रहा है। होटल का भुगतान रोक दिया है। दरअसल, केंद्रीय मंत्री बीजेपी की बैठक लेने आए थे। बैठक समाप्त होने के बाद वे फ्रेश होने गए, तब तक भाजपाइयों ने रायपुर के नामी होटल के लजीज नाश्ते को सफाचट कर दिया। मंत्रीजी पहुंचे तो प्लेटे बिखरी पड़ी थी। इस पर रायपुर के एक मंत्री ने पहले तो होटल के स्टाफ को अपने अंदाज में जमकर हड़काया। होटल वाले को अब पेमेंट के लिए चक्कर काटना पड़ रहा है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. जनसंपर्क का अगला सिकरेट्री क्या कोई ज्वाइंट सिकरेट्री लेवल का आईएएस होगा?
2. सत्ताधारी पार्टी में महिला नेत्रियों की संख्या क्यों बढ़ती जा रही है?

शनिवार, 13 मई 2017

भावी सीएस का ट्रेलर


14 मई
संजय दीक्षित
एसीएस टू सीएम बैजेंद्र कुमार का चीफ सिकरेट्री बनने की चर्चा बड़ी तेज है। उनकी ताजपोशी कब होगी, इसी जून में होगी या फिर अगले साल, ये तो डाक्टर साब बताएंगे। मगर बैजेंद्र ने आज दस का दम दिखाया। आपको बता दें, सूबे की सीमेंट कंपनियां इतनी ताकतवर हो गई थी कि मंत्रालय में होने वाली हाई प्रोफाइल मीटिंगों में आना उन्हें गवारा नहीं था, वो शनिवार को बैजेंद्र कुमार के दरवाजे पर घूटनों के बल खड़ी थीं….मिन्नतें कर रही थीं, आप जैसा कहेंगे, वैसे हम करेंगे। दरअसल, रेट को लेकर मनमानी पर उतर आई सीमेंट कंपनियों ने कारटेल बनाकर रेट 270 कर दिया है। चिल्हर में तो 280 तक बिक रहा है। यहीं नहीं, कंपनियां इस कोशिश में थी कि रेट 300 से उपर ले जाया जाए। लेकिन, जब मीडिया का प्रेशर बढ़ा तो सरकार ने बैजेंद्र को फ्री हैंड दे दिया। और, उन्होंने सीमेंट प्लांटों की ऐसी नस दबाई कि शनिवार छुट्टी का दिन होने के बाद भी त्राहि माम करते हुए कंपनियों के अफसर उनके बंगले पर पहुंच गए। दरअसल, अल्ट्राटेक और एसीसी को सरकार ने आज बंद कर दिया था और एक नई कंपनी की भी माइनिंग लीज खतम करने का आदेश जारी होने वाला था। कंपनी ने माईनिंग में बड़ा गड़बड़झाला किया है। चलिये, सीमेंट कंपनियों की गलतफहमी दूर हो गई….आखिर, सरकार, सरकार होती है। सरकार जब कुछ करने पर आ जाएं तो किसी की कोई मजाल नहीं।

रांग नम्बर डायल

लोक सुराज में बिलासपुर के एक ब्लॉक कांग्र्रेस अध्यक्ष रांग नम्बर डायल कर पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दरअसल, एसीएस पंचायत एमके राउत बेलगहना के पास चौपाल लगाए थे। ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष नया लड़का है, वह राउत के ओहरा से वाकिफ नहीं था। सो, उसने नेतागिरी चालू कर दी। राउत ने पहले उसे प्रेम से चौपाल में बिठाया। मगर, वह सुनने के लिए तैयार नहीं था। जब उसकी नेतागिरी की पराकाष्ठा हो गई तो राउत भृकुटी चढ़ाते हुए पुलिस अधिकारियों पर भड़के….लोक सुराज को डिस्टर्ब किया जा रहा है….तुमलोग क्या कर रहे हो…? इस पर वहां मौजूद तमाम अफसर सकपका गए। पुलिस वाले ने तुरंत कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई का कांग्रेस की ओर से इसलिए विरोध नहीं हुआ कि रायपुर, बिलासपुर के बीजेपी और कांग्रेस के जितने नेता है, सभी राउत के सामने बड़े हुए हैं। राउत उस समय दोनों जिलों के कलेक्टर रहे, जब बिलासपुर में कोरबा, जांजगीर, मुंगेली और रायपुर में धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद शामिल था।

मजबूरी का नाम डीडी सिंह

सिकरेट्री जीएडी निधि छिब्बर सेंट्रल डेपुटेशन के लिए रिलीव हो गईं। उनके पास निर्वाचन के साथ जीएडी में आईएएस सेक्शन का चार्ज था। आईएएस काफी संजीदा विभाग माना जाता है। आईएएस के खिलाफ जांच से लेकर नोटिस-वोटिस सब इसी में आता है। इसलिए, हमेशा इसमें रेगुलर रिक्रट्ड याने आरआर आईएएस को ही पोस्ट किया जाता था। वैसे भी, इस पोस्ट पर ज्यादातर महिला आईएएस रही हैं। इशिता राय से लेकर शहला निगार, रेणु पिल्ले, रितू सेन, निधि छिब्बर तक लंबी फेहरिश्त है। निधि के डेपुटेशन पर जाने के बाद राज्य में पहली बार आईएएस सेक्शन का जिम्मा राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोट होकर आईएएस बने डीडी िंसंह को दिया गया है। बताते हैं, जीएडी के आईएएस सेक्शन देखने के लिए अबकी कोई आईएएस तैयार नहीं हुआ। जीएडी वैसे भी माल-मसाला वाला विभाग है नहीं। उपर से आईएएस सेक्शन का मतलब चीफ सिकरेट्री के सीधे नियंत्रण में। लिहाजा, मजबूरी का नाम डीडी सिंह….सरकार ने इस विभाग को डीडी सिंह के हवाले कर दिया।

उल्टी गिनती

कलेक्टरों के ट्रांसफर की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। 20 को लोक सुराज खतम होगा। 23 को कलेक्टरों का परफारमेंस परखने के लिए सीएम कलेक्टर कांफ्रेंस करने जा रहे हैं। इसी रोज कैबिनेट भी है। जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, 23 की शाम को ही कलेक्टरों के आर्डर जारी हो जाएंगे। कलेक्टर कांफ्रेंस के तुरंत बाद कलेक्टरों का उनका रिपोर्ट कार्ड बताया जाएगा। अत्यधिक संभावना इस बात की भी है कि कांफ्रेंस के बाद कलेक्टर अपने जिले में पहुंचेंगे, उससे पहिले उनका आर्डर पहुंच जाएगा। सो, कलेक्टरों में बेचैनी लाजिमी है।

ईमानदारी को ईनाम

आईएफएस के सुब्रमण्यिम किन्हीं कारणों से भले ही सीएम सचिवालय से बाहर हो गए हों मगर सीएम ने अपने साथ काम करने और उनकी ईमानदारी को पुरस्कृत किया। छत्तीसगढ़ साइंस एन टेक्नालॉजी कौंसिल के डीजी का पद हाल ही में खाली हुआ है। बताते हैं, सीएम ने इसके लिए सुब्रमण्यिम को बुलाकर उन्हें इस पद पर पोस्ट करने की सूचना दी। राज्य में ऐसी पोस्टिंग शायद ही हुई होगी, जिसे सीएम ने खुद ऑफर किया हो। सुब्रमण्यिम वन विभाग में दो-एक गिने चुने अफसरों में शामिल हैं, जिनकी आनेस्टी की चर्चा होती है।

अब हिंदी भाषी प्रभारी

दिग्विजय सिंह के बाद कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी बीके हरिप्रसाद की किसी भी दिन छुट्टी हो सकती है। दिल्ली गए कांग्रेस नेताओं को राहुल गांधी ने इसके संकेत दिए हैं। बताते हैं, पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने पार्टी आलाकमान से अबकी किसी हिन्दी बेल्ट के नेता को प्रभारी बनाने का आग्रह किया है। सो, यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश या राजस्थान जैसे किसी प्रदेश के तेज-तर्रार कांग्रेस नेता को यह जिम्मा मिल जाए, तो आश्चर्य नहीं। असल में, पार्टी नेता चाहते हैं कि अगले साल चुनाव को देखते किसी गरजने वाले नेता को छत्तीसगढ़ की कमान दी जाए।

अब पछता रहे कांग्रेसी

राहुल गांधी से मिलने दिल्ली गए कांग्रेस नेताओं को ये पता नहीं था कि राहुल गांधी से वन-टू-वन मिलने का इस तरह मौका मिल जाएगा। राहुल ने पहले पार्टी दफ्तर में मिलने का टाईम दिया था। लेट हुआ तो घर बुला लिया। भूपेश और टीएस के साथ कांग्रेस के लोग बंगले पहुंचे तब तक सबको यही भान था कि जैसे पहले राहुल दो मिनट में हाउ डू यू करते आगे बढ़ जाते थे, वैसा ही कुछ इस बार भी होगा। लेकिन, विजिटर्स रुम में जैसे ही राहुल आए, बोले, वन-टू-वन मिल लेते हैं…इस पर पहले तो सभी सकपका गए। फिर, मोतीलाल वोरा बोले, पहले मैं मिलता हूं। तब लोगों ने चुटकी भी ली….काका! आप तो रोज ही मिलते हो। बहरहाल, जो नेता दिल्ली नहीं गए वे अब पछता रहे हैं….उन्हें भी मन का गुबार निकालने का मौका मिल जाता।

अंत में दो सवाल आपसे

1. भूपेश बघेल के खिलाफ ईओडब्लू में एफआईआर से सत्ताधारी पार्टी को फायदा होगा या नुकसान?
2. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की बैठक में मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह किस केंद्रीय मंत्री पर भड़क गए?

शुक्रवार, 12 मई 2017

डाक्टर ने गरमी खराब कर दी!


7 मई
संजय दीक्षित
सरकार को पहले शराब ना पीने वालों का गुस्सा झेलना पड़ा। अब, पीने वाले लोग नाराज हैं…..डॉक्टर ने गरमी खराब कर दी। चिल्ड बीयर का आनंद लेने के लिए लोग गरमी का इंतजार करते थे। लेकिन, पूरा वॉट लगा दिया। सरकारी दुकानों में एक तो पसंदीदा ब्रांड की बीयर मिल नहीं रही, और जो मिल रही, वह भी गरम। पीना है, तो घर के फ्रीज में ले जाकर ठंडा करो और बोनस में पत्नी की दो-चार ताने भी सुनो। वैसे, वहीस्की पीने वाले लोग भी कम परेशां नहीं हैं। उनका मनपसंद ब्रांड सरकारी दुकानों में एवेलेवल नहीं है। मंत्रियों, नेताओं और अफसरों के लिए सप्लायर, ठेकेदार गोंदिया से कैरेट मंगवा दे रहे हैं। मगर सबको ऐसी गॉड गिफ्टेड फैसिलिटी कहां? बेचारों को अनाप-शनाप दाम पर बाहर से मंगवाना पड़ रहा है। जाहिर है, लोग सरकार को कोसेंगे ही।

बैड मई

रमन सरकार के शराब बेचने के फैसले से सिर्फ पीने वाले ही दुखी नहीं हैं, जिनके संरक्षण में शराब ठेकेदारों का काम फल-फूल रहा था, उनके घरों में भी अवसाद पसरा है। आबकारी विभाग से लेकर आईजी, एसपी, एसडीएम, तहसीलदार, थानेदार और सिपाही। सबका बंधा था। एक से पांच तारीख तक सबके लिफाफे घर, आफिस या थानों में पहुंच जाते थे। इस बार पांच तारीख निकल गई। अब, घरवालियां पूछ रही….क्या हुआ। दरअसल, रेट सबका तय था। शराब दुकान वाले थाने के प्रत्येक सिपाही को कम-से-कम पांच हजार। थानेदार को 50 हजार। और अगर सिपाही, थानेदार सरकार से ज्यादा शराब ठेकेदार की ड्यूटी बजाते दिए, तो यह एमाउंट बढ़ भी जाता था। बड़े जिलों के एसपी को 2 से पांच लाख। कलेक्टर्स को महीना नहीं एकमुश्त मिल जाता था। ठेके के समय चाहे ऑनलाइन हो या मैन्यूल कलेक्टरों को बंधा था। ए केटेगरी के जिलों के कलेक्टरों को 75 लाख से एक करोड़ और छोटे जिलों के कलेक्टर्स को 25 से 50 लाख। ये राशि ठेका होते ही मिल जाती थी। वह भी बिना मांगे। अब, सभी कलेक्टर्स एवं एसपी शराब ठेकेदारो की सेवा को ग्रहण करते होंगे, ये मैं नही कह रहा। बट, रेट यही था। दिक्कत राजनेताओं को भी कम नहीं हो रही। पहले कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने के लिए 100 रुपए के साथ एक पौवा दे दो तो लोग दौड़े चले आते थे। आखिर, एक फोन पर ठेकेदार कार्टून-के-कार्टून पहुंचवा देता था। अब ये अतीत की बात हो गई। दुखी मीडिया वाले भी कम नहीं हैं। खासकर, मीडिया का लेवल लगाए पत्रकारों को पर्ची मिल जाती थी….फलां दुकान में चले जाइये। सरकार ने सबकी मई बैड कर दी।

दावा प्रबल

एसीएस टू सीएम एन बैजेंद्र कुमार भारत सरकार में सिकरेट्री के समकक्ष पोस्ट के लिए इम्पैनल हो गए हैं। याने प्रदेश के चीफ सिकरेट्री के बराबर। ऐसे में, बैजेंंद्र का सीएस का दावा जाहिर है, अब और मजबूत हो जाएगा। बैजेंद्र 85 बैच के आईएएस हैं। सीएस के लिए उनका तगड़ा कांपीटिशन अजय सिंह से हैं। अजय सिंह 83 बैच के आईएएस हैं। बैजेंद्र से दो बैच सीनियर। मगर सीएस के सलेक्शन में सीएम का वीटो चलता है। आखिर, शिवराज सिंह के बीके कपूर, बीकेएस रे और पी राघवन को पार करते हुए सीएस बनने का दृष्टांत है ही। बैजेंद्र को तो अब भारत सरकार ने भी चीफ सिकरेट्री के समकक्ष मान लिया है।

10 में से चार पीएस

छत्तीसगढ़ में सिकरेट्री, प्रिंसिपल सिकरेट्री लेवल पर अफसरों का टोटा हो गया है। खासकर, पीएस लेवल पर तो स्थिति और खराब हो गई है। स्टेट कैडर में कहने के लिए वैसे 10 पीएस हैं। इसमें से तीन डिरेल्ड हो गए हैं। अजयपाल सिंह, डॉ0 आलोक शुक्ला और बीएल अग्रवाल। बीएल कल तिहाड़ जेल से छूटे हैं। अजयपाल और आलोक को सरकार ने कोई काम नहीं दिया है। बचे सात। इनमें सीके खेतान दिल्ली डेपुटेशन पर हैं। केडीपी राव राजस्व बोर्ड में हैं। बीबीआर सुब्रमण्यिम तीन महीने की छुटटी पर कल ही निकले हैं। इस तरह 10 में से चार बचे। आरपी मंडल, रेणु पिल्ले, अमिताभ जैन और सुब्रत साहू। इनके उपर ही सरकार के मीडिल क्रम का पूरा दारोमदार रहेगा।

घर बिठा कर तनखा क्यों?

डॉ0 आलोक शुक्ला, अजयपाल सिंह और अनिल टुटेजा को सरकार घर बिठाकर पैसा दे रही है। तीनों के पास कोई काम नहीं है। आलोक और अनिल को नॉन घोटाले की वजह से सरकार ने कोई विभाग नहीं दिया है। अजयपाल को जनशिकायत जैसा एक ऐसा विभाग है, जिसके होने न होने का कोई मतलब नहीं। अलबत्ता, बड़े सम्मान के साथ हर महीने करीब दो लाख रुपए उनके खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। आलोक और अनिल को नॉन घोटाले की वजह से सरकार ने कोई काम नहीं दिया है। भारत सरकार ने दोनों के खिलाफ चालान पेश करने की मंजूरी दे दी है। लेकिन, सरकार ने कोई कार्रवाई कर रही और ना ही उन्हें कोई काम दिया जा रहा। आलोक को हर महीने दो लाख और अनिल को लगभग इसका आधा उनके एकाउंट में ट्रांसफर कर देती है सरकार। ऐसे में, दो साल का हिसाब लगा लीजिए। कायदे से दोनों को वेतन दिया जा रहा है तो काम भी लेना चाहिए। राज्य में अफसरों की वैसे भी कमी है। दोनों की काबिलियत पर कोई संशय भी नहीं। फिर, मुफ्त का वेतन क्यों?

नारी की जगह नारी

चीफ इलेक्शन आफिसर एवं सिकरेट्री जीएडी निधि छिब्बर डेपुटेशन पर दिल्ली जा रही हैं। वहां उनको डिफेंस में पोस्टिंग मिली है….एज ए ज्वाइंट सिकरेट्री। लिहाजा, ब्यूरोक्रेसी में चर्चा खूब है, निर्वाचन में निधि की जगह कौन लेगा। निर्वाचन में सबसे ज्यादा समय गुजारने वाले सुनील कुजूर अब एसीएस हो गए हैं। उन्हें सरकार भेजेगी नहीं। पीएस में अफसर वैसे भी कम हैं। सिकरेट्री में भी कमोवेश वही स्थिति है। लेकिन, किसी को तो अपाइंट करना ही होगा। वो भी रेगुलर रिक्रूट्ड आईएएस होना चाहिए। ऐसे में, किसी महिला सिकरेट्री को सरकार निर्वाचन की जिम्मेदारी सौंप दें, तो आश्चर्य नहीं। क्योंकि।

अंत में दो सवाल आपसे

1. छत्तीसगढ़ का अगला मुख्य निर्वाचन अधिकारी कौन होगा?
2. छत्तीसगढ़ में किस आईपीएस को बाहुबलि और किसे कटप्पा बताया जा रहा है?