शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

ब्यूरोक्रेसी में हलचल

17 सितंबर

एनएमडीसी के चेयरमैन बनने के बाद आईएएस एसोसियेशन ने जिस अंदाज में बैजेंद्र कुमार को ग्रेंड फेयरवेल दिया, उससे ऐसा मैसेज गया.... बैजेंद्र अब हमेशा के लिए जा रहे हैं.....आखिर, डेपुटेशन पर तो हर साल एक-दो अफसर जाते ही हैं....बिदाई कहां होती है। वैसे, ब्यूरोक्रेसी में चर्चा भी शुरू हो गई थी....बैजेंद्र अब शायद ही लौटे। लेकिन, सीएम ने नपे-तुले एक लाईन में नौकरशाही में हलचल मचा दी। सीएम ने बिदाई भाषण में कहा, बैजेंद्र जैसे अफसर का हम फिर स्वागत करना चाहेंगे। इससे पहिले बैजेंद्र बोले, छत्तीसगढ़ लौटकर उन्हें प्रसन्नता होगी। बैजेंद्र का जुलाई 2020 में रिटायरमेंट है। याने लगभग तीन साल। टाईम कम है, इसलिए अटकलें शुरू हो गई थी। लेकिन, सीएम ने साफ कर दिया है, बैजेंद्र के लिए चांस खतम नहीं हुआ है। अब बैजेंद्र लौटते हैं या नहीं.....ये तो वक्त बताएगा। मगर चीफ सिकरेट्री के दावेदारों को डाक्टर साब की ये बात अच्छी नहीं लगी होगी....ये तो जाहिर है।

जीएसटी और अमर 

जीएसटी से आम व्यापारी हलाकान हैं.....सरकार को कोस रहे हैं। लेकिन, यही जीएसटी एक मंत्री के प्रोफाइल को कहां से कहां पहुंचा दिया। बात कर रहे हैं, इंडस्ट्री मिनिस्टर अमर अग्रवाल की। भारत सरकार ने उन्हें जीएसटी की समस्याओं का समाधान करने वाली सुप्रीम कमेटी का सदस्य बनाया है, जिसमें देश से सिर्फ पांच लोग हैं। यूपी, मध्यप्रदेश जैसे सूबों से एक भी नहीं। यही नहीं, केंद्र में दूसरे नम्बर के कद्दावर मंत्री अरुण जेटली के क्लोज होने का मौका मिला, सो अलग। वो भी ऐसे वक्त में, जब रमन सिंह के मंत्री एक के बाद एक विवादों में घिरते जा रहे हैं, अमर का बढ़ता कद....खबर तो बनती ही है।

फुटबॉल की तरह

मंत्रालय में आईएफएस अफसर आशीष भट्ट की हालत फुटबॉल की तरह हो गई है। तब से और, जब सरकार ने जूनियर आईएएस को विभाग प्रमुख बनाना शुरू किया है। भट्ट 1984 बैच के आईएफएस हैं। इस साल के शुरू में वे ट्राईबल सिकरेट्री थे। 2003 बैच की आईएएस रीना बाबा कंगाले जब ट्राईबल में आई तो सरकार को उन्हें एनर्जी में शिफ्थ करना पड़ा। वहां सीनियर आईएएस बैजेंद्र कुमार थे, इसलिए चल गए। बैजेंद्र के जाने 2003 बैच के आईएएस सिद्धार्थ परदेशी एनर्जी सिकरेट्री बनें तो भट्ट को अब हायर एजुकेशन में भेजा गया है। पता नहीं, नवंबर में होने वाले फेरबदल में अब उन्हें कौन से विभाग टिकाया जाएगा।

एसपी के लिए सिरदर्द

छत्तीसगढ़ में एक तो पीएससी से थोक में डीएसपी अपाइंट होते जा रहे हैं। उपर से तुष्टिकरण के लिए सरकार 72 और स्पेशल डीएसपी नियुक्त करने जा रही है। डीएसपी की बढ़ती संख्या एसपी के लिए पहले से ही सिरदर्द बन गई है। आलम यह है कि जिन छोटे जिलों में मुश्किल से दो-तीन डीएसपी होते थे, अब पांच-पांच, छह-छह हो गए हैं। न उन्हें बिठाने की जगह है और न ही गाड़ी की व्यवस्था। अब और 72 को झेलना पड़ेगा।

मैडम ये क्या...?

राज्य महिला आयोग की चेयरमैन हर्षिता पाण्डेय का पिछले हफ्ते बर्थडे था। जलसा भी अच्छा हुआ....जाहिर है, अगले साल चुनाव है।  लेकिन, इंटरेस्टिंग यह रहा कि हर्षिता को जो भी बुके देता, बुदबुदाते हुए पूछता मैम ये क्या....इतना वजन कैसे कम कर लिया.....। लोगों के सवालों से लगा जैसे हर्षिता वजन कम करने की पार्टी दे रही हैं। दरअसल, उन्होंने दो महीने में 16 किलो वजन कम किया है। ऐसे में, लोगों की उत्सुकता स्वाभाविक है....वजन को लेकर कौर कंसस नहीं है।

साय की हैसियत

नंदकुमार साय का दर्जा भले ही केंद्रीय मंत्री का है। मगर बिलासपुर के छत्तीसगढ़ भवन के अटेंडर ने उनके कद को ऐसा नापा कि पूछिए मत! साय कल पहुंचे छत्तीसगढ़ भवन तो उन्हें दो नम्बर का कमरा दिया गया। साय ने पूछा, एक नम्बर क्यों नहीं? तो जवाब मिला, वो मंत्रियों के लिए है। सायजी के पीए ने बताया, साब केंद्रीय मंत्री लेवल के हैं। अटेंडर बोल, हमलोग लेवल वाले को मंत्री नहीं मानते। प्रोटाकॉल वाले साब ने कहा है, सिर्फ मंत्रियों के लिए खुलेगा एक नम्बर कमरा।  

रामदयाल के पीछे

आदिवासी सीएम पर कांग्रेस के ट्राईबल लीडर्स के एक होते सूर पीसीसी नेताओं के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। सबसे पहिले पाली-तानाखार के विधायक रामदयाल उईके ने मोर्चा संभाला। मनोज मंडावी और कवासी लकमा ने हां में हां मिला दिया। चार बार के विधायक उईके इतने अग्रेसिव हो गए हैं कि प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया की बंद कमरे में समझाइस पर भी नहीं रुके। दो दिन बाद फिर आदिवासी सीएम पर उनकी मुखरता सामने आ गई। पीसीसी नेताओं को ये तो मालूम है कि उईके बेहद महत्वकांक्षी हैं पर उनमें इतना कांफिडेंस कहां से आ गया....इसको लेकर हैरान हैं। पार्टी के लोग इस पता करने में जुट गए हैं....उईको को चाबी कहां से ऐंठी जा रही है।          

अत में दो सवाल आपसे

1. आदिवासी सीएम की मांग पर कांग्रेस विधायक रामदयाल उईके को सबसे पहिले बीजेपी के किस सीनियर ट्राईबल लीडर ने फोन कर बधाई दी?
2. मंत्रालय में गृह मंत्री की रिव्यू मीटिंग में अफसरों ने ऐसा क्या बताया कि मंत्रीजी बगले झांकने लगे?

 

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

त्रिफला का नया ब्रांड

10 सितंबर

त्रिफला का नया ब्रांड


पीएल पुनिया के छत्तीसगढ़ दौरे में सबसे हिट रहा त्रिफला का नया ब्रांड। नए में चरणदास महंत, रविंद्र चौबे और मोहम्मद अकबर शामिल हैं। तीनों ने कांग्रेस भवन में नए त्रिफला को लांच करते हुए बकायदा फोटो भी खिंचवाई। नया वाला त्रिफला कई मायने में पुराने से जुदा है। सबसे पहले 2012 में त्रिफला सामने आया था। उसमें प्योर संगठन के लोग थे.....तत्कालीन पीसीसी चीफ और नेता प्रतिपक्ष। नए में दोनों गायब हैं। लिहाजा, भूपेश बघेल को सर्तक हो जाना चाहिए.....त्रिफला उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, संगठन खेमा कम थोड़े ही हैं। त्रिफला का असर कम करने के लिए अगले दिन पुनिया से मिलाने कवर्धा से योगेश्वर राज सिंह को बुलवा लिया। योगेश्वर और अकबर के रिश्ते कैसे हैं, बताने की जरूरत नहीं। अब अकबर को तय करना है, त्रिफला का हिस्सा रहे या फिर अगले चुनाव के लिए टिकिट सुनिश्चित करें।

कांग्रेस का चौथा विकेट


कांग्रेस विधायक रामदयाल उईके के आदिवासी सीएम पर बागी बोल ने पार्टी को उलझन में डाल दिया है। पहली बार सीएम पद को लेकर कोई आदिवासी विधायक ने तीखे तेवर दिखाए हैं। कांग्र्रेस की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है कि जोगी कांग्रेस बनने के बाद उसके तीन विधायक पहले ही छिटक चुके हैं। अमित जोगी के अलावा सियाराम कौशिक और आरके राय। अब उईके जिस तरह की भाषा बोल रहें हैं, उससे पार्टी के नेताओं को खटका हो रहा है....उईके कहीं पुराने गुरू की शरण में तो नहीं जा रहे हैं। यही वजह है, पीएल पुनिया ने उईके को तलब कर बंद कमरे में उनसे चर्चा की।  

बिना प्रभार के मंत्री


भैयालाल राजवाड़े, महेश गागड़ा और दयालदास बघेल को मंत्री बने करीब दो साल होने जा रहे हैं। लेकिन, अब तक उन्हें किसी जिले का प्रभार नहीं मिला है। जबकि, कुछ मंत्रियों के पास दो-दो, तीन-तीन जिले का चार्ज है। पार्टी सुप्रीमो अमित शाह ने छत्तीसगढ़ दौरे में जब प्रभारी मंत्रियों को रात बिताने का फरमान जारी किया था तो भैयालाल राजवाड़े ने सीएम के सामने दुखड़ा रोया था....भाई साब! हम तीनों के पास जिला नहीं है। तब सीएम ने कहा था, बहुत जल्द उन्हें जिला मिल जाएगा। लेकिन, तीनों मंत्रियों का इंतजार खतम नहीं हो रहा।


कमजोर हुई आईएएस लॉबी?


बैजेंद्र कुमार के रिलीव होने के बाद ब्यूरोक्रेसी में माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की आईएएस लॉबी कमजोर होगी। एसीएस बनने के बाद बैजेंद्र ने 2014 में आईएएस एसोसियेशन की कमान संभाली थी। इसके बाद एसोसियेशन को उन्होंने चार्ज कर दिया था। हालांकि, साल के शुरूआत में उन्होंने एसोसियेशन की कमान छोड़ दी थी। अजय सिंह को नया अध्यक्ष बनाया गया। बावजूद इसके, एसोसियेशन बैजेंद्र पर निर्भर थी। जीएस मिश्रा-भूपेश बघेल एपीसोड में एसोसियेशन को जब सीएम से मुलाकात का टाईम नहीं मिल रहा था, तब भी बैजेंद्र कुमार का दरवाजा खटखटाया था अफसरों ने। सुनील कुजूर को एसीएस बनाने के लिए हल्ला बैजेंद्र ने ही किया था।
 

यूथ टीम

राज्य सचिवालय की जिम्मेदारी अब धीरे-धीरे यूथ टीम के हाथ में आती जा रही है। जिन विभागों को कभी दिग्गज अफसर संभालते थे, उन विभागों को अब स्पेशल सिकरेट्री देख रहे हैं। ताजा फेरबदल में 2003 बैच के आईएएस सिद्धार्थ कोमल परदेशी को पावर दिया गया है। इस विभाग को विवेक ढांड से लेकर अजय सिंह, अमन सिंह, बैजेंद्र कुमार जैसे अफसर संभाल चुके हैं। परदेशी अब स्पेशल सिकरेट्री के रूप में उर्जा विभाग के प्रमुख होंगे। वहीं, 2002 बैच के आईएएस डा0 कमलप्रीत को सरकार ने इंडस्ट्री का जिम्मा दिया है। कमलप्रीत भी अभी सिकरेट्री नहीं बनें हैं। इससे पहिले रीना बाबा कंगाले ट्राईबल, मुकेश बंसल एवियेशन, राजेश सुकुमार टोप्पो जनसंपर्क और आर संगीता जीएडी में आईएएस विंग संभाल रही हैं। ये सभी स्पेशल सिकरेट्री लेवल के अफसर हैं। जाहिर है, इससे सीनियर आफिसरों को पीड़ा तो हो रही होगी।   
फ्यूचर का सिनेरिया
बैजेंद्र कुमार के जाने के बाद जरूरी फेरबदल कर दिए गए। लेकिन, सत्ता के गलियारों में जिस तरह की खबरें निकल कर आ रही हैं, नवंबर में बड़े लेवल पर एक चेंजेस और होंगे। 30 नवंबर को एसीएस एमके राउत रिटायर होंगे। राउत का ग्रामीण और पंचायत विभाग आरपी मंडल को सौंपा जा सकता है। मंडल सरकार के फर्स्ट इनिंग में भी इस विभाग को संभाल चुके हैं। तब भी अजय चंद्राकर उनके मंत्री थे। और, अब भी होंगे। जाहिर है, समन्वय का कोई लफड़ा नहीं होगा। दोनों एक-दूसरे को बखूबी जानते हैं। मंडल के पंचायत में जाने के बाद उनका फारेस्ट और लेबर चित्तरंजन खेतान को मिल सकता है। इस बीच सरकार के साथ खेतान के तालमेल का सेतु मजबूत़ हो जाए, तो ऐसा भी हो सकता है कि नवंबर में उन्हें कोई और अहम विभाग मिल जाए।  
समय की मार
नॉन घोटाले में आईएफएस कौशलेंद्र सिंह बाल-बाल बच गए थे। मगर नान के दूसरे मामले में वे आरोपी बन गए। उन्होंने नियम-कायदों की परवाह किए बिना प्रमोशन दे दिया था। सिस्टम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता नहीं। मगर कानून ने उनकी गर्दन पकड़ ली। अदालत के निर्देश पर ईओडब्लू ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है। आपको याद होगा, एसीबी ने जब फारेस्ट अफसरों के यहां ताबड़तोड़ छापा मारा था, तब मंत्री महेश गागड़ा विरोध दर्ज कराने सीएम हाउस पहुंच गए थे। तब इसके पीछे कौशलेंद का ब्रेन माना गया था। अब उसी ईओडब्लू में कौशलेंद्र को चक्कर लगाना पड़ेगा। इसे ही कहते हैं समय की मार।
हफ्ते का व्हाट्सऐप
एमएसजी-मुझे माफ कर दीजिए जब साब!
जज-ठीक है, मगर तुम्हें खुद की मुवी दो बार देखनी होगी।
एमएसजी-ठीक है, जज साब। मुझे तुरंत फांसी दे दीजिए।
अंत में दो सवाल आपसे
1. पुरस्कार को लेकर एक ही बैच के दो आईएएस में खटास पैदा हो गई है....दोनों के नाम बताइये? 
2. सिकरेट्री लेवल के अफसर संजय शुक्ला को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग का डायरेक्टर क्यों बना दिया गया?

बुधवार, 6 सितंबर 2017

मैदान खाली…

3 सितंबर

संजय दीक्षित
एन बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी के चेयरमैन बनने से छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक समीकरण बदल गए हैं। 83 बैच के आईएएस अजय सिंह का चीफ सिकरेट्री बनने का रास्ता साफ समझिए। मौजूदा सीएस विवेक ढांड अगर मार्च में रिटायर होंगे तो एक अप्रैल को अजय सिंह सीएस बन जाएंगे। या कहीं, सरकार ने अगर ढांड को केंद्र से एक्सटेंशन दिला दिया तो ताजपोशी कुछ आगे-पीछे खिसक सकती है। वैसे, छह महीने एक्सटेंशन के प्रावधान हैं। चुनावी साल में कम-से-कम तीनेक महीने का एक्सटेंशन मिल ही सकता है। वैसे, रास्ता को 87 बैच के लिए क्लियर हो गया है। इस बैच में तीन आईएएस हैं। बीबीआर सुब्रमण्यिम, सीके खेतान और आरपी मंडल। एनके असवाल के रिटायर होने से सिर्फ एक पोस्ट खाली था। दावेदार थे तीन। अब नवंबर में एसीएस एमके राउत रिटायर हो जाएंगे। बैजेंद्र एनएमडीसी जा रहे हैं। याने अब तीनों एसीएस बन जाएंगे। यही नहीं, ढांड के रिटायर होने के बाद अब पीएस केडीपी राव भी अगले साल एसीएस प्रमोट हो जाएंगे। वरना, राव के लिए खतरा था।

बुलेट स्पीड

बैजेंद्र कुमार की एनएमडीसी में पोस्टिंग की चकरी 31 अगस्त को इतनी तेजी से घूमी कि राज्य सरकार से एनओसी लेकर भारत सरकार ने महज चार घंटे में नोटशीट क्लियर कर दी। दोपहर 12 बजे कैबिनेट सिकरेट्री ने सीएस को फोन करके बैजेंद्र के नाम पर सहमति मांगी और चार बजे नोटशीट पर प्रधानमंत्री ने हस्ताक्षर कर दिया। और, रात आठ बजे आदेश भी जारी हो गया। बैजेंद्र ने देर रात कहीं लिखा भी…इट जस्ट हैपेन्ड इन बुलेट स्पीड….मे बी इट इज गॉड्स विश! बिन मांगे 80 हजार करोड़ की नवरत्न कंपनी मिल गई तो ईश्वर का शुक्रगुजार तो रहना ही चाहिए। वैसे भी, भारत सरकार ने जिन 15 आईएएस अफसरों को नई पोस्टिंग दी, उस लिस्ट पर आप अगर गौर करें तो सबसे दमदार पोस्टिंग बैजेंद्र की ही होगी।

मौके पर न्याय

मानवाधिकार संगठन भले ही इस पर कोहराम मचा सकते हैं। लेकिन, इस मौके पर न्याय की इन दिनों खूब चर्चा है। माजरा दुर्ग का है….एडिशनल एसपी अजाक्स का रीडर बेहद सामान्य मामले को खतम करने के लिए दो लाख का डिमांड किया था। इसकी जानकारी एक आईपीएस को हो गई। उन्होंने आव देखा, न ताव, पहुंच गए एडिशनल एसपी के दफ्तर। पकड़ लिया रंगे हाथ रीडर को। इसके बाद रीडर की तो लात-घूसों से ऐसी सोटाई की, पूछिए मत! जी नहीं भरा तो पास खड़े पुलिस वाले से डंडा भी ले लिया। मीडिया वालों ने पूछा, साब आपको जांच कराना चाहिए था। आईपीएस ने जवाब भी उसी अंदाज में दिया….जेब में पैसा नहीं मिलता तो जांच कराता….पैसा बरामद होने के बाद जांच काहे का। जनाब कोरबा में भी पुलिस वालों की खूब ठुकाई की थी। आलम यह हुआ कि ट्रांसफर के बाद पुलिस वाले बजरंग बलि को लड्डू चढ़ाए थे। लेकिन, जरा बचके…. पवनदेव ने भी बिलासपुर में पुलिस वालों की खूब निलंबन और बर्खास्तगी की थी। जाल बिछाकर पवनदेव को पुलिस वालों ने ही ठिकाने लगा दिया।

निगरानी…. आईपीएस

अभी तक आपने निगरानीशुदा बदमाश सुना होगा….निगरानीशुदा आईपीएस नहीं। लेकिन, छत्तीसगढ़ में एक निगरानी आईपीएस हैं। दरअसल, आईपीएस की रिव्यू कमेटी ने तीन अफसरों के नाम भारत सरकार को भेजा था। इनमें से दो की भारत सरकार ने छुट्टी कर दी। एएम जुरी और केसी अग्रवाल को। मगर एडीजी महोदय को इस नोटिंग के साथ बख्श दिया….फिलहाल, पुलिस महकमा इन पर निगरानी रखें। अब, एडीजी पर नजर कौन रखेगा? बराबर या नीचे के अफसर तो नहीं ना। जाहिर तौर पर, डीजीपी को एडीजी की निगरानी करनी पड़ रही होगी। लेकिन, क्लास यह है कि जिस रिव्यू कमेटी ने एडीजी को निकाल बाहर करने की अनुशंसा की थी, डीजीपी भी उसके हिस्सा थे। याने उनकी कमिटी पहिले ही रिकमांड कर चुकी हैं…..एडीजी गड़बड़ है….निकाला जाए। तो अब वे निगरानी क्या करेंगे। लेकिन, मिनिस्ट्री आफ होम का आर्डर को क्या किया जा सकता है।

नई पोस्टिंग

बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी चेयरमैन बनने के घटनाक्रम के बाद प्रिंसिपल सिकरेट्री चित्तरंजन खेतान को ठीक-ठाक पोस्टिंग की संभवनाएं बढ़ गई है। भारत सरकार से लौटने के बाद सरकार ने उन्हें प्रशासन अकादमी का डीजी पोस्ट किया था। जाहिर है, बैजेंद्र के पास सीएम सचिवालय के साथ उर्जा और उद्योग विभाग था। ये दोनों विभाग पीएस अमन सिंह और सिकरेट्री सुबोध सिंह संभाल चुके हैं। मगर अब दोनों के पास इतना वर्क लोड है कि फिर से इन विभागों को चलाना उनके लिए संभव नहीं होगा। इसमें दो बातें सामने आ रही है। या तो दो महीने के लिए टेम्पोरेरी तौर पर अमन और सुबोध को इन विभागों को सरकार सौंप दें। और, नवंबर में होने वाले मेगा फेरबदल में विभागों का पुनर्गठन किया जाए। या फिर, किसी स्पेशल सिकरेट्री को उर्जा और सीएम सचिवालय के लिए पोस्ट किया जाए। अगर ऐसा हुआ तो साफ-सुथरी छबि के सिद्धार्थ कोमल परदेशी को सरकार मंत्रालय बुला सकती है। परदेशी कवर्धा और राजनांदगांव के कलेक्टर रह चुके हैं। जाहिर है, सरकार के लिए वे टेस्टेड अफसर होंगे। लेकिन, ये सिर्फ अटकलें हैं।

गो माता कहां हो?

गायों को लेकर कांग्रेस की सियासत तो सफल रही मगर इसके लिए उन्हें रायपुर में कितने पापड़ बेलने पड़े पूछिए मत! असल में, कांग्रेस को लगा था कि गाये ंतो यूं ही रोड चलते मिल जाएंगी….पकड़ लेंगे। मगर हुआ ऐसा कि नगर निगम के अमले ने सुबह चार बजे से ही सड़क पर छुट्टा घूमने वाली गायों को उठाना चालू कर दिया था। सात बजते तक सारी गायें गायब थीं। पार्टी ने गायों के लिए महापौर को लगाया। दिलचस्प दृश्य था….मेयर और उनकी टीम गायों के लिए मशक्कत कर रही थीं और निगम कर्मी गायों को गायब कर रहे थे। ले देकर लाखे नगर चौक पर कुछ गायें मिलीं तो पकड़ लाए। कांग्रेस को अफसोस इसलिए भी रहा कि पुलिस के चलते प्रदर्शन भी आधा-अधूरा रहा, उपर से गायों के चारा-चोकर पर भी जेब से हजारों रुपए निकल गए। चलिये, गायों को लेकर ऐसे प्रदर्शन होते रहने चाहिए….उन्हें सड़कों पर कागज और झिल्ली की बजाए एकाध दिन चारा-चोकर खाने को मिल जाएंगे।

अंत में दो सवाल आपसे

1. विभाग बदलने की आशंका से किन दो मंत्रियों की रात की नींद उड़ी हुई है?
2. किस महिला कलेक्टर ने एक कंपनी से तीन लाख रुपए महीना फिक्स करवा लिया है?  

शनिवार, 2 सितंबर 2017

सीएम का जन्मदिन गिफ्ट


27 अगस्त
संजय दीक्षित
क्रवार को सीएम डा0 रमन सिंह राजधानी के आंबेडकर हास्पिटल में डायबिटिक पीड़ित बच्चों को डायबिटिक किट बांटने पहुंचे थे। एक बच्ची किट लेने के बाद कुछ कदम चलकर पीछे पल्टी….सीएम से बोली, सर, आज मेरा बर्थडे है….डायबिटिक पीड़ित बच्ची….खुद बता रही है…मेरा जन्मदिन है….कुछ क्षण के लिए माहौल भावमय हो गया….सीएम भी ठिठके….क्या दें। जेब की ओर हाथ गया….लेकिन, पाकिट में वे पैसा रखते नहीं। फिर, ध्यान आया उपर की जेब में पेन तो है। झट से उन्होंने पार्कर पेन निकाल कर बच्ची के हाथ में दे दिया….लो तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट।

विदेश…ना बाबा

मंत्री अमर अग्रवाल ने जर्मनी जाने का प्लान स्थगित कर दिया है। मंत्री के साथ अफसरों की टीम जाने वाली थी…..स्पेशल सिकरेट्री अरबन रोहित यादव, डायरेक्टर इंडस्ट्री अलरमेल मंगई, एमडी सीएसआईडीसी सुनील मिश्रा। इन्हें कांफ्रेंस में हिस्सा लेने 18 सितंबर को जर्मनी रवाना था। बताते हैं, अमर अग्रवाल ने कल सुनील मिश्रा को बोलकर जीएडी से फाइल वापस मंगा ली। अमर चतुर पालीटिशियन हैं….जानते हैं, एक मंत्री के विदेश घूमने पर किरकिरी हो रही है…विधायकों का विदेश दौरा निरस्त हो गया है। सूखे से किसानों में मचे हाहाकार के बीच विदेश जाने का मैसेज अच्छा नहीं जाएगा।
संवैधानिक संकटराज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल के शपथ में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। सूचना आयोग के नार्म के मुताबिक राज्यपाल मुख्य सूचना आयुक्त को शपथ दिलाते हैं और मुख्य सूचना आयुक्त फिर सूचना आयुक्त को। लेकिन, छत्तीसगढ़ सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद पिछले डेढ़ साल से खाली है। सरमियस मिंज अप्रैल 2016 में रिटायर हुए थे। इसके बाद से मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी खाली पड़ी है। खाली क्यों रखी गई है, सरकार बता सकती है। फिलहाल लाख टके का सवाल अशोक अग्रवाल को शपथ कौन दिलाएगा….सूचना आयोग के अफसर किताबें खंगाल रहे हैं।

13 साल से एक ही व्यक्ति

राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल आंबेडकर चिकित्सालय में चार बच्चों की मौत हो गई। मौत की वजह को लेकर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है। मगर एक सवाल मौजूं है….एक ही व्यक्ति पिछले 13 साल से क्यों? हम बात कर रहे हैं, डा0 विवेक चौधरी की। आंबेडकर के सुपरिटेंडेंट। 2004 से इस पोस्ट पर बैठे हैं। चौधरी जब अस्पताल की कमान संभाले थे…उसी समय आरपी मंडल रायपुर के कलेक्टर पोस्ट हुए थे। मंडल के बाद आठ कलेक्टर बदल चुके हैं। लेकिन, आंबेडकर का अधीक्षक नहीं बदला। हम चौधरी की काबिलियत पर सवाल नहीं कर रहे हैं। वे कैंसर के एक्सपर्ट बताए जाते हैं। लेकिन, प्रशासन का अपना नार्म होता है। एक ही पद पर लंबे समय तक काबिज रहने पर जाहिर है, प्रशासन में जड़ता आ जाती है। पिछले तीन-चार साल मेंं आंबेडकर की घटनाएं विचलित कर रही है। सरकार और उसके हेल्थ मिनिस्टर को इस पर सोचना चाहिए।

गृह विभाग ने फंसवाया

एक झटके में 47 पुलिस वालों को फोर्सली रिटायर कर गृह विभाग ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। वजह है, सूची में 35 से अधिक पुलिस वालों का रिजर्व केटेगरी का होना। प्रदेश में वैसे ही आदिवासी एक्सप्रेस दौड़ाने की कोशिश हो रही है….गृह विभाग ने उसे ईंधन-पानी मुहैया करा दिया। पता चला है, अफसरों ने सरकार को विश्वास में नहीं लिया। गृह विभाग ने डीजीपी एएन उपध्याय, डीजी नक्सल डीएम अवस्थी और गृह विभाग के उप सचिव डीके माथुर की कमेटी बनाई थी। कमेटी ने रिकमांड किया और गृह विभाग ने यह कहते हुए उसे मंत्री रामसेवक पैकरा से दस्तखत करा लिया कि मोदी आईएएस, आईपीएस की छुट्टी कर रहे हैं, इसे रोकना ठीक नहीं होगा। बताते हैं, मोदीजी का नाम सुनते ही गृह मंत्री ने चिड़िया बिठा दिया। जबकि, ऐसे फैसले सरकार की बिना सहमति के होते नहीं। और बात बहुत साफ है, सरकार की नोटिस में आती तो यह लिस्ट नहीं निकलती। क्योंकि, सरकारें राजनीतिक नफा-नुकसान को दृष्टिगत रखते हुए फैसले लेती हैं। वो भी जब विधानसभा चुनाव का माहौल बनने लगा है। हालांकि, लिस्ट गलत नहीं है। सूरजपुर के एक टीआई कुकर्म करके फरार है। अंबिकापुर के एक टीआई को वहां के आईजी पहले ही बर्खास्त कर चुके हैं। हल्ला मचाने वाली एक महिला टीआई को सिर्फ बर्खास्त आईजी राजकुमार देवांगन ने ईमानदार अफसर बताते हुए सीआर में टॉप ग्रेड दिया है। उनके अलावा 17 आईपीएस अफसरों ने सीआर में सबसे खराब कोडिंग की है…ग और घ। उनमें से 14 एससी और एसटी केटेगरी के आईपीएस हैं। लेकिन, गृह विभाग के अफसरों को वोट बैंक की संवदेनशीलता तो समझना चाहिए।

सरकार का ब्रेक

47 इंस्पेक्टर्स, सब इंस्पेक्टर्स की छुट्टी करने के बाद गृह विभाग इतना उतावला था कि डीएसपी की छंटनी के लिए मीटिंग कर डाली। यही नहीं, पांच डीएसपी को रिटायर करने की अनुशंसा भी। लेकिन, इंस्पेक्टरों की छुट्टी पर चौतरफा हमले से घबराए सरकार ने फिलहाल इस पर ब्रेक लगा दिया है। सो, राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को घबराने की जरूरत नहीं है।

किस्मत हो तो….

आईएएस अशोक अग्रवाल की सूचना आयुक्त बनाने के बाद ब्युरोक्रेसी चकित है….सिरे से मान रहे हैं…किस्मत हो तो अशोक अग्रवाल जैसा। अधिकांश पोस्टिंग रायपुर में की। इसके बाद कोरबा, रायगढ़ और बाद में वीवीआईपी जिला राजनांदगांव की कलेक्टरी। फिर, रायपुर और दुर्ग का कमिश्नर। वहां से फिर आबकारी में ताजपोशी….आबकारी कमिश्नर का मतलब बताने की जरूरत नहीं है। और अब सूचना आयुक्त। पूरे पांच साल के लिए। वो भी अभी आबकारी से रिलीव नहीं होंगे। अभी लगेंगे दो-एक महीने। सरकार ने सिर्फ सूचना आयोग की सीट बुक की है। ऐसी किस्मत आखिर कितनों को मिलती है। डायरेक्ट आईएएस डीएस मिश्रा डेढ़ साल चक्कर काटने के बाद सहकारिता निर्वाचन आयुक्त बन पाए हैं, जहां उन्हें बैठने के लिए कुर्सी-टेबल का बंदोबस्त करना होगा।

ननकीराम की याद

सरकार को पुराने मंत्री ननकीराम कंवर की बहुत याद आ रही है….वे हर साल बारिश के लिए यज्ञ कराते थे। इतेफाक कहें या….अकाल भी कभी नहीं पड़ा। मगर पिछले तीन साल से सूबे में बारिश कम होती जा रही है। इस साल तो इंतेहा हो गई….गंगरेल में मात्र 10 परसेंट पानी है। ऐसे में, रमन सिंह को ननकी की कमी खलना स्वाभाविक है।

आखिरी बात हौले से

अनाचारी बाबा राम रहीम को जेल भेजकर सिस्टम ने देश को कड़ा संदेश दिया है…अब लोगों में अंध श्रद्धा पैदा कर साम्राज्य चलाने और फतवा जारी करने वालों की अब खैर नहीं। हरियाण पंजाब में भले ही िंहंसा भड़क उठी, मगर अब बाबाओं और इमामों की सिट्टी-पिटी गुम हो गई है….बढ़ियां है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. भारत सरकार ने गैर हिन्दी भाषी आईपीएस को रिव्यू कमेटी की सिफारिश के बाद भी क्यों नहीं हटाया?
2. भूपेश बघेल नेता प्रतिपक्ष बनेंगे और टीएस सिंहदेव पीसीसी चीफ…इसमें कोई सच्चाई है या विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही महज अफवाह?

विधवा गाड़ी और झंडा

20 अगस्त

संजय दीक्षित
गाड़ियों से बत्ती उतरने से न तो मंत्रियों को कोई फर्क पड़ा है और न ही आईपीएस अफसरों को। मंत्रियों के आगे सायरन बजाती पुलिस की गाड़ियां दौड़ती हैं…..तो कैबिनेट और राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त बोर्ड और आयोगों के चेयरमैनों ने भी जोर-जुगाड़ लगाकर पायलेटिंग की व्यवस्था करा ली हैं। आईपीएस को दिक्कत इसलिए नहीं है कि उनकी गाड़ियों में पुलिस का झंडा के साथ ही उसमें स्टार लगे होते हैं…..एआईजी में एक, आईजी में दो और एडीजी, डीजी में तीन। झंका-मंका के लिए इतना काफी है। सबसे अधिक परेशानी आईएएस अफसरों को हो रही है। खासकर जो बोर्ड या आयोगों में पोस्टेड हैं…..उन्हें सीजी 02 नम्बर की जगह सीजी 04 नम्बर की वाहन मिलती हैं। वैसे भी, मंत्रालय के अधिकांश सीनियर अफसरों ने बोर्ड और आयोगों के मद से लग्जरी गाड़ियां ले रखी हैं। जाहिर है, वे सभी 04 नम्बर वाली हैं। पहले उसमें नीली बत्ती होती थी, तो पुलिस वाले सैल्यूट ठोकते थे। अब, तीस मार खां अफसर बगल से निकल जाते हैं, पुलिस वाले देखते तक नहीं। उपर से जगह-जगह रोक देते हैं। गाड़ियों के असमय विधवा हो जाने का नौकरशाहों का दर्द समझा जा सकता है। अलबत्ता, उन्हें पश्चिम बंगाल के आईएएस अफसरों से उम्मीद जगी है। वहां आईएएस एसोसियेशन ने सरकार से गाड़ियों में झंडा लगाने की अनुमति मांगी है। पश्चिम बंगाल में अगर झंडा लगाने की इजाजत मिल गई तो जाहिर है, छत्तीसगढ़ के आईएएस भी इसके लिए अवाज बुलंद करेंगे।

नारी सशक्तिकरण

स्कूल शिक्षा विभाग से संबंद्ध बोर्ड में पोस्टेड आल इंडिया सर्विसेज के एक अफसर मुश्किल में फंस गए हैं। उन्होंने हाल ही में एक लेडी स्टाफ का ट्रांसफर किया था। इसकी वजह थी, लेडी का शिक्षकों के साथ बुरा बर्ताव। इससे टीचर्स सड़क पर उतर आए थे। लिहाजा, लेडी को वहां से हटा दिया गया। लेकिन, उसे यह नागवार गुजर गया। उसने अफसर के खिलाफ यौन प्रताड़ना की शिकायत कर दी है। शिकायत मंत्री के यहां पहुंच गई है। अफसर की अब सिट्टी-पिटी गुम है। जाहिर है, यह मामला ही ऐसा है कि जो भी सुनेगा, कहेगा…. आग लगी होगी, तभी धुंआ उठा है।

जांच का संकट

सरकार ने आईएएस रेणु पिल्ले का बिलासपुर ट्रांसफर कर दिया है। पिल्ले के बिलासपुर जाने से इस बात का संकट खड़ा हो गया है कि बड़े अफसरों के खिलाफ अब सेक्सुअल ह्रासमेंट की जांच कौन करेगा। खासकर सिकरेट्री लेवल के आईएएस और आईजी, एडीजी स्तर के आईपीएस की। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार विशाखा कमेटी की चेयरमैन महिला होनी चाहिए….आरोपी अफसर से एक रैंक उपर। लेकिन, पीएचक्यू में डीआईजी लेवल से उपर कोई महिला नहीं हैं। तभी रेणु पिल्ले की मदद ली जाती है। सिकरेट्री लेवल पर भी यही प्राब्लम है। प्रिंसिपल सिकरेट्री स्तर पर रेणु पिल्ले अकेली आईएएस थीं। इनके उपर कोई महिला आईएएस है नहीं। इंदिरा मिश्रा 11 साल पहले रिटायर हुई थीं। इसके बाद महिला आईएएस में लंबा गैप हो गया। ऐसे में कोई सिकरेट्री फंसेगा तो….? हालांकि, आईएएस चतुराई से सब काम करते हैं…..फंसते हैं, आईपीएस। हाल-फिलहाल धमतरी की महिला और आईजी का मामला सामने है। अगर यह 180 डिग्री में टर्न ले लिया तो….फिर, खबर आ रही है…..एक एडीजी के भी जल्द कुछ खुलासे होने वाले हैं। प्रश्न उठता है, इसकी तहकीकात कौन करेगा?

बृजमोहन की मुश्किलें

कृषि एवं पशुपालन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जलकी जमीन विवाद अभी ठंडा ही हुआ था कि धमधा में बीजेपी नेता के गोशाले में ढाई सौ गायों की मौत हो गई। यहीं नहीं, गोशाला संचालक की क्रूरता ने तो पार्टी नेताओं को मुंह छुपाने को मजबूर कर दिया है। इसमें इम्पोर्टेंट यह है कि गोशाला संचालकों को पशुपालन विभाग ने आंख मूंदकर लाखों रुपए का अनुदान दिया था। अनुदान बांटने में दरियादिली क्यों दिखाई गई, जांच में इसका खुलासा होगा। बहरहाल, उन्होंने दो डिप्टी डायरेक्टरों समेत नौ वेटनरी डाक्टरों को सस्पेंड कर दिया है।

अजब-गजब

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग के कारनामों के किस्से तो अनेक हैं। मगर इस बार जो हुआ है, वह सबको पीछे छोड़ दिया। बताते हैं, सत्ताधारी पार्टी के मंडल अध्यक्ष ने एक शिक्षक के ट्रांसफर का रिकमांडेशन किया था। मगर लिस्ट निकली तो विभाग के अफसरों ने शिक्षक की जगह मंडल अध्यक्ष का ही ट्रांसफर कर दिया। शिक्षकों ने मंडल अध्यक्ष को जब लिस्ट दिखाई तो कुछ देर के लिए वे शून्य से हो गए। पता चला है,  उन्हांने सीएम से इसका कांप्लेन किया है। शुक्र है, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने मंडल अध्यक्ष का ही ट्रांसफर किया है। कहीं मंत्री, विधायक का ही ट्रांसफर कर दें, तो अचरज नहीं। क्योंकि, ट्रांसफर के लिए रिकमांड तो सभी करते हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. जलकी के बाद अब कौन-सा जमीन घोटाला उजागर होने वाला है, जिसमें बड़ी संख्या में ब्यूरोक्रेट्स एक्सपोज होंगे?
2. जिलों के प्रभारी मंत्रियों के पुनर्गठन की फाइल क्यों लटक गई है? 

बुधवार, 16 अगस्त 2017

लक्ष्मी पुत्रों के दिन खराब


13 अगस्त
संजय दीक्षित
आमतौर पर लोग कहते हैं, छत्तीसगढ़ में अग्रवालों की सरकार है….अच्छी पोस्टिंग के लिए वैश्य होना जरूरी है। मगर राहु एवं गुरू के गोचर होने के कारण वैश्य नेताओं और अफसरों के अब बुरे दौर शुरू हो गए हैं। सबसे पहिले मोहन भैया की बात करें। राहु और गुरू के एक साथ आने का कुप्रभाव कहें कि उनके जैसे मैच्योर लीडर खम ठोककर लगा ललकारने…..सुन लो….तुम्हारे भी बाल-बच्चे हैं। राहु का दूसरा शिकार बनें डीआईजी केसी अग्रवाल। 5 अगस्त को दिन भर पीएचक्यू में नौकरी बजा कर शाम सात बजे भिलाई स्थित घर पहुंचे थे। अगले दिन संडे था। डिनर के बाद परिवार के साथ संडे का प्लान बना रहे थे कि कॉल बेल बजा। दरवाजा खोले तो देखा एआईजी अभिषेक पाठक हाथ में लिफाफा लिए गमगीन मुद्रा में खड़े हैं। पाठक से लिफाफा लेकर जब उसे खोला तो केसी के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उन्हेंं नौकरी से रिटायर कर दिया गया था। केसी के खिलाफ आरोप क्या है, किसी को नहीं मालूम। ना कोई डीई, ना ही जांच….फिर भी निबट गए। 11 अगस्त को प्रिंसिपल सिकरेट्री रैंक के आईएएस बाबूलाल अग्रवाल की छुट्टी हो गई। और, इसी दिन धमतरी की अग्रवाल महिला ने जिन आईपीएस अफसरों के साथ अपने रिश्ते जोड़े हैं, वे भी आखिर लक्ष्मीपुत्र ही हैं। ऐसे में, दीगर अग्रवाल नेताओं और अफसरों को कोई नुकसान हो, इससे पहिले उन्हें राहु को ठंडा करने का कोई उपाय करा लेना चाहिए।

3-2 का स्कोर

5 अगस्त को दो डीआईजी को फोर्सली रिटायर करने की खबर ने आईपीएस बिरादरी को हिला दिया। कई अफसरों की तो सदमे जैसी स्थिति थी। 6 को रविवार था। पीएचक्यू के 90 परसेंट से अधिक अफसरों ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था। या फिर फोन पिक नहीं किया। बेचारे अपने मुंह से इस बुरी खबर की पुष्टि करना नहीं चाहते थे….लग रहा था, अपना कोई चला गया। गुस्सा भी था….आईपीएस ही क्यों….? तीन-तीन आईपीएस और आईएएस एक भी नहीं। ये तो पक्षपात है….आईएएस को बचाया जा रहा है। आईपीएस अफसरों के चेहरे पर चमक तब आई जब 11 अगस्त को सुबह अचानक स्कोर बोर्ड 3-2 बताने लगा। आईएएस अजयपाल और बाबूलाल पेवेलियन लौट चुके थे। चलिये, आईपीएस में कम-से-कम ये बात अच्छी है, वे अपने प्रमोटी आईपीएस के लिए भी दुखी होते हैं। आईएएस लॉबी प्रमोटी को बड़ा बाबू से ज्यादा नहीं समझती।

महिला होने का वेटेज

ऑल इंडिया सर्विस रिव्यू कमेटी ने तीन आईएएस के नाम भारत सरकार को भेजे थे। इनमें अजयपाल और बाबूलाल के अलावा एक महिला आईएएस भी थीं। महिला अफसर के खिलाफ जमीन से संबंधित कोई पुराना मामला है। महिला एक वर्ग विशेष से भी आती है। जाहिर है, उनकी छुट्टी होने पर मैसेज अच्छा नहीं जाता। लिहाजा, डीओपीटी ने उन्हें कंसीडर कर लिया।अब आईएफएस का नम्बरआईपीएस, आईएएस से पांच अफसरों की छंटनी के बाद अब ऑल इंडिया सर्विस में आईएफएस कैडर बच गया है। रिव्यू कमेटी ने आईएफएस अफसरों के नाम भी भारत सरकार को भेजा है। इस कैडर से भी कम-से-कम दो आफिसर्स के रिमूव होने की चर्चा है।

कलेक्टरी के दावेदार

राप्रसे के 9 अफसरों के आईएएस अवार्ड होने के बाद कलेक्टरी के दावेदारों की संख्या और बढ़ गई है। इनमें जितेंद्र शुक्ला को जिला मिलना इसलिए तय लग रहा है क्योंकि, उन्हें 2009 बैच मिला है। सूबे में 2010 बैच के चार में से तीन आईएएस कलेक्टर बन गए हैं। दूसरा, जितेंद्र सरकार के लिए टेस्टेड हैं। जोगी के समय उनके गृह जिले के एसडीएम रहे। और, बीजेपी सरकार में बिलासपुर, कोरबा और रायपुर जैसे निगम के कमिश्नर। लंबे समय से वे राजघानी में सरकार के नजदीक रहकर काम कर रहे हैं। हालांकि, रसूख के मामले में तारण सिनहा का जवाब नहीं है। मगर उनका बैच 2011 मिला है। इस बैच के आईएएस अभी कलेक्टर बने नहीं है। अगर समरथ को नहीं…..वाला मामला रहा तो तारण को भी मौका मिल सकता है।

 साब! 500 ले लो…

रायपुर नगर निगम ने खुले में शौच करने वालों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। कमिश्नर रजत बंसल से लेकर पूरा अमला सुबह पांच बजे निकल पड़ता है। इस दौरान निगम अफसरों को ऐसे वाकयों से साबका पड़ रहा है कि बताने में वे शरमा जा रहे हैं। जोन क्रमांक तीन के अफसरों को शुक्रवार को एक अधेर व्यक्ति से पाला पड़ा, जो काफी प्रेशर में था। अफसरों ने कहा, तूने अगर यहां……तो 500 रुपए जुर्माना देना होगा। जवाब मिला….साब! 500 ले लेना, मगर अभी तो मत रोको और वहीं बैठ गया। अफसरों को मुंह घुमाने के अलावा कोई चारा नहीं था। हालांकि, उसकी इमरजेंसी देखकर हेल्थ आफिसर ने उसे माफी दे दी। बहरहाल, लोगों को टायलेट का यूज करने के लिए प्रेरित करने में निगम अमले को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। समता कालोनी से लगे झुग्गी-झोपड़ी इलाके में अफसर जब समझाइस देने पहुंचे तो कुछ लोगों ने ऐसी व्यथा सुना दी कि अफसर निरुत्तर हो गए….साब, टॉयलेट तो बन गया है, लेकिन बंद जगह पर प्रे..श…..र बनता नहीं है। लगता है, मोदीजी के इस अभियान को सफल होने में अभी वक्त लगेगा।

आ बैल मुझे मार

दंतेवाडा के पालनार कन्या छात्रावास में जो कुछ हुआ, उसे पुलिस के लिए आ बैल मुझे मार से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। आला अफसरानों को इसकी जांच करनी चाहिए कि किसके निर्देश पर सीआरपीएफ के जवानों को लड़कियों के हॉस्टल में राखी बंधवाने के लिए भेज दिया गया। और, वो भी दो सौ से अधिक जवानों को। कॉमन सेंस होना चाहिए, इतनी अधिक संख्या में पैरा मिलिट्री फोर्स के जवानों को कंट्रोल नहीं किया जा सकता। दो-एक सिरफिरे निकल ही जाते हैं। फिर, राखी में डांस….इससे पहिले कभी नहीं हुआ। पालनार कन्या छात्रावास में दंतेवाड़ा के पुलिस अधिकारी, सीआरपीएफ अफसर नाचने में इतने मस्त हो गए कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनके जवान क्या कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़िया सबले बढ़ियां

देश में आईएएस, आईपीएस से जिन आठ अफसरों की भारत सरकार ने छुट्टी की है, उनमें पांच छत्तीसगढ़ से हैं। याने 27 राज्यों से तीन और ढाई करोड़ आबादी वाले छत्तीसगढ़ से पूरे पांच। आठ करोड़ वाले यूपी से एक भी नहीं। चीफ सिकरेट्री की अध्यक्षता वाली रिव्यू कमेटी ने पांच अफसरों को बर्खास्तगी की सिफारिश करके वाकई छत्तीसगढ़ का नाम उंचा कर दिया….पूरे देश में छत्तीसगढ़ की चर्चा हो रही है। ठीक ही कहते हैं, छत्तीसगढ़ियां सबले बढ़ियां।

चार माटी पुत्र

छत्तीसगढ़ से जिन पांच आईएएस, आईपीएस को नौकरी से हकाला गया है, इनमें चार माटी पुत्र हैं। सिर्फ अजयपाल सिंह बाहर से हैं। बाकि, आईपीएस में राजकुमार देवांगन जांजगीर, एएम जुरी कांकेर, केसी अग्रवाल बिलासपुर और आईएएस में बाबूलाल अग्रवाल रायपुर। दिलचस्प यह है कि माटी पुत्रों को मारने वाले भी माटी पुत्र हैं। गजब कि न्यायप्रियता है भाई! अपना-पराया कुछ नहीं…सिर्फ न्याय।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस आईजी ने अपनी महिला मित्र को रायपुर में फ्लैट खरीदकर दिया है उसके नाम पर स्वागत विहार के पास आठ एकड़ जमीन खरीदा है?
2. रिटायर आईएएस डीएस मिश्रा को साल भर पहिले जब सहकारी निर्वाचन आयुक्त का ऑफर दिया गया था, तो उन्होंने ठुकरा दिया था। अब कैसे तैयार हो गए?

सर्वज्ञानी अफसर


6 अगस्त
संजय दीक्षित
सतत् विकास और प्रशासकीय सुधार पर स्टेट प्लानिंग कमीशन ने नया रायपुर में नेशनल वर्कशॉप किया। इसमें देश भर से एक दर्जन से अधिक जाने-माने नौकरशाहों ने भी शिरकत की। 64 बैच के डा0 एनसी सक्सेना, 73 बैच के फार्मर सिकरेट्री सत्यानंद मिश्रा, तो तीन प्रधानमंत्रियों के ज्वाइंट सिकरेट्री रहे 68 बैच के एसएस मीनाक्षीसुंदरम भी। वर्कशॉप के समापन समारोह में सीएम डा0 रमन सिंह भी पहुंचे। कार्यक्रम में दिग्गज हस्तियां को देखकर सीएम ने अफसोस जाहिर किया…..दिग्गज ब्यूरोक्रेट्स एवं डिफरेंट फील्ड से देश के नामचीन विद्वान छत्तीसगढ़ आए हैं….काश! मैं दोनों दिन वर्कशॉप में मौजूद रहता तो मुझे और सीखने को मिलता। मगर हैरानी की बात ये कि इस वर्कशॉप में एक भी ब्यूरोक्रेट्स नजर नहीं आए। जबकि, विधानसभा भी एक दिन पहले दोपहर में समाप्त हो गया था। वैसे, छत्तीसगढ़ के सर्वज्ञानी नौकरशाहों को सीखने की जरूरत भी नहीं है। दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश से चुन-चुनकर छंटे हुए अफसरों को जो यहां भेजा है….।

 वेट फॉर सुटेबल आईएएस?

बिल्डरों पर लगाम लगाने के लिए बनाए जा रहे रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के गठन में अभी कुछ और वक्त लग सकते हैं। वजह? सुटेबल कंडिडेट नहीं मिल रहा है। सरकार ने जस्टिस प्रितिंकर दिवाकर की अध्यक्षता में कमिटी बना दी है। पीएस आवास एवं पर्यावरण अमन सिंह और पीएस लॉ आरके शर्मा इसके सदस्य हैं। चेयरमैन के लिए दो आवेदन भी आए हैं…..रिटायर एसीएस डीएस मिश्रा और एनके असवाल के। लेकिन, कमिटी की अभी एक भी बैठक नहीं हुई है। लिहाजा, माना जा रहा है, इस रसूखदार पद के लिए सरकार की तलाश अभी पूरी नहीं हुई है। चेयरमैन के लिए रिटायर प्रिंसिपल सिकरेट्री से लेकर चीफ सिकरेट्री तक अप्लाई कर सकते हैं। ऐसे में, सवाल तो उठते हैं….सरकार कहीं किसी सुटेबल आईएएस के रिटायर होने की प्रतीक्षा तो नहीं कर रही है?

बीजेपी डिफेंसिव

बीजेपी की थर्ड इनिंग में यह पहिला मौका होगा, जब सत्ताधारी पार्टी डिफेंसिव दिखी। प्रेमप्रकाश पाण्डेय और अजय चंद्राकर की सलामी जोड़ी ने पारी संभालने की भरपूर कोशिश की। मगर जिस तरह के कांफिडेंस पहले दिखते थे, वह नदारत था। कांग्रेस ने इसका लाभ उठाने में कोई गलती नहीं की। मुख्य विपक्षी पार्टी के लिए भी हॉवी होने का यह पहला मौका था। नेता प्रतिपक्ष का उत्साह देखिए, पार्टी से अलग लाइन लेने पर सियाराम कौशिक और आरके राय को उन्होंने विधानसभा की लॉबी में ही बोल दिया…..निष्कासित किए जाएंगे। और, अगले दिन नोटिस भी इश्यू हो गई। कांग्रेस ने अपना घर दुरुस्त करना शुरू कर दिया है तो सत्ताधारी पार्टी को सोचना चाहिए।

 हार्ड लक

यूपीएससी में अबकी छत्तीसगढ़ के लिए बड़ा हार्डलक रहा। सिर्फ एक आईएएस से संतोष करना पड़ा। डिप्टी कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा सलेक्ट हुए। सर्वाधिक अफसोस दंतेवाड़ा की नम्रता जैन के लिए हुआ। 99 रैंक आने के बाद भी वे आईएएस के लिए सलेक्ट नहीं हो पाईं। इस बार उन्होंने यूपीएससी भी नहीं दिया। शायद उन्हें पूरा भरोसा रहा होगा। लानत है, बस्तर में पोस्टेड आईएएस अफसरों को। आमतौर पर परिपाटी रही है, यूपीएससी में परफार्म करने वाले प्रतिभागियों से वहां पोस्टेड आईएएस बुलाकर मिलते थे….एंकरेज करते थे…..उन्हें बताते थे कि अगली बार ये चूक मत करना। लेकिन, बस्तर के किसी भी नौकरशाह ने नम्रता को नहीं बताया कि रिस्क लेने की बजाए यूपीएससी फिर कंपीट करो।

पोस्टिंग या वरदान

यूपीएससी के इंटरव्यू के हफ्ते भर पहिले चंद्रकांत वर्मा को सरकार ने जब जनपद सीईओ बनाकर कोंटा भेजा, तो जाहिर है, उन्हें बुरा लगा होगा….सरकार ने कहां आंध्र के बार्डर पर पटक दिया। मगर कोंटा की पोस्टिंग चंद्रकुमार वर्मा के लिए वरदान बन गई। धुर नक्सल प्रभावित बस्तर लाइमलाइट में है। जाहिर है, वहां नौकरी करने वालों के प्रति स्वाभाविक तौर पर एक अलग दृष्टिकोण बनता है। वरना, चंद्रकांत का 352 रैंक था। कह सकते हैं, एकदम बाउंड्री पर। ऐसे में, कुछ भी हो सकता था।

चोरी और सीनाजोरी

सर्वेश्वर एनईकट के टेंडर में सिंचाई विभाग के अफसरों ने 15 करोड़ का खेल कर दिया। 41 और 42 करोड़ रेट देने वाली पार्टियों को कितने डेसिंग के साथ बाहर किया गया, इसके सारे पेपर हैं। कंट्रक्शन कंपनियों को जिस आधार पर बाहर किया गया, उन्हें कुछ दिन बाद फिर उसी बेस पर टेंडर प्रदान किया गया। इसके बाद भी सिंचाई विभाग सफाई दे रहा है, तो ये चोरी और सीनाजोरी ही तो हुआ।

अंत में दो सवाल आपसे

1. कांग्रेस नेताओं की जमीन की जांच-पड़ताल, नापी-जोखी अब सरकार करवाएगी?
2. सरकार के किस मंत्री की आजकल जोगी कांग्रेस से खूब छन रही है?  

समरथ को नहीं दोष गोसाई

23 जुलाई

संजय दीक्षित
राज्य प्रशासनिक सेवा के सुधाकर खलको और भरतलाल बंजारे का आईएएस अवार्ड लटक गया। इनका मामला कोई बहुत गंभीर भी नहीं था। सीआर में गुड और वेरी गुड का चक्कर था। अलबत्ता, एक ऐसे राप्रसे अफसर के आईएएस अवार्ड को हरी झंडी मिल गई, जिन पर करोड़ों के जमीन घोटाले की तोहमत है। जनाब ने एसडीएम रहने के दौरान सरकारी जमीन बिल्डर को सौंप दी….प्रति प्लाट दो पेटी लेकर ले आउट एप्रुव कर दिया। अब 50 से अधिक लोग अपनी जमीन के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। बिल्डर की हर्ट अटैक से असामयिक मौत हो गई। आईएएस अलेक्स पाल मेनन की जांच रिपोर्ट में राप्रसे अफसर के खिलाफ गंभीर टिप्पणी की गई है। सीएम भी बोल चुके हैं…. अब जीरो टॉलरेंस। इसके बाद भी दिल्ली में हुई डीपीसी में दागी अफसर को आईएएस अवार्ड के लिए हरी झंडी मिल गई। ऐसे में, खलको और बंजारे को तुलसीदासजी की चौपाई को याद करके संतोष कर लेना चाहिए…..समरथ को नहीं दोष गोसाई…..।

अंतरात्मा की आवाज

राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी को दो वोट अधिक मिल गए। जाहिर है, क्रॉस वोटिंग को लेकर कांग्रेस और जोगी कांग्रेस में मुश्कें कसनी ही थी…..दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगा रही हैं। मगर अंदर की बात यह है कि एक वोट तो कांग्रेस के ही एक विधायक ने खराब कर डाला। बेचारे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं….वोट डालने का सिस्टम समझ ही नहीं पाए। कांग्रेस का दूसरा वोट जानबूझकर इनवैलिड किया गया। कांग्रेस नेताओं को शक है कि दीगर दलों के प्रति वफादारी के चक्कर में बिलासपुर जिले के विधायक ने गड़बड़ कर डाला। रही बात कांग्रेस के निलंबित विधायक अमित जोगी और आरके राय की, दोनों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दिया होगा। इसके बाद अब मत पूछिएगा, कोविंद को दो वोट अधिक कैसे मिल गए।

ये है कांग्रेस का हाल!

अजीत जोगी के कांग्रेस से अलग होने के बाद समझा गया था कि अब कांग्रेस के सारे प्राब्लम छू-मंतर हो गए। अब, सत्ता में आने से कोई रोक नहीं सकता। लेकिन, विचित्र पार्टी है….कभी एक हो नहीं सकते। राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग को ही बानगी लें। पीसीसी चीफ भूपेश बघेल गोलमोल बोले, जोगी परिवार पर विश्वास नहीं किया जा सकता। लेकिन, शिव डहरिया तीन कदम आगे बढ़कर रेणु जोगी को पार्टी से निकालने की ही मांग कर डाली। दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष का बयान आया, रेणु जोगी जिम्मदार और भरोसेमंद नेत्री हैं….वे क्रॉस वोटिंग कर ही नहीं सकती। याने तीन नेता, तीन बयान…..ये है कांग्रेस का हाल।

 नजर लागे राजा…

.प्रायवेट सेक्टर के यंग प्रोफेशनल्स को सरकारी विभागों से जोड़ने के लिए रमन सरकार ने एक नायाब फेलोशिप शुरू की है। सीजी सीएम गुड गवर्नेंस फेलोशिप प्रोग्राम। यह प्रोग्राम शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य है। इससे पहिले, सिर्फ हरियाणा में चल रहा है। दो-दो साल के फेलोशिप में 42 प्रोफेशनल्स को चुना जाना है। इसमें पगार भी जोरदार है। एक लाख से लेकर ढाई लाख तक। ऐसे में, नौकरशाहों के नाते-रिश्तेदारों का मन भला कैसे नहीं ललचेगा। कुछ अफसरों की पत्नियां दो नम्बर में लुके-छिपे कुछ-कुछ करते ही रहती हैं। प्रोग्राम के लांच होते ही एक कलेक्टर ने सरकार से एप्रोच कर डाला। लेकिन, उपर से दो टूक जवाब मिल गया। फेलोशिप में किसी के नाते-रिश्तेदारों के लिए कोई जगह नहीं होगी…..सीएम साब चाहते हैं….ऐसे लोग चुने जाएं, जिनके अपाइंटमेंट से विभागों का परफारमेंस सुधरे। संदेश साफ है, दीगर कलेक्टर या ब्यूरोक्रेट्स अपनों के लिए ट्राई नहीं करें।

खबरों में अफसर

वीवीआईपी जिले के आला आफिसर्स अपनी पत्नियों के साथ मंगलवार को दाल-भात केंद्र में लंच क्या किया, सोशल मीडिया में उन्हें सैल्यूट करने वालों की बाढ़ आ गई। कोई उन्हें गरीबों का मसीहा बता रहा था तो किसी ने लिखा, दाल-भात केंद्र में खाना खाने वाला कलेक्टर इस राज्य में कभी हुआ ही नहीं। उसी जिले में सिद्धार्थ कोमल परदेशी से लेकर मुकेश बंसल, पी दयानंद, धनंजय देवांगन जैसे कलेक्टर रहे हैं। लेकिन, आपको याद नहीं होगा, इस अंदाज में इनकी फोटो कहीं दिखी होगी। बुद्धिमान अफसर इस तरह के कृत्य कभी करते भी नहीं….फिर जिला वीवीआईपी का हो तब तो और संजीदा रहना चाहिए। दाल-भात केंद्र के खाने का अगर टेस्ट ही करना था, तो बिना फोटोबाजी के भी इसे किया जा सकता था। दरअसल, दोष अफसरों का नहीं है। आफिसर्स तो अच्छे हैं, पर छत्तीसगढ़ में ढंग से उनकी ट्रेनिंग हो नहीं पाई। उन्हें यह नहीं बताया गया कि अच्छे अफसर खुद खबर नहीं बनता….राजनेताओं को आगे रखता है। बाकी वह दिल से काम किया होगा, तो अल्टीमेटली क्रेेडिट उसे मिलेगा ही।

बहादुर आईपीएस

इस हफ्ते राज्य पुलिस सेवा के तीन अफसरों को आईपीएस अवार्ड करने के लिए डीपीसी हुई। खबर है, तीनों के नाम को कमेटी ने एप्रुवल दे दिया है। अगले महीने तक नोटिफिकेशन भी हो जाएगा। मगर इनमें से एक अफसर की बहादुरी के बारे में आपको जानना जरूरी है। राजनांदगांव एसपी विनोद चौबे के शहीद होने के बाद इस बहादुर अफसर को सरकार ने वहां के एक सबडिविजन में एसडीओपी बनाया था। लेकिन, आदेश निकलते ही अफसर को रात में नक्सलियों के डरावने सपने आने लगे….एके-47 लिए माओवादियों ने उन्हें घेर लिया है। लिहाजा, जान है, तो जहां है…..उन्होंने वहां ज्वाईन करने से इंकार कर दिया। चले गए छुट्टी पर। लौटने पर कुछ साल तक लूप लाइन में रहे। उसके बाद फील्डिंग करके मुख्य धारा में आए और अब आईपीएस भी बन जाएंगे। देश के धुर नक्सल प्रभावित स्टेट में अगर ऐसे बहादुर आईपीएस होंगे, तो नक्सलिज्म खतम होने में देर नहीं होगी।

सीएम हलाकान?

पीसीसी चीफ भूपेश बघेल के जमीन एपीसोड पर सीएम भी कम परेशान नहीं हैं। जोगी कांग्रेस हर तीसरे रोज मय दस्तावेज जमीन घोटाला पेश कर देता है। और, मीडिया को जवाब देना पड़ता है सीएम को। जोगी कांग्रेस जब भी आरोप लगाती है, मीडिया वाले हेलीपैड पर डाक्टर साब को घेर लेते हैं….क्या कार्रवाई होगी? डाक्टर साब चीर परिचित गंभीर मुद्रा में जवाब देते हैं….कलेक्टर इसकी जांच करेंगे। डाक्टर साब भी सोच रहे होंगे, जमीन कब्जा किया किसी ने, आरोप कोई और लगा रहा है और जवाब मुझे देना पड़ रहा है।

 अंत में दो सवाल आपसे

1. भूपेश बघेल और चरणदास महंत के बीच चौड़ी होती खाई की मेन वजह क्या है?
2. बलरामपुर एसपी के लिए नाम चला आईपीएस इंदिरा कल्याण का तो आचला कैसे बाजी मार ले गए? 

शनिवार, 15 जुलाई 2017

वाह एसपी साब-1

16 जुलाई

संजय दीक्षित
पुलिस महकमे के लिए शर्मनाक है…..अफसर इतना नीचे उतर सकता है। खुला खेल फर्रुखाबादी स्टाईल में काम करने वाले सूबे के एक आईपीएस ने ट्रांसफर होने के बाद भी कमाल कर डाला। 11 जुलाई की शाम आर्डर निकलने के बाद 12 जुलाई को थानेदारों को एक प्रायवेट बैंक का एकाउंट नम्बर भेजा गया….इस खाते में 40 हजार रुपए ट्रांसफर करवा दें….नए साब को बोल दिया गया है। आपलोगों का खयाल रखेंगे। दरोगाजी लोग क्या करते। आईपीएस हैं। कुछ साल बाद कहीं आईजी बनकर पहुंच गए तो क्या होगा?

 वाह एसपी साब-2

राज्य सरकार के पास खासकर पुलिस में विकल्प का ऐसा टोटा होता जा रहा है कि थाना लूटवाने वाले आईपीएस आईजी बन जा रहे हैं और अपने रिवाल्वर की हिफाजत नहीं कर पाने वाले एसपी। 11 जुलाई को चार जिलों के लिए एसपी अपाइंट हुए, इनमें एक जनाब ऐसे भी हैं, जिनका कुछ साल पहिले सर्विस रिवाल्वर चोरी हो गई थी। मामले को पुलिस वालों ने ले-देकर रफा-दफा कराया। अब, आप ही बताइये, जो अफसर अपने सरकारी पिस्तौल की सुरक्षा नहीं कर पा रहा हो, वो जिले का प्रोटेक्शन क्या करेगा। इससे पहिले, सरकार ने एक ऐसे आईपीएस को अहम रेंज का आईजी बनाया है, जो जहां एसपी रहे थाना लूटा गया या फिर न्यूसेंस हुआ।

 प्रमोटी में आगे

स्टेट पुलिस सर्विस के अफसर एसपी बनने में प्रमोटी कलेक्टरों से आगे निकल गए हैं। फिलवक्त, 27 में से सिर्फ छह जिलों में प्रमोटी कलेक्टर्स हैं। दुर्ग, मुंगेली, कोरिया, नारायणपुर, कांकेर, और जगदलपुर। जबकि, अबकी फेरबदल में प्रमोटी एसपी नौ हो गए हैं। वीवीआईपी जिला कवर्धा और राजधानी रायपुर के अलावा धमतरी, कोरिया, जशपुर, अंबिकापुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर। दर्जन भर और आईपीएस अवार्ड होने हैं। याने चुनाव के पहिले तक प्रमोटी एसपी की संख्या जाहिर है, एक दर्जन से उपर पहुंच जाएगी। हालांकि, चुनाव के करीब आने पर प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या बढ़ेगी। लेकिन, कलेक्टरों में बड़ा टफ कंपीटिशन हैं। रेगुलर रिक्रूट्ड की तादात इतनी तेजी से बढ़ रही है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के लिए राह आसान नहीं होगा। प्रमोटी में अब वही कलेक्टर बनेंगे जो या तो उमेश अग्रवाल टाईप हों या फिर टामन सिंह सोनवाने जैसा। टामन सिंह विभागीय जांच के बाद भी बड़े जिले में कलेक्टर बनने में कैसे सफल हो गए, इसका कारण लिखना उचित नहीं होगा।

नया आइडिया

जाति विवाद में फंसे अजीत जोगी कैंप ने सोशल मीडिया में एक नया ट्रेंड चालू किया है, कार्टून्स एवं श्लोगन के जरिये विरोधियों पर हमला करने का। नंदकुमार साय का कार्टून बनाकर पहला निशाना अमित जोगी ने लगाया। यही नहीं, सोशल मीडिया में भी खूब श्लोगन चल रहे हैं….जोगी-जोगी जपते हो…..जोगी सरकार बन रही है…..इनकी नींद उड़ रही है। बताते हैं, इसके लिए जोगी हाउस में एक पूरी टीम है, जो नए-नए आइडियाज सोचकर कार्टून और श्लोगन बना रहे हैं।

नाम का गफलत

सरकार के दो कारपोरेशन हैं-सीएसआईडीसी और सीआईडीसी। दोनों का नाम लगभग मिलता-जुलता है। सिर्फ एस का फर्क है। यही वजह है, हमेशा गफलत हो जाती है। 11 जुलाई को कुछ आईएएस के ट्रांफसर में रीतू सेन को सीआईडीसी का एमडी बनाया गया। मीडिया में चल गया सीएसआईडीसी के एमडी बदले। सुनील मिश्रा का पूरा दिन निकल गया लोगों को सीएसआईडीसी और सीआईडीसी का मतलब समझाने में….यह बताने में कि मेरा ट्रांसफर नहीं हुआ है।

बड़ा सवाल

डिप्टी कलेक्टर सुधाकर खलको और भरतलाल बंजारे ने हाईकोर्ट में लड़कर आईएएस अवार्ड की डीपीसी में अपना नाम शामिल करवा लिया। लेकिन, उनकी राह अभी भी आसान नहीं है। सीआर के बेस पर उनका नाम कट गया था। हाईकोर्ट ने डीओपीटी को खलको और बंजारे के नाम पर विचार करने कहा है। लेकिन, जब सीआर का सवाल है तो आखिर डीओपीटी कितना कंसीडर करेगा? बहरहाल, 10 पोस्ट के लिए 17 जुलाई को दिल्ली में डीपीसी बैठेगी। इसमें चीफ सिकरेट्री भी मौजूद रहेंगे। सीनियर होने के कारण सुधाकर खलको और भरतलाल बंजारे का नाम सबसे उपर है। उनके ंबाद हैं जितेंद्र शुक्ला, जन्मजय मोहबे, जेके ध्रुव, रिमुजियेस एक्का, तारणप्रकाश सिनहा, इफ्फत आरा, दिव्या मिश्रा, पुष्पा साहू। खलको और बंजारे का नाम कटने की स्थिति में संजय अग्रवाल और पीएस ध्रुव अंडर टेन में आ जाएंगे। संजय नौंवे नम्बर पर और ध्रुव दसवें पर। संजय को अगर आईएएस अवार्ड हो जाता है, तो 10 में से चार बिलासपुर संभाग के होंगे। जितेन्द्र शुक्ला और जन्मजय मोहबे बिलासपुर के हैं और दिव्या और संजय रायगढ़ और खरसिया के। और, कहीं खलको और का नम्बर लग गया तो संजय और ध्रुव को इंतजार करना पड़ेगा।

वोटों का गणित

पीएल पुनिया को कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने की एक वजह दलित वोट भी माना जा रहा है। कांग्रेस के एक शीर्ष नेता ने माना, पार्टी पुनिया के जरिये दलितों को साधने की कोशिश करेगी। दलित कभी कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक थे। लेकिन, पिछले दो चुनावों में दलित वोट छिटककर बीजेपी के पाले में चले गए। 2013 में तो सत्ताधारी बीजेपी 10 में से नौ सीटें जीतने में कामयाब हो गई। कांग्रेस को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था। अलबत्ता, पुनिया की नियुक्ति से पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की डिमांड भी पूरी हो गई। मई फर्स्ट वीक में राहुल गांधी से जब छत्तीसगढ़ के नेताओं से वन-टू-वन मुलाकात की थी उस समय बताते हैं, भूपेश ने हिन्दी बेल्ट के नेता को प्रभारी बनाने का आग्रह किया था। पुनिया यूपी के तो हैं ही, आईएएस भी रहे हैं।

स्मार्टनेस का राज

बस्तर आईजी विवेकानंद सिनहा शांत चित के अफसर माने जाते हैं…..चाकलेटी भी। तभी तो सरकार ने उनका जब बस्तर का आर्डर निकाला तो लोगों के मुंह से निकल गया था….ओह! सरकार ने बेचारे को कहां फंसा दिया। वही विवेकानंद बस्तर में इतने एक्टिव हो गए हैं कि पूछिए मत! मिलिट्री ड्रेस में बिल्कुल कमांडर टाईप….स्मार्ट भी। आए दिन एक-दो नक्सली भी ढेर हो रहे हैं। विवेकानंद में आए इस बदलाव के पीछे जगदलपुर पुलिस आफिसर मेस का नया जिम बताया जा रहा है। आईजी, डीआईजी, एसपी समेत जिले के बड़े अफसर रोज सुबह सात से नौ बजे आना अनिवार्य है। जिम में दो घंटे पसीना बहाने का ही नतीजा है कि विवेकानंद से लेकर डीआईजी सुंदरराज, एसपी शेख आरिफ ने पांच से लेकर आठ किलो तक वजन कम कर लिया है। दूसरा फायदा यह है कि जिम में ही आज क्या करना है, उसकी स्टे्ज्डी बना ली जाती है। याने जिम के साथ पोलिसिंग भी। व्हाट एन आइडिया……।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डीएफओ के ट्रांसफर के आठ दिन बाद सरकार को आर्डर क्यों बदलना पड़ गया? 
2. किस आईएएस के बारे में चर्चा है कि वे एक जुलाई को वीआरएस के लिए नोटिस देंगे, लेकिन उन्होंने पल्टी मार दी?

सोमवार, 10 जुलाई 2017

रेरा का पेड़ा


संजय दीक्षित
9 जुलाई
रेरा का पेड़ारेरा बोले तो रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी। बिल्डरों को कसने के लिए भारत सरकार ने इस एक्ट को बनाया है। छत्तीसगढ़ में भी एक अगस्त से इसकी फंक्शनिंग चालू हो जाएगी। लिहाजा, जुलाई अंत तक चेयरमैन और मेम्बर्स की पोस्टिंग करनी होगी। सरकार ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। हाईकोर्ट के सीजे के नामनी के रूप में जस्टिस प्रितिंकर दिवाकर, पीएस आवास और पर्यावरण अमन सिंह और सिकरेट्री लॉ आरएस शर्मा इसके सदस्य बनाए गए हैं। चेयरमैन के लिए कम-से-कम प्रिंसिपल सिकरेट्री से रिटायर हुए अफसर पात्र होंगे। इस पोस्ट या इसके उपर से रिटायर होने वाले छत्तीसगढ़ में तीन आईएएस हैं। डीएस मिश्रा, आरएस विश्वकर्मा और एनके असवाल। विश्वकर्मा चूकि पीएसी चेयरमैन रह चुके हैं, इसलिए कोई और पोस्ट अब होल्ड नहीं कर सकते। डीएस को पहले सरकार ने कुछ नहीं दिया तो रेरा जैसी पोस्टिंग में संदेह है। मई में रिटायर होने के बाद असवाल ने जरूर अपने बंगले का एक्सटेंशन चार महीने के लिए करा लिया है। आवदेन भी अभी दो ही आए हैं। डीएस और असवाल का। इन दोनों में से किसी का नहीं हुआ तो सरकार या तो बाहर से किसी को लाएगी या फिर हो सकता है, कोई आला नौकरशाह इस पोस्ट के लिए वीआरएस ले लें। बहरहाल, जब तक कोई फैसला नहीं हो जाता, रेरा का कौन खाएगा पेड़ा….अटकलें गर्म रहेंगी।

 रेरा इज अल्टीमेट

पोस्ट रिटायरमेंट वाले राज्य में जितने पद हैं, उनमें सर्वाधिक मलाईदार रेरा होगा। बिल्डर्स ही नहीं, बल्कि हाउसिंग बोर्ड, एनआरडीए, आरडीए जैसी सरकारी हाउसिंग संस्थाएं भी इसके अंतगर्त आएंगी। रेरा को बिल्डरों को अधिकतम तीन साल के लिए जेल भेजने का पावर होगा, वहीं खामियां मिलने पर प्रोजेक्ट का 10 फीसदी जुर्माना भी कर सकता है। याने 50 करोड़ के प्रोजेक्ट हैं, तो सीधे पांच करोड़। ऐसे में पांचों उंगलियां घी में रहेंगी। रुतबे का तो पूछिए मत! बड़े लेवल में पोस्ट रिटायरमेंट वाले अभी चार पोस्ट हैं। बिजली नियामक आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग, सूचना आयोग और पीएससी। पीएससी में एज 62 साल है, इसलिए ब्यूरोक्रेट्स उधर देखते नहीं। सूचना आयोग में आरटीआई वालों की गाली खाने के अलावा कोई काम नहीं है। राज्य निर्वाचन में कुछ धरा नहीं है। बिजली नियामक में साल में एक बार रेट तय करते समय पूछपरख होती है, उसके बाद वहां भी वही हाल है। प्रायवेट पावर कंपनियों की हालत खराब होने के बाद इस आयोग की भी हालत खराब ही समझिए। ऐसे में, रेरा इज अल्टीमेट।

सरकार को बद्-दुआएं

सरकार ने एक झटके में बैरियर और चेक पोस्ट बंद कर दिए। जरा भी खयाल नहीं किया, उससे राज्य के कितने लोगों की मौज कट रही थीं। बैरियरों से सरकार को हर महीने 85 से 90 करोड़ का रेवन्यू आता था। और करीब 45 से 50 करोड़ उपर से। एक नंबर वाले 85-90 करोड़ खजाने में चले जाते थे। और, उपर वाले…..बोरियों में भरकर लाए जाते थे। फिर, चार आदमी की ड्यूटी थी….तीन दिन बैठकर लिफाफे और थैले में पैक करों….इसके बाद लिस्टेड लोगों तक पहुंचाना। ट्रांसपोर्ट से उपकृत होने वालों में रसूखदार लोगों के अलावा पुलिस मुख्यालय, मंत्रालय के संबंधित आला अधिकारी, कलेक्टर, एसपी, आईजी, एडीएम, सीएसपी, पत्रकार, छुटभैया नेता शामिल थे। पांच तारीख तक ये लिफाफे घर पहुंच जाते थे, सो लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता था। कुछ लोगों का घर का खर्चा इसी से चलता था….शायद यही वजह थी कि ट्रांसपोर्ट की लिस्ट में शामिल करने के लिए बड़े लेवल पर जैक लगाए जाते थे। पता नहीं, सरकार के रणनीतिकारों को क्या हो गया है। चुनाव के समय लिफाफों का वजन बढ़ाना था तो तीन दशक से चले आ रहे सिस्टम को यकबयक बंद कर दिया। जिनके लिफाफे बंद होंगे, वो सरकार को आखिर बद्-दुआएं ही तो देंगे।

 एसपी की लिस्ट

डीएफओ की लंबी लिस्ट के बाद अब एसपी की बारी है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और राष्ट्रपति के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के छत्तीसगढ़ दौरे के बाद संकेत मिले हैं, एसपी की लिस्ट निकल जाएगी। कलेक्टर और डीएफओ की तरह एसपी की लिस्ट बड़ी नहीं होगी। एसपी की लिस्ट में कुछ अड़चनें थीं। एक कु-ख्यात एसपी ने बड़ा जैक लगा दिया था। और दूसरा, बीजापुर एसपी केएल ध्रुव और दंतेवाड़ा एसपी कमललोचन कश्यप के ढाई साल से अधिक हो गए हैं। सरकार उन्हें चेंज करना चाह रही है। लेकिन, बस्तर आईजी विवेकानंद ने इन दोनों के लिए सरकार से आग्रह किया है। दरअसल, विवेकानंद के ज्वाईन करने से पहिले ही सुकमा, बस्तर, कोंडागांव और नारायणपुर के एसपी बदल गए थे। दो ही एसपी पुराने हैं। वो भी हट गए तो आईजी के लिए स्वाभाविक रूप से दिक्कतें तो होगी ही।

 डिप्टी कलेक्टर्स भी

डिप्टी कलेक्टरों के लिस्ट भी लगभग तैयार है। सीएम से सिर्फ अंतिम चर्चा भर बाकी है। समझा जाता है, अगले हफ्ते डिप्टी कलेक्टरों के आदेश भी निकल जाएंगे। इनमें ज्यादतर वे होंगे, जिनका दो साल से अधिक हो गया है या चुनाव के लिए आचार संहिता प्रभावशील होने तक दो साल हो जाएगा।

आईपीएस के लिए बस्तर

अफसरों के लिए बस्तर वैसे ही स्वर्ग माना जाता है। शराब का सरकारीकरण और ट्रांसपोर्ट बैरियर बंद होने के बाद खास तौर से एसपी के लिए मैदानी जिले में अब कुछ बच नहीं गया है। एसपी जब तक हाथ-पांव नहीं चलाए, कुछ नहीं मिलने वाला। बस्तर में नक्सल के अलावा नेतागिरी वाला कोई प्रेशर नहीं है। दूसरा, गृह विभाग ने एसएस मनी भी बढ़ाकर हर महीने पांच-पांच लाख रुपए कर दिया है। बस्तर में कागजों में ढेरों काम होते हैं, वह अलग है। सो, शाही सुख-सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। एसपी के बंगले के इंटिरियर के लिए नागपुर और मुंबई से आदमी बुलाए जा रहे हैं। चलिए, ठीक है। बस्तर में पोस्टिंग का चार्म बढ़े….यह अच्छी बात है।

नो कमेंट्स

बात बस्तर की हो तो सुकमा डीएफओ राजेश चंदेले का नाम जेहन में बरबस आ जाता है। चंदेले ने बंगले में स्वीमिंग पुल बनाकर सुर्खियां बटोरी थी। आय से अधिक संपति के मामले में चंदेले के खिलाफ राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने भारत सरकार से चालान पेश करने की अनुमति मांगी है। इसके लिए रिमाइंडर भी भेजे जा रहे हैं। इस बीच सरकार ने कल उन्हें धमतरी जैसे समृद्ध डिविजन का डीएफओ बना दिया है…..तो फिर नो कमेंट्स।

रिटायर्स की भीड़

पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए नौकरशाहों की भीड़ बढ़ती जा रही है। पिछले साल मार्च में दिनेश श्रीवास्तव रिटायर हुए थे। इसके बाद डीएस मिश्रा, ठाकुर राम सिंह, बीएल तिवारी, राधाकृष्णन, एसएल रात्रे, एनके असवाल। असवाल तो पिछले महीने ही सेवामुक्त हुए हैं। बहरहाल, इनमें से सिर्फ ठाकुर राम सिंह किस्मती निकले। सरकार ने उन्हें राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद नवाज दिया। बाकि, बाट जोह रहे हैं। सितंबर में सिकरेट्री इरीगेशन गणेश शंकर मिश्रा भी रिटायर होंगे। आईपीएस में राजीव श्रीवास्तव और आईएफएस में बीके सिनहा भी क्यूं में हैं। हालांकि, पोस्ट तो कई खाली है। लेकिन, सरकार मुठ्ठी बांधकर रखी है। मुख्य सूचना आयुक्त का पोस्ट को खाली हुए करीब डेढ़ साल हो गए हैं। मानवाधिकार आयोग में भी वैकेंसी है। सूचना आयुक्त का भी एक पद खाली होने वाला है। पुलिस जवाबदेह प्राधिकरण में भी पोस्ट वैकेंट हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. ईओडब्लू के खिलाफ मोर्चा खोलने का इरीगेशन डिपार्टमेंट ने दुःसाहस क्यों किया?
2. अजीत जोगी की जाति पर फैसले को लोग अमित शाह के दौरे से जोड़कर क्यों देख रहे हैं?

मुलाकात के मायने


संजय दीक्षित 
2 जुलाई 2017
मुलाकात के मायनेसीबीआई डायरेक्टर आलोक कुमार वर्मा 22 जून को रायपुर में थे। उन्होंने ब्यूरो के स्टेट आफिस का इनॉग्रेशन किया। वर्मा से मिलने दुर्ग के एसपी अमरेश मिश्रा रायपुर आए थे। सीबीआई डायरेक्टर ने अमरेश से अकेले में 25 तक चर्चा की। अब देश की र्शीर्ष जांच एजेंसी का मुखिया किसी एसपी से अकेले में लंबी मुलाकात करें तो इस पर भला बतकही कैसे नहीं होगी। ब्यूरोक्रेसी में अपने-अपने हिसाब से अटकलें लगाई जा रही हैं। कोई कह रहा है वर्मा ने अमरेश से किसी अहम विषय पर फीडबैक लिया है। तो कोई कह रहा है अमरेश ने सीबीआई में डेपुटेशन पर जाने के संबंध में बात की हैं। लेकिन, ये दोनों ही नहीं है। अमरेश दिल्ली जाना भी चाहें तो सरकार छोड़ेगी नहीं। सूबे में अमरेश जैसे गिने-चुने एसपी हैं। तभी तो दुर्ग भेजा गया। दरअसल, सीबीआई डायरेक्टर बिहार के मुजफ्फरपुर से हैं। और अमरेश बक्सर के। जाहिर है, एक इलाके के होने के कारण दोनों के पुराने संबंध हैं। चलिये, इस चक्कर में अमरेश का ओहरा और बढ़ गया।

डिजिटल वर्क, नो डंप

मंत्रालय में अब डिजिटल वर्क होगा। याने नो नोटशीट…..नो फाइल। सारा काम कंप्यूटर, लेपटॉप या मोबाइल पर। अंडर सिकरेट्री से डिजिटल नोटशीट आगे बढ़ेगी, फिर सिकरेट्री से होते हुए चीफ सिकरेट्री तक जाएगी। मंत्रालय में इसकी तैयारी शुरू हो गई है। जीएडी ने मंत्रालय के अफसरों को जल्द-से-जल्द हिन्दी टायपिंग सीखने कहा है। डिजिटल वर्किंग का फायदा यह होगा कि अफसरों के टेबल पर फाइलों का अंबार नहीं लगेगा। अफसर घर पर हों, गाड़ी में रहें या दौरे में। टाईम मिलते ही मोबाइल पर फाइलों को क्लियर कर देंगे। मंत्रालय दूर होने के चलते आने-जाने में कम-से-कम एक घंटा लगता है। इस दौरान मोबाइल पर बात करने या झपकी लेने के अलावा और कोई चारा नहीं होता। अब इसका बखूबी उपयोग किया जा सकेगा। और, नुकसान यह है कि ब्यूरोक्रेट्स कुछ फाइलों पर चर्चा लिखकर उसे लटका देते थे। ये ऐसी फाइलें होतीं थीं, जिनसे या तो कोई नाराजगी होती हैं या फिर हिस्सा कम दे रहा होगा, तो वह बढ़ा देगा। अब ऐसा नहीं हो पाएगा। कोई-न-कोई कमेंट लिखकर फाइल को डिस्पोज्ड करना होगा। अलबत्ता, मंत्रालय के अफसर इसका तोड़ निकालने में जुट गए हैं। क्योंकि, फाइलें अगर लटकाई नहीं गई तो फिर इतना परिश्रम करके ब्यूरोक्रेट्स बनने का मतलब क्या। बहरहाल…..सिस्टम इम्पू्रव करने की ये कोशिश अच्छी है।

नाश्ते में पोहा, तो सावधान!

नाश्ते में अगर आप पोहा लेते हैं तो जरा रुकिए…..! घर वाली को बोलिये, झकझक सफेद पोहा खरीदने से बचें। क्योंकि, पोहा की सफेदी के लिए लेड मिलाया जा रहा है। और, ये हम नहीं कर रहे हैं। बल्कि पोहा मिल वाले खुद स्वीकार किया है। दरअसल, भाटापारा से पोहा मिल मालिकों का एक प्रतिनिधिमंडल एक मंत्री से मिलने रायपुर आया था। इत्तेफाक से इस कॉलम का लेखक भी वहीं मौजूद था। पोहा वालों ने मंत्रीजी को बुके दिया। फिर, शरमाते हुए बोले, हमलोगों ने लेड मिलाना बंद कर दिया है। पोहा वालों को अपने मुंह से यह सफाई क्यों देनी पड़ी, ये भी जानना आवश्यक है। पिछले साल भाटापारा के पोहा मिलों के खिलाफ लेड मिलाने की शिकायत पर मंत्रीजी ने कुछ पोहा मिलों को बंद करा दिया था। लिहाजा, वे मंत्रीजी को भरोसा देने आए थे। लेकिन, उनके भरोसे पर आप कितना एतबार करेंगे। वे तो धंधा कर रहे हैं। धंधा का एक ही वसूल होता है। अत्यधिक मुनाफा। लेड के सेवन से कैंसर हो सकता है, इससे पोहा मिलों को क्या वास्ता?

नया तरीका

राज्य के संपदा विभाग ने बड़े-बड़ों से बंगला खाली कराने के लिए नायाब तरीका निकाला है। मकान खाली कर पहले संपदा विभाग से एनओसी ले आइये, इसके बाद ही पेंशन आदि का मामला आगे बढ़ेगा। यही नहीं, पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए भी अगर अप्लाई करना है तो पहले संपदा विभाग का अनापत्ति देना होगा। इसका फायदा यह हुआ है कि रिटायर होने वाले नौकरशाह बंगला खाली करने में देर नहीं कर रहे। हाल के दिनों में एनके असवाल एक अपवाद होंगे, जिन्हें रिटायर होने के बाद चार महीने के लिए सरकारी आवास में रहने का एक्सटेंशन मिला है। इससे पहिले, संपदा विभाग ने असवाल का बंगला अंबलगन पी दंपति को एलाट कर दिया था। लेकिन, अंबलगन को अब अक्टूबर तक वेट करना होगा।

समयदानी और अपराधी

बीजेपी का एक कार्यक्रम जोर-शोर से चल रहा है। समयदानी। समयदानी मतलब फील्ड में समय देने वाले। बताते हैं, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह का ये कंसेप्ट है। ताकि, पार्टी को और सुदृढ़ किया जा सकें। लेकिन, इसमें खबर यह है कि समयदानियों में कुछ गड़बड़ टाईप के लोगों का भी चयन हो गया है। बात करते हैं, सरगुजा इलाके का। सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पीडीएफ में अफरातफरी करने वाले बीजेपी के नेता के खिलाफ पुलिस ने हाल ही में चार सौ बीसी का मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर भी आसानी से नहीं हुई है। कलेक्टर भीम सिंह ने निर्देश दिया था। महीने भर बाद किरण कौशल से कांप्लेन हुआ तो जाकर उन्होंने एसपी को बुलाकर पूछा तब जाकर अपराध दर्ज हो पाया। सत्ताधारी पार्टी को ऐसे लोगों की पहचान होनी चाहिए। वरना, जिस विधानसभा में उक्त नेताजी की ड्यूटी लगाई गई है, वहां वे किस बात की शिक्षा देंगे, समझा जा सकता है।

 रीना बाबा और जोगी

आईएएस रीना बाबा कंगाले की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी ने अजीत जोगी की जाति पर रिपोर्ट दे दी है। यह काम रीना बाबा ही कर सकती थी। लेडी आईएएस हैं। दलित भी। नागपुर से कनेक्शन भी। फिर भी जोगी कांग्रेस ने रीना पर अटैक किया है। रीना के अलावा कोई पुरूष आईएएएस जोगी के खिलाफ ऐतिहासिक रिपोर्ट देने का शायद हौसला नहीं जुटाता। एसीएस एनके असवाल को ट्राईबल से हटाकर जब उनसे 20 बैच जूनियर रीना को सिकरेट्री बनाया गया था, तो अंदेशा हो गया था कि कोई बात है।

मारवाही पर चर्चा

अजीत जोगी की जाति वाली रिपोर्ट अभी सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुई है। रिपोर्ट को स्टे करने के लिए जोगी शीर्ष अदालत में फरियाद करेंगे। सुको के फैसले के बाद ही इस पर अंतिम तौर से कुछ कहा जा सकेगा। मगर अभी से मारवाही उपचुनाव पर अटकलें शुरू हो गई हैं। एक राजनीतिक पार्टी ने तो कंडिडेट पर बात शुरू कर दी है। हालांकि, अभी इसे  उति उत्साह कहना चाहिए। तस्वीर तो सुको के रुख पर साफ होगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. जोगी की जाति वाली रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देने में पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने देर क्यों लगाई?
2. पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर का कांफिडेंस लेवल बढ़ता जा रहा है, इसकी वजह क्या है?