तरकश, 31 अगस्त, 2025
संजय के. दीक्षित
2500 करोड़ सैलरी और काम 15 दिन
छत्तीसगढ़ में जब से फाइव डे वीक शुरू हुआ है, छुट्टियों का बहार है। पिछले नौ दिन में सिर्फ दो दिन वर्क हुआ, सात दिन छुट्टी रही। 31 के इस अगस्त महीने में पांच-पांच सटर्डे और संडे पड़ गया। उसके बाद 15 अगस्त, तीज, गणेश चतुर्थी, नवा खाई जैसी कई सरकारी छुटियां। इसके आगे भी कोई महीना नहीं है, जिसमें 12 दिन से ज्यादा छुट्टी न पड़ रही हो। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा, जहां इतनी छुट्टियां...साउथ के राज्यों को छोड़ दें, बिहार, यूपी और ओड़िसा जैसे राज्यों में इतने सरकारी अवकाश नहीं होते। अब जरा सोचिए...कर्मचारियों और अधिकारियों की तनख्वाह पर हर महीने 2500 करोड़ खर्च हो रहा और काम आधा महीना भी नहीं। ऐसे में, छत्तीसगढ़ विकसित राज्य कैसे बन पाएगा। सिस्टम को इस विडंबना को दूर करने साहसिक फैसले लेने पड़ेंगे...तभी 2035 तक छत्तीसगढ़ विकसित राज्य बन पाएगा। वरना, विजन डाक्यूमेंट बनाने का फिर क्या मतलब?
ब्यूरोक्रेट्स और बाबू एक बराबर
छत्तीसगढ़ में स्थिति यह है कि अर्थहीन छुट्टियों में भी मंत्रालय और विभागाध्यक्ष भवन में कामकाज ठप्प पड़ जाता है। अर्थहीन का मतलब ये कि जिससे सभी वर्गों का ताल्लुकात न हो। अब भला हरेली और तीज से मंत्रालय के अधिकारियों का क्या वास्ता। वैसे भी बड़े लोगों के यहां तीज कोई करता नहीं...अब करवा चौथ का दौर है। बावजूद इसके तीज, हरेली, चेट्री चंड जैसी छुट्टियों में मंत्रालय बंद हो जाए तो सिस्टम को इसे देखना चाहिए...आखिर बाबू और ब्यूरोक्रेट्स में फर्क होता है कि नहीं! ब्यूरोक्रेट्स देश चलाते हैं...मगर ऐसे में राज्य कैसे चलेगा। आखिर, इसी छत्तीसगढ़ में 2018 तक छुट्टियों में भी बड़े अफसर मंत्रालय और ऑफिस पहुंचते थे...प्लानिंग से लेकर इंपार्टेंट काम छुट्टी के दिन होते थे। अलबत्ता, इस साल एक जनवरी की सीएम विष्णुदेव साय की बैठक के बाद मंत्रालय की वर्किंग सुधरी है। 70 परसेंट से अधिक अफसर अब टाईम पर आ रहे हैं। फिर भी यह ध्यान रखना होगा कि ब्यूरोक्रेट्स और बाबू में अंतर होता है।
हर्बल लाइफ, चेन और शेयर
छत्तीसगढ़ में छुट्टियों का साइड इफेक्ट ये हो रहा कि सरकारी मुलाजिम काम छोड़ आजकल शेयर, हर्बल लाइफ और चेन के बिजनेस में घुस गए हैं। नवा रायपुर के महानदी, इंद्रावती भवन समेत अधिकांश ऑफिसों में ऐसे अफसर मिल जाएंगे, जो 3 बजे तक इसलिए सीट पर बैठते हैं कि उसके बाद शेयर मार्केट खुला होता है। कुछ अधिकारियों की पूरी फेमिली चेन के कारोबार में लगी है तो ये बात छिपी नहीं कि पुलिस मुख्यालय के आईजी लेवल का एक अफसर इस बिजनेस में इंवाल्व रहे हैं। शिक्षकों में ऐसी बड़ी तादात है, जो स्कूलों में पढ़ाने-लिखाने से तोबा कर हर्बल लाइफ का चेन बना लोगों को मोटा-पतला बनाने का काम कर रहे हैं। ऐसे में, वर्किंग कल्चर की आप कल्पना कैसे कर सकते हैं।
कलेक्टर, एसपी की मौज-मस्ती
एक जमाना था, जब कलेक्टर, एसपी 24 घंटे काम करते थे। मगर छत्तीसगढ़ में छुट्टियों के बहार के दौर में छुट्टी से काफी पहले आजकल कलेक्टर, एसपी सैर-सपाटे का प्लान कर ले रहे हैं। फिर जीएडी में अर्जी के साथ बार-बार फोन...सर! फ्लाइट की टिकिट हो गई...। हालांकि, कलेक्टर-एसपी पहले से इस समय काफी ठीक है। फिर भी कसावट का मामला जरा ढीला है। जीएडी सिकरेट्री ने जनवरी में इन दोनों को कड़ा मैसेज भेजकर कई सारे प्वाइंट पर काम करने कहा था। मगर सब किसी-न-किसी से जुड़े हैं, तो फिर क्या किया जा सकता है। हाल में एक वीआईपी जिले में कलेक्टर, एसपी की कड़वाहट सतह पर आ गई। इसमें क्या हुआ? न होना था और न होगा। ऐसे में प्रशासन कैसे चलेगा? हाई लेवल पर देखना होगा कि प्रशासनिक कार्य में किसी तरह की दखलांदाजी नहीं होनी चाहिए। कलेक्टर, एसपी को भी छुट्टी मांगने से पहले सोचना चाहिए...कभी-कभी देवदूत की तरह जिले में काम करने का अवसर मिलता है। इसे सिर्फ मौज-मस्ती और पैसा कमाने में न गंवा दें।
विष्णुदेव को पॉलिटिकल माइलेज
सीएम विष्णुदेव का पहला विदेश दौरा कितना सफल रहा, जमीनी तौर पर इसे दिखने में थोड़ा वक्त लगेगा। मगर राजनीतिक दृष्टि से इससे उन्हें बड़ा माइलेज मिला है। छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी मुख्यमंत्री का विदेश यात्रा से लौटने पर एयरपोर्ट पर ऐसा स्वागत हुआ। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव से लेकर सारे मंत्री, निगम-मंडल के अध्यक्ष और पार्टी के बड़े नेता विमानतल पर मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के स्वागत के शो को देखकर सियासी पंडित भी चकित रह गए। जाहिर है, राजनीति में स्वागत और भीड़ से भी अपने संदेश निकलते हैं...एयरपोर्ट पर आतिशि स्वागत का मतलब यही होगा न...सीएम ने अपनी राजनीतिक पकड़ बेहद मजबूत कर ली है!
प्रमोटी आईएएस PSC चेयरमैन क्यों?
छत्तीसगढ़ सरकार ने पीएससी की मेंबर रीता शांडिल्य को अपग्रेड करते हुए चेयरमैन बना दिया है। मगर उनका कार्यकाल साल भर ही रहेगा। वे पिछले साल सितंबर में आईएएस से रिटायर हुईं थीं। और पीएससी में 62 वर्ष रिटायरमेंट है। इस लिहाज से उनका एक साल निकल गया है। अगले साल 30 सितंबर को वे रिटायर हो जाएंगी। याने नेक्स्ट ईयर जून-जुलाई से नए चेयरमैन की तलाश शुरू हो जाएगी। बता दें, 60 में रिटायर होने के बाद आईएएस अधिकारियों को पीएससी में सिर्फ दो साल मिलता है इसलिए कोई डायरेक्ट आईएएस अधिकारी पीएससी चेयरमैन नहीं बनना चाहते। उनकी नजर पांच साल वाली पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग पर रहती है। छत्तीसगढ़ में अभी तक कोई डायरेक्ट आईएएस पीएससी चेयरमैन नहीं बना है। डायरेक्ट आईपीएस श्रीमोहन शुक्ला और अशोक दरबारी जरूर चेयरमैन रहे। उनके अलावे आईएएस में स्टेट सर्विस से आईएएस वाले ही चेयरमैन बनें हैं। मसलन, बीएल ठाकुर, केआर पिस्दा, आरएस विश्वकर्मा, टामन सिंह सोनवानी और अब रीता शांडिल्य।
पोस्टिंग और भाग्य-1
दिसंबर 2023 में जब बीजेपी की नई सरकार बनी थी, तब एसीएस होम मनोज पिंगुआ का नाम सीएम सचिवालय के लिए खूब चला था। मगर बाद में ऐसा हो नहीं सका। इसके बाद नए चीफ सिकरेट्री के लिए के लिए उनका नाम लगभग फायनल हो गया था, सिर्फ आदेश की रस्मअदायगी बच गई थी। 30 जून को कैबिनेट की बैठक के बाद उनके नाम का आदेश निकलना था कि दिल्ली के हाई पावर जोन से फोन आ गया। फोन ऐसा था कि सरकार में बैठे लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर सके और अमिताभ जैन को तीन महीने का एक्सटेंशन देने का रास्ता निकालना पड़ा। अब 30 सितंबर को अमिताभ जैन को फिर से तीन महीने का एक्सटेंशन मिलेगा, यह भविष्य के गर्भ में है। निहितार्थ है कि सबसे बड़ी किस्मत होती है।
पोस्टिंग और भाग्य-2
सचिव स्तर के पिछले फेरबदल में सरकार ने सिकरेट्री अविनाश चंपावत से राजस्व लेकर रीना बाबा कंगाले को दे दिया। इसके बाद अविनाश के पास सिर्फ जीएडी बचा है, जो आज तक किसी सिकरेट्री के पास सिंगल चार्ज के तौर पर नहीं रहा। जीएडी हमेशा दूसरे विभागों के साथ पुछल्ला होता था। ब्यूरोक्रेसी में ये किसी को समझ में नहीं आ रहा कि ऐसा हुआ कैसे। दागी राप्रसे अधिकारी को आईएएस बनाने के लिए क्लीन चीट देने से अंबलगन ने मना किया तो उनसे जीएडी लिया गया था। मगर चंपावत ने वो सब कुछ कर दिया, फिर ऐसी बेदर्दी उनके साथ क्यों? अफसरों की संख्या बढ़ गई है, ये रीजन है या कोई और?
लोकप्रिय सीएम, संयोग और खतरे
एक नामी मीडिया समूह के सर्वे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को देश का दूसरे सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री चुना गया है। पहले नंबर पर असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा हैं। बात छत्तीसगढ़ के सीएम की तो लगता है...पिछले छह-आठ महीने में ई-ऑफिस से लेकर गवर्नेंस के फील्ड में रिफार्म किए गए, उसके संदेश अच्छे गए, तभी 41 परसेंट से अधिक लोग उन्हें पसंद किए। सर्वे के मुताबिक सुशासन तिहार का आम जनमानस पर बडा प्रभाव पड़ा। इसमें सीएम सचिवालय के निर्विवाद अधिकारियों की भूमिका भी अहम रही। खासकर, छत्तीसगढ़ जैसे स्टेट में कभी किसी ने कल्पना नहीं की थी कि यहां ऑनलाइन फाइलें चलेंगी। गुड गवर्नेंस की दिशा में यह प्रयास मील का पत्थर जैसा है। हालांकि, बीजेपी में इस बात पर चुटकी ली जा रही कि इससे पहले 2005 में भी इसी इंडिया टुडे-सी वोटर सर्वे में डॉ. रमन सिंह देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री बने थे। उसके बाद रमन ऐसे मजबूत होते चले गए कि 15 साल उन्हें कोई हिला नहीं पाया। कहीं वही संयोग दुहरा गया तो फिर कांग्रेस का लंबा वनवास होगा ही, बीजेपी के दीगर दावेदारों का स्कोप विष्णुदेव खतम कर देंगे।
अंत में दो सवाल आपसे?
1. मंत्री बनने में पुरंदर मिश्रा का कोई रिसोर्स काम नहीं आ पाया तो क्या चीफ सिकेरट्री में सुब्रत साहू की दावेदारी अब प्रबल हो जाएगी?
2. क्या ये सही है कि करप्शन पर काबू पाने सिस्टम को एक बार आंख मूंदकर तलवार भांजने की जरूरत है?
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