रविवार, 7 फ़रवरी 2016

डीएस लेंगे रिटायरमेंट?


tarkash photo

7 फरवरी


संजय दीक्षित
82 बैच के आईएएस एवं रेवन्यू बोर्ड के चेयरमैन डीएस मिश्रा 16 मार्च के पहले रिटायरमेंट ले सकते हैं। रिटायरमेंट लेेने का मतलब आप यह मत निकालियेगा कि सरकार से वे नराज-वराज हो गए होंगे। रिटायरमेंट लेंगे वे सूचना आयोग में ताजपोशी के लिए। असल में, मुख्य सूचना आयुक्त सरजियस मिंज 16 मार्च को रिटायर होंगे। जाहिर है, मुख्य सूचना आयुक्त का पोस्ट चीफ सिकरेट्री के समकक्ष है। सो, वे मिंज की जगह ले सकते हैं। इससे पहले, आपको याद होगा मुख्य सूचना आयुक्त बनने के लिए अशोक विजयवर्गीय ने चीफ सिकरेट्री के पद से चार महीने पहिले रिटायरमेंट ले लिया था। पीसी दलेई भी रिटायरमेंट से कुछ महीने पहले नौकरी छोड़कर राज्य निर्वाचन आयुक्त बन गए थे। इन केस, बजट सत्र में सरकार के व्यस्त रहने के कारण उनका आर्डर नहीं हो पाया तो फिर वे रुटीन में अप्रैल में रिटायर होंगे। तब तक सूचना आयोग का पोस्ट उनके लिए खाली रखा जाएगा।

जोगी अस्वस्थ्य

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सेहत ठीक नहीं बताई जा रही। 20 दिन से अधिक हो गए। ना तो वे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं और ना ही मीडिया से मिल रहे हैं। हालांकि, वे सागौन बंगले में ही हैं। लेकिन, मिलने की मनाही है। बताते हैं, अमित के निष्कासान के दौरान जोगीजी का आपरेशन हुआ था। तब भूपेश को ललकारने के लिए वे डाक्टर की सलाह को नजरअंदाज कर रणभूमि में उतर आए थे। पामगढ़ और अहिरवारा जैसे कई सामाजिक सम्मेलनों ने जोगी ने दहाड़ा था, मोर से बड़ कोन नेता हवे छत्तीसगढ़ में। लगातार दौरे से जोगीजी के आपरेशन के कुछ टांके टूट गए। इसलिए, डाक्टरों ने उन्हें कंप्लीट बेडरेस्ट की सलाह दी थी। यद्यपि, उनकी तबीयत में सुधार है। अब, वे चेयर पर बैठने लगे हैं। लेकिन, पहले जैसे सक्रिय होने में अभी कुछ वक्त लगेगा।

तलवारें खींचेंगी!

सिके्रट सर्विस मनी को लेकर पुलिस महकमे में तलवारें खींच सकती है। एसएस मनी अभी आठ करोड़ रुपए है। इनमें से करीब आधा हिस्सा नक्सल आपरेशन को जाता है और आधा खुफिया पुलिस को। पुलिस महकमा नक्सल आपरेशन के हिस्से में से डंडी मारने के चक्कर में था। इसके लिए नोटशीट भी चल गई है। तर्क दिया गया है कि नक्सल इंटेलिजेंस कोई खुफिया इनपुट तो देता नहीं तो उसे इतनी राशि क्यों दी जाए। मगर, गड़बड़ यह हो गया कि एंटी नक्सल में डीएम अवस्थी आ गए हैं। वो भी स्पेशल डीजी बनकर। सो, वे राशि कम तो होने नहीं देंगे। आरके विज के समय एक बार चल भी जाता। मगर अब इसको लेकर बात बिगड़ सकती है। हम आपको बता दें, कि इंटेलिजेंस में पोस्टिंग का सबसे अधिक क्रेज रहता है, वह है बेहिसाब पावर, एक्सपोजर और आठ करोड़ रुपिया। इस रुपिये का कोई आडिट नहीं होता। कोई पूछ भी नहीं सकता कि इन रुपयों का आपने क्या किया। मुखबिरों को बांटा या अपने पास रखा। न विधानसभा में सवाल का लफड़ा और ना ही ईओडब्लू में शिकायत का खतरा। बिल्कुल सेफ। ऐसे में तलवारें तो निकलेगी ही।

2009 बैच की कसमसाहट

यह पहली दफा होगा, जब किसी एक बैच के सारे आईएएस राजधानी में डंप हो गए हैं। हम बात कर रहे हैं 2009 बैच की। इस बैच में छह आईएएस हैं। इनमें से अवनीश शरण जिला पंचायत रायपुर में सीईओ हैं। बाकी पांच विभिन्न डायरेक्ट्रेट में। सौरव कुमार चिप्स, प्रियंका शुक्ला कौशल उन्नयन, समीर विश्नोई बीज विकास निगम, फैयाज तंबोली नेशनल हेल्थ मिशन, किरण कौशल महिला बाल विकास। सभी कलेक्टर बनने के लिए कसमसा रहे हैं। वार्मअप हो-होकर थक गए। सही भी है। दूसरे राज्यों में 2010 बैच को कलेक्टर बनने का मौका मिल गया है। मगर भारतीय रेलवे की तरह उनका बैच भी लेट होता जा रहा है। सरकार ने अब भरोसा दिया है, बजट स़त्र के जस्ट बाद लिस्ट निकल जाएगी। याने मार्च एंड या अप्रैल फस्र्ट वीक। लेकिन, संख्या अधिक है। सो, अधिकतम चार को ही मौका मिल पाएगा। दो को अक्टूबर, नवंबर तक इंतजार करना होगा। बहरहाल, अधिकांश को अपने कैरियर से अधिक अपनी पत्नी और बच्चों की चिंता सताने लगी है। दरअसल, राजधानी की चकाचैंध में पत्नी-बच्चों का मन रमने लगा है। सरकार ने कहीं दूर पटक दिया तो क्या होगा। लेकिन, उन्हें चिंता नहीं करनी चाहिए। जिले में लक्ष्मीजी बरसने लगेंगी तो घर की लक्ष्मीजी का मन वहीं रमने लगेगा।

सवा साल की कलेक्टरी

अभी जो कलेक्टर बनेंगे, वे मानकर चल रहे हैं कि उस जिले में उनकी कलेक्टरी सवा से डेढ़ साल तक ही रहेगी। उसकी वजह यह है कि विधानसभा चुनाव में करीब पौने तीन साल बचा है। अभी जो कलेक्टर पोस्ट होंगे, जाहिर है, वे चुनाव तक नहीं रह पाएंगे। चुनाव आयोग की तलवार उन पर लटक जाएगी। सो, आचार संहिता लगने से एक, सवा साल पहले सरकार अपने हिसाब से जिलों में कलेक्टरों को बिठाएगी। याने अगले साल जून, जुलाई में निश्चित तौर पर एक बड़ी लिस्ट निकलेगी।

प्रेशर टेक्नीक

आईएफएस अफसरों की प्रेशर टेक्नीक काम कर गई। नवंबर से अटका पीसीसीएफ का आर्डर शनिवार को जारी हो गया। वो भी तीनों का। जबकि, पोस्ट दो ही थी। नवंबर में पीसीसीएफ की डीपीसी हुई थी। लेकिन, किसी की जिद में आदेश नहीं निकल रहा था। आईएफएस इससे खासे नाराज थे। अफसरों ने इसको लेकर कुछ दिन पहले मीटिंग की। उसमें कुछ आईएएस के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठे थे। उमेश अग्रवाल और संजय अलंग का नाम प्रमुखता से था। लेकिन, सब जानते हैं, निशाना कहीं और था। आईएफएस ने नेतागिरी के लिए रणनीति के तहत कौशलेंद्र सिंह को आगे किया। मालूम है, कौशलेंद्र का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। और, यह टेक्नीक काम कर गई। एसीबी से रहम दिलाने के लिए आईएएस अफसरों को कमरेड स्टाईल में सीएम से मिलना पड़ा था। लेकिन, आईएएस का दम देखिए, मीडिया में खबर छपवाई कि वे सीएम से मिलकर अपनी बात रखेंगे और उनका काम हो गया।

250 करोड़ का खजाना

बीके सिनहा के पीसीसीएफ स्टेट फारेस्ट रिसर्च बनने के बाद वन विभाग का अहम विभाग कैम्पा खाली हो गया है। कैम्पा का बजट 250 करोड़ का है। नेताओं और अफसरों के अधिकांश बेगारी इसी फंड से होते हैं। सो, इस पोस्ट पर किसी विश्वस्त को ही उपर वाले बिठाना चाहेंगे। चर्चा है, लेबर सिकरेट्री जीतेन कुमार को कैम्पा का प्रमुख बनाया जाएगा। मगर आर्डर निकलने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा। वजह, बीके सिनहा को वाईल्डलाइफ के साथ कैम्पा का चार्ज देने के कवायद की गई, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया।

यंग्रीमैन मेयर, यंग्रीमैन सीएसपी

गुरूवार को रायपुर के मेयर प्रमोद दुबे और सीएसपी कोतवाली अंशुमन सिसोदिया के बीच जमकर तू-तूू, मैं-मैं हो गई। मेयर गुस्से में थे कि बीजेपी पार्षद उनके चेम्बर में कैसे घुस गए। इस बात को लेकर वे स्टूडेंट लीडर वाले अपने पुराने अंदाज में सीएसपी से भिड़ गए। बोले, वक्त आने दो, देख लूंगा। तो सिसोदिया का भी ठाकुर खून ठहरा। जवाब भी उसी अंदाज में दिया। लेकिन, गलती दोनों की थी। सिसोदिया को मेयर के बारे में पता होना चाहिए कि वे स्टूडेेंट पालिटिक्स से आए हैं। यूनिवर्सिटी प्रेसिडेेंट रहे हैं। वो भी ब्राम्हणपारा ब्रांड। सिसोदिया को घोखा हो गया, मेयर शहर के प्रथम व्यक्ति होते हैं। गरिमा-वरिमा का ध्यान तो रखबे करेंगे। उधर, जब यह एपीसोड हुआ, सिसोदिया के बगल में महिला सीएसपी अर्चना झा खड़ी थीं। मेयर को भी इसका ध्यान रखना था। बगल में महिला खड़ी हो और कोई डपट दें तो जिसको गुस्सा ना आता हो वो भी भड़क जाएगा। सीएसपी के भड़कने का कारण भी वाजिब ही माना जाएगा।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस नेता ने अपनी मस्तानी को लाल बत्ती दिलवा दी?
2. छत्तीसगढ़ राजस्व बोर्ड का अगला चेयरमैन कौन हो सकता है?

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