रविवार, 5 मई 2019

चुनाव बाद पोस्टिंग

5 मई 2019
आचार संहिता हटने के बाद कुछ जिलों के कलेक्टर, एसपी बदलेंगे तो मंत्रालय में सिकरेट्री की एक लिस्ट भी निकलेगी। ़प्रमुख सचिव ़़ऋचा शर्मा के डेपुटेशन पर दिल्ली जाने के बाद खाद्य विभाग में नई पोस्टिंग नहीं हुई है। शहला निगार भी छुट्टी से लौट आई हैं। उन्हें भी विभाग मिलेगा। 23 मई के बाद राज्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू भी मूल सेवा में लौटेंगे। सुब्रत प्रिंसिपल सिकरेट्री रैंक के अफसर हैं। दो-दो चुनाव कराकर लौट रहे हैं तो जाहिर है, उन्हें कोई महत्वपूर्ण पोस्टिंग ही मिलेगी। वैसे, उन्हें पीडब्लूडी मिलने की चर्चा ज्यादा है। पीडब्लूडी अभी एसीएस अमिताभ जैन के पास है। मार्कफेड संभाल रहे अम्बलगन पी को खाद्य विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है। उधर, सिकरेट्री राजभवन और सिकरेट्री हायर एजुकेशन सुरेंद्र जायसवाल इसी महीने रिटायर होने वाले हैं। सरकार को 31 मई को सिकरेट्री टू गवर्नर और सिकरेट्री हायर एजुकेशन भी अपाइंट करना होगा। ऐसे में, एक चेन बनेगा तो कुछ और विभागों के सिकरेट्री लिस्ट में शामिल हो जाएं तो अचरज नहीं।

रिटायरमेंट की कतार

इस साल रिटायर होने वाले आईएएस की लगता है, लाइन लग जाएगी….आईएएस ओमेगा टोप्पो मार्च और हीरालाल नायक अप्रैल में रिटायर हुए हैं। इस महीने 31 मई को सिकरेट्री हायर एजुकेशन और सिकरेट्री राजभवन सुरेंद्र जायसवाल सेवानिवृत्त होंगे। उनके बाद जुलाई में एमडी खादी बोर्ड आलोक अवस्थी, सितंबर में सिकरेट्री संसदीय कार्य एवं कृषि हेमंत पहाड़े, अक्टूबर में चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर और एसीएस केडीपी राव और नवंबर में सिकरेट्री एनके खाखा मंत्रालय से बिदा हो जाएंगे। याने एक साल में चीफ सिकरेट्री, एडिशनल चीफ सिकरेट्री समेत सात आईएएस का रिटायरमेंट। जाहिर है, मंत्रालय में एक बड़ा वैक्यूम आएगा। वैसे, स्टडी लीव पर यूएस गए मुकेश बंसल अगले महीने और सोनमणि बोरा जुलाई में लौटेंगे तो दो अफसर हो जाएंगे।

सुख-दुख के साथी

31 मई को एक साथ रिटायर होने वाले चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर और एसीएस केडीपी राव में एक समानता और है। दोनों का भाग्योदय एक साथ हुआ। सुनील कुजूर लंबे समय से हांसिये पर रहे। सपने में भी उन्होने कभी चीफ सिकरेट्री की कुर्सी नहीं देखी होगी। कमोबेश यही स्थिति केडीपी की रही। केडीपी ने भी लगभग मान लिया था कि अब राजस्व बोर्ड से उनकी बिदाई हो जाएगी। लेकिन, सरकार बदलते ही कुजूर की किस्मत ऐसी पलटी कि मंत्रालय की सबसे उंची कुर्सी पर विराजमान हो गए। तो केडीपी भी एसीएस एग्रीकल्चर एवं एपीसी बन गए। वैसे, दोनों अफसरों में पुराने मंत्रालय के समय से अच्छी बनती है।

68 सीटों का प्रभाव

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 68 सीटें मिलने के बाद छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं का वजन लगता है, कांग्रेस की राजनीति में बढ़ गया है। पहली बार पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र में प्रचार का जिम्मा छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं को सौंपा है। अमेठी में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रचार की कमान तो संभाली ही, मंत्री, विधायक से लेकर मेयर, पार्षद तक में अमेठी जाने की होड़ लग गई। कांग्रेस नेताओं के अमेठी में झोंकने के पीछे वजह यह है कि 2014 के चुनाव में राहुल गांधी की लीड कम हो गई थी। लिहाजा, अमेठी की लीड बढाने कांग्रेस कोई कसर नहीं रखना चाहती।

करे कोई, भरे कोई

पिछले दस साल में व्यापम ने अपनी क्रेडिबिलिटी बनाई, वह चिप्स की चूक से पूरी धूल गई। याद होगा, पीएमटी एग्जाम का दो-दो बार पर्चा आउट होने के बाद सरकार ने व्यापम की सर्जरी कर दी थी। दागी छबि के कंट्रोलर को हटाकर प्रदीप चौबे को बिठाया गया था। इसके बाद व्यापम ने विभिन्न विभागों में भरती के लिए दर्जनों परीक्षाएं ली, किसी में भी गड़बड़ी नहीं हुई। लेकिन, चिप्स के अफसरों ने व्यापम का नाम ही खराब नहीं किया बल्कि सीएम को भी दुखी कर दिया। सरकार को चिप्स को दुरुस्त करना चाहिए। क्योंकि, वहां कुछ अफसर प्रायवेट लिमिटेड की तरह चिप्स को चला रहे हैं।

एसआईटी पर ढिलाई

सीएम भूपेश बघेल लोकसभा चुनाव में क्या व्यस्त हुए, राज्य में जितनी भी एसआइटी गठित हुई है, सभी लगभग ठंडे बस्ते में चली गई हैं। संकेत हैं, चुनाव के बाद सीएम एसआइटी की समीक्षा करेंगे। इसके बाद शायद उसकी वर्किंग में रफ्तार आए। सरकार ने विभिन्न केसों में आधा दर्जन के करीब एसआइटी बनाई है।

अफसरों को राहत!

समाज कल्याण के डायरेक्टर रजत कुमार को छत्तीसगढ़ का जनगणना निदेशक बनाया गया है। इस जनगणना की पोस्टिंग ने पिछले साल से आईएएस अफसरों की नींद उड़ा रखी थी। इसके लिए पिछली सरकार ने भुवनेश यादव, यशवंत कुमार, अलेक्स पाल मेनन और अंकित आनंद का नाम भारत सरकार को भेजा था। भारत सरकार ने इसके लिए अंकित का नाम ओके कर आदेश जारी कर दिया था। अंकित का आदेश जब यहां आया तो हड़कंप मच गया। वे बिजली कंपनी के एमडी थे। लिहाजा, सरकार ने रिलीव करने से दो टूक इंकार कर दिया। अंकित की जगह पर किसी और अफसर की पोस्टिंग होती तब तक विधानसभा चुनाव आ गया। नई सरकार ने जनगणना निदेशक के लिए रजत कुमार का नाम भारत सरकार को भेजा और वहां से उनका नाम फायनल होकर भी आ गया। हालांकि, रजत के लिए राहत यह है कि यह उनकी एडिशनल पोस्टिंग होगी। यानी राज्य शासन में भी वे बनें रहेंगे। बहरहाल, इस पोस्टिंग के बाद कई अफसरों ने राहत की सांस ली है….चलो मैं तो बच गया।

पोस्टिंग का रास्ता

नान मामले में आईएएस अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई। समझा जाता है, सेम ग्राउंड पर डा0 आलोक शुक्ला को भी बेल मिल जाए। उनके भी बेल के कागजात तैयार हैं। हाईकोर्ट से चूकि अग्रिम जमानत मिल गई है, इसलिए समझा जाता है अब उनकी पोस्टिंग का रास्ता भी खुल जाएगा। दोनों 2015 से बिना विभाग के हैं। आलोक के रिटायरमेंट में एक साल बचा है तो टुटेजा के चार साल। आलोक 86 बैच के आईएएस हैं। यानी चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर के बैच के। वे अगर नान के लपेटे में नहीं आए होते तो हो सकता था आज वे किसी उंची कुर्सी पर होते। टुटेजा का आईएएस अलॉट होने से पहिले सब ठीक-ठाक रहा। आईएएस बनते ही एडिशनल कलेक्टर बनाकर कांकेर भेज दिया गया। वहां से बड़ी मुश्किल से वे रायपुर लौटे थे। नान में भी आठ महीने ही वे एमडी रहे। अब इसे समय का फेर ही कहें, वरना दोनों रिजल्ट देने वाले बड़े काबिल अफसर थे।

अंत में सवाल आपसे

 सीएम भूपेश बघेल ने बृजमोहन अग्रवाल को जन्मदिन पर बधाई देते हुए लिखा, ईश्वर उन्हें दुश्मनों से निबटने के लिए साहस दें। भूपेश का इशारा बृजमोहन के किस दुश्मन की ओर था?

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