शनिवार, 3 नवंबर 2012

तरकश, 4 नवंबर



वीरानी

12 बरस तक सत्ता का केंद्र रहा डीकेएस मंत्रालय भवन की रौनक अब खतम हो गई है। चहल-पहल भी ना के बराबर ही है। नई राजधानी में मंत्रालय 7 नवंबर से चालू होगा। सो,  मंत्रालय की सारी फाइलें दशहरा के पहले ही वहां भेजी जा चुकी है। बची हैं, तो कुर्सी, टेबल और आलमारियां। काम नहीं होने से अफसरों ने भी मंत्रालय आना लगभग बंद कर दिया है। सोमवार इसका आखिरी दिन होगा। क्योंकि, 6 नवंबर को पूरी सरकार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के प्रवास में व्यस्त रहेगी। और 7 को नए मंत्रालय में बैठकी प्रारंभ हो जाएगी। याद होगा, नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ बनने पर डीएस अस्पताल को रातोरात खाली कराकर मंत्रालय भवन बनाया गया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत थी, बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन से 10 मिनट का फासला। आम आदमी के लिए तो और भी सुभिता था, आटो का मात्र पांच रुपए किराया। और अब...?

सबसे बड़ा

नए मंत्रालय में सबसे बड़ा कक्ष मुख्यमंत्री के प्रींसिपल सिकरेट्री बैजेंद्र कुमार का होगा। ऐसा इसलिए हुआ है कि पांचवें और सबसे आखिरी फ्लोर पर मुख्यमंत्री के लिए जो चेम्बर बना था, वो वास्तु के हिसाब से मुफिद नहीं माना गया। इसलिए, ऐन वक्त पर कमरे की अदला-बदली हो गई। जो कक्ष बैजेंद्र कुमार के लिए अलाट हुआ था, उसे सीएम चेम्बर बना दिया गया और सीएम वाला बैजेंद्र्र कुमार को। आमतौर पर हाई अथारिटी का चेम्बर सबसे आखिरी में होता है। मगर अब, फिफ्थ फ्लोर पर जाने पर सबसे पहले सीएम का कक्ष होगा। इसके बाद अमन सिंह और फिर, बैजेंद्र कुमार का। उस दिशा में न लिफ्ट है और ना ही सीढ़ी। सो, सीएम जब सचिवालय में होंगे, बैजेंद्र कुमार और अमन सिंह से मिलना मुमकिन नहीं होगा। सीएम सिक्यूरिटी सामने से स्टाफ के अलावा किसी को जाने नहीं देगी। वैसे भी, सुरक्षा के हिसाब से ग्राउंड फ्लोर से एकमात्र लिफ्ट पांचवें फ्लोर पर जाएगी। जिसका सीएम और उनका स्टाफ इस्तेमाल करेगा। बाकी जनरल लिफ्ट चैथे फ्लोर तक रहेगी। वहां से सीएम सिकेटेरियेट जाने के लिए या तो लिफ्ट बदलना पड़ेगा या फिर सीढ़ी के जरिये जा सकते हैं।

अपने मंत्रीजी

शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रम में अड़ोस-पड़ोस के लोग भी ढंग का कपड़ा पहन लेते हैं। लेकिन जरा गौर कीजिए.....2 नवंबर को राज्य का पहला इंवेस्टर्स मीट था और उसमें हिस्सा लेने मुल्क के उद्योगपति न्यू रायपुर पहंुचे थे। मंच पर प्रथम पंक्ति में सीएम के बायी ओर सूटेड-बूटेड उद्योगपति बैठे थे और दायी ओर मंत्रीगण। समारोह स्थल पर अपने मंत्रीजी लोगों के वेश-भूषा की चर्चा होती रही। अधिकांश मंत्रियों का पहनावा ऐसा था, जैसे ब्लाक स्तर के किसी पंचायत सम्मेलन में शिरकत करने आए हों। सबसे वरिष्ठ मंत्री ननकीराम कंवर संघ की काली टोपी लगाकर पहंुचे थे, तो पंचायत मंत्री हेमचंद यादव को तो मत पूछिए। बिना इन किए पैंट शर्ट और उपर से बेमेल, शरीर को कसा हुआ जैकेट। सादगी का मतलब ये तो नहीं होता कि कुछ भी पहन लो। अब, मंत्रियों की कोई नाराजगी होगी और इस वजह से ऐसा किए होंगे तब तो कुछ नहीं कहना। फिर भी, राज्य की मान का खयाल तो करना ही चाहिए। आखिर वे ढाई करोड़ लोगों को प्रतिनिधित्व करते हैं। फिर नौ साल हो गया है। डे्रस कोड तो अब समझ जाना चाहिए।

पंडितजी

इंवेस्टर्स मीट के उद्घाटन समारोह में सीएसआईडीसी के चेयरमैन बद्रीधर दीवान को आभार ज्ञापित करने की एकमात्र जवाबदेही सौंपी गई थी। पंडितजी ने कुर्ते की जेब से पुरजा निकाला और धड़धड़ाते हुए सत्यनारायण भगवान की कथा की तरह वाच दिया। इस दौरान उन्होंने सुब्रत राय सहारा जैसे दर्जन भर उद्योगपतियों और राजदूतों को भी तहे दिल से धन्यवाद दे डाला, जो इंवेस्टर मीट में आए ही नहीं थे। अब, ऐसे में ठहाके तो लगने ही थे।

वक्त की बात

वक्त-वक्त की बात होती है......कुछ दिन पहले तक मंत्रालय के दो आला आईएएस अधिकारी एक-दूसरे की सूरत देखना नहीं चाहते थे। एक-दूसरे के प्रमोशन में, दोनों ने अपने हिसाब से खूब रोड़े अटकाएं। मगर देश में हुए कोयला घोटाला और उसकी सीबीआई जांच ने दोनों को अब नजदीक ला दिया है। संचेती बंधुओं को जो कोल ब्लाक आबंटित हुआ है, दोनों आईएएस उस कमेटी के मेम्बर थे। आशंका है, सीबीआई कभी भी दबिश दे सकती है। या और कुछ हो या न हो, दस्तावेज तो मंगा ही सकती है। अब, दोनों अफसर मिलकर सिर खपा रहे हैं, ऐसे में क्या करना होगा। सीबीआई को क्या दबाव देना चाहिए। चिंता लाजिमी है। जरा सी भी कमेंट आ गई, तो अजय सिंह और एनके असवाल सुनील कुमार की कुर्सी के स्वाभाविक दावेदार हो जाएंगे।

नाकाम

राजधानी का अपना रेस्ट हाउस बचाने की वन विभाग की तमाम कोशिश बेकार साबित हुई। सरकार ने दो टूक कह दिया, इस बारे में अब कोई बात नहीं होगी....आप कोई दूसरा भवन देख लीजिए। उसे राज्य मानवाधिकार आयोग के नए अध्यक्ष राजीव गुप्ता का आवास बनाने का आदेश एकाध दिन में जारी हो जाएगा़। लोकेशन के हिसाब से यह राजधानी का सबसे बढि़या रेस्ट हाउस होगा। इससे पहले, वन मंत्री गणेशराम भगत ने अपना आवास बना लिया था। भगत के पिछला चुनाव हारने पर वन विभाग ने राहत की सांस ली थी। रेस्ट हाउस को फर्नीश्ड करने पर साल भर में एक करोड़ रुपए खर्च किया गया था। और वन विभाग को यही अखर रहा है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. रायपुर में सिटी बसों के लोकार्पण के लिए नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल के साथ चर्चा कर महापौर किरणमयी नायक ने अतिथियों का नाम तय किया और कार्ड भी छपकर आ गए। इसके बाद वे कांग्रेस नेताओं की उपेक्षा की बात कर विरोध क्यों प्रारंभ कर दिया?
2. संस्कृति सचिव केडीपी राव की टीआरपी इन दिनों क्यों बढ़ गई है?

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