शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

नौकरशाहों से CM मांगे रिजल्ट

16 फरवरी 2020
सीएम भूपेश बघेल और सीएस आरपी मंडल अमेरिका में हैं तो ऐसा नहीं है कि यहां अफसरों के मजे होंगे। बल्कि, इस समय वे ज्यादा टेंशन में हैं। टेंशन की वजह है सीएम के 33 प्वाइंट्स। सेन फ्रांसिस्को की फ्लाइट पकड़ने से पहिले सीएम ने मंत्रालय के सिकरेट्रीज समेत कलेक्टरों से बिंदुवार 33 योजनाओं की प्रगति की रिपोर्ट मांगी है। छह लाइन के लेटर में सीएम ने लिखा है, हर हाल में 20 फरवरी की शाम तक सीएम सचिवालय में रिपोर्ट्स पहुंच जानी चाहिए। लेटर की भाषा से लगता है, रिजल्ट न देने वाले अफसरों की खैर नहीं। पता चला है, अमेरिका से लौटते ही मुख्यमंत्री रिव्यू शुरू कर देंगे। विधानसभा की कार्यवाहियों के दौरान भी विभाग वार समीक्षाएं चलेगी। बजट सत्र के बाद कलेक्टरों के ट्रांसफर में भी ये 33 प्वांट्स प्रमुख पैरामीटर होंगे। दरअसल, विधानसभा का बजट सत्र खतम-खतम होते सरकार का लगभग डेढ़ साल पूरा हो जाएगा। इसके बाद काम करने के लिए बचेंगे सिर्फ ढाई साल। जाहिर है, पांचवे साल में कोई काम होता नहीं। सरकार चुनावी मोड में आ जाती है। इसलिए, सरकार अब ट्वेंटी-20 के मोड में बैटिंग करना चाहती है। बहरहाल, सीएम जब अफसरों से रिजल्ट मांगेंगे तो उसका खौफ सिर चढ़कर बोलेगा ही। अफसर घबराए हुए हैं।

प्रसन्ना की प्रसन्नता

2004 बैच के आईएएस आर प्रसन्ना को सरकार ने लंबे समय तक लगभग बिना विभाग के रखा। लगभग बिना विभाग मतलब पुछल्ला सा विभाग, जिसका कोई वजूद न हो…सिर्फ नाम का। हालांकि, पिछले महीने के एंड में आईएएस के ट्रांसफर में सरकार ने उन्हें मेन स्ट्रीम में लाकर समाज कल्याण विभाग का सचिव बनाया। लेकिन, वे काम शुरू कर पाते कि उससे पहले एनजीओ घोटाले की सीबीआई जांच का ऐलान हो गया। मतबल गड़बड़झाला किया कोई और, जवाब प्रसन्ना दें। लगता है, प्रसन्ना की प्रसन्नता की किसी की नजर लग गई है।

दाउजी बन गिस साहब

आमतौर पर कुर्ता, पायजामा, जैकेट और पटका में दिखने वाले सीएम भूपेश बघेल इन दिनों अमेरिका में हैं। यूएस में टेम्परेचर इन दिनों माईनस में चल रहा। ऐसे में कुर्ता, पायजामा भला कहां काम आने वाला। इसलिए, कई मौकों पर उन्होंने वहां सूट भी पहनी। उनमें से कोट और टाई वाली फोटो खूब वायरल हो रही है। सोशल मीडिया में इस पर लोगों के दिलचस्प कमेंट्स आ रहे…कई फॉलोवर्स ने लिखा…अपन दाउजी अब साहब बन गिस।

विवाद का पटाक्षेप?

राजधानी के भवन और हाउस के बीच उपजे विवाद का अब लगता है पटाक्षेप हो जाएगा। पता चला है, कुशाभाउ पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नए कुलपति के लिए नाम पर सहमति बन गई है। जो बीच का रास्ता निकला है, उसके अनुसार अब न जगदीश उपासने कुलपति बनेंगे और न ही दिल्ली के पत्रकार उर्मिलेश। उनके अलावा चार नाम और हैं पेनल में। इनमें से बलदेव शर्मा एक खास विचारधारा के माने जाते हैं। इसलिए, उनके नाम पर सहमति बनना संभव नहीं है। लिहाजा, मुकेश कुमार, लव कुमार मिश्रा या आशुतोष मिश्र में से किसी नाम का जल्द ऐलान हो जाए, तो अचरज नहीं।

केजरीवाल मॉडल-1

दिल्ली में केजरीवाल की पार्टी की धमाकेदार जीत से पहले छत्तीसगढ़ सरकार उनके मॉडल पर काम चालू कर दिया है। केजरीवाल की तरह भूपेश सरकार ने भी आम आदमी को टच करने वाले हेल्थ और स्कूल एजुकेशन पर अपना फोकस बढ़ाया है। आदिवासी इलाकों में सरकार का हॉट बाजार क्लीनिक हिट हो रहा है। दंतेवाड़ा और बीजापुर के उपचुनाव में इसका असर दिखा भी। अब शहरों में शहरी स्लम स्वास्थ्य केंद्र प्रारंभ करने की तैयारी है। इस बजट में इसका ऐलान हो जाएगा। स्लम स्वास्थ्य केंद्र सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की तरह नहीं होगा, जिसमें डाक्टर ही नहीं होते। इसे आउटसोर्स करने पर विचार किया जा रहा है ताकि, हंड्रेड परसेंट रिजल्ट मिले। सीएम के रणनीतिकारों का मानना है, सूबे के ऐसे वर्ग इस योजना से लाभान्वित होंगे, जो महंगे प्रायवेट अस्पतालों में नहीं जा पाते। उन्हें अपने मुहल्ले में पैथोलॉजी के जनरल टेस्ट के साथ ही डाक्टरों का परामर्श के साथ ही मुफ्त में दवाइयां मिल जाएंगी। वास्तव में, सरकार का ये बड़ा काम होगा।

केजरीवाल मॉडल-2

केजरीवाल के मॉडल नम्बर दो को अंजाम तक पहुंचाने का जिम्मा सीएम भूपेश बघेल ने प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डा0 आलोक शुक्ला को दिया है। रिजल्ट देने वाले आईएएस माने जाने वाले शुक्ला ने इस पर काम शुरू कर दिया है। इसी सत्र से राजधानी के दानी, सप्रे और आरडी पाण्डेय स्कूल में पहली से बारहवीं तक अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई चालू हो जाएगी। सरकार ने इन स्कूलों में अंग्रेजी टीचरों की भरती में फ्री हैंड दे दिया है। सीएम ने कहा है कि क्वालिटी में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। अंग्रेजी टीचरों की भर्ती में नो एप्रोच…हमारी भी नहीं सुनना। गरीबों के बच्चों के लिए जिलों में एक-एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल एक ट्रेलर है, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा को सुधारने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट पर काम कर रहे, इनमें से कई का असर आगामी सत्र से दिखने लगेगा। दरअसल, सरकार को भी मालूम है कि चावल, गेहूं, बोनस और समर्थन मूल्य कार्ड बार-बार नहीं चल सकता। ठोस काम करना ही होगा।

पोस्टिंग पर सस्पेंस

छत्तीसगढ़ के सबसे सीनियर आईएएस और राज्य योजना आयोग के वाइस चेयरमैन अजय सिंह 28 फरवरी को रिटायर हो जाएंगे। उनकी सेवानिवृत्ति के दिन जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, ब्यूरोक्रेसी में उत्सुकता बढती जा रही है कि अजय सिंह को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिलेगी या नहीं। यद्यपि, 31 अक्टूबर 2019 को बिलासपुर राजस्व बोर्ड चेयरमैन से उन्हें राज्य योजना आयोग का वाइस चेयरमैन बनाया गया था, तब लोग मानकर चल रहे थे कि फरवरी में रिटायरमेंट के बाद सरकार उन्हें योजना आयोग में संविदा पर उसी पद पर कंटीन्यू कर देगी। किन्तु, छत्तीसगढ़ में मौसम और अफसरों की पोस्टिंग का कोई भरोसा नहीं। देख ही रहे हैं….फरवरी में झमाझम बारिश हो जा रही है…..परफारमेंस ठीक न होने पर महीने भर में अफसरों की छुट्टी भी। अजय सिंह चीफ सिकरेट्री रहने के दौरान विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान होने से दो रोज पहिले समाज कल्याण घोटाले की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा कर आए थे। इसका खुलासा अभी हुआ है। पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग को लेकर अचानक जो संशय उपजा है, उसके पीछे समाज कल्याण विभाग की जांच रिपोर्ट भी हो सकती है।

शराब और दूरसंचार अधिकारी

शराब दुकानों के अगल-बगल बिकने वाले चखना केंद्रों को आबकरी विभाग सिस्टमेटिक करने जा रहा है। अब एक शराब दुकान, एक चखना बिक्री केंद्र होगा। इसके लिए ऑनलाइन टेंडर करने की तैयारी की जा रही है। चखना केंद्र के लिए ऑनलाइन टेंडर करने वाला छत्तीसगढ़ संभवतः देश का पहला राज्य होगा। असल में, आबकारी महकमे में एक टेलीफोन अधिकारी डेपुटेशन पर एमडी बन गए हैं। चल उनकी खूब रही है। ऐसे में, सरकार को देखना चाहिए दूरसंचार अधिकारी कुछ और चीजों को भी ऑनलाइन न करने की योजना न बना दें।

बियर प्रेमियों को सौगात

मई, जून की भीषण गरमी में चिल्ड बियर के लिए बियर प्रेमियों को काफी पापड़ बेलने पड़ते हैं। दुकानों में कभी स्टॉक खतम हो जाता है तो कभी मिला भी तो गरम। मगर अब बियर प्रेमियों के लिए गुड न्यूज है…सूबे में अब बियर की किल्लत नहीं होगी। आबकारी महकमा राज्य में तीन बियर फैक्ट्री खोलने की तैयारी कर रहा है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. रायपुर जिले के एक विधायक का नाम बताइये, जो आरगेनाइज ढंग से वसूली के लिए चर्चित होते जा रहे हैं?
2. राजधानी के एक नेता का नाम बताइये, जो नया रायपुर रोड के मुहाने पर छेड़ीखेरी में एक शादी महल को 150 करोड़ में खरीदे हैं?

रविवार, 9 फ़रवरी 2020

आईएएस, सीबीआई और ईडी

9 फरवरी 2020
एनजीओ घोटाले में सीबीआई ने भले ही अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है लेकिन, कई नौकरशाहों की रात की नींद उड़ गई है। दरअसल, जिन अफसरों का सीधे इस मामले में नाम नहीं, उन्होंने भी बहती गंगा में डूबकी लगाने में कोई संकोच नहीं किया। समाज कल्याण विभाग के दस्तावेज इसकी चुगली करते हैं….कुछ नौकरशाहों के परिजनों के एनजीओ को इस संस्था से किस तरह बड़ी राशि ट्रांसफर की गई। परकाष्ठा तो यह भी है, समाज कल्याण के अधिकारियों ने नौकरशाहों के निजी खरीदी, निजी यात्राओं का भुगतान सरकारी खाते से कर दिया। फाइलों में अफसर के नाम के साथ बकायदा इसका उल्लेख है। एक सिकरेट्री ने समाज कल्याण के एक अफसर की पत्नी के एकाउंट में सवा दो करोड़ रुपए जमा करवाया। बाद में इसमें से विभिन्न लोगों को एमाउंट आरटीजीएस कराए गए। जाहिर है, सीबीआई तो पूछेगी ही कि हाउस वाइफ के खाते में सवा दो करोड़ रुपए आए कहां से….और, किसी आईएएस ने कराया तो उनका नाम क्या है। कोई आश्चर्य नहीं कि सीबीआई के साथ इस मामले में ईडी की भी इंट्री हो जाए। क्योंकि, इसमें व्यापक स्तर पर मनी लॉड्रिंग होने का भी अंदेशा है। ऐसे में, चिंता समझी जा सकती है।

दो दोस्त, एक विभाग

आईएएस सोनमणि बोरा और आईपीएस राहुल भगत दोनों अच्छे दोस्त हैं। दोनों दिल्ली में एक साथ, एक ही हॉस्टल में पढ़ाई किए हैं। बोरा यूपीएससी पहले क्रेक कर लिए और राहुल बाद में। हालांकि, दोनों को कैडर सेम मिला… छत्तीसगढ़। और, अब संयोग यह हुआ है कि दोनों श्रम विभाग में हैं। राहुल भारत सरकार में डायरेक्टर लेबर हैं तो सोनमणि को हाल ही में छत्तीसगढ़ में सिकरेट्री लेबर बनाया गया है। चलिये, उम्मीद करते हैं, दोनों के संबंधों का लाभ राज्य को मिलेगा। बोरा छत्तीसग़ढ़ को एक मेडिकल कालेज ही दिलवा दें। देश के करीब डेढ़ दर्जन राज्यों में लेबर विभाग का एक-एक मेडिकल कालेज संचालित है। लेकिन, छत्तीसगढ़ अभी तक इससे वंचित है।

डीपीसी में रोड़ा

डीजी के प्रमोशन में अड़चन यह है कि राज्य सरकार खाली तीनों पदों पर एक साथ प्रमोशन करना चाहती है और भारत सरकार इसके लिए राजी नहीं। इसका नतीजा यह है कि सूबे में पिछले तीन महीने से सिर्फ एक डीजी बच गए हैं। जबकि, कायदे से चार होना चाहिए। वैसे, डीजी के दो पदों के लिए सहमति 11 दिसंबर को आ गई थी। लेकिन, राज्य सरकार चाहती है, डीजी जेल बीके सिंह के रिटायर होने के बाद खाली पद पर भी एक साथ डीपीसी हो जाए। सीनियरिटी में पहले नम्बर पर संजय पिल्ले और दूसरे नम्बर पर आरके विज हैं। इनके लिए कोई दिक्कत नहीं है। पेंच तीसरे पद को लेकर फंसा है। तीसरे पद के लिए एडीजी अशोक जुनेजा दावेदार हैं। सरकार ने जुनेजा के लिए भारत सरकार से सहमति मांगी थी। लेकिन, मिनिस्ट्री ऑफ होम ने मना कर दिया। वहां के अफसरों का मानना है कि मुकेश गुप्ता सस्पेंड हैं रिटायर नहीं। इसलिए, उस पद पर किसी और को प्रमोशन कैसे दिया जा सकता है। लेकिन, पता चला है, राज्य की दलीलें सुनने के बाद केंद्र अब तीसरे पद के लिए तैयार हो गया है। लिहाजा, केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुमति मिलते ही डीपीसी हो जाएगी। समझा जाता है, डीजी के डीपीसी के साथ ही एसपी, डीआईजी और आईजी का प्रमोशन आदेश निकलेगा।

बजट सत्र के बाद

कलेक्टरों का ट्रांसफर अब विधानसभा के बजट सत्र के बाद ही होगा। सीएम और सीएस दो दिन बाद विदेश दौरे पर जा रहे हैं। वहां से 21 फरवरी को इंडिया लौटेंगे। इसके दो दिन बाद 24 से बजट सत्र प्रारंभ हो जाएगा। सत्र वैसे तो एक अप्रैल तक है। लेकिन, राज्य बनने के बाद कभी भी बजट सत्र कंप्लीट नहीं हुआ है। विभागों का बजट स्वीकृत होने के बाद कोई सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष के नेताओं को खामोख्वाह नेतागिरी करने का मौका दिया जाए। पिछले अनुभवों को देखते मान सकते हैं कि 20 मार्च तक सेशन एंड हो जाए। याने मार्च के लास्ट वीक में कलेक्टरों की लिस्ट निकल जाएगी।

टीम भूपेश

सीएम भूपेश बघेल अफसरों के साथ अपने पहले विदेश दौरे पर 10 फरवरी को सुबह दिल्ली रवाना होंगे और वहां से उसी दिन देर रात यूएस की फ्लाइट पकड़ेंगे। 10 दिन में टीम सीएम हार्वर्ड के साथ ही न्यूयार्क और सेन फ्रांसिस्को जाएगी। खासकर वहां एग्रीकल्चर बेस इंडस्ट्री की संभावना टटोलेगी जाएगी। उनके साथ सीएस आरपी मंडल, एसीएस होम सुब्रत साहू, पीएस टू सीएम गौरव द्विवेदी, सीएम के सलाहकार प्रदीप शर्मा, सीएसआईडीसी के एमडी अरुण कुमार शामिल होंगे। टीएम भूपेश 21 फरवरी की सुबह दिल्ली लौटेगी।

मंत्री का विदेश प्रवास ब्रेक

नगरीय प्रशासन मंत्री बनने के बाद शिव डहरिया हाल ही में पहली बार विदेश गए थे। लेकिन, नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की घमाकेदार जीत के बाद सीएम के साथ मंत्रियों का पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलने का प्रोग्राम बन गया। नगरीय प्रशासन मंत्री के लिए यह बड़ा मौका था। जीत की शिल्पी सीएम तो थे ही लेकिन, विभाग डहरिया का है। सीएम भी इसके लिए कई बार नगरीय प्रशासन विभाग को एप्रीसियेट कर चुके हैं। ऐसे में, बुद्धिमानी का काम करते हुए डहरिया विदेश यात्रा बीच में ब्रेक कर तीन दिन पहले ही स्वीडन से दिल्ली लौट आए।

दीपांशु का रिकार्ड

97 बैच के आईजी दीपांशु काबरा को सरकार ने बिलासपुर का आईजी बनाया है। जनवरी 2019 में रायपुर आईजी से हटने के बाद से दीपांशु खाली बैठे थे। सरकार की पता नहीं क्या नाराजगी रही कि उन्हें कोई विभाग नहीं दिया। और, दिया तो ऐसा कि लोग आवाक रह गए! छत्तीसगढ़ के पांचों रेंज में बिलासपुर सबसे अहम पुलिस रेंज माना जाता है। कोरबा, रायगढ़, जांजगीर बिलासपुर में आते हैं। उपर से प्रोटोकॉल का कोई टेंशन नहीं। रायपुर आईजी का आधा समय तो इसी में जाता है। दीपांशु की पोस्टिंग में खास यह भी है कि वे सूबे के पहले आईपीएस बन गए हैं, जिन्हें दूसरी बार उस रेंज में मौका दिया गया है, जिसमें वे आईजी रह चुके हैं। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। कलेक्टर में एक बार सुबोध सिंह को दूसरी बार रायपुर का कलेक्टर बनने का अवसर मिला था। लेकिन, एसपी, आईजी में ऐसा कभी नहीं हुआ। दीपांशु रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा के आईजी रह चुके हैं। आईजी के रूप में बिलासपुर में उनका पांचवा रेंज होगा। यह रिकार्ड देश के शायद किसी भी आईजी के पास नहीं होगा।

कलेक्टरों को सीएस की पाती

चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल ने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत बच्चों और महिलाओं को गर्म भोजन मुहैया कराने के मामले में कलेक्टरों को पत्र लिखा है। इसमें से नारायणपुर कलेक्टर पीएम एल्मा का पत्र कहीं से वायरल हो गया। पत्र की भाषा से स्पष्ट है, सीएस सुपोषण अभियान में कलेक्टरों की दिलचस्पी न लेने से काफी नाराज हैं। पता चला है, सीएस की चेतावनी मिलने के बाद कलेक्टर्स सुपोषण अभियान को लेकर अचानक संजीदा हो गए हैं। जाहिर है, डर तो होगा ही….सत्र के बाद होने वाले फेरबदल में कहीं कुर्सी न खिसक जाए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. क्या बजट सत्र के बाद भूपेश बघेल मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हो सकता है?
2. बिलासपुर कलेक्टर डा0 संजय अलंग सिकरेट्री बनने के बाद रायपुर लौटेंगे या कलेक्टर में ही कंटीन्यू करेंगे?

आईएएस और मनी लॉंड्रिंग

2 फरवरी 2020
दिव्यांगों के नाम पर गड़बड़झाले की अगर सीबीआई जांच हुई तो उसकी लपटें कुछ और आईएएस अफसरों को झुलसा देगी। एक सिकरेट्री के खिलाफ तो मनी लॉंड्रिंग का एक अलग मामला बन जाएगा। दरअसल, जिन अफसरों के खिलाफ हाईकोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है, उनमें नीचे के एक अफसर ऐसे भी हैं, जिनके एकाउंट से मंत्रालय के एक सिकरेट्री साब ने मोटी रकम बाहर भिजवाई है। इनमें दो किश्तों में भेजी गई 65 लाख रुपए भी शामिल है। इस राशि को दो अलग-अलग एकाउंट से पुणे भेजा गया। सिकरेट्री ने अफसर की पत्नी के खाते से इसे आरटीजीएस कराया। राज्य सरकार की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के अधिकारियों ने इस रकम के बारे में जब सवाल किया तो आरोपी अफसर ने कलमबंद बयान में बताया, फलां सिकरेट्री का बेटा पुणे में पढ़ाई कर रहा था, साहब ने वाइफ के एकाउंट में पैसा जमा कराया फिर आरटीजीएस करवाया। एजेंसी के पास रिकार्डेड बयान है और अरोपी अफसर के हाउस वाइफ के खातों का पूरा डिटेल भी। इसके बाद भी जांच एजेंसी ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जांच एजेंसी के अफसर अगर बयान को इधर-उधर कर दिए होंगे तो सीबीआई को कार्रवाई के लिए जाहिर है बैंक एकाउंट काफी होगा।

दिव्यांगों के पैसे से शादी

समाज कल्याण विभाग एक तरह से कहें तो अफसरों के लिए चारागाह बन गया था। राज्य सरकार भले ही इस विभाग को ज्यादा बजट नहीं मिलता। मगर भारत सरकार से भरपूर ग्रांट मिला। एक जांच अधिकारी ने समाज कल्याण के एक अफसर से पूछा कि आपलोगों ने इस तरह नियम-कायदों को ताक पर क्यों रख दिया, अफसर ने बताया क्या बताए साब…उपर वालों का पूरा खर्चा उठाना पड़ता था। समाज कल्याण विभाग से जुड़े एक नौकरशाह की बेटी की शादी में 80 लाख का पेमेंट विभाग के अफसरों ने किया था। ऐसे ढेरों उदाहरण हैं, जो बताता है दिव्यांगों के पैसों को हजम कर अफसरों ने किस तरह देश में छत्तीसगढ़ को बदनाम किया।

आईजी और कमिश्नर की पोस्टिंग

दुर्ग के कमिश्नर दिलीप वासनीकर और सरगुजा के आईजी केसी अग्रवाल 31 जनवरी को रिटायर हो गए। उनकी जगह पर अभी किसी नए अधिकारी की पोस्टिंग नहीं हुई है। समझा जाता है, मुख्यमंत्री दिल्ली के दौरे पर हैं। कल रायपुर लौटने पर शाम तक नए कमिश्नर और आईजी के नाम का ऐलान हो जाए। कमिश्नरों का पावर समेट देने के कारण इस पोस्ट का हालांकि क्रेज नहीं है लेकिन सरगुजा आईजी को लेकर कश्मकश चल रहा। अभी तक दो ही दावेदार थे। रतनलाल डांगी और ओपी पाल। अब इसमें दो नाम और जुड़ गए हैं। डीआईजी आरपी साय और टीएस पैकरा का। साय सरगुजा में बटालियन के कमांडेंट हैं। और, पैकरा एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर। एटीसी भी वैसे छोटा पोस्ट नहीं है फिर भी कोयला नगरी में आईजी का भी अपना अलग अहमियत है। अब देखना है, कल सरकार किसके नाम पर मुहर लगाती है।

कलेक्टरों की छोटी लिस्ट?

छह फरवरी को पंचायत चुनाव की आचार संहिता समाप्त हो जाएगी। इसके बाद सरकार के सामने कलेक्टरों के बहुप्रतिक्षित ट्रांसफर को लेकर कोई रोड़ा नहीं रहेगा। सीएम भूपेश बघेल 11 फरवरी को विदेश दौरे पर जा रहे हैं। जाहिर है, सात से 11 के बीच किसी भी दिन लिस्ट निकल सकती है। हालांकि, इसमें एक नया अपडेट यह भी है कि सरकार बजट सत्र के बाद भी ट्रांसफर पर विचार कर सकती है। तब तक धान खरीदी और बजट सत्र भी समाप्त हो जाएगा। फिर, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सरकार का किसी कलेक्टर से गंभीर नाराजगी जैसी बात नहीं है। आखिर, दस के दस नगर निगमों में कांग्रेस का मेयर बन गया है। सरकार के नजदीकी लोगों के संकेत से लगता है, सीएम के विदेश जाने से पहले अगर लिस्ट निकली भी तो छोटी होगी। इसमें एक-दो ऐसे कलेक्टरों के नाम शामिल हो सकते हैं, जिसे चीफ सिकरेट्री पुअर पारफारमेंस पर हटाने के लिए रिकमांड करें।

रिटायर आईएएस या?

सूचना आयुक्त के एक खाली पद के लिए सरकार ने विज्ञापन निकाल दिया है। ये अच्छी बात है पहली बार सूचना आयोग में पोस्टिंग के लिए विज्ञापन निकला है। मगर, इस पोस्ट पर आसीन कौन होगा, इसको लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। हालांकि, कुछ रिटायर आईएएस एवं एनजीओ से जुड़े लोग इसके लिए दावेदारी कर रहे हैं। मगर सरकार किसके नाम को ओके करती है, यह वक्त बताएगा।

मुदित की जगह पीसी

राज्य वन अनुसंधान संस्थान वन विभाग का बड़ा और प्रतिष्ठित इंस्टिट्यूट है। इसके डायरेक्टर मुदित कुमार को सरकार ने सीजी कास्ट का डायरेक्टर अपाइंट किया है। इसमें महत्वपूर्ण यह है कि मुदित कुमार खुद की इच्छा से सीजी कॉस्ट गए हैं। मुदित बड़े संस्थान को छोड़कर सीजी कॉस्ट में क्यों गए, इस पर सवाल उठना लाजिमी है। बहरहाल, उनकी जगह पर एडिशनल पीसीसीएफ पीसी पाण्डेय को वन अनुसंधान संस्थान का डायरेक्टर बनाए जाने की चर्चा है।

भाजपा में सब ठीक नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता अमित शाह इस हफते रायपुर में थे। उन्होंने बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस कार्यक्रम के बाद बीजेपी में जिस तरह खुसुर-फुसुर हो रही, उससे लगता है, उपर में भले ही ठीक दिख रहा मगर पार्टी के भीतर नहीं। अमित शाह के कार्यक्रम का संचालन पूर्व मंत्री राजेश मूणत से कराया गया। और, आभार प्रदर्शन राजीव अग्रवाल से। पार्टी के नेताओं को ऐतराज है कि चार-चार महामंत्री के होने के बाद भी पूर्व मंत्री से संचालन क्यों? रायपुर सांसद से स्वागत कराया गया मगर नगर विधायक को छोड़ दिया गया। संचालन, स्वागत और आभार में नेताओं की हिन्दी की शैली पर भी भाजपा के अंदर चुटकी ली जा रही।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एमसीआई के सिकरेट्री छत्तीसगढ़ के सीनियर आईएएस डॉ0 आलोक शुक्ला के बैचमेट हैं। मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और पीजी कोर्स के लिए राज्य में त्राहि माम मचा हुआ है, ऐसे में डॉ. शुक्ला की मदद क्यों नही ली जानी चाहिए?
2. आईपीएस में डीआईजी से लेकर डीजी तक के प्रमोशन किस वजह से लटक गए हैं?

शनिवार, 25 जनवरी 2020

सीएस से खफा अफसरों की पत्नियां

26 जनवरी 2020
ब्यूरोक्रेसी के मुखिया आरपी मंडल ने नया रायपुर शिफ्थ होकर ब्यूरोक्रेसी की मुसीबतें बढ़ा दी है। अब अफसरों पर स्वाभाविक दबाव बन गया है कि वे भी नया रायपुर कूच करें। जाहिर है, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहली बार नया रायपुर की बसाहट देखने पहुंचे थे तो उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि पिछली सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई का 700 करोड़ लगा दिया है तो जरूरी है कि इसे बसाया जाए। उनके निर्देश पर ही सीएम हाउस समेत अन्य मंत्रियों के आवासों के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। एजेंसियों को टारगेट दिया गया है अक्टूबर तक इसे पूरी कर दे। छह महीने इंटिरियर में लगेगे। याने अगले साल सीएम हाउस भी वहां शिफ्थ हो जाएगा। इस बीच मंडल वहां पहुंच गए हैं। कुछ और अफसर बॉस की देखादेखी नया रायपुर जाने के लिए घरवालियों को तैयार कर रहे हैं। तीन अफसरों का तो पक्का हो गया है। वैसे, ये संख्या चार हो जाती। मगर चौथे आईएएस की पत्नी एकदम अड़ गई…तुम्हें जाना है तो जाओ, मैं नहीं जाने वाली। अब घर वाली से पंगा कौन ले…अफसर ने हथियार डाल दिया। सुनने में आ रहा है, अफसरों की पत्नियां सीएस से बेहद नाराज हो गई हैं….नया रायपुर जाकर सबको फंसवा डाले।

आठ करोड़ की चोट

अफसरों को नया रायपुर जाने और उनके लिए गरम खाना पहुंचाने पर हर साल सरकार का आठ करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। दरअसल, नया रायपुर में मंत्रालय जाने के बाद तत्कालीन सरकार ने अफसरों की गाड़ियों का फ्यूल का लिमिट बढ़ाकर 80 से 240 लीटर कर दिया था। याने एक गाड़ी पर महीने का 160 लीटर तेल का इजाफा। उपर से अफसरों के पास एक गाड़ी सिर्फ इसलिए होती है कि दोपहर में घर से गरम खाना मंत्रालय पहुंच जाए। हालांकि, कुछ अफसर ऐसे भी हैं, जो सुबह लांच बॉक्स लेकर मंत्रालय जाते हैं। लेकिन, उनकी संख्या नगण्य है। ज्यादतर इसे सर्विस की गरिमा के खिलाफ समझते हैं। उधर, अफसर के निज सचिव काले-पीले में इनवाल्व होते हैं, इसलिए विभागों से उनके लिए भी एक गाड़ी। मोटे अनुमान के तौर पर सिर्फ फ्यूल में ही सरकार अफसरों की सरकारी गाड़ियों पर आठ करोड़ फूंक रही है। जबकि, नया रायपुर में पीएचक्यू के पीछे 120 बंगले तीन साल से खाली पड़े हुए हैं। सरकार चाहे तो ये बंगले गुलजार हो सकते हैं।

एक बैच के दो दावेदार

सरगुजा आईजी केसी अग्रवाल इस महीने रिटायर हो जाएंगे। सरकार को 31 जनवरी को वहां नया आईजी अपाइंट करना होगा। हालांकि, आईजी लेचल पर विकल्प बेहद सीमित हैं। पांच रेंज हैं और पांच ही आईजी। इसमें भी दीपांशु काबरा सरगुजा के आईजी रह चुके हैं। फिर उनके ग्रह-नक्षत्र ठीक नहीं चल रहे…एक साल से बेविभाग हैं। वर्किंग में बच गए चार आईजी। लिहाजा, बस्तर में डीआईजी सुंदरराज को प्रभारी आईजी बनाकर भेजा गया। सरगुजा में भी कुछ ऐसा ही होने का चल रहा। सरकार किसी डीआईजी को प्रभारी आईजी बनाकर भेजेगी। एक ही बैच के दो डीआईजी सरगुजा के लिए दावेदार हैं। ओपी पाल और रतनलाल डांगी। दोनों 2003 बैच के आईपीएस हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से किसकी किस्मत चमकती है।

कमिश्नर भी नया

दुर्ग कमिश्नर दिलीप वासनीकर 31 जनवरी को रिटायर हो जाएंगे। कमिश्नर का पद चूकि सरकार ने अघोषित तौर पर प्रमोटी आईएएस के लिए रिजर्व कर दिया है, लिहाजा किसी प्रमोटी आईएएस को ही दुर्ग कमिश्नर बनने का मौका मिल सकता है। हालांकि, दुर्ग वीवीआईपी संभाग है, इसलिए ठीक ठाक अफसर को ही वहां भेजा जाएगा।

दूसरा आईआईटीयन

अजीत जोगी ने अपने समय में आईएएस अमित अग्रवाल को चिप्स का पहला सीईओ बनाया था। वे आईआईटी से पढ़े थे। और 19 बरस बाद भूपेश बघेल सरकार ने आईआईटीयन समीर विश्नोई को चिप्स की कमान सांंपी है। समीर कानपुर आईआईटी से बीटेक किए हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. चलाचली की बेला में किस अफसर ने नीचे तक के अफसरों को दस-दस, बीस-बीस हजार का टारगेट दे दिया है?
2. ऐन पंचायत चुनाव के दौरान सरकार ने डायरेक्टर पंचायत को क्यों बदल दिया?

रविवार, 19 जनवरी 2020

ब्यूरोक्रेसी को न्यू ईयर गिफ्ट

19 जनवरी 2020
छत्तीसगढ़ सरकार ने इस हफ्ते प्रिंसिपल सिकरेट्री रेणु पिल्ले और सुब्रत साहू को प्रमोट कर दोनों को एक साथ एडिशनल चीफ सिकरेट्री बना दिया। रेणु 91 बैच और सुब्रत 92 बैच के आईएएस हैं। इस दृष्टि से रेणु 2021 में और सुब्रत 2022 में एसीएस बनते। याने रेणु एक साल और सुब्रत समय से दो साल पहले एसीएस बन गए। अभी तक प्रदेश में ऐसा कभी हुआ नहीं। दूसरे कई राज्यों में अभी 89 और 90 बैच एसीएस नहीं बन पाया है। जीएस मिश्रा को प्रिंसिपल सिकरेट्री बनाने के दौरान 2017 में बीजेपी सरकार ने जरूर 94 बैच को टाईम से सवा साल पहले प्रमोशन कर दिया था। वास्तव में, आईएएस लॉबी के लिए ये न्यू ईयर गिफ्ट ही है। जो किसी राज्य में नहीं हुआ, वह छत्तीसगढ़ में ब्यूरोक्रेसी को मिल गया। छत्तीसगढ़ में ही 88 और 89 बैच के आईपीएस डीजीपी बनने के लिए टकटकी लगाए हुए हैं। इसलिए, छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी को यह खुश होने का समय है।

अफसर का शौचालय विवाद

मध्यप्रदेश के समय यही कोई 98 या 99 का वाकया होगा। जशपुर के कलेक्टर विनोद कुमार और एसपी एसआरपी कल्लूरी में कुछ खटपट हुआ था। पुलिस ने किसी मामले में जशपुर के सीएमओ आफिस में दबिश दी थी और यह कलेक्टर को नागवार गुजर गया। कलेक्टर-एसपी का विवाद तूल पकड़ता इससे पहिले बिलासपुर के कमिश्नर मदनमोहन उपाध्याय और बिलासपुर-रीवा रेंज के आईजी एसएस बड़बड़े ने हस्तक्षेप कर मामले को खतम करा दिया था। और, अब सिस्टम का हाल देखिए कि कवर्धा के एसडीएम और बिलासपुर के कानन पेंडारी चिड़ियाघर के एसडीओ के बीच शौचालय विवाद चीफ सिकरेट्री तक आ पहुंचा है। बताते हैं, एसडीएम बिना किसी सूचना के चिड़ियाघर पहुंचे और एसडीओ के चेम्बर के शौचालय का इस्तेमाल कर लिया। एसडीओ ने इस पर आपत्ति की तो एसडीएम ने बिलासपुर के एसडीएम को खबर कर दी। एसडीएम ने मौके पर तहसीलदार भेज दिया। तहसीलदार ने पुलिस बुलाकर एसडीओ फॉरेस्ट को तीन घंटे थाने में बिठा दिया। इस घटना के बाद राप्रसे और रावसे के अफसर आमने-सामने हो गए हैं। पूरा मामला चूकि एसडीएम के वीआईपी ट्रिटमेंट से जुड़ा था इसलिए सरकार कवर्धा एसडीएम पर कार्रवाई करने जा रही थी कि एक मंत्री बीच में आ गए। इधर, डिप्टी कलेक्टर्स लामबंद होकर सीएस से मिलने रायपुर आ पहुंचे….बोले, वन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। ये तो गजब हो गया। चीफ सिकरेट्री के पास इतने काम होते हैं कि उसे सांस लेने की फुरसत नहीं होती। वो अब एसडीएम साब के शौचालय का मामला सुलझाएंगे। पता नहीं तेज-तर्राट और कड़क चीफ सिकरेट्री को नेतागिरी करने आए डिप्टी कलेक्टरों पर गुस्सा आया या नहीं। बहरहाल, जो काम कमिश्नर, कलेक्टर को करना चाहिए, वो अगर चीफ सिकरेट्री करने लगेगा तो फिर सिस्टम का मतलब क्या है। ये बेहद छोटी बात थी…इसे कमिश्नर, कलेक्टर और सीएफ लेवल पर सुलझाई जा सकती थी। सरकार को इसे संज्ञान में लेना चाहिए।

सीएम बोले, तीसरा कहां है

भले ही जिलों के अफसरों में समन्वय नहीं हो मगर राजधानी में चीफ सिकरेट्री, डीजीपी और पीसीसीएफ हर कार्यक्रम में साथ नजर आते हैं। खासकर जब से आरपी मंडल सीएस बनें हैं, उनका निर्देश है कि कोई भी सरकारी कार्यक्रम हो, मंच पर तीनों के लिए कुर्सी लगाई जाए। साथ में यह भी कि अगर पुलिस मुख्यालय में कोई मीटिंग होगी तो डीजीपी और वन मुख्यालय में होगी तो पीसीसीएफ बीच में बैठेगा और बाकी दोनों उसके अगल-बगल। विधानसभा के अफसर दीघा में भी डीजीपी अब सीएस के बगल में बैठने लगे हैं। वरना, विश्वरजंन के रिटायर होने के बाद डीजीपी को विधानसभा में दूसरी या तीसरी पंक्ति में ही जगह मिल पाती थी। यहां तक कि सीएस सीएम को न्यू ईयर विश करने सीएम हाउस गए तो डीजीपी और पीसीसीएफ उनके साथ थे। अब तीनों को जब साथ नहीं देखते तो सीएम भी टोक देते हैं, बाकी किधर हैं। युवा महोत्वस में रस्सा प्रतियोगिता में जब राज्यपाल के साथ सीएस और डीजीपी रस्सा पकड़े तो सीएम बोले, तुम्हरा तीसरा कहां है। इस पर जमकर ठहाका लगा।

ब्यूरोक्रेसी से केमेस्ट्री

सरकार के एक बरस पूरे होने के बाद ब्यूरोक्रेसी की सरकार के साथ केमेस्ट्री ठीक होने लगी है। वो उनका आदमी, ये अब खतम होने लगा है। पिछली सरकार में उपेक्षित रहे अफसर जो सिर्फ इसी केटेगरी के चलते ठीक-ठाक पोस्टिंग पा गए थे, उनमें से कुछ को सरकार अब साइडलाइन करने जा रही है। क्योंकि, साल भर में उन्होंने कोई रिजल्ट दिया नहीं। सीएम भूपेश बघेल दो बार आईएएस एसोसियेशन के डिनर में जा चुके हैं। एक बार आईपीएस एसोसियेशन के डिनर में भी। आईएफएस अफसर भी बहुत जल्द डीएफओ कांफ्रेंस प्लस डिनर का आयोजन करने जा रहा है। सीएम अफसरों के कार्यक्रम में खानापूर्ति के लिए नहीं पहुंचते। बल्कि, उनके साथ काफी समय बिताते हैं। लगभग सभी से मिलते हैं, बात करते हैं।

आईएफएस अवार्ड

राज्य वन सेवा के नौ अधिकारियों को आईएफएस अवार्ड होने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। दो-एक दिन के भीतर इसके लिए सरकार नोटिफिकेशन जारी कर देगी। आईएफएस बनने वालों में सत्यदेव शर्मा, मयंक पाण्डेय, जितेंद्र उपाध्याय, प्रभाकार खलको, अशोक पटेल, दिव्या गौतम, संजय यादव, समा फारुकी, लोकनाथ पटेल शामिल हैं।

सेनापति को उम्मीद

आईएएस केसी देव सेनापति ने निर्वाचन में एडिशनल सीईओ के रूप में ज्वाईन कर लिया है। लेकिन, बैठ अभी भी रहे हैं चिप्स में। सरकार ने उन्हें चिप्स से हटा दिया लेकिन, उनकी जगह पर किसी की अभी चिप्स में नियुक्ति नहीं की है। हो सकता है कि सेनापति को उम्मीद हो कि शायद भारत निर्वाचन आयोग से उन्हें चिप्स में एडिशनल तौर पर काम करने की अनुमति मिल जाए। लेकिन, सरकार क्या चाहती है कि ये तभी क्लियर हो पाएगा जब आईएएस की लिस्ट में किसी को चिप्स का सीईओ बनाया जाता है या नहीं। सेनापति अगर चिप्स से रिलीव नहीं होंगे तो उन्हें वेतन कहां से मिले, इसकी दिक्कत जाएगी। निर्वाचन से वेतन निकालने के लिए लास्ट पे स्लीप की जरूरत पड़ेगी। अगर चिप्स से वे रिलीव नहीं होंगे तो वहां से लास्ट पे स्लीप मिलेगा नहीं। और, चिप्स से उनका ट्रांसफर हो गया है, इसलिए वहां से उन्हें वेतन अब निकलेगा नहीं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस जिले में पुलिस ने वसूली की दुकान खोल ली है?
2. स्वच्छता में जब कांकेर जिला रैंकिंग में उपर था तो सरकार ने बेमेतरा जिले के अफसरों को पुरस्कार लेने क्यों भेज दिया?

शनिवार, 11 जनवरी 2020

आईएएस तीन, काम ढेला का नहीं

12 जनवरी 2020
एक वो भी समय था जब पांच साल पहले पंचायत चुनाव के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त के बिना परमिशन लिए दंतेवाड़ा कलेक्टर केसी देवसेनापति अवार्ड लेने दिल्ली चले गए थे। इसको लेकर तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त पीसी दलेई तब काफी नाराज हुए थे। उन्होंने सेनापति को नोटिस भी थमा दी थी। लेकिन, समरथ को नहीं दोष गोसाई….दलेई की नाराजगी के बाद भी सेनापति का बाल बांका नहीं हुआ। लेकिन, वक्त, वक्त की बात है। एडिशनल इलेक्शन आफिसर के लिए सरकार ने पिछले महीने भारत निर्वाचन आयोग को तीन नामों का पेनल भेजा, उसमें सेनापति का नाम सबसे उपर था। दूसरे नम्बर पर हिमशिखर गुप्ता और राजेश राणा थे। जाहिर है, सेनापति का नाम उपर होने से आयोग ने उनके नाम पर मुहर लगा दी। आयोग से एप्रूवल मिलने के बाद सरकार ने कल सेनापति को चिप्स से हटाकर आयोग में भेज दिया। सवाल यह है कि अब वे वहां करेंगे क्या। दो-दो आईएएस पहले से वहां बिना काम के बैठे हैं। रीना बाबा कंगाले ने हाल ही में चीफ इलेक्शन आफिसर के रूप में ज्वाईन किया है और ज्वाइंट सीईओ समीर विश्नोई का ये तीसरा साल है। याने इलेक्शन में आईएएस तीन और काम एक ढेला का नहीं। क्योंकि, अब 2022 तक कोई मूवमेंट नहीं होने वाला। बहरहाल, चिप्स से बाहरी लोगों ने मिलकर कुछ छत्तीसगढ़ियां कर्मचारियों को बर्खास्त करवा दिया, सेनापति को इलेक्शन में बिठाने का मतलब यह तो नहीं है।

रीना कंगाले मुश्किल में

अजीत जोगी की जाति को फर्जी करार देने वाला साहसिक आदेश देकर चर्चा में आईं आईएएस रीना बाबा कंगाले मुश्किलों में घिर गईं हैं। इलेक्शन कमीशन ने उन्हें राज्य निर्वाचन पदाधिकारी बनाने के लिए सलेक्ट किया था। लेकिन, राज्य सरकार ने उनकी पोस्टिंग का आदेश निकाला नहीं। सरकार को उम्मीद थी कि रीना को एडिशनल तौर पर मंत्रालय में सिकरेट्री के रूप में काम करने के लिए आयोग इजाजत दे देगा। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने इलेक्शन कमीशन को पत्र भेज आग्रह किया था। लेकिन, आयोग इसे अन्यथा ले लिया। आयोग ने अनुमति देने की बजाए उल्टे सवाल कर दिया कि अभी तक उन्होंने निर्वाचन में ज्वाईन किया क्यों नहीं। आयोग का पत्र आते ही मंत्रालय में हड़कंप मचा….रीना को फौरन निर्वाचन में जाकर ज्वाईनिंग देनी पड़ी। आयोग ने चूकि एडिशनल पोस्टिंग के लिए अनुमति देने से फिलहाल मना कर दिया है। इसलिए, मंत्रालय में वाणिज्यिक कर सचिव की उनकी पोस्टिंग भी एक तरह से कहें तो स्वयमेव खतम समझी जानी चाहिए। क्योंकि, निर्वाचन में ज्वाईनिंग के बाद वे अब इलेक्शन कमीशन की इम्प्लाई हो गई हैं। सरकार से उन्हें वेतन जरूर मिलेगा लेकिन, छुट्टी देने से लेकर सीआर लिखने का काम अब आयोग करेगा। हालांकि, राज्य बनने के बाद यह पहला मौका है, जब आयोग इतना सख्त हुआ है। इससे पहिले सभी सीईओ को आयोग एडिशनल पोस्टिंग की अनुमति दे चुका है। केके चक्रवर्ती, डा0 आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, निधि छिब्बर, सुब्रत साहू इनमें शामिल हैं। सुब्रत तो विधानसभा चुनाव के चार महीने पहिले तक प्रिंसिपल सिकरेट्री हेल्थ रहे। सुब्रत ने आयोग को मैनेज भी बढ़ियां किया था। तमाम शिकायतों के बाद भी दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के समय वहां के कलेक्टर टीपी वर्मा को बचा लिया। सरकार के पास डा0 आलोक शुक्ला भी हैं। वे पांच साल इलेक्शन कमीशन में रहे हैं। इसमें आलोक और सुब्रत की मदद लेनी चाहिए।

ओएसएडी होम के मायने

राज्य सरकार ने दो दिन पहले खुफिया चीफ हिमांशु गुप्ता को गृह विभाग में ओएसडी बनाने का आदेश जारी किया। यह आदेश इसलिए जारी करना पड़ा क्योंकि भारत सरकार ने प्रायवेट सिक्यूरिटी एजेंसियों को लायसेंस देने का अधिकार गृह विभाग के ज्वाइंट सिकरेट्री लेवल के अफसर को अनिवार्य कर दिया है। मंत्रालय में सेटअप क्यों बढ़ाया जाए, इसलिए सरकार ने रास्ता निकालते हुए हिमांशु को ही ओएसडी बना दिया। वैसे, पहले खुफिया चीफ ही एजेंसियों को लायसेंस जारी करते थे। अब वे ओएसडी के रूप में यही काम करेंगे।

शादियों का महीना

इस महीने ब्यूरोक्रेसी में कई शादियां होंगी। 14 जनवरी को डायरेक्टर इंडस्ट्री अनिल टुटेजा के बेटे यश की शादी है और 15 को रिशेप्सन। इसके बाद 18 जनवरी को तीन शादियां है। पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी तथा लघु वनोपज संघ के एमडी संजय शुक्ला के बेटे, डायरेक्टर पंचायत जितेंद्र शुक्ला और आईएफएस जयसिंह महस्के की बेटी की इसी दिन शादी है। संजय शुक्ला और महस्के समधी बन रहे हैं। इसके बाद 2 फरवरी को एक बड़ी शादी और होगी। चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के बेटे गौरांग भी इस दिन परिणय सूत्र में बंधेंगे।

तीसरे दर्जे की सर्विस

वैसे तो ऑल इंडिया सर्विसेज में पहले नम्बर पर आईएएस, फिर आईपीएस और आईएफएस आते हैं। लेकिन, छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों का प्रमोशन जिस तरह से पिछड़ता जा रहा है, आईपीएस अफसर कहने लगे हैं, अपनी सर्विस अब तीसरे नम्बर की हो गई है। आईएएस का समय चाहे जैसा भी चल रहा हो, प्रमोशन आदि का काम समय पर निबटवा लेते हैं। इस बार तो पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी ने आईएफएस का प्रमोशन और पोस्टिंग दोनों हो गई। आईएफएस में तो थोक में पदोन्नतियां हुई। आईपीएस ही जो लंबे समय से लटका हुआ है। डिमोशन हुए डीजी के लिए 11 दिसंबर को भारत सरकार से अनुमति आने के बाद प्रमोशन नहीं हो रहा तो फिर बाकी को आईजी, डीआईजी को कौन पूछता है।

आंखें पथराई जा रही

राज्य में सरकार बनने के बाद से बोर्ड और निगमों में पोस्टिंग को लेकर कांग्रेसी सीएम भूपेश बघेल पर टकटकी लगाए हुए हैं। और, सीएम हैं कि हर चुनाव के बाद टाईम एक्सटेंड कर देते हैं। विधानसभा चुनाव के बाद बोले लोकसभा के बाद। लोकसभा गुजरा तो नगरीय चुनाव के बाद। अब तो ये भी निबट गया। निगमों की कुर्सियों पर कब से रुमाल रखे कांग्रेसियों का दिल अब बैठा जा रहा है….पता नहीं, दाउ का दिल कब पसीजेगा?

मंडल का मोटिवेशन

ट्राईबल फेस्टिवल के आयोजन में वाहवाही बटोर चुके संस्कृति सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के सामने युवा महोत्सव का आयोजन भी चुनौती से कम नहीं है। सरकार की कोशिश है कि किसी मायने में युवा महोत्सव कमतर न हो। यही वजह है कि चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल भी लगातार इसकी समीक्षा कर रहे हैं। हाल ही में मंत्रालय में हुई एक मीटिंग में परदेशी के प्रेजेंटेशन के बाद मंडल ने पहले मैच में घुंआधार सेंचुरी ठोकने वाले दो क्रिकेटरों के बारे में अफसरों से सवाल कर दिया। कोई जवाब न मिलने पर मंडल बोले, दोनों बैट्समैन बाद के मैच में जीरो पर आउट हो गए….हाल ये है कि उन्हें आज आपलोगों की तरह कोई नहीं जानता। वे फिर सिद्धार्थ की ओर मुखातिब हुए, बोले….तुमने ट्राईबल महोत्सव में बढ़ियां काम किया है, इसका ये मतलब ये नहीं कि उन क्रिकेटरों की तरह ट्राईबल महोत्सव में सेंचुरी मारकर युवा महोत्सव में आउट हो जाओ….तुमको अब डबल सेंचुरी मारना है। मंडल इसी अंदाज में मीटिंग लेते हैं और मोटिवेट भी करते हैं अफसरों को।

जादू की छड़ी

राजधानी पुलिस के कुछ दिनों से लाटरी निकल आए हैं। क्राइम होते हैं मगर एक से दो दिन में आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ जा रहे हैं। चाहे पार्षद का चुनाव जीतने के लिए खुद की कार पर गोली चलाने का मामला हो या माना में युवती और उसके बच्चे को जला देने का मामला। राजधानी में दो बहनों पर अटैक के केस में भी पुलिस ने 24 घंटे में आरोपियों को पकड़ लिया। मंत्री कवासी लकमा को धमकी देने वाले मुजरिम भी तीसरे दिन शिमला में धरे गए। नारियल व्यापारी की गोली मारने का खुलासा भी मात्र 12 घंटे में। आलम यह है कि दूसरे जिलों के कप्तान अब पूछ रहे हैं रायपुर पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी आ गई है क्या। हालांकि, सिलतरा से उद्योगपति का अपहरण राजधानी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। इसे अगर पुलिस ने जल्द सुलझा लिया तो वास्तव में जादू की छड़ी वाली बात स्थापित हो जाएगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस जिले के कलेक्टर से सरकार नाराज है और उसकी कभी भी छुट्टी हो सकती है?
2. मंत्रालय में सचिव लेवल के ट्रांसफर क्या अब युवा महोत्सव के बाद होंगे?

रविवार, 5 जनवरी 2020

सीएम की हाई टी

5 जनवरी 2020
आदिवासी नृत्य महोत्सव के बारे में सरकार ने जितना सोचा नहीं था, उससे अधिक वह सफल हो गया। छह देश…25 राज्य….1800 कलाकार….और, उनकी अद्भूत प्रस्तुति। तीन दिन का आयोजन बिना किसी बाधा, विवाद के निबट गया। उपर से राहुल गांधी इसी एक कार्यक्रम के लिए दिल्ली से रायपुर आए। ऐसे में, सीएम भूपेश बघेल की प्रसन्नता समझी जा सकती है। उन्होंने समापन समारोह के अगले दिन आयोजन को सफल बनाने वालों के लिए हाउस में हाई टी रखा। इसमें चीफ सिकरेट्री, पीसीसीएफ, सिकरेट्री कल्चर से लेकर डीएसपी, नायब तहसीलदार तक को बुलाया गया। मुख्यमंत्री सभी से एक-एक कर मिले…उनसे बात की….पीठ थपथपायी। ये अलग बात है कि महोत्सव की तैयारियों पर सीएम खुद भी नजर रखे रहे। कई मर्तबा साइंस कालेज ग्राउंड गए। फेस्टिवल में भी तीनों दिन पहुंचे। कार्यक्रम ग्रेंड सक्सेस होने का यह भी एक कारण था….सीएम को जब इतना चाव रहेगा तो अफसर चौकस रहेंगे ही। बहरहाल, टीम मोटिवेशन के लिए सीएम की हाई टी को सबने एप्रेसियेट किया। क्योंकि, बड़े आयोजन का क्रेडिट आमतौर पर बड़े अफसर बटोर ले जाते हैं। नीचे वालों को आखिर कोई कहां पूछता है।

सीएस की नो टी

मंत्रालय में कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब चीफ सिकरेट्री की मिनिमम चार-पांच बैठकें नहीं होतीं। इन बैठकों में चाय-बिस्किट भी सर्व होती थी। सीएस का चूकि अपना पेंट्री कार है, इसलिए इसमें कोई दिक्कत नहीं थी….अफसरों को भाप निकलती चाय मिल जाती थी। मगर जब से आरपी मंडल मुख्य सचिव बने हैं, मीटिंगों से चाय-बिस्किट गायब हो गई है। सीएस ने दो टूक कह दिया है, नो टी…मीटिंग मतलब सिर्फ मीटिंग।

ईश्वरीय चमत्कार या….

वायु को शुद्ध रखने वाले मलाईदार विभाग के रीजनल अफसर का सरकार ने रायपुर से रायगढ़ ट्रांसफर किया था और रायगढ़ वाले का रायपुर। रायपुर वाले अफसर का रिटायरमेंट में तीन महीने से कम समय बचा था, इसका हवाला देकर वे रायगढ़ गए नहीं और रायगढ़ वाले रिलीव होकर रायपुर आ गए। रायगढ़ वाले अफसर वहां से रिलीव हो गए थे इसलिए फिर से उनकी पोस्टिंग हो नहीं सकती थी और सरकार के आदेश के बाद भी रायपुर वाले हटने के लिए तैयार नहीं हुए। लिहाजा, रायगढ़ से आए अफसर पेंडुलम बनकर मुख्यालय में अटैच हो गए। अब इसमें क्लास यह हुआ कि जिस अफसर को रायपुर से रायगढ़ भेजा जा रहा था और उसने सरकार के आदेश को मानने से इंकार कर दिया, उसे रिटायरमेंट के रोज 31 दिसंबर को उसी पद पर संविदा पोस्टिंग दे दी गई। जाहिर है, कोई नाराजगी होगी तभी रिटायरमेंट के समय उनका ट्रांसफर किया गया। लेकिन, उपर से कुछ ऐसा प्रेशर बना कि शाम को पांच बजे के बाद मंत्रालय खोलकर अफसर का संविदा आर्डर निकाला गया। अफसर के बारे में बताया जाता है, ईश्वर में उनकी अगाध आस्था है….आफिस के आधे हिस्सों को मंदिर में कंवर्ट कर दिया है…नारियल, फूल, अगरबत्ती से लेकर पूजन की हर सामग्री मिल जाएगी। एक बात और….अफसर में मैनेजमेंट की अद्भूत कला है। उस आफिस में आरटीआई लगाने वालों के घर मिठाई का डिब्बा पहुंच जाता है। ऐसे में, अफसर की संविदा पोस्टिंग के पीछे ईश्वरीय चमत्कार है या मैनेजमेंट का कौशल, यह रहस्य बना हुआ है।

सीएस का नया बंगला

चीफ सिकरेट्री की गरिमा के अनुरुप 2011 में शंकर नगर में एक बंगला इयरमार्क किया गया था। लेकिन, विडंबना यह कि उसमें सिर्फ चार मुख्य सचिवों को ही रहने का मौका मिल पाया। पी जाय उम्मेन, सुनिल कुमार, विवेक ढांड और अजय सिंह। नई सरकार ने इस बंगले को आईएएस पुल से लेकर मंत्री जय सिंह अग्रवाल को अलॉट कर दिया। राजधानी में सीएस का बंगला न होने की दिक्कत आरपी मंडल को हो रही है। देवेंद्र नगर में उनका उस समय का बंगला है, जब 2003 में वे बिलासपुर कलेक्टर से सिकरेट्री बनकर रायपुर आए थे। सी टाईप बंगले में इतनी जगह नहीं होती कि उसमें आफिस और निवास बनाया जा सकें। या कोई मिलने आए तो उसे प्रॉपर बिठाया जाए। इसको देखते सीएस अब बंगला बदल रहे हैं। वे नया रायपुर जा रहे हैं। पीएचक्यू के पीछे सेक्टर 17 में सीएस बंगला तैयार किया जा रहा है। बहुत जल्द वे वहां शिफ्थ हो जाएंगे। सीएस इसके जरिये एक मैसेज भी देना चाहते हैं, बाकी अफसरों को…वे भी नया रायपुर शिफ्थ हों। अभी तक इसको लेकर बातें होती है कि नया रायपुर को बसाना है तो मंत्रियों और अफसरों को वहां रहना चाहिए। अफसरों में अभी सिकरेट्री रीना बाबा कंगाले, डीआईजी संजीव शुक्ला और ईओडब्लू एसपी सदानंद नया रायपुर में रहते है। सीएस लेवल का अफसर पहली बार नया रायपुर जा रहा है।

अहम पोस्टिंग

दिल्ली डेपुटेशन पर पोस्टेड छत्तीसगढ़ की 2003 बैच की आईएएस रीतु सेन इस समय सबसे महत्वपूर्ण पोस्टिंग होल्ड कर रही हैं। वे शहरी आवास विभाग की डायरेक्टर हैं। अभी वे आवास शाखा देख रही हैं। दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से लेकर सांसदों, नौकरशाहों को अगर घर चाहिए तो उनकी फाइल रीतु के टेबल पर जाएगी ही। दिल्ली में सरकारी मकानों की वैसे भी भारी मारामारी रहती है। ऐसे में, उनकी पोस्टिंग का मतलब आप समझ सकते हैं। इस पद पर बैठने वाले अफसरों का नेटवर्क बेहद मजबूत हो जाता है। क्योंकि, घर सबको चाहिए, चाहे वो रुलिंग पार्टी के हां या विरोधी पार्टी के। रीतु छत्तीसगढ़ में सरगुजा कलेक्टर रहने के दौरान कई महत्वपूर्ण काम की थी। खासकर स्वच्छता के क्षेत्र में।

बीजेपी में उलटफेर

भाजपा संगठन में जल्द ही बड़ा फेरबदल होगा। प्रदेश भापजा का निजाम बदलेगा, तो संगठन मंत्री के पद पर पवन साय की जगह कोई नया चेहरा आ सकता है। भाजपा के भीतर वैसे पूर्व मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह के केंद्र में जाने की अटकलें भी चल रही है। बहरहाल, नए अध्यक्ष के लिए वैसे तो दो-तीन नाम प्रमुख हैं। लेकिन, सबसे प्रबल दावेदारी दुर्ग सांसद विजय बघेल की बताई जा रही है। वे पौने चार लाख से लोकसभा चुनाव जीते हैं और ओबीसी भी हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रिश्ते में भी लगते हैं। इसलिए, कई नेता विजय को पार्टी के लिए मुफीद मान रही है। लेकिन, विजय की ताजपोशी इतना आसान नहीं होगा। भाजपा के भीतर ही उनके नाम पर विरोध करने वालों की कमी नहीं है।

न्यू ईयर पोस्टिंग

पुलिस मुख्यालय में पोस्टेड एडीजी एसआरपी कल्लूरी और आईजी दीपांशु काबरा के पास अभी कोई काम नहीं है। सरकार ने दीपांशु को रायपुर रेंज आईजी से हटाकर पीएचक्यू भेजा था। और, कल्लूरी को ट्रांसपोर्ट से शिफ्ट तो किया मगर कोई जिम्मेदारी नहीं दी है। जाहिर है, कल्लूरी और दीपांशु को नए साल से बड़ी उम्मीदें होंगी….शायद कोई विभाग मिल जाए। अंदर की खबर है, दोनों के लिए नया साल गुड हो सकता है। जल्द ही एडीजी से डीजी प्रमोशन के लिए डीपीसी होने वाली है। इसमें पीएचक्यू में अहम सर्जरी होगी। इसमें कल्लूरी और दीपांशु दोनों को पोस्टिंग मिल सकती है।

पोस्टिंग का वेट

मंत्रालय में सचिव लेवल पर संभावित उलटफेर को लेकर अफसरों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। सबकी एक ही जिज्ञासा है, सरकार के एक बरस पूरे होने के बाद होने वाले फेरबदल में किसे क्या मिलेगा। चर्चा है कि कुछ दिनों में जिन अफसरों ने बढ़ियां प्रदर्शन किया है, उन्हें सरकार ठीक-ठाक पोस्ट देगी। हो सकता है, सीएम सचिवालय में भी एक आईएएस पोस्ट किया जाए। सीएम के सचिवालय में अफसरों की कमी तो है। डा0 आलोक शुक्ला और प्रसन्ना आर को भी नई जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। सिद्धार्थ परदेशी के परफारमेंस से सीएम बेहद खुश हैं। हो सकता है, सिद्धार्थ के लिए भी कुछ नया हो जाए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एसपी बनने के लिए इन दिनों आईपीएस किस सीनियर पुलिस अधिकारी की परिक्रमा कर रहे हैं?
2. वन विभाग रेंजर से प्रमोट होकर एसीएफ बनें अफसरों को डीएफओ क्यों बना रहा है?