शनिवार, 11 जनवरी 2020

आईएएस तीन, काम ढेला का नहीं

12 जनवरी 2020
एक वो भी समय था जब पांच साल पहले पंचायत चुनाव के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त के बिना परमिशन लिए दंतेवाड़ा कलेक्टर केसी देवसेनापति अवार्ड लेने दिल्ली चले गए थे। इसको लेकर तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त पीसी दलेई तब काफी नाराज हुए थे। उन्होंने सेनापति को नोटिस भी थमा दी थी। लेकिन, समरथ को नहीं दोष गोसाई….दलेई की नाराजगी के बाद भी सेनापति का बाल बांका नहीं हुआ। लेकिन, वक्त, वक्त की बात है। एडिशनल इलेक्शन आफिसर के लिए सरकार ने पिछले महीने भारत निर्वाचन आयोग को तीन नामों का पेनल भेजा, उसमें सेनापति का नाम सबसे उपर था। दूसरे नम्बर पर हिमशिखर गुप्ता और राजेश राणा थे। जाहिर है, सेनापति का नाम उपर होने से आयोग ने उनके नाम पर मुहर लगा दी। आयोग से एप्रूवल मिलने के बाद सरकार ने कल सेनापति को चिप्स से हटाकर आयोग में भेज दिया। सवाल यह है कि अब वे वहां करेंगे क्या। दो-दो आईएएस पहले से वहां बिना काम के बैठे हैं। रीना बाबा कंगाले ने हाल ही में चीफ इलेक्शन आफिसर के रूप में ज्वाईन किया है और ज्वाइंट सीईओ समीर विश्नोई का ये तीसरा साल है। याने इलेक्शन में आईएएस तीन और काम एक ढेला का नहीं। क्योंकि, अब 2022 तक कोई मूवमेंट नहीं होने वाला। बहरहाल, चिप्स से बाहरी लोगों ने मिलकर कुछ छत्तीसगढ़ियां कर्मचारियों को बर्खास्त करवा दिया, सेनापति को इलेक्शन में बिठाने का मतलब यह तो नहीं है।

रीना कंगाले मुश्किल में

अजीत जोगी की जाति को फर्जी करार देने वाला साहसिक आदेश देकर चर्चा में आईं आईएएस रीना बाबा कंगाले मुश्किलों में घिर गईं हैं। इलेक्शन कमीशन ने उन्हें राज्य निर्वाचन पदाधिकारी बनाने के लिए सलेक्ट किया था। लेकिन, राज्य सरकार ने उनकी पोस्टिंग का आदेश निकाला नहीं। सरकार को उम्मीद थी कि रीना को एडिशनल तौर पर मंत्रालय में सिकरेट्री के रूप में काम करने के लिए आयोग इजाजत दे देगा। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने इलेक्शन कमीशन को पत्र भेज आग्रह किया था। लेकिन, आयोग इसे अन्यथा ले लिया। आयोग ने अनुमति देने की बजाए उल्टे सवाल कर दिया कि अभी तक उन्होंने निर्वाचन में ज्वाईन किया क्यों नहीं। आयोग का पत्र आते ही मंत्रालय में हड़कंप मचा….रीना को फौरन निर्वाचन में जाकर ज्वाईनिंग देनी पड़ी। आयोग ने चूकि एडिशनल पोस्टिंग के लिए अनुमति देने से फिलहाल मना कर दिया है। इसलिए, मंत्रालय में वाणिज्यिक कर सचिव की उनकी पोस्टिंग भी एक तरह से कहें तो स्वयमेव खतम समझी जानी चाहिए। क्योंकि, निर्वाचन में ज्वाईनिंग के बाद वे अब इलेक्शन कमीशन की इम्प्लाई हो गई हैं। सरकार से उन्हें वेतन जरूर मिलेगा लेकिन, छुट्टी देने से लेकर सीआर लिखने का काम अब आयोग करेगा। हालांकि, राज्य बनने के बाद यह पहला मौका है, जब आयोग इतना सख्त हुआ है। इससे पहिले सभी सीईओ को आयोग एडिशनल पोस्टिंग की अनुमति दे चुका है। केके चक्रवर्ती, डा0 आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, निधि छिब्बर, सुब्रत साहू इनमें शामिल हैं। सुब्रत तो विधानसभा चुनाव के चार महीने पहिले तक प्रिंसिपल सिकरेट्री हेल्थ रहे। सुब्रत ने आयोग को मैनेज भी बढ़ियां किया था। तमाम शिकायतों के बाद भी दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के समय वहां के कलेक्टर टीपी वर्मा को बचा लिया। सरकार के पास डा0 आलोक शुक्ला भी हैं। वे पांच साल इलेक्शन कमीशन में रहे हैं। इसमें आलोक और सुब्रत की मदद लेनी चाहिए।

ओएसएडी होम के मायने

राज्य सरकार ने दो दिन पहले खुफिया चीफ हिमांशु गुप्ता को गृह विभाग में ओएसडी बनाने का आदेश जारी किया। यह आदेश इसलिए जारी करना पड़ा क्योंकि भारत सरकार ने प्रायवेट सिक्यूरिटी एजेंसियों को लायसेंस देने का अधिकार गृह विभाग के ज्वाइंट सिकरेट्री लेवल के अफसर को अनिवार्य कर दिया है। मंत्रालय में सेटअप क्यों बढ़ाया जाए, इसलिए सरकार ने रास्ता निकालते हुए हिमांशु को ही ओएसडी बना दिया। वैसे, पहले खुफिया चीफ ही एजेंसियों को लायसेंस जारी करते थे। अब वे ओएसडी के रूप में यही काम करेंगे।

शादियों का महीना

इस महीने ब्यूरोक्रेसी में कई शादियां होंगी। 14 जनवरी को डायरेक्टर इंडस्ट्री अनिल टुटेजा के बेटे यश की शादी है और 15 को रिशेप्सन। इसके बाद 18 जनवरी को तीन शादियां है। पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी तथा लघु वनोपज संघ के एमडी संजय शुक्ला के बेटे, डायरेक्टर पंचायत जितेंद्र शुक्ला और आईएफएस जयसिंह महस्के की बेटी की इसी दिन शादी है। संजय शुक्ला और महस्के समधी बन रहे हैं। इसके बाद 2 फरवरी को एक बड़ी शादी और होगी। चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के बेटे गौरांग भी इस दिन परिणय सूत्र में बंधेंगे।

तीसरे दर्जे की सर्विस

वैसे तो ऑल इंडिया सर्विसेज में पहले नम्बर पर आईएएस, फिर आईपीएस और आईएफएस आते हैं। लेकिन, छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों का प्रमोशन जिस तरह से पिछड़ता जा रहा है, आईपीएस अफसर कहने लगे हैं, अपनी सर्विस अब तीसरे नम्बर की हो गई है। आईएएस का समय चाहे जैसा भी चल रहा हो, प्रमोशन आदि का काम समय पर निबटवा लेते हैं। इस बार तो पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी ने आईएफएस का प्रमोशन और पोस्टिंग दोनों हो गई। आईएफएस में तो थोक में पदोन्नतियां हुई। आईपीएस ही जो लंबे समय से लटका हुआ है। डिमोशन हुए डीजी के लिए 11 दिसंबर को भारत सरकार से अनुमति आने के बाद प्रमोशन नहीं हो रहा तो फिर बाकी को आईजी, डीआईजी को कौन पूछता है।

आंखें पथराई जा रही

राज्य में सरकार बनने के बाद से बोर्ड और निगमों में पोस्टिंग को लेकर कांग्रेसी सीएम भूपेश बघेल पर टकटकी लगाए हुए हैं। और, सीएम हैं कि हर चुनाव के बाद टाईम एक्सटेंड कर देते हैं। विधानसभा चुनाव के बाद बोले लोकसभा के बाद। लोकसभा गुजरा तो नगरीय चुनाव के बाद। अब तो ये भी निबट गया। निगमों की कुर्सियों पर कब से रुमाल रखे कांग्रेसियों का दिल अब बैठा जा रहा है….पता नहीं, दाउ का दिल कब पसीजेगा?

मंडल का मोटिवेशन

ट्राईबल फेस्टिवल के आयोजन में वाहवाही बटोर चुके संस्कृति सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के सामने युवा महोत्सव का आयोजन भी चुनौती से कम नहीं है। सरकार की कोशिश है कि किसी मायने में युवा महोत्सव कमतर न हो। यही वजह है कि चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल भी लगातार इसकी समीक्षा कर रहे हैं। हाल ही में मंत्रालय में हुई एक मीटिंग में परदेशी के प्रेजेंटेशन के बाद मंडल ने पहले मैच में घुंआधार सेंचुरी ठोकने वाले दो क्रिकेटरों के बारे में अफसरों से सवाल कर दिया। कोई जवाब न मिलने पर मंडल बोले, दोनों बैट्समैन बाद के मैच में जीरो पर आउट हो गए….हाल ये है कि उन्हें आज आपलोगों की तरह कोई नहीं जानता। वे फिर सिद्धार्थ की ओर मुखातिब हुए, बोले….तुमने ट्राईबल महोत्सव में बढ़ियां काम किया है, इसका ये मतलब ये नहीं कि उन क्रिकेटरों की तरह ट्राईबल महोत्सव में सेंचुरी मारकर युवा महोत्सव में आउट हो जाओ….तुमको अब डबल सेंचुरी मारना है। मंडल इसी अंदाज में मीटिंग लेते हैं और मोटिवेट भी करते हैं अफसरों को।

जादू की छड़ी

राजधानी पुलिस के कुछ दिनों से लाटरी निकल आए हैं। क्राइम होते हैं मगर एक से दो दिन में आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ जा रहे हैं। चाहे पार्षद का चुनाव जीतने के लिए खुद की कार पर गोली चलाने का मामला हो या माना में युवती और उसके बच्चे को जला देने का मामला। राजधानी में दो बहनों पर अटैक के केस में भी पुलिस ने 24 घंटे में आरोपियों को पकड़ लिया। मंत्री कवासी लकमा को धमकी देने वाले मुजरिम भी तीसरे दिन शिमला में धरे गए। नारियल व्यापारी की गोली मारने का खुलासा भी मात्र 12 घंटे में। आलम यह है कि दूसरे जिलों के कप्तान अब पूछ रहे हैं रायपुर पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी आ गई है क्या। हालांकि, सिलतरा से उद्योगपति का अपहरण राजधानी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। इसे अगर पुलिस ने जल्द सुलझा लिया तो वास्तव में जादू की छड़ी वाली बात स्थापित हो जाएगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस जिले के कलेक्टर से सरकार नाराज है और उसकी कभी भी छुट्टी हो सकती है?
2. मंत्रालय में सचिव लेवल के ट्रांसफर क्या अब युवा महोत्सव के बाद होंगे?

रविवार, 5 जनवरी 2020

सीएम की हाई टी

5 जनवरी 2020
आदिवासी नृत्य महोत्सव के बारे में सरकार ने जितना सोचा नहीं था, उससे अधिक वह सफल हो गया। छह देश…25 राज्य….1800 कलाकार….और, उनकी अद्भूत प्रस्तुति। तीन दिन का आयोजन बिना किसी बाधा, विवाद के निबट गया। उपर से राहुल गांधी इसी एक कार्यक्रम के लिए दिल्ली से रायपुर आए। ऐसे में, सीएम भूपेश बघेल की प्रसन्नता समझी जा सकती है। उन्होंने समापन समारोह के अगले दिन आयोजन को सफल बनाने वालों के लिए हाउस में हाई टी रखा। इसमें चीफ सिकरेट्री, पीसीसीएफ, सिकरेट्री कल्चर से लेकर डीएसपी, नायब तहसीलदार तक को बुलाया गया। मुख्यमंत्री सभी से एक-एक कर मिले…उनसे बात की….पीठ थपथपायी। ये अलग बात है कि महोत्सव की तैयारियों पर सीएम खुद भी नजर रखे रहे। कई मर्तबा साइंस कालेज ग्राउंड गए। फेस्टिवल में भी तीनों दिन पहुंचे। कार्यक्रम ग्रेंड सक्सेस होने का यह भी एक कारण था….सीएम को जब इतना चाव रहेगा तो अफसर चौकस रहेंगे ही। बहरहाल, टीम मोटिवेशन के लिए सीएम की हाई टी को सबने एप्रेसियेट किया। क्योंकि, बड़े आयोजन का क्रेडिट आमतौर पर बड़े अफसर बटोर ले जाते हैं। नीचे वालों को आखिर कोई कहां पूछता है।

सीएस की नो टी

मंत्रालय में कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब चीफ सिकरेट्री की मिनिमम चार-पांच बैठकें नहीं होतीं। इन बैठकों में चाय-बिस्किट भी सर्व होती थी। सीएस का चूकि अपना पेंट्री कार है, इसलिए इसमें कोई दिक्कत नहीं थी….अफसरों को भाप निकलती चाय मिल जाती थी। मगर जब से आरपी मंडल मुख्य सचिव बने हैं, मीटिंगों से चाय-बिस्किट गायब हो गई है। सीएस ने दो टूक कह दिया है, नो टी…मीटिंग मतलब सिर्फ मीटिंग।

ईश्वरीय चमत्कार या….

वायु को शुद्ध रखने वाले मलाईदार विभाग के रीजनल अफसर का सरकार ने रायपुर से रायगढ़ ट्रांसफर किया था और रायगढ़ वाले का रायपुर। रायपुर वाले अफसर का रिटायरमेंट में तीन महीने से कम समय बचा था, इसका हवाला देकर वे रायगढ़ गए नहीं और रायगढ़ वाले रिलीव होकर रायपुर आ गए। रायगढ़ वाले अफसर वहां से रिलीव हो गए थे इसलिए फिर से उनकी पोस्टिंग हो नहीं सकती थी और सरकार के आदेश के बाद भी रायपुर वाले हटने के लिए तैयार नहीं हुए। लिहाजा, रायगढ़ से आए अफसर पेंडुलम बनकर मुख्यालय में अटैच हो गए। अब इसमें क्लास यह हुआ कि जिस अफसर को रायपुर से रायगढ़ भेजा जा रहा था और उसने सरकार के आदेश को मानने से इंकार कर दिया, उसे रिटायरमेंट के रोज 31 दिसंबर को उसी पद पर संविदा पोस्टिंग दे दी गई। जाहिर है, कोई नाराजगी होगी तभी रिटायरमेंट के समय उनका ट्रांसफर किया गया। लेकिन, उपर से कुछ ऐसा प्रेशर बना कि शाम को पांच बजे के बाद मंत्रालय खोलकर अफसर का संविदा आर्डर निकाला गया। अफसर के बारे में बताया जाता है, ईश्वर में उनकी अगाध आस्था है….आफिस के आधे हिस्सों को मंदिर में कंवर्ट कर दिया है…नारियल, फूल, अगरबत्ती से लेकर पूजन की हर सामग्री मिल जाएगी। एक बात और….अफसर में मैनेजमेंट की अद्भूत कला है। उस आफिस में आरटीआई लगाने वालों के घर मिठाई का डिब्बा पहुंच जाता है। ऐसे में, अफसर की संविदा पोस्टिंग के पीछे ईश्वरीय चमत्कार है या मैनेजमेंट का कौशल, यह रहस्य बना हुआ है।

सीएस का नया बंगला

चीफ सिकरेट्री की गरिमा के अनुरुप 2011 में शंकर नगर में एक बंगला इयरमार्क किया गया था। लेकिन, विडंबना यह कि उसमें सिर्फ चार मुख्य सचिवों को ही रहने का मौका मिल पाया। पी जाय उम्मेन, सुनिल कुमार, विवेक ढांड और अजय सिंह। नई सरकार ने इस बंगले को आईएएस पुल से लेकर मंत्री जय सिंह अग्रवाल को अलॉट कर दिया। राजधानी में सीएस का बंगला न होने की दिक्कत आरपी मंडल को हो रही है। देवेंद्र नगर में उनका उस समय का बंगला है, जब 2003 में वे बिलासपुर कलेक्टर से सिकरेट्री बनकर रायपुर आए थे। सी टाईप बंगले में इतनी जगह नहीं होती कि उसमें आफिस और निवास बनाया जा सकें। या कोई मिलने आए तो उसे प्रॉपर बिठाया जाए। इसको देखते सीएस अब बंगला बदल रहे हैं। वे नया रायपुर जा रहे हैं। पीएचक्यू के पीछे सेक्टर 17 में सीएस बंगला तैयार किया जा रहा है। बहुत जल्द वे वहां शिफ्थ हो जाएंगे। सीएस इसके जरिये एक मैसेज भी देना चाहते हैं, बाकी अफसरों को…वे भी नया रायपुर शिफ्थ हों। अभी तक इसको लेकर बातें होती है कि नया रायपुर को बसाना है तो मंत्रियों और अफसरों को वहां रहना चाहिए। अफसरों में अभी सिकरेट्री रीना बाबा कंगाले, डीआईजी संजीव शुक्ला और ईओडब्लू एसपी सदानंद नया रायपुर में रहते है। सीएस लेवल का अफसर पहली बार नया रायपुर जा रहा है।

अहम पोस्टिंग

दिल्ली डेपुटेशन पर पोस्टेड छत्तीसगढ़ की 2003 बैच की आईएएस रीतु सेन इस समय सबसे महत्वपूर्ण पोस्टिंग होल्ड कर रही हैं। वे शहरी आवास विभाग की डायरेक्टर हैं। अभी वे आवास शाखा देख रही हैं। दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से लेकर सांसदों, नौकरशाहों को अगर घर चाहिए तो उनकी फाइल रीतु के टेबल पर जाएगी ही। दिल्ली में सरकारी मकानों की वैसे भी भारी मारामारी रहती है। ऐसे में, उनकी पोस्टिंग का मतलब आप समझ सकते हैं। इस पद पर बैठने वाले अफसरों का नेटवर्क बेहद मजबूत हो जाता है। क्योंकि, घर सबको चाहिए, चाहे वो रुलिंग पार्टी के हां या विरोधी पार्टी के। रीतु छत्तीसगढ़ में सरगुजा कलेक्टर रहने के दौरान कई महत्वपूर्ण काम की थी। खासकर स्वच्छता के क्षेत्र में।

बीजेपी में उलटफेर

भाजपा संगठन में जल्द ही बड़ा फेरबदल होगा। प्रदेश भापजा का निजाम बदलेगा, तो संगठन मंत्री के पद पर पवन साय की जगह कोई नया चेहरा आ सकता है। भाजपा के भीतर वैसे पूर्व मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह के केंद्र में जाने की अटकलें भी चल रही है। बहरहाल, नए अध्यक्ष के लिए वैसे तो दो-तीन नाम प्रमुख हैं। लेकिन, सबसे प्रबल दावेदारी दुर्ग सांसद विजय बघेल की बताई जा रही है। वे पौने चार लाख से लोकसभा चुनाव जीते हैं और ओबीसी भी हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रिश्ते में भी लगते हैं। इसलिए, कई नेता विजय को पार्टी के लिए मुफीद मान रही है। लेकिन, विजय की ताजपोशी इतना आसान नहीं होगा। भाजपा के भीतर ही उनके नाम पर विरोध करने वालों की कमी नहीं है।

न्यू ईयर पोस्टिंग

पुलिस मुख्यालय में पोस्टेड एडीजी एसआरपी कल्लूरी और आईजी दीपांशु काबरा के पास अभी कोई काम नहीं है। सरकार ने दीपांशु को रायपुर रेंज आईजी से हटाकर पीएचक्यू भेजा था। और, कल्लूरी को ट्रांसपोर्ट से शिफ्ट तो किया मगर कोई जिम्मेदारी नहीं दी है। जाहिर है, कल्लूरी और दीपांशु को नए साल से बड़ी उम्मीदें होंगी….शायद कोई विभाग मिल जाए। अंदर की खबर है, दोनों के लिए नया साल गुड हो सकता है। जल्द ही एडीजी से डीजी प्रमोशन के लिए डीपीसी होने वाली है। इसमें पीएचक्यू में अहम सर्जरी होगी। इसमें कल्लूरी और दीपांशु दोनों को पोस्टिंग मिल सकती है।

पोस्टिंग का वेट

मंत्रालय में सचिव लेवल पर संभावित उलटफेर को लेकर अफसरों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। सबकी एक ही जिज्ञासा है, सरकार के एक बरस पूरे होने के बाद होने वाले फेरबदल में किसे क्या मिलेगा। चर्चा है कि कुछ दिनों में जिन अफसरों ने बढ़ियां प्रदर्शन किया है, उन्हें सरकार ठीक-ठाक पोस्ट देगी। हो सकता है, सीएम सचिवालय में भी एक आईएएस पोस्ट किया जाए। सीएम के सचिवालय में अफसरों की कमी तो है। डा0 आलोक शुक्ला और प्रसन्ना आर को भी नई जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। सिद्धार्थ परदेशी के परफारमेंस से सीएम बेहद खुश हैं। हो सकता है, सिद्धार्थ के लिए भी कुछ नया हो जाए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एसपी बनने के लिए इन दिनों आईपीएस किस सीनियर पुलिस अधिकारी की परिक्रमा कर रहे हैं?
2. वन विभाग रेंजर से प्रमोट होकर एसीएफ बनें अफसरों को डीएफओ क्यों बना रहा है?

रविवार, 29 दिसंबर 2019

मंत्रियों में घबराहट


29 दिसंबर 2019
नगरीय निकाय चुनाव में जिन इलाकों में सत्ताधारी पार्टी का परफारमेंस पुअर रहा, उन क्ष़्ोत्रों के मंत्रियों की हालत खराब हो रही है। कई मंत्री घबराए हुए हैं। सरकार का वैसे भी एक साल कंप्लीट हो गया है। काम के लिए अब सिर्फ तीन साल बचे हैं। जाहिर है, पांचवे साल में चुनाव की तैयारी शुरू हो जाती है। लिहाजा, सरकार अब कोई एक्सपेरिमेंट नहीं करेगी। वैसे भी, सीएम भूपेश बघेल भी कई बार मंत्रियों को परफारमेंस को लेकर आगाह कर चुके हैं। नगरीय निकाय चुनाव में ओवरऑल पार्टी का प्रदर्शन भी बढ़ियां रहा। राहुल गांधी सीएम की पीठ थपथपा ही गए हैं। सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ल और देवती कर्मा जैसे कई लोग तैयार बैठे हैं। यह सब सोचकर कई मंत्रियों का दिल बैठा जा रहा है। आखिर, दाउ का क्या भरोसा….पुअर परफारमेंस पर कहीं बाहर का रास्ता न दिखा दें?

मंत्रालय में बड़ी सर्जरी

मंत्रालय में सचिव स्तर पर बहुत जल्द एक अहम बदलाव हो सकता है। इसमें सचिव स्तर के कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदलेंगी। कुछ सचिवों के पास कई-कई विभाग हैं। उनके लोड कम किए जाएंगे तो कुछ के दायित्व बढाएं जाएंगे। प्रसन्ना आर जैसे कुछ सिकरेट्री के पास कोई खास काम नहीं है। सरकार उन्हें कोई दूसरी जिम्मेदारी दे सकती है। कुछ मंत्री भी दुखी हैं कि उनके सिकरेट्री ठीक से काम नहीं कर रहे। फेरबदल में सरकार निश्चित तौर पर इसका भी ध्यान रखेगी। वैसे, पीडब्लूडी में भी कुछ चेंजेस हो सकते हैं। कोई आश्चर्य नहीं, पीएस होम सुब्रत साहू को कोई और अहम जिम्मेदारी मिल जाए। प्रिंसिपल सिकरेट्री डा0 आलोक शुक्ला को भी महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जाना लगभग तय लग रहा है। कुल मिलाकर मंत्रालय की सर्जरी अबकी इस हिसाब से की जाएगी कि वह कम-से-कम दो साल तक चले। सीएम भूपेश की काम करने वाली यही असली टीम होगी। वजह यह कि किसी भी नई सरकार का पहला साल अफसरो को परखने में निकल जाता है। एक साल में सीएम भी समझ गए हैं कि कौन काम करने वाले अफसर हैं और कौन जुबानी जमा खर्च वाले।

वेटिंग चेयरमैन

रिटायर आईपीएस गिरधारी नायक मानवाधिकार आयोग के मेम्बर बन गए हैं। जाहिर है, उनकी नजर प्रभारी चेयरमैन की कुर्सी पर रही होगी। क्योंकि, डीजी से रिटायर हुआ अफसर सिर्फ मेम्बर तो बनेगा नहीं। लेकिन, नायक को इसके लिए अभी वेट करना पड़ेगा। आयोग में अभी डिस्ट्रिक्ट जज रैंक के प्रभारी चेयरमैन हैं। उनके रिटायरमेंट में अभी छह-सात महीने का टाईम है। तब तक नायक को सदस्य बनकर काम करना होगा। हालांकि, प्रभारी चेयरमैन बनने के बाद भी नायक के सामने इस बात की खतरा हमेशा रहेगा कि सरकार कभी किसी हाईकोर्ट जस्टिस को चेयरमैन बना दिया तो? जाहिर है, चेयरमैन का पद वस्तुतः हाईकोर्ट के जस्टिस का है। जस्टिस की नियुक्ति न होने पर सरकार प्रभारी चेयरमैन बनाकर अपने लोगों को उपकृत करती है।

शुक्ला की बिदाई नहीं

करीब चार साल बाद मंत्रालय लौटे सीनियर आईएएस डा0 आलोक शुक्ला का जून 2020 में रिटायरमेंट है। याने सिर्फ छह महीने बाद। आलोक आईएएस से जरूर रिटायर हो जाएंगे। लेकिन, सरकार से नहीं। ताजा अपडेट यह है कि जब तक भूपेश सरकार रहेगी, आलोक सरकारी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहेंगे। बताते हैं, सीएम भूपेश बघेल ने भी उन्हें दो टूक कह दिया है, आपको रिटायर नहीं होना है। सरकार का मानना है, जब पिछली सरकार में रिटायमेंट के दस-दस साल बाद बाहरी अधिकारी जमे रहे तो फिर रिजल्ट देने वाले छत्तीसगढ़ियां आईएएस क्यों नहीं। वैसे ठीक भी है। सूबे में सीनियर लेवल पर अफसरों का वैसे ही टोटा है। आलोक तो काबिल अधिकारी माने जाते हैं। फूड और हेल्थ में उन्होंने काफी काम किया है।

व्यापम में आईएएस

आईएफएस उमा देवी के डेपुटेशन पर भारत सरकार जाने से व्यापम चेयरमैन का पद खाली हो गया है। पीएमटी पर्चा कांड के बाद विवादों में रहे इस भर्ती बोर्ड को सरकार मजबूत करने पर विचार कर रही है। इसके लिए जल्द ही किसी आईएएस को व्यापक का नया चेयरमैन अपाइंट किया जा सकता है। आईएएस भी सीनियर होगा। उन्हें टास्ट दिया जाएगा कि खाली पड़े सैकड़ों पदों पर अगले चार साल में ज्यादा-से-ज्यादा भर्तियां पूरी कर लें।

आईपीएस के प्रमोशन

कुछ साल पहिले तक आईपीएस में परंपरा रही कि एक जनवरी को प्रमोशन मिल जाता था। इसकी तैयारी पहले ही पूरी कर ली जाती थी। और, 31 दिसंबर की शाम को आर्डर निकल जाता था। 2009 के बाद यह परंपरा बंद हो गई। लेकिन, इस बार यह सुनने में आ रहा है कि प्रमोशन को लेकर सरकार संजीदा है। गृह विभाग में इसको लेकर कई बैठकें हो चुकी है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही आईपीएस में प्रमोशन हो जाएगा। हालांकि, इस बार संख्या काफी कम है। आईजी से एडीजी प्रमोट होने वाले सिर्फ प्रदीप गुप्ता हैं। वे बिलासपुर के आईजी हैं। प्रमोशन के बाद उन्हें वहीं कंटीन्यू कर दिया जाएगा। डीआईजी टीआर पैकरा आईजी बनेंगे। चूकि वे हाल ही में ट्रांसपोर्ट में आए हैं। लिहाजा, उन्हें भी बदलने की कोई संभावना नहीं है। एसपी से डीआईजी बनने वालों में जरूर चार आईपीएस हैं। इनमें एक राजनांदगांव के एसपी बीएस धु्रव भी शामिल हैं। उनके अलावा आरएन दास, मयंक श्रीवास्तव और टी एक्का भी डीआईजी बनेंगे।

महिला अफसरों पर भरोसा

भारत निर्वाचन आयोग ने आईएएस रीना बाबा कंगाले को राज्य निर्वाचन पदाधिकारी बनाने के लिए ओके कर दिया है। हालांकि, जीएडी से उनका अभी आर्डर नहीं निकला है। सरकार चाह रही है कि रीना के पास एडिशनल चार्ज के रूप में मंत्रालय का चार्ज बना रहे। इसके लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी गई है। बहरहाल, निधि छिब्बर के बाद रीना दूसरी महिला आईएएस होंगी, जिन्हें भारत निर्वाचन आयोग ने इस पद पर पोस्टिंग दी है। दिलचस्प यह है कि निधि छिब्बर का नाम जब निर्वाचन आयोग को भेजा गया था तब तीन सदस्यीय पेनल में उनका नाम सबसे उपर था। आयोग ने उनके नाम को टिक कर दिया था। इस बार भी तीन नाम भेजे गए, उनमें रीना कंगाले, अविनाश चंपावत और सुबोध सिंह के नाम थे। हालांकि, सुबोध का नाम कोरम पूरा करने के लिए भेजा गया होगा, क्योंकि उन्हें डेपुटेशन पर जाने राज्य सरकार एनओसी दे चुकी है।

मंत्रियों में टकराव?

नगरीय निकाय चुनाव में राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने पार्टी के पिछड़ने का ठीकरा पुलिस पर फोड़ा है। अग्रवाल का आरोप है कि पुलिस ने कांग्रेस पार्टी के पार्षदों को हराने के लिए काम किया। राजस्व मंत्री के इस आरोप के बाद गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने अपनी पुलिस का बचाव करने में देर नहीं लगाई। उन्होंने कहा, पता नहीं मंत्रीजी ने ये कैसे कह दिया। पुलिस ऐसा काम नहीं कर सकती….पुलिस हराने और जिताने का काम नहीं करती। तो क्या इसे मंत्रियों में टकराव की शुरूआत मानी जाए।

विभाग छोटा, काम बड़ा

गर ढंग से काम किया जाए तो छोटा विभाग भी अहम बन जाता है। जैसा संस्कृति विभाग अभी हुआ है। आदिवासी डांस महोत्सव से पहिले भला कौन जानता था कि पुछल्ला सा विभाग राज्य और राज्य सरकार की इस तरीके से ब्रांडिंग करा देगा। नेशनल मीडिया में यह आयोजन सुर्खियों में रहा। इस आयोजन की खासियत यह है कि सरकार का इसमें एक रुपया नहीं लगा। बारह-तेरह करोड़ रुपए में में से साढ़े सात करोड़ एनएमडीसी दे दिया। बाकी पैसा लोकल इंडस्ट्री देने वाली है। इस आयोजन से संस्कृति सचिव सिद्धार्थ परदेशी का नम्बर बढ़ गया है। सरकार में बैठे लोग भी बोल रहे, सिद्धार्थ ने जबर्दस्त मेहनत किया। हालांकि, अगला साल पर्यटन विभाग के लिए भी अहम होगा। रामपथ गमन के साथ ही कोरबा के बांगो को नेशनल लेवल का टूरिस्ट सेंटर बनाने पर काम प्रारंभ हो गया है। बांगो के बारे में बताते हैं, वैसा लंबा झील देश में कहीं नहीं है। भोपाल से भी बड़ा। करीब 40 किमी में पसरा। सिकरेट्री टूरिज्म अंबलगन पी इसके लिए बांगो का मुआयना करके आ चुके हैं। मंत्रालय में इस मास्टर प्लान पर काम प्रारंभ हो चुका है। याने टूरिज्म भी कुछ बड़ा करने वाला है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. नए साल में सैर-सपाटे पर जाने सरकार से छुट्टी मांगने से ब्यूरोक्रेट्स घबरा क्यों रहे हैं?
2. दुर्ग सांसद विजय बघेल क्या भारतीय जनता पार्टी के अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे?

शनिवार, 28 दिसंबर 2019

फिर आचार संहिता



22 दिसंबर 2019
नगरीय निकाय चुनाव के नतीजे 24 दिसंबर को आएंगे। इससे पहिले राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल, आयोग के पास टाईम भी नहीं है। 15 फरवरी तक ग्राम पंचायत, जनपद और जिला पंचायतों के पदाधिकारियों को शपथ दिलाने की प्रक्रिया निबटानी पड़ेगी। खबर है, नगरीय निकाय के रिजल्ट के एक-दो दिन के भीतर ही आयोग पंचायत चुनाव का ऐलान कर देगा। इसके साथ ही कोड ऑफ कंडक्ट फिर प्रभावशील हो जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि आचार संहिता की वजह से डेढ़ महीने से सरकारी कामधाम ठप पड़ा है, वो 20 फरवरी तक फुरसत समझिए। छत्तीसगढ़ के साथ यही बिडंबना है, राज्य सरकार के पांच साल में से सवा साल आचार संहिता में गुजर जाता है। विधानसभा चुनाव के लिए पिछले साल 6 अक्टूबर को कोड ऑफ कंडक्ट लगा था। वह दिसंबर एंड में खतम हुआ। जनवरी नया साल में निकल गया। फरवरी में लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई। मई एंड में लोस चुनाव संपन्न हुआ तो जून में बरसात शुरू हो गई। अक्टूबर बरसात, दशहरा और दिवाली में निकल गया। नवंबर में ठाकुर राम सिंह ने नगरीय निकाय चुनाव का बिगुल फूंक दिया। और, अब पंचायत चुनाव। वैसे, कम-से-कम इस साल तो ये ठीक है, फरवरी में बजट पेश हो जाएगा। इसके बाद नया बजट, नया काम।

अफसरों को अभयदान

यह बात स्पष्ट है, नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों से जिलों के कलेक्टर्स एवं नगर निगम कमिश्नरों का न केवल परफारमेंस आंका जाएगा….बल्कि इसी से उनका भविष्य तय होगा। अधिकांश कलेक्टरों एवं निगम कमिश्नरों का जिलों में एक बरस पूरा हो गया है। ऐसे में, कोई कलेक्टर या कमिश्नर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। कलेक्टर वैसे भी जिले में सरकार के प्रतिनिधि होते हैं। रिजल्ट अनुकूल नहीं आने का मतलब होगा, उन्होंने सरकार की योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं कराया। कलेक्टर्स और कमिश्नर्स भी इस चीज को समझ रहे हैं। तभी 25 दिसंबर का डेट उन्हें काफी डराया हुआ है। इस दिन चुनाव के रिजल्ट आएंगे। लेकिन, रिजल्ट अच्छा आए या खराब। पंचायत चुनाव के चलते उन्हें अब फरवरी तक के लिए अभयदान मिल जाएगा। आचार संहिता की वजह से अफसरों को हटाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि, कलेक्टर डिस्ट्रिक्ट रिटर्निंग आफिसर होते हैं। उसी तरह निगम कमिश्नर असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट रिटर्निंग आफिसर।

अब बजट के बाद

पंचायत चुनाव के चलते लगता है, मेगा प्रशासनिक फेरबदल अब बजट के बाद ही हो पाएगा। फरवरी में मुख्यमंत्री एवं भारसाधक वित्त मंत्री भूपेश बघेल अपना दूसरा बजट पेश करेंगे। तब तक धान खरीदी का काम भी पूरा हो जाएगा। तब जिलों में थोक में ट्रांसफर होंगे। हां, मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय में जरूर कुछ अहम बदलाव हो सकते हैं…. ऐसी खबरें आ रही हैं।

डीजी का प्रमोशन

भारत सरकार ने संजय पिल्ले और आरके विज को फिर से डीजी बनाने के लिए अनुमति दे दी है। फिर से का मतलब आप समझते होंगे….दोनों को पिछले साल 6 अक्टूबर को पिछली सरकार ने डीजी बनाया था। नई सरकार ने पदोन्नति को निरस्त कर पिल्ले, विज और मुकेश गुप्ता को डिमोट कर दिया। मुकेश गुप्ता चूकि सस्पेंड हैं, लिहाजा राज्य सरकार ने दो पदों के लिए डीपीसी करने की अनुमति मांगी थी। इस दौरान 30 नवंबर को डीजी बीके सिंह के रिटायर हो जाने के बाद तीसरा पद भी खाली हो गया है। एडीजी अशोक जुनेजा इस तीसरे पद के इकलौते दावेदार हैं। अब प्रश्न यह है कि सरकार दो पदों पर डीपीसी कर देगी या फिर जुनेजा के लिए भारत सरकार से अनुमति आने का वेट करेगी। हालांकि, पिछली सरकार ने बिना अनुमति ही तीनों को डीजी बना दिया था। जुनेजा का प्रमोशन जनवरी से ड्यू है। कुल मिलाकर संजय पिल्ले के ग्रह-नक्षत्र कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। पिछले साल पोस्ट होने के बाद भी उन्हें प्रमोशन के लिए 10 महीना वेट करना पड़ा। क्योंकि, सरकार विज और गुप्ता के बगैर उन्हें डीजी बनाने के लिए तैयार नहीं थी। पिल्ले डीजी बने और बिना कसूर के डिमोट हो गए। उनके लिए एक पोस्ट तो खाली थी ही। लेकिन, एक ही आदेश में तीनों का प्रमोशन हुआ था इसलिए तीनों का निरस्त करना पड़ गया।

सीएस की क्लास

चीफ सिकरेट्री की कुर्सी संभालने के डेढ़ महीने के भीतर आरपी मंडल 23 दिसंबर को तीसरी बार कलेक्टरों से मुखातिब होंगे। उन्होंने कलेक्टरों के साथ जिला पंचायत सीईओ और डीएफओ को भी वीडियोकांफें्रंसिंग में मौजूद रहने के लिए कहा है। सीएस जिलों में चल रहे मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का रिव्यू करेंगे। मंडल के बारे में कलेक्टरों का कहना है कि एजेंडा सिर्फ कहने के लिए होता है, सीएस पूरी क्लास ले डालते हैं। इसलिए, पूरी तैयारी करनी पड़ती है। न जाने किस योजना के बारे में पूछ दें। ऐसे में, नए सीएस से जिले के अधिकारी थोड़ा असहज महसूस करने लगे हैं। पहले महीने में एक वीडियोकांफें्रसिंग होती थी। अब 15 दिन में वीडियोकांफें्रसिंग तो हो ही रही है सीएस खुद ही दौरे पर निकल जा रहे हैं। नवंबर में कलेक्टर कांफ्रेंस के बाद वे संभाग मुख्यालयों में जाकर अफसरों की क्लास ले चुके हैं।

कलेक्टर का बंगला

ब्यूरोक्रेसी का भी अजीब आलम है…राजधानी में एक महिला कलेक्टर के घर पर चोरी हुई तो चोरी पर चिंता जताने की बजाए अफसरों के बीच खुसुर-पुसुर शुरू हो गई….कलेक्टर को राजधानी में आवास कैसे मिल गया है। दरअसल, कलेक्टर को सरकार ने विशेष केस में दो महीने बंगला अपने पास रखने की इजाजत दी थी। नवबंर फर्स्ट वीक में यह पीरियड खतम हो गया था। सिर्फ डेढ़ महीना लेट हुआ आवास खाली करने में। तब तक चोरों ने हाथ साफ कर दिया। उधर, कलेक्टर का आदेश निकलते ही एडीजी पवनदेव ने सितंबर में ही यह बंगला अपने नाम पर अलॉट करा लिया था। नया अपडेट यह है कि महिला कलेक्टर ने बंगला खाली कर दिया है। पीडब्लूडी ने उसकी चाबी पवनदेव को सौंप दी है। बिलासपुर आईजी बनने से पहिले पवनदेव इसी बंगले में रहते थे। जाहिर है, इस बंगले से उनका लगाव तो रहेगा ही।

अंत में दो सवाल आपसे

1. पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए अफसर आजकल अपने सर्विस के स्टे्टस का ध्यान क्यों नहीं रख रहे?
2. नगरीय निकाय चुनाव के बाद बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां होगी या पंचायत चुनाव के बाद?

रविवार, 8 दिसंबर 2019

कलेक्टर्स, कमिश्नर्स और स्कूटी

8 दिसंबर 2019
नौकरशाहों के लिए सबसे प्रिय कोई चीज होती है तो वह है गाड़ी और बंगला। अफसर बिरादरी में इसी से उनकी हैसियत आंकी जाती है। उनके बंगले में कम-से-कम तीन गाड़ियां तो खड़ी होनी ही चाहिए। लेकिन, छत्तीसगढ़ में पता नहीं अफसरों को किसकी नजर लग गई, पहले पीली बत्ती उतर गई। और अब चीफ सिकरेट्री ने ऐसा कर दिया है कि सरकारी गाड़ियों का मोह छोड़ कलेक्टरों, निगम कमिश्नरों को अब मोटरसायकिलों पर घूमना पड़ रहा है। उनमें भी नम्बर बढ़ाने के लिए स्कूटर में बैठे फोटो वायरल करने की मजबूरी। सुबह की ठंड में टू व्हीलर वाली फोटो शेयर करने वाले अफसरों का दर्द आप समझ सकते हैं।

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आईपीएस में उलटफेर

पुलिस मुख्यालय में सरकार जल्द ही बड़ी उलटफेर कर सकती है। संकेत हैं, डीजी के लिए होने जा रही डीपीसी के बाद सरकार अहम आदेश निकालेगी। इसमें पीएचक्यू समेत जेल, होमगार्ड, नक्सल आपरेशन, लोक अभियोजन, सबमें बदलाव किया जा सकता है। नए फेरबदल में आईपीएस अशोक जुनेजा को अहम पोस्टिंग मिल सकती है तो एडीजी पवनदेव को पीएचक्यू में और जिम्मेदारी मिलेगी। अशोक जुनेजा रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर तीनों बड़े जिलों के एसपी रह चुके हैं। बिलासपुर और दुर्ग के आईजी भी। ट्रांसपोर्ट में भी रहे हैं और युवा और खेल में भी। मंत्रालय में सिकरेट्री होम भी। पीएचक्यू में प्रशासन और छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स, पुलिस ट्रेनिंग, पुलिस भरती अभी हैं ही। याने पूरा तजुर्बा है उनके पास। नए फेरबदल में एसआरपी कल्लूरी को भी कोई विभाग दिया जाएगा। ट्रांसपोर्ट से हटने के बाद कल्लूरी के पास अभी कोई विभाग नहीं है।

डीजी के लिए डीपीसी

संजय पिल्ले और आरके विज को एडीजी से डीजी बनाने राज्य सरकार ने भारत सरकार को लेटर लिखा था, उसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। और, महीना भर हो भी गया है। नियम यह है कि भारत सरकार महीने भर के भीतर कोई आपत्ति नहीं करती या कोई रिप्लाई नहीं आता तो राज्य सरकार प्रमोशन कर सकती है। हाल ही में 2004 बैच के आईएएस को सिकरेट्री बनाया गया, उसमें भी ऐसा ही हुआ। आदेश के नीचे में जीएडी ने इसका हवाला देते हुए बताया था कि भारत सरकार को एक महीने पहले अनुमति के लिए पत्र भेजा गया और एक महीने की अवधि पूरी हो गई, इसलिए प्रमोशन किया जाता है। ऐसे में, पिल्ले और विज की किसी भी दिन डीपीसी हो सकती है। साथ में, एडीजी अशोक जुनेजा की भी डीपीसी होने की खबर है। क्योंकि, डीजी जेल बीके सिंह के रिटायर होने के बाद डीजी के तीन पद खाली हो गए हैं। और, मुकेश गुप्ता सस्पेंड हैं, लिहाजा उनका प्रमोशन अब हो नहीं सकता। मुकेश के बाद सीनियरिटी में जुनेजा आते हैं। और, जनवरी 2019 से उनका प्रमोशन ड्यू भी हो गया है।

मंत्रालय में भी चेंज

हालांकि, 31 अक्टूबर को नए चीफ सिकरेट्री की पोस्टिंग के साथ ही कुछ सचिवों के प्रभार में बदलाव किया गया था। बावजूद इसके संकेत मिल रहे हैं, मंत्रालय में सिकरेट्री की एक और लिस्ट निकल सकती है। इसमें कुछ अहम विभागों के सचिवों को इधर-से-उधर किया जाएगा। प्रिंसिपल सिकरेट्री होम एंड जेल सुब्रत साहू को एकाध विभाग और मिल सकता है।

कलेक्टरों की बढ़ी धड़कनें

धान खरीदी प्रारंभ होने के बाद सूबे के सीमाई जिलों के कलेक्टरों की धड़कनें तेज हो गई है….पता नहीं किस दिन आर्डर निकल जाए। दरअसल, सरकार की नोटिस में है कि हर साल छत्तीसगढ़ में लगभग पांच लाख मीट्रिक टन अवैध धान दूसरे प्रदेशों से आता है। लगभग 12 सौ करोड़ का। इस साल बिचौलियों के लिए तो लाटरी निकलने जैसा था…भूपेश बघेल सरकार 25 सौ में धान खरीद रही है। लिहाजा, अवैध धान को नहीं रोका गया तो सरकारी खजाने पर चपत बैठनी तय है। इसे रोकना सरकार के लिए चुनौती से कम नहीं है। चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल ने इसके लिए कलेक्टर, एसपी का अलग से व्हाट्सएप ग्रुप बना दिया है। वे सुबह से पूछना चालू कर देते हैं, किसने, कितना धान पकड़ा। इसके बाद फूड सिकरेट्री कमलप्रीत और मार्कफेड एमडी शम्मी आबिदी का दिन भर कलेक्टरों को फोन। हालांकि, कलेक्टरों ने अभी तक पिछले साल की तुलना में सिर्फ सात दिन में चार गुना अधिक अवैध धान पकड़ लिया है। फिर भी, कोरिया, बलरामपुर, धमतरी, राजनांदगांव, कवर्धा, गरियाबंद समेत दस सीमाई जिलों के कलेक्टरों के लिए मुसीबत तो है, पता नहीं कब क्या हो जाए।

खेतान, सुब्रत भी लपेटे में

आईएएस अफसर विधानसभा में सवाल उठाने को लेकर भले ही भड़के हुए हों लेकिन, क्लास ये भी है कि सवाल के जवाब तैयार करने के तरीके से आईएएस एसोसियेशन के प्रेसिडेंट सीके खेतान और पीए होम सुब्रत साहू भी लपेटे में आ गए हैं। मंत्रालय से विधानसभा को भेजे गए जवाब में खेतान को तीन देश और सुब्रत को दो देशों की निजी यात्रा की जानकारी दी गई। जबकि, खेतान का दो दौरा टोटली सरकारी था। एक तो ऑस्ट्रेलिया में वे नरवा, गरवा पर उन्होंने भाषण दिया था। और, दूसरा आक्सफोर्ड में दो हफ्ते का स्टडी टूर। उन्होंने दो-दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी ले ली और उन्हीं के बिरादरी वाले अफसरों ने उसे प्रायवेट यात्रा करार देकर विधानसभा को जानकारी भेज दी। ऐसा ही कुछ सुब्रत साहू के साथ हुआ। ऐसे में, आईएएस लॉबी का जज्बाती होकर न्याय की बात करना, कितना लाजिमी है। आईएएस लॉबी का कहना है, निजी यात्राओं के लिए अनुमति लेना आवश्यक नहीं है। तो उनसे पूछना चाहिए…फिर खेतान और सुब्रत के सरकारी दौरे को निजी क्यों बता डाले।

रियल इस्टेट को राहत

रियल इस्टेट को भूपेश बघेल सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। अभी तक रियल इस्टेट के लिए कोई विभाग नहीं था। कुछ काम टाउन एंड कंट्री में होता था, तो कुछ नगर निगम से। कलेक्टरों को भी बिल्डरों को परिक्रमा लगानी पड़ती थी। अब रियल इस्टेट के लिए आवास पर्यावरण को नोडल विभाग बना दिया है। उनके कामों के लिए सिंगल विंडों सिस्टम प्रारंभ किया जा रहा है। पहले बिल्डरों को प्रोजेक्ट की सरकारी प्रक्रिया पूरी करने में दो साल तक लग जाते थे। बिल्डरों ने सीएम को बताया था कि इसके चलते प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाती है। सीएम ने इसके बाद अफसरों को निर्देश दिए कि ऐसी व्यवस्था बनाएं कि दो महीने में बिल्डरों का काम निबट जाए। इसी तरह उद्योगों के लिए भी सिंगल विंडो सिस्टम प्रारंभ किया जा रहा। अभी तक सिंगल विंडो तो था मगर सिर्फ नाम के लिए। अब इसे धरातल पर उतारा जा रहा है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. विदेश यात्राओं पर भड़कने वाली आईएएस लॉबी पिछली सरकार में जब आईएएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो चुप्पी क्यों साधे रही?
2. दूसरा सवाल,,,,
2. संजय पिल्ले को एडीजी जेल बनाने के बाद एडीजी आरके विज को भी क्या किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जायेगा?

शनिवार, 7 दिसंबर 2019

मंत्री को भी चाहिए न्याय

सूबे के युवा आदिवासी मंत्री का बेटा दुर्ग के इंजीनियरिंग काॅलेज से बीई कर रहे हैं। वहां किसी बात को लेकर हाॅस्टल में कुछ छात्रों से विवाद हो गया। छात्रों के समर्थन में एनएसयूआई के नेता हाॅस्टल पहुंचे और मंत्रीजी के बेटे की जमकर पिटाई कर दी। अब बेटा पिट जाए, किसी भी पिता को भला बर्दाश्त कैसे हो सकता है। वो भी पिता जब मंत्री हों। गुस्से में तमतमाते हुए मंत्रीजी ने फौरन दुर्ग के सीनियर पुलिस अधिकारियों को फोन लगाया। बोले, बेटे के साथ मारपीट करने वालों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भिजवाओ, वरना खैर नहीं….विधानसभा चालू होने वाला है…समझ जाना। मगर मंत्रीजी की इस घुड़की का पुलिस अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ। मंत्रीजी इसके बाद दुर्ग गए और बेटे को साथ लेकर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के पास न्याय मांगने पहुंचे। गृह मंत्रीजी बोले, निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी। मगर क्लास यह है कि घटना के एक हफ्ते बाद गिरफ्तारी तो छोड़िये, अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। सुना है, अब मंत्रीजी कार्रवाई के लिए डीजीपी डीएम अवस्थी से मिलने वाले हैं। ऐसे में, समझा जा सकता है, सूबे में पोलिसिंग की क्या हालत है। मंत्री रिपोर्ट लिखाने भटक रहे हैं, तो आम आदमी का क्या होगा?

अफसर, पुलिस और चोर

एक अफसर के घर में चोरी हुई। पुलिस में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई। चूकि, बड़े अफसर का मामला था, पुलिस हरकत में आई और हाईप्रोफाइल चोर को पकड़ लिया गया। अब आई पैसे और जेवरात की बरामदगी की बारी। चोरी की रिपोर्ट में जो नगदी और गहने का ब्यौरा दिया गया था, चोरों के पास माल उससे कहीं अधिक ज्यादा मिला। रिपोर्ट जितने की लिखाई गई है, पुलिस उससे अधिक भला बरामदगी कैसे दिखा सकती है। चोरों ने भी मीडिया की खबरों को पढ़ लिया था कि इतनी राशि की चोरी हुई है। लिहाजा, पुलिस और चोरों ने मिलकर आपस में समझ लिया और जितनी रकम और जेवरात अफसर द्वारा बताई गई थी, उतना लौटा दिया गया। व्हाट इज आइडिया!

आईएएस में एक, आईपीएस में जीरो

डीजी जेल और होमगार्ड बीके सिंह के रिटायर होने के बाद आईपीएस में सीनियर लेवल पर शून्यता की स्थिति निर्मित हो जाएगी। राज्य बनने के बाद यह पहली बार होगा कि डीजी लेवल पर डीजीपी के अलावा एक भी अफसर नहीं होगा। जबकि, सूबे में डीजी के चार पोस्ट हैं। लेकिन, इस साल डीजी लेवल के तीन आईपीएस रिटायर हो गए। पहले गिरधारी नायक, फिर एएन उपध्याय और अब बीके सिंह। इससे पहिले डीजी लेवल पर अफसरों की संख्या इतनी होती थी कि स्पेशल डीजी बनाना पड़ता था। संतकुमार पासवान स्पेशल डीजी रह चुके हैं। यानि पोस्ट न रहने के बाद भी भारत सरकार से अनुमति लेकर प्रमोशन दे दिया जाता था। मगर इस बार मामला ही उल्टा है। डीजी लेवल पर कोई अफसर ही नहीं है। पूरे तीन पद खाली हैं। कमोवेश इसी तरह के हालात आईएएस में भी है। चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के बाद मंत्रालय में सिर्फ एक एडिशनल चीफ सिकरेट्री हैं। अमिताभ जैन। ऐसा कभी नहीं हुआ कि सरकार के पास एक एसीएस हो। एक समय तो छह-छह एसीएस हो गए थे। स्वीकृति पद से भी अधिक। और अभी मात्र एक। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सीएस 87 बैच के हैं। उनसे नीचे 88 बैच में केडीपी राव थे। वे 31 अक्टूबर को रिटायर हो गए। 89 बैच में भी एक ही आईएएस हैं। अमिताभ जैन। 90 बैच के शैलेष पाठक नौकरी छोड़ दिए। 91 बैच में रेणु पिल्ले, 92 बैच में सुब्रत साहू और 93 बैच में अमित अग्रवाल हैं। याने सभी बैच में एक-एक अफसर। 94 बैच में जरूर चार-पांच आईएएस हैं। मगर दिक्कत यह है कि 2024 या बहुत हुआ तो 2023 के एंड में ये एसीएस बन पाएंगे। तब मंत्रालय में यही स्थिति रहनी है।

सीएस के ग्रुप में एसपी

अवैघ धान पकड़ने में जिले के पुलिस कप्तान कितने सजग हैं, चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल इस पर नजर रख रहे हैं। इसके लिए चीफ सिकरेट्री ने एक अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हैं। उन्होंने इस ग्रुप में सभी 27 जिलों के कलेक्टरों को जोड़कर सभी को एडमिन बना दिया। कलेक्टरों को उन्होंने अपने-अपने जिलों के एसपी को जोड़ने का मैसेज भेजा। अब सारे कलेक्टर, एसपी सीएस के व्हाट्सएप ग्रुप में हैं। हालांकि, कलेक्टर तो सीएस के ग्रुप में रहते ही हैं, पहला मौका होगा जब सीएस के व्हाट्सएप ग्रुप में एसपी भी जोड़े गए हैं। सीएस लगातार व्हाट्सएप के जरिये धान के अवैध ढुलाई को वाॅच कर रहे हैं।

डीएम भी अब सड़क पर

डीजीपी डीएम अवस्थी भी अब पुलिस मुख्यालय से निकलकर फील्ड में उतर गए हैं। पिछले हफ्ते अचानक वे धमतरी जिलों के कई थानों में धमक गए। एक थाने में डीजीपी जब पहुंचे तो वहां जश्न की तैयारी चल रही थी। थाने में एक भी स्टाफ बर्दी में नहीं था। कोई जिंस में था तो कोई टीशर्ट में। डीएम ने थानेदार समेत सात पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

अजय अध्यक्ष?

विधानसभा के शीत सत्र में विधायक अजय चंद्राकर गजब फर्म में दिखे। लगा पूरी पार्टी एक तरफ और अजय एक तरफ। विपक्ष की ओर से सत्ता पक्ष पर हमला बोलने का जिम्मा अकेले ही संभाले रहे। उनकी आक्रमकता ने मंत्रियों को भी कई बार असहज किया। पता चला है, बीजेपी में नया अध्यक्ष अपाइंट होने वाला है। उसमें अजय चंद्राकर का भी नाम है। चंद्राकर के साथ सिर्फ एक रोड़ा है वह कुर्मी होना। असल में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी उन्हीं के समुदाय से आते हैं। अब एक ही वर्ग से दो बड़े पदों पर नियुक्ति तो हो नहीं सकती। लेकिन, यह अवश्य है कि अजय चंद्राकर तगड़े दावेदार हैं अध्यक्ष पद के। भाजपा भी चाह रही है कि सूबे में अगर सीएम भूपेश बघेल जैसे नेता से अगर टक्कर लेना है, तो आक्रमक नेता को ही पार्टी की कमान सौंपनी होगी। शिवप्रताप सिंह, रामसेवक पैकरा, विष्णुदेव साय, विक्रम उसेंडी….अब बहुत हो गया।

बनवारीलाल की चूक

भाजपा नेता बनवारीलाल अग्रवाल की एक राजनीतिक चूक ने छत्तीसगढ़ में विपक्ष को विधानसभा का उपाध्यक्ष पद देने की परंपरा ही खतम कर दी। अजीत जोगी सरकार के समय बनवारी लाल अग्रवाल डिप्टी स्पीकर थे। उन्होंने सरकार से किसी बात पर अनबन होने पर इस पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद तत्कालीन सीएम अजीत जोगी ने कांग्रेस के धरमजीत सिंह को विस उपाध्यक्ष बनवा दिया। कांग्रेस के बाद बीजेपी के कार्यकाल में भी ऐसा ही हुआ। भाजपा ने अपनी ही पार्टी के नारायण चंदेल और बद्रीधर दीवान को विस उपाध्यक्ष बनाया। अब कांग्रेस भी मनोज मंडावी को उपाध्यक्ष बनाने जा रही है।

अंत में दो सवाल आपसे

नगरीय निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन न करने पर कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नरों को क्या बदला जाएगा?
राजस्व सचिव एनके खाखा रिटायर हो रहे हैं, क्या उन्हें कोई पोस्ट रिटायरमेेेंट पोस्टिंग मिलेगी?

शनिवार, 23 नवंबर 2019

दो गाड़ी, 8 कमिश्नर, कलेक्टर

24 नवंबर 2019
कमिश्नर और सात कलेक्टर दो गाड़ी में….यह थोड़ा अटपटा लग सकता है। मगर 21 नवंबर को दोपहर जब नया रायपुर के स्टार होटल मेफेयर में कमिश्नर, कलेक्टर्स गाड़ी से उतरे तो देखने वाले आवाक रह गए! जनरल पब्लिक की तरह कलेक्टर्स…? दरअसल, चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल ने जब छह दिन के भीतर दूसरी बार बस्तर के कमिश्नर, कलेक्टर्स, सीईओ को रायपुर तलब किया तो साफ तौर पर हिदायत दी गई वे अलग-अलग गाड़ियों में आकर सरकारी धन का अपव्यय करने की बजाए दो गाड़ियों में आएं। अब सीएस का हुकूम था। सो, उसका पालन करना ही था। बस्तर के सभी सातों कलेक्टर कमिश्नर बंगले में एकत्रित हुए। और, फिर वहां से एक गाड़ी में कमिश्नर और तीन कलेक्टर बैठे और दूसरी में चार कलेक्टर। इसी तरह दो अन्य गाड़ियों में सात जिला पंचायत सीईओ। होटल मेफेयर में सभी को लजीज भोजन कराया गया। कई तो धन्य हो लिए मेफेयर होटल को देखकर ही, खाने की तो पूछिए मत! लंच के बाद सभी अफसरों को मंत्रालय ले जाया गया मीटिंग के लिए। वहां फिर बस्तर संभाग के डेवलपमेंट को लेकर अफसरों की ऐसी खिंचाई हुई कि जब वे बाहर निकले तो चेहरा देखने लायक था। खुद को सुपरमैन समझने वाले कलेक्टरों को एक तो गाड़ियों में भर कर आना पड़ा और उस पर से….टांग देंगे, लटका देंगे। इसे ही कहते हैं, खिला-पिलाकर धुलाई। कागजों और सोशल मीडिया में काम करके सरकार को भ्रमित करने वाले कलेक्टरों को अब संभल जाना चाहिए।

अजब-गजब

जिस महिला आईएफएस पर 13 करोड़ के बॉटनीकल गार्डन में गड़बड़झाला करने का आरोप लगा था, वह रायपुर की डीएफओ बन गई। जंगल सफारी में पोस्टिंग के दौरान महिला आईएफएस ने नया रायपुर में 13 करोड़ का बॉटनीकल गार्डन बनवाया था। एक कांग्रेस नेता ने आरटीआई में जानकारी निकलवाई कि गार्डन में मुश्किल से तीन करोड़ भी खर्च नहीं हुए हैं। नेता ने पूरे दस्तावेज के साथ अफसर के खिलाफ ईओडब्लू में शिकायत की। शिकायत गंभीर किस्म की है, इसलिए ईओडब्लू ने जांच के लिए सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति की फाइल सरकार में प्रक्रियाधीन है। इससे पहिले महिला अफसर को रायपुर जैसे डिवीजन की कमान सौंप दी गई। इस चक्कर में रायपुर के डीएफओ उत्तम गुप्ता को छह महीने में ही हटना पड़ गया। उत्तम वही आईएफएस हैं, जिन्होंने पिछली सरकार के वन मंत्री के 50 लाख के फर्जी वाउचर पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया था। इसके लिए पुरस्कृत होने की बजाए छुट्टी हो गई। है न अजब-गजब!

जय-बीरु की जोड़ी

ब्यूरोक्रेसी में कभी आईएएस आरपी मंडल और आईपीएस अशोक जुनेजा को जय-बीरु की जोड़ी कहा जाता था। दोनों पहले बिलासपुर के कलेक्टर-एसपी रहे और फिर रायपुर के। राजधानी में ये जोड़ी काफी हिट रही….दोनों हर मौके पर साथ दिखते थे। वक्त बदला….जय अब चीफ सिकरेट्री हैं और बीरु एडीजी रह गए। बीरु का जनवरी से प्रमोशन ड्यू है। अब पीएचक्यू में अफसर चुटकी ले रहे हैं…क्या बीरु को डीजी बनाने में जय मदद करेंगे। यह सवाल इसलिए भी मौजूं है कि 30 नवंबर को डीजी जेल बीके सिंह रिटायर हो रहे हैं। सरकार चाहे तो संजय पिल्ले और आरके विज के साथ अशोक जुनेजा को डीजी बनाने के लिए डीपीसी कर सकती है। भारत सरकार से इजाजत लेकर। जाहिर है, बीरु को जय से उम्मीदें तो होगी ही।

27 तक ऐलान

राज्य निर्वाचन आयोग 28 नवंबर या इससे एकाध दिन पहले नगरीय निकाय चुनाव का ऐलान कर सकता है। यह उसकी मजबूरी भी होगी। क्योंकि, पांच जनवरी तक सभी 151 नगर निगम, नगरपालिकाएं और नगर पंचायतों का गठन हो जाना चाहिए। काउंटिंग के बाद कलेक्टर विधिवत बैठक बुलाएंगे। फिर, इस बार मेयर का चुनाव भी राज्य निर्वाचन आयोग कराएगा। पहले पार्षद और महापौर का चुनाव एक ही दिन होते थे। इसलिए, आयोग का काम इसके बाद खतम हो जाता था। अब पार्षद मेयर चुनेंगे। और, यह राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में होगा। लिहाजा समझा जाता है 27, 28 दिसंबर तक काउंटिंग करना अनिवार्य होगा। तभी पूरी प्रक्रिया पूरी कर 5 जनवरी तक पहली बैठक संपन्न हो पाएगी। सो, यह मानकर चलें कि 28 नवंबर तक सूबे में आचार संहिता की घोषणा हो जाएगी।

नया प्रदेश अध्यक्ष


बीजेपी के दर्जन भर नए जिलाध्यक्षों का ऐलान हो गया है। चार जिलों में निर्वाचन की प्रक्रिय पूरी की जाएगी। इसके बाद बाकी जिलों में मनोनयन कर दिया जाएगा। दरअसल, भाजपा के संविधान के अनुसार कुछ परसेंटेज जिलों में विधिवत चुनाव जरूरी है। याने 27 में से 16 जिलों में। इसके बाद पार्टी मनोनयन के लिए फ्री रहेगी। खासकर जिन जिलों में विवाद की स्थिति है, वहां मनोनयन किया जाएगा। हालांकि, भाजपा के भीतरखाने से यह भी सुनाई पड़ रहा है कि पार्टी अध्यक्ष विक्रम उसेंडी को भी बदलने पर विचार कर रही है। सत्ताधारी पार्टी और उस पर भी सीएम भूपेश बघेल जैसे आक्रमक राजनीति करने वाले नेता हों, उनके सामने उसेंडी बेहद कमजोर पड़ रहे हैं। नए अध्यक्ष को लेकर भाजपा के भीतर खुसुर-फुसुर शुरू हो गई है। नए अध्यक्ष को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं की नजर पूर्व मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह की ओर है। नया अध्यक्ष उनके पसंद का होगा या फिर पार्टी कोई हटकर फैसला करेगी। वैसे, जिला अध्यक्षों में रमन सिंह की चल रही है। इसलिए, पार्टी के बड़े नेता भी नए अध्यक्ष के बारे में खुलकर कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं।

कुजूर की ताजपोशी

निवर्तमान मुख्य सचिव सुनील कुजूर को रिटायर होने के 15 दिन के भीतर ही पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिल गई। उन्हें सहकारिता निर्वाचन आयुक्त बनाया गया है। हालांकि, यह पोस्टिंग चीफ सिकरेट्री से रिटायर होने वाले अफसर के लायक नहीं है। इस पद पर प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी जीएस मिश्रा पोस्टेड रहे हैं। उनसे पहिले एसीएस DS मिश्रा भी। लेकिन, मिश्रा ने भी रिटायर होने के बाद एक साल तक वेट किया। जब कहीं कोई गुंजाइश नहीं बची तब इस पोस्ट के लिए उन्होंने हां किया था। फिर, निर्वाचन की पोस्टिंग को सरकार ने पांच बरस से घटाकर दो बरस कर दिया है। किन्तु कुजूर के सामने कोई विकल्प नहीं था। सीएस लेवल का पोस्ट कहीं खाली नहीं है। रेरा में विवेक ढांड हैं और मुख्य सूचना आयुक्त एमके राउत। बिजली बोर्ड में शैलेंद्र शुक्ला हाल ही में चेयरमैन बने हैं। एक पद सूचना आयुक्त का था। लेकिन, वो और छोटा हो जाता। लिहाजा, कुजूर ने सहकारिता निर्वाचन को ही ओके कर दिया। वैसे भी, कुजूर के पास चुनाव कराने का खासा तर्जुबा है। देश में सबसे अधिक राज्यों में वे प्रेक्षक बनकर चुनाव कराने गए हैं। कई साल तक प्रदेश के निर्वाचन अधिकारी भी रहे हैं।

केडीपी को वेट

सीएस सुनील कुजूर और एसीएस केडीपी राव एक साथ रिटायर हुए थे। कुजूर को पोस्टिंग मिल गई। ऐसे में, सवाल उठता है केडीपी का क्या होगा। केडीपी की सहकारी निर्वाचन में दिलचस्पी थी। लेकिन, वो अब फुल हो गया है। अब एकमात्र बच रहा है सूचना आयुक्त। वहां भी किसी आरटीआई वाले की नियुक्ति की चर्चा हो रही है। ऐसे में, केडीपी को सूचना आयुक्त के लिए जोर लगाना पड़ेगा। तभी कुछ बात बन पाएगी। वरना, पुराना अनुभव है, पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग जितनी जल्दी मिल जाए, उतना अच्छा। धीरे-धीरे मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। गिरधारी नायक का उदाहरण सामने है। याद होगा, एक्स चीफ सिकरेट्री अशोक विजयवर्गीय ने मुख्य सूचना आयुक्त बनने के लिए सीएस जैसा पद छह महीने पहिले छोड़ दिया था। एसीएस सरजियस मिंज ने भी कुछ ऐसा ही किया था। विवेक ढांड को रिटायरमेंट से पहले ही पोस्टिंग मिल गई थी। एमके राउत को रिटायरमेंट के बाद मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति 12 दिन में मिल गई थी । सिकरेट्री सुरेंद्र जायसवाल को रिटायरमेंट की शाम को ही संविदा नियुक्ति मिल गई थी। इसी तरह का कुछ सिकरेट्री हेमंत पहारे के साथ हुआ था।

अंत में दो सवाल आपसे

1. गृह और जेल विभाग से ट्रांसपोर्ट को अलग रखने के मायने क्या हैं?
2. रिटायर आईपीएस गिरधारी नायक को आपदा प्रबंधन का प्रमुख बनाने में किसने रोड़ा लगाया है?