सोमवार, 11 दिसंबर 2017

सोच में जीएडी

रिटायर सिकरेट्री दिनेश श्रीवास्तव ने रिटायरमेंट के बाद प्रमोशन का डिमांड करके सामान्य प्रशासन विभाग को सोच में डाल दिया है। उन्होंने जीएडी को लिखा है कि जब 94 बैच के आईएएस को ड्यू डेट से 14 महीने पहिले प्रमुख सचिव बना दिया तो मेरा क्या कुसूर था। श्रीवास्तव 93 बैच के आईएएस थे। पिछले साल मार्च में वे सिकरेट्री से रिटायर हुए। श्रीवास्तव का कहना है, जीएडी चाहता तो उन्हें प्रमोशन देकर प्रिंसिपल सिकरेट्री बना सकता था। बहरहाल, जीएडी के अफसर उधेड़बुन में हैं कि श्रीवास्तव को क्या जवाब दिया जाए।

झलियामाड़ी स्टाईल

शिक्षाकर्मियों के आंदोलन को भी झलियामाड़ी कांड की तरह निबटाया गया। याद होगा, रमन सरकार की दूसरी पारी में कांकेर जिले के झलियामाड़ी ट्राईबल हॉस्टल में बच्चियों के साथ सेक्सुअल ह्रासमेंट की घटनाएं हुईं थीं। तब छत्तीसगढ़ हिल गया था। कांग्रेस ने इसे बड़ा इश्यू बनाते हुए पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाने के साथ ही राज्य बंद का ऐलान किया था। लेकिन, सरकार के रणनीतिकारों ने ऐसा किया कि मामला ही फुस्स हो गया। आंदोलन शुरू होने की सुबह पीड़ित बच्चियों के परिजनों का लेकर बस सीधे सीएम हाउस के अंदर चली गई थी। मीडियाकर्मी जब हाउस पहुंचे, तब तक सीएम से परिजन मुलाकात कर कार्रवाइयों पर संतोष जता चुके थे। इसी तरह का कुछ ऑपरेशन शिक्षाकर्मी में हुआ। सरकार ने अपने दो प्यादों से वजीर मारने जैसा काम कर दिखाया। मंत्रियों, अफसरों के साथ ही कांग्रेस को सुबह मीडिया से पता चला कि स्ट्राईक कल रात में ही समाप्त हो गई है। वह भी बिना शर्त। कांग्रेस के पास अब कोसने के अलावा कोई चारा नहीं था।

विकास शील डेपुटेशन पर?

प्रिंसिपल सिकरेट्री विकास शील डेपुटेशन पर दिल्ली जा सकते हैं। बहुत पहिले उन्होंने सरकार से अनुमति मांगी थी। सरकार के पास उनका लेटर पेंडिंग है। विकास शील की वाइफ निधि छिब्बर इसी साल मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में दिल्ली गई हैं। अब चूकि, गौरव द्विवेदी दंपति प्रतिनियुक्ति से लौट कर छत्तीसगढ़ आ गए हैं। गौरव की पत्नी ज्वाईन करने के बाद चाईल्ड केयर लीव पर चली गई है। जाहिर है, वे भी कुछ दिन बाद लौट आएंगी। लिहाजा, विकास शील को डेपुटेशन के लिए एनओसी देने में अब कोई दिक्कत नहीं है। समझा जाता है, इसी दृष्टि से डॉ0 रोहित यादव को सामान्य प्रशासन विभाग का एडिशनल चार्ज दिया गया है। ताकि, विकास शील के जाने के बाद रोहित जीएडी संभाल लें।

ऑल रिजनल सर्विस

आईएएस अफिसर ऑल इंडिया सर्विस के होते हैं। इसलिए नाम भी है इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस। मगर छत्तीसगढ़ में एक क्षेत्र विशेष के आईएएस जिस तरह क्षेत्रवाद चला रहे हैं, इससे लगता नहीं कि वे ऑल इंडिया सर्विस के अफसर हैं। आलम यह है कि उन अफसरों की एक्टिवीटी को देखकर अब ब्यूरोक्रेसी में लोग कहने लगे हैं, इन लोगों के लिए एक ऑल इंडिया सर्विस के भीतर एक ऑल रिजनल सर्विस बना देना चाहिए….ऑल रिजनल सर्विस का व्हाट्सएप बनाकर उसी में अपना गुटरगूं करते रहे।

विधानसभा के बाद

पुलिस महकमे की सर्जरी अब विधानसभा के बाद ही हो पाएगी। 22 दिसंबर को सत्र ओवर हो जाएगा। इसके बाद 25 को क्रिसमस है। इसी के आसपास डीपीसी होगी। आधा दर्जन आईपीएस इसमें प्रमोट होकर डीआईजी बनेंगे। तो कुछ को सलेक्शन ग्रेड मिलेगा। डीआईजी बनने वालों में चार एसपी भी हैं। जाहिर है, इनके अलावा कुछ और जिलों में चुनावी दृष्टि से सरकार एसपी बदलेगी। सब मिलारक लगभग आठ-से-नौ जिलों के कप्तान बदलने के संकेत मिल रहे हैं।

मंत्री ने यूं बचाया

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मौजूद न रहने के चलते रायपुर के जिस असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शोयब काजी को सरकार ने सस्पेंड किया था, उसे आखिरकार मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने बहादुरी से बचा लिया। राजवाड़े ने सस्पेंशन की खबर मिलने पर उल्टे तत्कालीन प्रिंसिपल सिकरेट्री लेबर आरपी मंडल को नोटिस इश्यू कर दी थी। बाद में पता चला, मुख्यमंत्री के अनुमोदन से अफसर को निलंबित किया गया है तो मंत्री ने लिख दिया उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने शोयब को मंदिर हसौद भेजा था, इसलिए शोयब सीएम के कार्यक्रम में मौजूद नहीं रह पाए। मंत्री के इस नोटिंग से लेबर विभाग सन्न है। ऐसा कि कोर्ट में वह विभाग का जवाब नहीं रख पाया। जवाब दे भी क्या….विभाग इसमें फंस जाएगा। क्योंकि, मंत्री बोल रहे हैं, मैंने अफसर को कहीं और भेजा था। तो फिर, सरकारी नाफारमानी कैसे हुई। इसी आधार पर कोर्ट ने स्टे दे दिया।

नया ट्रेंड

एंटी करप्शन ब्यूरो ने पिछले महीने एक एसडीएम को रिश्वत लेते हुए पक़ड़ा तो एसडीएम के समाज के लोग अगले दिन सरकार से मिलने पहुंच गए। अब, सीडी कांड में विनोद वर्मा को निर्दोष बताते हुए उनके समाज के लोग सड़क पर उतर गए। उधर, सिकरेट्री ईरीगेशन सोनमणि बोरा ने एक सब इंजीनियर को सस्पेंड क्या किया इंजीनियर उन्हें लाल सलाम बोल ललकारने लगे हैं। ऐसे में, राज्य में अराजकता फैल जाएगी….कोई अफसर काम ही नहीं कर पाएगा। हालांकि, अफसरों को भी कार्रवाइयों में भेदभाव नहीं बरतनी चाहिए।

अंत में दो सवाल आपसे?

1. मुख्यमंत्री द्वारा जोगी कांग्रेस को चुनौती के रूप में उभरना बताने के पीछे क्या राजनीतिक उद्देय हो सकते हैं?
2. देवेंद्र वर्मा ने प्रमुख सचिव संसदीय कार्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष का सलाहकार बनने से भी क्यों इंकार कर दिया?

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें