शनिवार, 24 मार्च 2018

सरकार की शार्ट मेमोरी या....

11 फरवरी

राज्य सरकार ने एक आईपीएस को एसपी बनाया और महीने भर में बदल दिया। आमतौर पर ब्यूरोक्रेसी में ऐसे उदाहरण कम मिलते हैं, जब महीने भर में किसी एसपी का विकेट उड़ गया हो। लेकिन, जब नक्सली वारदात बढ़ने लगी तो सरकार को लगा, गड़बड़ हो गया। फिर, एसपी को चेंज कर दिया गया। हालांकि, इस अफसर से सरकार को पहले भी झटका मिल चुका है। बात 2008 चुनाव के समय का है। उस दौरान वे रायपुर में एडिशनल एसपी ट्रैफिक थे। किसी बड़े बंगले से उनके पास कोई गाड़ी छोड़ने के लिए फोन आया। मगर इस अफसर ने अचार संहिता का हवाला देते हुए गाड़ी छोड़ने से मना कर दिया। तब लग रहा था कि सरकार गई और कांग्रेस की ताजपोशी होने ही वाली है। कुछ अफसर इसलिए अति उत्साहित हो गए थे। लेकिन, रिजल्ट आया तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। सरकार के शपथ लेने के बाद ट्रांसफर का पहला आर्डर इसी अफसर का हुआ था। लेकिन, सरकार का बड़ा दिल कहें या शार्ट मेमोरी, आईपीएस को एसपी बना दिया। 

एक और एसीएस


88 बैच के आईएएस केडीपी राव जल्द ही एडिशनल चीफ सिकरेट्री बन जाएंगे। वैसे, उनका प्रमोशन जनवरी से ड्यू है। लेकिन, पोस्ट खाली न होने के कारण उनका नम्बर नहीं लगा। विवेक ढांड के रिटायर होने के बाद अब एसीएस का एक पोस्ट खाली है। विधानसभा सत्र के बाद उनकी डीपीसी हो सकती है। राव फिलहाल, राजस्व बोर्ड के चेयरमैन हैं। राज्य में अभी चीफ सिकरेट्री को छोड़कर एसीएस रैंक के चार आईएएस हैं। सुनील कुजूर, सीके खेतान, आरपी मंडल और बीवी सुब्रमण्यिम। राव पांचवें एसीएस होंगे। उनका रिटायरमेंट भी नजदीक है। अगले साल ही। हालांकि, एन बैजेंद्र कुमार एनएमडीसी नहीं गए होते तो राव का एसीएस बनना आसान नहीं होता। क्योंकि, फिलहाल एसीएस लेवल पर कोई रिटायरमेंट नहीं है। चीफ सिकरेट्री अजय सिंह भी 2020 में रिटायर होंगे।


विकास को हेल्थ


सिकरेट्री स्कूल एजुकेशन विकास शील को भारत सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट में पोस्टिंग मिलना लगभग तय माना जा रहा है। इसके लिए उनकी फाइल भी बढ़ गई है। संकेत हैं, मार्च के फर्स्ट वीक या उसके आसपास उनका आर्डर निकल जाएगा। विकास शील यहां स्वास्थ्य विभाग संभाल चुके हैं। दिल्ली में ज्वाइंट सिकरेट्री हेल्थ का एक पोस्ट खाली था। लिहाजा, उन्होंने इसके लिए प्रयास किया। बताते हैं, पोस्ट भर न जाए, राज्य सरकार ने इसी बेस पर उन्हें डेपुटेशन के लिए एनओसी देने में देर नहीं लगाई। विकास के जाने के बाद सवाल यह है कि स्कूल शिक्षा का नया सिकरेट्री कौन होगा। नाम सिर्फ एक ही आ रहा है। गौरव द्विवेदी। अब देखना है, सरकार क्या निर्णय लेती है। 

सुब्रत को राहत


भारत निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़़ के चीफ इलेक्शन आफिसर सुब्रत साहू को हेल्थ सिकरेट्री के तौर पर मार्च तक काम करने की अनुमति दे दी है। आयोग ने तीसरी बार एक्सटेंशन दिया है। इससे पहिले 31 जनवरी को उनका टाईम खतम हो गया था। सरकार ने इसके बाद चुनाव आयोग को लेटर भेजा था। लेट से ही सही आयोग ने सुब्रत को राहत देने वाला फैसला दे दिया। सुब्रत को अब आगे भी दिक्कत नहीं होने वाली। मध्यप्रदेश कैडर के ओपी रावत अब चीफ इलेक्शन कमिश्नर बन गए हैं। लिहाजा, वे मार्च में फिर तीन महीने के लिए उनका एक्सटेंशन हो जाए, तो आश्चर्य नहीं। कुल मिलाकर सुब्रत किस्मती निकले। वरना, जीएडी ने उन्हें निर्वाचन में डंप करने का इंतजाम कर दिया था। अगर निर्वाचन आयोग ने उन पर नजरे इनायत नहीं की होती तो आप समझ सकते हैं, चुनाव आफिस में बैठकर अभी वे क्या करते।

दंतेवाड़ा की यूएसपी


एक समय था, जब दंतेवाड़ा की पोस्टिंग से अफसर घबराते थे। कोई वहां जाना नहीं चाहता था। था भी कुछ ऐसा ही। सरकार जिस अफसर से नाराज होती थी या जिसे किसी काम के लायक नहीं समझती, उसे वहां भेज दिया जाता था। लेकिन, ओपी चौधरी ने दंतेवाड़ा की ऐसी यूएसपी बढ़ाई कि वहां का कलेक्टर बनने के लिए नए आईएएस में होड़ मची हुई है। 2016 में जब सौरभ कुमार को वहां का कलेक्टर बनाया गया, तब भी यही स्थिति थी। बहुत कम लोगों को मालूम है कि दंतेवाड़ा का कलेक्टर बनने के लिए उन्हें एक महिला आईएएस के साथ तगड़ा संघर्ष करना पड़ा था। चूकि, सौरभ का जैक बहुत पावरफुल था, इसलिए उनकी पोस्टिंग हो गई थी। सौरभ का अब वहां से हटने का टाईम हो गया है। इसलिए, फिर कश्मकश शुरू हो गया है। अब, दंतेवाड़ा की पोस्टिंग का मतलब हम आपको बता देते हैं....वहां काम करने का स्कोप है तो कमाने का भी। ढाई सौ करोड़ का तो माईनिंग फंड है। ये सीधे कलेक्टर के हाथ में होता है। इस पैसे से अगर वह चाहे तो काम करके नाम कमा लें या फिर कमा कर खुद को मजबूत कर ले।

एससी को ही मौका?


विधानसभा का बजट सत्र समाप्त हो जाने के बाद सूबे में राज्य सभा चुनाव की सरगर्मियां चालू हो जाएगी। हालांकि, इसमें कांग्रेस के लिए कोई स्कोप नहीं है। बीजेपी के भूषणलाल जांगड़े रिटायर हो रहे हैं। जाहिर है, उनकी जगह पर बीजेपी का ही कोई चेहरा चुनकर दिल्ली जाएगा। वैसे, इस एक सीट के लिए बीजेपी के भीतर कई नाम लिए जा रहे हैं। लेकिन, चुनावी साल में सरकार के सामने मजबूरी यह होगी कि जांगड़े के बाद किसी अजा नेता को ही इसके लिए नामित करें। वरना, संदेश अच्छे नहीं जाएंगे। विरोधी पार्टियों को भी बोलने का मौका मिल जाएगा। ये अवश्य है, सत्ताधारी पार्टी इस वर्ग के किसी एक्टिव लीडर को राज्य सभा में भेजना चाहेगी। क्योंकि, जांगडे से पार्टी को कोई लाभ नहीं मिला।


अंत में दो सवाल आपसे


1. अजीत जोगी वास्तव में किस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?
2. सीएम के साथ अब सिकरेट्री लेवल से नीचे के अफसर विदेश नहीं जाएंगे, ऐसा क्यों?


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