रविवार, 5 अक्तूबर 2014

तरकश, 4 अक्टूबर


तरकश

 

नाग पर नाग

कांग्रेस नेताओं के प्रताप से हाल ही में रिकार्ड मतों से विधायक चुने गए भोजराज नाग पर अंतागढ़ में विजयदशमी की पूजा के दौरान नाग देवता सवार हो गए। वे लगे जोर-जोर से झूमने। नाग देवता से आर्शीवाद लेने पास-पड़ोस के गांवों के लोगों का तांता लग गया। भोजराज अंतागढ़ शीतला मंदिर के पुजारी हैं। इसके अलावा वे इलाके में झाड़-फूंक के नाम से भी उनकी लोकप्रियता है। चलिये, बढियां हैं। राजधानी के भाजपा नेताओं को कोई दिक्कत होगी तो विधायकजी सेवा के लिए तैयार मिलेंगे। कांग्रेसियों को भी इससे परहेज नहीं होगा। विधायकजी पर तो उनका बड़ा कर्ज है।

मंत्रिमंडल का पुनर्गठन

मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह 8 अक्टूबर से मंत्रियों की क्लास लेने जा रहे हैं। इसके तहत अलग-अलग विभागों के मंत्रियों और अफसरों को तलब किया जाएगा। मोदी के तर्ज पर पूछा जाएगा कि तीसरी पारी में 11 महीने में वे क्या किए हैं और आगे क्या ब्लू प्रिंट तैयार किए हैं। पता चला है, मंत्रियों के परफारमेंस के आधार पर रिपोर्ट कार्ड बनाए जाएंगे। अंदर से निकल कर आ रही खबरों की मानें तो महाराष्ट्र और हरियाणा में इस महीने चुनाव के बाद रमन कैबिनेट का पुनर्गठन हो सकता है। इसमें दो खाली सीटों को भरा जाएगा। साथ ही, रिपोर्ट कार्ड ठीक ना होने पर कुछ मंत्रियों को बदलने पर भी विचार किया जा सकता है।

वीआईपी झाडू

वीआईपी का हर चीज स्पेशल होता है। जाहिर है, वह अगर झाडू लगाएगा तो वह भी खास ही होगा। गांधी जयंती के दिन राजधानी में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। नेताओं को झुकना न पड़े, इसलिए स्पेशल आर्डर देकर झाड़ू बनवाए गए थे। मगर उसके वीआईपीकरण में गड़बड़ हो गया। झाडू की लंबाई काफी बढ़ गई। आमतौर पर स्वीपर जो झाडू का इस्तेमाल करते हैं, वे चार से पांच फुट के होते हैं…..तीन फुट का झाडू और दो फुट का डंडा। लेकिन वीआईपी झाडू बन गया आठ से नौ फुट का। स्थिति यह थी कि झाडू का डंडा छहफुटिया नेताओं के सिर से भी दो फुट उपर निकल जा रहा था। वीआईपीज मुद्दत बाद झाडू थामे थे। वह भी अनकंफार्ट। सो, चेहरे की परेशानी समझी जा रही थी।

अपना लंबू

वालीवूड के लंबू को न्यू रायपुर दिखाने के लिए सरकार ने अपने लंबू को चुना। अपने लंबू बोले तो एसएस बजाज। एनआडीए के वाइस प्रेसिडेंट। बजाज की लंबाई छह फुट छह इंच है। और, अमिताभ की छह फुट दो इंच। बजाज को अपने से लंबे देखकर अमिताभ भी चैंक गए। बहरहाल, दोनों की जोड़ी खूब जमी। होटल से लेकर न्यू रायपुर के भ्रमण और उसके बाद एयरपोर्ट तक 45 मिनट दोनों साथ रहे। अमिताभ ने बजाज से आत्मीय बातें की। बजाज भी चकित थे कि वालीवूड का शहंशाह इतना विनम्र हो सकता है।

संयोग या…..

इसे संयोग कहा जाए या पब्लिसिटी का स्टंट, रविवार को जिस इंडोर स्टेडियम में केबीसी शो आयोजित किया गया था, उसके जस्ट बगल में एक टाकिज में सात हिन्दुस्तानी फिल्म लगी थी। टाकिज में लगे बडे़-बड़े पोस्टर सबका ध्यान खींच रहे थे। बिग बी उसी रास्ते से छह बार गुजरे। सात हिन्दुस्तानी अमिताभ की पहली पिक्चर थी। जाहिर है, अमिताभ को यह अच्छा लगा होगा।

खातिरदारी

कहते हैं, खाकी बर्दी वालों से कभी पंगा नहीं लेना चाहिए। केबीसी के बाउंसरों ने रायपुर में यही भूल की। शो के समय कई लोगों से हाथापाई कर डाली। अफसरों के साथ दुव्र्यवहार हुआ। पुलिस वालों को भी नहीं छोड़ा गया। इसके बाद बारी पुलिस की थी। राजधानी पुलिस ने चार बाउंसरों को न केवल अरेस्ट किया बल्कि पुलिसिया अंदाज में जमकर आवभगत की गई। बताते हैं, खातिरदारी के लिए हट्टे-कठ्ठे एक-एक बाउंसर के लिए चार-चार पुलिस वाले लगाए गए। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि मुलाहिजा में खातिरदारी के कहीं साक्ष्य न आ जाए।

गलत परंपरा

इंटरटेनमेंट और स्पोट्र्स इवेंट अगर मंत्रालय लेवल पर हैंडिल किया जाएगा तो उसका हश्र वही हुआ, जो केबीसी के आखिर में हुआ। सीएम ने अपने स्तर पर प्रयास कर केबीसी को यहां आयोजित कराया….सूरत के बाद रायपुर देश का दूसरा शहर रहा, जहां केबीसी का आयोजन हुआ……वालीवूड के शहंशाह दो दिन तक रायपुर में रुके। उन्होंने सूबे के टूरिज्म का प्रचार करने के लिए अपनी आवाज देने की भी पेशकश की। लेकिन, स्टेडियम में तालाबंदी, महापौर का रवैया, आयोजकों और उसके बाउंसरों द्वारा लोगों के साथ किए गए बरताव ने मजा किरकिरा कर दिया। असल में केबीसी के लिए हाईप्रोफाइल मीटिंग मंत्रालय में हुई थी। और, उसके बाद ही आयोजकों का दिमाग खराब हुआ। लोकल सिस्टम को इगनोर करना शुरू कर दिया। स्टेडियम का पैसा देने से भी कतराने लगे। यही चूक नेशनल बाक्सिंग चैम्पिनशीप में भी हो रहा है। इसके लिए भी मंत्रालय में बैठक हुई है। ये दोनों आयोजन ऐसे नहीं हैं, जिसकी तैयारी की समीक्षा मंत्रालय स्तर पर हो।

फिजूलखर्ची नहीं

रायपुरियंस को यह जानकर निराशा हो सकती है कि राज्योत्सव में अबकी वालीवूड कलाकारों के ठुमके देखने को नहीं मिलेंगे। सरकार ने फिजूलखर्ची रोकने इस बार राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों को बुलाने पर रोक लगा दी है। संस्कृति विभाग से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि राज्योत्सव में सिर्फ और सिर्फ लोकल कलाकारों को मौका दिया जाए। खर्च पर लगाम लगाने के लिए ही इस बार राज्योत्सव को सात दिन से घटाकर तीन दिन किया गया है। वैसे, सरकार ने करीना कपूर विवाद से भी सबक लिया है। पिछले बार 10 मिनट के लिए मंच पर आने के लिए करीना ने एक करोड़ 10 लाख रुपए ली थी। बाहरी कलाकारों पर ही संस्कृति विभाग ने पांच करोड़ से अधिक रुपए लूटा दिए थे। बहरहाल, फिजूलखर्ची रोकने सरकार का यह सही फैसला माना जा रहा है।

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