रविवार, 9 अगस्त 2020

चीफ सिकरेट्री को लेकर जल्दबाजी

तरकश, 9 अगस्त 2020
संजय के दीक्षित
सोशल मीडिया में नए चीफ सिकरेट्री को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है…राजस्व बोर्ड के चेयरमैन सीके खेतान से लेकर एसीएस अमिताभ जैन और सुब्रत साहू को ब्यूरोक्रेसी के इस शीर्ष पद का दावेदार बताया जा रहा है। हालांकि, इस बारे में अभी बात करना जल्दीबाजी होगी। सीएस आरपी मंडल के रिटायरमेंट में अभी साढ़े तीन महीने से ज्यादा बाकी हैं। वे 30 नवंबर को रिटच©2ायर होंगे। सीएस जैसे पद के लिए ये टाईम कम नहीं होते। फिर दावेदारों को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता। वक्त बहुत बलवान होता है। कब किसके सितारे बुलंद हो जाए, कौन जानता है।

एक्सटेंशन भी संभव

सब कुछ ठीक रहा तो राज्य सरकार चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के एक्सटेंशन पर भी विचार कर सकती है। हालांकि, सरकार ने सुनील कुजूर को भी छह महीने का एक्सटेंशन देने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था। मगर दिल्ली से उन्हें क्लियरेंस नहीं मिला। कोरोना के दौर में केंद्र इस समय सकारात्मक रुख अपना सकता है। वैसे भी, मंडल के 13 महीने के कार्यकाल में पांच महीने कोरोना में निकल गया, जो साढ़े तीन महीने बचे हैं, उसमें भी क्या होगा, अभी कोई भरोसा नहीं। वे पिछले साल 1 नवंबर को चीफ सिकरेट्री का दायित्व संभाले थे। मंडल को एक्सटेंशन देने की स्थिति में सुब्रत साहू सीएस के स्ट्रांग कंडिडेट हो जाएंगे। सुब्रत एसीएस टू सीएम हैं। इस वजह से स्वाभाविक तौर पर वे सरकार के ज्यादा नजदीक हैं। हालांकि, जनवरी 2022 में उनका 30 साल पूरा होगा। मगर जब एएन उपध्याय 29 साल की सर्विस में डीजीपी बन सकते हैं तो फिर सुब्रत क्यों नहीं? हालांकि, ये सब कुछ निर्भर करेगा सीएम भूपेश बघेल पर कि इस बारे में वे क्या सोचते हैं।

लाॅकडाउन में छुट्टी

राजनांदगांव एसपी जितेंद्र शुक्ला की चार महीने में ही ट्रांसफर हो गया। वे मार्च एंड में चार्ज लिए थे और 7 अगस्त को बटालियन में कमांडेंट बनाए जाने का आर्डर निकल गया। जितेंद्र को सुकमा में मंत्री कवासी लकमा से पंगा लेने की वजह से हटाया गया था। उस समय उन्हें पुलिस मुख्यालय में पोस्ट किया गया था। हालांकि, वे जल्दी ही वापसी करते हुए महासमुद के एसपी बनने में कामयाब हो गए। सरकार ने उन पर भरोसा करते हुए महासमुंद से राजनांदगांव जैसे जिले का कप्तान बनाया। मगर वे लाॅकडाउन में एसपी बनें और लाॅकडाउन में ही चलता कर दिए गए। खबर है, उनकी वर्किंंग से सरकार बहुत खुश नहीं थी। खैरागढ़ थाने के टीआई ने जिस बीजेपी नेता को करोड़ों के चिट फंड घोटाले में जेल भेजा था, एसपी ने उस टीआई की ही छुट्टी कर दी। इससे सरकार के कान खड़े हो गए।

एक और लिस्ट

एसपी की एक छोटी लिस्ट निकल गई, एक और आ सकती है। आईपीएस डी श्रवण को सीनियरिटी की दृष्टि से मंुगेली जैसा छोटे जिले के एसपी बनने पर तरकश के पिछले अंक में जिक्र हुआ था। सरकार ने इसे नोटिस में लेते हुए श्रवण को मुंगेली से हटाकर राजनांदगांव जैसे बड़े जिले की कमान सौंप दी है। पता चला है, दो-तीन जिलों के एसपी और बदल सकते हैं। इनमें दो जिले बस्तर के हो सकते हैं। और, एक-दो बिलासपुर संभाग के।

सीएम का गुस्सा

आदिवासी विभाग की हाईपावर कमेटी की बैठक में आदिवासियों से जुड़ी योजनाओं में डीएफओ समेत फाॅरेस्ट अफसरों द्वारा इंटरेस्ट नहीं लेने पर सीएम भूपेश बघेल बेहद नाराज हुए। सीएम हाउस मंें हुई इस बैठक में वन मंत्री मोहम्मद अकबर, पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव, आदिवासी मंत्री मंत्री प्रेमसाय सिंह, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत समेत आला अधिकारी मौजूद थे। सीएम ने दो टूक कहा, आदिवासियों से जुड़ी योजनाओं में फाॅरेस्ट अफसर अगर अड़ंगेबाजी करेंगे तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में मौजूद सीएस आरपी मंडल को उन्होंने निर्देश दिया कि वे इसे प्रायरिटी में इसकी माॅनिटरिंग करें।

विद्या भैया के ऐसे लोग

2 अगस्त अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं0 रविशंकर शुक्ल का जन्मदिन था और उनके बेटे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल का भी। रविशंकर शुक्ल तो बीते युग के हो गए मगर हैरानी की बात यह है कि विद्या भैया को भी किसी ने याद नहीं किया। वे लोग भी नहीं, जिन लोगों की पहचान विद्या भैया से बनी और आज भी उनके नाम से ही जाने जाते हैं। वाकई…ये हद है।

राजेश रिटायर लेकिन…

वन विकास निगम के एमडी राजेश गोवर्धन इस महीने रिटायर हो जाएंगे। सवाल उठता है, गोवर्धन की जगह कौन लेगा। एमडी का पद पीसीसीएफ लेवल का है। पीसी पाण्डेय सीनियरिटी में हैं। लेकिन, लंबे समय से आईएफएस की डीपीसी लटके होने की वजह से अफसरों का प्रमोशन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में, हो सकता है पाण्डेय को सरकार प्रभारी एमडी बना दें।

कलेक्टर नहीं

छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस पर कलेक्टर नहीं, जनप्रतिनिधि ही झंडारोहण करेंगे। कुछेक राज्यों ने कोरोना को देखते अबकी कलेक्टरों को जिला मुख्यालयों में झंडा फहराने के लिए अधिकृत किया गया है। इसको देखते छत्तीसगढ़ में कुछ दिनों से सोशल मीडिया में कलेक्टरों के झंडा फहराने की अटकलें चल रही हैं। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं होेने वाला। कोरोना प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए जनप्रतिनिधि ही झंडा फहराएंगे।

गुरू घासीदास जिला

सतनामी समाज बलौदा बाजार जिले का नामकरण बाबा गुरू घासीदास के नाम पर करने की मांग कर रहा है। विधायक इंदू बंजारे ने इसके लिए सीएम भूपेश बघेल को पत्र लिखकर कहा है कि गिरौदपुरी बाबा की जन्मस्थली है, इस वजह से 15 अगस्त को बलौदा बाजार जिले का नामकरण बाबा के नाम कर दें, तो सतनामी समाज आपका आभारी रहेगा। पंजाब जैसे कुछ सूबों में वहां के संतों के नाम पर जिलों के नामकरण होने के दृष्टांत हैं। अब देखना है, सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है।

विधायकों को इम्पाॅर्टेंस

विस चुनाव में जब कांग्रेस की झोली में 67 विधायक आए थे तो समझा गया था कि इतनी बड़ी फौज में विधायकों को भला कौन पूछेगा। मगर संसदीय सचिवों समेत निगम-आयोगों में विधायकों को जिस तरह इम्पाॅर्टेंस दिया जा रहा है, वह धारणा निर्मूल निकली। 15 संसदीय सचिवों समेत बस्तर, सरगुजा विकास प्राधिकरणों, आयोग, मंडलों में अभी तक करीब ढाई दर्जन विधायकों को एडजस्ट किया जा चुका है। निगम-मंडलों की दूसरी सूची में भी कुछ विधायकों को मौका मिल सकता है। कह सकते हैं, विधायकों की निकल चुकी है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस जिले के एसपी ने 7500 फुट सरकारी जमीन खरीदने के स्कीम में पत्नी के नाम से दो आवेदन लगा दिया है?
2. छत्तीसगढ़ के किस कांग्रेस नेता को हद से अधिक किस्मती माना जाता है…बिना कुछ किए उनके पास अवसर चलकर आ जाते हैं?

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