शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

ओपी आखिरी नहीं

26 अगस्त
बीजेपी ज्वाईन कर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले ओपी चौधरी अकेले आईएएस नहीं होंगे। कम-से-कम दो और आईएएस सरकार के रणनीतिकारों के संपर्क में हैं। बस्तर संभाग के एक कलेक्टर की बात तो फाईनल राउंड में पहुंच गई है। यदि बात बन गई तो बीजेपी उन्हें बस्तर के किसी सीट पर उतार सकती है। यही नहीं, एक एडिशनल एसपी को जांजगीर की सीट से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। तानाखार से पूर्व आईजी भारत सिंह भी खम ठोंक रहे हैं। इनके अलावा भी टिकिट की दौड़ में कई और रिटायर आईएएस, आईपीएस बताए जा रहे हैं। रिटायर डीजी राजीव श्रीवास्तव भी संघ में सक्रिय हैं। टिकिट के लिए वे भी बीजेपी के संपर्क में हैं। दरअसल, 15 साल से सत्ता में जमी बीजेपी एंटी इंकाम्बेंसी का असर कम करने फ्रेश चेहरों को ढूंढ रही है। इस कड़ी में कुछ और लोगों को पार्टी में शामिल किया जा सकता है।

कलपेगी आत्मा

रमन कैबिनेट ने अटलजी के नाम पर नया रायपुर के साथ ही कई संस्थानों का नामकरण कर दिया। इसमें बाकी तो ठीक है, पर माड़वा ताप बिजली घर का नामकरण लोगों को खटक रहा है। दरअसल, कोरबा में बना माड़वा बिजली प्लांट के माथे पर देश का सबसे महंगा पावर प्लांट का दाग लगा है। 3000 करोड़ इसके बनने में फूंक गया। एक मेगावॉट पर 9.2 करोड़ रुपए लागत आई है। यह सब हुआ प्लांट निर्माण में लेट लतीफी पर। ऐसे प्लांट का नाम अगर अटलजी के नाम पर रखा जाएगा तो जाहिर है, उनकी आत्मा कलपेगी ही।

फिल्डिंग में कमजोर

अंबिकापुर जैसे बड़े जिले का कलेक्टर रह चुकीं किरण कौशल को सरकार ने बालोद जैसे छोटे जिले की कमान सौंप दी, तो लोगों का चौंकना स्वाभाविक था। दरअसल, मुंगेली के बाद अंबिकापुर भेजी गई किरण का नाम किसी बड़े जिले के लिए चल रहा था। लेकिन, बताते हैं आखिरी मौके पर जिस जिले में उन्हें भेजना था, वहां के कलेक्टर ने कुछ ज्यादा जोर लगा दिया। लिहाजा, सरकार के पास और कोई चारा नहीं बचा था। पता चला है, चुनाव आयोग भी किरण को एक बड़े जिले के लिए तैयार हो गया था। दिल्ली से पूछने पर यहां के अफसरों ने फीडबैक दिया था कि किरण के खिलाफ चुनाव आयोग के क्रायटेरिया के अलावा और कोई एडवर्स नहीं है। लेकिन, ऐन पोस्टिंग के वक्त मामला गड़बड़ा गया।

ये तो हद है!

इलेक्शन हमेशा अर्जेंट होता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में आलम यह है कि कलेक्टर निर्वाचन कार्यालय का ही नहीं बल्कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का फोन रिसीव नहीं कर रहे। सीईओ सुब्रत साहू ने कलेक्टरों को कड़ा पत्र भेजकर चेताया है कि वे आयोग को हल्के में न लें। उन्होंने लिखा है कि मेरा फोन हो या उनके दफ्तर का, हर हाल में वे पिक करें। यदि व्यस्त हों तो कॉल बैक करें। ये तो वाकई पराकाष्ठा है। सीईओ को लेटर लिखना पड़ रहा है। दरअसल, अधिकांश कलेक्टर नए जमाने के हैं। जरूरत है चीफ सिकरेट्री मंत्रालय में एक रिफ्रेशर कोर्स आयोजित कर सभी का ज्ञानवर्द्धन करवाएं। वरना, आचार संहिता लगने पर कई कलेक्टर हिट विकेट होंगे।

दस का दम

सामान्य प्रशासन विभाग ने सेंट्रल डेपुटेशन के लिए नाम भेजकर आईएएस अंकित आनंद को भले ही उलझन में डाल दिया। लेकिन, राज्य सरकार ने दम दिखाया। सरकार ने भारत सरकार से न केवल आर्डर चेंज करने के लिए लिखा है बल्कि रायपुर कलेक्टर बनाने के लिए चुनाव आयोग के पास अंकित आनंद का नाम प्रपोज कर दिया है। अंकित अगर रायपुर कलेक्टर बन गए तो फिर जनगणना में जाने का सवाल ही नहीं उठता।

नॉन आईएएस की ताजपोशी?

बिजली विनियामक आयोग के चेयरमैन के लिए चार रिटायर नौकरशाहों ने भी आवेदन किया है। राधाकृष्णन, डीएस मिश्रा, एनके असवाल और आरएस विश्वकर्मा। लेकिन, नॉन आईएएस एसके शुक्ला के नाम को लेकर खुसुर-फुसुर कुछ ज्यादा हो रही है। शुक्ला यहां क्र्रेडा में लंबे समय तक पोस्टेड रहे हैं। पिछले साल यहां उनका समीकरण गड़बड़ाया तो सौर उर्जा अभिकरण का चेयरमैन बनकर हरियाणा चले गए। हरियाणा सरकार ने उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। राज्य मंत्री का ओहदा छोड़ अगर वे यहां चेयरमैन के लिए अप्लाई किए हैं, तो इसके अपने मायने होंगे। जाहिर है, नारायण सिंह के रिटायर होने के बाद विनियामक आयोग चेयरमैन का पोस्ट महीने भर से खाली है। नारायण भी रिटायर आईएएस थे। शुक्ला अगर चेयरमैन बनते हैं तो वे दूसरे नॉन आईएएस चेयरमैन होंगे। इसके पहिले बिजली बोर्ड के सचिव मनोज डे को सरकार ने एक मौका दिया था।

करप्शन पर लगाम?

किसानों के बिजली बिल का 100 रुपए लिमिट तय करने बिजली कंपनियों के कर्मचारियों को सरकार ने बड़ा झटका दिया है। क्योंकि, मीटर रीडिंग नियमित होती नहीं। एवरेज बिल के नाम पर हजारों रुपए का बिल किसानों को थमा दिया जाता था। फिर शुरू होता था उसे कम करने का खेल। जाहिर है, बिना नगद नारायण के बिल कम होता नहीं। अब लिमिट तय होने के बाद चलिये किसानों को राहत मिलेगी। और, चुनाव के समय किसान खुश हैं तो नेता भी। तभी तो कैबिनेट में जब यह प्रस्ताव आया तो सारे मंत्रियों ने एक सूर में कहा, इससे बढ़ियां बात और क्या हो सकती है।

हफ्ते का व्हाट्सएप

वो ईद पर भी खुश होते हैं, वो नानक जयंती पर भी खुश होता है, वो दीवाली पर भी खुश होता है, वो क्रिसमस पर भी खुश होता है, सरकारी कर्मचारियों का कोई मजहब नही होता, साहब वो हर छुट्टी पर खुश होता है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. नेताओं के जोगी कांग्रेस छोड़कर जाने के पीछे असली वजह क्या है?
2. किस जिले के एसपी चुनावी माहौल में भी थाईलैंड, पटाया का सैर कर आए?

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें