रविवार, 17 मई 2026

Chhattisgarh Tarkash 2026: डीजीपी, डंडी और आइडिया



तरकश, 17 मई 2026

संजय के. दीक्षित

डीजीपी, डंडी और आइडिया

गृह विभाग ने अरुणदेव गौतम के पदनाम से प्रभारी का टेका हटाते हुए उन्हें पूर्णकालिक पुलिस प्रमुख नियुक्त कर दिया। अरुणदेव 14 महीने प्रभारी रहे और अब आठ महीने पूर्णकालिक डीजीपी रहेंगे। दोनों को मिला दें तो 22 महीने का डीजीपी का कार्यकाल कम नहीं होता। मगर ये भी सही है कि प्रभारवाद के दौरान 14 महीने संशय की स्थिति रही, उससे पोलिसिंग किसी-न-किसी रूप में प्रभावित हुई। और अब पूर्णकालिक आदेश में गृह विभाग ने दिमाग दौड़ाते हुए जिस चतुराई से डीजीपी का आदेश निकाला, उससे गौतम समझ नहीं पा रहे होंगे कि वे खुश होएं या...। गौतम की नियुक्ति अगर आज 16 मई की डेट से होती तो दो साल के हिसाब से 15 मई 2028 तक उनका कार्यकाल रहता। मगर 14 महीने बैक डेट याने 5 फरवरी 2025 से आदेश निकाला गया, इससे 4 फरवरी 2027 को उनका पीरियड खतम हो जाएगा। अर्थात सिस्टम ने उनके टेन्योर में 14 महीने की डंडी मार दी। इससे गौतम कितने उत्साह से काम करेंगे? और उससे पुलिस विभाग का क्या नफा-नुकसान होगा, ये अलग बात। मिलियन डॉलर का सवाल है...चाणक्य बृद्धि के किस अफसर ने बैक डेट वाला यह रास्ता निकाला...इस लाइन पर तो किसी ने सोचा ही नहीं था। इससे यूपीएससी और सुप्रीम कोर्ट भी खुश और सरकार भी उलझन मुक्त।

नए डीजीपी की कवायद

आईपीएस अरुणदेव गौतम के आदेश में स्पष्ट तौर पर दो साल के कार्यकाल का उल्लेख नहीं किया गया है। मगर सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार डीजीपी का मिनिमम कार्यकाल दो बरस होना चाहिए। इस दृष्टि से 4 फरवरी 2027 को उनका दो साल हो जाएगा। इसके बाद डिपेंड करेगा कि सिस्टम और डीजीपी के बीच कितना कंफर्टनेस है। वैसे अरुणदेव गौतम पक्के ठाकुर हैं, उनके लिए लिमिट से ज्यादा लचीलापन मुमकिन नहीं होगा। अगर ऐसा नहीं होता तो फिर लास्ट मई में यूपीएससी से पैनल आने के बाद अभी तक आदेश लटका नहीं रहता। इसलिए ऐसा प्रतीत हो रहा कि इस साल नवंबर से नए डीजीपी चयन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जाहिर है, यूपीएससी को तीन महीने पहले डीजीपी के पेनल के लिए प्रपोजल भेजना होता है।

अगले डीजीपी!

डीजीपी अरुणदेव गौतम का कार्यकाल 4 फरवरी 2027 को पूरा हो जाएगा। उसके बाद सरकार चाहे तो उन्हें जुलाई 2027 में रिटायरमेंट तक कंटीन्यू कर सकती है, जिसकी संभावनाएं काफी क्षीण हैं। बहरहाल, अरुणदेव के बाद जीपी सिंह ने कहीं करिश्माई ढंग से वापसी कर ली तो ठीक, वरना एडीजी प्रदीप गुप्ता, विवेकानंद और अमित कुमार अगले डीजीपी के प्रबल दावेदार होंगे। हालांकि, इस साल नवंबर में नए डीजीपी के लिए यूपीएससी को पेनल बनाने प्रस्ताव भेजा जाएगा, उसमें हिमांशु गुप्ता का नाम फिर शामिल होगा। हिमांशु के रिटायरमेंट में टाईम भी काफी बचा है। उनके अलावे एसआरपी कल्लूरी भी होंगे। यद्यपि, यूपीएससी जिन तीन नामों की अनुशंसा करेगा, उनमें से ही कोई अगला डीजीपी बनेगा। लेकिन, मजबूत दावेदारी की बात करें तो प्रदीप, विवेकानंद और अमित के नाम सबसे उपर होंगे।

बीजेपी, बस और चेतावनी

रायपुर में अरसा बाद बीजेपी कार्यसमिति की बैठक हुई। बैठक में संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने तल्ख अंदाज में मंत्रियों और नेताओं को चेता दिया। उन्होंने घाटी में चढ़ रहे बस की उस सवारी और ड्राईवर का दिलचस्प किस्सा सुनाया। शिवप्रकाश बोले...बस का बाया हिस्सा जब खाई की तरफ आता था तो सवारी अपनी सीट छोड़ दायी तरफ की सीट पर जा बैठता था और जब दाया हिस्सा खाई की तरफ तो वह बायी तरफ की सीट पर बैठ जाता था। यात्री के इस तरह बार-बार सीट बदलता देख ड्राईवर से रहा नहीं गया। उसने यात्री से कहा, तुम्हारे सीेट बदलने से कोई फायदा नहीं। बस जब खाई में गिरेगी तो तुम अकेले नहीं, बल्कि बस में बैठे सभी यात्री उपर जाएंगे। शिवप्रकाश बोले...इसी तरह जब सरकार को कोई नुकसान होगा, तो चाहे मंत्री हो या नेता, सभी सड़क पर आ जाएंगे। इसलिए आप ये मत समझिए कि पार्टी या सरकार में कुछ इधर-उधर हो रहा तो उसे देख आंख मूद लें या यह सोच निकल लें कि इससे मुझे क्या फर्क पड़ता है...असल में, सबको इसकी कीमत चुकानी होगी। संगठन मंत्री ने ये भी नसीहत दी...संगठन और सरकार एक सायकिल के दो पहिये नहीं बल्कि एक सेतु हैं। इस सेतु से पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता को फायदा मिलना चाहिए। कुल मिलाकर कार्यसमिति की बैठक मंत्रियों और नेताओं को आईना दिखाने वाली रही।

सरकार बड़ी या विभाग?

छत्तीसगढ़ के करीब एक लाख आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी टू ईट सप्लाई करने का काम महिला स्व सहायता समूहों द्वारा किया जाता था। मगर 2018 में आई कांग्रेस सरकार ने इसे स्व सहायता समूहों के हाथ से लेकर ठेकेदारों को दे दिया था। महिला बाल विकास विभाग ने इसके लिए बीज विकास निगम को एजेंसी बनाया। अब खेती-किसानी का काम करने वाले बीज विकास निगम को रेडी टू ईट सप्लाई का काम क्यों दिया गया, इस पर फिर कभी। अभी ये इश्यू है कि बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि सरकार बनते ही रेडी टू ईट का काम महिला स्व सहायता समूहों को सुपूर्द कर दिया जाएगा। मगर ढाई साल हो गया, अभी तक सिर्फ एक जिला ने इसे लागू कर पाया। मंत्री ओपी चौधरी ने महिला बाल विकास विभाग से लड़-भिड़कर 10 जुलाई 2025 को अपने रायगढ़ जिले में इसे शुरू करा लिया। इस मौके पर सरकार ने भी कहा था कि जल्द ही पूरे प्रदेश में रेडी टू ईट का काम स्व-सहायता समूहों को दे दिया जाएगा। मगर, इसके बाद दस महीना निकल गया...महिला बाल विकास के लोगों के कान पर जूं नहीं रेंगा। पता चला है, बीजेपी के दिल्ली में बैठे लोगों ने इसे नोटिस किया है। पार्टी के केंद्रीय नेताओं का मानना है, जिस योजना में सरकार के खजाने का कोई पैसा नहीं लगना, उसमें देरी नहीं करनी चाहिए। जाहिर है, छत्तीसगढ़ में 10 लाख से अधिक महिला स्व-सहायता समूह हैं, उसमें 30 लाख से अधिक महिलाएं हैं। रेडी टू ईट सप्लाई का काम मिलने से लाखों महिलाएं स्वालंबी बन रही थीं। मगर ठेकेदारी सिस्टम में महिला बाल विकास विभाग के लोगों की पांचों उंगलियां ऐसा घी में है कि घोषणा पत्र और स्व-सहायता समूह सब गौण हो गए हैं।

मंत्रियों की मेजर सर्जरी

बीजेपी अगले महीने राज्य सरकारों के कामकाज का रिव्यू करने जा रही है। इसमें छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव नवंबर 2023 में हुए थे, उनका नंबर सबसे उपर है। जाहिर है, सरकार के ढाई बरस पूरे होने पर मंत्रिमंडल का पुनर्गठन भी होना है। कुछ मंत्रियों की छंटनी भी होगी। हालांकि, कैबिनेट में कौन भीतर आएगा और कौन बाहर...इस बारे में कुछ कहना व्यर्थ है। इसलिए कि बीजेपी के इस दौर में एक कान को पता नहीं होता कि दूसरे कान को क्या हो रहा है। इसलिए, पब्लिक डोमेन में जितने नाम चल रहे हैं, वे सिर्फ और सिर्फ अटकलबाजियां हैं। हां ये अवश्य है...इस बार कुछ बड़ा और हटकर होगा। क्योंकि, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन छत्तीसगढ़ के प्र्रभारी रहे हैं। उनके पास सभी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड है। फिर बीजेपी के लोग भी मान रहे कि 2029 की जंग के लिए मंत्रिमंडल में बिना मेजर सर्जरी किए स्थिति अनुकूल नहीं होगी।

एसपी ट्रांसफर

सात जिलों के कलेक्टरों के बदले जाने के बाद पुलिस अधीक्षकों के ट्रांसफर की चर्चांएं बड़ी तेज है। पब्लिक डोमेन में भविष्यवाणियां की जा रही...फलां यहां तो वो वहां जा रहा। मगर सरकारी सूत्रों से पता चला है अभी हफ्ते भर कुछ नहीं होगा। 17 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन के दौरे पर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। उनके दिल्ली लौटने के बाद एसपी ट्रांसफर पर विचार किया जाएगा। कुल मिलाकर जो संकेत मिल रहे, हफ्ता भर से पहले पुलिस अधीक्षकों के तबादले पर कोई हलचल नहीं होना है।

हफ्ते की सबसे बड़ी खबर

इस हफ्ते की सबसे बड़ी खबर बीजेपी कोर ग्रुप में बदलाव रहा। कोर ग्रुप में सालों से जमे ऐसे-ऐसे दिग्गजों को हटाया गया है, जिसका फैसला पार्टी की लोकल बॉडी के लिए नामुमकिन था। निश्चित तौर पर इसमें दिल्ली की भूमिका रही होगी। केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व ने इसके जरिये बड़ा संदेश दिया है। 12 मंत्रियों में से सिर्फ तीन को मौका मिला। डिप्टी सीएम अरुण साव एवं विजय शर्मा। और मंत्री ओपी चौधरी। अमर अग्रवाल का नाम इसलिए चौंकाने वाला रहा कि पुराने नेताओं की विदाई हो रही, ऐसे में उन्हें कोर गु्रप में शामिल करने के पीछे यकीनन कोई सियासी निहितार्थ होंगे। कोर ग्रुप के पुनर्गठन से यह साफ हो गया है कि मंत्रिमंडल की सर्जरी भी कुछ इसी अंदाज में किया जाएगा।

हफ्ते का कोट

जिसके पास तुम्हारे लिए वक्त नहीं, उसको कभी परेशान मत करना, क्योंकि वो अपनी दुनिया में व्यस्त है, और उस दुनिया में तुम्हारी कोई जरूरत नहीं। तथा सुख में उस व्यक्ति को निमंत्रण देना, जो दुख में बिना बुलाए आ जाते हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. क्या ये सही है कि जिन मंत्रियों पर छंटनी की आशंका ज्यादा है, उनके विभागों में करप्शन और बढ़ गया है?

2. क्या आईएएस ट्रांसफर की एक और लिस्ट आ सकती है?

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