शनिवार, 1 जून 2013

तरकश, 26 मई


झूला घर

मंत्रालय दूर बनने का खामियाजा यह हुआ कि उसका झूला घर का स्वरूप बनता जा रहा है। महिला कर्मियों को दुधमुंहा बच्चों के लिए लांच आवर में 30 किलोमीटर दूर रायपुर आना मुमकिन नहीं है। सो, कुछ महिला अफसर अपने बच्चों को लेकर मंत्रालय आ रही हैं। उनके साथ कार से बच्चे को लेकर आया आती है। और शाम को साथ ही घर लौटती है। यही वजह है कि आजकल मंत्रालय के कुछ कमरों से बच्चों की किलकारियां सुनाई पड़ती है। खैर, उंचे ओहदे पर बैठी महिला अफसरों को ज्यादा परेशानी इसलिए नहीं है, क्योंकि, उन्हें दो कमरे वाला चेम्बर मिला हुआ है। एक में वे बैठती हैं, और दूसरे में आया और उनका बच्चा। मगर छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों को परेशानी है। न उनके पास कार है, न आया है और ना ही एक्सट्रा कमरा। पता चला है, मंत्रालय कर्मचारी संघ अब चीफ सिकरेट्री सुनिल कुमार से मंत्रालय में झूला घर बनवाने के लिए मिलने वाला है।

बड़े घर में

सूबे के दो कुंवारे आईएएस में से एक, बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर अवनिश शरण की शादी पक्की हो गई है। शादी देर से हो रही है मगर बड़े घर में हो रही है। सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिनहा की बेटी स्मिता से। छत्तीसगढ़ के लिए इससे अच्छी बात क्या होगी। देश के शीर्ष जांच एजेंसी के चीफ की बेटी छत्तीसगढ़ की बहू बनकर आ रही हैं। 21 मई को दिल्ली में अवनिश की सगाई हुई और जुलाई में शादी होगी। उनकी होने वाली पत्नी आईबी में पोस्टेड हैं। और शादी के बाद घूमने-फिरने के लिए स्विटजरलैंड की टिकिट भी हो चुकी है। उधर, दूसरे आईएएस ओपी चैधरी की भी सगाई हो चुकी है। मगर शादी कब होगी, यह तय नहीं है। उनकी मंगेतर एमबीबीएस करने के बाद दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। 

मोदी और रमन

राजनांदगांव की सभा में नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ को सबसे तेज प्रगति करने वाला राज्य बताकर रमन को स्वाभाविक तौर पर अपने करीब कर लिया है। चुनाव के पहले विकास यात्रा के जरिये लोगों से सीधे संवाद करने निकले रमन की 18 मई को राजनांदगांव सभा में पहुंचे मोदी ने रमन के तारीफ की झड़ी लगा दी, बल्कि यहां तक कह डाला कि रमन सिंह देश के पहले सीएम होंगे, जो अपने कार्यों का हिसाबा देने जनता के बीच जा रहे हैं और मुझे गर्व होता है कि मैं रमन का मित्र हूं। मोदी यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ का जिस तरह विकास हो रहा, आने वाले पांच बरसों में वह गुजरात से भी आगे निकल जाएगा। तो रमन ने भी गुजरात को विकास का माडल बताया। गौरतलब है, भाजपा में प्रधानमंत्री के प्रत्याशी के मसले पर मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह आडवानी की वकालत कर रहे हैं। तो आडवानी भी विभिन्न मंचों से शिवराज की तारीफ करते नहीं थकते। ऐसे में, रमन सिंह अब नरेंद्र मोदी के साथ खड़े दिखाई दें, तो अचरज नहीं।
वोट फार्मूला
विधानसभा चुनाव को देखते राज्य के कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू ने मतदाताओं से सीधा संपर्क करने के लिए अलग तरीका निकाला है। विकास यात्रा के सिलसिले में वे हफ्ते भर से अपने विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर हैं, और इस दौरान जिस गांव में शाम हो जाती है, वहां किसी किसान के घर या खलिहान में रात्रि विश्राम कर रहे हैं। और उसी घर में भोजन भी। हालांकि, उनका अभनपुर विधानसभा रायपुर से बहुत दूर नहीं है। कहीं से भी वे अधिकतम घंटे भर में राजधानी लौट सकते हैं। लेकिन मतदाताओं को रिझाने के लिए तकलीफ तो सहनी पड़ेंगी न।

लकी मुख्यालय

बीजेपी का भव्य और हाईटेक मुख्यालय बन कर तैयार हो जाने के बाद भी पुराना आफिस याने एकात्म परिसर का मोह पार्टी नहीं छोड़ पा रही है। भाजपा की समूची गतिविधियां यहीं से संचालित हो रही है। पता चला है, विधानसभा चुनाव के बाद ही वहां के बारे में सोचा जाएगा। इसकी वजह यह है कि एकात्म परिसर बीजेपी के लिए काफी लकी रहा है। इस बिल्डिंग के बनने के बाद सूबे में न केवल भाजपा की सीटें बढ़ीं बल्कि दो-दो बार सरकार बनाने मे ंकामयाब रही। तो ऐसे लकी मुख्यालय को भला कौन छोड़ना चाहेगा। वो भी चुनाव के समय में।

सबसे पहले

अटलबिहारी सरकार ने देश में छह नए एम्स बनाने की घोषणा की थी, उनमें से रायपुर एम्स का ओपीडी सबसे पहले प्रारंभ होने जा रहा है। 3 जून इसकी तारीख मुकर्रर हो गई है। बाकी पांच, 1 जुलाई से शुरू होंगे। एम्स को जिस तरह से तैयार किया जा रहा है, वह छत्तीसगढ़ के लिए वारदान साबित होगा। वारदान इसलिए, कि अस्पताल खुलने से पहले ही वहां राज्य की सिकलसेल, फल्सीफेरम मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों पर काम चालू हो गया है, जिससे हर साल सैकड़ों लोग असमय काल के ग्रास बन जाते हैं। सिकलसेल पर डाटा कलेक्ट किया जा रहा है और शुक्रवार को इस पर एम्स में कांफें्रस हुई। साल के अंत तक एम्स में ट्रामा सेंटर खुल जाएगा और अगले साल तक सेंट्रल इंडिया का यह सबसे बड़ा अस्पताल पूर्ण स्वरूप में आ जाएगा। फिलहाल, 67 डाक्टरों की नियुक्ति हो गई है। रायपुर एम्स इस मामले में भी लकी है कि उसे डा0 नागरकर जैसे डायरेक्टर मिले हैं। लंबे समय तक इंगलैंड में रहने के बाद नागरकर पीजीआई चंडीगढ़ में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट बनकर लौटे। और अब उन्होंने एम्स ज्वाईन किया है।

अंत में दो सवाल आपसे

1.    बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर अवनिश शरण से बड़े-बड़े आईएएस, आईपीएस और मिनिस्टर क्यों चमकने लगे हैं?
2.  विकास यात्रा के बाद रायपुर और बिलासपुर संभाग के किन दो कलेक्टरों की छुट्टी तय मानी जा रही है?



शनिवार, 18 मई 2013

तरकश, 19 मई

गीता का ज्ञान

मुकाम हासिल करने के लिए सूबे के एक वरिष्ठ मंत्री ने कोई कसर नहीं छोड़ी। राज्य के कोने-कोने में समर्थकों की फौज-फटाका तैयार करने से लेकर हर साल साधु-संतों का जमावड़ा तक। मगर कोई युक्ति काम नहीं आ रही है। बल्कि, मंजिल उनसे और दूर होती जा रही है। अब, वे अपने बंगले में श्रीमद्भागवत कथा करा रहे हैं। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है, कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, फल पर नहीं। इसलिए, फल की चिंता मत करो। तुम अपना काम करते जाओ। मंत्रीजी को भी फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। राजयोग बनेगा, तो स्वयमेव उनके मन की मुराद पूरी हो जाएगी।    

जातिवाद की ट्रेनिंग

 वैसे तो राजधानी के स्टेट इंस्टिट्यूट आफ रुरल डेवलपमेंट में पंचायत एवं ग्रामीण विकास से संबंधित लोगों को टे्रनिंग दी जाती है, मगर इन दिनों वहां जातिवाद की टे्रनिंग चल रही है। परशुराम जयंती के दिन तो इंतेहा हो गई। दिल्ली से विशेष तौर पर आमंत्रित वक्ता ने इंस्टिट्यूट के सेमिनार हाल में ब्राम्हणों को जी भर कर गालियां बकी। इतनी भद्दी कि सभ्य आदमी कान पर हाथ रख ले। असल में, जिस अफसर को इंस्टिट्यूट में पोस्ट किया गया है, वे एक खास विचारधारा से ताल्लुकात रखते हंै। और उन्हें अपने विचारधारा को सींचने के लिए सरकार ने बढि़यां अवसर जो मुहैया करा दिया है।
 

अग्रेसिव स्ट्रेज्डी


विकास यात्रा शुरू होने के बाद पत्र-पत्रिकाओं में सीएम और उनकी योजनाआंे को प्रमुखता ऐसे ही नहीं मिल रही है। बल्कि, इसके पीछे नए सिकरेट्री पीआर अमन सिंह की अग्रेसिव स्टे्रज्डी है। वे पहले जनसंपर्क सचिव होंगे, जो ब्यूरोके्रटिक इगो त्याग कर अखबारों के दफ्तरों में गए। और अब, शायद ही कोई दिन जाता होगा, जब वे प्रभावशाली मीडिया संस्थानों से उनकी बात न होती होगी। आशय विनम्र आग्रह होता है कि सरकार विज्ञापन दे रही है, तो उसकी खबरों को भी वेटेज दिया जाए। और अमन सिंह जैसे प्रभावशाली शख्सियत नियमित संपर्क में रहे, तो सरकारी खबरों की अनदेखी भला कैसे की जा सकती है। यहीं नहीं, विकास यात्रा में फलां तारीख को किस जर्नलिस्ट को सीएम के हेलिकाप्टर पर या विकास रथ पर भेजना है, फोटो किस तरह की होगी, विज्ञापन का मजमूं क्या होगा, इसका स्क्रिप्ट अमन के हाथ में रहता है। शुक्रवार को वे राजनांदगांव के एक पुलिस अफसर को फोन करते हैं, विकास रथ पर साब की फोटो क्लीयर नहीं आ रही, के्रन का इंतजाम कर फोटो खिंचवाओ। दो मिनट बाद टीवी पर डांेगरगढ़ सभा का लाइव देखकर एक टीवी चैनल को फोन लगवाते हैं, कैमरा सिर्फ मंच पर ही फोकस है, उसे भीड़ को भी कवर करना चाहिए। विकास यात्रा को कवर करने दिल्ली की मीडिया भी पहुंच रही है। एसएमएस के जरिये मीडिया को पल-पल की खबरें सेंड की जा रही है। डीपीआर ओपी चैधरी यात्राओं में साथ चल रहे हैं। ऐसे में कवरेज क्यों नहीं मिलेगा।   

लकी मुख्यालय

बीजेपी का भव्य और हाईटेक मुख्यालय बन कर तैयार हो जाने के बाद भी पुराना आफिस याने एकात्म परिसर का मोह पार्टी नहीं छोड़ पा रही है। पार्टी की समूची गतिविधियां यहीं से संचालित हो रही है। पता चला है, विधानसभा चुनाव के बाद ही वहां के बारे में सोचा जाएगा। इसकी वजह यह है कि एकात्म परिसर बीजेपी के लिए काफी लकी रहा है। इस बिल्डिंग के बनने के बाद सूबे में न केवल भाजपा की सीटें बढ़ीं बल्कि दो-दो बार सरकार बनाने मे ंकामयाब रही। तो ऐसे लकी मुख्यालय को भला कौन छोड़ना चाहेगा। वो भी चुनाव के समय में।

सबसे पहले

अटलबिहारी सरकार ने देश में छह नए एम्स बनाने की घोषणा की थी, उनमें से रायपुर एम्स का ओपीडी सबसे पहले प्रारंभ होने जा रहा है। 3 जून इसकी तारीख मुकर्रर हो गई है। बाकी पांच, 1 जुलाई से शुरू होंगे। एम्स को जिस तरह से तैयार किया जा रहा है, वह छत्तीसगढ़ के लिए वारदान साबित होगा। वारदान इसलिए, कि अस्पताल खुलने से पहले ही वहां राज्य की सिकलसेल, फल्सीफेरम मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों पर काम चालू हो गया है, जिससे हर साल सैकड़ों लोग असमय काल के ग्रास बन जाते हैं। सिकलसेल पर डाटा कलेक्ट किया जा रहा है और शुक्रवार को इस पर एम्स में कांफें्रस हुई। साल के अंत तक एम्स में ट्रामा सेंटर खुल जाएगा और अगले साल तक सेंट्रल इंडिया का यह सबसे बड़ा अस्पताल पूर्ण स्वरूप में आ जाएगा। फिलहाल, 67 डाक्टरों की नियुक्ति हो गई है। रायपुर एम्स इस मामले में भी लकी है कि उसे डा0 नागरकर जैसे डायरेक्टर मिले हैं। लंबे समय तक इंगलैंड में रहने के बाद नागरकर पीजीआई चंडीगढ़ में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट बनकर लौटे। और अब उन्होंने एम्स ज्वाईन किया है। 

अच्छी खबर

ऐसे दौर में जब बुजुर्ग माता-पिता बोझ समझे जाने लगे हों, लोग पत्नी और अपनी संतान से इतर सोच नहीं पाते, बिलासपुर के युवा पत्रकार यशवंत गोहिल का प्रयास लोगों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। मदर्स डे के दिन यशवंत ने अपनी दादी के 100 साल होने पर समारोहपूर्वक उनका जन्मदिन मनाया। दादी के मनभावन भजनों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन किया गया और सारगर्भित संगोष्ठी भी हुई। काश! और लोग भी इससे नसीहत लेते, तो आज बुजुर्गोंे की यह दशा नहीं होती।  

अंत में दो सवाल आपसे

1.    भाजपा के एक लाल बत्ती वाले नेता का नाम बताइये, जो शादी के बाद विशाखापटनम में बसने के बारे में सोच रहे हैं?
2.    क्या अमित जोगी को बेलतरा और महंत गुट को बिलासपुर से टिकिट देने और जीतवाने की कांग्रेस में कोई डील हुई है?

शनिवार, 11 मई 2013

तरकश, 12 मई


कांग्रेस की डील


पिछला हफ्ता कांग्रेस के लिए काफी अहम रहा। और राजधानी में अमितेश शुक्ल के निवास पर कांग्रेस के सभी गुटीय नेताओं का एक टेबल पर बैठकर भोजन करना उतना महत्वपूर्ण नहीं था, जितना कि दिल्ली से दिग्विजय सिंह के साथ रेणू जोगी और अमित जोगी का रायपुर आना रहा। तीनों नियमित विमान के एक्जीक्यूटिव क्लास में साथ आएं। सियासी पंडितों की मानें तो दिल्ली में कोई बड़ी डील हुई और उसके बाद कांग्रेस में परिस्थितियां तेजी से पलटी है। लोगों में उत्सुकता इस बात की है कि दिग्गी ने किस शर्त पर डील कराई। जाहिर है, जोगी गुट कम में तो समझौता किया नहीं होगा। उसकी झलक दिख भी रही है। दिग्गी की वापसी के बाद अमित जोगी ने जब गुरूवार को दो दिनों की बिलासपुर शहर की पदयात्रा शुरू की तो विरोधी गुट के नेता भी अमित के पीछे-पीछे दौड़ते दिखे। अमित हीरो की तरह घूमे और बिलासपुर के बड़े नेता उनके पीछे-पीछे। बिलासपुर के लोग यह नजारा देखकर अवाक थे। चैक-चैराहों पर अमित का स्वागत करने के लिए महंत गुट, पटेल गुट के नेताओं की होड़ लग गई थी। इनमें कुछ तो पिछले एक दशक से जोगी का एलानिया विरोध करते आ रहे थे और पिछले लोकसभा चुनाव में रेणू जोगी को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन डील का ही नतीजा है कि अब, सब कुछ बदल गया है। 

नो कमेंट्स


अपने राज्य में करप्शन की स्थिति क्या है, जरा इस पर गौर कीजिए। मल्टीमीडिया के जरिये 12वीं के छात्रों को साइंस पढ़ाने के लिए एससीईआरटी ने पिछले दिनों टेंडर किया था। टेंडर में तीन पार्टियों ने अप्लाई किया। सबसे लो रेट था 90 लाख और सबसे हाई 30 करोड़। स्कूल शिक्षा विभाग की कोशिश थी कि 30 करोड़ वाले को काम मिल जाए। 30 करोड़ याने 20 फीसदी के हिसाब से छह करोड़ अंदर होने की गारंटी। बल्कि उससे अधिक भी। मगर 90 लाख सबसे कम रेट था और नियमानुसार उसे ही काम मिलना था। 90 लाख वाली मुंबई की पार्टी थी और उसका कहना था कि उसने कम रेट इसलिए कोट किया है कि वह सीबीएसई के लिए इसी तरह का प्रोग्राम बनाती है। उसके लिए यह बेहद आसान है। एससीईआरटी ने मुंबई की पार्टी को फाइनल करते हुए फाइल आगे बढ़ाया। मगर उसे काम नहीं मिलां। सरकार ने टेंडर निरस्त करके दोबारा टेंडर करने का फारमान जारी कर दिया। कारण बताया गया, रेट बहुत कम है, इसलिए वह काम नहीं कर पाएगी। एक ओर, आईपीएल के लिए 32 करोड़ का काम पीडब्लूडी ने 21 करोड़ में करके चमत्कृत कर डाला और दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा विभाग मल्टीमीडिया प्रोग्राम को 90 लाख के बजाए 30 करोड़ में कराने के लिए प्रेशर बना रहा है। ताज्जुब यह कि दोनों विभागों का मंत्री एक है। तो फिर गड़बड़ी कहां हो रही है। नो कमेंट्स।

पुनर्वास


रिटायर डीजीपी अनिल नवानी को पुलिस शिकायत प्राधिकरण में पुनर्वास मिलने के बाद कई रिटायर आईपीएस ने कोशिशें तेज कर दी है। खबर तो ये भी है कि विकास यात्रा के बाद एक और रिटायर डीजी का किसी आयोग में एडजस्टमेंट हो जाएगा। इसे देखते एक अन्य रिटायर डीजीपी भी सरकार से रिश्ते सुधारने में जुट गए हैं। असंतुष्टों का जमावड़ा लगाने से उन्हंे आखिर कोई लाभ नहीं हुआ। पिछले हफ्ते वे मंत्रालय में सिकरेट्री टूू सीएम अमन सिंह से मिले। काफी देर तक चर्चा हुई। अब अमन सिंह से मिलने का मतलब समझा जा सकता है।    

अंडर एस्टीमेट


सत्ताधारी पार्टी स्वाभिमान मंच को भले ही हलके में ले रही हो, मगर विधानसभा चुनाव में वह दुर्ग का येदियुरप्पा बन जाए, तो आश्चर्य नहीं। पुराने दुर्ग जिले में 12 सीटें हैं। इनमें से सात भाजपा और पांच कांग्रेस के पास है। दुर्ग जिले में 12 परसेंट साहू वोट है। ओबीसी की बात करें तो 30 फीसदी से अधिक। कांग्र्रेस स्वाभिमान मंच की अहमियत समझ रही है। तभी दिग्विजय सिंह के रायपुर प्रवास में दीपक साहू की उनकी बंद कमरे में मीटिंग कराई गई। पता चला है, चुनाव में कांग्रेस मंच को पूरी मदद करेगी। हर तरह की मदद। बस, उसे अपना प्रत्याशी उतारना होगा।  


अब राजनीति


इस बार का विधानसभा चुनाव इस मायने में भी दिलचस्प होगा कि इसमें कुछ रिटायर नौकरशाह भी राजनीति के मैदान मंे किस्मत आजमाते नजर आएंगे। राज्य सूचना आयोग में पोस्टेड एक रिटायर आईएएस राज्यसभा की ट्रेन छूटने के बाद अब कुनकुरी से विधानसभा में जाने की तैयारी कर रहे हैं। महीने में तीन-चार चक्कर उनका कुनकुरी का लग जा रहा है। आयोग के एक कमिश्नर बेमेतरा से भाजपा की टिकिट के लिए प्रयासरत हैं। गृह विभाग के ज्वाइंट सिकरेट्री एसपी सोढ़ी ने वीआरएस के लिए आवेदन लगाया ही है। खबर है, वे कांकेर के लिए ट्राई कर रहे हैं। तीन साल से अंबिकापुर में पोस्टेड कमिश्नर एमएस पैकरा इस साल जुलाई में रिटायर होंगे। वे भी विधानसभा चुनाव के लिए वार्मअप हो रहे हैं। रिटायर आईएएस एवं गोंडवाना समाज के अध्यक्ष बीपीएस नेताम भी टिकिट की दौड़ में पीछे नहीं हैं। आईजी होमगार्ड आरसी पटेल के चुनाव लड़ने की चर्चा तो काफी पहले से है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इनमे ंसे कितने टिकिट पाने में कामयाब हो पाते हैं। 

दीया तले अंधेरा


याद होगा, मंत्रालय की सुरक्षा में तैनात एक 55 वर्षीय डीएसपी यूपी में 15 वर्षीय बालिका से शादी रचाते पकड़ा गया था। यह मामला मीडिया में खूब उछला और यूपी में छत्तीसगढ़ पुलिस की खासी फजीहत हुई थी। मगर इसके तीसरे दिन डीएसपी वाकी-टाकी धरे मंत्रालय में डृयूटी करते पाया गया। असल में, यूपी में यादवों की सरकार है, छग पुलिस में यादवों का दबदबा है और डीएसपी भी यादव है। ऐसे में कार्रवाई कैसे होगी। अलबत्ता, अफसरों का कु-तर्क है, उसे डार्क में रखकर शादी की जा रही थी। याने नहीं बताया गया कि लड़की नाबालिग है। बात गले नहीं उतर रहा। एक डीएसपी बिना लड़की देखे शादी कर लेगा। बहरहाल, आम आदमी ऐसा गुस्ताखी करें, तो उसे यही पुलिस सलाखों के पीछे भेजने में देर नहीं लगाती। नैतिकता के नाते डीएसपी को कम-से-कम मंत्रालय जैसी जगह से तो हटा देना था। मगर ऐसा नहीं हुआ। याने दीया तले अंधेरा वाली ही स्थिति है। 

अंत में दो सवाल आपसे

1. प्रींसिपल सिकरेट्री केडीपी राव का तबादला क्यांे किया गया?
2. आईएफएस अफसर आनंद बाबू की के्रडा में पोस्टिंग का क्रेडा के किस अफसर के इशारे पर कर्मचारियों ने विरोध किया?



रविवार, 5 मई 2013

तरकश, 5 मई

खफा

जीएमआर ने आईपीएल कराकर भले ही वाहवाही बटोर ली मगर लाख कोशिशों के बावजूद उद्योग मंत्री राजेश मूणत की नाराजगी दूर न कर सका। जीएमआर के अफसरों ने मंत्री को मनाने की अपनी ओर से कम कोशिशें नहीं की। उन्हें पूरा कारपोरेट बाक्स की टिकिट का आफर दिया गया। मगर मूणत टस-से-मस नहीं हुए। रायपुर से ही उनके साथी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आईपीएल में अपनी ताकत दिखाने की कोई कमी नहीं की। मगर जीएमआर से नाराजगी का लेवल इतना ज्यादा था कि मूणत मैच देखने तक नहीं गए। ऐसे में सत्ता के गलियारों में इसकी चर्चा कैसे नहीं होगी। लोगों की उत्सुकता नाराजगी की वजह जानने की है।

 

वाह भाई!


मुद्दों को हाईजैक करना कोई पीडब्लूडी मिनिस्टर बृजमोहन अग्रवाल से सीखे। छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ को स्टेडियम की चाबी सौंपने के मौके पर अग्रवाल को जब नहीं बुलाया गया, तो बंद कमरे में किसी को कोसने के बजाए अगले दिन खेल और पीडब्लूडी अफसरों को साथ लेकर स्टेडियम का निरीक्षण करने चले गए। और वहां से फोटो के साथ बयान जारी हुआ, 60 दिन की मिली चुनौती और 45 दिनों में कर दिखाया। स्टेडियम को पीडब्लूडी ने तैयार किया, इसलिए उन्होंने इसे कैश करने की कोई कोशिश नहीं छोड़ी। जबकि, स्टेडियम से बृजमोहन को अलग रखा गया। आईपीएल लाने में सिकरेट्री टू सीएम अमन सिंह की भूमिका अहम रही तो स्टेडियम को तैयार करने की पूरी कमान चीफ सिकरेट्री सुनील कुमार और आरपी मंडल की टीम ने संभाली थी। मगर बृजमोहन तो बृजमोहन हैं। वे माहौल बनाना जातने हैं।

अब वनडे


आप ताज्जुब मत कीजिएगा, अगर अक्टूबर, नवम्बर मंे रायपुर में आस्टे्रलिया का वन डे मैच हो जाए। इसके लिए रमन के रणनीतिकारों ने कोशिशें शूरू कर दी है। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ल ने भी संकेत दिए हैं कि छत्तीसगढ़ को एक वनडे की मेजबानी मिल सकती है। उधर, दिल्ली किक्रेट एसोसियेशन के अरुण जेटली के जरिये बीसीसीआई को साधने में सरकार जुट गई है। चुनाव के दौरान वन डे मिलने का मतलब समझा जा सकता है सरकार के लिए कितना फायदेमंद रहेगा। आईपीएल से ही सत्ताधारी पार्टी की रेटिंग बढ़ गई है। और क्रिकेट ऐसा इश्यू है कि कांग्रेस भी इसका विरोध नहीं कर पाएगी। आईपीएल का शुरू मे कांग्रेस नेताओं ने विरोध किया था मगर हवा का रुख भांपकर बाद में खामोश रहना ही बेहतर समझा। 

हैट्रिक


रायपुर के आईपीएल में भले ही हैट्रिक न बन सकी, मगर महीने भर के भीतर सूबे के तीन आईएएस अफसरों ने राष्ट्रीय स्तर पर धमक दर्ज कराने की हैट्रिक जरूर बनाई है। एक नेशनल डेली के सर्वे में पीएस टू सीएम एन बैजेंद्र कुमार देश के दूसरे प्रभावशाली ब्यूरोके्रट्स चुने गए। डायरेक्टर पब्लिक रिलेशन ओपी चैधरी को धुर नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में एजुकेशन प्रोग्राम के लिए प्रधानमंत्री के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। और अब हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर सोनमणि बोरा को केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने देश के उन पांच आईएएस अफसरों में शामिल किया है, जिन्होंने फील्ड में मार्केबल काम किया है। बिलासपुर कलेक्टर रहने के दौरान बोरा ने महतारी एक्सप्रेस योजना शुरू की थी। बाद मंे राज्य सरकार ने इसे पूरे प्रदेश में लागू किया। डीओपीटी ने इसे पसंद किया है। नागपुर में 6 मई से होने जा रही डीओपीटी की कांफ्रेंस में आल इंडिया सर्विसेज के चुनिंदा 50 अफसरों के बीच बोरा अपने कामों को शेयर करंेगे। कुल मिलाकर कहा जा सकता है, अप्रैल महीना नौकरशाहों के लिए बढि़यां रहा। कम समय, कम लागत और क्वालिटी वर्क का सेहरा आखिर, ब्यूरोके्रट्स के माथे पर ही बंधा। पीएस हेल्थ एमके राउत ने स्मार्ट कार्ड से बिदक रहे प्रदेश के डाक्टरों को समझौते के मेज पर लाने का काम बखूबी किया। वहीं, आरएस विश्वकर्मा ने गुजरे महीने कामर्सियल टैक्स और आबकारी से रिकार्ड 400 करोड़ रुपए जुटाया।

सुरक्षित सीट


दूसरा कोई नेता पुत्र विधानसभा चुनाव लड़े या न लड़े, अजीत जोगी के बेटे अमित का अबकी चुनाव लड़ना तय है। और यह भी तय है कि बिलासपुर जिले की किसी सीट से राजनीति में अपनी किस्मत आजमाएंगे। जोगी खेमा उनके लिए चार सीटों पर काम कर रहा है, बेलतरा, बिल्हा, कोटा और तखतपुर। बेलतरा भाजपा के बद्रीधर दीवान का क्षेत्र है और कांग्रेस के लिए यह सबसे मुफीद है। मगर वह ब्राम्हण बाहूल्य सीट है और ब्राम्हण सपोर्ट करेंगे कि नहीं, जोगी कैंप में संशय है। फिर बेलतरा में महंत गुट भी खासा प्रभाव है। गुरूवार को परिवर्तन रैली में महंत गुट के एक अल्पज्ञात नेता की रैली में अधिक भीड़ जुट जाने के कारण जोगी गुट को अपना कार्यक्रम निरस्त करना पड़ गया। एससी वोटों के चलते अमित का बिल्हा क्षेत्र में भी मूवमेंट हो रहा है। बिल्हा स्पीकर धरमलाल कौशिक का इलाका है। सियासी पंडितों का कहना है, बेलतरा और बिल्हा में बात नहीं बनीं, तो अमित अपनी मां की कोटा सीट से चुनाव लड़ना पसंद करेंगे। 

खैर नहीं


सेल टेक्स चोरी करने वाले कारोबारियों की अब खैर नहीं। उन पर शिकंजा कसने के लिए सरकार अब पुलिस की तरह मुखबिर तैनात करने जा रही है। मुखबिर बाजार पर नजर रखेंगे और वाणिज्यिक कर विभाग को सेल टैक्स चोरी की सूचना देंगे। इस आधार पर विभाग छापे की कार्रवाई करेगा। अफसरों का अनुमान है कि सेल टैक्स की चोरी पर लगाम लग जाए, तो वाणिज्यिक कर विभाग का 15 से 20 फीसदी राजस्व बढ़ जाएगा। चलिये, बिना टैक्स बढ़ाए ही राजस्व बढ़ जाए, तो सरकार के लिए इससे अच्छी बात क्या होगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1.    राजस्व कम होने पर जब गणेशशंकर मिश्रा को सरकार ने हटा दिया तो अप्रैल महीने में ही बोर्ड और कारपोरेशन के आगे हाथ फैलाने पर वित्त विभाग के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई क्यां नहीं होनी चाहिए?
2.    अनिल नवानी के बाद अब किस रिटायर आईपीएस की पुनर्वास की चर्चा है?



शनिवार, 27 अप्रैल 2013

तरकश, 28 अप्रैल


छक्का


आईपीएल में चैका-छक्का पड़ने के दो रोज पहले ही मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह ने शिक्षाकर्मियों को रेगुलर टीचर के सामान वेतन और सुविधाएं देने का ऐलान करके सियासी छक्का लगा दिया। इस छक्के के दर्द को कांग्रेस से अधिक भला कौन महसूस कर सकता है। कहां इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी हो रही थी। आखिर, सवा लाख शिक्षक कम नहीं होते। ग्रामीण इलाके में वोटों के समीकरण को बनाने-बिगाड़ने में इनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सो, आंदोलन के दौरान शिक्षाकर्मियों और सरकार के बीच तल्खी आई तो विरोधी पार्टियांे की बांछे खिल गई थी। उन्हें लगा, सवा लाख एजेंट हमें मुफ्त में मिल गए। इसे गुगली के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। जोगी सरकार के समय लाठी खाने के बाद भी शिक्षाकर्मियों का स्वाभाविक झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ रहा था। मगर रमन ने गुगली पर छक्का जड़ कर बता दिया कि हैट्रिक बनाना है, इसलिए कोई मौका नहीं देंगे।

मुसीबत 


आईपीएल को लेकर सूबे के लोगों में भले ही जबर्दस्त उत्साह हो, मगर 90 विधायकों और छह महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के टिकिट के चार सौ से अधिक दावेदारों के लिए यह किसी मुसीबत से कम प्रतीत नहीं हो रहा हैं। कितने को आईपीएल की टिकिट दें और किसे नाराज करें। सिर्फ टिकिट ही नहीं, गाड़ी में रायपुर लेकर आने से लेकर ठहरने, खाने-पीने का भी इंतजाम। आईपीएल में दोनों पार्टियों के नेता लंबे से उतर रहे हैं। टिकिट का शार्टेज ऐसे ही नहीं हुआ। खेल विभाग के एक आला अधिकारी की मानें तो चुनावी साल में आधे से अधिक टिकिट तो नेताओं ने खरीद लिया। 90 में से 55 विधायकों ने 14 हजार टिकिट लिया है। एक मंत्रीजी ने अकेले 2 हजार टिकिट का इंतजाम किया है। यह अलग बात है कि इसके लिए आधा दर्जन ठेेकेदारों को टोपी पहनाया गया। अब, ऐसे में टिकिट की क्रायसिस तो होनी ही थी।

दीवानगी


राज्य के मंत्रियों को क्रिकेट से कोई लगाव नहीं है लेकिन कई नौकरशाहों में इसकी जबर्दस्त दीवानगी है। मंत्रालय में अधिकांश अफसरों के चेम्बर में काम के दौरान क्रिकेट भी चलता रहता है टीवी पर। सीएम सचिवालय में अमन सिंह और सुबोध सिंह एवं पीएस एमके राउत और आरपी मंडल क्रिकेट प्रेमी अफसरों मंे सबसे उपर हंै। फाइलों में डूबे होने के बाद भी अमन की एक आंख टीवी पर रहती है। आसपास के शहरों में कहीं मैच हो, तो राउत और मंडल वहां जाना हीं भूलते। इनमें से कई तो चंडीगढ़ और मुंबई तक हो आते हैं। इसलिए, ब्यूरोक्रेसी में नौकरशाही का क्रेज समझा जा सकता है।

भरोसा


अजीत जोगी सरकार के समय डिप्टी एडवोकेट जनरल रहे युवा अधिवक्ता संजय अग्रवाल को रमन सरकार ने जब एडवोकेट जनरल बनाना चाहा तो संगठन के भीतर ही कई तरह की बातें हुई थीं। मगर संघ की पृष्ठभूमि के पूर्व एजी जो काम न करा सकें, वह संजय अग्रवाल ने करा दिया। सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट कमल विहार, पीएससी, सब इंस्पेक्टर भरती जैसे कई केसेज में सरकार के पक्ष में फैसले हुए हैं। कमल विहार के खिलाफ तो दर्जन भर से अधिक याचिकाएं लगी थी। और ज्यादातर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने लगवाई थी। हाईकोर्ट ने समूची याचिकाओं को खारिज कर दिया। 48 वर्ष के अग्रवाल देश के सबसे युवा एजी होंगे। और साढ़े नौ साल में पहला मौका है, जब सरकार एजी के पारफारमेंस से प्रसन्न है। ठीक की कहा गया है, लेवल के बजाए काम पर जाना चाहिए। तेज आदमी पर किसी का भी लेवल लगा हो, वह काम में तेज ही होगा।

जन्मोत्सव 


राजनेताओं को ताकत दिखाने के लिए जन्मदिन से बढि़यां कोई मौका नहीं होता। उपर से चुनावी साल हो, तब तो मत पूछिए। अजीत जोगी का 29 अप्रैल और बृजमोहन अग्रवाल का 1 मई को जन्मदिन है और दोनों के यहां इसकी जोर-शोर से तैयारी चल रही है। खासकर अजीत जोगी के सागौन बंगले में। उनके लिए इस जन्मदिन का अबकी विशेष महत्व है। वे रोबेटिक पैरों पर चलकर समर्थकों के बीच आएंगे। इसके इत्तर, चुनावी साल मंे विरोधियों को हैसियत भी दिखानी है। इसलिए, कोई कमी नहीं रखी जा रही। बताते हैं, पूरे जिलों से कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगेगा। 30 विधायकों के आने की सहमति मिल चुकी है। जोगी खेमे की तो इसकी संख्या और बढ़ सकती है। और भाजपा से ज्यादा कांग्रेस नेताआंे को यह संदेश दिया जाएगा कि सूबे में कांग्रेस का कोई छत्रप है, तो वह अपने साहब हैं।

पद बड़ा और....


कैडर रिव्यू कराकर आईएफएस अफसरों ने आल इंडिया सर्विसेज में बाजी मार ली। आईएफएस की देखादेखी आईएएस का भी कैडर रिव्यू का प्रपोजल दिल्ली गया है। आईपीएस का तो अभी अता-पता नहीं है। अलबत्ता, आईएफएस के कैडर रिव्यू के कुछ प्वाइंट जरूर लोगों को खटक रहे है। अभी तक वन विभाग के सर्किल में सीएफ होते थे, अब सीसीएफ पोस्ट होंगे। ऐसा ही हुआ, जैसे कमिश्नर कलेक्टरी करेगा। आईएएस में भी बहुत पहले प्रयोग के तौर पर कमिश्नर लेवल के अफसरों को राजधानी का कलेक्टर बनाया था, मगर बाद में इसे दुरुस्त कर लिया गया। आईएफएस एसोसियेशन कैडर रिव्यू के लिए पिछले दिनों जब एक शीर्ष अफसर से मिलने गया था तो उन्होंने तीखे कमेंट किए थे, आप लोग पद बड़ा और काम छोटा करना चाहते हैं। आईएफएस इस पर खूब झेंपे।

 
अंत में दो सवाल आपसे

1. जन्मदिन के जरिये अजीत जोगी खेमा भाजपा को अपनी ताकत दिखाना चाहता है या कांग्रेस नेताओं को?
2. पीडब्लूडी के बदनाम इंजीनियरों ने आईपीएल के लिए 32 करोड़ के बजट में से 21 करोड़ में काम कैसे कर दिया?  

रविवार, 14 अप्रैल 2013

तरकश, 14 अप्रैल



सबको राम-राम


मुख्यमंत्री के प्रींसिपल सिकरेट्री एन बैजेंद्र कुमार बड़े दिनों के बाद गुरूवार रात फेसबुक पर आए। उन्होंने जनसंपर्क आयुक्त से मुक्त होने की खबर को साझा किया। साथ ही, छह साल तक सहयोग करने के लिए मित्रों को धन्यवाद दिया, मीडिया के मित्रों को राम-राम भी बोला। हालांकि, उनका आदेश एक अप्रैल को हो गया था। मगर मीडिया के लोग इसे भूल जा रहे थे। जो भी मिलने आता, धीरे से जेब से निकालकर विज्ञापन का एक लेटर थमा देता। सो, बैजेंद्र कुमार को फेसबुक पर आना पड़ा। वैसे, उनके शब्दों से लग रहा था, इस विभाग से रिलीव होने के बाद काफी शुकून महसूस कर रहे हैं। बहरहाल, उन्होंने जनसंपर्क जैसे विभाग में छह साल काम करने का रिकार्ड बनाया। इससे पहले, कोई दो साल से ज्यादा नहीं रहा। असल में, मीडिया को टेकल करने का लफड़ा और कमाई कुछ नहीं, इस वजह से बहुत से आईएएस जनसंपर्क में आना नहीं चाहते।

जय साई बाबा


देश के माने हुए मंदिरों में जाकर नानवेज छोड़ना या शराब जैसे व्यसन को त्याजना आम बात है। मगर आज के युग में कोई ़अफसर भगवान के सामने जाकर रिश्वत लेना छोड़ दें, सहसा विश्वास नहीं होता। मगर यह सही है कि राजधानी में पोस्टेड एक सीनियर आईएएस ने साईं के दरबार में जाकर रिश्वत लेना छोड़ दिया। आईएएस 2008 में शिरडी गए थे। बाबा के सामने उन्होंने मत्था टेका। संकल्प लिया कि अब वे एक पैसा हाथ नहीं लगाएंगे। अब स्थिति यह है कि ठेकेदार सूटकेस लेकर घूम रहे हैं कि साब एकसेप्ट कर लें। रिश्वत छोड़ने का चमत्कार यह हुआ है कि आईएएस की हैसियत लगातार बढ़ती जा रही। अभी तो टापोटाप वाली स्थिति है। काश! उनकी देखादेखी कुछ और अफसर भी शिरडी वाले के दरबार में ऐसा ही कुछ संकल्प ले आते तो सबक भला होता।

दो पत्नी


वैसे तो पत्नी अगर पति पर विवाहेत्तर संबंधों का आरोप लगाती है तो पुलिस कार्रवाई करने में देर नहीं लगाती। मगर एक आईपीएस अफसर दो-दो पत्नी रखा है और उसकी पत्नी न्याय की गुहार लगा रही है, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही। जबकि, एक पुराने डीजी के निर्देश पर आईजी लेवल की जांच हुइ थी और चार पेज की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी आईपीएस दूसरी महिला को भी पत्नी की तरह रखा है। उसके बच्चे सरकारी गाड़ी में स्कूल जाते हैं। इसके बाद भी कोई एक्शन नहीं।

खफा


जेके लक्ष्मी सीमेंट मामले में एक आरोपी के खिलाफ जनसुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई करने को लेकर सरकार पुलिस महकमे से बेहद खफा है। पुलिस ने बस्तर में पिछले दो-तीन साल में जितने भी मामले बनाए हैं, सभी आरोपी अदालत से बाइज्जत रिहा हो रहे हैं। जाहिर है, पुलिस उन्हें नक्सली साबित करने में नाकाम रही है। इसके बावजूद, जेके मामले में नक्सली धारा लगा दी गई। और सरकार को इंफार्म भी नहीं किया गया। सरकार के करीबी अफसरों का कहना है, अगर नक्सलियों ने घटना को अंजाम दिया तो पुलिस को पता कैसे नहीं चला कि अहिरवारा इलाके में नक्सली धमक आए हैं। सरकार की जानकारी में यह है कि पुलिस महकमे से निर्देश मिलने के बाद दुर्ग पुलिस ने नक्सली धारा लगाया।    

घर वापसी


राजधानी के एक आला राजनेता के चर्चित पीए की आखिरकार घर वापसी हो गई। बंगले के साथ मंत्रालय में भी अब उन्हें कक्ष एलाट कर दिया गया है। पिछले साल पीए के कुछ निजी मामलों ने इतना तूल पकड़ा कि साब ने उसे बाहर का रास्ता दिखाना बेहतर समझा था। तब लोगों ने समझा कि पीए के लिए बंगले का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया। मगर साब दयालू हैं। उनका मन पसीज गया।  

पद बड़ा और....


कैडर रिव्यू कराकर आईएफएस अफसरों ने आल इंडिया सर्विसेज में बाजी मार ली। आईएफएस की देखादेखी आईएएस का भी कैडर रिव्यू का प्रपोजल दिल्ली गया है। आईपीएस का तो अभी अता-पता नहीं है। अलबत्ता, आईएफएस के कैडर रिव्यू के कुछ प्वाइंट जरूर लोगों को खटक रहे है। अभी तक वन विभाग के सर्किल में सीएफ होते थे, अब सीसीएफ पोस्ट होंगे। ऐसा ही हुआ, जैसे कमिश्नर कलेक्टरी करेगा। आईएएस में भी बहुत पहले प्रयोग के तौर पर कमिश्नर लेवल के अफसरों को राजधानी का कलेक्टर बनाया था, मगर बाद में इसे दुरुस्त कर लिया गया। आईएफएस एसोसियेशन कैडर रिव्यू के लिए पिछले दिनों जब चीफ सिकरेट्री सुनील कुमार से मिलने गया था तो उन्होंने तीखे कमेंट किए थे, आप लोग पद बड़ा और काम छोटा करना चाहते हैं। आईएफएस इस पर खूब झेंपे।

अच्छी खबर


तो सरकारी प्रोडक्ट हमेशा सवालों में रहते हैं। मगर सरकारी दुग्ध संघ का देवभोग पेड़ा इतना टेस्टी है कि अच्छे-अच्छे होटलों का पेड़ा उसके सामने टिक नहीं पा रहा। जाहिर है, ऐसे में डिमांड तो बढ़ेगा ही। देवभोग के स्टालों में एडवांस पैसा जमा करने पर पेड़ा नहीं मिल रहा। स्टाल वालों का कहना है, पूर्ति नहीं हो पा रही।

अंत में दो सवाल आपसे


2. छत्तीसगढ़ के किस मंत्री का केरल के वन मंत्री केबी गणेश कुमार जैसा हश्र हो सकता है?
1. सरकार ने किस रणनीति के तहत ओपी चैधरी को डायरेक्टर जनसंपर्क बनाया है? 

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

तरकश, 7 अप्रैल


झटका

सरकार ने ट्राईबल कार्ड के तहत एमएस परस्ते को वीवीआईपी जिला कवर्धा का कलेक्टर पोस्ट कर दिया मगर यह डायरेक्ट आईएएस अफसरों को अच्छा नहीं लगा है। वीवीआईपी जिला राजनांदगांव पहले छिना अब कवर्धा भी हाथ से निकल गया। कवर्धा में अभी तक डायरेक्टर आईएएस ही रहे हैं। सोनमणि बोरा, सिद्धार्थ परदेशी, इसके बाद मुकेश बंसल। राजनांदगांव से रमन सिंह के निर्वाचित होने के बाद वहां भी डायरेक्ट ही पोस्ट रहे। संजय गर्ग, रोहित यादव और परदेशी। मगर राजनांदगांव को अब प्रमोटी आईएएस अशोक अग्रवाल संभाल रहे हैं। सीएम के जिले का अपना क्रेज होता है। आमतौर पर वहां डायरेक्टर आईएएस ही पोस्ट किए जाते हैं। लेकिन अब डायरेक्ट आईएएस, आईपीएस को गुमान नहीं होना चाहिए। आईपीएस में भी वैसा ही है। राजनांदगांव और कवर्धा, दोनों में प्रमोटी एसपी हैं। राजनांदगावं के एसपी संजीव शुक्ला को आईपीएस अवार्ड हो गया है, कवर्धा के प्रखर पाण्डेय को तो अभी आईपीएस नहीं मिला है। जााहिर है, प्रमोटी अफसरों को इम्पार्टेंस मिल रहा है। सूबे के दूसरे बड़ा जिला बिलासपुर को भी ठाकुर राम सिंह संभाल रहे हैं। औद्योगिक जिले के रूप में उभर रहे जांजगीर में भी आरपीएस त्यागी कलेक्टर हैं। डायरेक्ट को यह अच्छा कैसे लगेगा?

साठा तो पाठा

एक लोकोक्ति है, साठा तो पाठा। याने 60 में भी पठ्ठा। लगता है, सरकार भी इस पर विश्वास करने लगी है। 2 अप्रैल को कलेक्टरों के हुए फेरबदल में कुछ ऐसा ही दिखा। कवर्धा के कलेक्टर बनाए गए एमएस परस्ते का 60वां चालू हो गया है। अगले साल वे रिटायर होंगे। इसी तरह धमतरी कलेक्टर एनके मंडावी का भी 2014 आखिरी है। याने कोई मेजर प्राब्लम नहीं हुआ तो दोनों जिले से रिटायर होंगे। और कलेक्टर के रूप में रिटायर होने का नया कीर्तिमान बनाएंगे। अविभाजित मध्यप्रदेश में भी कभी ऐसा देखने में नहीं आया। वह इसलिए कि रिटायरमेंट की उम्र में कलेक्टर नहीं बनाए जाते। मगर अपने यहां तो साठा वाला मामला है।

उल्टा-पुल्टा

सचिवों का फेरबदल करके सीएम ने मंत्रालय की टीम मजबूत कर ली है। आरपी मंडल पीडब्लूडी में ओपनर की तरह बैटिंग कर रहे हैं, तो मीडिल आर्डर में विवेक ढांड पंचायत को संभाले हुए हैं। सरकार ने अब बैटिंग आर्डर चेंज करके मजबूत बैट्समैन एमके राउत को भी मैदान में उतार दिया है। याने पीडब्लूडी, हेल्थ, अरबन और पंचायत, चारों जगह दम-खम वाले खिलाड़ी। मगर कलेक्टरों की लिस्ट में उल्टा-पुल्टा हो गया। संस्कृति संचालक एनके शुक्ला को रायपुर जिला पंचायत में सीईओ बनाया गया है, जहां वे राज्य बनने से पहले 99 में सीईओ थे। और तब उसमें 15 ब्लाक थे, अब मात्र पांच रह गए हैं। हालांकि, उनकी पनिश्मेंट पोस्टिंग समझ में आती है। बजट सत्र के दौरान एक डायरेक्ट आईएएस से पंगा ले लिया था। और डायरेक्ट अफसरों ने घेरकर उन्हें निबटा डाला। मगर कई आईएएस की पोस्टिंग लोगों को समझ में नहीं आ रही है। मसलन्, भुवनेश यादव के खिलाफ पीएचई का 15 करोड़ रुपए को निजी खातों में ट्रांसफर करने और 75 लाख रुपए का मोबाइल खरीदने के मामले में जीएडी क्वेरी कर रहा है। यादव को नारायणपुर कलेक्टर से हटाकर जीएडी में ही डिप्टी सिकरेट्री बना दिया गया। शम्मी आबिदी जैसे नई आईएएस कलेक्टरशीप की प्रतिक्षा कर रही थीं, उन्हें डायरेक्टर पंचायत की कमान सौंप दी गई। कोंडागांव के कलेक्टर हेमंत पहाड़े गरियाबंद क्यों शिफ्थ हुए, वे खुद इसका मतलब नहीं समझ पा रहे हैं। सरगुजा के बहुचर्चित बस्ता कांड में एक प्रमोटी आईएएस के खिलाफ इंक्वायरी चल रही है। वे भी कलेक्टर बन गए।      

कनेक्शन

ओपी चैधरी को डायरेक्टर पब्लिक रिलेशंस बनाने के बाद राजधानी के लोग नगर निगम और डीपीआर के बीच कनेक्शन ढूंढ रहे हैं। असल में, कुछ साल से रायपुर नगर निगम कमिश्नर रहे अफसर डीपीआर बन रहे हैं। याद होगा, सोनमणि बोरा और अशोक अग्रवाल रायपुर ननि कमिश्नर रहे। दोनों डीपीआर बनें। चैधरी भी  रायपुर में कमिश्नर रहे। और अब डीपीआर हैं। यहीं नहीं, राज्य बनने से पहले मनोज श्रीवास्तव भी रायपुर के कमिश्नर रहे और वे मध्यप्रदेश में लंबे समय तक पब्लिक रिलेशंस में रहे। ऐसे में लोग गलत चुटकी नहीं ले रहे हैं, वर्तमान कमिश्नर तारणप्रकाश सिनहा भी एक दिन डीपीआर बनेंगे।

राहत

प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका आईपीएल में सरकार अब कुछ राहत की सांस ले रही है। प्रतिष्ठा की बात इसलिए आ गई थी कि समय कम था और बीसीसीआई के कुछ लोगों ने कमेंट कर दिया था कि दो महीने में छत्तीसगढ़ आईपीएल की क्या तैयारी कर पाएगा? दर्शकों को पटिया पर बैठना पड़ेगा। यही वजह है, सरकार ने इसे चुनौती की तरह लिया। और आलम यह है कि तैयारी अब अंतिम चरण में पहंुच गई है। स्टेडियम में शिफ्थ वाइज 24 घंटे काम चल रहा है। ठीक ही कहा गया है, गर इच्छा शक्ति हो तो कोई काम मुश्किल नहीं है। सरकार चाहे तो कुछ भी संभव है। कम समय, कम लागत के बाद भी क्वालिटी वर्क के लिए आईपीए राज्य के लिए एक नजीर बनेगा।

पावरफुल

मंत्रालय में हुए फेरबदल में 85 बैच के आईएएस बैजेंद्र कुमार और ताकतवर हो गए हैं। उनके पास पांच विभाग पहले से थे अब वाणिज्य और उद्योग मिलने के बाद विभागों की संख्या आधा दर्जन पहुंच गई है। पीएस टू सीएम, आवास पर्यावरण, पब्लिक रिलेशंस, चेयरमैन पौल्यूशन बोर्ड, चेयरमैन एनआरडीए और अब वाणिज्य और उद्योग। सिर्फ जनसंपर्क आयुक्त से मुक्त हुए हैं। मगर जनसंपर्क विभाग तो उन्हीं के पास है।

गुड्डा और गुडि़या

पहले छोटे जोगी की शादी को लेकर अजीत जोगी के समर्थकों में उत्सुकता थी। अब नन्हें जोगी को लेकर है। पूर्व विधायक और मध्यप्रदेश के समय सेवादल के अध्यक्ष रहे कांग्रेस नेता चंद्रप्रकाश बाजपेयी के बिलासपुर स्थित निवास पर होली मिलन समारोह में जोगीजी को रिटर्न गिफ्ट बाक्स दिया गया। बाक्स में चना, मुर्रा और गुड्डा निकला। चना, मुर्रा जोगीजी को बहुत प्रिय है मगर गुड्डा का आशय उन्हें समझ में नहीं आया। जब कार्यक्रम के संचालक ने गुड्डे का मतलब समझाया तो लोगों ने खूब ठहाके लगाए। मंच पर अमित और बहू रीचा भी थी। दोनों शरमा गए। वैसे, समर्थकों को चिंता नहीं करनी चाहिए। समय आने पर गुड न्यूज भी आ जाएगा। जोगी परिवार हर काम रणनीति बनाकर करता है। तभी तो मैदान में टिका हुआ है।          

अंत में दो सवाल आपसे


1. प्रींसिपल सिकरेट्री एमके राउत को हेल्थ और अरबन देकर उन्हें मजबूत करने के पीछे क्या कोई पावर गेम है?
2. राजधानी के पड़ोसी जिले के एक कलेक्टर का नाम बताइये, जिन्हें एक विरोधी पार्टी के नेता की सिफारिश पर नहीं हटाने की चर्चा है?