शनिवार, 7 जुलाई 2012

तरकश, 8 जुलार्इ


गुगली पर छक्का

बीजापुर मुठभेड़ मामले में पुलिस की बयानबाजी से विश्वसनीय छत्तीसगढ़ की हवा ही निकल गर्इ थी। रायपुर से लेकर दिल्ली तक चल रही खबरों से यही मैसेज जा रहा था कि बलंडर हुआ है। और उसे छुपाने की कोशिश की जा रही है। अगले साल चुनाव को देखते चिदंबरम ने भी इस बार साथ नहीं दिया। क्षमा तो मांगा ही, यह कहकर राज्य सरकार का संकट और बढ़ा दिया कि राज्य पुलिस के निर्देश पर कार्रवार्इ हुर्इ थी और जांच कराना वहां की सरकार का काम है। इसके बाद राजधानी में सब जगह यही चर्चा थी, सरकार इस बार घिर गर्इ.....जवाब देना मुशिकल होगा। मगर हार्इकोर्ट के एकिटव जसिटस से जांच कराने का ऐलान कर चिदंबरम की गुगली पर छक्का जड़ दिया। राज्य बनने के बाद 12 साल में आखिर, यह पहला मौका होगा, जब किसी मामले की जांच के लिए हार्इकोर्ट के जज से जांच कराने की घोषणा हुर्इ हो। लोकल कांग्रेस नेता भी सकते में हैं, जसिटस से जांच के बाद अब बचता क्या है। बस्तर में खोए आधार को पाने का यह बढि़यां मौका था। सामने विधानसभा भी था। लेकिन गड़बड़ हो गया।

मिशन दिल्ली

रमन सरकार के दिनोंदिन सख्त होते तेवर को सियासी प्रेक्षक मिशन दिल्ली से जोड़कर देख रहे हैं। नरेंद्र मोदी की पीएम की दावेदारी पर नीतिश कुमार के सवाल के बाद भाजपा के पास कम विकल्प बच गए हैं। निर्विवाद छबि की वजह से इनमें रमन का भी एक नाम हो सकता है। राजनीतिक पंडितों का तर्क है, लोकलुभावन योजनाओं से रमन की छबि जनप्रिय नेता की बन गर्इ है, सिर्फ सख्त प्रशासक की कमी थी। अब वो भी आप देख रहे हैं। तीन महीने में तीन बड़ी घटनाएं हुर्इ हैं.....अप्रैल में गरियाबंद में निर्माणाधीन बि्रज गिरने पर पीडब्लूडी के चीफ इंजीनियर, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर, एकिजक्यूटिव इंजीनियर, एसडीओ समेत आधा दर्जन अफसरों को तत्काल सस्पेंड। जबकि, सीएम के एक करीबी मंत्री की सिफारिश पर उनके एक ठेेकेदार को इसका काम मिला था। फिर, गरीब महिलाओं के गर्भाशय निकालने पर स्वास्थ्य विभाग ने नौ डाक्टरों के रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिए। इनमें ऐसे-ऐसे नाम थे कि अखबारों की खबर पर लोगों को यकीं नहीं हो रहा था। और अब बीजापुर कांड की जांच। इसकी आंच में कुछ पुलिस अधिकारी भी झुलस सकते हैं। मगर इसकी परवाह नहीं की गर्इ। दिल्ली के अखबारों में न्यायिक जांच की खबर फं्रट पेज पर छपी।

अमीर कलेक्ट्रेट

आपको याद होगा, पिछले साल जशपुर को वहां के कलेक्टर द्वारा देश का घटिया जिला बताने पर खूब बवाल मचा था। मगर अब कम-से-कम कलेक्टर के चेम्बर को देखकर जशपुर को कोर्इ घटिया नहीं कह सकेगा। कलेक्टर के लिए 30 लाख रुपए खर्च कर शानदार चेम्बर बनाया गया है.....80 हजार की तो टेबल खरीदी गर्इ। बताते हैं, कलेक्टर ने पीडब्लूडी के अफसरों को चेम्बर का जीर्णाद्धार करने कहा था। अब प्रमोटी कलेक्टर होते तो चल जाता, डायरेक्टर आर्इएएस का सवाल था। सो कंजूसी क्यों किया जाए। चलिये, कलेक्टर साब को अपने चेम्बर में बैठने पर अब बेकार जिला का भान नहीं होगा।

सरप्राइजिंग

नगरीय प्रशासन विभाग के प्रींसिपल सिकरेट्री अजय सिंह अगर किसी को पत्र भेजकर मिलने के लिए बुलाएं तो खुसुर-पुसुर तो होगी ही। बुधवार को ऐसा ही हुआ। उन्होंने राजधानी के एक समाजेवी को पत्र लिखा, आप मिलने आएंंगे तो हमें अच्छा लगेगा। जाहिर है, अजय सिंह अलग मिजाज के अफसर है......लोगों से मिलने-जुलने में उनको विश्वास नहीं है। मोबाइल रिसीव करने का सवाल ही नहीं उठता। मंत्रालय में लोग शर्त लगाते हैं, सिंह साब मोबाइल रिसीव कर लेंगे तो मैं ये कर......दूंगा। लेकिन इस बार मामला जरा हटकर था। समाज सेवी नगरीय निकाय के एक मामले को लेकर पत्र देने पहुंचे थे। मगर पीए ने उसे लेने से टका-सा जवाब दे दिया......साब ने मना किया है.....सेक्शन में जाकर दे दो। समाजसेवी ने इसकी शिकायत चीफ सिकरेट्री सुनील कुमार को फैक्स कर दी। और इसी का असर हुआ, समाजसेवी को बुलौवा आ गया।

झुनझुना

पांच-छै मलार्इदार निगम, आयोगों को छोड़ देें, तो बाकी नेताओं के लिए लाल बत्ती झुनझुना से ज्यादा नहीं है। बलिक और यह तकलीफ दे रही है। ठीक से वे इतरा भी नहीं पा रहे हैं। दर्जा है, कैबिनेट मंत्री का, और वेतन मिलता है, मनरेगा मजदूर से भी कम.....1500 रुपए महीना। आयोग के पुराने भृत्यों को भी 10 हजार से कम नहंी मिलता। लाल बत्ती देखकर लोग चंदा के लिए परेशान कर देते हैं, सो अलग। महीने में पेट्रोल की पात्रता है सिर्फ 150 लीटर की। इसके बाद मोटरसायकिल पर घूमो। पुलिस ने पिछले सोमवार को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष सोमनाथ यादव की मोटरसायकिल को चालान कर दिया। गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं था। बदनामी होगी, इसलिए उन्होंने घटना के बारे में किसी को बताया भी नहीं? कर्इ साल की तपस्या और कर्इ चौखटों पर मत्था टेकने के बाद नेताओं को लाल बत्ती मिली है। उसके बाद ये हाल है, तो उनके भीतर का दर्द आप समझ सकते हैं।

टामी का बर्थडे

भाजपा की बैठक में पीए का मामला ऐसे ही नहीं उछला। मंत्रियों के इक्के-दुक्के पीए ही होंगे, जो खास पैसा नहीं बना पाए। वरना, 10 करोड़ से कम का कोर्इ आसामी नहंीं हैं। हाल यह हो गया है कि अब पैसे को क्या करें। सो, अब टामी का बर्थडे भी मनाया जा रहा है। एक मंत्री के पीए के बच्चों द्वारा जीर्इ रोड पर सिथत एक माल के रेस्टोरेंट में अपने टामी का बर्थडे मनाने की खूब चर्चा है। चूकि माल में टामी ले जाना एलाउ नहीं है, सो उसकी फोटो को प्रतीक मानकर केक काटा गया। पीए का जलवा अपने मंत्री से भी ज्यादा है। मंत्री के पास तीन गाड़ी है और पीए के पास भी इतनी ही। स्कार्पियो से लेकर इनोवा तक। एक अपने और एक पत्नी के लिए और एक बच्चों को स्कूल जाने के लिए। मंत्रीजी सीधे-साधे हैं, इसलिए पीए ही उनका मंत्रालय चला रहा है। इसलिए, इस रुतबे को वह डिजर्व करता ही है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एएसआर्इ के रिजल्ट निकालने और दो नक्सलियों के मारे जाने पर पीएचक्यू में प्रेस कांफें्रस हो जाती है, मगर बीजापुर में 21 नक्सलियों के मारे जाने के बाद पुलिस मुख्यालय में कोर्इ सुगबुगाहट क्यों नहीं हुर्इ?
2. अपनी बेटी को चुनाव न जीतवा पाने वाले आदिवासी नेता अरबिंद नेताम को पार्टी से बाहर करने पर क्या वाकर्इ कांग्रेस को नुकसान होगा?

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