शनिवार, 30 जून 2012

तरकश, 1 जुलार्इ

सहमे आर्इपीएस


बिलासपुर के एसपी राहुल शर्मा की मौत के बाद पुलिस महकमे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक के बाद एक अफसर, या तो सदगति को प्राप्त हो रहे हैं या बीमारी के शिकार हो रहे हैं। याद होगा, हादसे के दूसरे दिन आर्इजी जीपी सिंह निबट गए। इसके 20 वें दिन बीएस मारावी की मौत हो गर्इ। फिर, डेढ़ महीने बाद र्इओडब्लू में पोस्टेड डीआर्इजी डीडी चतुर्वेदी का देहावसान हो गया। और अब, एडीजी रामनिवास बीमार चल रहे हैं। एक्सपांडेलाइटिस का इतना तगड़ा अटैक रहा कि हफते भर तक बिस्तर से हिल-डुल नहीं पाए। अब किसी तरह बेल्ट बांधकर आफिस आ रहे हैं। फस्र्ट फलोर पर सीढ़ी चढ़ने में तकलीफ होने की वजह से उन्हें अब ग्राउंड फलोर पर एआर्इजी का कमरा एलाट किया गया है। रामनिवास डीजीपी के प्रबल दावेदार हैं। सो, उनकी मनोदशा क्या होगी, आप समझ सकते हैं। पीएचक्यू के जिस अफसर के चेम्बर में जाएं, आजकल यही चर्चा है.....राहुल की मौत के समय पंचख चल रहा था। और इस दौरान इस तरह की घटना का अशुभ योग होता है। और हो भी कुछ ऐसा ही रहा है। पहली बार ताकतवर पुलिस महकमे के खिलाफ रमन कैबिनेट एक हो गया। इसलिए आर्इपीएस अफसरों का सहमना अस्वभाविक नहीं है।


अच्छी खबर


राज्य सरकार के लिए एक अच्छी खबर होगी......2008 बैच के पंजाब कैडर के युवा आर्इएएस दंपति अड़पा कार्तिक और रूपांजलि ने भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में काम करने की इच्छा जतार्इ है। दोनों ने इसके लिए डीओपीटी को आवेदन भेज दिया है, जिस पर कार्रवार्इ अब अंतिम चरण में है। अड़पा वहां नगरीय प्रशासन विभाग में एडिशनल सिकरेट्री हैं और रूपांजलि लुधियाना डेवलपमेंट अथारिटी में एडिशनल एडमिनिस्टे्रटिव चीफ हैं। दोनों पंजाब के टाप के अफसर माने जाते हैं। बहरहाल, यह पहला मौका होगा, जब पंजाब कैडर का आर्इएएस छत्तीसगढ़ आ रहा है। पंजाब और महाराष्ट्र को आर्इएएस में टाप का कैडर माना जाता है।


पीए का चक्कर


दिल के चक्कर में एक हार्इप्रोफाइल शखिसयत का पीए मारा गया। उसका जालिम दिल लग भी गया तो एक संवेदनशील आयोग की मेम्बर और भाजपा नेत्री से। दोनों शादी-शुदा हैं, इसलिए साब ने बहुत समझाया, संगठन के आदमी हो, बदनामी होगी। आयोग की महिला चेयरमैन ने भी अपनी सदस्या को लाइन पर लाने के लिए कम कोशिश नहीं की। मगर यह ऐसी बीमारी है कि इस पर किसी का वश कहां चलता है। पिछले हफते महिला नेत्री के घर पीए पहुंचे तो किसी ने उनकी पत्नी और ससुर को फोन कर दिया। फिर क्या था, दोनों तपाक से मौके पर पहुंच गए। पत्नी और ससुर को खिड़की से देखकर पीए पीछे की दीवार फांद कर भागा। इस चक्कर में पैर भी टूट गया। बड़े साब ने इसे गंभीरता से लिया.....इसके बाद हाउस से पीए को इशारा कर दिया गया, फिलहाल आपकी जरूरत नहीं है। घर में रहकर दिल को दुरुस्त कीजिए। वैसे, ठीक ही कहा गया है, दिल जो न कराए। वरना, पीए की एक समय जलवा था। आर्इएएस, आर्इपीएस, मीडिया से लेकर बड़े-बड़े नेता तक खुशामद में लगे रहते थे।


डेपुटेशन


दिल्ली से सात साल डेपुटेशन करके 2007 में रायपुर लौटे मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एन बैजेंद्र कुमार फिर दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं। सेंट्रल डेपुटेशन के लिए आर्इएएस को साल में दो बार, जुलार्इ और दिसंबर में आवेदन करना होता है। बैजेंद्र इस महीने आवदेन भेज सकते हैं। सुना है, इसके लिए उन्होंने चीफ सिकरेट्री सुनील कुमार से चर्चा की है। 85 बैच के आर्इएएस बैजेंद्र दिल्ली में एम्स, मानव संसाधन, दिवंगत केंद्रीय मंत्री अजर्ुन सिंह के प्रायवेट सिकरेट्री से लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय में काम कर चुके हैं। डेपुटेशन की अधिकतम अवधि पूरी हो जाने के चलते 2007 में उन्हें रायपुर लौटना पड़ा था।




मीडिया और पुलिस


छत्तीसगढ़ में नेटवर्क के मामले में मीडिया और पुलिस का एक ही हाल है। गुरूवार की शाम बासागुड़ा और जगरगुंडा में हुर्इ नक्सली मुठभेड़ इसका ताजा उदाहरण है। शुक्रवार को सुबह तक न मीडिया को पता था और न पुलिस को। टीवी चैनलों में साढ़े नौ बजे बे्रकिंग न्यूज चलना शुरू हुआ। जबकि, आंध्र पुलिस के हवाले से शुक्रवार के कुछ तेलगू अखबारों में यह खबर छप चुकी थी। चेन्नर्इ से एक आर्इएएस मित्र ने वहां के अखबार में खबर पढ़कर इस स्तंभकार को फोन कर एनकाउंटर के बारे में पूछा तो चौंकने के अलावा कोर्इ चारा न था। छत्तीसगढ़ की खबर छत्तीसगढ़ के अखबारों में नहीं है और न पुलिस को पता है.....मीडिया और पुलिस के लिए इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है।

लिस्ट टली


कलेक्टरों का ट्रांसफर कम-से-कम 10 जुलार्इ तक के लिए टल गया है। बताते हैं, मुख्यमंत्री की अति व्यस्तता की वजह से सूची पर चर्चा नहीं हो पा रही है। वैसे, कलेक्टर कांफे्रंस के पहले 3-4 जुलार्इ तक लिस्ट निकलने की खबर थी। मगर मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों की मानें तो अब कलेक्टर कांफे्रंस में अफसरों का पारफारमेंस देखने के बाद ही कोर्इ फैसला किया जाएगा। सूत्रों का ऐसा भी कहना है, 10 जुलार्इ तक अगर लिस्ट नहीं निकली तो फिर विधानसभा के मानसून सत्र के बाद ही कुछ होगा। क्योंकि, इस बार जो अफसर जिले में जाएंगे, वे ही अगला चुनाव कराएंगे। सो, सरकार जल्दीबाजी के बजाए ठोक-बजाकर अफसरों को जिले में भेजेगी। ऐसे अफसरों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी, जो अनुभवी के साथ ही संतुलित ढंग से काम करते हों।

डबल झटका


एनएसयूआर्इ के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव का सिटंग आपरेशन की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पहले वह उलझन में थी कि रिकाडिर्ंग में एक जगह यादव के साथ शिकायतकर्ता चाय पी रहा है और बाद में यादव ने फिर पिटार्इ क्यों शुरू कर दी। पुलिस को पता चला है, देवेंद्र को चाय पीने के दौरान पता चल गया सामने वाले की शर्ट में कैमरा लगा हुआ है, इसलिए गुस्सा कर पिटार्इ कर दी। मगर उसे यह आभास नहीं हुआ कि छत में एक और कैमरा लगा है। छत के कैमरे से ही पिटार्इ भी शूट हो गर्इ। बहरहाल, इस एपिसोड से कांग्रेस को करारा झटका लगा है। वरिष्ठ आदिवासी नेता अरबिंद नेताम की बगावत के पार्टी उबरी भी नहीं थी कि यह कांड हो गया। इससे पार्टी के खिलाफ दोहरा संदेश गया है। एक तो जोर-जबर्दस्ती चंदा उगाही का और दूसरा, आपस में ही एक-दूसरे को निबटाने का। यह किसी से छिपा नहीं है कि एनएसयूआर्इ प्रमुख को एक्सपोज करने में पार्टी के किस गुट का हाथ है।

अंत में दो सवाल आपसे


1. सीएम हाउस से ओपी गुप्ता को छुटटी पर क्यों भेज दिया गया है?

2. प्रींसिपल सिकरेट्री विवेक ढांड को एसीएस बनाने में देरी क्यों हो रही है?


कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें