शनिवार, 7 अक्तूबर 2017

छत्तीसगढ़ का अपमान!

संजय दीक्षित
 2 अक्टूबर

रुलिंग पार्टी की विचार धारा से जुड़े एक आईएएस ने तबाही मचा दी है....उन्हें छत्तीसगढ़ की मान-मर्यादा का भी खयाल नहीं....अपना छत्तीसगढ़ इतना तो गरीब नहीं है.....आईएएस दो-दो हजार की वसूली करने लगे। दरअसल, सरकार के पास एक जिला पंचायत सीईओ का कांप्लेन आया है। आडियो भी साथ में है। सीईओ का पीए फोन पर तगादा कर रहा है....सब जगह से पैसा आ गया है....सिर्फ तुम्हारे यहां का ही बचा है। मामला है, ग्राम पंचायत सचिवों की सेवा के रिनीवल का। जिले में करीब पांच सौ ग्राम पंचायत हैं। रिनीवल के लिए दो-दो हजार रेट तय किया गया है। दो-दो हजार का मतलब भी दस लाख होता है। पता चला है, सरकार की ओर से सीईओ को मैसेज करा दिया गया है। लेकिन, महिला कलेक्टर को सीईओ कितना सुनेंगे, इसमें संशय है।   
पोस्टिंग का रिकार्ड
एन बैजेंद्र कुमार के बाद राजेश टोप्पो दूसरे आईएएस होंगे, जिन्होंने जनसंपर्क में दो साल पूरा किया है। 24 सितंबर 2015 को राजेश डायरेक्टर पब्लिक रिलेशंस बने थे। उनसे पहिले बैजेंद्र कुमार करीब पांच साल कमिश्नर जनसंपर्क रहे। इन दोनों के अलावा कोई भी आईएएस सवा-डेढ़ साल से आगे नहीं बढ़ पाया। सीके खेतान जरूर दो साल के आसपास रहे मगर दो टेन्योर में। जनसंपर्क में सबसे कम समय तक रहने वालों में जीएस मिश्रा, बीएल तिवारी और अशोक अग्रवाल हैं। जनसंपर्क की पोस्टिंग बेहद रुतबेदार मानी जाती है। मध्यप्रदेश के समय हमेशा सीएम के क्लोज और हाई प्रोफाइल आईएएस को डीपीआर बनाया जाता था। अविभाजित मध्यप्रदेश में सुनील कुमार सबसे यंगेस्ट डीपीआर रहे। वे आईएएस में आने के आठ साल में डायरेक्टर पीआर बन गए थे। यह रिकार्ड अभी भी कायम है। पुराने लोगों को याद होगा, 87 में रायपुर में कलेक्टर रहने के दौरान सुनिल कुमार को तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने बुलाकर डीपीआर बनाया था। बहरहाल, राजेश टोप्पो जहां भी रहे हैं, पोस्टिंग का रिकार्ड बनाए हैं। बलौदा बाजार कलेक्टर रहे तो पौने चार साल। अब तो पावर जोन में पहुंच गए हैं। देखना दिलचस्प होगा, अगला कौन सा रिकार्ड बनाते हैं।     

उड़ीया आईएएस और राहू


छत्तीसगढ़ में उड़ीया आईएएस की कभी तूती बोलती थी। एसके मिश्रा अजीत जोगी के बाद रमन सरकार में भी सीएस बने रहे। लेकिन, उनके बाद राहू-केतु मंगल में ऐसे बैठे हैं कि जब भी बड़े पदों पर पोस्टिंग का मौका आता है, उसे बाधित कर देते हैं। बीकेएस रे को सीएस बनने के समय भी कुछ ऐसा ही हुआ और गिरधारी नायक के डीजीपी बनने के समय भी। अब रेरा के चेयरमैन की पोस्टिंग में भी एक उड़ीया अफसर को घेरने के लिए मारक ग्रह-नक्षत्र एक्टिव हो गए हैं। हालांकि, रेरा के दावेदार तो कई हैं, लेकिन उ़ड़ीया अफसर का पलड़ा ज्यादा भारी है। ऐसे में, एक नेशनल जांच एजेंसी की नोटिस को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल इस पर भी उठ रहे हैं कि जांच एजेंसी के अफसर 30 और 31 अगस्त को छुट्टी होने के बाद भी रायपुर आए....होटल में बैठकर नोटिस तैयार की और अफसर को देकर दिल्ली के लिए उड़ गए। अब पूरी ब्यूरोक्रेसी की नजर इस पर है कि इस आईएएस का भी वही हश्र होगा, जो बीकेएस रे और गिरधारी नायक का हुआ था। या फिर आईपीएस पवनदेव टाईप.....जिन्हें मीडिया में लगातार खबरों के प्लांट होने के बाद भी सरकार ने एडीजी प्रमोट कर दिया।   

सब फलाहारी


बुधवार को डीजीपी एएन उपध्याय ने सूबे के सात पुलिस अधीक्षकों को मुख्यालय में मीटिंग रखी थी। इश्यू था 24 अक्टूबर को एसपी कांफ्रेंस की तैयारी। इन सातों को सीएम के सामने प्रेजेंटेशन देना है। मीटिंग में एसपी के साथ मुख्यालय के सभी अफसर भी शामिल हुए। जब लांच का वक्त आया तो पता चला डीजीपी साब पूरे नौ दिन का उपवास रखे हैं। उनके साथ चुनिंदा अफसरों के लिए फलाहारी की व्यवस्था थी। अफसरों को लगा.....बॉस उपवास पर हैं और हमलोग थ्री स्टार होटल का लजीज भोजन उड़ाए, तो यह जमेगा नहीं। ठीक है, साब सीधे-साधे हैं....लेकिन, ट्रांसफर के समय प्रपोजल तो सरकार डीजी से ही मांगती है। इसलिए, 90 फीसदी आईपीएस प्लेट लेकर फलाहारी की लाईन में खड़े हो गए। इससे, जो सचमुच उपवास पर थे, उन्हें कम पड़ गया, और जो बढ़ियां नाश्ता सोंट कर आए थे, वे पौष्टिक फलाहारी भी खाए और डीजीपी की नजर में धरम-करम वाला बनकर अपना नंबर भी बढ़वा लिए।

बर्दी उतरने का खौफ


पुलिस मुख्यालय के एक एडिशनल डीजी इन दिनों राइट टाईम आफिस आने लगे हैं। ठीक साढ़े दस बजे उनकी
गाड़ी पीएचक्यू में लग जाती है। पहले वे हफ्ते में दो-एक दिन आते थे। आते भी थे तो दोपहर बाद। लेकिन, रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट पर भारत सरकार ने जब से डीजीपी को उनकी निगरानी करने कहा है, आईपीएस ने अपना टाईम टेबल बदल लिया है।

ज्वाइंट सिकरेट्री की पोस्टिंग


निर्वाचन आयोग से ज्वाइंट सीईओ डीडी सिंह रिलीव हो गए हैं। उनकी जगह पर किसी आईएएस को पोस्ट किया जाएगा। नीचे लेवल पर आईएएस की कमी नहीं है, लिहाजा, यह पक्का है, कोई डायरेक्ट आईएएस ही होगा। हो सकता है, 2008 या 09 बैच के किसी आईएएस से सरकार खुश न हो और उन्हें इस पोस्ट पर बिठाकर जून 2019 तक शंट कर दें।

अच्छे दिन


सीनियर आईएफएस राकेश चतुर्वेदी के अब अच्छे दिन आने वाले हैं। आरा मिल प्रकरण उनके लिए ऐसा गले का फांस बना कि कहां वो आज एडिशनल पीसीसीएफ होते लेकिन, सीएफ में ही अटके हुए हैं। पता चला है, उनका प्रकरण अब खातमे की ओर हैं। कभी भी उन्हें गुड न्यूज मिल सकता है। आरा मिल प्रकरण 2003 चुनाव के समय का है। चुनाव के लिए वन विभाग से संबंधित राजनेताआें को खरचा चाहिए था। इस खरचे का जुटाने में निबट गए कई आईएफएस।         

अंत में दो सवाल आपसे


1. डीजीपी एएन उपध्याय नवरात्रि में शक्ति की उपासना के लिए नौ दिन उपवास रहे...डीजीपी के दावेदारों को यह अच्छा क्यों नहीं लगा?
2. दिग्विजय सिंह के छत्तीसगढ़ दौरे में अबकी कांग्रेसियों की इतनी भीड़ क्यों जुटी?



कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें