रविवार, 29 अक्तूबर 2017

मंत्री से तगादा

15 अक्टूबर
सूबे के एक मंत्री ने 10 पेटी में एक आफिसर का ट्रांसफर किया। लेकिन, तबादले का आर्डर निकलते ही अफसर पर गाज गिर गई। कार्रवाई उपर से हुई है, इसलिए मन को मसोसने के अलावा मंत्रीजी कुछ कर भी नहीं सकते। अफसर अब मंत्रीजी से तगादा कर रहा है, साब मैं तो निबट गया। आपके बेटे को जो दिया था, उसे लौटवा दीजिए। लेकिन, मंत्रीजी कम थोड़े ही हैं। साफ कह दिया….तुम्हारा काम तो मैं करा ही दिया था….तुम्हारी किस्मत ही खराब निकली तो मैं क्या कर सकता हूं।

5 साल में 6 कलेक्टर

कोंडागांव ने कलेक्टर बदलने के मामले में नया रिकार्ड कायम किया है…..शायद देश में भी यह पहला भी हो। वहां पांच साल में छह कलेक्टर बदले हैं। नवंबर 2012 में हेमंत पहाडे को कोंडागांव से हटाया गया था। उनके बाद विजय धुर्वे, धनंजय देवांगन, शिखा राजपूत, समीर विश्नोई और अब नीलकंठ टेकाम। याने हर 10 महीने में एक कलेक्टर बदल गए।

अभी और होंगे चेंज

सरकार ने 12 अक्टूबर को कोंडागांव कलेक्टर समीर विश्नोई को हटाकर राप्रसे से आईएएस बने नीलकंठ टेकाम को वहां की कमान सौंप दी। लोगों को भले ही यह अप्रत्याशित लगा हो मगर ये तो होना ही था। समीर ही नहीं, अगले दो-तीन महीने में इसी तरह एक-एक, दो-दो करके छह-से-सात जिलों के कलेक्टर बदलेंगे। 23 अक्टूबर को कलेक्टर कांफें्रस में जिन कलेक्टरों का पारफारमेंस पुअर होगा, उनके भी नम्बर लगेंगे। दरअसल, सूबे में प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या बेहद कम है। यूपी, पंजाब जैसे राज्यों में आधे से अधिक प्रमोटी आईएएस कलेक्टर एवं एसपी होते हैं। सियासी गणित में प्रमोटी ज्यादा मुफीद बैठते हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव के समय भी 11 जिलों में प्रमोटी आईएएस कलेक्टर थे। नीलकंठ टेकाम को मिलाकर अभी सात पहुंचे हैं। हालांकि, राज्य में आरआर आईएएस की संख्या बढ़ गई है, फिर भी चार-से-पांच और प्रमोटी को जिले में भेजा जाएगा। कांडागांव के बाद दंतेवाड़ा और बीजापुर में भी प्रमोटी पोस्ट किए जाएंगे। दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार को जांजगीर का कलेक्टर बनाए जाने की चर्चा है।

वक्त-वक्त की बात!

एक वो भी वक्त रहा, जब 2011 में 87 बैच के आईएएस सीके खेतान और आरपी मंडल टाईम से पांच महीने पहिले प्रमोशन पाकर प्रिंसिपल सिकरेट्री बन गए थे। उनके साथ बीबीआर सुब्रमण्यिम को दिल्ली में ही प्रोफार्मा प्रमोशन मिल गया था। और आज वक्त ऐसा है कि जनवरी से तीनों का प्रमोशन ड्यू है…..एडिशनल चीफ सिकरेट्री बनने के लिए वे टकटकी लगाए बैठे हैं। जबकि, दो पोस्ट भी खाली हैं। एक एनके असवाल के रिटायर होने से और दूसरा बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी जाने के बाद। तीसरा पोस्ट भी नवंबर में एमके राउत के सेवानिवृत होने के बाद खाली हो जाएगा। जीएडी चाहे तो हफ्ते भर का काम है। सीएम के बोलने के बाद आखिर सुनील कुजूर का डीपीसी करके पांचवें दिन एसीएस का आर्डर निकल गया था। 87 बैच में कहीं गेहूं के साथ घुन पिसने का मामला तो आड़े नहीं आ रहा है। क्योंकि, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह इसी बैच के एक अफसर पर बेहद उखड़े थे, जब विभागीय मंत्री होने के बाद भी वे उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं पहुंचे। लेकिन, बाकी दो का क्या कुसूर। दोनों जब एक-दूसरे से मिलते हैं, तो पूछते हैं…मेरा क्या होगा कालिया।

जीएस की पारी अब करीब

सिंचाई विभाग के सचिव गणेश शंकर मिश्रा की पारी इस महीने 31 तारीख को समाप्त हो जाएगी। राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में आने वाले मिश्रा पोस्टिंग के मामले में इतने किस्मती रहे हैं कि उनके मित्र भी उनसे ईर्ष्या रखते हैं। वे लंबे समय तक एक्साइज में रहे। जनसंपर्क के डायरेक्टर के साथ उसके सचिव भी रहे। वीआईपी डिस्ट्रिक्ट राजनांदगांव का कलेक्टर रहने का भी उन्हें मौका मिला। मिश्रा को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए रेरा का मेम्बर बनाए जाने की अटकलें लगाई जा रही है।

भूपेश का फेवीकोल

भूपेश बघेल को दूसरी बार पीसीसी चीफ बनने से रोकने के लिए पार्टी के उनके मित्रों ने क्या नहीं किया। आलाकमान तक तगड़ा मैसेज पहुंचाने के लिए पीएल पुनिया के पहिले दौरे में त्रिफला के नए एडिशन को लांच किया गया….रामदयाल उईके को बगावती सूर के साथ बैटिंग करने भेजा गया। मगर इनमें से कोई भी नुख्सा काम नहीं आया। अलबत्ता, पुनिया को भी छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेताओं के शह-मात के खेल को समझने में देर नहीं लगा। तभी तो लफड़ा खतम करने के लिए पुनिया ने आलाकमान से पहले ही भूपेश को अध्यक्ष बनाने का स्पष्ट संकेत दे डाला। अब, कांग्रेस के लोग फेवीकोल की उस कंपनी का पता लगा रहे हैं कि आखिर राहुलजी से ये आदमी इतना बुरी तरह कैसे चिपक गया है….त्रिफला से लेकर आदिवासी विधायक के तेवर भी काम नहीं आए।

कार्यकारी अध्यक्ष नहीं

भूपेश बघेल को सेकेंड इनिंग देने के साथ ही कांग्रेस छत्तीसगढ़ में कार्यकारी अध्यक्ष भी नहीं बनाएगी। प्रभारी महासचिव पीएल पुनिया के पहले दौरे से पहिले रामदयाल उईके ने बगावती तेवर दिखाए थे, तब पुनिया ने उन्हें तलब किया था। रामदयाल ने उनसे दो टूक कहा था कि छत्तीसगढ़ में अगर कांग्रेस की सरकार बनानी है तो अनुसूचित जाति और जनजाति से एक-एक कार्यकारी अध्यक्ष बनाना चाहिए। लेकिन, कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर पार्टी का अनुभव ठीक नहीं रहा है। छत्तीसगढ़ में भी चरणदास महंत और सत्यनारायण शर्मा को 2007 में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। तब धनेंद्र साहू पीसीसी चीफ थे। तब कांग्रेस तीन खेमों में बंट गई थी। पार्टी अब फिर से इस तरह की स्थिति नहीं लाना चाहती। बताते हैं, राहुल गांधी ने भी कार्यकारी अध्यक्ष के कंसेप्ट को खारिज कर दिया है।

गुड न्यूज

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का रायगढ़ मॉडल अब प्रदेश के सभी जिलों में लागू किए जाएंगे। रायगढ़ पहिला जिला है, जहां बिटिया के जन्म लेने पर माता-पिता को तोहफा दिया जाता है….बुके भेंट कर अभिनंदन भी। इस जिले में न केवल बालिकाओं का अनुपात बढ़ा है बल्कि डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के प्रयासों से स्कूलों में बालिकाओं की उपस्थिति भी बढ़ी है। 12 अक्टूबर को चीफ सिकरेट्री ने वीडियोकांफ्रेंसिंग में रायगढ़ कलेक्टर शम्मी आबिदी को बेटी बचाओं में आउटस्टैंडिंग काम के लिए एप्रीसियेट किया….ग्रेट शम्मी!

अंत में दो सवाल आपसे

1. चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड ने रेरा चेयरमैन के लिए अप्लाई कर दिया है या करने वाले हैं?
2. जीएस मिश्रा के बाद ईरीगेशन सिकरेट्री किसी यूथ आईएएस को बनाया जाएगा या किसी सीनियर अफसरों को टिकाया जाएगा?

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