शनिवार, 22 अगस्त 2026

Chhattisgarh Tarkash 2026: 50 लाख की पूजा का असर!



तरकश, 23 अगस्त 2026

संजय के. दीक्षित

50 लाख की पूजा का असर!

2 अगस्त के इसी स्तंभ में जिक्र हुआ था कि एक कलेक्टर ने आगे सब कुछ ठीक रहे, इसलिए कामख्या में विशेष अनुष्ठान कराया है। इसके लिए उन्हें पंडित को 50 लाख रुपए देने पड़े थे। ये पैसे जिले के कुछ ठेकेदारों और सप्लायरों ने चंदा कर जुटाया। बहरहाल, 18 अगस्त की आईएएस लिस्ट के बाद सूबे के कई कलेक्टर कामख्या के उस पंडित जी का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जो चाहते हैं कि कलेक्टरी का सफर उनका आगे भी कंटिन्यू रहे। दरअसल, जिस कलेक्टर ने आधा करोड़ का स्पेशल अनुष्ठान कराया, उसका चमत्कारिक असर दिखा। वरना, जिस तरह जिले में उन्होंने दुःसाहसी और ब्लाइंड फैसले किए, उससे उन्हें भी भरोसा नहीं रहा होगा कि उनका अच्छा होगा।

कॉडर मैनेजमेंट

छत्तीसगढ़ में, ऑल इंडिया सर्विस की बात करें तो आईएएस की पोस्टिंग में अभी भी अच्छा करने का प्रयास किया जा रहा...कलेक्टर हो या सिकेट्री, कई लेवल पर फीडबैक लेने के बाद फैसले लिए जाते हैं। 6 मई के 42 अफसरों की लिस्ट में भी इसकी झलक दिखी तो 18 अगस्त की लिस्ट में भी। अब कलेक्टरों को ही लें...इस समय सूबे के 33 में से 10 बड़े जिलों में अच्छी छबि वाले अफसरों को सरकार ने मौका दिया है, करीब 10 एवरेज हैं। जाहिर है, 33 में से अगर 20 जिले के कलेक्टर बढ़ियां हैं, तो इस दौर में ये परसेंटेज बुरा नहीं है। खैर, सिकेट्री में भी बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। जिम्मेदारियों के मामले में सिकेट्री भूवनेश यादव की स्थिति अच्छी नहीं थी, उन्हें भी इस बार आदिम जाति विकास जैसे अहम दायित्व सौंप गया है। उपर से योजना और पंजीयन भी उनके पास बना रहेगा। कहने का तात्पर्य यह है कि अब कोई सिकेट्री यह नहीं कह सकता कि सरकार ने काम करने का मौका नहीं दिया। बहरहाल, सिस्टम को बाकी सर्विसों के कॉडर मैनेजमेंट पर भी ध्यान देना चाहिए।

पोस्टिंग और मैसेज

राज्य सरकार ने कलेक्टरों के ट्रांसफर के जरिये ये संदेश देने की कोशिश की है कि छोटे जिले के कलेक्टर अगर अच्छा करेंगे तो उन्हें अपग्रेड किया जाएगा। जाहिर है, मुंगेली जिले का पारफर्मेंस बढ़ियां रहा तो सरकार ने कांकेर जिले का कलेक्टर बनाकर कुंदन कुमार को उनके काम और सीनियरटी के हिसाब से पोस्टिंग दी। सरकार में बैठे अफसरों का कहना है, कोई कलेक्टर अगर बढियां काम करेगा, तो निश्चित तौर पर उसका जिला अपग्रेड किया जाएगा। और गड़बड़ तो कार्रवाई भी.

कलेक्टर बैक टू रायपुर

चीफ सिकेट्री विकास शील ने कलेक्टरों की कई वीडियो कांफ्रेंसिंग में कई अफसरों को चेताया था कि बिना इजाजत मुख्यालय न छोड़ें। इसके बाद भी कुछ कलेक्टर आदतों से बाज नहीं आए। इसका नतीजा यह हुआ कि एक कलेक्टर की छुट्टी हो गई। बताते हैं...जिला छोड़ बार-बार रायपुर भाग आने से मुख्य सचिव बेहद खफा थे। उन्होंने दो टूक कह दिया था...फलां कलेक्टर ठीक नहीं। अब सीएस का फारमान था, सो नोटशीट चली। मगर, चूकि प्रभावशाली जिले से जुड़ा मामला था, लिहाजा उसे क्लियर होने में तीन-चार दिन का वक्त जरूर लगा। लेकिन, जीएडी ने अल्टीमेटली आदेश निकाल दिया। अलबत्ता, लिस्ट में कलेक्टर का नाम देख लोग चौंके। क्योंकि, किसी को अंदेशा नहीं था कि कलेक्टर साब को कोई रायपुर भी बुला सकता है। लोग तो उनके बारे में ये कहते थे, जब आना होगा...वे अपने मन से आएंगे।

बड़ी डील, बड़ा झटका

नगरीय प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने दुर्ग नगर निगम में विभागीय अधिकारी को कमिश्नर बनाने पूरी स्ट्रेटजी तैयार कर ली थी। विभागीय मंत्री से प्रशासकीय अनुमोदन भी हो गया था। सिर्फ आदेश निकलना बाकी था कि सौदेबाजी की बात लीक हो गई। और सिकेट्री अर्बन एडमिनिस्ट्रेशन आर. शंगीता ने नोटशीट समन्वय में भेज दी। अब समन्वय में क्यों और कैसे भेजी, ये बात फिर कभी। अभी सिर्फ इतना कि आईएएस सुमित अग्रवाल के हटने के बाद दुर्ग निगम कमिश्नर का पद खाली था। बताते हैं, नगरीय प्रशासन संचालनालय में कोई डिप्टी डायरेक्टर हैं, उन्हें कमिश्नर बनाने पूरा खेल किया गया। डिप्टी डायरेक्टर पिछली सरकार में पूरे पांच साल पाटन और कुम्हारी नगरीय निकाय में सीएमओ रहे। इसके बावजूद...सबसे बड़ा रुपैया। हालांकि, नगरीय प्रशासन के माफियाओं ने आखिरी प्रयास इस रूप में किया कि दुर्ग निगम कर्मचारी संघ भी आगे आ गया। संघ भी नहीं चाहता था कि कोई आईएएस या एसएएस कमिश्नर बन जाए। सो, डायरेक्टेट पहुंच कर वेतन लटकने से लेकर तमाम तरह की बातें हुई। मगर सिस्टम ने खेल को समझते हुए फिर से आईएएस को दुर्ग नगर निगम में बिठा कर पोस्टिंग के खेल पर ब्रेक लगा दिया।

विभागीय अफसरों पर ब्रेक

रायपुर, बिलासपुर और भिलाई जैसे बड़े नगरीय निकायों में कमिश्नर के पद पर आईएएस बिठाने का काम छत्तीसगढ़ के फर्स्ट सीएम अजीत जोगी ने शुरू किया था। रायपुर में उन्होंने सोनमणि बोरा को कमिश्नर बनाया था तो बिलासपुर में डॉ0 एसके राजू को। मगर छोटे निगमों में विभागीय अधिकारियों को कमिश्नर बनाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। पिछली सरकार में इस पर ब्रेक लगाने का काम किया डिप्टी सिकेट्री टू सीएम सौम्या चौरसिया ने। तब नगरीय प्रशासन से आदेश निकला कि नगर निगमों में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ही आयुक्त बनाए जाएंगे। उसके बाद फिर विभागीय अधिकारियों को कम-से-कम नगर निगमों में आयुक्त बनने का कोई मौका नहीं मिला। मगर सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद पता नहीं किन लोगों ने विभाग के लोगों को मिसगाइड कर विभागीय अधिकारी को दुर्ग जैसे संभागीय मुख्यालय के नगर निगम में बिठाने का प्रपंच रच डाला, सरकार को इसकी जांच करा पनिश करना चाहिए।

कमिश्नर का रिकार्ड

नगरीय प्रशासन सचिव के लिए नाम पहले 2005 बैच के एक आईएएस अफसर का चला मगर लिस्ट निकलने के तीन-चार दिन पहले सोनमणि बोरा का नाम अचानक चर्चा में आ गया। और फिर उनके नाम पर मुहर भी लग गई। बहरहाल, इम्पॉटेंट यह है कि नए अर्बन सिकेट्री सोनमणि बोरा छत्तीसगढ़ के उन दो आईएएस अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें दो नगर निगम में कमिश्नर रहने का अवसर मिला। बोरा अजीत जोगी शासन काल में पहले रायपुर में कमिश्नर रहे, फिर रमन सिंह सरकार में बिलासपुर के निगम कमिश्नर। सोनमणि के अलावा अवनीश शरण बिलासपुर और रायपुर निगम के कमिश्नर रहे हैं। सोनमणि के साथ खास बात यह है कि उन्होंने अधिकांश पोस्टिंग बिलासपुर में की है। बिलासपुर नगर निगम आयुक्त के साथ वे गुरू घासीदास विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार रहे। बिलासपुर जिला पंचायत सीईओ। फिर कलेक्टर बिलासपुर और उसके बाद डिविजनल कमिश्नर बिलासपुर। जाहिर है, बोरा को लंबे समय बाद अच्छी पोस्टिंग मिली है। रमन सिंह की तीसरी पारी में भी उन्हें महिला बाल विकास जैसे विभाग मिलते रहे। कांग्रेस सरकार में वे सिकेट्री राजभवन रहे। इसके बाद वे सेंट्रल डेपुटेशन चले गए। बीजेपी की सरकार बनने के बाद वे लौटे तो महीने भर बिना विभाग के रहे। फिर ट्राईबल का दायित्व मिला। खैर, नया दायित्व मिलने के बाद पहली ही मीटिंग में सोनमणि ने तेवर दिखाया...रायपुर निगम के डिप्टी कमिश्नर हेल्थ की क्लास ले ली। आगे भी उनका ये तेवर जारी रहे, तो सूबे के लिए बढ़िया होगा।

गजब का सरप्राइज

बीजेपी ने नितिन नबीन की टीम बनाने में भी लोगों को खूब चौंकाया। खासकर, छत्तीसगढ़ में जिनके नामों की चर्चाएं रही...जो नितिन नबीन के करीबी रहे...उनमें से एक को भी मौका नहीं मिला, और जिनका दूर-दूर तक कोई अंदेशा नहीं था, उन्हें बड़ा ब्रेक मिल गया। जाहिर है, नितिन की टीम में छत्तीसगढ़ से तीन नेताओं को शामिल किया गया है। रुप कुमारी चौधरी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, दीपक म्हस्के सोशल मीडिया संयोजक दीपक म्हस्के और डॉ. संदीप पाठक राष्ट्रीय मंत्री। खैर, रुप चौधरी तो नहीं मगर दीपक म्हस्के के नाम से बीजेपी के लोग भी चकित रह गए। दीपक सीजीएमएससी के चेयरमैन हैं, शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि नेशनल लेवल का पद इस तरह चलकर आ जाएगा। जेन जी के दौर में उन्हें पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. चेयरमैन और सिंगल मेंबर मिल पीएससी चला रहे, वहां सदस्यों की भर्ती क्यों नहीं हो पा रही?

2. राजधानी रायपुर में वो कौन सा ऐसा समारोह था, जिसमें पूर्व मुख्य सचिवों समेत बड़े-बड़े लोगों के मोबाइल गेट पर रखवा लिए गए ?

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