तरकश, 30 अगस्त 2026
संजय के. दीक्षित
सीएम का रातोरात दिल्ली विजिट
छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय गुरूवार की रात शार्ट विजिट पर दिल्ली गए। वे रात करीब नौ बजे दिल्ली पहुंचे और एयरपोर्ट से सीधे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के घर रवाना हो गए। रात 10 बजे उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मीटिंग तय हुई थी। उसके बाद सीएम चंद घंटे छत्तीसगढ़ सदन में रेस्ट किए, फिर रायपुर वापसी के लिए सुबह पौने चार बजे एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए। सीएम के कुछ घंटे की इस दिल्ली विजिट के बाद सूबे में सियासी अटकलों का पारा गरम हो गया है। कुछ लोग इसे नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति से जोड़ रहे हैं। बता दें, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव अस्वस्थ्य चल रहे हैं। सो उनकी जगह नया अध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने की अटकलें तेज हैं। तो दूसरी तरफ सीएम के दिल्ली विजिट को मंत्रिमंडल की सर्जरी से जोड़कर भी देखा जा रहा। जाहिर है, बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद छत्तीसगढ़ के मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावनाएं जताई जा रही थी। अब चूकि नितिन नवीन की टीम का ऐलान हो गया है, सो राजनीतिक पंडितों का मानना है, पार्टी छत्तीसगढ़ के मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को शामिल कर सकती है। खैर, ये चर्चाएं हैं। बंद कमरे में नितिन नवीन और सीएम के बीच क्या बातें हुईं, ये उन दोनों को ही पता होगा।
कलेक्टर-एसपी, अलग राहें
कलेक्टर कांफ्रेंस में हर बार कलेक्टर, एसपी में समन्वय की बातें दुहराई जाती है...एक-डेढ़ साल पहले एक सिकेट्री टू सीएम ने कलेक्टर-एसपी को व्हाट्सएप कर ताकीद भी की थी...समन्वय बनाकर रहे, दोनों साथ में जिले का दौरा करें। मगर आलम यह है कि कई जिलों में कलेक्टर-एसपी अलग-अलग अपनी डफली बजा रहे। सरगुजा और बस्तर के कुछ जिलों में ऐसा भी सुनने में आ रहा, कलेक्टर के साथ दौरे में जाने की बात दूर, एसपी उनसे मिलने से भी कतराते हैं। तो कुछ कलेक्टर ऐसे हैं, जो कप्तान को वेटेज नहीं देते। जीएडी और गृह विभाग को इसे देखना चाहिए, वरना ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था कैसे चलेगी।
बीजेपी में कांग्रेस का वायरस
संगठन को लेकर कभी बेहद कमिटेड रहने वाले बीजेपी के भीतर की बातें आजकल बाहर लीक होने लगी है। बल्कि, अपना औरा कायम करने कुछ बातों को जानबूझकर लीक कराई जा रही। ठीक कांग्रेस की तरह। हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिसकी सूचना विरोधी पार्टी तक पहुुंच गई और उसने मीम्स बनाकर मौज ले लिया। बहरहाल, सूचनाएं लीक होने से बीजेपी के नेता नाखुश हैं। पिछले हफ्ते मीटिंग में एक पदाधिकारी ने यहां तक कह दिया कि पार्टी हमारी मां है, और उसके साथ गद्दारी नहीं होनी चाहिए।
ईमानदारी की सजा
ईरीगेशन में गजबे खेला चल रहा है। 2500 करोड़ की सिकासेर सिंचाई परियोजना में एसई ने यह आब्जेक्शन लगाया कि बिना मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के 1.3 डी शर्त क्यों जोड़ दी गई। इसके तहत सिर्फ 5000 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी ही इस टेंडर में क्वालिफाई कर सकती थी। पता चला है, टेंडर में 1.3 ए की अनुमति कैबिनेट से ली गई, जिसमें टेंडर की सामान्य शर्ते होती हैं। मगर बाद में उसमें 1.3 डी जोड़ दिया गया, ताकि पसंदीदा पार्टी को टेंडर दिया जा सके। मंत्रालय के इरीगेशन डिपार्टमेंट में बैठे एक्सपर्ट एसई ने खेल समझ आपत्ति लगा दी। मगर ईएनसी ऑफिस ने अगले दिन ही उन्हें मंत्रालय से बुलाकर एक्सपर्ट का काम वापिस ले लिया। अब इसमें दो प्वाइंट बेहद महत्वपूर्ण है। एक तो सुनने में आ रहा कि इरीगेशन के अफसरों ने उपर के लोगों को डार्क में रखकर कुछ दस्तखत करा लिए। और दूसरा ईएनसी ऑफिस में बैठे कुछ अधिकारियों के तार कहीं और जुड़े हुए हैं...जहां से सारे अपडेट बाहर पहंुचाए जा रहे हैं। इसे विपक्ष के चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। अब पता नहीं, इंटेलिजेंस या सिस्टम के रणनीतिकारों को इसकी भनक है या नहीं। मगर ये तय है कि वहां कुछ बड़ा पक रहा है, जो आगे जाकर सिस्टम के लिए मुसीबत बनेगा। क्योंकि, मामला 2500 करोड़ का जो है।
आईआईटीयन अफसर और न्याय?
छत्तीसगढ़ में ऐसा फर्स्ट टाईम हुआ कि कोई आईपीएस बिना एसपी बने डेपुटेशन पर चला गया। वो आईपीएस थे विकास कुमार। पोस्टिंग की दांव-पेंच से जूझने की बजाए उन्होंने एनआईए में एसपी बनना मुनासिब समझा। उनके बाद अब आईआईटीयन आईएफएस वरुण जैन एनआईए में जा रहे...वो भी किसी टेरीटेरी याने फील्ड में बिना डीएफओ बने। वरुण आईआईटी रुड़की से बीटेक कर पहले इंडियन रेलवे सर्विस में सलेक्ट हुए, फिर आईएफएस में हुआ तो फॉरेस्ट और वाईल्डलाइफ में कुछ नया करने का सपना लेकर फॉरेस्ट सर्विस ज्वाईन किया। उन्हें करीब चार साल से उदंती-सीतानदी टाईगर रिजर्व में बिठाकर रखा गया था, जहां प्रमोटी आईएफएस भी जाना पसंद नहीं करते। अलबत्ता, वरुण ने वहां भी काम करके दिखाया। राज्य बनने के बाद 25 साल में किसी आईएफएस ने जंगल का इतना बेजा कब्जा नहीं हटाया, जितना वरुण ने चार साल में कर डाला। इसके बाद भी उन्हें DFO में चांस नहीं मिला. लिहाजा, वरुण ने एनआईए में एसपी के लिए अप्लाई कर दिया। वे टेलेंटेड तो थे ही, उनका एसपी के पद पर सलेक्शन भी हो गया। और जिस तरह आईपीएस प्रभात कुमार को पुलिस मुख्यालय ने नहीं रोका, उसी तरह वरुण जैन का भी हुआ। जाहिर है, ऐसे अफसरों को डेपुटेशन पर जाने से रोकना चाहिए, क्योंकि ऐसे अधिकारी किसी भी राज्य के लिए एसेट होते हैं।
और भी डेपुटेशन पर
छत्तीसगढ़ के लिए यह अच्छी बात है कि इस समय भारतीय वन सेवा में 80 परसेंट से अधिक अफसर आईआईटी, एनआईटी और बीआईटी वाले हैं। मगर उनके साथ हार्ड लक यह है कि इन दिनों जिस तरह अच्छे आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर बनाने में प्रायरिटी दिया जा रहा, उस तरह फॉरेस्ट में नहीं हो रहा। इससे आप समझ सकते हैं...सूबे में इस समय सबसे कम जंगल वाला कोई डिविजन है तो वो है रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर और मुंगेली। इन सभी में आरआर याने डायरेक्ट आईएफएस अफसरों को डीएफओ बनाया जा रहा और मनेंद्रगढ़, कटघोरा, अंबिकापुर, धर्मजयगढ़, धमतरी, महासमुंद, बलौदा बाजार जैसे बड़े बजट वाले डिविजनों में प्रमोटी आईएफएस अफसरों को पोस्ट किया जा रहा। ऐसे में, आने वाले समय में कुछ और आईआईटीयन आईएफएस डेपुटेशन पर चले जाएं तो हैरानी नहीं होगी।
पद दरोगा का, काम सिपाही का
पुलिस में बरसों बाद सिर्फ पुलिस मुख्यालय से संबंद्धित इतनी बड़ी लिस्ट निकली...एक झटके में 31 आईपीएस अधिकारियों के विभाग बदल गए। आधा दर्जन से अधिक अधिकारी ढाई साल से हांसिये पर थे, या बिना विभाग के...सबको कुछ-न-कुछ दिया गया। अलबत्ता, लिस्ट देखकर लगता है, देने वाले ने मुठ्ठी खोलकर फिर बांध ली। कई अफसरों को उनके वेतन और योग्यता के अनुसार जिम्मेदारी नहीं दी गई। एक तो 50 लाख से अधिक वेतन देकर उन्हें ठलहा बिठाकर रखा गया और अब ढाई साल बाद दायित्व देने का फैसला किया तो ऐसा हुआ...जैसे दरोगा से सिपाही का काम लेना।
पोस्टिंग का रिकार्ड
आखिरकार डीजी पवनदेव का विभाग बदला। उन्हें डीजी होमगार्ड और फायर ब्रिगेड बनाया गया है। पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन में वे छह साल 10 महीने चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। पुलिस हाउसिंग का ये रिकार्ड तो है ही, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस में कोई भी इतने लंबे समय तक एक पद पर नहीं रहा। डीजीपी अमरनाथ उपाध्याय और चीफ सिकेट्री अमिताभ जैन को अपवाद रूवरूप छोड़ दें तो बहुत हुआ तो तीन, साढ़े तीन साल में पोस्टिंग बदल जाती है। अमरनाथ और अमिताभ भी चार और पांच साल रहे। बट पवनदेव ने ऐसा रिकार्ड बना दिया, जिसे भविष्य में टूटने की संभावना बहुत कम नजर आती है।
चेयरमैन कौन?
रिकार्ड पारी खेलकर पवनदेव पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन से विदा हो गए। उनकी जगह शिवराम प्रसाद कल्लूरी को बिठाया गया है। मगर गृह विभाग ने आदेश निकालने में कल्लूरी के साथ डंडी मार दी। उन्हें सिर्फ एमडी याने प्रबंध निदेशक बनाया गया है। जबकि, यह कंपनी लॉ एक्ट में बना कारपोरेशन है, इसमें चेयरमैन की पोस्टिंग जरूरी है। कल्लूरी को सिर्फ एमडी बनाने के पीछे क्या मंशा है, ये अभी पता नहीं चला है। मगर इससे पहले एकाध बार ऐसा हुआ है कि इस कारपोरेशन में एमडी की पोस्टिंग हुई और डीजीपी को चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। अब देखना है, गृह विभाग इस बार क्या करना चाहता है।
बैकफुट पर मिनिस्टर!
छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठन टेट याने टीचर एजिबिलिट टेस्ट से इतने घबरा गए कि जेन जी की तरह स्कूल बंद करने की सीधी चेतावनी दे डाली। अलबत्ता, इस टेस्ट में आखिर 150 में 90 अंक ही तो लाना था। मात्र 60 परसेंट। फिर सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, 2019 से पहले जिनने टेट क्लियर नहीं किया, उन्हें पात्रता हासिल करनी होगी, वरना प्रमोशन नहीं होगा। चूकि जेन जी का दौर है...देश के अलग-अलग राज्यों से स्कूलों को लेकर आंदोलन-मार्च की खबरें आ रही। लगता है, इसको देखते स्कूल शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को दुखी करना उचित नहीं समझा। ताजा अपडेट है, उन्होंने शिक्षकों के लिए विभागीय टेट आयोजित करने का भरोसा दिया है। यद्यपि, मंत्रीजी भी सिस्टम में रिफार्म करना चाहते हैं, इसलिए व्यापम से परीक्षा कराने पर अड़े हुए थे। मगर जब देखे कि कोई सपोर्ट नहीं मिलने वाला... ठीकरा उनके माथे ही फूटेगा, इसलिए उन्होंने सरेंडर कर दिया। अब जैसे स्कूलों में होम एग्जाम होते हैं...शिक्षकों की इच्छा के अनुरूप उसी तरह अब टेट हो जाएगा। यानी सब पास। मास्टर साब लोग भी खुश और स्कूल शिक्षा विभाग भी खुश। जाहिर है, व्यापम अगर एग्जाम लेता तो मामला जरा कठिन हो जाता। बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने टेट परीक्षा उन शिक्षकों के लिए अनिवार्य किया है, जो शिक्षाकर्मी के तौर पर बिना किसी परीक्षा प्रक्रिया के भर्ती हुए हैं। और बाद में उनका शिक्षक कैडर में संविलियन हो गया।
अंत में दो सवाल आपसे?
1. वो कौन से अफसर हैं, जो ट्रांसफर के बाद कार्यमुक्त होने से पहले कई करोड़ के चेक काट दिए?
2. सीएसआईडीसी ने मंडी बोर्ड से कागजों में बिना जमीन हस्तांतरित हुए जेम एंड ज्वेलरी पार्क का टेंडर कैसे किया, और सिंगल पार्टी को प्रदान भी कर दिया?

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