बुधवार, 1 जुलाई 2015

तरकश, 28 जून


 

tarkash photo 


बेतुका बोल

एक बड़े जिले के सर्किट हाउस में अफसरों के साथ गप-शप करते हुए एक मंत्रीजी की जुबान फिसल गई। उन्होंने अफसरों से पूछ डाला, आपके एसपी साब की पत्नी बहुत संुदर है क्या। वहां कई आईएएस और आईपीएस थे। मंत्रीजी के बेतुके सवाल से सभी सकते में आ गए। तो कुछ गुस्साये से होकर एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे कि मंत्रीजी को हो क्या गया है। मंत्रीजी ने अफसरों के बनते-बिगड़ते चेहरों को भांपते हुए तत्काल अपनी बात सुधारी। उन्होंने कहा, एसपी साब आफिस के बजाए घर में ज्यादा रहते हैं। इसलिए, मुझे लगा कि……। लेकिन, बंदूक की गोली और मुंह की बोली, निकलने के बाद वापिस कहां आती है।

एसीबी की तलवार

नान घोटाले की जद में आने से कुछ कलेक्टर बाल-बाल बच गए। या कह सकते हैं कि एसीबी ने फिलहाल उन्हें बख्श दिया है। जबकि, उनके खिलाफ है पुख्ता साक्ष्य। नवंबर में जब अंबिकापुर में पोस्टेड नान के एक अधिकारी को रेड करने के लिए एसीबी ने जाल बिछाया तो एक-एक करके कई कलेक्टर उसमें फंसते चले गए। इस दौरान नौ कलेक्टरों के वाइस रिकार्ड हुए हैं। चार कलेक्टर तो सीधे पूछ रहे हैं कि फलां महीना का तुमने भेजा नहीं। इनमें अधिकांश युवा कलेक्टर हैं। सूत्रों की मानें तो केस लेंदी न हो जाए, इसलिए कलेक्टरों को इसमें शामिल नहीं किया गया। मगर उनके सिर पर एसीबी की तलवार तो लटकी रहेगी।

ढेर जोगिया…..

सामान्य प्रशासन विभाग याने जीएडी में आईएएस मन लगाकर काम करें इसलिए सरकार ने पहली बार अनूठी पहल करते हुए पति-पत्नी को एक ही विभाग में पोस्ट किया। मगर इस बार तो पराकाष्ठा हो गई। जीएडी ने फर्जी जाति मामले में फंसे राज्य प्रशासनिक सेवा के आनंद मसीह का नाम भी आईएएस अवार्ड के लिए दिल्ली भेज दिया। मसीह को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में राज्य सरकार द्वारा बनाई गई हाई पावर कमेटी ने बर्खास्ती की सिफारिश की थी। वे हाईकोर्ट के स्टे पर चल रहे हैं। गंभीर आरोपों के चलते ही उन्हें ज्वाइंट कलेक्टर से अपर कलेक्टर प्रमोट नहीं किया गया। बावजूद इसके, जीएडी ने इतनी बड़ी चूक कर दी। यही नहीं, 42 अफसरों की लिस्ट में पहला नाम एसके राठौर का है। मगर जीएडी ने उनका सीआर ही नहीं भेजा। लिहाजा, आईएएस अवार्ड का प्रोसेज लटक जाएगा। छत्तीसगढ़ का नाम खराब होगा, सो अलग। यह तब हो रहा है, जब जीएडी में छह आईएएस मिलाकर नौ अफसर हैं। विकासशील, निधि छिब्बर, डा0 कमलप्रीत सिंह, सुरेंद्र जायसवाल, डीडी सिंह और इमिल लकड़ा आईएएस हैं। जिस केके बाजपेयी को सुनिल कुमार ने छुट्टी कर दी थी, उनके रिटायरमेंट के बाद आईएएस सेक्शन का एक्सपर्ट करार देकर संविदा में बुलाया गया। केआर मिश्रा ज्वाइंट सिकरेट्री हैं ही। ठीक ही कहा गया है, ढेर जोगिया मठ के उजाड़।

फस्र्ट सिकरेट्री

सूबे के प्रभावशाली आईएएस एवं एडिशनल चीफ सिकरेट्री एन बैजेंद्र कुमार भारत सरकर में एडिशनल सिकरेट्री इम्पैनल हो गए हैं। डेपुटेशन पर अगर वे दिल्ली गए तो तीन साल बाद वे सिकरेट्री बन जाएंगे। इससे पहले, सुनिल कुमार सिकरेट्री के लिए इम्पैनल हुए थे। मगर उनके रिटायरमेंट में महज एक साल बचा था। इसलिए, भारत सरकार ने उनके नाम को इंटरटेन नहीं किया। आमतौर पर जिनका रिटायरमेंट मे कम-से-कम दो साल बचा हो, ऐसे आईएएस ही केंद्र में सिकरेट्री बनाए जाते हैं। बैजेंद्र के लिए यही प्लस है। 82 बैच वालों का सिकरेट्री में नम्बर लग गया है। याने तीन साल बाद 2018 में बैजेंद्र सिकरेट्री के लिए इम्पैनल होंगे, तब उनके पास पूरा दो साल रहेगा रिटायरमेंट में। ऐसा हुआ तो भारत सरकार में सिकरेट्री की प्रतिष्ठित पोस्टिंग पाने वाले वे छत्तीसगढ़ कैडर के पहले आईएएस होंगे। मगर ये तभी होगा, जब राज्य सरकार उन्हें डेपुटेशन के लिए रिलीव करेगी। हालांकि, सवाल उनके कैरियर का है। सो, राज्य सरकार के सामने भी पशोपेश वाली स्थिति रहेगी।

अपना केजरीवाल

आफत भरी बारिश में रायपुर के लोगों को उम्मीद थी कि चमकदार जीत दर्ज कर महापौर बने कांग्रेस के यंग्रीमैन नेता प्राब्लम को साल्व करने में अहम भूमिका निभाएंगे। मगर महापौर जी पानी में कुर्सी लगाकर धरना देकर सिस्टम के लिए खुद ही प्राब्लम बन गए। एक ओर निचली बस्तियों में पानी से जनजीवन ठप था। उधर, नगर निगम के अफसरों की हालत खराब थी। महापौरजी को समझाए या पब्लिक को। बड़ी मुश्किल से महापौर को समझा-बुझाकर धरना समाप्त कराया गया। लोग कह रहे हैं कि हमने महापौर बनाया था, समस्याओं का निबटारा करने के लिए या धरना देने के लिए। बहरहाल, मेयर को अपना सलाहकार बदलना चाहिए। अच्छी छबि है। फ्यूचर भी बढि़यां हैं। आखिर, इन्हीं कामों से ही तो अरबिंद केजरीवाल का ग्राफ तेजी से गिरा है।

अगला नम्बर

नान घोटाले का रिकार्ड समय में चालान पेश करने के बाद अफसरशाही में एसीबी का खौफ सिर चढ़कर बोल रहा है। असल में, किसी को भान नहीं था कि एसीबी चालान पेश कर पाएगी। मगर एसीबी ने दो महीने में जांच कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इससे ब्यूरोक्रेसी भी सहमा है। जाहिर है, चालान पेश करने के बाद एसीबी खाली तो बैठी नहीं होगी। अगले शिकार के लिए एक्सरसाइज चल रहा है। अफसरों की चिंता की वजह भी यही है…..अगला नम्बर किसका है? कहीं मैं तो नहीं!

हफ्ते का व्हाट्स एप

एक भक्त की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रभु बोले, बोल बच्चा क्या चाहिए? भक्त बोला-धरती से आसमान तक सड़क बना दो। प्रभु-मुश्किल है, कोई और वर मांगो। भक्त-पत्नियों को समझदार, सुशील और शांत बना दो। प्रभु-सड़क सिंगल बनाउ या डबल।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस एसपी की सास के बारे में चर्चा है कि वह मनीराम को हैंडिल करती है?
2. रमन सरकार अगले हफ्ते नौकरशाही को हिला देने वाला कौन-सा बड़ा फैसला लेने जा रही है?

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