शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

40 मिनट बोल गए पीएम

तरकश, 28 फरवरी

संजय दीक्षित
सत्य साई अस्पताल के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम करीब आधा घंटा डिले हो गया था। एक तो सबका स्पीच लंबा, उपर से हाउसिंग बोर्ड के माडल इस तरह आकर्षक बन गए थे कि मोदी को उन्हें देखने में टाईम लग गए। प्रधानमंत्री को इसके बाद डोंगरगढ़, उड़ीसा, कोलकाता और वहां से यूपी जाना था। जाहिर है, समय के वे बड़े पाबंद हैं। टाईम गड़बड़ाने से उनका मूड कुछ गड़बड़ा गया था। इसकी जानकारी मिलने पर पीएमओ तत्काल हरकत में आया। पीएमओ से ताबड़तोड़ फोन आने लगे कि डोंगरगढ़ के कार्यक्रम को शार्ट किया जाए। लेकिन, ऐसा हो नहीं पाया। डोंगरगढ़ में उमड़े जनसमूह को देखकर मोदी गद्गद हो गए। शिड्यूल में उनका भाषण 20 मिनट का था। बोले 40 मिनट। कुंवर बाई से नसीहत लेने का देश के लोगों से आव्हान कर डाला, सो अलग। दरअसल, डोंगरगढ़ के प्र्रोग्राम को सफल बनाने के लिए सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी थी। लिहाजा, डोंगरगढ़ की सभा छत्तीसगढ़ बनने के बाद किसी प्रधानमंत्री की पहली सभा के रूप में दर्ज हो गई, जिसमें डेढ़ लाख से अधिक भीड उमड़ी हो। जिस ग्राउंड में सभा थी, उसकी कैपिसिटी 80 हजार की थी। ग्राउंड सुबह नौ बजे ही फुल हो गया था। चलिये, पीएम की शाबासी से सरकार को कम-स-कम साल भर के लिए उर्जा भी मिल गई।

2005 बैच भी प्रसन्न

प्रधानमंत्री के सफल दौरे के बाद 2005 बैच के आईएएस अफसरों की खुशी तो पूछिए मत! इस बैच में छह आईएएस हैं। इनमें से पांच की भूमिका पीएम विजिट में किसी-न-किसी रुप में अहम रही। मुकेश बंसल राजनांदगांव कलेक्टर हैं ही। राजेश टोप्पो डायरेक्टर, पब्लिक रिलेशंस हैं। जाहिर है, पीएम विजिट के प्रचार-प्रसार में उन्हीं का रोल रहा। जांजगीर कलेक्टर ओपी चैधरी को राजनांदगांव में पब्लिक रिलेशंस के लिए सरकार ने तैनात किया था। दुर्ग कलेक्टर आर संगीता ने पीएम की सभा में भीड़ जुटाने में मदद की। ज्वाइंट सिकरेट्री टू सीएम होने के नाते रजत कुमार भी पीएम विजिट की तैयारियों में जुटे रहे। ऐसे में, इस बैच को खुश होना लाजिमी है। दिलचस्प यह भी है कि यह छत्तीसगढ़ का पहला बैच होगा, जिनमें स्वाभाविक इष्र्या नहीं, बल्कि अद्भूत तालमेल देखने को मिलेगा। एक-दूसरे की पोस्टिंग के लिए फील्डिंग भी करते हैं मिलजुल कर। लिहाजा, सभी मजबूत जगहों पर बैठे हैं। एक सीएम के साथ। एक डीपीआर। और, चार कलेक्टर। अब, पीएम विजिट की पार्टी भी सभी साथ करने वाले हैं।

मियां-बीवी

सोशल मीडिया में 21 फरवरी को पीएम विजिट, कुंवर बाई, छत्तीसगढ़ हाउसिंग प्रोजेक्ट के साथ ही राज्य की जिन 10 खबरों को सबसे अधिक ट्रेंड मिला, उनमें सोनी सोढ़ी पर केमिकल हमला भी शामिल रहा। यही वजह है कि सरकार की ओर से मियां-बीवी ने मोर्चा संभाला। मियां बोले तो बीबीआर सुब्रमण्यिम। सूबे के पिं्रसिपल सिकरेट्री होम। और बीवी उनके पत्नी उमा देवी। दिल्ली में छत्तीसगढ़ की रेसिडेंट कमिश्नर। सुब्रमण्यिम सोनी के परिजनों से मिलने दंतेवाड़ा पहुंच गए तो उमादेवी दिल्ली अस्पताल में जाकर सोनी का हालचाल पूछा।

बजट सत्र और बेफिकर सरकार

एक मार्च से प्रारंभ हो रहे विधानसभा का बजट सत्र रमन सिंह की तीसरी पारी का पहला सेशन होगा, जिसमें विपक्ष के पास कोई बड़ा इश्यू नहीं होगा। न नान घोटाला टाईप का कोई मामला है और ना ही कोई नक्सल वारदात, जिस पर सदन ठप्प किया जा सकें। उपर से गृह मंत्री के रुप में सरकार ने अजय चंद्राकर को बिठा दिया है। विपक्ष के लिए वास्तव में यह चिंताजनक स्थिति होगी। एक तो सरकार पर हमला करने वाला यों कहें कि घेरने वाला विपक्ष के पास कोई ढंग का वक्ता नहीं है। दूसरा, गंभीर इश्यू का भी टोटा। उधर, छत्तीसगढ़ विजिट में प्रधानमंत्री के पीठ थपथपाने से सरकार फुल जोश में है ही। सो, नाट फिकर।

कैबिनेट बड़ा या एमआईसी?

सीएम कैबिनेट बोले तो प्रदेश की सर्वोच्च बाडी। सरकार से भी बड़ी। हर नीतिगत फैसले कैबिनेट में ही होते हैं। मगर रायपुर नगर निगम ने कैबिनेट की हैसियत बता दी। उसके फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। पूरा माजरा हम आपको बताते हैं। कुछ दिन पहले कैबिनेट ने फैसला किया था कि शहरी निकायों के सभी स्कूलों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग करेगा। प्रदेश के सारे नगरीय निकायों के कमिश्नरों ने आर्डर निकालकर तत्काल उसे लागू भी कर दिया। सिवाय रायपुर के। रायपुर नगर निगम ने डेढ़ होशियारी दिखाते हुए प्रस्ताव को एमआईसी में रख दिया। एमआईसी में पास तो होना नहीं था। प्रस्ताव रिजेक्ट हो गया। सरकार को जब इसकी जानकारी मिली तो हड़कंप मच गया। आला अफसरों ने निगम के एक अफसर को पल्स पोलियो की दो बूंद खुराक दी। तब निगम का अमला हरकत में आया। बड़ी मशक्कत के बाद संकट का समाधान निकाला गया। निगम से राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार से नोटशीट मंगाई गई। सरकार में बुलेट ट्रेन की तरह फाइल दौड़ी और घंटे भर में आर्डर जारी हो गया। इससे सरकार को यह पता चल गया कि रायपुर स्मार्ट क्यों नहीं बन पाया। जिस निगम को कैबिनेट के पावर के बारे में नहीं पता, भला वह शहर को स्मार्ट कैसे बना सकता है।

आईपीएस की गायें

वैसे तो रायपुर एवं रायपुर के आसपास कई नौकरशाहों के फार्म हाउसेज हैं। मगर धमतरी रोड पर एक आईपीएस का फार्म हाउस इन दिनों राजधानी में चर्चा का विषय बना हुआ है। फार्म हाउस में उन्नत एवं विदेशी नस्ल की 150 से अधिक गायें पाली गई हैं। इनकी देखभाल के लिए पुलिस लाइन से जवानों की ड्यूटी लगाई जाती है। खैर, पुलिस के प्रभावशाली अफसर हैं तो इतना तो बनता ही हैं।

मास्टर माइंड

एसीबी और आईएफएस को आमने-सामने लाने वाले मास्टर माइंड का खुलासा हो गया है। बताते हैं, नान घोटाले के मास्टर माइंड आईएफएस ने अपनी गर्दन बचाने के लिए दांव खेला। और, इसमें फंस गए आईएफएस और उनके युवा मंत्री। मास्टर माइंड को पता है कि कभी भी एसीबी उन्हें नाप सकती है। इसलिए, उस पर प्रेशर बनाने के लिए उन्होंने अपने मंत्री को सीएम के यहां चलने की पट्टी पढ़ाई। मंत्री नए हैं, सीधे भी। सो, घनचक्कर में फंस गए। जबकि, कई आईएफएस अफसरों ने नान घोटाले के मास्टर माइंड को सजेस्ट किया था कि एसीबी से इस तरह पंगा लेने का कोई मतलब नहीं है। अगर मंत्रीजी को इस संदर्भ में सीएम से बात करनी हो तो वन-टू-वन भी बात कर सकते हैं। लेकिन, मास्टर माइंड माने नहीं, आईएफएस अफसरों की एसीबी के साथ वैमनस्या तो कराई ही मंत्री की भी फजीहत हो डाली।

दाल-भात केंद्र

प्रदेश के आईएएस, नान आईएएस बाहर में भले ही काजू-बादाम, छप्पन भोग, नोट-पानी खाते होंगे, मगर विधानसभा के समय उनकी शामत आ जाती है। कई बार उन्हें बिस्कुट से काम चलाना पड़ता है तो कभी पेट दबाकर। ऐसा इसलिए होता है कि उनके लिए हाउस में न बैठने की व्यवस्था है और ना ही खाने की। टिफिन लेकर आएं भी तो खाएं कहां पर। मंत्रियों के कमरे भी छोटे हैं। वहां उनके चम्पू बैठे रहते हैं। नौकरशाहों का गुस्सा सातवें आसमान पर तब पहंुच जाता है, जब एनाउंस किया जाता है विधायकों के लिए फलां जगह खाने की व्यवस्था है और पत्रकारों के लिए फलां जगह। आईएएस अफसरों ने अबकी सरकार से गुहार लगाई है कि विस परिसर में उनके लिए कम-से-कम पांच रुपए वाला दाल-भात केंद्र का ही इंतजाम कर दिया जाए। इसका वे भुगतान कर देंगे। इतने के बाद तो उम्मीद तो बनती ही है कि उनके लिए कैंटीन का इंतजाम हो जाए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डेपुटेशन पूरा होने के बाद छुट्टी पर चल रही आईएएस निहारिक बारिक छत्तीसगढ़ लौटेंगी या दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर बनेंगी?
2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायपुर दौरे में होम सिकरेट्री बीबीआर सुब्रमण्यिम से नक्सल मामले में गंभीर चर्चा की या हाल-चाल पूछा?

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

परमानेंट गृह मंत्री?


tarkash photo

21 फरवरी


संजय दीक्षित
सड़क हादसे में गंभीर रूप से जख्मी रामसेवक पैकरा को पूरी तरह स्वस्थ्य होने में दो से ढाई महीने लगेंगे। इससे अधिक भी हो सकता है। सरकार ने तब तक गृह विभाग की कमान अजय चंद्राकर को सौंप दी है। हालांकि, इसके पीछे पीएम विजिट और बजट सत्र बताया जा रहा है मगर सत्ता के गलियारों से जिस तरह के संकेत मिल रहे हंै, चंद्रकार को होम में कंटीन्यू भी किया जा सकता है। जाहिर है, होम के बाद चंद्राकर के पास तीन बड़े विभाग हो गए हैं। पंचायत, स्वास्थ्य और होम। सरकार इनमें से एक कम कर देगी। मसलन, पंचायत को पैकरा के हवाले। जब वे स्वस्थ्य हो जाएंगे। वैसे भी, माओवाद ग्रस्त राज्य होने के चलते ठीक-ठाक गृह मंत्री बनाए जाने की बातें बहुत पहले से चल रही हैं। तीसरी बार जब सरकार बनीं, तब भी अजय चंद्राकर को होम मिनिस्टर बनाने की चर्चाएं हुई थीं। लेकिन, तब नरेंद्र मोदी पीएम नहीं थे। अब, केंद्र भी चाहेगा कि देश के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित स्टेट में तेज-तर्रार गृह मंत्री हो। और, चंद्राकर इसमें फिट बैठते हैं।

जोगी को गुस्सा क्यों?

अजीत जोगी बोले तो सियासत के माहिर खिलाड़ी। जीवट नेता। ऐसा योद्धा जो विपरीत परिस्थितयों में भी हार नहीं मानता। लेकिन, जोगीजी में अब कुछ चेंजेस दिखने लगे है। उन्हें अब गुस्सा आने लगा है। मंगलवार को उन्होंने कुछ मीडिया वालों को बंगले में बुलवाया था। लेकिन, कुछ सवालों पर वे बुरी तरह उखड़ गए। रिपोर्टर्स भी स्तब्ध रह गए। ऐसा तो उनके सीएम रहने के दौरान भी गुस्साते नहीं देखा गया। जोगीजी राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं। अच्छी तरह याद है, दिल्ली में मीडिया के तीखे सवालों को चैके-छक्के की तरह हवा में उछाल देते थे। लगता है, बुरे समय में उनके अपने जिस तरह घोखा दे रहे हैं, वे हिल गए हैं। संगठन खेमा उनके अधिकांश विधायकों को साधने में कामयाब हो गया है। आखिर, सियाराम कौशिक को जीताने के लिए जोगीजी ने क्या नहीं किया। मगर कौशिक के जन्मदिन में संगठन खेमा हावी रहा। अभी तो आरके राय ही उनके साथ खड़े दिख रहे हैं। अपनी ताकत दिखाने अमित जोग पेंड्रा गए तो विधायकों में सिर्फ राय ही मौजूद थे। ऐसे में, जोगीजी का गुस्सा लाजिमी है।

14 वें मंत्री

रमन सरकार का चैदहवां मंत्री बनने का खौफ नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव पर भी सिर चढ़कर बोल रहा है। ये हम नहीं कह रहे हैं। टीएस ने खुद ही इस आशंका को बयां किया। मौका था, क्षत्री समाज का सम्मेलन का। राजधानी में हुए इस कार्यक्रम में ठाकुर नेताओं का जमघट था। सीएम के साथ नेता प्रतिपक्ष भी मंच पर थे। टीएस ने अपने भाषण में चुटकी ली, वे व्यक्तिगत तौर पर भी सीएम से कई बार अनुरोध कर चुके हैं कि वे उन्हें मित्र ना कहें। वरना, लोग उन्हें सरकार का 14वां मंत्री कहने लगेंगे। इस पर जमकर ठहाके लगे।

जब जाम में फंस गए डीजीपी

पीएम विजिट की तैयारी का जायजा लेने के बाद घर लौट रहे सूबेे के डीजीपी अमरनाथ उपध्याय शनिवार को शंकर नगर में जाम में बुरी तरह फंस गए। असल में हुआ ऐसा कि प्रेमप्रकाश पाण्डेय के बंगले के पास वाले चैक पर दोपहर दो बजे के करीब एक कार ने स्कूटी को ठोकर मार दी। स्कूटी के ठीक पीछे डीजीपी की गाड़ी थी। हादसे के बाद उनकी गाड़ी के ठीक सामने कार और स्कूटर वाले तू-तू-मैं-मैं करने लगे। इससे चैक पर जाम लग गया। डीजीपी को गाड़ी में बैठा देखकर ट्रैफिक पुलिस वाले दौड़े। गनमैन भी गाड़ी से उतरकर लोगों को समझाने की कोशिश की। मगर कोई सुनने के लिए तैयार नहीं था। करीब 10 मिनट बाद पुलिस किसी तरह डीजीपी की गाड़ी निकलवाने में कामयाब हो पाई।

धमतरी से शुरूआत

ब्रेन हेम्बे्रज के बाद धमतरी कलेक्टर भीम सिंह मुंबई के अस्पताल में भरती है। उनकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। लेकिन, उन्हें कलेक्टरी संभालने में वक्त लगेगा। तब तक एडिशनल कलेक्टर के भरोसे जिला नहीं चलाया जा सकता। ऐसे में, धमतरी में नए कलेक्टर की पोस्टिंग हो जाए, तो अचरज नहीं। वैसे भी, भीम सिंह का धमतरी से ट्रांसफर होना ही था। उनका दो साल पूरा हो गया है। अगले फेरबदल में उन्हें कोई बड़ा जिला मिलता। मार्च तक अगर वे सेहतमंद हो गए, तो बड़े जिले की उनकी दावेदारी वैसे भी रहेगी। बहरहाल, धमतरी में जो कलेक्टर जाएगा, वह 2009 बैच का होगा। याने इस बैच की शुरूआत धमतरी से होगी।

तीन आईपीएस जाएंगे दिल्ली

अंकित गर्ग, धु्रव गुप्ता के बाद एडीजी प्रशासन राजेश मिश्रा ने भी डेपुटेशन के लिए अप्लाई कर दिया है। इनमें से दो का दिल्ली जाना लगभग तय लग रहा है। गर्ग और गुप्ता का। वजह भी है। दंतेवाड़ा में एसपी रहने के दौरान एस्सार और नक्सली रिलेशंस कांड के बाद से गर्ग हांसिये पर चल रहे हैं। सरकार उन्हें सशस्त्र बल बटालियन में पोस्ट करके भूल गई है। सो, भारत सरकार से अगर ओके हुआ, तो गर्ग दिल्ली की ट्रेन पकड़ने में देर नहीं लगाएंगे। उधर, धु्रव गुप्ता आईपीएस में जरूर सलेक्ट हो गए, मगर उनके तेवर ऐसे हैं कि पुलिस के वर्तमान सिस्टम में फिट नहीं बैठते। ऐसे, अफसरों को अपना समाज, अपना सिस्टम बर्दाश्त नहीं करता। इसीलिए, वे पीएचडी करने कानपुर चले गए थे। और, अब दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. सूबे के किन फेसबुकिया कलेक्टरों से सरकार इन दिनों परेशान है?
2. अजीत जोगी ने जब कहा, वे 30 साल और जीएंगे तथा प्रदेश की सेवा करेंगे, यह सुनकर भूपेश बघेल को कैसा लगा होगा?

ग्रह-नक्षत्र खराब?


tarkash photo14 फरवरी



संजय दीक्षित
छत्तीसगढ़ बोले तो सबसे शांत, सुघड़ प्रदेश। मगर कुछ दिनों से सूबे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। गर आप ज्योतिष पर यकीन करते हैं तो छत्तीसगढ़ की कंुडली में मंगल, बुध और शनि का पोजिशन कुछ इस तरह बन गया है कि अपर लेवल में झगड़ा-फसाद खूब होंगे। देख ही रहे हैं। नेता, मंत्री, अफसर सब लड़ रहे हैं। कांग्रेस में अपनों में ही तलवारें खींची हुई है। ऐसा, कि सामने पड़ जाएं, तो गर्दन उड़ा दें। कैबिनेट में मंत्री लड़ रहे हैं। तो सड़क पर आईएएस, आईपीएस और आईएफएस तलवारें भांज रहे हैं। बिल्कुल अराजकता के हालात। हालांकि, सबसे पहले तलवार लेकर सड़क पर उतरे आईएएस ही। मगर इसमें उनका कोई कसूर नहीं। छत्तीसगढ़ का ग्रह-नक्षत्र ही….। आपको याद होगा, कुछ दिन पहले आईएएस ट्रेड यूनियन के अंदाज में आईपीएस से रहम के लिए पहुंच गए थे सीएम के पास। तो हाल में, आईएएस, आईपीएस, दोनों से भिड़ गए आईएफएस। वन मंत्री महेश गागड़ा तो और एक कदम आगे निकल आए। एसीबी के छापे के खिलाफ आईएफएस को लेकर पहंुच गए सीएम के पास। उन पर मंगल का प्रभाव नहीं होता तो मंत्री होने की सुविधा के नाते वे सीएम से वन-टू-वन भी बात कर सकते थे। वो ज्यादा प्रभावशाली भी होता। मीडिया में खबर भी नहीं बनती। किन्तु….। और देखिए, अगले दिन एसीबी ने संपति का खुलासा करके गागड़ा पर ही जवाबी गोला दाग दिया। अब, इसे क्या कहेंगे? ग्रह-नक्षत्र का असर! तो सरकार को इसके लिए कुछ करना चाहिए। ठोस कदम। पुख्ता इंतजाम। वरना, प्रदेश के लिए यह स्थिति ठीक नहीं है।

अमित के लौटने के बाद

आईजी लेवल पर फेरबदल अब अमित कुमार के दिल्ली से लौटने के बाद ही संभव होगा। अमित फिलहाल, सीबीआई में डेपुटेशन पर हैं। अगस्त में उनका वहां पांच साल पूरा हो जाएगा। सरकार ने उन्हें आईजी का प्रोफार्मा प्रमोशन दे दिया है। जाहिर है, अमित सरकार के गुडबुक में रहे हैं। जब यहां से दिल्ली गए थे, दुर्ग एसपी थे। सो, वहां से लौटने पर उन्हें आईजी के रूप में ठीक-ठाक ही रेंज मिलेगा। तब तक रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के आईजी की कुर्सी पर कोई खतरा नहीं दिख रहा है। अब, कोई हिट विकेट होकर अपनी कुर्सी गवां बैठे या सरकार को सर्जरी करने के लिए विवश कर दें, तो बात अलग है।

ऐसे भी आईएएस

एक सीनियर आईएएस लोन के लिए हलाकान हैं। कई बैंकों में उनके कागज जमा हुए, मगर सभी ने हाथ खड़ा कर दिया। दरअसल, आईएएस ने पहले से कुछ बैंकों से लोन ले चुके हैं। मगर चुकाया एक का भी नहीं। एक को कह दिया कि मैंने लोन लिया ही नहीं है। हस्ताक्षर मेरा नहीं है। इसलिए, बैंकर हड़के हुए हैं। चलाचली की बेला में लोन दे दिया तो वसूल तो होने वाला नहीं।

दो लाल बत्ती का असर?

बिलासपुर जिले में आने वाला तखतपुर प्रदेश का पहला ब्लाक या विधानसभा क्षेत्र होगा, जहां सरकार ने दो लाल बत्ती दी है। राजू क्षत्री को संसदीय सचिव और हर्षिता पाण्डेय को राज्य महिला आयोग की कमान। मगर बुधवार को कांग्रेस का वहां कार्यक्रम हुआ, वह प्रदेश का अब तक का सबसे जोशीला और भीड़-भाड़ वाला कार्यक्रम में दर्ज हो गया। राजू क्षत्री ने वैसे भी पिछला चुनाव कांग्रेस के आशीष सिंह से महज 600 वोटों से जीता था। वहां पावर के डबल पोल बनने से अगले चुनाव की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

स्वागत विहार

स्वागत विहार पर सरकार का शिकंजा फिर कसता जा रहा है। ताजा अपडेट यह है कि स्वागत विहार में जिस सरकारी जमीन की प्लाटिंग की गई थी, राजस्व विभाग ने उसे फिर से सरकारी रिकार्ड में दर्ज कर लिया है। और यह भी, जिन प्लाटों को सरकारी रिकार्ड में दर्ज किया गया है, उनमें बड़े-बड़ों के नाम है। सो, जो लोग संजय बाजपेयी के देहावसान के बाद राहत महसूस कर रहे होंगे, उनके लिए यह बैड न्यूज है।

सब पाण्डेयजी

सरकार ने जिन ब्राम्हण नेताओं को लाल बत्ती से नवाजा है, उनमें अधिकांश पाण्डेयजी हैं। पीएससी मेम्बर पाण्डेय। राज्य महिला आयोग में पाण्डेय और माटी कला बोर्ड में भी पाण्डेय। मंत्री प्रेमप्रकाश भी पाण्डेय तो संगठन में सरोज पाण्डेय भी पाण्डेय। रायपुर जिलाध्यक्ष भी पाण्डेय। अपवाद के तौर पर शिवरतन शर्मा और बद्रीधर दीवान। लेकिन, उनकी हालत भी देख लीजिए। भारत सरकार ने जिस तरह माईनिंग रुल बदलें है और दूसरा, सुबोध सिंह के माईनिंग सिकरेट्री बनने के बाद जिस तरह सिस्टम को आनलाईन किया गया है, चेयरमैन के लिए कुछ बच नहीं गया है। उधर, सरकार ने दीवानजी को दूसरी बार विस उपाध्यक्ष बनाया है। इस पोस्ट की कितनी अहमियत है, आप समझ सकते हैं। ऐसे में, बीजेपी में ही लोग भी चुटकी ले रहे हैं कि एक वीरेंद्र पाण्डेय के लिए सरकार ने इतने पाण्डेय को मैदान में उतार दिया है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एक कलेक्टर का नाम बताइये, जिसकी पत्नी कलेक्टरी चलाती है?

रविवार, 7 फ़रवरी 2016

डीएस लेंगे रिटायरमेंट?


tarkash photo

7 फरवरी


संजय दीक्षित
82 बैच के आईएएस एवं रेवन्यू बोर्ड के चेयरमैन डीएस मिश्रा 16 मार्च के पहले रिटायरमेंट ले सकते हैं। रिटायरमेंट लेेने का मतलब आप यह मत निकालियेगा कि सरकार से वे नराज-वराज हो गए होंगे। रिटायरमेंट लेंगे वे सूचना आयोग में ताजपोशी के लिए। असल में, मुख्य सूचना आयुक्त सरजियस मिंज 16 मार्च को रिटायर होंगे। जाहिर है, मुख्य सूचना आयुक्त का पोस्ट चीफ सिकरेट्री के समकक्ष है। सो, वे मिंज की जगह ले सकते हैं। इससे पहले, आपको याद होगा मुख्य सूचना आयुक्त बनने के लिए अशोक विजयवर्गीय ने चीफ सिकरेट्री के पद से चार महीने पहिले रिटायरमेंट ले लिया था। पीसी दलेई भी रिटायरमेंट से कुछ महीने पहले नौकरी छोड़कर राज्य निर्वाचन आयुक्त बन गए थे। इन केस, बजट सत्र में सरकार के व्यस्त रहने के कारण उनका आर्डर नहीं हो पाया तो फिर वे रुटीन में अप्रैल में रिटायर होंगे। तब तक सूचना आयोग का पोस्ट उनके लिए खाली रखा जाएगा।

जोगी अस्वस्थ्य

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सेहत ठीक नहीं बताई जा रही। 20 दिन से अधिक हो गए। ना तो वे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं और ना ही मीडिया से मिल रहे हैं। हालांकि, वे सागौन बंगले में ही हैं। लेकिन, मिलने की मनाही है। बताते हैं, अमित के निष्कासान के दौरान जोगीजी का आपरेशन हुआ था। तब भूपेश को ललकारने के लिए वे डाक्टर की सलाह को नजरअंदाज कर रणभूमि में उतर आए थे। पामगढ़ और अहिरवारा जैसे कई सामाजिक सम्मेलनों ने जोगी ने दहाड़ा था, मोर से बड़ कोन नेता हवे छत्तीसगढ़ में। लगातार दौरे से जोगीजी के आपरेशन के कुछ टांके टूट गए। इसलिए, डाक्टरों ने उन्हें कंप्लीट बेडरेस्ट की सलाह दी थी। यद्यपि, उनकी तबीयत में सुधार है। अब, वे चेयर पर बैठने लगे हैं। लेकिन, पहले जैसे सक्रिय होने में अभी कुछ वक्त लगेगा।

तलवारें खींचेंगी!

सिके्रट सर्विस मनी को लेकर पुलिस महकमे में तलवारें खींच सकती है। एसएस मनी अभी आठ करोड़ रुपए है। इनमें से करीब आधा हिस्सा नक्सल आपरेशन को जाता है और आधा खुफिया पुलिस को। पुलिस महकमा नक्सल आपरेशन के हिस्से में से डंडी मारने के चक्कर में था। इसके लिए नोटशीट भी चल गई है। तर्क दिया गया है कि नक्सल इंटेलिजेंस कोई खुफिया इनपुट तो देता नहीं तो उसे इतनी राशि क्यों दी जाए। मगर, गड़बड़ यह हो गया कि एंटी नक्सल में डीएम अवस्थी आ गए हैं। वो भी स्पेशल डीजी बनकर। सो, वे राशि कम तो होने नहीं देंगे। आरके विज के समय एक बार चल भी जाता। मगर अब इसको लेकर बात बिगड़ सकती है। हम आपको बता दें, कि इंटेलिजेंस में पोस्टिंग का सबसे अधिक क्रेज रहता है, वह है बेहिसाब पावर, एक्सपोजर और आठ करोड़ रुपिया। इस रुपिये का कोई आडिट नहीं होता। कोई पूछ भी नहीं सकता कि इन रुपयों का आपने क्या किया। मुखबिरों को बांटा या अपने पास रखा। न विधानसभा में सवाल का लफड़ा और ना ही ईओडब्लू में शिकायत का खतरा। बिल्कुल सेफ। ऐसे में तलवारें तो निकलेगी ही।

2009 बैच की कसमसाहट

यह पहली दफा होगा, जब किसी एक बैच के सारे आईएएस राजधानी में डंप हो गए हैं। हम बात कर रहे हैं 2009 बैच की। इस बैच में छह आईएएस हैं। इनमें से अवनीश शरण जिला पंचायत रायपुर में सीईओ हैं। बाकी पांच विभिन्न डायरेक्ट्रेट में। सौरव कुमार चिप्स, प्रियंका शुक्ला कौशल उन्नयन, समीर विश्नोई बीज विकास निगम, फैयाज तंबोली नेशनल हेल्थ मिशन, किरण कौशल महिला बाल विकास। सभी कलेक्टर बनने के लिए कसमसा रहे हैं। वार्मअप हो-होकर थक गए। सही भी है। दूसरे राज्यों में 2010 बैच को कलेक्टर बनने का मौका मिल गया है। मगर भारतीय रेलवे की तरह उनका बैच भी लेट होता जा रहा है। सरकार ने अब भरोसा दिया है, बजट स़त्र के जस्ट बाद लिस्ट निकल जाएगी। याने मार्च एंड या अप्रैल फस्र्ट वीक। लेकिन, संख्या अधिक है। सो, अधिकतम चार को ही मौका मिल पाएगा। दो को अक्टूबर, नवंबर तक इंतजार करना होगा। बहरहाल, अधिकांश को अपने कैरियर से अधिक अपनी पत्नी और बच्चों की चिंता सताने लगी है। दरअसल, राजधानी की चकाचैंध में पत्नी-बच्चों का मन रमने लगा है। सरकार ने कहीं दूर पटक दिया तो क्या होगा। लेकिन, उन्हें चिंता नहीं करनी चाहिए। जिले में लक्ष्मीजी बरसने लगेंगी तो घर की लक्ष्मीजी का मन वहीं रमने लगेगा।

सवा साल की कलेक्टरी

अभी जो कलेक्टर बनेंगे, वे मानकर चल रहे हैं कि उस जिले में उनकी कलेक्टरी सवा से डेढ़ साल तक ही रहेगी। उसकी वजह यह है कि विधानसभा चुनाव में करीब पौने तीन साल बचा है। अभी जो कलेक्टर पोस्ट होंगे, जाहिर है, वे चुनाव तक नहीं रह पाएंगे। चुनाव आयोग की तलवार उन पर लटक जाएगी। सो, आचार संहिता लगने से एक, सवा साल पहले सरकार अपने हिसाब से जिलों में कलेक्टरों को बिठाएगी। याने अगले साल जून, जुलाई में निश्चित तौर पर एक बड़ी लिस्ट निकलेगी।

प्रेशर टेक्नीक

आईएफएस अफसरों की प्रेशर टेक्नीक काम कर गई। नवंबर से अटका पीसीसीएफ का आर्डर शनिवार को जारी हो गया। वो भी तीनों का। जबकि, पोस्ट दो ही थी। नवंबर में पीसीसीएफ की डीपीसी हुई थी। लेकिन, किसी की जिद में आदेश नहीं निकल रहा था। आईएफएस इससे खासे नाराज थे। अफसरों ने इसको लेकर कुछ दिन पहले मीटिंग की। उसमें कुछ आईएएस के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठे थे। उमेश अग्रवाल और संजय अलंग का नाम प्रमुखता से था। लेकिन, सब जानते हैं, निशाना कहीं और था। आईएफएस ने नेतागिरी के लिए रणनीति के तहत कौशलेंद्र सिंह को आगे किया। मालूम है, कौशलेंद्र का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। और, यह टेक्नीक काम कर गई। एसीबी से रहम दिलाने के लिए आईएएस अफसरों को कमरेड स्टाईल में सीएम से मिलना पड़ा था। लेकिन, आईएएस का दम देखिए, मीडिया में खबर छपवाई कि वे सीएम से मिलकर अपनी बात रखेंगे और उनका काम हो गया।

250 करोड़ का खजाना

बीके सिनहा के पीसीसीएफ स्टेट फारेस्ट रिसर्च बनने के बाद वन विभाग का अहम विभाग कैम्पा खाली हो गया है। कैम्पा का बजट 250 करोड़ का है। नेताओं और अफसरों के अधिकांश बेगारी इसी फंड से होते हैं। सो, इस पोस्ट पर किसी विश्वस्त को ही उपर वाले बिठाना चाहेंगे। चर्चा है, लेबर सिकरेट्री जीतेन कुमार को कैम्पा का प्रमुख बनाया जाएगा। मगर आर्डर निकलने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा। वजह, बीके सिनहा को वाईल्डलाइफ के साथ कैम्पा का चार्ज देने के कवायद की गई, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया।

यंग्रीमैन मेयर, यंग्रीमैन सीएसपी

गुरूवार को रायपुर के मेयर प्रमोद दुबे और सीएसपी कोतवाली अंशुमन सिसोदिया के बीच जमकर तू-तूू, मैं-मैं हो गई। मेयर गुस्से में थे कि बीजेपी पार्षद उनके चेम्बर में कैसे घुस गए। इस बात को लेकर वे स्टूडेंट लीडर वाले अपने पुराने अंदाज में सीएसपी से भिड़ गए। बोले, वक्त आने दो, देख लूंगा। तो सिसोदिया का भी ठाकुर खून ठहरा। जवाब भी उसी अंदाज में दिया। लेकिन, गलती दोनों की थी। सिसोदिया को मेयर के बारे में पता होना चाहिए कि वे स्टूडेेंट पालिटिक्स से आए हैं। यूनिवर्सिटी प्रेसिडेेंट रहे हैं। वो भी ब्राम्हणपारा ब्रांड। सिसोदिया को घोखा हो गया, मेयर शहर के प्रथम व्यक्ति होते हैं। गरिमा-वरिमा का ध्यान तो रखबे करेंगे। उधर, जब यह एपीसोड हुआ, सिसोदिया के बगल में महिला सीएसपी अर्चना झा खड़ी थीं। मेयर को भी इसका ध्यान रखना था। बगल में महिला खड़ी हो और कोई डपट दें तो जिसको गुस्सा ना आता हो वो भी भड़क जाएगा। सीएसपी के भड़कने का कारण भी वाजिब ही माना जाएगा।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस नेता ने अपनी मस्तानी को लाल बत्ती दिलवा दी?
2. छत्तीसगढ़ राजस्व बोर्ड का अगला चेयरमैन कौन हो सकता है?

शनिवार, 30 जनवरी 2016

डीएम से खौफ क्यों?


tarkash photo

31 जनवरी


संजय दीक्षित
डीएम अवस्थी के डीजी बनने के पश्चात कुछ आईपीएस अफसरों के कैरियर पर काली छाया मंडराने लगी है। खौफ है, डीएम कहीं डीजीपी बन गए, तो अपना क्या होगा। दरअसल, डीजीपी बनने के बाद डीएम अगर क्रीज पर टिक गए तो आधा दर्जन से अधिक आईपीएस को डीजीपी बनने का अवसर नहीं मिलेगा। अप्रैल 2023 में डीएम का रिटायरमेंट है। याने आठ साल। सबसे लंबा। छत्तीसग़ढ़ में किसी भी डीजी का कार्यकाल इतना लंबा नहीं रहा। जाहिर है, नीचे वालों का ब्लडप्रेशर तो बढ़ेगा ही। अवस्थी से जस्ट नीचे 87 बैच के विनय कुमार सिंह और स्वागत दास हैं। दोनों भारत सरकार में डेपुटेशन पर हैं। इनमें से सिंह 2019 और दास 2022 में रिटायर हो जाएंगे। अब 88 बैच। इनमें सबसे सीनियर संजय पिल्ले। जुलाई 23 में वे रिटायर होंगे। डीएम के रिटायर होने के बाद उनके पास महज तीन महीने का समय रहेगा। इसके बाद आरके विज दिसंबर 21 और मुकेश गुप्ता सितंबर 22 में सेवानिवृत होंगे। 89 बैच के अशोक जुनेजा भी जून 23 में बिदा हो जाएंगे। सो, संजय पिल्ले कहीं आखिरी तक डीजीपी रहे, तो जुनेजा को उनसे एक महीना पहले नौकरी को बाय-बाय करना पड़ेगा। मगर यह तभी होगा, जब डीएम आउट नहीं हुए।

आईपीएस आगे, आईएएस पीछे

कैडर रिव्यू न हो पाने का खामियाजा सूबे के ताकतवर नौकरशाहों को इस तरह भुगतना पड़ रहा है कि प्रमोशन के लिए उन्हें आईपीएस अफसरों का सहारा लेना पड़ रहा है। डीएस मिश्रा से लेकर बैजेंद्र कुमार तक का प्रमोशन आईपीएस का हवाला देकर हुआ। आपको याद होगा, 82 बैच के रामनिवास 2011 में एडीजी बन गए थे। जबकि, 82 बैच के आईएएस डीएस मिश्रा का प्रमोशन नहीं हो रहा था। तब के चीफ सिकरेेट्री सुनिल कुमार ने रामनिवास की आड़ में डीएस का प्रमोशन कराया था। इसके बाद, फरवरी 2014 में 85 बैच के अमरनाथ उपध्याय डीजीपी बने तो 84 बैच के एमके राउत और 85 बैच के एन बैजेंद्र कुमार को इसी पैटर्न पर एसीएस प्रमोट किया गया। असल में, कैडर रिव्यू न होने का खामियाजा आईएएस को भुगतना पड़ रहा है। ब्यूरोक्रेसी में उपर लेवल पर अफसर बढ़ गए मगर पोस्ट बढ़ा नहीं। यही वजह है कि प्रिंसिपल सिकरेट्री सुनील कुजूर और अजयपाल सिंह एसीएस नहीं बन पा रहे हैं। सरकार ने उनके लिए दो स्पेशल पोस्ट मांगा है, मगर भारत सरकार से हरी झंडी मिल नहीं पा रही। जबकि, उन्हीं के 86 बैच के आईपीएस डीएम अवस्थी डीजी बन गए हैं। एसीएस और डीजी का पोस्ट समतुल्य होता है। सो, सामान्य प्रशासन विभाग अब डीएम का हवाला देकर अब भारत सरकार से फिर गुजारिश करने जा रहा है।

और मजबूत होगा एसीबी

सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो को और मजबूत करने का फैसला किया है। गृह विभाग ने कुछ दिन पहले ब्यूरो से जिन 26 अफसरों एवं जवानों को वापिस बुलाने का फरमान जारी कर दिया था, सरकार के हस्तक्षेप के बाद इसे निरस्त किया जा रहा है। यही नहीं, पहली बार एसीबी को सिके्रट सर्विस मनी का प्रावधान किया जा रहा है। इतना सब हो रहा है तो आपको यह मानना पड़ेगा कि एसीबी चीफ मुकेश गुप्ता का जलजला कम नहीं हुआ है। वरना, 26 लोगों का ट्रांसफर केंसिल तो कदापि नहीं होता।

कांग्रेस के साथ पारी

आईजी रविंद्र भेडि़या 31 जनवरी को रविवार होने के चलते एक दिन पहले 30 को ही रिटायर हो जाएंगे। रिटायरमेंट के बाद वे कांग्रेस के साथ अपनी नई पारी की शुरूआत करेंगे। वैसे भी, वे कांग्रेसी परिवार से ही आते हैं। उनकी पत्नी अनिला भेडि़या डौंडीलोहारा से कांग्रेस से विधायक हैं। रविंद्र के बड़े भाई डोमेंद्र भेडि़या भी डौंडीलोहरा से कई बार विधायक रह चुके हैं। बहरहाल, छत्तीसगढ़ बनने के बाद भेडि़या कांग्रेस में शामिल होने वाले पहले रिटायर आईपीएस होंगे। यह भी हो सकता है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में डौंडीलोहारा से पत्नी की बजाए वे मैदान में उतर जाएं। इससे पहले, आरसी पटेल की तब के पीसीसी चीफ नंदकुमार पटेल के साथ निकटता रही। पिछले विधानसभा चुनाव के समय टिकिट उनको मिलने की चर्चा भी खूब रही मगर उन्होंने कांग्रेस ज्वाईन नहीं किया।

विपक्ष को वेटेज

कांग्रेस को अबकी बजट में शिकायत नहीं रहेगी कि उनके इलाके को इगनोर किया गया है। सीएम डा0 रमन सिंह ने पहली बार अबकी कांग्रेस विधायकों को भी बजट पर सुझाव के लिए बुला रहे हैं। सरगुजा संभाग से विधायकों के साथ नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव भी एक जनवरी को शाम सीएम हाउस में अपनी बात रखेंगे। चलिये, बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस को यह शिकवा नहीं होगी कि उन्हें नहीं सुना गया।

अफसर रहेंगे टारगेट में

बजट के लिए सीएम से वन-टू-वन मुलाकात में सुझाव कम, जाहिर तौर पर शिकायतें अधिक हांेगी। और, टारगेट में रहेंगे अफसर। पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने आज इसका आगाज कर भी दिया। एक न्यूज चैनल से बात करते हुए उन्होंने मंत्रालय में अफसरों के टाईम से न आने पर अफसरशाही को निशाने पर लिया। उन्होंने दो टूक कहा कि सुनिल कुमार जब सीएस थे तो अफसर कैसे 10 बजे मंत्रालय पहुंच जाते थे। वे सीएम से इस बारे में बात करेंगे।

अंत में दो सवाल आपसे

1. आईएफएस अफसरों की डीपीसी की फाइल किसके पास अटकी हैं?
2. जुआ खिलवाने पर किस एसपी को पिछले हफ्ते सरकार ने फटकार लगाई?

शनिवार, 23 जनवरी 2016

फिर फिसली जुबां


tarkash photo




संजय दीक्षित
खेल एवं श्रम मंत्री भैयालाल रजवाड़े की एक बार फिर जुबां फिसल गई। सीएम हाउस में संसदीय सचिवों के शपथ लेने के बाद एक महिला संसदीय सचिव को वन विभाग मिलने पर मीडिया ने वन विभाग में उनकी प्राथमिकताओं पर सवाल पूछा। संसदीय सचिव इसका जवाब देतीं, इससे पहले बाजू में खड़े रजवाड़े तपाक से बोल पडे़, बोलो ना, वन के साथ मेरा तन है….। रजवाड़े की इस टिप्पणी से न केवल संसदीय सचिव बुरी कदर झेंप गईं बल्कि आसपास खड़े लोग भी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। याद होगा, पिछले साल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में महिलाओं पर की गई अमर्यादित टिप्पणी पर बड़ा बवाल मचा था। उन्होंने कहा था, पांच सौ की चाकरी, चार हजार की साड़ी, ये है आंगनबाड़ी। रजवाड़े की इस बेतुके बोल पर सरकार को भी शर्मसार होना पड़ा था।

भाई-भाई

छत्तीसगढ़ कांग्रेस और छत्तीसगढ़ पुलिस की हालत लगभग भाई-भाई वाली हो गई है। कांग्रेस में एक-दूसरे को एक्सपोज करने की होड़ मची है। तो पुलिस मुख्यालय के कुछ अफसरों और बस्तर पुलिस में जंग छिड़ी हुई है। जंग है, अधिकार और अहंकार की। बस्तर पुलिस सीएम और डीजीपी के इतर कहीं देखती नहीं। और पीएचक्यू के एक गुट को लगता है, उन्हें बायपास किया जा रहा है। ऐसे में, झगड़े तो होंगे ही। जाहिर है, भूपेश और जोगी की लड़ाई में कांग्रेस की भद पिट रही है तो पुलिस अफसरों की खींचतान में सरकार की। जगदलपुर में नक्सलियों की शादी पर सरकार की आखिर, किरकिरी हो ही गई। बस्तर पुलिस बड़बोलेपन में कह गई थी कि जिन नक्सलियों की शादी हो रही है, वे जीरम कांड-एक और दो में शरीक थे। पुलिस महकमे ने तीन दिन तक इसका खंडन करना भी मुनासिब नहीं समझा। अलबत्ता, विरोधी खेमा चटकारे लेता रहा, फंस गई बस्तर पुलिस…..बड़ा नक्सल एक्सपर्ट बनता है….अब आएगा मजा। उधर, कांग्रेस ने सीधे सरकार पर हमला बोल दिया, जीरम घाटी में कांग्रेसियों को मारने के एवज में सरकार नक्सलियों को शादी करवाकर नौकरी का तोहफा दे रही है। वास्तव में मैसेज भी कुछ ऐसा ही जा रहा था। सरकार भी मानती है कि गर पहले दिन ही इसका खंडन हो गया होता, तो विपक्ष को अवसर नहीं मिलता। सरकार की फटकार के बाद पुलिस जागी और तीन दिन बाद खंडन का ड्राफ्ट तैयार कर हांफते हुए सीएम सचिवालय पहुंचे पीएचक्यू के अधिकारी। मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी। सीएम सचिवालय ने यह कहते हुए पुलिस अधिकारियों को झिड़क दिया कि झूठ को झूठ कहने में आपलोगों को तीन दिन लग गए।

जब रमन हुए लाल

पुलिस की आपसी लड़ाई में जब सरकार की छबि दागदार होने लगे तो सरकार को भला गुस्सा कैसे नहीं आएगा। नक्सलियों की शादी और उन्हें नौकरी देने पर जब सरकार पर आरोपों की बौछारें शुरू हो गईं तो गुरूवार को सीएम ने पुलिस और गृह महकमे के आला अफसरों की खबर ली। पूछा, जब झीरम कांड की जांच कर रही एनआईए के एफआईआर तक में दोनों नक्सलियों के नाम नहीं है, तो इसका खंडन क्यों नहीं किया गया। जबकि, पीएचक्यू में प्रवक्ता है, नक्सल सेल बना हुआ है। अब, सीएम के गुस्से का असर दिखना ही था। दिपांशु काबरा को उठाकर सरगुजा भेज दिया गया और लांग कुमेर को रायपुर पुलिस मुख्यालय। जबकि, सरगुजा आईजी के लिए हेमकृष्ण राठौर का नाम लगभग तय था। दिपांशु हाईप्रोफाइल आईपीएस माने जाते हैं। रायगढ़, दुर्ग और रायपुर जैसे जिलों में कप्तानी की है। सो, उनकी दावेदारी दुर्ग या रायपुर के लिए थी। मगर इससे पहले ही सरकार ने तलवार निकाल कर भांज दिया। आने वाले समय में पीएचक्यू में कुछ और उठापटक हो जाए, तो अचरज नहीं।

छाबड़ा का बल्ले-बल्ले

दिपांशु काबरा के सरगुजा जाने से डीआईजी स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच डा0 आनंद छाबड़ा की हर महीने लगभग 60 हजार रुपए की लाटरी निकल जाएगी। दरअसल, एसआईबी में वेतन 50 फीसदी अधिक मिलता है। मगर एसआईबी में सिर्फ आईजी का पोस्ट सेंक्शन होने के चलते छाबड़ा को इसका लाभ नहीं मिल रहा था। हालांकि, पीएचक्यू ने फाइल चलाई थी मगर पोस्ट ना होने के कारण गृह विभाग ने उसे वापिस लौटा दिया था। अब, काबरा हट गए हैं तो छाबड़ा को तो बल्ले-बल्ले समझिए।

अवस्थी होंगे  डीजी

1986 बैच के आईपीएस डीएम अवस्थी को डीजी बनाने के लिए शनिवार को देर शाम मंत्रालय में डीपीसी हो गई। समझा जाता है, दो-तीन दिन में उनका आर्डर भी निकल जाएगा। वे सूबे के चैथे डीजी होंगे। एएन उपध्याय, गिरधारी नायक और डब्लूएम अंसारी पहले से इस रैक में हैं। यह पहला मौका होगा, जब छत्तीसगढ़ पुलिस में चार डीजी होंगे। प्रमोशन होने के बाद हाई प्रोफाइल आईपीएस अवस्थी को अब विभाग क्या मिलता है, इसकी अटकलें लगनी शुरू हो गई है।

सुबह भूपेश, शाम को जोगी

22 जनवरी को कांग्रेस के गुटीय प्रदर्शन में दोपहर तक भूपेश बघेल गुट हावी रहा। तमाम विरोधों के बाद भी संगठन खेमा जगह-जगह अंतागढ़ टेप कांड की सीडी चलाने में कामयाब हो गया। मगर दोपहर बाद जोगी खेमा ने राजधानी में कोलावेरी की पैरोडी चलाकर माहौल खींच लिया। पैरोडी थी, व्हाय दिस फर्जी टेप, फर्जी टेप जी…क्यों भूपेश….दू करोड़ में टेप बनाइंग, बैक डेट में ह महामत्री बनाइंग, ददा संग कांग्रेस चलाइंग, ओला घर के खेती बनाइंग, व्हाय दिस फर्जी टेप, फर्जी टेप जी। ठीक 3 बजे राजधानी में आधा दर्जन मिनीडोर इस पैरोडी को चलाते हुए निकले। उसमें पोस्टर भी चस्पा था, छत्तीसगढ़ में कार्यरत एक राष्ट्रीय पार्टी को आवश्यकता है, एक महामंत्री की। योग्यता-सजायाफ्ता मुजरिम हो, ब्लैकमेलर हो, कम-से-कम पांच आडिया, वीडियो कांड किए हो। योग्य उम्मीदवार को एक नेता का सीडी बनाना होगा। चयन होने के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दो करोड़ रुपए एवं बैकडेट में नियुक्ति आदेश देंगे। मिनीडोर जहां भी गया, लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हालांकि, इस पर पब्लिक का रियेक्शन अच्छा नहीं था। कुछ लोगों ने बड़ी तल्ख टिप्पणी की….दोनों गुट एक-दूसरे का कपड़ा खोल रहे हैं….इसमें नुकसान कांग्रेस पार्टी का ही होगा।

शक्ति प्रदर्शन

एक ओर कांग्रेस गुटीय शक्ति प्रदर्शन में दम-खम के साथ जुटी हुई है। वहीं, सत्ताधारी पार्टी 2018 के चुनाव के लिए अपना किला मजबूत करने में जुट गई है। बोर्ड एवं निगमों में ताजपोशी के बाद सरकार ने कैबिनेट और राज्य मंत्री का दर्जा देने में देर नहीं लगाई। पहली बार ऐसा हुआ कि दो दिन के भीतर किसको किस तरह की सुविधा की पात्रता होगी, आर्डर जारी कर दिया। वरना, दूसरी पारी में लाल बत्ती का दर्जा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था।

अंत में दो सवाल आपसे

1. छत्तीसगढ़ के आईएएस 30 अप्रैल को ब्यूरोक्रेसी में होने वाली किस उठापटक की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं? 
2. कांग्रेस के संगठन खेमे ने सिर्फ जोगी और मंतूराम पवार की सीडी ही क्यों चलाई?

शनिवार, 16 जनवरी 2016

दो पाटन के बीच

 

तरकश17 जनवरी
 संजय दीक्षित
कांग्रेस की अंदरुनी लड़ाई ने पार्टी नेताओं के सामने धर्मसंकट की स्थिति खड़ी कर दी है। आखिर, वे किस नाव की सवारी करें। जोगीजी की या भूपेश बघेल की। दोनों नाव को साधे रखने के चक्कर में गड़बड़ भी हो रहा है। आपने देखा ही, दो दिन जोगी जी के साथ रहने के बाद भूपेश बघेल की नाव की सवारी करने पीसीसी दफ्तर गए कवासी लकमा कैसे फंस गए। साजा वाले महराज, रविंद्र चैबेजी के समक्ष तो और विकट स्थिति है। एक ओर खाई तो दूसरी ओर…। टेप कांड से पहले उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र जांता में 18 जनवरी को सतनामी समाज का सम्मेलन के लिए जोगीजी का कार्यक्रम ले लिया था। सागौन बंगला से जोगीजी का कार्यक्रम भी रिलीज हो गया है। महराज अगर जोगी के साथ मंच शेयर करते हैं तो उन पर संगठन खेमे की भृकुटी तन जाएगी। और, कार्यक्रम अगर निरस्त करते हैं तो जोगीजी का तीसरा नेत्र खुल जाएगा। साजा में 12 फीसदी सतनामी वोटर हैं। जोगीजी को नाराज करने के वे मतलब आप समझ रहे हैं ना।

वाह जोगीजी!

अंतागढ़़ टेप कांड में अजीत जोगी पर कार्रवाई लगभग टल ही गई है। संगठन खेमे के लोग भी दबी जुबां से इसे स्वीकार करने लगे हैं। बताते हैं, राहुल गांधी ने साफ कह दिया कि एक के खिलाफ एक्शन तो हो ही गया है। एक माने अमित जोगी। राहुल गांधी वैसे भी अब पार्टी के नेताओं को प्यार का पैगाम दे रहे हैं। शुक्रवार को मुंबई में उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस वर्सेज संजय निरुपम के केस में कहा कि पीसीसी कैसे चलती है, मुझे मालूम हो गया है। आपलोग प्यार से रहिये, पार्टी को मजबूत कीजिए……मैंने अपने स्टाफ से कहा है कि शिकवे-शिकायत ले कर दिल्ली आने वाले नेताओं को तिल का लड्डू खिलाएं और उनसे कहें कि वे एक-दूसरे के साथ प्यार से रहे। तिल का लड्डू खाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जय-बीरु कल लौट ही आए हैं। बहरहाल, जोगी ने एक बार फिर साबित किया कि वे ऐसे योद्धा हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी लड़ाई का रुख बदलने का माद्दा रखते हैं। ऐसे समय में, जब रायपुर से लेकर दिल्ली तक जोगी की घेरेबंदी हो गई थी। छत्तीसगढ़ की राजनीति मे दिलचस्पी रखने वाले कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेता भी इसी एपीसोड में अपना पुराना हिसाब चूकता करना चाहते थे। लेकिन, मान गए जोगी को। उन पर कार्रवाई के लिए जय-बीरु दो-दो बार दिल्ली हो आए। जोगी छत्तीसगढ़ से हिले भी नहीं। जिस समय दिल्ली छत्तीसगढ़ की राजनीति का केंद्र बन गया था, जोगी पामगढ़ और अहिरवारा की सभा में दहाड़ रहे थे, छत्तीसगढ़ में मोर ले बड़े कोन नेता हवै। फिरोज सिद्दिी का अपनी आवाज से पलटना और टेप पार्ट-3, ओवर की आखिरी गेंद पर जावेद मियादाद का छक्का हो गया।

टर्निंंग प्वाइंट

टेप कांड एपीसोड में सोनिया गांधी का पीसीसी प्रमुख और नेता प्रतिपक्ष से न मिलना जोगी खेमे के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। दोनों नेताओं ने दो दिन प्रयास किया मगर सोनिया से दस जनपथ से ग्रीन सिग्नल नहीं मिल सका। सियासी प्रेक्षक भी मानते हैं कि भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव को अगर दो मिनट का वक्त भी मिल गया होता….शिकायत तो दूर, सिर्फ दुआ-सलाम हो भी गया होता, तो जोगी खेमे की स्थिति आज कुछ और होती। जोगीजी के साथ आज जो विधायक खड़े हैं, इसमें से शायद आधे भी नहीं टिके रहते। असल में, सोनिया का संगठन नेताओं से नहीं मिलने के बाद जोगी खेमा अपने लोगों में यह मैसेज देने में कामयाब हो गया कि दिल्ली में साब का जादू अभी कायम है। यही वजह है कि दिल्ली में जोगी समर्थकों का जमावड़ा लग गया।

एक और सीडी

कांग्रेस नेताओं की एक और सीडी आने की चर्चा इन दिनों राजधानी में सुनाई पड़ रही है। बताते हैं, टेपकांड पार्ट-4 के बाद कांग्रेस की पालीटिक्स में कयामत आ जाएगी। वैसे, सीएम डा0 रमन सिंह भी संकेत दे चुके हैं कि अभी और सीडी आएंगी। सरकार के खुफिया अफसरों को भी इस सीडी के बारे में जानकारी मिल चुकी है।

प्राइज टाईप कलेक्टर्स

प्राइज टाईप कलेक्टर्स बोले तो सिर्फ प्राइज के लिए काम। सोशल सेक्टर का एक काम पकड़कर आंकड़ों की बाजीगरी करके दिल्ली से पुरस्कार ले आओ। ऐसे कलेक्टरों से अपनी सरकार बेहद नाराज है। सीएम डा0 रमन सिंह ने ऐसे कलेक्टरों को ताकीद की है कि कलेक्टर्स पुरस्कार की बजाए एडमिनिस्ट्रेशन पर फोकस करें। असल में, सरकार के पास रिपार्ट आई है कि 27 में से सात कलेक्टर भी एडमिनिस्ट्रेशन पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वैसे भी, बस्तर के सात जिलों में एडमिनिस्ट्रेशन करने के कोई गुंजाइश है नहीं। बचे 20। इनमें से सरगुजा संभाग का भी वहीं हाल है। एडमिनिस्ट्रेशन की कमजोरी के चलते सरकार की अच्छी योजनाएं भी लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है।

राठौर होंगे सरगुजा आईजी?

26 जनवरी के बाद सरगुजा के नए आईजी का आर्डर निकल जाएगा। वहां के आईजी लांग कुमेर एडीजी बनने जा रहे हैं। उनकी डीपीसी हो गई है। सिर्फ आदेश निकलना बाकी है। सरगुजा आईजी के लिए दो नाम चर्चा में है। दिपांशु काबरा और हेमकृष्ण राठौर। राठौर की भी डीआईजी से आईजी के लिए डीपीसी हो गई है। राठौर के सरगुजा आईजी बनाए जाने को इसलिए बल मिल रहा है क्योंकि, एक तो आईजी लेवल में अफसरों का टोटा है। लांग कुमेर के प्रमोट होने और आरके भेडि़या के इस महीने रिटायर होने से दो आईजी वैसे भी कम हो जाएंगे। दिपांशु हाई प्रोफाइल के आईपीएस हैं। जाहिर है, उनकी कोशिश होगी मैदानी एरिया में ही मैदान मारा जाए। सरगुजा क्यों जाएं? ऐसे में, राठौर का पलड़ा भारी दिख रहा है। राठौर ट्रांसपोर्ट में भी रह चुके हैं। ट्रांसपोर्ट वालों की उपर में ट्यूनिंग भी बढि़यां होती है।

गले पड़ गईं

आउटसोर्सिंग का विरोध करना लगता है, कांग्रेस पार्टी को भारी पड़ जाएगा। कांग्रेस के विरोध के बाद सरकार ने नर्र्साेंं की भरती निरस्त कर दी है। नौकरी से निकाली गईं नर्संे शुक्रवार को संुबह रायपुर आकर कांग्रेस भवन में जम गईं। हालांकि, कांग्रेसियों ने दूसरे रोज नर्साें के रुकने के लिए पास के धर्मशाला में बंदोबस्त कर दिया। मगर नर्सों का कहना है, कांग्रेस के विरोध के चलते उनकी नौकरी गई है, अब कांग्रेस ही उनके लिए कुछ करें। वरना, वे वापिस नहीं जाएंगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. सूबे के एक ताकतवर शख्सियत के सचिवालय के किस नौकरशाह को इन दिनों बाजीराव कहा जा रहा है?
2. सिकरेट्री निधि छिब्बर को आखिर दिल्ली जाने की इजाजत क्यों नहीं मिल पा रही है?