सोमवार, 26 मार्च 2018

निर्वाचन की तलवार

25 मार्च
मन कैबिनेट ने 23 मार्च को एक अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पद क्रियेट कर दिया। राज्य निर्वाचन कार्यालय में दो आईएएस पोस्ट हैं। एक सीईओ सुब्रत साहू और दूसरा ज्वाइंट सीईओ समीर विश्नोई। एडिशनल सीईओ का पोस्ट करने का मतलब है किसी सीनियर आईएएस को वहां डंप किया जाएगा। हालांकि, चुनाव के नजदीक आने पर एक एडिशनल सीईओ को पोस्ट किया जाता है। लेकिन, निर्वाचन में भला कौन जाना चाहेगा। बहरहाल, 2000 से 2006 बैच के बीच के किन्हीं तीन अफसरों के नामों का पेनल बनाकर राज्य सरकार अब चुनाव आयोग को भेजेगी। इनमें ज्यादा खतरा 2004 और 06 बैच को है। क्योंकि, 2002, 03 और 05 बैच के आईएएस न केवल मजबूती से क्रीज पर जमे हैं बल्कि सरकार से केमेस्ट्री भी उनकी बढ़ियां है।

नया हेल्थ सिकरेट्री

राज्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहू को चुनाव आयोग ने अब हेल्थ डिपार्टमेंट में काम करने की छूट देने से इंकार कर दिया है। सरकार के आग्रह पर चुनाव आयोग जुलाई से लेकर अब तक तीन बार सुब्रत को एक्सटेंशन दे चुका है। आखिरी बार उन्हें फरवरी में दो महीने की मोहलत मिली थी, जिसका टाईम 31 मार्च को समाप्त हो जाएगा। जाहिर है, 31 के बाद सुब्रत को हेल्थ से हटना पड़ेगा। और, उनकी जगह पर सरकार को नए सचिव की पोस्टिंग करनी होगी। हालांकि, सरकार के लिए यह मशक्कत भरा काम होगा। क्योंकि, अफसर हैं नहीं। स्पेशल सिकरेट्री रैंक के ठीक-ठाक अफसरों को सरकार ने किसी-न-किसी विभाग में बिठा दिया है। बच रही हैं सिर्फ रेणु पिल्ले और मनिंदर कौर द्विवेदी। रेणु फिलहाल रेवन्यू बोर्ड में मेम्बर हैं और मनिंदर डेपुटेशन के बाद छुट्टी पर हैं। मनिंदर भी अगले महीने के अंत तक लौट सकती हैं। अब, देखना है सरकार किसे हेल्थ की कमान सौंपती है।

कलेक्टरों की धड़कन

लोक सुराज जैसे-जैसे समापन की ओर बढ़ रहा है, कलेक्टरों की दिल की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। जाहिर है, 31 मार्च के बाद कभी भी कलेक्टरों की बहुप्रतीक्षित लिस्ट निकल जाएगी। इसमें सात से आठ से दस कलेक्टर बदलेंगे। सरकार भी इस बार चुप्पी साधी हुई है। किसी को कोई संकेत नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि राजधानी और न्यायधानी को छोड़कर सारे कलेक्टरों की नींद उड़ी हुई है….सरकार कहां पटकती है या फिर किस जिले में भेजेगी।

पुलिस पर शनि

पुलिस के ग्रह-नक्षत्र कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। आलम यह है कि अपराधों को रोकथाम करने वाली पुलिस अपराधिक गतिविधियों में लिप्त होकर खुद ही खबर बन जा रही है। कहीं रेप में कोई पुलिस वाला पकड़ा गया तो कहीं आपस में ही एक-दूसरे से भिड़ गए। दंतेवाड़ा में एक आईपीएस ने दो उप निरीक्षकों की धुनाई कर दी तो रायपुर और राजनांदगांव में एसआई ने हवलदार की पिटाई कर दी। एसटीएफ का एक जवान राजस्थानी महिला से रेप में फंस गया। हफ्ते के आखिरी दिन बिलासपुर के सिरगिट्टी थाने में आग लग गई। डीजीपी को बनारस के किसी पंडित को बुलाकर शनि की शांति के लिए पूजा-पाठ कराना चाहिए।

वन विभाग का ढाबा

शीर्षक आपको चौकाएंगी….वन विभाग का भला ढाबा कैसे हो सकता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ के वन विभाग में कुछ भी हो सकता है। ढाबा भी। ढाबा भी कोई ऐसी-वैसी जगह पर नहीं। धरमपुर से गुजरने वाले एयरपोर्ट रोड पर। दरअसल, स्टेशन रोड के गेस्ट हाउस पर मानवाधिकार आयोग का कब्जा होने के बाद वन विभाग ने जीई रोड से लगे धरमपुरा में लग्जरी गेस्ट हाउस बनवाया है। नेता, अफसर, मीडिया जैसे फोकटिया प्रजाति से बचने अफसरों ने दिमाग लगाया, क्यों न किसी प्रायवेट पार्टी को रेस्टोरेंट का जिम्मा दे दिया जाए। बात जमी और फायनल हो गया। वन विभाग के एक अफसर को पंजाबी ढाबा का खाना बेहद पसंद है। सो, उन्होंने अपनी चलाकर उसे गेस्ट हाउस का काम दिला दिया। लेकिन, इस भूल का अहसास तब हुआ, जब हाल ही में वन विभाग के एक बड़े अफसर के कुछ रिश्तेदार गेस्ट हाउस में रुके। रात में रिश्तेदारों को अपने घर खाना खिलाकर जब वे उन्हें छोड़ने गेस्ट हाउस पहुंचे तो लड़खडाते हुए एक आदमी उनकी गाड़ी के गेट के पास आकर पूछ दिया, तुम कौन? अब अफसर के गुस्से का ठिकाना नहीं। खैर, ये तो होना ही था। सरकारी गेस्ट हाउस में सार्वजनिक ढाबा खुलेगा तो उसमें बाहरी लोग आएंगे ही। फिर, गेट पर अल्कोहल की जांच करने वाली मशीन तो लगी नहीं है।

संग्राम शिविर

सरकार का समाधान शिविर जैसे-जैसे अंतिम दिन की ओर बढ़ रहा है, वह संग्राम शिविर के रूप में बदलते जा रहा है। बिल्हा में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक का वहां के विधायक सियाराम कौशिक से विवाद हो गया तो दुर्ग के अहिरवारा में मंच पर कुर्सी को लेकर विधायक और पूर्व विधायक आपस में ही भिड़ गए। चुनाव के छह महीने पहिले ही राजनीतिक पार्टियों में इस कदर संग्राम छिड़ गया है तो फिर चुनाव आते-आते क्या होगा, समझा जा सकता है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. अप्रैल के फर्स्ट वीक में कलेक्टरों के होने वाले ट्रांसफर में सरकार कितने जिलों के कलेक्टरों को रायपुर में डंप करेगी?
2. राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस जोगी कांग्रेस से गच्चा खाई है या फिर अमित जोगी की धमकी की परवाह न कर कांग्रेस ने दो विधायकों को पार्टी से बाहर करने का मार्ग प्रशस्त होने दिया?

शनिवार, 24 मार्च 2018

डीएम के सारथी!

18 मार्च
सुकमा के धुर नक्सल प्रभावित इलाके में सीएम ने बाइक से सड़क निर्माण का जायजा लिया तो एक बाइक की स्टेयरिंग अमन सिंह ने संभाली और उनके पीछे बैठे डीजी नक्सल डीएम अवस्थी। यह दूसरा मौका था जब डीएम के सारथी बनें अमन। पिछले साल भी डीएम को पीछे बिठाकर अमन ने मोटरसायकिल चलाई थी। इसके बाद भी डीएम की मन की बातें पूरी नहीं हो रही तो सवाल तो उठेंगे ही….अमन जैसे सारथी के बाद भी डीएम के डीजी पदनाम के आगे से आखिर नक्सल हट कर पी क्यों नहीं जुड़ पा रहा है। या तो डीएम को सारथी को साधने नहीं आ रहा या फिर सारथी सधने को तैयार नहीं है।


रणनीतिक चूक



धरमलाल कौशिक राज्यसभा में जाते-जाते चूक गए। सरोज पाण्डेय बीजेपी की कंडिडेट नामित हो गई। बताते हैं, कंडिडेट के सलेक्शन में बड़ा गेम हो गया….यहां के लीडर उसमें मात खा गए। राज्य सभा से अजा के भूषणलाल जांगड़े रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह पर अगर किसी अजा नेता को ही राज्यसभा में भेजने पर बीजेपी नेता स्टैंड रहते तो यह नौबत नहीं आती। आखिर, पिछले चुनाव में अजा की 10 में से नौ सीटें बीजेपी की झोली में गई थी। कांग्रेस ने भी इसी वर्ग के पीएल पुनिया को प्रभारी बनाया है। जाहिर है, ऐसे में आलाकमान या गेम चेंजर नेता अनुसूचित जाति को नजरअंदाज नहीं कर पाते। लेकिन, अजा से बाहर आकर धरमलाल का नाम आगे बढ़ाने से उपर वालों को सामान्य वर्ग के कंडिडेट को आगे करने का मौका मिल गया। विशुद्ध तौर पर इसे रणनीतिक चूक कही जाएगी।


यह भी संयोग



राज्यसभा में बीजेपी में जिन दो नामों की चर्चा शुरू से रही, वे दोनों चुनाव हारे हुए थे। धरमलाल कौशिक बिल्हा विधानसभा से तो सरोज पाण्डेय दुर्ग संसदीय सीट से। सरोज के खिलाफ कांग्रेस ने जिस लेखराम साहू को उतारा, वो भी हारे हुए हैं। लेखराम पिछला चुनाव अजय चंद्राकर से हारे थे।


कांग्रेस का दांव



लगता है, पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने अपने सलाहकार बदल लिए हैं। बीजेपी ने धरमलाल को किनारे कर सरोज पाण्डेय का नाम राज्यसभा सीट के लिए आगे किया तो भूपेश ने लेखराम साहू को प्रत्याशी बनाने में देर नहीं लगाई। कांग्रेस को यह मालूम है कि जीतने की कोई संभावना नहीं है। लेकिन, साहू प्रत्याशी उतार कर ओबीसी की सिम्पैथी तो ले ही ली कांग्रेस ने। मैसेज यह भी दिया कि बीजेपी ने धरम को नजरअंदाज कर दिया परन्तु कांग्रेस ने ओबीसी पर भरोसा जताया।


कार्रवाई का अंदेशा



सीएम ने लोक सुराज में पुअर पारफारमेंस की वजह से गरियाबंद कलेक्टर श्रुति सिंह को हटा दिया। वैसे, सुबह जब सीएम के साथ अमन सिंह हेलीकाप्टर पर सवार हुए तो अफसरों को अंदेशा हो गया था, किसी का विकेट गिर सकता है। पिछले बार भी कोरिया और सूरजपुर के लोक सुराज में सीएम के साथ अमन गए थे। और वहां से लौटते ही रायपुर हेलीपैड पर सीएम ने मीडिया के सामने कोरिया और सूरजपुर कलेक्टर की छुट्टी का ऐलान कर दिया था।


नारी सशक्तिकरण



आईएएस में हुए छोटे फेरबदल में महिला नौकरशाहों का दबदबा बढ़ा है। प्रिंसिपल सिकरेट्री रीचा शर्मा को फूड के साथ सामान्य प्रशासन विभाग और एम गीता को महिला बाल विकास के साथ डीजी प्रशासन एकेडमी का चार्ज दिया गया है। इस फेरबदल के बाद सभी महिला ब्यूरोक्रेट्स के पास अब कम-से-कम दो विभाग हो गए हैं। इससे पहिले निहारिका बारिक के पास सिकरेट्री टूरिज्म, कल्चर और ग्रामोद्योग, शहला निगार के पास पीएचई के साथ तकनीकी शिक्षा, रीना बाबा कंगाले सिकरेट्री ट्राईबल, संगीता आर के पास स्पेशल सिकरेट्री लेबर का इंडिपेंडेंट चार्ज के साथ लेबर कमिश्नर। पहले जेंस ब्यूरोक्रेट्स में एक से ज्यादा विभाग को स्टेट्स सिंबल माना जाता था। तब महिला सिकरेट्री थीं भी नहीं। एकमात्र रेणु पिल्ले थीं। उनसे पहिले इंदिरा मिश्रा। लेकिन, पिछले दो-तीन साल में महिला सिकरेट्रीज की संख्या तेजी से बढ़ी हैं। और, पुरूषों की जगह महिलाएं लेने लगी हैं। अगले महीने के अंत तक मनिंदर कौर द्विवेदी भी छुट्टी से लौट आएंगी। सरकार अगर रेणु पिल्ले को बिलासपुर से रायपुर शिफ्थ कर दे तो मंत्रालय में आठ महिला सिकरेट्री हो जाएंगी। याने 40 परसेंट से अधिक.


गेस्ट हाउस का बिल



एक पीसीसीएफ लेवल के आईएफएस की बेटी की पिछले दिनों शादी हुई तो सर्किल के अफसरों ने गेस्ट हाउस का बिल थमा दिया। आईएफएस भी चौंके, मेरे ही बनवाए गेस्ट हाउस में मुझे ही बिल देना पड़ेगा। सर्किल के अफसरों को बुलाकर खूब बुरा-भला कहा। पीए से पूछे, इसका सीआर मत आगे बढ़ाना। पीए बोले, साब। सीआर तो आपने पहले ही वेरी गुड लिख दिया है। अब तो सिर धुनने के अलावा कोई चारा नहीं था।


बोवाज का लास्ट मंथ



राज्य वन अनुसंधान संस्थान के डायरेक्टर आरके बोवाज इस महीने रिटायर हो जाएंगे। बोवाज लंबे समय तक पीसीसीएफ रहे। आरके टम्टा को पीसीसीएफ बनाने के लिए सरकार ने उन्हें हटाकर अनुसंधान संस्थान का डायरेक्टर बना दिया था। बहरहाल, बोवाज के रिटायर होने के बाद सरकार को रिसर्च इंस्टिट्यूट में किसी पीसीसीएफ लेवल के अफसर को पोस्ट करना होगा।


गौरव की वापसी



95 बैच के आईएएस गौरव द्विवेदी की मंत्रालय में वापसी हो गई। पोस्टिंग भी ठीक-ठाक मिली है। सिकरेट्री स्कूल एजुकेशन। इसके साथ वे माध्यमिक शिक्षा मंडल के वे चेयरमैन भी होंगे। डेपुटेशन पर दिल्ली जा रहे विकास शील के पास ये विभाग थे। याने दिल्ली से आए अफसर को दिल्ली जाने वाले अफसर का विभाग मिल गया।


अंत में दो सवाल आपसे



1. सरगुजा जिला पंचायत के सीईओ अनुराग पाण्डेय किस लॉबी के शिकार हो गए?
2. क्या छत्तीसगढ़ का अगला हेल्थ सिकरेट्री कोई महिला हो सकती है?


वो सात कलेक्टर!


11 मार्च

पिछले साल 23 अक्टूबर को कलेक्टर्स कांफ्रेंस हुई थी। सरकार ने 27 में से 10 को आउटस्टैंडिंग, 10 को संतोषजनक और सात के काम को पुअर माना था। सरकार के सार्वजनिक ऐलान से लगा था कि सात की किसी भी समय छुट्टी हो जाएगी। लेकिन, छह महीना हो गया। कोई एक्शन नहीं। इस बीच सरकार ने कई कलेक्टरों को विदेश का सैर भी करा दिया। कलेक्टर भी चुपके से घूमकर आ गए। चालाकी से कोई फोटो-वोटो भी नहीं डाला सोशल मीडिया में। बहरहाल, सवाल यह है कि पुअर पारफारमेंस मानने के बाद भी कलेक्टरों पर कार्रवाई नहीं होगी, तो फिर कलेक्टर कांफ्रेंस को कलेक्टर्स गंभीरता से कैसे लेंगे। 

ट्वीट पर फसाद


राज्य के मुखिया का काम लोगों में प्रेम और सौहार्द्र स्थापित करना है। लेकिन, अपने मुख्यमंत्री के एक ट्वीट ने कई घरों में फसाद खड़ा कर दिया। महिला दिवस के एक रोज पहले डाक्टर साब ने अपनी पत्नी की फोटो शेयर करते हुए सपोर्ट के लिए उन्हें शुक्रिया किया। उस ट्वीट के बाद तो कई घरों में महाभारत छिड़ गई। पत्नियां कहने लगी, सीएम साब को देखो और एक आप हो! रायपुर में एक मंत्री की पत्नी ने यहां तक कह दिया, हमारे साथ फोटो खिंचाने से बचते हो....शपथ लेने के बाद हमारे तरफ देखे भी नहीं, और सीएम साब को देखो, उन्होंने मंच पर ही मैडम को गले लगा लिया था। झगड़े को खतम करने के लिए मंत्रीजी ने फिर महिला दिवस के दिन सोशल मीडिया में पत्नी संग फोटो शेयर किया। यही नहीं, एक एसीएस और दो प्रिंसिपल सिकरेट्री के घर जंग छिड़ गई। मंत्रालय से घर पहुंचते ही पत्नियों ने तंज कसा....सीएम साब का ट्वीट देखे हो....क्यों देखोगे? आज तक कभी मुझे क्रेडिट दिए हो....तुम जान लो, जो हो मेरी वजह से। शादी के बाद ही तुम इतना आगे बढ़े। मेरी पुण्याई से तुमको बडे़-बड़े विभाग मिल जा रहे हैं। वरना, तुम कहीं ऐसे-वैसे विभाग में पड़े होते। ये तो एक बानगी है...ऐसे प्रसंग अनेक घरों में सुनने को मिले।  


बड़ा नुकसान


कलेक्टरों का ट्रांसफर फिर टल गया है। अब लोक सुराज के बाद बदले जाएंगे कलेक्टर। पहले इसे सीएम के फॉरेन से लौटने के बाद किया जाना था। फिर, बजट सत्र के बाद। अब अप्रैल चला गया है। बार-बार ट्रांसफर का टलना राज्य के हित में नहीं। जिन कलेक्टरों का हटना तय है या फिर तलवार लटकी है, समझ सकते हैं उनका काम में कितना मन लगेगा। कलेक्टर भी मान चुके हैंं, अब जाना तय है तो ऐसे काम हाथ में क्यों लें, जिसे वे महीने-डेढ़ महीने में पूरा ही नहीं कर सकते। जाहिर है, ऐसे में राज्य का नुकसान होगा। जिन कलेक्टरों की बदलने की चर्चा है, उनमें दंतेवाड़ा, बीजापुर, जगदलपुर, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद, जांजगीर, बलरामपुर और जशपुर शामिल प्रमुख हैं।

सिंगल आर्डर


गरियाबंद कलेक्टर श्रुति सिंह डेपुटेशन पर यूपी जा रही हैं। उनका प्रॉसिजर भी पूरा हो गया है। लेकिन, कलेक्टरों के ट्रांसफर के लिए उनका रुका था। अब जबकि, ट्रांसफर टल गया है तो उनका सिंगल आर्डर निकल सकता है। श्रुति डायरेक्ट आईएएस हैं। खबर है, उनके जाने के बाद गरियाबंद में किसी प्रमोटी आईएएस को कलेक्टर बनाकर भेजा जाएगा।  

किस्मत का यू टर्न


रिटायर एडिशनल चीफ सिकरेट्री एनके असवाल को सरकार ने आखिरकार रेरा का मेम्बर अपाइंट कर दिया। उनके साथ रिटायर पीसीसीएफ आरके टम्टा की भी रेरा में ताजपोशी की गई है। पिछले साल मई में रिटायर होने वाले असवाल हालांकि, रेरा चेयरमैन के लिए ट्राई कर रहे थे। तब रेरा में कंपीटिशन टफ नहीं हुआ था। सरकार ने ढांड का नाम सूचना आयोग के लिए तय कर दिया था और राउत का छह महीने बाकी था। रेरा चेयरमैन के लिए तब रिटायर आईएएस डीएस मिश्रा और आईएफएस बीके सिनहा की चर्चा थी। इसलिए, असवाल ने देवेंद्र नगर के बंगले को चार महीने के लिए एक्सटेंशन करा लिया था। लेकिन, बाद में ढांड के सूचना आयोग को छोड़ रेरा चेयरमैन की दौड़ में शामिल हो जाने के बाद असवाल ने रेरा में पोस्टिंग की उम्मीद छोड़ दी। साथ ही मकान भी। बोरिया-बिस्तर समेट कर वे अपने गृह नगर जयपुर लौट गए थे। लेकिन, असवाल की किस्मत ने यू टर्न ली....चेयरमैन न सही प्रदेश के सबसे वजनदार बोर्ड के वे मेम्बर तो बन ही गए।

छोटी सर्जरी


प्रिंसिपल सिकरेट्री विकास शील डेपुटेशन पर भारत सरकार में जा रहे हैं। वहां उन्हें ज्वाइंट सिकरेट्री हेल्थ बनाया गया है। अगले हफ्ते वे किसी भी दिन वे यहां से रिलीव हो जाएंगे। उन्हें कार्यमुक्त किए जाने के साथ ही स्कूल एजुकेशन में किसी को पोस्ट किया जाएगा। जाहिर है, मंत्रालय में एक छोटी सी सर्जरी होगी। स्कूल एजुकेशन के साथ ही हो सकता है, एक-दो विभागों में और बदलाव हो जाए। क्योंकि, केडीपी राव का वनवास लंबा हो गया है। गौरव द्विवेदी को भी दिल्ली से आने के बाद सरकार ने शंट किया हुआ है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के बाद हो सकें सरकार रेणु पिल्ले को बिलासपुर रेवन्यू बोर्ड से वापिस लाए। वैसे, सरकार के सामने दिक्कत यह है कि स्कूल एजुकेशन में वह न्यू मॉडल को भी इमप्लीमेंट नहीं कर सकती। क्योंकि, इंडिविजूअल विभाग को संभालने वाले जूनियर अफसर अब सरकार के पास बचे नहीं हैं। सब कहीं-न-कहीं फिट हो चुके हैं। 

सरकारी शराब का दोष


होली में एक विधायक और टीआई भिड़ गए। लोग भी चौंके....विधायकजी तो ऐसे थे नहीं, बड़े मिलनसार हैं...टीआई का भी ऐसा ट्रेक रिकार्ड रहा नहीं। बाद में, पता चला दोष दोनों का नहीं था। पहले लोकल शराब ठेकेदार छत्तीसगढ़ के लोगों की सेहत का बड़ा ध्यान रखते थे। अल्कोहल की मात्रा कम करने के लिए बॉटलिंग करते समय 30 से 40 फीसदी पानी मिलाते थे। सरकारी दुकानों को इससे क्या मतलब। बाहर से आता है, और यहां उसे बेच देते हैं। तभी तो लोग बोल रहे हैं, आजकल बड़ा हार्ड हो गया है....थोड़े से में ही चढ़ जा रहा है। इसलिए, विधायक और टीआई एपीसोड को मीडिया को अब ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए। साल में एक बार होली आती है। फिर भी, अगर ठीकरा फोड़ना है, तो उसके लिए मंत्री अमर अग्रवाल उपयुक्त हैं। उन्होंने ही प्रायवेट ठेका बंद कराया। 


अंत में दो सवाल आपसे


1. गौरव द्विवेदी अगर प्रशासन अकादमी से हटे तो उनकी जगह पर किस आईएएस को वनवास के रुप में वहां भेजा जाएगा?
2. एनके असवाल और आरके टम्टा को रेरा का मेम्बर बनाने में किस रिटायर नौकरशाह की चली है?


सरकार की शार्ट मेमोरी या....

11 फरवरी

राज्य सरकार ने एक आईपीएस को एसपी बनाया और महीने भर में बदल दिया। आमतौर पर ब्यूरोक्रेसी में ऐसे उदाहरण कम मिलते हैं, जब महीने भर में किसी एसपी का विकेट उड़ गया हो। लेकिन, जब नक्सली वारदात बढ़ने लगी तो सरकार को लगा, गड़बड़ हो गया। फिर, एसपी को चेंज कर दिया गया। हालांकि, इस अफसर से सरकार को पहले भी झटका मिल चुका है। बात 2008 चुनाव के समय का है। उस दौरान वे रायपुर में एडिशनल एसपी ट्रैफिक थे। किसी बड़े बंगले से उनके पास कोई गाड़ी छोड़ने के लिए फोन आया। मगर इस अफसर ने अचार संहिता का हवाला देते हुए गाड़ी छोड़ने से मना कर दिया। तब लग रहा था कि सरकार गई और कांग्रेस की ताजपोशी होने ही वाली है। कुछ अफसर इसलिए अति उत्साहित हो गए थे। लेकिन, रिजल्ट आया तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। सरकार के शपथ लेने के बाद ट्रांसफर का पहला आर्डर इसी अफसर का हुआ था। लेकिन, सरकार का बड़ा दिल कहें या शार्ट मेमोरी, आईपीएस को एसपी बना दिया। 

एक और एसीएस


88 बैच के आईएएस केडीपी राव जल्द ही एडिशनल चीफ सिकरेट्री बन जाएंगे। वैसे, उनका प्रमोशन जनवरी से ड्यू है। लेकिन, पोस्ट खाली न होने के कारण उनका नम्बर नहीं लगा। विवेक ढांड के रिटायर होने के बाद अब एसीएस का एक पोस्ट खाली है। विधानसभा सत्र के बाद उनकी डीपीसी हो सकती है। राव फिलहाल, राजस्व बोर्ड के चेयरमैन हैं। राज्य में अभी चीफ सिकरेट्री को छोड़कर एसीएस रैंक के चार आईएएस हैं। सुनील कुजूर, सीके खेतान, आरपी मंडल और बीवी सुब्रमण्यिम। राव पांचवें एसीएस होंगे। उनका रिटायरमेंट भी नजदीक है। अगले साल ही। हालांकि, एन बैजेंद्र कुमार एनएमडीसी नहीं गए होते तो राव का एसीएस बनना आसान नहीं होता। क्योंकि, फिलहाल एसीएस लेवल पर कोई रिटायरमेंट नहीं है। चीफ सिकरेट्री अजय सिंह भी 2020 में रिटायर होंगे।


विकास को हेल्थ


सिकरेट्री स्कूल एजुकेशन विकास शील को भारत सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट में पोस्टिंग मिलना लगभग तय माना जा रहा है। इसके लिए उनकी फाइल भी बढ़ गई है। संकेत हैं, मार्च के फर्स्ट वीक या उसके आसपास उनका आर्डर निकल जाएगा। विकास शील यहां स्वास्थ्य विभाग संभाल चुके हैं। दिल्ली में ज्वाइंट सिकरेट्री हेल्थ का एक पोस्ट खाली था। लिहाजा, उन्होंने इसके लिए प्रयास किया। बताते हैं, पोस्ट भर न जाए, राज्य सरकार ने इसी बेस पर उन्हें डेपुटेशन के लिए एनओसी देने में देर नहीं लगाई। विकास के जाने के बाद सवाल यह है कि स्कूल शिक्षा का नया सिकरेट्री कौन होगा। नाम सिर्फ एक ही आ रहा है। गौरव द्विवेदी। अब देखना है, सरकार क्या निर्णय लेती है। 

सुब्रत को राहत


भारत निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़़ के चीफ इलेक्शन आफिसर सुब्रत साहू को हेल्थ सिकरेट्री के तौर पर मार्च तक काम करने की अनुमति दे दी है। आयोग ने तीसरी बार एक्सटेंशन दिया है। इससे पहिले 31 जनवरी को उनका टाईम खतम हो गया था। सरकार ने इसके बाद चुनाव आयोग को लेटर भेजा था। लेट से ही सही आयोग ने सुब्रत को राहत देने वाला फैसला दे दिया। सुब्रत को अब आगे भी दिक्कत नहीं होने वाली। मध्यप्रदेश कैडर के ओपी रावत अब चीफ इलेक्शन कमिश्नर बन गए हैं। लिहाजा, वे मार्च में फिर तीन महीने के लिए उनका एक्सटेंशन हो जाए, तो आश्चर्य नहीं। कुल मिलाकर सुब्रत किस्मती निकले। वरना, जीएडी ने उन्हें निर्वाचन में डंप करने का इंतजाम कर दिया था। अगर निर्वाचन आयोग ने उन पर नजरे इनायत नहीं की होती तो आप समझ सकते हैं, चुनाव आफिस में बैठकर अभी वे क्या करते।

दंतेवाड़ा की यूएसपी


एक समय था, जब दंतेवाड़ा की पोस्टिंग से अफसर घबराते थे। कोई वहां जाना नहीं चाहता था। था भी कुछ ऐसा ही। सरकार जिस अफसर से नाराज होती थी या जिसे किसी काम के लायक नहीं समझती, उसे वहां भेज दिया जाता था। लेकिन, ओपी चौधरी ने दंतेवाड़ा की ऐसी यूएसपी बढ़ाई कि वहां का कलेक्टर बनने के लिए नए आईएएस में होड़ मची हुई है। 2016 में जब सौरभ कुमार को वहां का कलेक्टर बनाया गया, तब भी यही स्थिति थी। बहुत कम लोगों को मालूम है कि दंतेवाड़ा का कलेक्टर बनने के लिए उन्हें एक महिला आईएएस के साथ तगड़ा संघर्ष करना पड़ा था। चूकि, सौरभ का जैक बहुत पावरफुल था, इसलिए उनकी पोस्टिंग हो गई थी। सौरभ का अब वहां से हटने का टाईम हो गया है। इसलिए, फिर कश्मकश शुरू हो गया है। अब, दंतेवाड़ा की पोस्टिंग का मतलब हम आपको बता देते हैं....वहां काम करने का स्कोप है तो कमाने का भी। ढाई सौ करोड़ का तो माईनिंग फंड है। ये सीधे कलेक्टर के हाथ में होता है। इस पैसे से अगर वह चाहे तो काम करके नाम कमा लें या फिर कमा कर खुद को मजबूत कर ले।

एससी को ही मौका?


विधानसभा का बजट सत्र समाप्त हो जाने के बाद सूबे में राज्य सभा चुनाव की सरगर्मियां चालू हो जाएगी। हालांकि, इसमें कांग्रेस के लिए कोई स्कोप नहीं है। बीजेपी के भूषणलाल जांगड़े रिटायर हो रहे हैं। जाहिर है, उनकी जगह पर बीजेपी का ही कोई चेहरा चुनकर दिल्ली जाएगा। वैसे, इस एक सीट के लिए बीजेपी के भीतर कई नाम लिए जा रहे हैं। लेकिन, चुनावी साल में सरकार के सामने मजबूरी यह होगी कि जांगड़े के बाद किसी अजा नेता को ही इसके लिए नामित करें। वरना, संदेश अच्छे नहीं जाएंगे। विरोधी पार्टियों को भी बोलने का मौका मिल जाएगा। ये अवश्य है, सत्ताधारी पार्टी इस वर्ग के किसी एक्टिव लीडर को राज्य सभा में भेजना चाहेगी। क्योंकि, जांगडे से पार्टी को कोई लाभ नहीं मिला।


अंत में दो सवाल आपसे


1. अजीत जोगी वास्तव में किस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?
2. सीएम के साथ अब सिकरेट्री लेवल से नीचे के अफसर विदेश नहीं जाएंगे, ऐसा क्यों?


शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

सरकार कुछ कीजिए!

 18 फरवरी
स्टेट पीएससी में कितने फाइट के बाद डीएसपी में सलेक्शन होता है। फिर, दो साल की कठिन ट्रेनिंग। उसके बाद भी पोस्टिंग के लिए रिरियाना पड़े तो फिर इससे बड़ा दुर्भाग्य नहीं हो सकता। 2016 में डीएसपी बनें अफसरों के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। ट्रेनिंग खतम होने के तुरंत बाद पुलिस मुख्यालय ने पोस्टिंग का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेज दिया था। लेकिन, महीने भर में भी आदेश नहीं निकल पाया। अफसरों को उम्मीद थी कि विधानसभा सत्र के दौरान मंत्री से लेकर अफसर तक राजधानी में रहेंगे, तो आर्डर निकल ही जाएगा। लेकिन, सत्र के 13 दिन गुजर जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। ऐसे में, सरकार को युवा अफसरों के लिए कुछ करना चाहिए।

मंत्रियों की फीस


चुनावी साल में मंत्रियों की फीस बेतहाशा बढ़ गई है। बढ़ी फीस के अनुसार पेमेंट नहीं हुआ, तो आपकी फाइल नहीं सरकेगी। वैसे, पोस्टिंग के लिए फीस लेना कई मंत्री गॉड गिफ्टेड अधिकार समझते हैं....भगवान ने उन्हें मंत्री जो बनाया है। लेकिन हद तो यह है कि अधिकांश मंत्रियों के बंगले में जेनविन फाइलें भी रोकी जाने लगी है। मंत्रियों के पीए की बे-शरमी के साथ एक ही वर्डिंग रहती है....चुनाव है साब, कुछ करना पड़ेगा। कुछ पीए तो ज्यादा आगे बढ़कर बैटिंग शुरू कर दिए हैं। उन्हें पता है, शंकर भगवान पर चढ़ावा आएगा तो लोग नंदी को थोड़े ही भूल जाएंगे। 

अब रोहित का नम्बर


सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव विकास शील को दिल्ली डेपुटेशन पर जाने की मंजूरी दे दी है। विधानसभा सत्र के बाद वे दिल्ली के लिए कूच कर जाएंगे। विकास की पत्नी निधि छिब्बर पिछले साल डेपुटेशन पर दिल्ली गई थी। तभी से माना जा रहा था कि देर-सबेर विकास भी दिल्ली का रुख करेंगे। विकास के बाद पता चला है सिकरेट्री अरबन एडमिनिस्ट्रेशन रोहित यादव भी दिल्ली जाने वाले क्यूं में हैं। रोहित की पत्नी भी दिल्ली में हैं। सो, अप्रैल, मई तक रोहित की भी दिल्ली की रवानगी हो जाए, तो अचरज नहीं।

नकल भी अकल से


एक रिजर्व केटेगरी के मंत्री ने अपने साथी मंत्रियों की देखादेखी राजधानी के कचना में डेढ़ एकड़ बेशकीमती लैंड खरीद लिया। लेकिन, रास्ता को लेकर वे फंस गए हैं। दलाल ने उन्हें उनकी जमीन से कचना मेन रोड का जो रास्ता बताया था, उस पर बेजा कब्जा है। तरुण चटर्जी के जमाने से वहां लोग रह रहे हैं। मंत्रीजी यदि उन्हें हटवाए तो चुनाव के समय अलग बखेड़ा खड़ा हो जाएगा। अब मंत्रीजी पछता रहे हैं। जमीन खरीदने के लिए नाहक कंपनी बनाई....पत्नी को डायरेक्टर बनवाया। सब बेकार हो गया। ठीक ही कहते हैं, नकल भी अकल से करनी चाहिए।

कलेक्टरों के विकेट


अमन सिंह के यूएस से लौटने के बाद कलेक्टरों के ट्रांसफर की चर्चाएं फिर तेज हो गई है। वैसे, ट्रांसफर में इस बार कई फैक्टर काम करेंगे, इसलिए लिस्ट चौंकाने वाली निकल जाए तो आश्चर्य नहीं। चुनाव कराने का एंगल अहम है ही, प्रमोटी आईएएस को एडजस्ट करना होगा, सौदान सिंह ने राज्य के दौरे के बाद फीडबैक दिए होंगे, सरकार उसका भी ध्यान रखेगी। ऐसे में, कई कलेक्टरों के विकेट गिर जाएंगे। उन कलेक्टरों को भी सरकार बदल देगी, जिन्हें पिछले साल मई में ही पोस्ट किया गया। दुर्ग कलेक्टर आउटस्टैंडिंग काम कर रहे हैं.... मगर चुनावी राजनीति और चुनावी साल में ऐसे अफसरों के साथ दिक्कत जाती है। हालांकि, सरकार के पास अफसरों का टोटा भी है। सवाल है, नए कलेक्टर के लिए अफसर लाएगी कहां से। रिजर्व केटेगरी में ही पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में हो सकता है, 2011 बैच के रेगुलर रिक्रूट्ड को ड्रॉप करते हुए पिछले साल आईएएस अवार्ड हुए कुछ अफसरों को सरकार कलेक्टर बना दें। इस बैच में जीतेंद्र शुक्ला, तारण सिनहा, सुधाकर खलको, संजय अग्रवाल आदि हैं। इनमें से भी कुछ का नम्बर लग सकता है।

आठ करोड़ का तालाब


आठ करोड़ में केनाल या डेम बने तो बात समझ में आती है। लेकिन, आठ करोड़ी तालाब.....किसी को हजम नहीं हो रहा है। नया तालाब भी नहीं। पुराने तालाब के एक्सटेंशन में जंगल विभाग ने आठ करोड़ रुपया फूंक दिया। वह भी बिना टेंडर के। कांग्रेस विधायक धनेंद्र साहू ने इसे विधानसभा में उठाया, तो सबको सांप सूंघ गया। 15 फरवरी की शाम वन मंत्री के यहां ब्रीफिंग में यह सवाल आया तो सन्नाटा छा गया। कोई जवाब नहीं सूझ रहा था। प्रकरण की गंभीरता को समझकर मंत्रीजी ने यह कहते हुए हाथ खड़ा कर दिया....भाई कुछ भी हो, आपलोगों को टेंडर तो करना ही था। इसके बाद मुंह लटकाए अफसर लौट गए। रात में नींद भी नहीं आई....सदन में कहीं हंगामा न मच जाए। लेकिन, पता नहीं कैसे धनेंद्र साहू ने इसे सवाल को तूल न देते हुए बैठ गए। वरना, वन विभाग के अफसर भी मानते हैं...आठ करोड़ में से सीधे चार करोड़ अंदर गया है।

छोटे मियां शुभांल्लाह


बड़े जिलों को पीछे छोड़ते हुए बस्तर का नारायणपुर जिला पीएम अवार्ड के इनोवेशन केटेगरी में दूसरे चरण में पहुंच गया है। नारायणपुर का काम भी हवा-हवाई नहीं। बल्कि विस्मृत करने वाला है। वहां के कलेक्टर टीपी वर्मा ने राज्य के सौर उर्जा योजना का अद्भूत क्रियान्वयन करते हुए अबूझमाड़ के 340 गांवों को विद्युतकृत कर दिया है। यहीं नहीं, नारायणपुर जैसे वनवासी इलाके के 80 फीसदी गांव अब बिजली से जगमगा रहे हैं। इसी तरह, रायपुर से लगा धमतरी पुलिस ने पेंडिंग अपराधों को समाप्त कर लोगों का ध्यान खींचा है। रजनेश सिंह ने दो महीने पहिले जब एसपी के रूप में ज्वाईन किए थे तो पेंडिंग केसेज 34 फीसदी थे। पिछले दिनों डीजीपी ने जब एसपी के वीडियोकांफें्रेसिंग किए तो धमतरी का क्राइम डेटा देखकर वे भी चकित थे। रजनेश ने धमतरी में एक ऐसे मर्डर मिस्ट्री का भंडाफोड़ किया, जिसमें सात हत्याओं का खुलासा हुआ। वर्मा राप्रसे से आईएएस बनें हैं और उनका यह पहला जिला है। और, रजनेश एकाध महीने में आपईपीएस बनने वाले हैं।

कैट की शरण में


डीआईजी केसी अग्रवाल को कैट से बड़ी राहत मिलने के बाद एएम जुरी और राजकुमार देवांगन भी कैट की शरण में पहुंच गए हैं। दोनों ने भारत सरकार द्वारा अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी है। जुरी और देवांगन ने अपनी याचिका में कहा है कि बिना उन्हें सुने ही सरकार ने नौकरी से छुट्टी कर दी। देवांगन को पिछले साल जनवरी में और अग्रवाल और जुरी को भारत सरकार ने सितंबर में फोर्सली रिटायर कर दिया था।


अंत में दो सवाल आपसे


1. क्या आईएएस गौरव द्विवेदी की विधानसभा सत्र के बाद प्रशासन अकादमी से मुख्य धारा में वापसी हो जाएगी?
2. जोगी कांग्रेस की सक्रियता को लोग उनकी कांग्रेस वापसी की संभावनाओं से जोड़कर क्यों देख रहे हैं? 
 

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

कलेक्टरी खतरे में

पंजाब सरकार के एक फैसले के बाद डीओपीटी ने प्रमोटी अफसरों की सीनियरिटी लिस्ट में संशोधन किया है। इसमें छत्तीसगढ़ के 14 आईएएस लाभान्वित हुए हैं। सीधे एक साल सीनियर। सबसे ज्यादा 2004 बैच इससे परेशान होगा। इसमें डायरेक्टर समाज कल्याण संजय अलंग से लेकर उमेश अग्रवाल, धनंजय देवांगन, टामन सिंह सोनवानी और छतर सिंह देहरे शामिल हैं। ये सभी 2005 बैच में थे, अब 2004 में आ गए हैं। इसमें अलंग और देहरे को छोड़कर तीनों कलेक्टर हैं। उमेश दुर्ग, धनंजय जगदलपुर और सोनवानी कांकेर में। सरकार ने कलेक्टरी के लिहाज से 2004 बैच को क्लोज कर दिया है। आखिरी लॉट अमित कटारिया, अंबलगन और अलरमेल का था। सरकार ने तीनों को पिछले साल ही वापिस बुला लिया था। हालांकि, ये कोई नियम नहीं है कि किस बैच को कलेक्टर रखना है। पहली पारी में तो सरकार ने सीके खेतान और आरपी मंडल को सिकरेट्री के बाद भी कलेक्टर बनाया था। फिर भी, उमेश, धनंजय और सोनवानी को टेंशन तो रहेगा ही। 

नीरा राडिया

नौकरशाहों की पत्नियां को अलर्ट हो जाना चाहिए। वे व्हाट्सएप, एसएमएस चेक करते रहें। वरना, उन्हें घोखा हो सकता है। दरअसल, एक नीरा राडिया अफसरों के बीच अपनी पैठ गहरी करती जा रही है। मंत्रालय के सीनियर आईएएस से लेकर आईपीएस, आईएफएस तक.....कौन नहीं है उसके गिरफ्त में। एक दर्जन से अधिक अफसर उसके इशारों पर नाच रहे हैं। आलम यह है कि अहम फाइलें भी युवती के कहने पर मूव हो रही हैं। नीरा राडिया के शिकारों के आप नाम सुनेंगे, तो आपको यकीं नहीं होगा....ऐसे अफसर भी लंगोट के इतने ढिले हो सकते हैं....राम-राम।


मुफ्त में प्रचार

छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य का बजट भाषण अगर टॉप टेन में पहले नम्बर पर ट्रेंड करें तो यह आश्चर्य की बात भला कैसे नहीं होगी। रमन सिंह का भाषण डेढ़ घंटे से अधिक समय तक देश में सबसे उपर ट्रेंड किया। और, ट्रेंड इसलिए भी किया कि छत्तीसगढ़़ में इसे फेसबुक पर खूब देखा गया.....आखिर, छत्तीसगढ़ के बाहर के लोग यहां के बजट तो देखे नहीं होंगे। यानी बिना किसी खर्चे के सरकार ने चुनावी बजट को जन-जन तक पहुंचा दिया। ऐसा करके जनसंपर्क संचालक राजेश टोप्पों ने सरकार का फेथ और बढ़ा लिया। दरअसल, फेसबुक लाइव का प्लान उन्होंने ही किया था। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया, जहां बजट भाषण सोशल मीडिया में लाइव हुआ। अभी तक पीएम लेवल पर इस तरह के प्रयोग होते थे। 

जोगी दांव

अजीत जोगी को न केवल अपने को प्रासंगिक रखना आता है बल्कि सियासी दांव-पेंच में भी उनका जवाब नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद जब कांग्रेस ने उन पर सोशल मीडिया के जरिये हल्ला बोला तो जोगी ने एक ही दांव में मैच का रुख ही बदल दिया। जोगी ने ऐलान किया....वो रमन सिंह के खिलाफ राजनांदगांव से चुनाव लड़ेंगे। और, सरकार के साथ उनकी हमजोली का मुद्दा टर्न हो गया। उपर से जोगी की गुगली में फंस गए टीएस सिंहदेव। जीतेंगे रमन सिंह बोलकर सिंहदेव ने बॉलर के हाथ में कैच दे दिया।


जोगी और भूपेश

कांग्रेस अब नेता प्रतिपक्ष़्ा टीएस सिंहदेव को ताकीद करने वाली है...जोगी के खिलाफ या तो बयान मत दीजिए या फिर सोच-समझकर। एक तो सिंहदेव जैसे ही जोगी के खिलाफ मुंह खोलते हैं, अमित जोगी तालाब वगैरह का मुद्दा उठाकर उन्हें बैकफुट पर कर देते हैं। पिछले छह महीने में बाबा ने जब भी जोगी के खिलाफ कुछ बोला है, अमित लंगोट पहनकर दो-दो करने के लिए मैदान में उतर जाते हैं। राजनांदगांव इश्यू में भी अमित ने उल्टे सिंहदेव को रमन का स्टार प्रचारक घोषित कर दिया। आखिरकार, सिंहदेव को बैकअप देने के लिए भूपेश बघेल को आगे आना पड़ा। अब यह स्थापित सत्य हो गया है कि जोगी के बराबर का नेता अगर कांग्रेस में है तो वो हैं भूपेश बघेल। दोनों सभी मामलों में समान हैं। तभी भूपेश टक्कर भी दे रहे हैं। 


कलेक्टरों की लिस्ट

सीएम की व्यस्तता की वजह से कलेक्टरों की लिस्ट लगातार टलती ही जा रही है। ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद सीएम का लगातार दौरा चलता रहा। और, पिछले एक हफ्ते से बजट भाषण की तैयारी में उनका पूरा अमला बिजी था। बजट निबट जाने के बाद अब सीएम से इस पर चर्चा हो सकती है, ऐसा संकेत हैं। तब तक पीएस टू सीएम अमन सिंह भी 14 को रायपुर आ जाएंगे। हालांकि, सरकार को लिस्ट निकालने में देर नहीं करनी चाहिए। इससे नुकसान राज्य का होता है। क्योंकि, जिन कलेक्टरों पर तलवार लटकी है, जिनका जिला बदलना है, व ेअब कितने मन से काम कर रहे होंगे, आप भी समझ सकते हैं।

नम्रता को एमपी कैडर

दंतेवाड़ा की नम्रता जैन यूपीएसी में 99 रैंक लाकर भी आईएएस न बन सकीं अब उनका कैडर भी मन मुताबिक नहीं मिला है। नम्रमा को मध्यप्रदेश कैडर आबंटित हुआ है। हालांकि, एमपी बड़ा राज्य है। राज्य बंटवारे के बाद छत्तीसगढ़ आए अधिकांश आईपीएस एमपी जाने के लिए हाईकोर्ट चले गए थे। फिर भी, होम कैडर का अपना अलग मजा होता है।     
मुझसे क्या भूल हुई
अमित जोगी वक्ता बड़े अच्छे हैं। उनका भाषण और भाषण देने की शैली तो पूछिए मत! लेकिन, स्पीकर से झिड़की खाने में उन्होंने सबको पीछे छोड़ दिया है। बजट सत्र के श्रद्धांजलि भाषण में भी वे अध्यक्ष की टोका-टोकी का शिकार हुए। छोटे जोगी ने ट्विटर पर अपना गम शेयर किया....मैंने कौन सी गलती की....जिसकी ये....। इंतेहा तो तब हो गई, जब 9 फरवरी को सभापति शिवरतन शर्मा ने उनकी बातें विलोपित कर कह नसीहत दे डाली.....हमने आपको सवाल पूछने का मौका दिया था, आप लगे भाषण देने।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस अफसर के सरकारी बंगले में 70 लाख रुपए के इंटीरियर का काम हो रहा है? 
2. मोतीलाल वोरा की चुनाव अभियान समिति में इंट्री कैसे मिली?




सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

सीएस को बैकअप

28 जनवरी
एक्स चीफ सिकरेट्री सुनिल कुमार को सरकार ने सीएम का एडवाइजर अपाइंट किया है। उनके आदेश में कुछ विभागों का जिक्र किया गया है….फलां, फलां काम देखेंगे। लेकिन, समझने वाले समझ गए हैं कि उनकी भूमिका क्या होगी। तभी तो इस खबर से ब्यूरोक्रेट्स सन्न रह गए। वैसे, सुनिल कुमार सिर्फ सलाहकार के तौर पर ही नहीं होंगे। यह काम तो वे अभी भी कर रहे हैं। प्लानिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमैन के साथ ही सरकार अभी भी महत्वपूर्ण मामलों में उनसे सलाह लेती है। सरकार के कहने पर उन्होंने रायपुर में स्टे को हफ्ते से बढ़ाकर 15 दिन कर दिया था। दरअसल, चुनावी बरस में सरकार को नियम-कायदों के गुणी व्यक्ति के साथ ही सिस्टम पर पैनी नजर रखने वाले एक तेज अफसर की दरकार थी। क्योंकि, राज्य में सिस्टम डिरेल्ड हो चुका है। जिलों में अराजकता के हालात हैं। ट्रांसफर्मर लगवाने और लोगों से वसूली करने वाले एई पर कार्रवाई करने के लिए सरकार को रायपुर से सिकरेट्री पावर और एमडी को भेजना पड़ रहा है। ग्राउंड पर दर्जनों योजनाएं चल रही है। इसके बाद भी सरकार को इसका कोई लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। हालत दिनोंदिन प्रतिकूल होती जा रही है। राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह ने भी राज्य के दौरे में इसे महसूस किया। बहरहाल, सुनिल कुमार के लिए प्लस यह होगा कि सौम्य और शालीन चीफ सिकरेट्री अजय सिंह भी उन्हें बेहद सम्मान देते हैं। लिहाजा, ऐसा समझा जा रहा है, इगो के टकराव वाली स्थिति भी पैदा नहीं होगी…..अलबत्ता, सीएस को बैकअप मिलेगा और, सरकार को एक मास्टर स्ट्रोक वाले अफसर।

कड़े फैसले!

पता चला है, सुनिल कुमार को मंत्रालय में बिठाकर भ्रष्टाचार के मामले में सरकार कुछ कड़े फैसले लेना चाहती है। कुमार का ऐसा ओहरा है कि अफसर चू-चाएं नहीं करते। याद होगा, प्रिंसिपल सिकरेट्री केडीपी राव को सरकार ने 2013 में बिलासपुर का कमिश्नर बना दिया था। लेकिन, अफसरों की हिम्मत नहीं पड़ी कि इस मामले में कुछ करें। सबने केडीपी का अंदरुनी मामला बताकर पल्ला झा़ड़ लिया था। अभी तो आलम यह है कि भानुप्रतापपुर एसडीएम को हटाया गया तो आईएएस एसोसियेशन पहुंच गया सीएस और सीएम के पास। सरकार एसोसियेशन के इतना प्रेशर में है कि किसी भ्रष्ट अफसर को वह नोटिस भी नहीं जारी कर सकती….गोलबंद होकर पहुंच जाएंगे सीएम के पास। सुनिल कुमार की विषय पर इतनी पकड़ है और गड़बड़ अफसरों की नस का ज्ञान….कि सरकार इसका लाभ लेना चाहेगी।

दुष्ट आत्माओं का निवारण

पीएमजीएसवाय के सीईओ और आईएफएस राकेश चतुर्वेदी के दुष्टात्मा का निवारण सरकार ने कर दिया है। लंबे समय से वे इससे परेशान थे। सरकार भी उनके लिए कुछ करना चाहती थी कि एक आत्मा रोड़ा बनकर खड़ी हो जाती थी। आखिरकार, सरकार ने सचिवालय के शिव से पूछा….आप ही बताइये, इस ब्राम्हण का उद्धार कैसे किया जाए….बेचारे का कुछ नहीं हुआ, तो पाप लग जाएगा। शिव बोले, ठहरो वत्स! मैं कुछ करता हूं….तुम सरकार हो तो क्या हुआ, कुछ आत्माएं ऐसी होती है किसी को नहीं बख्शती। नंगा से बेचारी गंगा भी परेशां हो गई थी….फिर भी मैं कुछ करता हूं। फिर, एक दिन सचिवालय के अफसरों ने बैठकर आत्मा के निवारण का रास्ता ढूंढ निकाला। शिव ने कहा कि जब तक आत्मा राकेश पर सवार रहेगी, फाइल मैं अपने पास रखूंगा। तंत्रोपचार के बाद आत्मा जैसे ही राकेश के सिर से हटेगी, मैं फाइल बढ़ा दूंगा। और, ऐसा ही हुआ। सीएम 13 को ऑस्ट्रेलिया के लिए उड़े और शिव ने फाइल आगे बढ़ाई। सीएस अजय सिंह ने अगले दिन आर्डर जारी कर दिया। अब सरकार भी राहत की सांस ले रही है और राकेश भी।

दूसरे नारायण

आरा मिल प्रकरण को निबटने के बाद राकेश चतुर्वेदी अब हवाई जहाज के टेकऑप जैसा प्रमोशन पाएंगे। अभी वे सीएफ है। इसी साल एडिशनल पीसीसीएफ के साथ ही पीसीसीएफ बन जाएंगे। प्रकरण के चलते उनका प्रमोशन नहीं हो पा रहा था। जबकि, उनके बैच वाले एडिशनल पीसीसीएफ हो गए हैं। कुछ इसी तरह आईएएस नारायण सिंह का हुआ था। मालिक मकबूजा केस में डीओपीटी ने पांच साल के लिए उनका प्रमोशन रोक दिया था। सजा की अवधि समाप्त होने के बाद नारायण सिंह छह महीने के भीतर सिकरेट्री से प्रिंसिपल सिकरेट्री और फिर एडिशनल सीएस बन गए थे।

मंत्री को ब्रम्हज्ञान

ठीक ही कहते हैं, ज्ञान हासिल करने के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है। अपने एक मंत्रीजी भी इन दिनों विदेश की सैर पर हैं। वहां से वे रोज बौद्धिक ट्विट कर रहे हैं…..राजनीति में शतरंज के नियम लागू होने चाहिए….शतरंज के मोहरे कम-से-कम अपनों को तो नहीं मारते। अगले दिन फिर….सोनार का कचरा भी बनिये के बादाम से महंगा होता है। ट्विट पढ़कर मंत्रीजी के लोग हैरान हैं….भाई साब अचानक इतने डीप ज्ञान की बात कैसे करने लगे। वो भी पंद्रहवें साल में। उधर, उनके विरोधी पता लगा रहे हैं कि वो जगह कौन-सी है, जहां मंत्री को ज्ञान की प्राप्ति हो गई….कोई वृक्ष है या कोई विशिष्ट होटल।

छोटा बजट सत्र

विधानसभा का बजट सत्र अब तक का सबसे छोटा बजट सत्र होगा। सिर्फ 15 दिन का। 5 फरवरी से शुरू होकर 28 को अवसान हो जाएगा। हो सके तो इससे पहिले भी निबट जाए। क्योंकि, चुनावी बरस में किसी को सत्र की नहीं पड़ी है। विधायकों का मन अटका रहेगा अपने इलाके में। विपक्ष भी कोई उत्साहित नहीं दिख रहा है। इससे पता चलता है, जिस दिन सत्र प्रारंभ होगा, कांग्रेस विधायक दल की बैठक उसी दिन शाम को आहूत की गई है।

पिछड़ी बीजेपी

चुनाव के 10 महीने पहिले जिस तरह से नेताओं के बीच ट्विटर वार शुरू हुआ है, माना जा रहा है कि अगले चुनाव में सोशल मीडिया एक बड़ा फैक्टर होगा। बहरहाल, तमाम संसाधनों के बावजूद सोशल मीडिया में बीजेपी बुरी तरह पिछड़ती जा रही है। अधिकांश भाजपा नेता या तो सोशल मीडिया से दूर है या फिर उन्हें हैंडिल करने नहीं आता। पार्टी पूरी तरह सरकारी प्रचार तंत्र पर निर्भर हो गई है। लेकिन, लाख टके का सवाल है, अचार संहिता प्रभावशील होने के बाद क्या होगा। कांग्रेस ने शैलेष नीतिन त्रिवेदी को दोबारा लोकर अपनी मीडिया टीम को कस दिया है। वहीं, बीजेपी इस लेवल को छू भी नहीं पा रही। भाजपा की मीडिया टीम में अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिनका मीडिया से कभी रिश्ता रहा नहीं। इसके उलट कांग्रेस की मीडिया टीम को दाद देनी पड़ेगी….पूरा डिवोशन है। मीडिया के न केवल वे संपर्क में है बल्कि छपे चाहे न छपे, सरकार के खिलाफ सामग्रियां भरपूर मुहैया कराई जा रही है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. कौन से आईजी एक एनजीओ संचालिका के गिरफ्त में उलझते जा रहे हैं?
2. एक बड़े अफसर का नाम बताइये, जो सरकार की नजर में धीरे-धीरे अप्रासांगिक होते जा रहे हैं?