रविवार, 5 अक्टूबर 2014

तरकश, 4 अक्टूबर


तरकश

 

नाग पर नाग

कांग्रेस नेताओं के प्रताप से हाल ही में रिकार्ड मतों से विधायक चुने गए भोजराज नाग पर अंतागढ़ में विजयदशमी की पूजा के दौरान नाग देवता सवार हो गए। वे लगे जोर-जोर से झूमने। नाग देवता से आर्शीवाद लेने पास-पड़ोस के गांवों के लोगों का तांता लग गया। भोजराज अंतागढ़ शीतला मंदिर के पुजारी हैं। इसके अलावा वे इलाके में झाड़-फूंक के नाम से भी उनकी लोकप्रियता है। चलिये, बढियां हैं। राजधानी के भाजपा नेताओं को कोई दिक्कत होगी तो विधायकजी सेवा के लिए तैयार मिलेंगे। कांग्रेसियों को भी इससे परहेज नहीं होगा। विधायकजी पर तो उनका बड़ा कर्ज है।

मंत्रिमंडल का पुनर्गठन

मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह 8 अक्टूबर से मंत्रियों की क्लास लेने जा रहे हैं। इसके तहत अलग-अलग विभागों के मंत्रियों और अफसरों को तलब किया जाएगा। मोदी के तर्ज पर पूछा जाएगा कि तीसरी पारी में 11 महीने में वे क्या किए हैं और आगे क्या ब्लू प्रिंट तैयार किए हैं। पता चला है, मंत्रियों के परफारमेंस के आधार पर रिपोर्ट कार्ड बनाए जाएंगे। अंदर से निकल कर आ रही खबरों की मानें तो महाराष्ट्र और हरियाणा में इस महीने चुनाव के बाद रमन कैबिनेट का पुनर्गठन हो सकता है। इसमें दो खाली सीटों को भरा जाएगा। साथ ही, रिपोर्ट कार्ड ठीक ना होने पर कुछ मंत्रियों को बदलने पर भी विचार किया जा सकता है।

वीआईपी झाडू

वीआईपी का हर चीज स्पेशल होता है। जाहिर है, वह अगर झाडू लगाएगा तो वह भी खास ही होगा। गांधी जयंती के दिन राजधानी में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। नेताओं को झुकना न पड़े, इसलिए स्पेशल आर्डर देकर झाड़ू बनवाए गए थे। मगर उसके वीआईपीकरण में गड़बड़ हो गया। झाडू की लंबाई काफी बढ़ गई। आमतौर पर स्वीपर जो झाडू का इस्तेमाल करते हैं, वे चार से पांच फुट के होते हैं…..तीन फुट का झाडू और दो फुट का डंडा। लेकिन वीआईपी झाडू बन गया आठ से नौ फुट का। स्थिति यह थी कि झाडू का डंडा छहफुटिया नेताओं के सिर से भी दो फुट उपर निकल जा रहा था। वीआईपीज मुद्दत बाद झाडू थामे थे। वह भी अनकंफार्ट। सो, चेहरे की परेशानी समझी जा रही थी।

अपना लंबू

वालीवूड के लंबू को न्यू रायपुर दिखाने के लिए सरकार ने अपने लंबू को चुना। अपने लंबू बोले तो एसएस बजाज। एनआडीए के वाइस प्रेसिडेंट। बजाज की लंबाई छह फुट छह इंच है। और, अमिताभ की छह फुट दो इंच। बजाज को अपने से लंबे देखकर अमिताभ भी चैंक गए। बहरहाल, दोनों की जोड़ी खूब जमी। होटल से लेकर न्यू रायपुर के भ्रमण और उसके बाद एयरपोर्ट तक 45 मिनट दोनों साथ रहे। अमिताभ ने बजाज से आत्मीय बातें की। बजाज भी चकित थे कि वालीवूड का शहंशाह इतना विनम्र हो सकता है।

संयोग या…..

इसे संयोग कहा जाए या पब्लिसिटी का स्टंट, रविवार को जिस इंडोर स्टेडियम में केबीसी शो आयोजित किया गया था, उसके जस्ट बगल में एक टाकिज में सात हिन्दुस्तानी फिल्म लगी थी। टाकिज में लगे बडे़-बड़े पोस्टर सबका ध्यान खींच रहे थे। बिग बी उसी रास्ते से छह बार गुजरे। सात हिन्दुस्तानी अमिताभ की पहली पिक्चर थी। जाहिर है, अमिताभ को यह अच्छा लगा होगा।

खातिरदारी

कहते हैं, खाकी बर्दी वालों से कभी पंगा नहीं लेना चाहिए। केबीसी के बाउंसरों ने रायपुर में यही भूल की। शो के समय कई लोगों से हाथापाई कर डाली। अफसरों के साथ दुव्र्यवहार हुआ। पुलिस वालों को भी नहीं छोड़ा गया। इसके बाद बारी पुलिस की थी। राजधानी पुलिस ने चार बाउंसरों को न केवल अरेस्ट किया बल्कि पुलिसिया अंदाज में जमकर आवभगत की गई। बताते हैं, खातिरदारी के लिए हट्टे-कठ्ठे एक-एक बाउंसर के लिए चार-चार पुलिस वाले लगाए गए। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि मुलाहिजा में खातिरदारी के कहीं साक्ष्य न आ जाए।

गलत परंपरा

इंटरटेनमेंट और स्पोट्र्स इवेंट अगर मंत्रालय लेवल पर हैंडिल किया जाएगा तो उसका हश्र वही हुआ, जो केबीसी के आखिर में हुआ। सीएम ने अपने स्तर पर प्रयास कर केबीसी को यहां आयोजित कराया….सूरत के बाद रायपुर देश का दूसरा शहर रहा, जहां केबीसी का आयोजन हुआ……वालीवूड के शहंशाह दो दिन तक रायपुर में रुके। उन्होंने सूबे के टूरिज्म का प्रचार करने के लिए अपनी आवाज देने की भी पेशकश की। लेकिन, स्टेडियम में तालाबंदी, महापौर का रवैया, आयोजकों और उसके बाउंसरों द्वारा लोगों के साथ किए गए बरताव ने मजा किरकिरा कर दिया। असल में केबीसी के लिए हाईप्रोफाइल मीटिंग मंत्रालय में हुई थी। और, उसके बाद ही आयोजकों का दिमाग खराब हुआ। लोकल सिस्टम को इगनोर करना शुरू कर दिया। स्टेडियम का पैसा देने से भी कतराने लगे। यही चूक नेशनल बाक्सिंग चैम्पिनशीप में भी हो रहा है। इसके लिए भी मंत्रालय में बैठक हुई है। ये दोनों आयोजन ऐसे नहीं हैं, जिसकी तैयारी की समीक्षा मंत्रालय स्तर पर हो।

फिजूलखर्ची नहीं

रायपुरियंस को यह जानकर निराशा हो सकती है कि राज्योत्सव में अबकी वालीवूड कलाकारों के ठुमके देखने को नहीं मिलेंगे। सरकार ने फिजूलखर्ची रोकने इस बार राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों को बुलाने पर रोक लगा दी है। संस्कृति विभाग से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि राज्योत्सव में सिर्फ और सिर्फ लोकल कलाकारों को मौका दिया जाए। खर्च पर लगाम लगाने के लिए ही इस बार राज्योत्सव को सात दिन से घटाकर तीन दिन किया गया है। वैसे, सरकार ने करीना कपूर विवाद से भी सबक लिया है। पिछले बार 10 मिनट के लिए मंच पर आने के लिए करीना ने एक करोड़ 10 लाख रुपए ली थी। बाहरी कलाकारों पर ही संस्कृति विभाग ने पांच करोड़ से अधिक रुपए लूटा दिए थे। बहरहाल, फिजूलखर्ची रोकने सरकार का यह सही फैसला माना जा रहा है।

रविवार, 21 सितंबर 2014

तरकश, 21 सितंबर


तरकश

पुणे से रायपुर

अमिताभ बच्चन का ग्रेट शो केबीसी रायपुर में यूं ही फाइनल नहीं हुआ। सोनी टीवी वाले इसके लिए पुणे समेत कुछ बड़े शहरों के स्टेडियम देख रहे थे। बताते हैं, मुंबई से नजदीक होने के कारण सोनी टीवी के साथ ही अमिताभ बच्चन भी पुणे को प्राथमिकता दे रहे थे। मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह को इसका पता चला। उन्होंने सोनी टीवी को आफर दिया, रायपुर में नेशनल लेवल का अत्याधुनिक इंडोर स्टेडियम है। आप यहां शो करें, सरकार हरसंभव मदद करेगी। इसके बाद सीएम की अमिताभ बच्चन से फोन पर बात हुई। आईपीएल के बाद चैम्पियन ट्राफी होने से अमिताभ को पता था कि रायपुर फास्ट ग्रोविंग सिटी के रुप में उभर रहा है। इसलिए, उन्होंने ओके कर दिया। इस तरह सूरत के बाद रायपुर देश का दूसरा शहर बन गया, जहां स्टूडियो के बाहर केबीसी शो होगा।

अपना रायपुर

पिछले साल आईपीएल हुआ…..अभी चैम्पियन ट्राफी चल रहा और, अगले हफ्ते ग्रेट बच्चन का केबीसी का धूम रहेगा। पिछले दो महीेने में 40 से अधिक सेलिब्रेटी रायपुर आए हैं। जाहिर है, अपना रायपुर ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पिछड़ा, आदिवासी और नक्सली राज्य मानने वाले देश के लोग हतप्रभ हैं। खासकर क्रिकेट स्टेडियम और केबीसी से। अमिताभ बच्चन यहां पूरे तीन रोज रहेंगे। देश के लोग सोनी टीवी पर रायपुर को देखेंगे। चैम्पियन ट्राफी के जरिये दुनिया भर के लोग रायपुर स्टेडियम को देख रहे हैं। बाद के मैचों में दर्शकों की संख्या भले ही कम हो गई हो, मगर पास-पड़ोस के राज्यों से भी क्रिकेट प्रेमी रायपुर आ रहे हैं। ताज, हयात जैसे पांच सितारा होटलों में 4 अक्टूबर तक रुम नहीं हैं। जिन अंतराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाडि़यों को लोग टीवी पर देखते थे, उन्हें राजधानी के मार्केट में खरीदगारी करते हुए या माल में घूमते हुए देख रहे थे। यही नहीं, पिछले दो महीने में 40 से अधिक सेलिब्रेटी रायपुर आए हैं। रणवीर कपूर तो पिछले दिनों ही रायपुर आए थे।

किन्नरों की दुआएं

रमन कैबिनेट ने सरकारी खर्चे पर किन्नरों का लिंग परिवर्तन कराने का फैसला लिया है। इसके लिए 50 हजार से 4 लाख रुपए तक का प्रावधान किया गया है। सूबे की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्र्रेस को यही चिंता खाने लगी है। कांग्रेस नेता जानते हैं कि किन्नरों की दुआओं में बड़ा दम होता है। बिलासपुर में किन्नरों का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था, तो उसमें अजीत जोगी, चरणदास महंत जैसे पार्टी के कई नेता शरीक हुए थे। और, छत्तीसगढ़ के 10 हजार से अधिक किन्नरों ने अगर रमन सिंह को दुआएं दे दी तो क्या होगा?

किस्मत की बात

पोस्टिंग और प्रमोशन के लिए इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आईएएस, आईपीएस डायरेक्ट है या प्रमोटी…..पहुंच वाला है या पहुंचहीन। आखिर, प्रमोटी आईपीएस होने के बाद भी सुभाष अत्रे 2006 में प्रींसिपल सिकरेट्री होम बनने में कामयाब हो गए थे। आईजी से एडिशनल डीजी पदोन्नत होते ही तत्कालीन चीफ सिकरेट्री आरपी बगाई ने उन्हें पीएस बनवा दिया था। मगर अब वैसी बात नहीं रही। आईएएस लाबी ज्यादा यूनाईट है। अशोक जुनेजा एडिशनल डीजी होने के बाद भी मंत्रालय में प्रींसिपल सिकरेट्री नहंीं बन पा रहे। अभी भी सिकरेट्री होम हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति आईएफएस संजय शुक्ला की भी है। एडिशनल पीसीसीएफ होने के बाद भी वे सिकरेट्री से उपर नहीं जा पा रहे। इन दोनों ताकतवर अफसरों का ये हाल है, बाकी का क्या होगा?

जोगी का रिकार्ड टूटा

अंतागढ़ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के भोजराग नाग ने 53 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज कर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का रिकार्ड तोड़ दिया। सीएम बनने के बाद 2001 में हुए मरवाही उपचुनाव में जोगी 51 हजार मतों से जीते थे। हालांकि, उस समय वे सीएम थे। भाजपा विधायक रामदयाल उइके ने उनके लिए यह सीट खाली की थी। उइके के पाला बदलने से तब भाजपा ठगी से रह गई थी। अबकी, सकते में आने की बारी कांग्रेस की थी, जब पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी मंतूराम पवार ने ऐन वक्त पर मैदान छोड़ दिया। बहरहाल, सूबे में सबसे अधिक विधानसभा चुनाव जीतने का रिकार्ड भोजराज के नाम दर्ज हो गया। भाजपा का कांग्रेस से हिसाब बराबर हुआ, सो अलग।

दूसरे नम्बर पर नोटा

अंतागढ़ उपचुनाव में एक और रिकार्ड बना, वह दूसरे नम्बर पर नोटा का। वहां 13 हजार से अधिक लोगों ने नोटा का बटन दबाया। याने सेकेंड नम्बर के प्रत्याशी से एक हजार अधिक। कांग्रेस का कोइ्र्र प्रत्याशी था नहीं। भोजराज के बाद सबसे अधिक 12 हजार मत रुपधर को मिले। नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में बस्तर के आदिवासियों ने ही नोटा का बटन दबाया था। दंतेवाड़ा में 9 हजार वोट नोटा में पड़़े थे। मगर अंतागढ़ में उससे भी आगे निकल गया। जाहिर है, अधिकारों के प्रति आदिवासी भी सजग हो रहे हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. रायपुर में अगर आंबेडकर अस्पताल नहीं होता तो मीडिया वालों को लीड स्टोरी एवं ब्रेकिंग खबरें कहां से मिलती?
2. राजधानी के एक बड़े उद्योगपति का नाम बताए, जिसकी कलम विहार-2 के नाम पर 100 एकड़ जमीन का लेआउट रोक दिया गया था, और बाद में उपर लेवल पर समझौते के बाद उसे क्लियर कर दिया गया?

शनिवार, 13 सितंबर 2014

तरकश, 14 सितंबर

तरकश, 14 सितंबर

तरकश

सजा के बदले इनाम

जांजगीर के चर्चित मनरेगा घोटाले में एक ब्यूरोके्रट्स की संलिप्तता से आला अधिकारी इंकार नहीं कर रहे हैं। नौकरशाह ने रिलीव होने के दिन पांच करोड़ से अधिक के काम स्वीकृत कर दिए। यही नहीं, उन्होंने एक से बढ़कर एक कारनामेे किए। तेरहवें वित आयोग के पैसे से, बिना पंचायत के प्रस्ताव के करोड़ों रुपए का सीसी रोड बनवा दिया। महानदी के बांध पर 9 लाख रुपए की नाली बन गई। मालखरौदा के देवगांव ग्राम पंचायत में तीन महीने के भीतर एक करोड़ के काम हो गए। झिर्रा पंचायत में तीन महीने में 75 लाख के। जांच हुए तो दो करोड़ के काम 12 लाख के पाए गए। याने एक करोड़ 88 लाख भीतर। यह सिर्फ दो ग्राम पंचायत की बात है। बाकी का आप अंदाजा लगा सकते हैं। इस केस में हुआ क्या? आधा दर्जन संविदा कर्मियों की छुट्टी हो गई। और नौकरशाह को अच्छी जगह पोस्टिंग। याने सजा की बजाए इनाम मिल गया।

लंदन से सतना

नाम जंगल विभाग तो काम भी आखिर कुछ ऐसा ही होगा न। न्यू रायपुर में वल्र्ड लेवल का जंगल सफारी बनाने के लिए आपको याद होगा, वन मंत्री, पीसीसीएफ समेत सात आईएफएस अफसरों का दल 2012 में साउथ आफ्रिका, केन्या और लंदन का जू देखने गया था। ताकि, यहां उसी तरह का जंगल सफारी बनाया जा सकें। दो सप्ताह के सरकारी दौरे पर 25 लाख रुपए से अधिक खर्च आया था। 230 करोड़ रुपए के इस प्रोेजेक्ट का अक्टूबर 12 में शिलान्यास किया गया। तब दावा किया गया था कि एशिया का सबसे बड़ा जंगल सफारी न्यू रायपुर में बनेगा। मगर दो साल में आधी-अधूरी बाउंड्री के अलावा वहां एर्क इंट नहीं रखी गई। ताजा अपडेट यह है कि हाल में डीएफओ आफिस के कुछ अधिकारी मध्यप्रदेश का सतना जू देखने गए थे। सवाल मौजूं है, क्या लंदन और आफ्रिका के बजाए अब सतना माडल का यहां जू बनेगा। अगर ऐसा है तो आफ्रिका और लंदन में लाखों रुपए फूंकने का मतलब क्या था?

आत्ममुग्ध

अंतागढ़ उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी के ऐन मौके पर मैदान छोड़ने को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया। प्रदर्शन के बाद पार्टी के दोनों खेमों के नेता गदगद हैं। संगठन खेमा मुग्ध है कि उसने विरोधी गुट के नेता को प्रदर्शन में शरीक होने दिल्ली जाने बाध्य कर दिया। तो विरोधी गुट के नेता की खुशी का पारावार नहीं है कि उनकी वजह से धरने का एजेंडा चेंज हो गया। पहले, चुनाव आयोग के घेराव का कार्यक्रम था। बाद में वह चेंज होकर रमन सरकार के खिलाफ हो गया। चलिये, इसी तरह कांग्रेसी खुश होते रहे, तो रमन सरकार को कोई दिक्कत नहीं आने वाली।

पहला आईएफएस

एडिशनल पीसीसीएफ एवं हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर संजय शुक्ला छत्तीसगढ़ क्लब के नए सिकरेट्री बनाए गए हैं। शुक्ला पहले आईएफएस सिकरेट्री हैं। वरना, राज्य बनने के बाद अभी तक आईएएस ही इस क्लब के सिकरेट्री बनते आए थे। उनके पहले विकास शील, मनोज पिंगुआ, केडीपी राव और सीके खेतान सिकरेट्री रहे। सिविल इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले शुक्ला को छत्तीसगढ़ क्लब का सूरत बदलने के साथ क्लब की गतिविधियां बढ़ाने का जिम्मा दिया गया है।

आईआईटी में पेंच?

भिलाई में आईआईटी खुलने में पेंच आ गया है। इसके लिए 600 एकड़ लैंड मांगा जा रहा है। और, भिलाई में एक साथ इतनी जमीन संभव ही नहीं है। सरकार के सामने असमंजस यह है कि वह भिलाई में आईआईटी खोलने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित करवा चुकी है। और, तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी सूरत में उनके इलाके में यह प्रतिष्ठित संस्थान खुल जाए, जिससे अगला चुनाव उनके लिए आसान हो जाए। मगर, पर्याप्त लैंड और समीप में एयरपोर्ट होने के चलते एचआरडी के अफसर न्यू रायपुर को तवज्जो दे रहे हैं। ऐसे में आईआईटी कहां बनेगा, इसका ऐलान नहीं हो पा रहा है।

लीडरशीप इंस्टिट्यूट

उच्च शिक्षा विभाग न्यू रायपुर में एक लीडरशीप इंस्टिट्यूट खोलने जा रहा है। इसमें राजनीतिज्ञों के साथ ही विभिन्न सेक्टर के लोग इस संस्थान में दाखिला लेकर सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। इस संस्थान में व्यक्तित्व विकास के साथ ही एक लीडर में क्या-क्या गुण होने चाहिए, बताए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह भाषण देने के कौशल सिखाएं जाएंगे। देश का यह पहला इंस्टिट्यूट होगा। इसमें दीगर राज्यों के लोगों से फीस ली जाएगी मगर छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह फ्री रहेगा।

पुरा अब होगा पूरा

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम का ड्रीम प्रोजेक्ट को छत्तीसगढ़ के अफसरों ने भले ही कूड़ा करके दफन कर दिया मगर एनडीए सरकार अब इस योजना को फिर से शुरू करने जा रही है। मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार से इस योजना की जानकारी मांगी है ताकि, उसे शीघ्र लांच किया जा सकें। हालंाकि, योजना का नाम बदलकर अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुरबन योजना किया गया है। रुरबन मतलब रुरल और अरबन। कलाम की योजना थी कि शहरों के आसपास के गांवों में अरबन फैसिलीटी मुहैया कराई जा सकें। जिससे गांवों के लोग शहरों में माइग्रेट ना करें। इससे शहरों पर बोझ कम होगा। लेकिन, कलाम के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद अफसरों का ध्यान भी इस योजना से हट गया। कारण, पीडब्लूडी, पीएचई तरह इसका बजट नहीं था। और, जाहिर है, जिसमें ठीक-ठाक बजट नहीं, उसकी फाइलों को सरकारी मशीनरी कूड़ा में ही डाल देती है?

अंत में दो सवाल आपसे

1. अजीत जोगी का मंच टूटने पर उनके समर्थकों ने किसकी धुनाई कर दी?
2. मंत्रालय में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों के सीटिंग अरेंजमेंट में इन दिनों सीनियर आईपीएस अफसरों की उपेक्षा क्यों की जा रही है?

शनिवार, 30 अगस्त 2014

तरकश, 31 अगस्त

तरकश, 31 अगस्त

तरकश


राजभवन सख्त

राजभवन का कामकाज अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगा। अभी तक राज्यपाल को कई ऐसी फाइलें भेज दी जाती थी, जिस पर उनके हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती थी। विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने तो और स्तर हल्का कर दिया था…..एचओडी के अपाइंटमेंट तक की फाइलें राजभवन भेजी जाती थी। वीसी के अवकाश के आवेदन भी राजभवन आते हैं। राज्यपाल बलरामदास टंडन इससे खुश नहीं हैं। राजभवन में पुलिस प्राधिकार, मुख्य सूचना आयुक्त तक की छुट्टियों की अर्जी आती हैं। जबकि, ऐसा कोई नियम नहीं है। दरअसल, राज्यपाल बिना नियम देखे किसी कागज पर हस्ताक्षर नहीं करते। उन्होंने कई मामलों में जब नियम मांगा तो राजभवन के अफसरों के होश उड़ गए। अभी तक बिना नियम के ही बहुत सारे काम चल रहे थे। मगर, अब राज्यपाल के पास कोई फाइल लेकर जाने से पहले नियम खंगाले जा रहे हैं। अब, उच्च शिक्षा विभाग का इम्पार्टेंस भी बढ़ेगा। अभी तक इस विभाग का रोना था कि वाइस चांसलर उनकी सुनते नहीं। मगर अब शायद ऐसा न हो।

पुलिस का अनुशासन

पुलिस महकमे में सबसे अधिक अनुशासन की अपेक्षा की जाती है लेकिन हो उल्टा रहा है। गृह मंत्री रामसेवक पैकरा मंगलवार को जब पुलिस मुख्यालय पहुंचे तो कई सीनियर अफसरों को बिना यूनिफार्म में देखकर वे दंग रह गए। जबकि, बैठक पूर्व प्रस्स्तावित थी। डीजीपी एएन उपध्याय खुद यूनिफार्म में थे। याद होगा, पूर्व राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन कोरबा एसपी पर इसलिए भड़क गए थे कि वे बिना वर्दी पहले उन्हें रिसीव करने आ गए थे। रायपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव में एसपी रहे डा0 आनंद कुमार अपनी एंबेसडर कार में हैंगर में वर्दी लटकाकर चलते थे। ताकि, कहीं ला एंड आर्डर की स्थिति आ जाए तो तत्काल वर्दी पहनकर मौके पर पहुंच जाएं। पर लगता है, वह पुरानी बात हो गई।

चारो खाने चित

अंतागढ़ उपचुनाव से कांग्रेस पार्टी को बड़ी उम्मीद थी। नवंबर में हुए चुनाव में विक्रम उसेंडी पांच हजार वोट से ही तो जीते थे। ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, कई उपचुनावों में भाजपा को पटखनी मिली है। यहां, राशन कार्ड का मुद्दा था ही। कांग्रेस की तैयारी थी कि जिस तरह 2006 में कोटा उपचुनाव में कांग्रेस ने सत्ताधारी पार्टी को हराया था, उसी तरह अंतागढ़ बाइ इलेक्शन जीत कर माहौल बनाया जाए। और, उसकी फसल नगरीय निकाय चुनावों में काटी जाए। मगर पार्टी प्रत्याशी द्वारा आश्चर्यजनक ढंग से नाम वापिस लेने से कांग्रेस चुनाव के पहले ही चारो खाने चित हो गई।

कमजोर सूचना तंत्र

मैदान में उतरने से पहले पार्टी प्रत्याशी द्वारा हाथ खड़ा कर देने को कांग्रेस नेता भले ही घोखा और षडयंत्र करार दें मगर इस एपीसोड में साफ हो गया है कि संगठन खेमा ने बेहद कमजोर दांव चला। मंतूराम पवार विरोधी खेमे से जुड़े हैं, इसे कौन नहीं जानता था। इसके बाद भी उन पर दांव लगा दिया। टिकिट देने से पहले आजमा तो लेना था। फिर, पुख्ता सूत्रों की मानें तो पिछले चार दिनों से पवार से नामंकन वापिस लेवाने की कोशिश चल रही थी। उनके पास फोन आ रहे थे….लोग मिल रहे थे। मगर संगठन खेमे को भनक तक नहीं लगी। जबकि, विरोधी खेमे का सूचना तंत्र देखिए, शुक्रवार शाम भूपेश बघेल का जब किसी को लोकेशन नहीं मिल रहा था, मीडिया को भी नहीं। तब विरोधी खेमे के बंगले में यह खबर थी कि बघेल कांकेर के लिए रवाना हो गए हैं और अभी धमतरी क्रास कर रहे हैं। संगठन खेमे का सूचना तंत्र मजबूत होता तो यह बाजा ही नहीं बजता।

भूपेश हटाओ…..

अंतागढ़ उपचुनाव में कांग्रेस की फजीहत होने के बाद अब पार्टी में भूपेश हटाओ मुहिम तेज होगी। कार्यकारिणी में जिन नेताओं को जगह नहीं मिली, वे अब अपना हिसाब चूकता करेंगे। विधान मिश्रा, राजेंद्र तिवारी ने हमला बोला ही है, कई और नेता संगठन खेमे के खिलाफ मुखर होंगे। भूपेश के पास टीएस सिंहदेव के अलावा कोई बड़ा नेता नहीं है, जो उनके बचाव में उतर सकें। सत्यनारायण शर्मा पहले से नाखुश हैं। बदरुद्दीन कुरैशी को कार्यकारिणी में लिए जाने से रविंद्र चैबे की नाराजगी लाजिमी है। और किसी नेता की हैसियत इतनी बड़ी नहीं है कि संगठन के साथ वह दमदारी से खड़ा हो सकें। कुल मिलाकर कांग्रेस की स्थिति और खराब होगी। ऐसे में, नगरीय निकाय चुनावों में भी पार्टी का परफारमेंस प्रभावित होगा।

हालत खास्ता

छत्तीसगढ़ के कमजोर और मध्यम वर्ग के लोगों को अब राजधानी रायपुर में अपना घर का सपना जल्द पूरा हो सकता है। हाउसिंग बोर्ड कम रेंज के 25 हजार फ्लैट बनाने जा रहा है। 15 हजार न्यू रायपुर में और 10 हजार कमल विहार में। सभी पांच लाख से 15 लाख के बीच के होंगे। याने न्यू रायपुर में भी आपको पांच लाख के मकान उपलब्ध होंगे। इसे प्री कास्ट टेक्नालाजी से बनाए जाएंगे। इस तकनीक से न केवल साल भर के भीतर मकान तैयार हो जाएंगे, बल्कि क्वालिटीयुक्त होंगे। बड़े मकान बिकते नहीं, 1000 फ्लैट खाली पड़े हैं। कोई लेनदार नहीं है। इसलिए, हाउसिंग बोर्ड ने तय किया है कि छोटे और मंझोले रेंज के आवास बनाए जाएं। अफसरों का दावा है, दो साल के भीतर 25 हजार फ्लैट तैयार कर देंगे। प्री कास्ट टेक्नालाजी के लिए एलएंडटी जैसी तीन कंपनियों से बातचीत शुरू हो गई है। कमल विहार-2 के लिए लोग बेसब्री से प्रतीक्षा कर ही रहे हैं, हाउसिंग बोर्ड का यह प्रोजेक्ट चालू हो गया तो प्रायवेट बिल्डरों ही हालत और खराब होगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. अंतागढ़ उपचुनाव वे नाम वापस लेने के लिए कांग्रेस के सगंठन खेमे को मुख्यमंत्री का पुतला जलाना चाहिए या किसी और का?
2. किस कलेक्टर पर भ्रष्टाचार की गाज गिर सकती है?

शनिवार, 23 अगस्त 2014

तरकश, 24 अगस्त


जोगी का साईं

कांग्रेस से जुड़े शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती भले ही साईंa पूजा पर सवाल उठाते हुए कवर्धा में 24 अगस्त से धर्म संसद करने जा रहे हैं, मगर कांग्रेस में भी साईं भक्तों की कमी नहीं है। कांग्रेस के कई बड़े नेता साल में एक बार शिरडी अवश्य जाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कलेक्टर से राजनीति में आने के दौरान जब असमंजस में थे, तो उन्होंने साईं बाबा का सहारा लिया था। बात 1986 की है। पीएमओ से लगातार फोन आ रहे थे कि आप सहमति दीजिए। जोगीजी तय नहीं कर पा रहे थे….आईएएस, उस पर से टाप डिस्ट्रिक्ट इंदौर का कलेक्टर। बेचैनी में जोगीजी पत्नी के साथ जीप में बैठकर शहर में निकल गए। बास को परेशान देख उनका पीए भी गाड़ी में बैठ गया। उसी ने जोगी को सुझाया, सर….साई बाबा पर फैसला छोड़ दीजिए। बाबा के लाकेट को टास करते हैं। जोगीजी ने कहा, चलो फोटो आएगी तो राजनीति में आउंगा, नही ंतो केंसिल। टास में बाबा की फोटो आ गई और इसके बाद बताते हैं, जोगी ने पीएमओ फोन लगाकर ओके कर दिया।

राज्योत्सव में मोदी

राज्योत्सव में अबकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीफ गेस्ट होंगे। राज्य शासन ने इसके लिए पीएमओ को लेटर भेज दिया है। और, वहां से पीएम के आने के संकेत भी मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री न्यू रायपुर में नए विधानसभा भवन का भूमिपूजन भी करेंगे। राज्य बनने के बाद यह पहला मौका होगा, जब राज्योत्सव में प्रधानमंत्री आएंगे। राज्योत्सव इस बार धूमधाम से मनाया जाएगा। पूरे सात दिन कार्यक्रम चलेंगे। आचार संहिता की वजह से पिछले साल रंगारंग आयोजन नहीं हो पाया था। इसकी भी कसर पूरी की जाएगी।

सीधे फाइल नहीं

मुख्यमंत्री के पास सिकरेट्रीज अब सीधे फाइल लेकर नहीं जा सकेंगे। इसके लिए बकायदा लेटर जारी हो गया है। दरअसल, कुछ अफसर सीएम से सीधे मिलकर फाइल करा लेते हैं। जबकि, प्रोपर चैनल है, सचिवालय के अफसरों के जरिये सीएम तक फाइल जाने का। सीएम सचिवालय ने सीएम से लिखित में आपत्ति दर्ज कराई थी। कहा था…..ऐसे में सीएम सचिवालय का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा। सीएम ने इसे जायज माना और, अमेरिका के लिए उड़ान भरने से पहले इसे अनुमोदित कर दिया। याने सिकरेट्रीज अब मुख्यमंत्री से कराने वाली फाइल सीएम सिक्रेटेरियेट भेजेंगे।

28 को लौटेंगे सीएम

पत्नी का चेकअप कंप्लीट न हो पाने के कारण मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह का 24 अगस्त को अमेरिका से लौटना टल गया है। अब वे 27 अगस्त को आएंगे। उनकी पत्नी श्रीमती वीणा सिंह को स्प्लीन के प्राब्लम के कारण मेदांता में भरती कराया गया था। चिकित्सकीय परामर्श के लिए उन्हें अमेरिका ले जाया गया है। वहां उनकी स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है।

गुडबुक

मुख्यमंत्री ने 16 अगस्त को कलेक्टरों का वीडियोकांफ्रेंसिंग कर हर ब्लाक में 10-10 माडल विलेज बनाने का टास्क दे दिया। साथ ही सभी स्कूलों में शौचालय बनाने की हिदायत भी। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से भाषण में सभी स्कूलों में शौचालय बनाने के साथ ही सांसदों को एक-एक गांव गोद लेने के लिए कहा था। इसमें उन्होंने राज्य सरकारों को भी आगे आने का उन्होंने आव्हान किया था। भाजपा शासित सूबे में भी, छत्तीसगढ़ पहला राज्य होगा, जहां पीएम की घोषणाओं पर इतना फास्ट एक्शन लिया गया होगा। ऐसे में, रमन का नम्बर तो बढ़ेगा ही।

ये दोस्ती…..

आईएएस में ऐसी दोस्ती शायद ही देखने को मिलती है। खास तौर से एक बैच में। बात कर रहे हैं, रजत कुमार, मुकेश बंसल और ओपी चैधरी की। तीनों 2005 बैच के आईएएस हैं। तीनों में गहरी छनती है। गजब का फेथ भी। शायद ही कोई दिन गुजरता हो, जब तीनों आपस में फोन पर बात न करते हों। तीनों, बिना एक-दूसरे को शेयर किए कोई काम नहीं करते। किसी को कोई प्राब्लम हो, तो बाकी के दो उसका रास्ता बताते हैं। ओपी की शादी हुई तो मुकेश बंसल पूरा इंतजाम किया, बल्कि अपनी ओर से व्हाट्सप पर ओपी के मित्रों को इंवीटेशन तक भेजा। ओपी के हनीमून का प्लान भी दोनों ने मिलकर बनाया। ये होती है दोस्ती।

गुड आइडिया

बिजली उपभोक्ताओं के जेब से बिल निकालने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने कई नायाब नुख्से निकाले हंै। पहला, जिनके बिल जमा नहीं होंगे, उनका कंप्लेन दर्ज नहीं किया जाएगा। कंप्लेन के दौरान पूछा जाएगा, आपने पिछले महीने की बिल जमा कर दिया है। फिर, कंपनी इस बात का भी जोरदार प्रचार शुरू करने जा रही है कि समय पर बिल जमा न करने पर 18 फीसद सरचार्ज लगता है……आप चाहे तो इसे बचा सकते हैं। कंपनी के अफसरों का मानना है कि 15 से 20 फीसदी लोग ऐसे होते हैं, जो लापरवाही के चलते समय पर भुगतान नहीं कर पाते। कहने के लिए सरचार्ज 10-20 रुपए होते हैं, मगर 18 फीसदी बढ़ता है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एसआरपी कल्लूरी के बस्तर का आईजी बनने के बाद माओवादियों के कितने शहरी हितैषी बस्तर पुलिस के समक्ष अघोषित सरेंडर कर दिए हैं?
2. सोनिया गांधी ने पीसीसी चीफ भूपेश बघेल को क्या अजीत जोगी के समर्थकों को कार्यकारिणी में एडजस्ट करने कहा है?

शनिवार, 9 अगस्त 2014

तरकश, 10 अगस्त

तरकश

बैचमेट बनाम बैचमेट

आईजी राजकुमार देवांगन के खिलाफ विभागीय जांच में सरकार ने बिलासपुर रेंज के आईजी पवनदेव को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बना दिया है। प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बोले तो सरकारी वकील। डीजी जेल और होमगार्ड गिरधारी नायक जांच अधिकारी हैं। पवनदेव का काम होगा नायक के समक्ष सरकार का पक्ष रखना। बाराद्वार डकैती कांड में देवांगन के खिलाफ डीई हो रही है और पवनदेव जांच अधिकारी के समक्ष देवांगन के खिलाफ खड़े होंगे। जबकि, दोनों बैचमेट हैं। 92 बैच के आईपीएस। बैचमेट के खिलाफ बैचमेट को खड़ा करके सरकार ने पवनदेव के खिलाफ अजीब धर्मसंकट खडा कर दिया है। देवांगन नप गए तो आरोप लगेगा बैचमेट ने मदद नहीं की। और, बच गए तो जोर से वकालत कर दी।

फिर महिला

अक्सर ऐसा कहा जाता है, किसी बात को प्रचारित करना हो तो किसी महिला से शेयर कर लो। मगर आईएएस के मामले में ऐसा नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग के आईएएस सेल में आमतौर पर महिला आईएएस को ही पोस्ट किया जाता है कि सूचना सुरक्षित रहे। कुछ महीने के लिए विकास शील जरूर इस विभाग में रहे लेकिन उनके डेपुटेशन पर जाने के बाद शहला निगार को दूसरी बार इस विभाग की कमान सौंप दी गई। इससे पहिले रेणू पिल्ले, ईशिता राय, निधि छिब्बर, शहला निगार और रीतू सेन इस पोस्ट पर रह चुकी हैं। रीतू को अंबिकापुर कलेक्टर बनने के बाद विकास शील को टेम्पोरेरी तौर पर जीएडी सिकरेट्री बनाया गया था।

भूचाल

भारी डिप्रेशन में चल रहे एक सीनियर आईएफएस अफसर के साथ अगर कुछ गलत हो गया तो न केवल सरकार कटघरे में आ जाएगी बल्कि, ब्यूरोक्रेसी में भी भूचाल आ जाएगा। आईएफएस का पत्नी से तलाक हो गया है। तलाक क्यों हुआ, नौकरशाही में सबको पता है। आईएफएस ने तलाक के कुछ कारण भी कोर्ट में बताए थे। दूसरा, डीपीसी होने के आठ महीने बाद भी प्रमोशन को हरी झंडी नहीं दी जा रही है। मंत्रालय के अफसर भी मानते हैं कि आईएफएस के खिलाफ कोई गंभीर मामला नहीं है। उससे गंभीर केस में फंसे आईएएस सिकरेट्री, प्रिंसिपल सिकरेट्री और आईपीएस डीआईजी, आईजी प्रमोट हो गए मगर आईएफएस को अटका दिया गया है।

जय हो

अपने चेले को पीसीसीएफ बनाने के लिए एक सीनियर आईएफएस अफसर चार लोगों का उद्धार कर गए। वन विभाग में अभी पीसीसीएफ के चार पोस्ट हैं। साब का चंपू पीसीसीएफ नहीं बन पा रहा था, इसलिए जाते-जाते याने 31 जुलाई को रिटायरमेंट के दिन पीसीसीएफ के चार नए पोस्ट का प्रपोजल भिजवा दिया। प्रस्ताव के मुताबिक चारों को पीसीसीएफ का दर्जा दिया जाएगा। अगर एक पोस्ट का प्रपोजल होता तो हल्ला मचता कि अपने आदमी के लिए उन्होंने पोस्ट क्रियेट कराया है। सो, चार-चार कर दिया। अब, बीएल शरण से लेकर जीतेंद्र उपध्याय, एनसी पंत और बीके सिनहा तक पीसीसीएफ बन जाएंगे। विभाग में अब पुराने साब का जय-जय हो रहा है।

ऐसा भी होता है

हिदायतुल्ला ला यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति एमके श्रीवास्तव बरकउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल में सस्पेंड होे गए हैं। उन पर महिला कर्मी के साथ दुव्र्यव्यहार का आरोप लगा है। वीसी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद श्रीवास्तव अपने मूल संस्थान में लौट गए थे। कुलपति बड़ा सम्मानित पद होता है। वह भी कानून की पढ़ाई वाले विश्वविद्यालय का। पद से हटने के बाद भी अगर वह सस्पेंड होगा, तो लोगों को झटका तो लगेगा ही।

आईजी का गुस्सा

एक बड़े कांग्रेस नेता को यह बयान देना भारी पड़ गया कि राज्य में फर्जी नक्सलियों का समर्पण कराया जा रहा है। एक आईजी को जब इसका पता लगा तो उन्होंने नेताजी को फोन लगाकर जमकर सुनाया…..प्रेशर बनाकर नक्सलियों को किस तरह हम समर्पण करवा रहे हैं और, आप लोग राजधानी में बैठकर इस तरह की बातें कर रहे हैं। हालांकि, नेताजी मुकर गए….हमने ऐसा कुछ कहा नहीं। हालांकि, नेताजी का बयान टीवी में चल चुका था। मगर आईजी के फोन का असर यह हुआ कि कांग्रेसी अब इस विषय पर बोलने में हिचकने लगे हैं।

धरम और उसेंडी

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो जाएगा। अंदरखाने से जो खबर आ रही है, पार्टी के शीर्ष नेताओं के समक्ष इस पोस्ट के लिए मुख्य तौर पर दो नाम है। धरमलाल कौशिक और विक्रम उसेंडी। हालांकि, सांसद रमेश बैस ने छत्तीसगढ़ को आदिवासी की बजाए पिछड़ा राज्य का हुंकार भर कौशिक की मुश्किलें बढ़ा दी है। मगर फायनल इन दो नामों में से ही होगा।

अंत में दो सवाल आपसे

1. दो सीनियर आईपीएस अफसरों की पुरानी जोड़ी क्यों बिछड़ गई?
2. आईजी राजकुमार देवांगन के खिलाफ गिरधारी नायक से विभागीय जांच कराने के पीछे वजह क्या हो सकती है?

शनिवार, 2 अगस्त 2014

तरकश, 3 अगस्त

तरकश

अच्छे दिन

तीसरी बार नगरीय प्रशासन मंत्रालय की कमान मिलने के बाद जाहिर है, सूबे की राजनीति में अमर अग्रवाल का ग्राफ उपर हो गया है। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि नगरीय चुनाव के ठीक पहले उन्हें इस विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। अहम यह है कि अमूमन सभी सीनियर मंत्रियों की नजर इस विभाग पर थी। दिसंबर में जब तीसरी बार सरकार शपथ लेने जा रही थी, उस दौरान कम-से-कम चार मंत्रियों ने सीएम से इस महकमे के लिए इच्छा जताई थी। मुख्यमंत्री ने शायद इसीलिए, इस विभाग को अपने पास रख लिया था। अमर का कद ऐसे वक्त में बढ़ाया गया, जब कुछ मंत्रियों द्वारा कथित तौर पर सरकार विरोधी हवा बनाने की खबरें आ रही थीं। सो, इसके सियासी निहितार्थ से भी इंकार नहीं किया जा सकता। वैसे, नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद अमर का शीर्ष स्तर पर भी मजबूत हुए हैं। मोदी संघ के प्रचारक थे और स्व. लखीराम अग्रवाल जनसंघ और बीजेपी का बड़ा नाम। लखीराम के बिलासपुर स्थित विनोबा नगर निवास पर मोदी कई बार रुके हैं। कुछ बार वहीं वे पत्रकारों से भी मिले थे। सो, बढि़यां दिन आ गए हैं अमर के।

विस्तार टला

15 अगस्त से पहिले रमन कैबिनेट के विस्तार की चर्चा थी। तीन और मंत्री बनाए जाने थे। मगर 26 जुलाई को सीएम ने यकबयक अमर अग्रवाल को नगरीय प्रशासन का सिंगल आर्डर निकाल दिया। जाहिर है, विस्तार अब लंबे समय के लिए टल गया है। सूत्रों की मानें तो अब स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के बाद ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और सर्जरी भी। तब तक विधायकों को दिल थाम कर इंतजार करना होगा।

लाल बत्ती

लाल बत्ती के इंतजार की घड़ी और लंबी हो सकती है। सत्ता के गलियारों से जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, दर्जन भर से अधिक बोर्ड और आयोगों में अब नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के बाद ही पोस्टिंग होगी। एक तो राज्य के खजाने की स्थिति अच्छी नहीं है, ऐसे में वह सफेद हाथियों को अभी पालना नहीं चाहती। फिर, उसके पीछे पार्टी की अपनी रणनीति भी है। विधायक और नेता दोनों चुनावों में गंभीरता से काम करें। चुनाव के नतीजे आने के बाद ही अब लाल बत्ती बंटेंगी।

फेयरवेल

एके सिंह सिर्फ पीसीसीएफ ही नहीं, बल्कि प्रभावशाली आईएफएस थे। 31 अगस्त को उनके फेयरवेल में इसकी झलक भी दिखी। आईएफएस एसोसियेशन ने बिदाई समारोह का आयोजन किया था। उसमें चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड, समेत डीजीपी एएन उपध्याय, एसीएस डीएस मिश्रा, अजय सिंह, एनके असवाल जैसे कई आईएएस, आईपीएस ने शिरकत की। जिस हाईप्रोफाइल अंदाज में उनकी बिदाई हुई, मार्केट में यह चर्चा तो होनी ही थी कि रिटायरमेंट के बाद सिंह को सरकार अच्छी पोस्टिंग दे रही है। सूचना आयुक्त तो है ही, उससे कुछ बड़ा भी हो जाए, तो अचरज नहीं।

घर मत भेजो पति को

ट्रांसफर निरस्त कराने के लिए मंत्रियों और अफसरों के सामने लोग दिलचस्प तर्क दे रहे हैं। किसी को अचानक हर्ट प्राब्लम हो गया है, किसी की मां बीमार है तो किसी को बूढ़े पिताजी की सेवा करनी है। बहुओं को सास-ससुर भले ही बला से कम नहीं लगते, मगर तबादला होते ही उन्हें सास-ससुर की बीमारी की चिंता सताने लगी है। पंचायत विभाग के एक केस की महकमे में जबर्दस्त चर्चा है। रायपुर से लगे एक जिले की भाजपा नेत्री के हसबैंड का ट्रांसफर उनके गृह नगर हुआ है। पति घर आ गए, इससे नेत्री को खुश होना चाहिए तो उल्टे वे अफसरों पर दबाव बना रही है कि मेरे मिस्टर को वहीं रहने दिया जाए। याने घर से दूर ही। कारण? यह पंचायत, कृषि और श्रम विभाग वाले बता सकते हैं या फिर पार्टी वाले।

प्रेशर

राशन कार्ड विवाद को देखते भाजपा के भीतर नगरीय निकाय चुनाव कराया जाए या नहीं इस पर मंथन शुरू हो गया है। हिमाचल और उत्तराखंड में जिस तरह हुआ, उसको देखते पार्टी को आशंका है कि राशन कार्ड की नाराजगी बीजेपी पर भारी पड़ सकती है। पार्षदों ने ही फर्जी राशन कार्ड बनवाया, और कार्ड निरस्त होने पर वे अपने वार्ड में किस मुंह से वोट मांगने जाएंगे। चिंता स्वाभाविक है। सो, चुनाव स्थगित करने सरकार पर प्रेशर बन सकता है।

हफ्ते का एसएमएस

लड़का, ज्योतिष से, बाबाजी मेरी शादी क्यों नहीं हो रही है? ज्योतिष, पगले तेरी किस्मत में सुख-ही-सुख है, तो शादी कैसे होगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. पीडब्लूडी विभाग का सिकरेट्री चेंज होने से कौन खुश होगा, राजेश मूणत या आरपी मंडल?
2. राज्य शासन के कर्मचारियों का रिटायरमेंट 60 से 62 करने का आर्डर सरकार क्या वापिस ले लेगी?