शनिवार, 7 मार्च 2015

तरकश, 8 मार्च

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वाह भाई!

सूबे में आईएएस तो कई हैं और कलेक्टर भी, मगर ठसक सबकी एक जैसी नहीं है। अब देखिए न, एक आईएएस ने सरकार से डंके की चोट पर मांग कर जिला लिया। हालांकि, सरकार ने मनचाहा जिला उन्हें नहीं दिया, मगर अफसर शाही अंदाज के जो ठहरे। सो, हवाई जहाज से ज्वाईन करने पहुंचे। अब, भले ही कोई कहे कि खाली प्लेन जा रहा था मगर हवाई मार्ग से पदभार ग्रहण करने जाएंगे तो चर्चा तो होगी ही। ब्यूरोके्रसी में हर जगह लाट साब की ठसक की चर्चा हो रही है।

छुट-पुट चेंजेंस

ऐसा नहीं है कि बजट सत्र चल रहा है, तो प्रशासनिक फेरबदल नहीं होंगे। छुट-पुट चेंजेस होते रहेंगे। आपने देखा ही, होलिका दहन के दिन सरकार ने रायपुर नगर निगम कमिश्नर अवनीश शरण को चेंज किया गया। दो-तीन आईएफएस अफसरों की भी लिस्ट निकली। शनिवार को एडिशनल कलेक्टर भी चेंज किए गए। ऐसे एक-एक, दो-दो नामों की सूची निकलती रहेगी।

टेम्पोरेरी पोस्टिंग

रायपुर नगर निगम कमिश्नर अवनीश शरण को सरकार ने रायपुर का अपर कलेक्टर बनाया है लेकिन इसे टेम्पोरेरी पोस्टिंग ही समझना चाहिए। अवनीश को नगर निगम में पौने तीन साल से अधिक हो गया था। वे पहले डायरेक्ट आईएएस थे, जो दो नगर निगम किए। आमतौर पर एक बार नगर निगम करने के बाद पंचायत सीईओ या कलेक्टरी मिल जाती है। जोगी सरकार के समय पहली बार डा0 एसके राजू को बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर से सरगुजा का कलेक्टर पोस्ट किया गया था। इसके बाद मुकेश बंसल और ओपी चैधरी इसी तरह कलेक्टर बनें। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो अगले एक महीने के भीतर कलेक्टरों की जो सप्लीमेंट्री लिस्ट निकलेगी, उसमें 2009 बैच के अवनीश का नाम भी होगा। 2008 बैच में हालांकि, दो आईएएस अभी कलेक्टर बनने के लिए बचे हैं। मगर दो में से एक के सीआर के बारे में कुछ बताने की जरूरत नहीं है। सो, अगली सूची में 2008 बैच में से संभवतः एक और 2009 से अवनीश, किरण कौशल और प्रियंका शुक्ला में से दो का नम्बर लगना लगभग निश्चित माना जा रहा है।

सबको राम-राम

कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी के हरिप्रसाद पिछले हफ्ते रायपुर आए……एक-एक लोगों से मिले और इशारे-इशारे में सबको राम-राम कर गए। बताते हैं, कुछ दिनों के भीतर कांग्रेस कार्यकारिणी का पुनगर्ठन होना है, उसमें उन्हें बदले जाने का संकेत मिल चुका है। यही वजह है कि हरिप्रसाद कई लोगों से यह कहना नहीं भूले कि प्रदेश प्रभारी के तौर पर उनका यह आखिरी छत्तीसगढ़ दौरा होगा। बहरहाल, नए प्रभारी के अपाइंटमेंट के बाद प्रदेश में कांग्रेस के भीतर समीकरण भी कुछ बदलेंगे ही। जाहिर है, पीसीसी चीफ भूपेश बघेल के हरिप्रसाद से रिश्ते प्रगाढ़ थे।

हालत पतली

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का पारफरमेंस भले ही बेहतर हुआ है, मगर 11 साल से सत्ता से बाहर रहने के चलते उसकी माली हालत खास्ता होती जा रही है। खास तौर से केंद्र से गवर्नमेंट जाने के बाद। केंद्र में अपनी सरकार थी तो आफिस खर्च के नाम पर हर महीने दो लाख रुपए आता था। दिसंबर से वह भी बंद हो गया है। फंड जुटाने के लिए पीसीसी ने 250-250 रुपए लेकर 5000 सदस्य बनाने का टारगेट किया है। यही नहीं, एमएलए पर भी पार्टी अब प्र्रेशर बना रही है। एमएलए साल में एक बार बेसिक वेतन पार्टी को देते हैं। कांग्रेस विधायक पिछले साल भी बेसिक जमा नहीं किया था। पार्टी ने फारमान जारी कर बेसिक जमा करने कहा है।

संकटमोचक

विधानसभा में संख्याबल को लेकर कांग्रेस जब संकट में घिरी तो पार्टी से निष्कासित विधायक सियाराम कौशिक और आरके राय संकटमोचक बनकर खड़े हुए। संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर ने यह कहकर हमला बोला कि कांग्रेस के निष्कासित विधायकांे को जब पार्टी मीटिंग में नहीं बुलाया जा रहा तो पार्टी यह बताए कि उसके कितने एमएलए हैं। इसके बाद सत्ताधारी पार्टी ने कांग्रेस को घेरना शुरू किया तो नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव खड़े होकर बाले कि दोनों विधायक मुझे लिखकर दिए हैं कि वे मरते समय तक कांग्रेस में रहेंगे। इसके बाद आश्चर्यजनक घटनाक्र्रम में दोनों विधायकों ने पार्टी में वापसी के लिए आवेदन कर दिया। हालांकि, सत्ताधारी पार्टी के हमले से कुछ होता नहीं, मगर पार्टी की किरकिरी होती। सो, तुरंत डैमेज कंट्रोल किया गया। और, इसके लिए दोनों निष्कासित विधायक आवेदन देने के लिए तैयार हो गए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस कलेक्टर की फेसबुक पर कमेंट की बड़ी चर्चा है?
2. भूपेश बघेल ने विसानसभा में सरकार से अधिक एसीबी चीफ मुकेश गुप्ता को क्यों निशाना बनाया?

शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

तरकश, 28 फरवरी

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एक और लिस्ट

आईएएस, आईपीएस के ट्रांसफर अभी कंप्लीट नहीं हुए हैं। बजट सत्र के बाद नौकरशाही की एक और लिस्ट निकलेगी। जाहिर है, पहली लिस्ट में कई कलेक्टरों का किन्ही कारणों से नम्बर नहीं लग पाया या फिर अभयदान मिल गया था। मसलन, राजेश टोप्पो साढ़े तीन साल से बलौदा बाजार में कलेक्टर हैं। और, लंबी कलेक्टरी का रिकार्ड अपने नाम कर लिया है। हर बार फेरबदल में उनका नाम चलता है। इस बार भी लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन, ऐन वक्त पर लिस्ट से नाम निकल गया। इधर, रायपुर नगर निगम कमिश्नर अवनीश शरण को भी जिला मिलना तय माना जा रहा है। स्वास्थ्यगत कारणों से इस बार उनका नम्बर नहीं लग पाया। अगले फेरबदल में अवनीश को बलौदा बाजार भेजा सकता है। दंतेवाड़ा कलेक्टर सेनापति का राज्य निर्वाचन आयोग से पंगा होने के बाद ट्रांसफर भी तय था। लेकिन, विकल्प के अभाव में अगले फेरबदल तक के लिए टाल दिया गया। इसी तरह अगली सूची में कुछ और जिले प्रभावित हो सकते हंै।

अच्छे दिन

2007 बैच की आईएएस अफसर शम्मी आबिदी को कलेक्टरी की पारी शुरू करने में विलंब हुआ। उनके कई जूनियर आईएएस कलेक्टर बन चुके हैं। मगर उपर वाले ने दिया तो….। शम्मी को कांकेर का कलेक्टर पोस्ट किया गया। और, इसके दो दिन बाद उनके पति शेख आरिफ को सरकार ने बालोद का पुलिस कप्तान बना दिया। आरिफ का यह तीसरा जिला है। इससे पहले, वे धमतरी और जांजगीर संभाल चुके हैं और कुछ दिनो ंसे पीएचक्यू में अच्छे दिन का इंतजार कर रहे थे। कलेक्टरी और कप्तानी के चक्कर में पति-पत्नी में दूरियां न बढ़े, सरकार ने इसका भी बखूबी ध्यान रखा। कांकेर और बालोद एकदम सटा हुआ है। चलिये, आरिफ दंपति के अच्छे दिन आ गए।

हैट्रिक

अलरमेल ममगई डी छत्तीसगढ़ की पहली महिला आईएएस बन गईं हैं, जिन्हें सरकार ने लगातार कलेक्टरी करने का तीसरा मौका दिया है। ममगई महासमुंद में दो साल कलेक्टर रहीं। इसके बाद ढाई साल कांकेर में और अब उन्हें रायगढ़ जैसे बड़े जिले की कमान सौंपी गई है। हालांकि, दुर्ग कलेक्टर संगीता पी और कोरबा कलेक्टर रीना बाबा कंगाले का भी तीसरा जिला है लेकिन संगीता का कवर्धा और महासमुंद के बीच बे्रक हुआ। तो इसी तरह का कुछ रीना के साथ भी हुआ। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की कोई महिला आईएएस एक-दो से ज्यादा जिला नहीं किया। बहरहाल, ममगई और संगीता दोनों सरकार के गुडबुक में हैं और आश्चर्य नहीं कि रायपुर कलेक्टर ठाकुर राम सिंह ठाकुर और बिलासपुर कलेक्टर सिद्धार्थ परदेशी का रिकार्ड ब्रेक कर दें। दोनों नाट आउट रहकर चैथा जिला कर रहे हैं।

झटका

हालांकि, डायरेक्ट आईएएस अफसरों को इससे झटका लगा होगा…..मगर सरकार ने मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रमोटी आईएएस गणेश शंकर मिश्रा पर भरोसा जताते हुए जनसंपर्क सिकरेट्री के साथ ही आयुक्त जनसंपर्क की भी अहम जिम्मेदारी सौंप दी। इससे पहले, 2006 में प्रमोटी आईएएस दिनेश श्रीवास्तव डीपीआर के साथ विशेष सचिव रहे। मगर सीपीआर कोई नहीं हुआ। मिश्रा का मीडिया के साथ रिलेशंस भी बढि़यां हैं…..बस्तर के कलेक्टर और कमिश्नर रहने के दौरान रायपुर और दिल्ली के अखबारों में वहां की खबरें छप जाती थी। इसको देखते ही सरकार ने उनका चयन किया। उनके पास आबकारी आयुक्त, आबकारी सचिव, पंजीयन और मुद्रांक सचिव का भी प्रभार यथावत रहेगा। सो, यह मानने में कोई हर्ज नहीं कि ब्यूरोक्रेसी में मिश्रा का कद और बढ़ गया है।

दो पत्नी वाले साब

दो पत्नी के चक्कर में एक आईपीएस अफसर डीआईजी नहीं बन पा रहे हैं। असल में, पहली पत्नी ने सीएम से आईपीएस की शिकायत कर दी थी। सीएम के निर्देश पर बिलासपुर के तत्कालीन आईजी डीएस राजपाल ने दबाकर जांच कर दी। जांच में इतने सारे तथ्य आ गए हैं कि पुलिस महकमा चाहकर भी अपने अफसर को बचा नहीं पा रहा है। कार्रवाई टालने के लिए विभागीय जांच जरूर शुरू कर दी गई है, जो आठ साल से जारी है। और, पुलिस विभाग की स्ट्रेज्डी के तहत आगे भी जारी रहेगी, जब तक कि आईपीएस रिटायर न हो जाएं।

कवर्धा के पीछे

पारिवारिक परिस्थितियों के चलते रायगढ़ एसपी राहुल भगत अपेक्षाकृत छोटा जिला कवर्धा में शिफ्थ हो गए। राहुल के बेटे की पिछले साल ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। राहुल की चूकि ठीक-ठाक आईपीएस की छबि है, इसलिए डीजीपी ने भी उनकी सिफारिश की थी। बताते हैं, सीएम ने खुद राहुल से बात की और कवर्धा के लिए ओके कर दिया। दरअसल, कोई नहीं चाहता था कि राहुल को फिलहाल साइडलाइन किया जाए। बहरहाल, कवर्धा भले ही वीवीआईपी जिला हो मगर आकार, प्रकार में छोटा है। यही वजह है कि वहां कलेक्टर, एसपी तो ठीक-ठाक पोस्ट किए जाते हैं लेकिन लगभग सभी की स्टार्टिंग पोस्टिंग होती है। सोनमणि बोरा से लेकर सिद्धार्थ परदेशी, मुकेश बंसल सबने शुरूआत में ही कवर्धा किया।

20-20 मैच

बजट सत्र के पहले दुर्ग एसपी की पोस्टिंग पर पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने जिस तरह से बैटिंग की है, उससे लगता है, सदन में विपक्ष 20-20 स्टाइल में ही बैटिंग करने के लिए उतरेगा। कहीं ऐसा हुआ तो मध्यप्रदेश विधानसभा में जो हुआ, उसकी पुनरावृति छत्तीसगढ़ में भी हो सकती है। वैसे भी, जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, 12 मार्च को बजट पेश होने के बाद दसेक रोज में चर्चा कराने के बाद बजट पास कर सत्र समाप्त कर दिया जाएगा।

अंत में दो सवाल आपसे

1. जनवरी में राजधानी में तीन दिन का आईएएस कार्निवाल किया गया था। उससे डायरेक्ट आईएएस अफसरों को लाभ हुआ या नुकसान?
2. अमित कटारिया को बस्तर का कलेक्टर कैसे बना दिया गया?

शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

तरकश, 22 फरवरी


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डाक्टर या बिचैलिया

नागरिक आपूर्ति निगम में कमीशनखोरी के केस में एंटी करप्शन ब्यूरो राजधानी के एक डाक्टर की तलाश कर कर रही है। एसीबी को नान के कंप्यूटर से डाक्टर का नाम मिला था। पूछताछ में यह बात सामने आई कि नान के अधिकारी डाक्टर के क्लिनिक में पैसे पहुंचाते थे और वहां से फिर आगे डिस्ट्रीब्यूट होता था। सिर्फ नवंबर और दिसंबर में डाक्टर को 70 लाख रुपए दिए गए। पीए की डायरी में भी हर तीसरा नाम डाक्टर का है। याने वह डाक्टरी छोड़कर बिचैलिया बन गया था। एसीबी अब, डाक्टर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

बड़े-बड़े लोग

पत्नी भी नौकरशाह, और खुद भी। इसके बाद भी जनाब ने इंतेहा कर दी। विभाग से हटने के बाद भी नागरिक आपूर्ति निगम को दूहने मे उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। हवाई जहाज का टिकिट से लेकर मोबाइल के बिल तक का भुगतान भी नान से होता था। तो डोमिनो से पिज्जा और केएफसी का चिकन भी। वैसे, पीए की डायरी की अगर जांच हो जाए तो कई ब्यूरोक्रेट्स के चेहरे का पानी उतर जाएगा। आईएएस अपने घर के लोगों का कपड़े भी नान से सिलवाते थे। डायरी में एक जगह लिखा है, मैडम का कपड़ा और सिलाई के लिए 29 हजार। एक जगह लिखा है, फलां मंत्रीजी के यहां शादी के लिए 11 हजार लिफाफा। साब के घर के राशन का भुगतान। फलां सर के यहां एसी तो फलां के यहां आईफोन। अक्टूबर 2013 में कुछ आईएएस विदेश गए, उन्हें डालर और यूरो दिए गए। इसका भी डायरी में उल्लेख है। डायरी में नौकरशाहों के यहां भिजवाने वाले कई ऐसे आयटम हैं, जिसको यहां लिखा नहीं जा सकता।

छोटी लिस्ट

आईएएस-आईपीएस की मेगा सर्जरी तो बजट सत्र के बाद होगी, अलबत्ता, एक छोटी लिस्ट एक-दो दिन में निकल सकती है। इनमें कुछ जिलों के कलेक्टर होंगे तो कुछ एसपी। दुर्ग एसपी डा0 आनंद छाबड़ा का नाम इनमे ंसबसे उपर बताया जा रहा है। जाहिर है, दुर्ग एसपी बदलेंगे तो एक चेन बनेगा। इसमें राजनांदगांव एसपी संजीव शुक्ला का नम्बर भी लग सकता है। दुर्ग के लिए उनका अरसे से नाम चल रहा है।

महामहिम जी!

राज्यपाल बलरामदास टंडन ने बुधवार को साक्षरता मिशन की जरूरत पर तल्खी से सवाल उठाया। उन्होंने यहां तक कह दिया, क्या अनंत काल तक साक्षरता मिशन चलता रहेगा या कभी बंद भी होगा। महामहिमजी आपको समझना चाहिए कि अगर यह बंद हो गया, तो कइयों की दुकान बंद हो जाएगी। मिशन का लगभग 200 करोड़ रुपए का बजट है। किताबों की खरीदी, छपाई, फर्जी सप्लाई, किराये की गाडि़यों पर करोड़ों का खेल होता है। मिशन ने एक मोबाइल कपनी से मोटी कमीशन लेकर उन जगहों पर भी सैकड़ों सिम बांट दिए, जहां उस कंपनी का नेटवर्क ही नहीं है। अभी दस करोड़ रुपए की पुस्तकें खरीदी जानी है। इसके लिए दिल्ली के एक प्रकाशक से डेढ़ करोड़ पेशगी मिल गई है। मिशन का आलम यह है कि काम एक ढेले का नहीं दिख रहा और खेल करोड़ों का हो रहा। 2003 में संविदा में दो सहायक प्रबंधक अपाइंट हुए, वे ही आज भी मिशन को चला रहे हैं। संविदा के लोगों को डीडीओ का पावर नहीं होता। लेकिन, वहां सब चलता है। लोग जापान से लेकर थाइलैंड तक तफरी करने जा रहे हैं। हालाकि, गड़बडि़यों की शिकायत ईओडब्लू मंे भी हुई है। अब, देखना है, नान की तरह साक्षरता पर ईओडब्लू की भौंहे कब टेढ़ी होती है।

बल्ले-बल्ले

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री बनने के बाद स्मृति ईरानी 8 मार्च को पहली बार रायपुर आ रही हैं। 8 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। वे इंडोर स्टेडियम में 10 हजार से अधिक महिलाओं को संबोधित करेंगी। इसके लिए भारत सरकार ने 90 लाख रुपए का फंड दिया है। आयोजन साक्षरता मिशन को करना है।

आवास क्रांति

सरकार का नया भाड़ा नियंत्रण कानून को आवास के क्षेत्र में क्रांति के रूप में देखा जा सकता है। पहले किरायेदार से मकान खाली करना इतना जटिल था कि लोग मकान किराये में देने से पहले दस बार सोचते थे। मगर अब एक महीने की नोटिस पर घर या दुकान खाली कराया जा सकता है। सरकार ने इसके लिए भाड़ा नियंत्रक बोर्ड को अधिकरण बनाने के बाद उसे हाईकोर्ट के समकक्ष पावर प्रदान कर दिया है। अधिकरण को अधिकतम छह महीने में फैसला देना होगा। इसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में ही हो सकती है। याने हाईकोर्ट का चक्कर नहीं रहेगा। आवास पर्यावरण सिकरेट्री संजय शुक्ला का दावा है, इस कानून से छत्तीसगढ़ में हाउसिंग फील्ड में निवेश बढ़ेगा। क्योंकि, अब मकान कब्जा करने का डर लोगों को अब नहीं खाएगा।

जवाब तलब

राजधानी के पड़ोसी पुलिस रेज के एक आईजी अपने अंदाज में काम करने के लिए जाने जाते हैं। उनके रेंज में अगर सीएम का विजिट हो, तब भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। जबकि, नक्सल बहुल प्रदेश होने के कारण सीएम के विजिट में आईजी मौजूद रहते हैं। पुलिस मुख्यालय ने इसको लेकर आईजी से जवाब तलब किया है। इसका असर हुआ है। आईजी अब हरकत मे आ गए हैं।

तीन नाम

पीसीसीएफ रामप्रकाश के रिटायरमेंट में भले ही अभी तीन महीने बचे हो मगर पर्दे के पीछे जोर-आजमाइश शुरू हो गई है। रामप्रकाश के बाद सीनियरिटी में आरके बोवाज हैं। उनके बाद बीएन द्विवेदी और बीके सिनहा का नम्बर आता है। बोवाज तो हर संभव कोशिश कर रहे हैं। मगर जरूरी नहीं कि उनका नंबर लग जाए। द्विवेदी और सिनहा कम थोड़े ही हैं। सिनहा को वन विभाग का मास्टर ब्रेन माना जाता है। लंबे समय तक नगरीय निकाय संचालक रहे हैं। अगर उनका मास्टर स्ट्रोक चल गया, तो वे भी शीर्ष पद प्राप्त कर सकते हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. नान के पीए की डायरी में किन नौकरशाहों और मंत्रियों के पीए के नाम सामने आए हैं?
2. नान की कमीशनखोरी से किस ब्यूरोक्रेट्स का आफिसर्स क्लब का लाइफटाइम फीस के रूप में 95 हजार रुपए जमा किया गया?

तरकश, 8 फरवरी

तरकश


नया नजारा

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अनुशासनहीनता के मामले में कड़े तेवर दिखाते हुए दो विधायकों को भले ही निलंबित कर दिया मगर वे अब पार्टी के लिए मुसीबत का सबब बनने वाले हैं। खास तौर से पीसीसी चीफ भूपेश बघेल और लीडर आपोजिशन टीएस सिंहदेव के लिए। सूत्रों की मानें तो निलंबित विधायक सियाराम कौशिक और आरके राय निलंबन समाप्त कराने के लिए चिरौरी नहीं करेंगे बल्कि, निलंबित रहकर पार्टी के क्षत्रपों को बेपर्दा करेंगे।़ विधानसभा के बजट सत्र में इसकी झलक देखने को मिलेगी। जब कौशिक और राय अपनी ही पार्टी के नेताओं पर तीर बरसाएंगे। सो, लोगों को अबकी सदन में नया नजारा देखने को मिलेगा। पहला मौका होगा, जब विपक्ष के भीतर ही एक-दूसरे पर तीर चलेंगे…..आरोप-प्रत्यारोप होंगे। जाहिर है, बजट सत्र अबकी काफी दिलचस्प रहेगा। सताधारी पार्टी के लिए इससे बढि़यां बात क्या होगी।

गुड न्यूज

छत्तीसगढ़ अब सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होने जा रहा है। बिलासपुर के चकरभाटा में सैन्य छावनी पर काम शुरू हो गया है। और, इधर रायपुर में एयरफोर्स का बेस स्टेशन बनाने की भी भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है। बताते हैं, मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह ने इसके लिए डिफेंस मिनिस्टर से आग्रह किया था। रायपुर न केवल एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों का रिफ्यूलिंग सेंटर होगा, बल्कि एयरफोर्स के मारक विमानों के साथ ही साजो सामान का भंडारण केंद्र भी होगा। एयरफोर्स इसके लिए माना एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया करेगा। यहां से उड़कर हवा में ही विमानों में रिफ्यूलिंग किया जाएगा। यही नहीं, रायपुर में एयरफोर्स के 10 हजार जवानों का कैम्प भी होगा। सीएम के निर्देश पर अफसरों ने तत्परता से नए रायपुर में एयरफोर्स को एक हजार एकड़ जमीन अलाट कर दिया है।

15 के बाद

पंचायत चुनाव के कारण लटकी प्रशासनिक सर्जरी अब 15 के बाद ही हो पाएगी। शनिवार शाम सीएम दिल्ली जा रहे हैं। वे 11 की शाम लौटेंगे। 15 को रेल मंत्री आ रहे हैं। उनके साथ रेल कारिडोर पर अहम मंत्रणा होने वाली है। सो, उसकी भी व्यापक तैयारी होगी। सीएम के करीबी सूत्रों का कहना है कि अब 15 के बाद ही फेरबदल होगा।

मंत्रिमंडल का पुनगर्ठन

प्रशासनिक सर्जरी की तरह मंत्रिमंडल का पुनगर्ठन भी विधानसभा के बजट सत्र तक टल जाए, तो अचरज नहीं। हालांकि, मीडिया में इसको लेकर जबर्दस्त अटकलें है। मगर उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो अभी इस पर कोई चर्चा नहीं है। बजट सत्र महत्वपूर्ण होता है। इसके पहले अगर मंत्रियों का नए सिरे से विभाग बंटवारा होगा, तो पारफारमेंस पर असर पड़ेगा। सो, इस बात से इंकार नहीं किया जा रहा कि बजट सत्र के बाद ही अब परिवर्तन हो पाए।

प्रेम में निलंबन

सूबे में एक भृत्य को डिप्टी कलेक्टर से प्रेम का इजहार करना भारी पड़ गया। बताते हैं, एक डिप्टी कलेक्टर के प्रति उसके मन मेें कुछ-कुछ होने लगा था। और, मौका देखकर उसने इसे व्यक्त कर दी। जाहिर है, इसका खामियाजा तो उसे भुगतना ही था। मैडम ने कलेक्टर से बोलकर उसे फौरन निलंबित करा दिया।

अप्रिय प्रसंग

सरकार में बैठे अफसर ही सरकार की भद पिटवाने की कोई कसर नहीं छोड़ रहे। दंतेवाड़ा कलेक्टर सेनापति के मामले में तो यही लगता है। सामान्य प्रशासन विभाग ने एक ओर तो सेनापति से लिखित में कहा कि वे चुनाव आयोग से परमिशन लेकर मनरेगा का अवार्ड लेेने दिल्ली जाएं और दूसरी ओर आला अफसरों ने फोन पर उन्हें मौखिक अनुमति दे दी। असल में, राज्य निर्वाचन आयुक्त पीसी दलेई को अफसरों ने बेहद हल्के में लिया। यहां तक कि दलेई ने सेनापति के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा तो उसे भी तवज्जो नहीं दिया गया। बताते हैं, दलेई ने निर्वाचन आयोग की गरिमा बनाए रखने के लिए जीएडी के अफसरों से आग्रह किया कि वे सेनापति के खिलाफ सांकेतिक कार्रवाई ही कर दे। लेकिन, जीएडी से उन्हें कोई रिस्पांस नहीं मिला। तो जाकर आयोग ने सेनापति के निर्वाचन अधिकार सीज कर लिए। छत्तीसगढ़ में इस तरह का पहला वाकया हुआ, जब आप कलेक्टर तो रहोगे मगर चुनाव नहीं कराओगे। इस पूरे एपीसोड में भद किसकी पिटी। सरकार की ही न। मैसेज तो यही जाएगा कि छत्तीसगढ़ में संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का खयाल नहीं रखा जा रहा। अफसर चाहते तो इस अप्रिय प्रसंग को रोक सकते थे।

अब कोर्ट में

सेनापति प्रकरण को कांग्रेस कोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया है कि पंचायत विभाग ने सेनापति को दिल्ली जाने की इजाजत नहीं दी तो अवार्ड लेने कैसे चले गए। आखिर, नारायणपुर के कलेक्टर तो नहीं गए। पंचायत विभाग ने दंतेवाड़ा जिला पंचायत के सीईओ को पुरस्कार लेने के लिए अधिकृत किया था। फिर, सेनापति ने उसे ओवरलुक कर खुद कैसे चले गए। पंचायत चुनाव के दौरान बिना किसी को चार्ज दिए वे जिले से बाहर रहे। जबकि, दंतेवाड़ा नक्सल दृष्टि से भी संवेदनशील जिला है। याने बड़ों के चक्कर में सेनापति की मुश्किलें भी बढ़ सकती है। सीआर में दर्ज होगा, सो अलग।

पावर में अदानी

अदानी ग्रुप का कारोबार अब छत्तीसगढ़ में पसरने लगा है। अभी तक ग्रुप के पास सरगुजा में कोयल के खनन काम था। मगर हाल ही में उसने रायगढ़ जिले में स्थित कोरबा वेस्ट पावर को टेकओवर किया है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. मुख्यमंत्री ने कहा, जो चुनाव जीतवाते थे, वे अब हरवा रहे हैं, उनका इशारा किसके ओर था? 
2. मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री के बीच तनातनी की बातें कहां से क्रियेट कराई जा रही?

रविवार, 15 फ़रवरी 2015

तरकश, 15 फरवरी

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पीए की डायरी

एसीबी अफसरों को नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी के पीए से मिली डायरी ने राजधानी के बड़े-बड़ों की नींद उड़ा दी है। बताते हैं, डायरी में 100 से अधिक राइस मिलरों के साथ ही कुछ नौकरशाहों के नाम मिलें हैं। जिन अफसरों के यहां पैसे जाते थे, उसका हिसाब डायरी में रहता था। उसका यदि खुलासा हो गया तो कई साफ-सुथरे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। अब, एसीबी के हाथ उन तक पहुंच पाएंगे या नहीं, यह तो वक्त बतलाएगा। मगर राइस मिलरों पर शिकंजा कसना तय है। आपको याद होगा, तीन साल पहले राइस मिलरों और सरकार में तनातनी हुई थी तो मिलरों ने अफसरों को हर साल 100 करोड़ रुपए देने का आरोप लगाया था। बाद में, मिलर पलटी मार दिए थे कि हमने एफसीआई पर आरोप लगाया था। एसीबी उस बयान को भी जांच में लेने वाली है।

जीरो टालरेंस

छत्तीसगढ़ के लोग सालों से जीरो टालरेंस की बातें सुनते आ रहे थे, मगर पहली बार गुरूवार को लोगों ने इसे महसूस किया। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि नान के आर्गेनाइज करप्शन का एसीबी इस तरह पर्दाफाश करेगा। बताते हैं, जनवरी एंड में सीएम ने उच्च स्तरीय बैठक ली थी, जिसमें एसीबी चीफ मुकेश गुप्ता से कहा था कि जीरो टालरेंस को सफल बनाने में एसीबी अहम रोल निभा सकता है। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो ऐसे बड़े छापे अब लगातार चलते रहेंगे। भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कारगर कार्रवाई करने के लिए सरकार ने मुकेश गुप्ता को एसीबी के साथ इंटेलीजेंस बरकरार रखा है। और, उपर के लोगों की मानें तो नान के खिलाफ हिला देने वाले छापे के बाद मुकेश के पास इंटेलीजेंस आगे भी बना रहेगा।

इंकम टैक्स स्टाइल

एसीबी ने नागरिक आपूर्ति निगम के मुख्यालय समेत अन्य ठिकानों पर इंकम टैक्स और सीबीआई स्टाइल में दबिश दी। एसीबी के अफसर पखवाड़े भर से इस मिशन पर काम कर रहे थे। छापे के तीन दिन पहले 28 टीमें बना ली गई थी। इसके लिए पूरे प्रदेश भर से एसीबी के साथ ही ईओडब्लू के स्टाफ को रायपुर बुलाया गया था। छापे के पूर्व रात में एसीबी चीफ मुकेश गुप्ता ने राजधानी के चुनिंदा संपादकों और पत्रकारों को डिनर दिया। तब किसी को इल्म नहीं था कि एसीबी इतनी बड़ी कार्रवाई करने जा रही है। गुप्ता भी डिनर में लगातार ठहाके लगाते रहे। डिनर के बाद पत्रकारों को बिदा करने के बाद बताते हैं, गुप्ता ने रात दो बजे तक पूरे आपरेशन का रिव्यू किया और जरूरी टिप्स दिए।

वास्तुदोष?

नगरीय निकाय के बाद पंचायत चुनाव में बीजेपी की हार कहीं उसके नए प्रदेश कार्यालय के वास्तुदोष के कारण तो नहीं हो रही है…..पार्टी के भीतर इसकी खूब चर्चा है। पार्टी नेता खुलकर इसकी शिकायत कर रहे हैं कि बिल्डिंग में वास्तु की जो खामियां रह गई थी, पार्टी उसका शिकार हो रही है। दलीलें भी दी जा रही कि विधानसभा चुनाव का संचालन पुराने कार्यालय से हुआ और पार्टी की हैट्रिक बन गई। नगरीय निकाय चुनाव की सारी बड़ी बैठकें और तैयारियां नए कार्यालय से संचालित की गई। चुनाव भी पूरी गंभीरता के साथ लड़ा गया। लेकिन, नतीजा चैंकाने वाला आया। जाहिर है, पूरे देश में जब कांग्रेस सिकुड़ती जा रही है तो छत्तीसगढ़ में वह दिनोंदिन मजबूत हो रही है…..गुटबाजी और भीतरघात जैसी कांग्रेस की बीमारी आखिर भाजपा में आ गई। राजधानी के वास्तुविद् भी मानते हैं कि पार्टी का नया दफ्तर बीेजेपी के लिए बड़ा संकट का कारण बन रहा है। पं0 देवनारायण शर्मा की मानें तो कार्यालय में दो प्रवेश द्वार हैं, एक नै़ऋत्य और दूसरा अग्नि कोण पर। वास्तुशास्त्र में इसे सर्वविनाशक माना जाता है। अध्यक्ष के बैठने की जगह भी गलत है, उत्तर-पश्चित दिशा में हाईटेंशन लाइन गुजर रहा है, जैसी वास्तु से जुड़ी अनेक खामियां हैं। हालांकि, कई लोग इस तरह की बातों पर एतबार नहीं करते मगर संकटों का दौर शुरू होने पर कई बार नास्तिक लोग भी तंत्र-मंत्र की शरण में पहुंच जाते हैं। भाजपा नेताओं की तकलीफें समझनी चाहिए

सर्जरी टलेगी?

पंचायत चुनाव के बाद होने वाली प्रशासनिक सर्जरी अप्रैल तक के लिए टल सकती है। इसके पीछे 2 मार्च से शुरू होने वाला बजट सत्र बताया जा रहा है। हालांकि, इस पर अंतिम तौर पर मुहर नहीं लगाया गया है मगर सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों का मानना है कि विधानसभा सत्र के समय कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों का ट्रांसफर उचित नहीं होगा। बजट सत्र वैसे भी महत्वपूर्ण होता है। नए कलेक्टरों से विधानसभा के जवाबों को तैयार करने में दिक्कतें होंगी। फिर, नौ जिला पंचायतों में दो रोज पहले ही नए सीईओ तैनात किए गए हैं। ऐसे में, अगर कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ, दोनों नए हो जाएंगे तो जिले का कामकाज प्रभावित होगा। जाहिर है, इस बार दर्जन भर से अधिक कलेक्टरों को चेंज करने की तैयारी है। कई इधर-से-उधर होंगे, तो कुछ ड्राप भी किए जाएंगे।

नाट आउट

पहले ही जिले में साढ़े तीन साल। आमतौर पर ऐसा होता नहीं। मगर बलौदा बाजार के कलेक्टर राजेश टोप्पो ने यह रिकार्ड बना डाला है। बलौदा बाजार को नया जिला बनाने के बाद उन्हंे वहां पहले ओएसडी और फिर कलेक्टर पोस्ट किया गया था। उस समय से वे क्रीज पर टिके हुए हैं। हर फेरबदल में उनकी चर्चा तो होती है लेकिन ऐन वक्त पर चेंज हो जाता है। चलिये, एक जिले में लंबे समय तक कलेक्टरी का रिकार्ड तो उन्होंने बना ही लिया। छत्तीसगढ़ में कोई भी कलेक्टर एक जिले में साढ़े तीन साल नहीं रहा है।

नए एमडी

सरकारी बिजली कंपनियों के सबसे अहम विद्युत वितरण कंपनी में भी अगले फेरबदल में नए एमडी की पोस्ंिटग की जाएगी। फिलहाल, सुबोध सिंह एमडी हैं और उन्हें वहां तीन साल से अधिक हो गया है। वैसे भी उन पर वर्क लोड बढ़ता जा रहा है। सिकरेट्री टू सीएम का काम ही अपने आप में काफी महत्वपूर्ण होता है। उस पर, बिजली वितरण कंपनी के एमडी होने के साथ उन्हंें माईनिंग और उद्योग की कमान भी उनके पास है। बहरहाल, बिजली वितरण कंपनी के लिए इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले आईएएस की तलाश हो रही है। छत्तीसगढ़ कैडर में ऐसे तीन आईएएस हैं। सिद्धार्थ परदेशी, मुकेश बंसल और अंकित आनंद। निश्चित तौर पर इन्हीं में से कोई एक वितरण कंपनी का एमडी बनेगा। बिजली विभाग सीएम के पास है और इसके सिकरेट्री अमन ंिसंह हैं तो जाहिर है, ठीक-ठाक आईएएस को ही इस विभाग में पोस्ट किया जाएगा।

अंत में दो सवाल आपसे

1. रायपुर में झुग्गी-झोपडि़यों की बेतरतीब बसाहट को लेकर किस कांग्रेस नेता को याद किया जाता है?
2. नागरिक आपूर्ति निगम में एमडी के पीए की डायरी में किन-किन आईएएस अफसरों के नाम हो सकते हैं?

रविवार, 25 जनवरी 2015

तरकश, 25 जनवरी

तरकश

दमदारी

झारखंड के छत्तीसगढि़यां सीएम ने रांची में ऐसा दम दिखाया कि पूरे देश की ब्यूरोक्रेसी हिल गई है। हम बात कर रहे हैं, रधुवर दास की। सोमवार को रघुवर टाप ब्यूरोक्रेट्स की मीटिंग ले रहे थे। इस दौरान चीफ सिकरेट्री सजन चक्रवर्ती ने किसी बात पर उन्हें टका सा जवाब दे दिया। इससे रघुवर आग-बबूला हो गए। उन्होंने भरी मीटिंग में चक्रवर्ती को गेट आउट कर दिया। यही नहीं, 10 मिनट में नए सीएस का आर्डर भी निकल गया। सबसे ताकतवर समझे जाने वाले आईएएस लाबी को इससे चिंतित होना लाजिमी है।

गिरेगी गाज!

इधर, पंचायत चुनाव का कोड आफ कंडक्ट लागू नहीं होता, तो छत्तीसगढ़ में भी कुछ बड़े अफसरों पर गाज गिर चुकी होती। भू-तल परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी ने नक्सल प्रभावित राज्यों के पीडब्लूडी मंत्रियों और अफसरों की मीटिंग ली थी। छत्तीसगढ़ होस्ट स्टेट था, इस लिहाज से उसका पारफारमेंस भी उसी तरह का होना था। फिर, गडकरी, ऐसे-वैसे मंत्री भी नहीं है। नागपुर के हैं, पार्टी के अध्यक्ष रहे हैं। उनके सामने जितना पुअर प्रेजेंटेशन हो सकता था, अपने अफसरों ने दिया। गडकरी इस पर खासे बिगड़े। आखिरकार, सीएम को बात संभालनी पड़ी। पता चला है, सीएम इससे बेहद दुखी हैं। मानकर चलिये, पंचायत चुनाव के बाद होने वाली सर्जरी में सीएम की नाराजगी देखने को मिलेगी।

भगवान मालिक हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर कैबिनेट सिकरेट्री अजीत सेठ ने सोमवार को आदिवासी इलाकों के डेवलपमेंट के लिए राज्यों के अफसरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग की। मीटिंग की रिपोर्टिंग सीधे पीएम को होनी थी। सो, इसके इंपोर्टेंस का अंदाजा आप लगा सकते हैं। मगर अपने अफसरों के पास इसकी तैयारी नहीं थी। कैबिनेट सिकरेट्री को फेस करना था। आ बैल मुझे मार वाली गलती क्यों करें, इसलिए, वीडियो कांफ्रेंसिंग में नीचे के अफसरों को भेज दिया गया। कैबिनेट सिकरेट्री से नीचे के अफसर भला क्या बात करते। छत्तीसगढ़ के बारे में कोई चर्चा ही नहीं हुई। ऐसे में पीएमओ में छत्तीसगढ़ की छबि कैसी बनेगी, आप समझ सकते हैं।

तेरे प्यार में पागल…..

पीएचक्यू में तैनात एडिशनल डीजी को एक महिला सब इंस्पेक्टर को मदद करना भारी पड़ गया। महिला एसआई किसी काम से एडीजी के पास गई थी और उन्होंने भले मन से फौरन उसका काम करवा दिया। एडीजी के काम करने की इसी स्टाईल पर महिला इंस्पेक्टर फिदा हो गई और, अब वह शादी करने के लिए हाथ धोकर उनके पीछे पड़ गई है। कभी सिंदूर लेकर पीएचक्यू पहुंच जाती है…..मैं तेरे प्यार में पागल। तो कभी प्यार में जान देने की धमकी देने लगती है। एडीजी को उससे पीछा छुड़ाते नहीं बन रहा। उल्टे, अब उटपटांग आरोप लगाने लगी है। हाल ही की बात है, रायपुर प्रेस क्लब पहुंचकर उसने कई सनसनीखेज आरोप लगा डाले। बताते हैं, महिला की दिमागी दशा ठीक नहीं है। मगर उसके चक्कर में कहीं ऐसा न हो कि एडीजी की मानिसक दशा खराब हो जाए। बहरहाल, आईपीएस लाबी में इस पर खूब चटखारे लिए जा रहे हैं।

वाट एन आइडिया

रातोरात एडीजी बनाए गए एक रिटायर आईपीएस ने संविदा नियुक्ति के लिए अद्भूत आवेदन दिया है। उन्हांेने लिखा है, उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए उन्हें सेवा करने का मौका दिया जाए। सरकार में पोस्टिंग का मतलब होगा कि या तो सरकारी खर्चे पर उनका इलाज होगा या पुलिस विभाग के फोकट फंड से। वाट एन आइडिया सर जी।

दो पत्नी का फेर

सरगुजा का एक शिक्षक सफलतापूर्वक दो पत्नी रखने के बाद खुद तो भगवान को प्यारे हो गए मगर जाते-जाते सरकार को फंसा डाला। उसके डबल पत्नी के चक्कर में महालेखाकर आफिस से लेकर मंत्रालय तक के अफसर हलाकान है। असल में, दो पत्नी रखने का मतलब होता है, सरकारी नौकरी से छुट्टी। और, शिक्षक ने सेवा रिकार्ड में दोनों पत्नी का नाम डाल दिया, शांति और कांति। इसके बाद भी नौकरी करता रहा। शिक्षा विभाग ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया और पीएफ, पेंशन आदि में दोनांे पत्नियों का नाम चढ़ा दिया। अब, दोनों पत्नियां पीएफ एवं पेंशन के लिए दावा ठोक दिया है। सरकार को न पेंशन देते बन रहा और ना ही रोकते। एजी आफिस और मंत्रालय के बीच छह महीने से फाइल घूम रही है।

300 करोड़ की चपत

पेट्रोल, डीजल का रेट गिरने से आम आदमी भले ही प्रसन्न हो मगर जरा छत्तीसगढ़ के फायनेंस और टैक्सेशन विभाग से पूछिए कि उन पर क्या गुजर रही है। पेट्रोल, डीजल पर सरकार को 25 फीसदी टैक्स मिलता है। दो रुपए भी कम हुआ, तो सीधे लीटर पर 50 पैसे की चोट। पिछले छह महीने में पेट्रोल का 14 रुपए रेट गिर चुका है। इस हिसाब से राज्य के खजाने को प्रति लीटर लगभग तीन रुपए की मार पड़ रही है। याने साल में तीन से चार सौ करोड़ का झटका लगेगा। एक ओर राज्य की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। सीएसआईडीसी, हाउसिंग बोर्ड और पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन जैसे संस्थाओं से पैसे लेकर वित्त विभाग काम चला रहा है। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार ने दबंगई से पेट्रोल पर टैक्स 31 फीसदी करके घाटे की एक हद तक भरपाई कर ली। लेकिन, छत्तीसगढ़ सरकार का फिलहाल ऐसा कुछ करने का इरादा दिख नहीं रहा। ऐसे में, वित्त विभाग को ही खर्चाें पर अंकुश लगाकर काम चलाना होगा।

आईएएस का वायरल

लगता है, आईएएस का डायरेक्टर और प्रमोटी का वायरल आईएफएस में आ गया है। पिछले दिनों एक सीनियर आईएएस ने डायरेक्ट और प्रमोटी की अभद्र ढंग से तुलना कर दिया था। इसके बाद आईएफएस में भी डायरेक्टर और प्रमोटी का झगड़ा सतह पर आ गया। आईएफएस एसोसियेशन से 55 प्रमोटी अफसरों ने अध्यक्ष संजय शुक्ला को अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। प्रमोटी अफसर इस बात को लेकर गुस्से में हैं कि एसोसियेशन में डायरेक्ट आईएफएस का बर्चस्व है और उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। असल में, प्रमोटी आईएफएस अफसरों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि सर्किल में पहले सीएफ बैठते थे, डायरेक्ट अफसरों ने मलाई काटने के लिए उसे सीसीएफ का पोस्ट करा दिया। सीएफ सिर्फ वन मुख्यालय में होंगे। प्रमोटी आईएफएस आमतौर पर सीएफ से उपर पहुंच नहीं पाते। ऐसे में, उन्हें सबको अब हेडक्वार्टर से रिटायर होना पड़ेगा। यही वजह है कि कुछ डीएफओ ने सीएफ प्रमोट होने की बजाए लिख कर दे दिया था उन्हें प्रमोशन नहीं चाहिए। और, प्रमोटी आईएफएस अब प्रेशर बना रहे हैं कि कुछ सर्किलों में सीएफ को भी कमान सौंपी जाए, जिससे वे बेरोजगार न हो सकें।

अंत में दो सवाल आपसे

1. राजधानी की एक ऐसी सड़क का नाम आप बता सकते हैं, जिसे बिल्डरों से दो करोड़ रुपए न मिलने पर सेंक्शन सड़क को डायवर्ट कर दिया गया?
2. आईएएस लाबी वास्तव में इतनी मजबूत हो गई है तो आरएस विश्वकर्मा, सोनमणि बोरा जैसे कई अफसरों का प्रमोशन क्यों नहीं करवा पा रही?

शनिवार, 17 जनवरी 2015

तरकश, 18 जनवरी


तरकश

 ड्राप

पंचायत चुनाव के बाद रमन मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल में कम-से-कम एक मंत्री ड्राप हो जाएं, जो अचरज नहीं। पता चला है, बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने रमन को फ्री हैंड दे दिया है कि जिसका पारफारमेंस ठीक नहीं है, उनके साथ कोई मरौव्वत न किया जाए। इसके बाद, उच्च स्तर पर जो चर्चाएं चल रही है, एक मंत्री का विकेट गिरना तय दिख रहा है। यही नहीं, तीन से चार मंत्रियों के विभाग भी बदले जाएंगे। तीन नए मंत्रियों की इंट्री होगी। सीएम के पास छोटे-बड़े 15 से अधिक विभाग हैं। पुनगर्ठन के बाद मुख्यमंत्री दर्जन भर से अधिक विभागों को दीगर मंत्रियों को ट्रांसफर करेंगे। हो सकता है, राजेश मूणत का आवास पर्यावरण अब सीएम के पास आ जाए। सूत्रों की मानें तो सीएम के पास अब सिर्फ वित्त, पावर और आवास पर्यावरण रह सकता है।

गजब के रिश्ते

राजधानी में पिछले हफ्ते केंद्रीय मंत्री जगतप्रकाश नड्डा और भाजपा के थिंक टैंक राम माधव के रायपुर आने की जितनी चर्चा नहीं हुई, उससे कहीं अधिक दोनों के सूबे के ताकतवर नौकरशाह अमन सिंह के घर जाने की रही। नड्डा तो यहां के प्रभारी महासचिव रहे हैं, सो उनके स्वाभाविक संबंध हो सकते हैं। लेकिन, राम माधव को लेकर तो पार्टी के बड़े नेता भी हैरान हैं। हवाई जहाज का टायर फट जाने पर राम माधव ने सीधे अमन सिंह को ही फोन लगाया। इसके अलावा वे पार्टी के किसी नेता से मिले और ना ही उनसे कोई बात की। वैसे भी अमन सिंह के रिश्तों और उसे मेंटेन करने का, उनके विरोधी भी दाद देते हैं। शायद ही किसी को पता होगा कि पीके फिल्म का जब भिलाई, दुर्ग में विरोध हो रहा था, तो आमिर खान ने अमन सिंह को फोन करके मदद मांगी थी। इससे पहले, इंडिया टुडे कांक्लेव में अरुण पुरी जब अमिताभ बच्चन के साथ ग्रामीण इलाके में बिजली की किल्लतों पर शेयर कर रहे थे, तो अमिताभ ने उन्हें टोका था कि छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं है…..आप कभी छत्तीसगढ़ जाइये, तो पावरफुल सिकरेट्री अमन सिंह से मिलिए। ऐसे हैं, अमन सिंह के संबंध।

300 करोड़ की चपत

पेट्रोल, डीजल का रेट गिरने से आम आदमी भले ही प्रसन्न हो मगर जरा छत्तीसगढ़ के फायनेंस और टैक्सेशन विभाग से पूछिए कि उन पर क्या गुजर रही है। पेट्रोल, डीजल पर सरकार को 25 फीसदी टैक्स मिलता है। दो रुपए भी कम हुआ, तो सीधे लीटर पर 50 पैसे की चोट। पिछले छह महीने में पेट्रोल का 14 रुपए रेट गिर चुका है। इस हिसाब से राज्य के खजाने को प्रति लीटर लगभग तीन रुपए की मार पड़ रही है। याने साल में तीन से चार सौ करोड़ का झटका लगेगा। एक ओर राज्य की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। सीएसआईडीसी, हाउसिंग बोर्ड और पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन जैसे संस्थाओं से पैसे लेकर वित्त विभाग काम चला रहा है। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार ने दबंगई से पेट्रोल पर टैक्स 31 फीसदी करके घाटे की एक हद तक भरपाई कर ली। लेकिन, छत्तीसगढ़ सरकार का फिलहाल ऐसा कुछ करने का इरादा दिख नहीं रहा। ऐसे में, वित्त विभाग को ही खर्चाें पर अंकुश लगाकर काम चलाना होगा।

शादी या शक्ति प्रदर्शन?

इस महीने के अंत में प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और अमर अग्रवाल के बेटे की शादी होगी। अमर के बेटे की 29 को और बृजमोहन के बेटे की शादी 31 जनवरी को है। इनमें से एक की तैयारी जिस अंदाज में चल रही है, उससे लगता है, छत्तीसगढ़ की अब तक की यह सबसे हाईप्रोफाइल शादी होगी। राजधानी में नेशनल हाईवे पर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के सामने 30 एकड़ जमीन का समतलीकरण किया जा रहा है। इसके लिए महीने भर से कई भीमकाय जेसीबी लगे हैं। वर-वधु को आर्शीवाद देने के लिए तीन राज्यों के राज्यपाल, तीन सीएम और दर्जन भर से अधिक केंद्रीय मंत्री के आने की सहमति मिल चुकी है। दूसरे राज्यों के दर्जन भर से अधिक मंत्री भी आएंगे। रायपुर एयरपोर्ट पर इसके लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। कई चार्टर प्लेन जो आएंगे। वैसे भी, राजनेताओं के यहां की शादियां शक्ति प्रदर्शन का जरिया तो होती ही है।

बिन बुलाए मेहमान

14 जनवरी को दिल्ली पहुंचे अपने आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों की हालत देखने लायक थी! बात यह नहीं थी कि बीेजेपी नेतृत्व ने अगले महीने होने वाले फेरबदल में उन पर खतरे की तलवार लटका दी थी। मामला था, बिन बुलाए मेहमान का। असल में, रायपुर के हाईप्रोफाइल भवन से इन मंत्रियों को शादी का न्यौता मिला था। मंत्रियों से उसके डेट देखने में चूक हो गई। हालांकि, महीना भर पहले आए शादी के मनुहार पत्र में डेट 14 जनवरी लिखा था। उसके हिसाब से मंत्रियों ने 14 का टिकिट करा लिया। इसके बाद शादी का निमंत्रण पत्र आया, उसमें मंत्रियों को 17 जनवरी को रिशेप्सन का न्यौता था। कार्ड पर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। और, उड़ गए दिल्ली के लिए। वहां छत्तीसगढ़ भवन में पता चला कि आपलोगों का रिशेप्सन का न्यौता है। मंत्रियों का मुंह अब देखने लायक था। चिंतन-मनन के बाद मंत्रियों ने तय किया कि अब आ गए हैं, तो चला जाए। सकुचाते, शर्माते हुए मंत्रीगण शादी में ही पहुंच गए। बुके दिए और कोई देखे मत, जल्दी से खिसक लिए।

सरकारी दलाल

कमल विहार का प्लाट बेचने रायपुर विकास प्राधिकरण अब दलालों का सहारा लेने जा रही है। दलालों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए आरडीए ने बकायदा आवेदन मंगाया था। 7 जनवरी इसका लास्ट डेट था। पता चला है, दो दर्जन से अधिक दलालों ने आरडीए की दलाली करने के लिए आवेदन लगाए हैं। आरडीए उन्हें एक फीसदी कमीशन देगा। उधर, हाउसिंग बोर्ड ने भी मकान बेचने के लिए दलालों की मदद लेना चालू कर दिया है। यद्यपि, इसमें सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता। मगर इसमें सबसे बड़ा खतरा यह दिख रहा कि आरडीए और हाउसिंग बोर्ड में काम करने वाले दलाल अपने को सरकारी दलाल बताना शुरू कर दिए हैं। यह ठीक नहीं है।

नागपुर की फ्लाइट

रायपुर में विमान सेवाओं की शुरूआत से ही रायपुर से नागपुर सीधे कनेक्टेड था। एयर इंडिया की फ्लाइट दिल्ली से रायपुर, नागपुर होते हुए फिर दिल्ली लौटती थी। याने सुबह में नागपुर के लिए सीधी फ्लाइट थी। मगर प्रफुल्ल पटेल के नागरिक उड्डयन मंत्री बनते ही यह सुविधा हमसे छीन गई। दरअसल, पटेल नागपुर के हैं और उन्हें दिल्ली से रायपुर होते हुए नागपुर जाने में घंटा भर समय जाया होता था, इसलिए उन्होंने रुट चेंज कराकर दिल्ली, नागपुर, रायपुर, दिल्ली करा दिया था। पटेल के हटने के बाद एक बार फिर कोशिशें शुरू हुई है कि एयर इंडिया की फ्लाइट नागपुर होकर दिल्ली जाए। लेकिन देखना होगा, यह कब तक हो पाता है।

अनूठी कोशिश

दंतेवाड़ा जैसे धुर नक्सल प्रभावित एरिया में एजुकेशन के फील्ड में काम करके देश-दुनिया में पहचान बना चुके यंग आईएएस ओपी चैधरी जांजगीर में युवाओं के कैरियर को लेकर अनूठा काम चालू किया है। जिले के 462 हाईस्कूल और 51 कालेजों में कैरियर गाइंडेस के लिए मास्टर ट्रेनर बनाया गया है। हर शनिवार को कैरियर पर अनिवार्य रुप से एक पीरियड होता है। प्रार्चायों को अनिवार्य तौर पर ओरियेंटेंशन प्रोग्राम कराया जा रहा। कलेक्टर ने 250 पेज की एक कैरियर मार्गदर्शिका नाम से पुस्तक प्रकाशित कराई है, जिसमें 75 परीक्षाओं के बारे में विस्तार से बताया गया है। चैधरी खुद भी हफ्ते में कम-से-कम दो-से-तीन स्कूल या कालेजों में जाकर क्लास लेते हैं, प्रश्न पूछते हैं, सही जवाब मिलने पर ईनाम के तौर पर कैरियर मार्गदर्शिका दी जाती है। बच्चों को इसके लिए भी मोटिवेट किया जा रहा है कि वे कैरियर में क्या बनना चाहते हैं, स्कूल में ही तय कर लें। है न अच्छी कोशिश।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एक आईपीएस अफसर चीन की सैर करने क्यों गए थे?
2. थोक के भाव में यंग आईएएस अफसर होने के बाद भी दो-तीन बड़े जिल के कलेक्टर के लिए ठीक-ठाक अफसर क्यों नहीं मि हैं?