शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

सरकार कुछ कीजिए!

 18 फरवरी
स्टेट पीएससी में कितने फाइट के बाद डीएसपी में सलेक्शन होता है। फिर, दो साल की कठिन ट्रेनिंग। उसके बाद भी पोस्टिंग के लिए रिरियाना पड़े तो फिर इससे बड़ा दुर्भाग्य नहीं हो सकता। 2016 में डीएसपी बनें अफसरों के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। ट्रेनिंग खतम होने के तुरंत बाद पुलिस मुख्यालय ने पोस्टिंग का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेज दिया था। लेकिन, महीने भर में भी आदेश नहीं निकल पाया। अफसरों को उम्मीद थी कि विधानसभा सत्र के दौरान मंत्री से लेकर अफसर तक राजधानी में रहेंगे, तो आर्डर निकल ही जाएगा। लेकिन, सत्र के 13 दिन गुजर जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। ऐसे में, सरकार को युवा अफसरों के लिए कुछ करना चाहिए।

मंत्रियों की फीस


चुनावी साल में मंत्रियों की फीस बेतहाशा बढ़ गई है। बढ़ी फीस के अनुसार पेमेंट नहीं हुआ, तो आपकी फाइल नहीं सरकेगी। वैसे, पोस्टिंग के लिए फीस लेना कई मंत्री गॉड गिफ्टेड अधिकार समझते हैं....भगवान ने उन्हें मंत्री जो बनाया है। लेकिन हद तो यह है कि अधिकांश मंत्रियों के बंगले में जेनविन फाइलें भी रोकी जाने लगी है। मंत्रियों के पीए की बे-शरमी के साथ एक ही वर्डिंग रहती है....चुनाव है साब, कुछ करना पड़ेगा। कुछ पीए तो ज्यादा आगे बढ़कर बैटिंग शुरू कर दिए हैं। उन्हें पता है, शंकर भगवान पर चढ़ावा आएगा तो लोग नंदी को थोड़े ही भूल जाएंगे। 

अब रोहित का नम्बर


सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव विकास शील को दिल्ली डेपुटेशन पर जाने की मंजूरी दे दी है। विधानसभा सत्र के बाद वे दिल्ली के लिए कूच कर जाएंगे। विकास की पत्नी निधि छिब्बर पिछले साल डेपुटेशन पर दिल्ली गई थी। तभी से माना जा रहा था कि देर-सबेर विकास भी दिल्ली का रुख करेंगे। विकास के बाद पता चला है सिकरेट्री अरबन एडमिनिस्ट्रेशन रोहित यादव भी दिल्ली जाने वाले क्यूं में हैं। रोहित की पत्नी भी दिल्ली में हैं। सो, अप्रैल, मई तक रोहित की भी दिल्ली की रवानगी हो जाए, तो अचरज नहीं।

नकल भी अकल से


एक रिजर्व केटेगरी के मंत्री ने अपने साथी मंत्रियों की देखादेखी राजधानी के कचना में डेढ़ एकड़ बेशकीमती लैंड खरीद लिया। लेकिन, रास्ता को लेकर वे फंस गए हैं। दलाल ने उन्हें उनकी जमीन से कचना मेन रोड का जो रास्ता बताया था, उस पर बेजा कब्जा है। तरुण चटर्जी के जमाने से वहां लोग रह रहे हैं। मंत्रीजी यदि उन्हें हटवाए तो चुनाव के समय अलग बखेड़ा खड़ा हो जाएगा। अब मंत्रीजी पछता रहे हैं। जमीन खरीदने के लिए नाहक कंपनी बनाई....पत्नी को डायरेक्टर बनवाया। सब बेकार हो गया। ठीक ही कहते हैं, नकल भी अकल से करनी चाहिए।

कलेक्टरों के विकेट


अमन सिंह के यूएस से लौटने के बाद कलेक्टरों के ट्रांसफर की चर्चाएं फिर तेज हो गई है। वैसे, ट्रांसफर में इस बार कई फैक्टर काम करेंगे, इसलिए लिस्ट चौंकाने वाली निकल जाए तो आश्चर्य नहीं। चुनाव कराने का एंगल अहम है ही, प्रमोटी आईएएस को एडजस्ट करना होगा, सौदान सिंह ने राज्य के दौरे के बाद फीडबैक दिए होंगे, सरकार उसका भी ध्यान रखेगी। ऐसे में, कई कलेक्टरों के विकेट गिर जाएंगे। उन कलेक्टरों को भी सरकार बदल देगी, जिन्हें पिछले साल मई में ही पोस्ट किया गया। दुर्ग कलेक्टर आउटस्टैंडिंग काम कर रहे हैं.... मगर चुनावी राजनीति और चुनावी साल में ऐसे अफसरों के साथ दिक्कत जाती है। हालांकि, सरकार के पास अफसरों का टोटा भी है। सवाल है, नए कलेक्टर के लिए अफसर लाएगी कहां से। रिजर्व केटेगरी में ही पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में हो सकता है, 2011 बैच के रेगुलर रिक्रूट्ड को ड्रॉप करते हुए पिछले साल आईएएस अवार्ड हुए कुछ अफसरों को सरकार कलेक्टर बना दें। इस बैच में जीतेंद्र शुक्ला, तारण सिनहा, सुधाकर खलको, संजय अग्रवाल आदि हैं। इनमें से भी कुछ का नम्बर लग सकता है।

आठ करोड़ का तालाब


आठ करोड़ में केनाल या डेम बने तो बात समझ में आती है। लेकिन, आठ करोड़ी तालाब.....किसी को हजम नहीं हो रहा है। नया तालाब भी नहीं। पुराने तालाब के एक्सटेंशन में जंगल विभाग ने आठ करोड़ रुपया फूंक दिया। वह भी बिना टेंडर के। कांग्रेस विधायक धनेंद्र साहू ने इसे विधानसभा में उठाया, तो सबको सांप सूंघ गया। 15 फरवरी की शाम वन मंत्री के यहां ब्रीफिंग में यह सवाल आया तो सन्नाटा छा गया। कोई जवाब नहीं सूझ रहा था। प्रकरण की गंभीरता को समझकर मंत्रीजी ने यह कहते हुए हाथ खड़ा कर दिया....भाई कुछ भी हो, आपलोगों को टेंडर तो करना ही था। इसके बाद मुंह लटकाए अफसर लौट गए। रात में नींद भी नहीं आई....सदन में कहीं हंगामा न मच जाए। लेकिन, पता नहीं कैसे धनेंद्र साहू ने इसे सवाल को तूल न देते हुए बैठ गए। वरना, वन विभाग के अफसर भी मानते हैं...आठ करोड़ में से सीधे चार करोड़ अंदर गया है।

छोटे मियां शुभांल्लाह


बड़े जिलों को पीछे छोड़ते हुए बस्तर का नारायणपुर जिला पीएम अवार्ड के इनोवेशन केटेगरी में दूसरे चरण में पहुंच गया है। नारायणपुर का काम भी हवा-हवाई नहीं। बल्कि विस्मृत करने वाला है। वहां के कलेक्टर टीपी वर्मा ने राज्य के सौर उर्जा योजना का अद्भूत क्रियान्वयन करते हुए अबूझमाड़ के 340 गांवों को विद्युतकृत कर दिया है। यहीं नहीं, नारायणपुर जैसे वनवासी इलाके के 80 फीसदी गांव अब बिजली से जगमगा रहे हैं। इसी तरह, रायपुर से लगा धमतरी पुलिस ने पेंडिंग अपराधों को समाप्त कर लोगों का ध्यान खींचा है। रजनेश सिंह ने दो महीने पहिले जब एसपी के रूप में ज्वाईन किए थे तो पेंडिंग केसेज 34 फीसदी थे। पिछले दिनों डीजीपी ने जब एसपी के वीडियोकांफें्रेसिंग किए तो धमतरी का क्राइम डेटा देखकर वे भी चकित थे। रजनेश ने धमतरी में एक ऐसे मर्डर मिस्ट्री का भंडाफोड़ किया, जिसमें सात हत्याओं का खुलासा हुआ। वर्मा राप्रसे से आईएएस बनें हैं और उनका यह पहला जिला है। और, रजनेश एकाध महीने में आपईपीएस बनने वाले हैं।

कैट की शरण में


डीआईजी केसी अग्रवाल को कैट से बड़ी राहत मिलने के बाद एएम जुरी और राजकुमार देवांगन भी कैट की शरण में पहुंच गए हैं। दोनों ने भारत सरकार द्वारा अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी है। जुरी और देवांगन ने अपनी याचिका में कहा है कि बिना उन्हें सुने ही सरकार ने नौकरी से छुट्टी कर दी। देवांगन को पिछले साल जनवरी में और अग्रवाल और जुरी को भारत सरकार ने सितंबर में फोर्सली रिटायर कर दिया था।


अंत में दो सवाल आपसे


1. क्या आईएएस गौरव द्विवेदी की विधानसभा सत्र के बाद प्रशासन अकादमी से मुख्य धारा में वापसी हो जाएगी?
2. जोगी कांग्रेस की सक्रियता को लोग उनकी कांग्रेस वापसी की संभावनाओं से जोड़कर क्यों देख रहे हैं? 
 

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

कलेक्टरी खतरे में

पंजाब सरकार के एक फैसले के बाद डीओपीटी ने प्रमोटी अफसरों की सीनियरिटी लिस्ट में संशोधन किया है। इसमें छत्तीसगढ़ के 14 आईएएस लाभान्वित हुए हैं। सीधे एक साल सीनियर। सबसे ज्यादा 2004 बैच इससे परेशान होगा। इसमें डायरेक्टर समाज कल्याण संजय अलंग से लेकर उमेश अग्रवाल, धनंजय देवांगन, टामन सिंह सोनवानी और छतर सिंह देहरे शामिल हैं। ये सभी 2005 बैच में थे, अब 2004 में आ गए हैं। इसमें अलंग और देहरे को छोड़कर तीनों कलेक्टर हैं। उमेश दुर्ग, धनंजय जगदलपुर और सोनवानी कांकेर में। सरकार ने कलेक्टरी के लिहाज से 2004 बैच को क्लोज कर दिया है। आखिरी लॉट अमित कटारिया, अंबलगन और अलरमेल का था। सरकार ने तीनों को पिछले साल ही वापिस बुला लिया था। हालांकि, ये कोई नियम नहीं है कि किस बैच को कलेक्टर रखना है। पहली पारी में तो सरकार ने सीके खेतान और आरपी मंडल को सिकरेट्री के बाद भी कलेक्टर बनाया था। फिर भी, उमेश, धनंजय और सोनवानी को टेंशन तो रहेगा ही। 

नीरा राडिया

नौकरशाहों की पत्नियां को अलर्ट हो जाना चाहिए। वे व्हाट्सएप, एसएमएस चेक करते रहें। वरना, उन्हें घोखा हो सकता है। दरअसल, एक नीरा राडिया अफसरों के बीच अपनी पैठ गहरी करती जा रही है। मंत्रालय के सीनियर आईएएस से लेकर आईपीएस, आईएफएस तक.....कौन नहीं है उसके गिरफ्त में। एक दर्जन से अधिक अफसर उसके इशारों पर नाच रहे हैं। आलम यह है कि अहम फाइलें भी युवती के कहने पर मूव हो रही हैं। नीरा राडिया के शिकारों के आप नाम सुनेंगे, तो आपको यकीं नहीं होगा....ऐसे अफसर भी लंगोट के इतने ढिले हो सकते हैं....राम-राम।


मुफ्त में प्रचार

छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य का बजट भाषण अगर टॉप टेन में पहले नम्बर पर ट्रेंड करें तो यह आश्चर्य की बात भला कैसे नहीं होगी। रमन सिंह का भाषण डेढ़ घंटे से अधिक समय तक देश में सबसे उपर ट्रेंड किया। और, ट्रेंड इसलिए भी किया कि छत्तीसगढ़़ में इसे फेसबुक पर खूब देखा गया.....आखिर, छत्तीसगढ़ के बाहर के लोग यहां के बजट तो देखे नहीं होंगे। यानी बिना किसी खर्चे के सरकार ने चुनावी बजट को जन-जन तक पहुंचा दिया। ऐसा करके जनसंपर्क संचालक राजेश टोप्पों ने सरकार का फेथ और बढ़ा लिया। दरअसल, फेसबुक लाइव का प्लान उन्होंने ही किया था। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया, जहां बजट भाषण सोशल मीडिया में लाइव हुआ। अभी तक पीएम लेवल पर इस तरह के प्रयोग होते थे। 

जोगी दांव

अजीत जोगी को न केवल अपने को प्रासंगिक रखना आता है बल्कि सियासी दांव-पेंच में भी उनका जवाब नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद जब कांग्रेस ने उन पर सोशल मीडिया के जरिये हल्ला बोला तो जोगी ने एक ही दांव में मैच का रुख ही बदल दिया। जोगी ने ऐलान किया....वो रमन सिंह के खिलाफ राजनांदगांव से चुनाव लड़ेंगे। और, सरकार के साथ उनकी हमजोली का मुद्दा टर्न हो गया। उपर से जोगी की गुगली में फंस गए टीएस सिंहदेव। जीतेंगे रमन सिंह बोलकर सिंहदेव ने बॉलर के हाथ में कैच दे दिया।


जोगी और भूपेश

कांग्रेस अब नेता प्रतिपक्ष़्ा टीएस सिंहदेव को ताकीद करने वाली है...जोगी के खिलाफ या तो बयान मत दीजिए या फिर सोच-समझकर। एक तो सिंहदेव जैसे ही जोगी के खिलाफ मुंह खोलते हैं, अमित जोगी तालाब वगैरह का मुद्दा उठाकर उन्हें बैकफुट पर कर देते हैं। पिछले छह महीने में बाबा ने जब भी जोगी के खिलाफ कुछ बोला है, अमित लंगोट पहनकर दो-दो करने के लिए मैदान में उतर जाते हैं। राजनांदगांव इश्यू में भी अमित ने उल्टे सिंहदेव को रमन का स्टार प्रचारक घोषित कर दिया। आखिरकार, सिंहदेव को बैकअप देने के लिए भूपेश बघेल को आगे आना पड़ा। अब यह स्थापित सत्य हो गया है कि जोगी के बराबर का नेता अगर कांग्रेस में है तो वो हैं भूपेश बघेल। दोनों सभी मामलों में समान हैं। तभी भूपेश टक्कर भी दे रहे हैं। 


कलेक्टरों की लिस्ट

सीएम की व्यस्तता की वजह से कलेक्टरों की लिस्ट लगातार टलती ही जा रही है। ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद सीएम का लगातार दौरा चलता रहा। और, पिछले एक हफ्ते से बजट भाषण की तैयारी में उनका पूरा अमला बिजी था। बजट निबट जाने के बाद अब सीएम से इस पर चर्चा हो सकती है, ऐसा संकेत हैं। तब तक पीएस टू सीएम अमन सिंह भी 14 को रायपुर आ जाएंगे। हालांकि, सरकार को लिस्ट निकालने में देर नहीं करनी चाहिए। इससे नुकसान राज्य का होता है। क्योंकि, जिन कलेक्टरों पर तलवार लटकी है, जिनका जिला बदलना है, व ेअब कितने मन से काम कर रहे होंगे, आप भी समझ सकते हैं।

नम्रता को एमपी कैडर

दंतेवाड़ा की नम्रता जैन यूपीएसी में 99 रैंक लाकर भी आईएएस न बन सकीं अब उनका कैडर भी मन मुताबिक नहीं मिला है। नम्रमा को मध्यप्रदेश कैडर आबंटित हुआ है। हालांकि, एमपी बड़ा राज्य है। राज्य बंटवारे के बाद छत्तीसगढ़ आए अधिकांश आईपीएस एमपी जाने के लिए हाईकोर्ट चले गए थे। फिर भी, होम कैडर का अपना अलग मजा होता है।     
मुझसे क्या भूल हुई
अमित जोगी वक्ता बड़े अच्छे हैं। उनका भाषण और भाषण देने की शैली तो पूछिए मत! लेकिन, स्पीकर से झिड़की खाने में उन्होंने सबको पीछे छोड़ दिया है। बजट सत्र के श्रद्धांजलि भाषण में भी वे अध्यक्ष की टोका-टोकी का शिकार हुए। छोटे जोगी ने ट्विटर पर अपना गम शेयर किया....मैंने कौन सी गलती की....जिसकी ये....। इंतेहा तो तब हो गई, जब 9 फरवरी को सभापति शिवरतन शर्मा ने उनकी बातें विलोपित कर कह नसीहत दे डाली.....हमने आपको सवाल पूछने का मौका दिया था, आप लगे भाषण देने।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस अफसर के सरकारी बंगले में 70 लाख रुपए के इंटीरियर का काम हो रहा है? 
2. मोतीलाल वोरा की चुनाव अभियान समिति में इंट्री कैसे मिली?




सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

सीएस को बैकअप

28 जनवरी
एक्स चीफ सिकरेट्री सुनिल कुमार को सरकार ने सीएम का एडवाइजर अपाइंट किया है। उनके आदेश में कुछ विभागों का जिक्र किया गया है….फलां, फलां काम देखेंगे। लेकिन, समझने वाले समझ गए हैं कि उनकी भूमिका क्या होगी। तभी तो इस खबर से ब्यूरोक्रेट्स सन्न रह गए। वैसे, सुनिल कुमार सिर्फ सलाहकार के तौर पर ही नहीं होंगे। यह काम तो वे अभी भी कर रहे हैं। प्लानिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमैन के साथ ही सरकार अभी भी महत्वपूर्ण मामलों में उनसे सलाह लेती है। सरकार के कहने पर उन्होंने रायपुर में स्टे को हफ्ते से बढ़ाकर 15 दिन कर दिया था। दरअसल, चुनावी बरस में सरकार को नियम-कायदों के गुणी व्यक्ति के साथ ही सिस्टम पर पैनी नजर रखने वाले एक तेज अफसर की दरकार थी। क्योंकि, राज्य में सिस्टम डिरेल्ड हो चुका है। जिलों में अराजकता के हालात हैं। ट्रांसफर्मर लगवाने और लोगों से वसूली करने वाले एई पर कार्रवाई करने के लिए सरकार को रायपुर से सिकरेट्री पावर और एमडी को भेजना पड़ रहा है। ग्राउंड पर दर्जनों योजनाएं चल रही है। इसके बाद भी सरकार को इसका कोई लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। हालत दिनोंदिन प्रतिकूल होती जा रही है। राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह ने भी राज्य के दौरे में इसे महसूस किया। बहरहाल, सुनिल कुमार के लिए प्लस यह होगा कि सौम्य और शालीन चीफ सिकरेट्री अजय सिंह भी उन्हें बेहद सम्मान देते हैं। लिहाजा, ऐसा समझा जा रहा है, इगो के टकराव वाली स्थिति भी पैदा नहीं होगी…..अलबत्ता, सीएस को बैकअप मिलेगा और, सरकार को एक मास्टर स्ट्रोक वाले अफसर।

कड़े फैसले!

पता चला है, सुनिल कुमार को मंत्रालय में बिठाकर भ्रष्टाचार के मामले में सरकार कुछ कड़े फैसले लेना चाहती है। कुमार का ऐसा ओहरा है कि अफसर चू-चाएं नहीं करते। याद होगा, प्रिंसिपल सिकरेट्री केडीपी राव को सरकार ने 2013 में बिलासपुर का कमिश्नर बना दिया था। लेकिन, अफसरों की हिम्मत नहीं पड़ी कि इस मामले में कुछ करें। सबने केडीपी का अंदरुनी मामला बताकर पल्ला झा़ड़ लिया था। अभी तो आलम यह है कि भानुप्रतापपुर एसडीएम को हटाया गया तो आईएएस एसोसियेशन पहुंच गया सीएस और सीएम के पास। सरकार एसोसियेशन के इतना प्रेशर में है कि किसी भ्रष्ट अफसर को वह नोटिस भी नहीं जारी कर सकती….गोलबंद होकर पहुंच जाएंगे सीएम के पास। सुनिल कुमार की विषय पर इतनी पकड़ है और गड़बड़ अफसरों की नस का ज्ञान….कि सरकार इसका लाभ लेना चाहेगी।

दुष्ट आत्माओं का निवारण

पीएमजीएसवाय के सीईओ और आईएफएस राकेश चतुर्वेदी के दुष्टात्मा का निवारण सरकार ने कर दिया है। लंबे समय से वे इससे परेशान थे। सरकार भी उनके लिए कुछ करना चाहती थी कि एक आत्मा रोड़ा बनकर खड़ी हो जाती थी। आखिरकार, सरकार ने सचिवालय के शिव से पूछा….आप ही बताइये, इस ब्राम्हण का उद्धार कैसे किया जाए….बेचारे का कुछ नहीं हुआ, तो पाप लग जाएगा। शिव बोले, ठहरो वत्स! मैं कुछ करता हूं….तुम सरकार हो तो क्या हुआ, कुछ आत्माएं ऐसी होती है किसी को नहीं बख्शती। नंगा से बेचारी गंगा भी परेशां हो गई थी….फिर भी मैं कुछ करता हूं। फिर, एक दिन सचिवालय के अफसरों ने बैठकर आत्मा के निवारण का रास्ता ढूंढ निकाला। शिव ने कहा कि जब तक आत्मा राकेश पर सवार रहेगी, फाइल मैं अपने पास रखूंगा। तंत्रोपचार के बाद आत्मा जैसे ही राकेश के सिर से हटेगी, मैं फाइल बढ़ा दूंगा। और, ऐसा ही हुआ। सीएम 13 को ऑस्ट्रेलिया के लिए उड़े और शिव ने फाइल आगे बढ़ाई। सीएस अजय सिंह ने अगले दिन आर्डर जारी कर दिया। अब सरकार भी राहत की सांस ले रही है और राकेश भी।

दूसरे नारायण

आरा मिल प्रकरण को निबटने के बाद राकेश चतुर्वेदी अब हवाई जहाज के टेकऑप जैसा प्रमोशन पाएंगे। अभी वे सीएफ है। इसी साल एडिशनल पीसीसीएफ के साथ ही पीसीसीएफ बन जाएंगे। प्रकरण के चलते उनका प्रमोशन नहीं हो पा रहा था। जबकि, उनके बैच वाले एडिशनल पीसीसीएफ हो गए हैं। कुछ इसी तरह आईएएस नारायण सिंह का हुआ था। मालिक मकबूजा केस में डीओपीटी ने पांच साल के लिए उनका प्रमोशन रोक दिया था। सजा की अवधि समाप्त होने के बाद नारायण सिंह छह महीने के भीतर सिकरेट्री से प्रिंसिपल सिकरेट्री और फिर एडिशनल सीएस बन गए थे।

मंत्री को ब्रम्हज्ञान

ठीक ही कहते हैं, ज्ञान हासिल करने के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है। अपने एक मंत्रीजी भी इन दिनों विदेश की सैर पर हैं। वहां से वे रोज बौद्धिक ट्विट कर रहे हैं…..राजनीति में शतरंज के नियम लागू होने चाहिए….शतरंज के मोहरे कम-से-कम अपनों को तो नहीं मारते। अगले दिन फिर….सोनार का कचरा भी बनिये के बादाम से महंगा होता है। ट्विट पढ़कर मंत्रीजी के लोग हैरान हैं….भाई साब अचानक इतने डीप ज्ञान की बात कैसे करने लगे। वो भी पंद्रहवें साल में। उधर, उनके विरोधी पता लगा रहे हैं कि वो जगह कौन-सी है, जहां मंत्री को ज्ञान की प्राप्ति हो गई….कोई वृक्ष है या कोई विशिष्ट होटल।

छोटा बजट सत्र

विधानसभा का बजट सत्र अब तक का सबसे छोटा बजट सत्र होगा। सिर्फ 15 दिन का। 5 फरवरी से शुरू होकर 28 को अवसान हो जाएगा। हो सके तो इससे पहिले भी निबट जाए। क्योंकि, चुनावी बरस में किसी को सत्र की नहीं पड़ी है। विधायकों का मन अटका रहेगा अपने इलाके में। विपक्ष भी कोई उत्साहित नहीं दिख रहा है। इससे पता चलता है, जिस दिन सत्र प्रारंभ होगा, कांग्रेस विधायक दल की बैठक उसी दिन शाम को आहूत की गई है।

पिछड़ी बीजेपी

चुनाव के 10 महीने पहिले जिस तरह से नेताओं के बीच ट्विटर वार शुरू हुआ है, माना जा रहा है कि अगले चुनाव में सोशल मीडिया एक बड़ा फैक्टर होगा। बहरहाल, तमाम संसाधनों के बावजूद सोशल मीडिया में बीजेपी बुरी तरह पिछड़ती जा रही है। अधिकांश भाजपा नेता या तो सोशल मीडिया से दूर है या फिर उन्हें हैंडिल करने नहीं आता। पार्टी पूरी तरह सरकारी प्रचार तंत्र पर निर्भर हो गई है। लेकिन, लाख टके का सवाल है, अचार संहिता प्रभावशील होने के बाद क्या होगा। कांग्रेस ने शैलेष नीतिन त्रिवेदी को दोबारा लोकर अपनी मीडिया टीम को कस दिया है। वहीं, बीजेपी इस लेवल को छू भी नहीं पा रही। भाजपा की मीडिया टीम में अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिनका मीडिया से कभी रिश्ता रहा नहीं। इसके उलट कांग्रेस की मीडिया टीम को दाद देनी पड़ेगी….पूरा डिवोशन है। मीडिया के न केवल वे संपर्क में है बल्कि छपे चाहे न छपे, सरकार के खिलाफ सामग्रियां भरपूर मुहैया कराई जा रही है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. कौन से आईजी एक एनजीओ संचालिका के गिरफ्त में उलझते जा रहे हैं?
2. एक बड़े अफसर का नाम बताइये, जो सरकार की नजर में धीरे-धीरे अप्रासांगिक होते जा रहे हैं?

मंगलवार, 30 जनवरी 2018

गुड मार्निंग सर….

सीएम के ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद कलेक्टरों के ट्रांसफर की अटकलें शुरू हो गई है। दरअसल, एसपी की लंबी लिस्ट निकलने के बाद कलेक्टरों की सूची भी निकलनी थी। लेकिन, सीएम की व्यस्तता के चलते चर्चा हो नहीं पाई। और, 13 जनवरी को वे ऑस्ट्रेलिया विजिट पर रवाना हो गए। वहां से उनके लौटने के बाद कलेक्टरों की धुकधुकी एक बार फिर तेज हो गई है। सीनियर अफसरों को वे रोज सुबह-शाम गुड मॉर्निंग और गुड इवनिंग का मैसेज भेज रहे हैं। ताकि, लिस्ट बनते समय कम-से-कम उनका नाम तो याद रहें।

वेटिंग कलेक्टर्स

दीगर राज्यों में 2011 बैच के कलेक्टर दूसरा जिला कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में अभी 2010 बैच ही पूरा नहीं हुआ है। इस बैच की रानू साहू बच गई हैं। 2011 बैच में भी एक-दो नही, पूरे छह आईएएस हैं। अब सबको इस सरकार में चांस मिलना मुमकिन नहीं है। बहुत हुआ तो दो। बाकी को विधानसभा चुनाव तक वेट करना होगा। कलेक्टरों की लिस्ट बनाते समय सरकार को इस पर भी मशक्कत करनी होगी। राप्रसे से आईएएस बने अफसरों की भी अपनी दावेदारी है। सरकार प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या और बढ़ाने पर विचार कर रही है। अभी प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या छह है। दुर्ग, जगदलपुर, कांकेर, नारायणपुर, मुंगेली और कोरिया। याने छह। पिछले चुनाव के समय 11 प्रमोटी कलेक्टर्स थे। जाहिर है, सरकार कम-से-कम चार प्रमोटी को और जिलों में भेजना चाहेगी। इस बार विधानसभा चुनाव कुछ अलग टाईप का होगा। जातिगत दांव-पेंच भी अजमाए जाएंगे। ऐसे में, कलेक्टरों की लिस्ट में जाति का तड़का भी लगेगा ही। सर्वाधिक फोकस इस बार दलित वोटों पर होगा। सरकार के पास दो दलित कलेक्टर हैं और दोनों आदिवासी इलाका बस्तर में। ट्राईबल की संख्या भी दो ही है…..सिर्फ मुंगेली और कोरिया। पिछले विधानसभा चुनाव में सिर्फ बस्तर में ही तीन आदिवासी कलेक्टर थे। जगदलपुर में भी ट्राईबल कलेक्टर रहे एमएस परस्ते। इस बार बस्तर में एक भी आदिवासी कलेक्टर नहीं हैं। लगता है, इसी गुणा-भाग में कलेक्टरों की लिस्ट में देरी हो रही है।

ग्रह-दशा का फेर

88 बैच के सबसे सीनियर आईपीएस संजय पिल्ले को इस महीने डीजी बन जाना था। लेकिन, बैच के चक्कर में बेचारे उलझ गए हैं। दरअसल, 88 बैच में तीन आईपीएस हैं। संजय के अलावा आरके विज और मुकेश गुप्ता। मगर पोस्ट एक ही वैकेंट है। राज्य सरकार चाहती है कि तीनों को एक साथ डीजी बनाया जाए। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है…. भारत सरकार से दो और पोस्ट की मंजूरी मिल जाएं। पुराने चीफ सिकरेट्री ने केंद्रीय गृह सचिव को डीओ लेटर लिखा था। लेकिन, बात बनी नहीं। सरकार अब ऑस्ट्रेलिया से लौटी है तो लोगों की उत्सुकता बढ़ी है। वैसे, राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार है….छत्तीसगढ़ में 15 साल के सीएम भी…..इसलिए माना जा रहा है कि सरकार को कामयाबी मिल जाएगी। फिलहाल, संजय पिल्ले को इंतजार करना होगा।

शराब और संस्कृति

सरकार की कुछ पोस्टिंगे बड़ी बेमेल होती है। आईएएस जीतेंद्र शुक्ला को सरकार ने पहिले दारु बेचने का काम सौंपा और अब संस्कृति विभाग का डायरेक्टर बना दिया है। याने शराब और संस्कृति साथ-साथ। वैसे पता नहीं क्यों, दारु बिकवाने का काम सरकार पंडितों को ही सौंपती है। गणेश शंकर मिश्रा भी लंबे समय तक शराब विभाग के कमिश्नर रहे और सिकरेट्री भी। उनके बाद अशोक अग्रवाल इस पद पर जरूर आए, मगर सेकेंड पोजिशन पर जीतेंद्र शुक्ला को सरकार ने बिठा दिया। इसी तरह हेल्थ डिपार्टमेंट में जंगल विभाग के अधिकारी अनिल साहू सिकरेट्री हैं। अब, भला जंगल और हेल्थ का क्या संबंध?

गणेश होंगे रेरा मेम्बर?

विवेक ढांड को रेरा का चेयरमैन बनाने के बाद अब उसके दो मेम्बर्स अपाइंट करने का प्रासेज जल्द ही शुरू होगा। हालांकि, रेरा चेयरमैन के साथ मेम्बर्स के लिए भी आवेदन जमा किए गए थे। लेकिन, कमेटी ने सिर्फ चेयरमैन का नाम तय कर बाकी को खारिज कर दिया था। रेरा मेम्बर के लिए वैसे तो एक दर्जन से अधिक दावेदारी सामने आ रही है। लेकिन, अक्टूबर में रिटायर हुए प्रिंसिपल सिकरेट्री गणेश शंकर मिश्रा इसके मजबूत दावेदार हैं।

11 साल में 5000 पौधे

वर्ल्ड में सबसे महंगे पौधे छत्तीसगढ़ के वन विभाग के नर्सरी में तैयार हो रहे हैं। इस गौरवमयी उपलब्धि का खुलासा 23 जनवरी को विभाग के प्रेजेंटेशन के दौरान हुआ तो सीएस अजय सिंह भी हैरान रह गए। दरअसल, सीएस सभी विभागों के कामकाज को समझने के लिए इन दिनों रिव्यू कर रहे हैं। फॉरेस्ट की बारी आई तो सीएस ने पौधे तैयार करने की व्यवस्था और उसके रिजल्ट पर सवाल किया। अरण्य भवन के अफसरों ने उन्हें बताया कि डेढ़ करोड़ की लागत से टिश्यू कल्चर बनाया गया है। वहां 5 हजार पौधे तैयार किए गए हैं। सीएस ने पूछा, कितने दिन में? अफसरों ने बताया 11 साल में। इस पर सीएस कुछ देर तक शून्य से हो गए।

अच्छे दिन आयो रे

वन विभाग भले ही 11 साल में पांच हजार पौधे उगाता हो लेकिन, अब उसके अच्छे दिन आ गए हैं। आरा मिल प्रकरण में एक-एक करके सभी को बरी कर दिया गया था। सिर्फ दो माटी पुत्र बच गए थे। अब दोनों को राहत मिलने के संकेत मिल रहे हैं। वहीं, खबर है पीसीसीएफ के दो पदों के लिए डीपीसी होने जा रही है। इसमें एके द्विवेदी और केसी यादव को पीसीसीएफ बनने का मौका मिल सकता है। वजह? अब बदले की भावना वाला मामला नहीं रह गया है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. रियल इस्टेट के बड़े खिलाड़ियों ने किस अफसर के सम्मान में कचना के फार्म हाउस में कॉकटेल पार्टी दी?
2. सरकार का ऐसा कौन सा विभाग है, जिसमें सिर्फ बाहरी ठेकेदारों एवं सप्लायर्स को काम दिया जाता है?

गुरू ज्ञान केंद्र

यह एक इत्तेफाक हो सकता है, मगर पुराने मंत्रालय के सामने का इलाका अब रिटायर नौकरशाहों का रिहैबिलिटेशन जोन बन गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुर राम सिंह यहां पहले से थे। अब टॉप लेवल के तीन और आ गए हैं। विवेक ढांड, एमके राउत और डीएस मिश्रा। तीन महीने पहिले सहकारिता आयोग के चेयरमैन बनकर डीएस मिश्रा आए। फिर, मुख्य सूचना आयुक्त एमके राउत और लास्ट में रेरा चेयरमैन विवेक ढांड भी। मुख्य सूचना आयुक्त और रेरा की बिल्डिंग तो एकदम अगल-बगल है। खाली रहने पर ढांड और राउत खिड़की खोलकर बतिया सकते हैं। यही नहीं, रिटायर होने के बाद आरपी जैन भी विभागीय जांच आयुक्त बन इसी जोन में टाईम बिता रहे हैं। रिटायर आईएएस अशोक अग्रवाल और रिटायर पीसीसीएफ एके सिंह भी सूचना आयुक्त हैं। इस रिहैबिलिटेशन जोन में कम-से-कम आधे दिन का समय लेकर जाना चाहिए। क्योंकि, इससे कम में होगा भी नहीं। वैसे, यंग ब्यूरोक्रेट्स को गुरू ज्ञान के लिए इस जोन में जाना ही चाहिए। वहां डिफरेंट टाईप के ज्ञानी लोग बैठे हैं। फास्ट काम करने से लेकर काम कैसे नहीं करना है….बिना काम किए भी अच्छा कैसे कहलाया जा सकता है….जनता को उल्लू बनाना, नेताओं को मिसगाइड करना….कम्बल ओढ़कर घी पीना….मलाईदार पोस्टिंग प्राप्ति गुर….क्रीज पर टिकने का कौशल…..रिटायरमेंट के बाद मनचाही पोस्टिंग प्राप्ति कला से लेकर तमाम तरह के तीन-तिकड़म, गुणा-भाग सब सिखने को मिल जाएगा। ऐसे गुरू ज्ञान केंद्र में अफसरों को तो मत्था टेकना ही चाहिए न।

सीएस की उलझन

खबर है, नए चीफ सिकरेट्री अजय सिंह बंगले को लेकर उलझन में हैं। सिंह पिछले 17 साल से शंकर नगर के सरकारी आवास में रह रहे थे। सीएस बनने के बाद उन्हें अब चीफ सिकरेट्री के इयर मार्क बंगले में शिफ्थ होना पड़ेगा। विवेक ढांड ने रेरा का आर्डर निकलने से पहिले ही इस बंगले को खाली कर दिया था। सीएस के सामने दिक्कत यह है कि नए बंगले में जाने पर उन्हें अपना पुराना घर खाली करना होगा। दो बंगला वे रख नहीं सकते…..लोग लगेंगे उंगली उठाने। और, खाली कर दिए तो….? दो साल बाद जब रिटायर होंगे, तो बेचारे कहां जाएंगे। पत्नी मेडिकल कॉलेज की डीन हैं….राजधानी में उन्हें ठीक-ठाक सरकारी घर कहां मिलेगा। जाहिर सी बात है, 17 साल से जिस घर में रह रहे हों तो दिक्कत तो होगी। फिर, पुराना बंगला उनके लिए शुभ भी तो रहा है….मुख्य सचिव की कुर्सी तक पहुंच गए।

चुनाव आयोग का लोचा

हफ्ते भर के भीतर छत्तीसगढ़ के दो आईएएस विदेश यात्रा से वंचित हो गए। विवेक ढांड और सुब्रत साहू। दोनों के लगेज तैयार था। लेकिन, विदेश यात्रा का योग नहीं था। ढांड तो रेरा चेयरमैन अपाइंट होने के कारण टीम रमन के ऑस्ट्रेलिया विजिट में शामिल नहीं हो पाए। सुब्रत में चुनाव आयोग ने अडं़गा लगा दिया। दरअसल, सुब्रत राज्य निर्वाचन अधिकारी हैं। लिहाजा, भारत निर्वाचन आयोग उनकी अथॉरिटी है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर के साथ श्रीलंका जाने के लिए अनुमति मांगी। लेकिन, आयोग ने स्पष्ट तौर पर इंकार कर दिया। इसके कारण उनकी टिकिट केंसिल कराई गई है। इसीलिए तो कोई अफसर राज्य निर्वाचन अधिकारी बनना नहीं चाहता। इस पोस्ट पर राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रहता। विदेश जाने के मौसम में छोटे-छोटे अफसर फॉरेन जा रहे हैं। लेकिन, प्रिंसिपल सिकरेट्री होने के बाद भी आयोग ने उन्हें रोक दिया।

यूपी में दम है

कांग्रेस की नई कार्यकारिणी के बाद पार्टी कितनी मजबूत हुई है, इस बारे में कुछ कहना अभी जल्दीबाजी होगी। मगर इतना तो सही है कि सूची जारी होने के बाद पार्टी प्रभारी पीएल पुनिया बेहद ताकतवर हो गए हैं। लिस्ट जारी होने के बाद पूरी पार्टी उनके पीछे दौड़ रही है। आखिर कौन नहीं है….माटी पुत्र कांग्रेसी से लेकर गैर माटी पुत्र तक। पांच-पांच, छह-छह बार के विधायक, मंत्री सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री तक। रिटायर ब्यूरोक्रेट्स पुनिया यूपी से हैं। वे न कभी विधायक रहे, न मंत्री। राजनीति पोस्ट के तौर पर सिर्फ केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष का तजुर्बा है। इसके बाद भी कमाल देखिए! ठीक ही कहते हैं, यूपी में दम है। छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी में जिधर देखिए, यूपी वाले ही मिलेंगे।

कलेक्टरों की लिस्ट

टीम रमन के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद कभी भी कलेक्टरों की लिस्ट निकल सकती है। हालांकि, 5 फरवरी से विधानसभा का बजट सत्र प्रारंभ होने जा रहा है। लेकिन, अब तो सत्र के दौरान भी ट्रांसफर हो जाते हैं। इसलिए, सत्र का भी लोचा नहीं है। वैसे, लिस्ट छोटी ही होगी। अधिकतम आधा दर्जन जिले प्रभावित हो सकते हैं। वैसे, दो-एक बड़े जिलों के पुअर पारफारमेंस वाले कलेक्टरों को भी बदलने की भी चर्चा है। बहरहाल, सरकार चाहेगी कि नए कलेक्टरों को जिले को समझने का मौका मिले। अगस्त में चुनाव अचार संहिता प्रभावशील हो जाएगी। इसलिए, लगता नहीं कि अब इस कार्य में सरकार देर करना चाहेगी।

श्रीलंका पर सवाल

विदेश जाने के इस मौसम में एक-के-बाद एक मिनिस्टर फॉरेन जा रहे हैं। केदार कश्यप निकल चुके हैं। अजय चंद्राकर और राजेश मूणत रवाना होने वाले हैं। मूणत तो अबकी गणतंत्र दिवस भी चीली-वीली में कहीं मनाएंगे। लोगों को आश्चर्य अजय चंद्राकर के श्रीलंका यात्रा पर हो रहा है। श्रीलंका तो अपने पैसे से भी जाया जा सकता है। और फिर मंत्री श्रीलंका, नेपाल और मालद्वीप जैसे देशों में थोड़े ही जाता है। यूएस, यूरोप जाना चाहिए। चंद्राकर को कम-से-कम अपने अफसरों का तो खयाल करना चाहिए था। जा रहे हैं विदेश और नाम है श्रीलंका।

मैं तुझसे मिलने आई….

इस हफ्ते दो व्हाट्सएप खूब मूव हुए। पहला, इजराइली पीएम नेतन्याहू का….नेतन्याहू छत्तीसगढ़ के मूल वाशिंदे हैं….उनका असली नाम नेतराम साहू है। और दूसरा, बरसो पहले गाया गया गाना….मैं तुझसे मिलने आई, मंदिर जाने के बहाने…..इस बार सही उतरेगा….14 फरवरी को वेलेंटाईन डे है और महाशिवरात्रि भी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. सीडी कांड में सीबीआई ने किन दो बड़े लोगों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य जुटा लिया है?
2. जोगी कांग्रेस की विधानसभा प्रत्याशियों की तीसरी लिस्ट क्यों अटक गई है?

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

रमन मिलाई जोड़ी

13 जनवरी
अजय सिंह के सूबे के चीफ सिकरेट्री बनने के बाद छत्तीसगढ़ के 80 हजार स्केल वाले तीनों शीर्ष पोस्ट पर अब एक राशि के अफसर हो गए हैं। तीनों का स्वभाव लगभग एक समान है। बेहद कूल। सौम्य और शालीन। डीजीपी एएन उपध्याय का चेहरा ऐसा है कि कोई कितने भी गुस्से में जाए, निकलने पर बोलेगा….काम नहीं हुआ मगर आदमी शरीफ हैं। उनके डीजी बनने के बाद गुटबाजी से लेकर पीएचक्यू की दुकानें बंद हो गई है….सरकार को आखिर क्या चाहिए। पीसीसीएफ आरके सिंह लंबे समय तक विदेशों में रहे हैं। इसलिए, रहते हैं हमेशा सूटेड-बूटेड। लेकिन, सज्जनता और ईमानदारी तो पूछिए मत! रिजल्ट देने वाले अफसर में उनकी गिनती होती है। रही-सही कसर अजय सिंह को चीफ सिकरेट्री बनाकर मुख्यमंत्री ने पूरी कर दी है। चलिये, ऑस्ट्रेलिया में डाक्टर साब चैन से रहेंगे, काम भले ही फास्ट नहीं हो लेकिन, उंच-नीच नहीं होगी, इसकी पूरी गारंटी रहेगी।

रेरा का पेड़ा

चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड आखिरकार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के चेयरमैन बनने में कामयाब हो गए। इसके लिए उन्होंने चीफ सिकरेट्री की कुसी ढाई महीने पहिले ही छोड़ दी। रेरा का चेयरमैन बनने वाले वे देश के दूसरे चीफ सिकरेट्री होंगे। उनसे पहिले मध्यप्रदेश के रिटायर चीफ सिकरेट्री डिसूजा को शिवराज सरकार ने इस मलाईदार कुर्सी पर बिठाया था। जबकि, वहां भी रेरा के पेड़ा के लिए दर्जनों लोग लगे थे। डिसूजा और ढांड में फर्क यह है कि ढांड रिटायरमेंट से पहिले वीआरएस लेकर रेरा की चेयरमैनी संभाली है। बिल्डरों पर अंकुश लगाने के कारण रेरा चेयरमैन की कुर्सी को जलवादार के साथ ही मलाईदार मानी जा रही है।

कांग्रेस को बेचैनी

चुनावी साल में सरकार का लोक सुराज कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन सकता है। क्योंकि, क्योंकि सरकार इसे कैश करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। अब, बलौदा बाजार के खैरा गांव को ही लें। सीएम का हेलिकाप्टर वहां लैंड किया। डाक्टर साब ने भाषण के अंत में कहा कि आपलोगों की सेवा करता रहूं, इसके लिए आप लोग दोनां हाथ उठाकर मुझे आर्शीवाद दीजिए। इस पर सैकड़ों हाथ उठ गए। अब, किसे पता वे सेवा करने का आर्शीवाद मांगे या चौथी पारी के लिए। मंत्रियों के जनसमस्या शिविरों पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस के जाहिर है, इससे बेचैनी बढ़ेगी।

कोई इधर गिरा, कोई….

डीआईजी की पोस्टिंग देखकर आपको लगा होगा कि क्यों सूबे के कुछ आईपीएस डेपुटेशन के लिए खूंटा तूड़ा रहे थे। इस बार 11 आईपीएस डीआईजी प्रमोट हुए हैं। इनमें से सिर्फ नेहा चंपावत लकी रहीं। उन्हें पति मिला….पति मिलने का आशय आप गलत मत निकालियेगा….वो कोई खोए नहीं थे। किसी बात पर सरकार ने अविनाश चंपावत को रायपुर से सरगुजा भेज दिया था। कमिश्नर बनाकर। नेहा को डीआईजी प्रमोट करने के बाद सरकार ने रहम दिखाई। सरगुजा में छत्तीसगढ आर्म्स फोर्स में डीआईजी का एक नया पोस्ट क्रियेट कर अब उन्हें भी वहां भेज दिया है। बचे दस। उन बेचारों को तो पूछिए मत…कोई इधर गिरा, तो कोई उधर। पत्नी, बच्चे, डॉगी तक दुखी हैं। डीआईजी बनने वालों में पांच तो बड़े-बड़े जिलों के कप्तान थे। कप्तानी के बाद उन्हें पेवेलियन में दर्शक बनाकर बिठा दिया गया है। अब एक गाड़ी, एक घर में काम चलाना पड़ेगा। जिले का आरआई तो घर से लेकर बाहर तक का इंतजाम देख लेता था। रायपुर में दर्जनों आईपीएस हैं, यहां का आरआई किसको-किसको देखेगा। यही तो अंतर है, आईएएस और आईपीएस में। आईएएस में पावर बढ़ता जाता है। आईपीएस में एसपी के बाद सब खतम। इसमें तीन ही महत्वपूर्ण होते हैं, थानेदार, एसपी और डीजीपी। जीपी सिंह और दीपांशु काबरा जैसे आईजी हों तो बात अलग है। वरना, आईजी में 25 फीसदी ही रुतबा रह जाता है। बहरहाल, डीआईजी लोगों को सहानुभूति की जरूरत है। अब अगले पांच साल उन्हें जमापूंजी में से काम चलाना होगा।

कलेक्टरों की लिस्ट

एसपी, डीआईजी लेवल पर बड़ी सर्जरी के बाद ब्यूरोक्रेसी में कलेक्टरों के ट्रांसफर की अटकलें चल रही थी। लेकिन, पता चला है कलेक्टरों के ट्रांसफर अब टीम रमन के ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद ही हो पाएगा। वैसे, नाम कम हैं, इसलिए सरकार भी बहुत जल्दी में नहीं है। बावजूद इसके, कलेक्टरों की रात की नींद उड़ी हुई है….जबकि, सीएम ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। आखिर, वे सीएम के चीन प्रवास को भूले नहीं हैं। दो साल पहिले रायपुर से टेकऑफ करने के 15 मिनट बाद इंडिगो का प्लेन जब 20 हजार फुट की उंचाई पर पहुंचा तो सीएम ने अफसरों से बात करके लिस्ट को ओके कर दिया था। और, दिल्ली एयरपोर्ट से ही मीडिया को सूची जारी हो गई थी। कलेक्टरों को लग रहा, क्या पता 14 जनवरी को दोपहर ऑस्ट्रेलिया के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट में बैठने से पहिले कुछ अनहोनी हो जाए। ऐसे में, उनकी बेचैनी समझी जा सकती है।

हमारी उमर लग जाए….

सरकार ने एक झटके में 15 जिलों के एसपी बदल दिए। पहली बार लिस्ट ऐसी निकली कि दो-एक को छोड़कर सभी सरकार को दुआएं दे रहे हैं….तुमको हमारी उमर लग जाए। जो दुखी हैं, वो भी हंड्रेड परसेंट नहीं, फिफ्टी परसेंट। पारुल माथुर बेमेतरा में एसपी रह चुकी हैं। तीन साल से वे रेलवे एसपी थीं। इसके बाद भी उन्हें मुंगेली एसपी बनाकर भेज दिया गया, जो किसी आईपीएस का पहला जिला होता है। नीथू कमल का पहला जिला मुंगेली ही था। लोग इस पर चुटकी ले रहे हैं, पारुल के आईपीएस पिता राजीव माथुर से जरूर पीएचक्यू के किसी अफसर से नाराजगी रही होगी, वरना….। दूसरे दुखियारे हैं, डी श्रवण। श्रवण लंबे समय बस्तर में रहकर पिछले साल ही कोरबा पहुंचे थे। इस आस में कि अब दो-चार साल सुकून के साथ मैदानी इलाके में गुजरेगा। लेकिन, उन्हें फिर बस्तर भेज दिया गया। इन दोनों के अलावे बाकी सबकी निकल पड़ी। मयंक श्रीवास्तव तक कोरबा एसपी बन गए। आरिफ शेख बस्तर से बिलासपुर, दीपक झा बालोद से रायगढ़ और मुंगेली एसपी नीथू कमल को जांजगीर जैसा जिला मिल गया, जहां 2004 बैच के अजय यादव एसपी थे। नीथू 2008 बैच की हैं। रायपुर एसपी संजीव शुक्ला को बिना मांगे मुराद मिल गई। वे चाहते थे, भले पीएचक्यू में ही पोस्ट कर दो, लेकिन यहां से शिफ्थ करो। वे दुर्ग जैसे जिले की कमान पा गए। सालों से बस्तर में पड़े नारायणपुर एसपी संतोष सिंह वहां से निकलने में सफल हो गए। उन्हें महासमुंद जिला मिल गया। एसपी को देखकर कलेक्टर भी प्रार्थना कर रहे….हमारी सूची भी ऐसी ही निकले।

बी फॉर…..

हालांकि, इसे एक संयोग कह सकते हैं, लेकिन आईपीएस आरिफ शेख के साथ लगातार चौथी बार हुआ है। बी नाम वाले जिले में वे चौथी बार एसपी बने हैं। बालोद, बलौदा बाजार, बस्तर और बिलासपुर। आरिफ के साथ एक इत्तेफाक यह भी रहा है, एक साल के भीतर उनका तीसरी बार ट्रांसफर हुआ। बालोद से बलौदाबाजार, फिर बस्तर और वहां से बिलासपुर। और, यह भी…उन्होंने बद्री मीणा के सात जिले की बराबरी भी कर ली है। गरियाबंद, धमतरी, जांजगीर, बालोद, बलौदा बाजार, बस्तर और बिलासपुर।

अंत में दो सवाल आपसे

1. शैलेष नीतिन कांग्रेस के मीडिया सेल के फिर प्रमुख बनाए गए हैं और पूर्व पत्रकार विनोद वर्मा भी अंदरखाने से मीडिया को ही टेकल करते हैं। ऐसे में, दोनों के बीच टकराव तो नहीं होगा?
2. बालोद जैसे छोटे जिले से जम्प लगा दीपक झा सीधे रायगढ़ के एसपी बन गए। ये कैसे हुआ?

ऐ दिल है मुश्किल…!

7 दिसंबर
वेटिंग सीएस अजय सिंह का प्रोबेशन इतना लंबा खींचता जा रहा है कि अब लोग भी कहने लगे हैं सरकार माटी पुत्र के धैर्य की परीक्षा ले रही है। कहां, दिसंबर को लेकर उम्मीदें थी। अब जनवरी आया तो टीम रमन का ऑस्ट्रेलिया ट्रिप। वहां से लौटते ही 5 फरवरी से विधानसभा। फिर, उसके बाद मार्च में लोक सुराज। जरा सोचिए! इन कड़ियों को जोड़कर अजय सिंह का दिल बैठने नहीं लगता होगा। पंडरिया के इस ठाकुर अफसर की पीड़ा उनके मोबाइल के रिंग टोन से समझी जा सकती है…..तू ही सफर मेरा….तू ही मेरी मंजिल….तेरे बिना गुजारा…..ऐ दिल है मुश्किल। कम-से-कम ठाकुरों को ठाकुर की पीड़ा को समझना चाहिए।

बड़ी देर कर दी….

आईएएस अजय सिंह ही नहीं, छत्तीसगढ़ के 11 आईपीएस प्रमोशन के लिए दिसंबर से टकटकी लगाए हैं। अलबत्ता, डीआईजी कहलाने का चार्म भी धीरे-धीरे खतम होते जा रहा है। आखिर, कोई भी चीज समय पर होता है तो उसका एनजायमेंट है। लेकिन, गृह विभाग का क्या किया जा सकता है। अगर प्रमोशन के लिए भारत सरकार को टाईम पर लेटर चला गया होता, तो ये नौबत नहीं आती। होम ने चार दिसंबर को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर से अनुमति मांगी। नियम यह है कि एक महीने के भीतर अगर भारत सरकार से कोई रिस्पांस नहीं आया तो राज्य सरकार प्रमोशन करने के लिए स्वतंत्र हो जाती है। गृह विभाग अगर नवंबर में पत्र भेज दिया होता तो दिसंबर में ही डीपीसी हो गई होती। बहरहाल, डीजीपी एएन उपध्याय के डीजी कांफ्रेंस के सिलसिले में छत्तीसगढ़ से बाहर होने के चलते एसपी के प्रमोशन अब आठ जनवरी के बाद ही होंगे। डीजीपी प्रमोशन कमेटी के मेम्बर होते हैं।

लिस्ट में संशोधन

दुर्ग और बिलासपुर में नए आईजी की पोस्टिंग के बाद एसपी की लिस्ट में कुछ संशोधन हो सकते हैं। मसलन, प्रखर पाण्डेय। प्रखर का नाम राजनांदगांव के लिए चल रहा था। लेकिन, हो सकता है, उन्हें सीएम सिक्यूरिटी में ही कंटीन्यू किया जाए। क्योंकि, सीएम सिक्यूरिटी के लिए सरकार को ढंग का कोई अफसर नजर आ नहीं रहा। फिर, प्रखर को सीएम हाउस से बाहर निकालने पर वहां पोस्टेड और कई डीएसपी खड़े हो जाएंगे…हमें भी फील्ड में भेजो। अगर प्रखर राजनांदगांव नहीं गए तो वहां के एसपी प्रशांत अग्रवाल भी हो सकता है, वहीं कंटीन्यू करें। प्रशांत का पहले दुर्ग के लिए नाम चल रहा था। लेकिन, जीपी अब दुर्ग के आईजी बन गए हैं। जीपी ऐसे आईजी हैं कि कमजोर एसपी हो, तब भी काम चला लेंगे। रायपुर में उनके आईजी रहने के दौरान ओपी पाल लंबे समय तक एसपी रहें…इसके आप समझ सकते हैं। सरकार में उच्च स्तर पर बैठे लोग जीपी की इस प्रतिभा से वाकिफ हैं। सो, दुर्ग में कोई लो प्रोफाइल का या फिर जूनियर एसपी पोस्ट हो जाए, तो अचरज नहीं। ऐसा ही कुछ बिलासपुर में भी हो सकता है।

अब हवाई जहाज

छत्तीसगढ़ में कभी उड़ीया लॉबी सरकार चलाती थी। एसके मिश्रा जोगी के बाद रमन सरकार में भी सीएस रहे। एमके राउत का भी अपना रुतबा रहा। अब आईएएस में बच गए हैं सिर्फ सुब्रत साहू। चलिये, उड़ीसा के अफसरों की सरकार चलाने में भूमिका कम हो गई तो क्या हुआ, अब उनकी कंपनी छत्तीसगढ़ में जहाज चलाएगी।

छत्तीसगढ़ के गौरव

माटी पुत्र आईएएस जगदीश सोनकर को सरकार ने धमतरी जिला पंचायत सीईओ से हटाकर दंतेवाड़ा भेज दिया। दंतेवाड़ा के सीईओ गौरव सिंह अब धमतरी के नए सीईओ होंगे। धमतरी पंचायत मंत्री का गृह जिला है, सो वहां के लिए पसंद कर लाए जाने पर गौरव के दंतेवाड़ा के चाहने वालों ने ऐसी बिदाई दे डाली कि सुनील कुमार, विवेक ढांड और एमके राउत जैसे अफसरों ने ऐसी बिदाई की कल्पना नहीं की होगी। राजनांदगांव कलेक्टर मुकेश बंसल को वहां की एक सभा में सीएम खुद बोलकर लाए कि आपके सबसे बेहतरीन अफसर को और बड़ा काम करने के लिए मैं रायपुर लेकर जा रहा हूं और वे अपने साथ उन्हें हेलिकाप्टर में रायपुर लाएं। इसके बाद भी मुकेश की बिदाई कब हो गई, किसी को पता ही नहीं चला। एजुकेशन सिटी से सुर्खियां बटारने वाले ओपी चौधरी के फेयरवेल का पता नहीं चला। लेकिन, गौरव के फेयरवेल पर दंतेवाड़ा में जो जश्न हुआ, उसमें पैसे पानी की तरह बहाए गए। आसपास के कई कलेक्टर और एसपी भी उसमें शिरकत करने पहुंचे। विधायक देवती कर्मा समेत जनप्रतिनिधि से लेकर बड़े ठेकेदार, सप्लायर भी थे। आईएएस को कंधे पर बिठाकर भांगड़ा किया गया। ठीक है, दंतेवाड़ा में पैसे बेहिसाब है। करोड़ों रुपए माईनिंग फंड में आ रहा है। लेकिन, सरकार को कुछ करना चाहिए। कम-से-कम यंग आईएएस सीमाओं का ध्यान रखें।

शैलेंद्र सिंह की याद

अंबिकापुर कलेक्टर किरण कौशल ने वहां के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल पर अपना ध्यान फोकस किया है। डाक्टरों की मौजूदगी से लेकर तमाम चीजों पर नजर रखने के लिए उन्होंने एप बनवाया है। बताते हैं, इसके आशातीत नतीजे मिल रहे हैं। डॉक्टर टाईम से अस्पताल आने लगे हैं। इस खबर को पढ़कर 87 बैच के तेज-तर्रार आईएएस शैलेष सिंह की याद ताजा हो गई। मुश्किल से डेढ़ साल बिलासपुर का कलेक्टर रहने का उन्हें मौका मिला। 99 मध्य से नवंबर 2000 तक। और, उन्होंने लोगों को बताया कि कलेक्टर अगर चाहे तो कुछ भी कर सकता है। जिला अस्पताल जो अब सिम्स बन गया है, कलेक्टर ने ऐसी व्यवस्थाएं बनाई कि लोग आज भी उन्हें याद करते हैं। अस्पताल पर नकैल कसने के लिए रोस्टर में रोज एक डिप्टी कलेक्टर की उन्होंने अस्पताल में ड्यूटी लगा दी थी। शहर में रहने पर वे खुद भी एक बार अस्पताल जाते थे। लेकिन, अब के कलेक्टरों को अस्पताल प्राथमिकता में रहा नहीं। एकाध इनोवेशन का काम पकड़कर सरकार से शाबासी ले लों। बाकी, अस्पताल में आम आदमी भेड़-बकरियों की तरह धक्के खा रहा है, तो खाने दो। भगवान ने आम आदमी इसीलिए तो बनाया है। चलिये, अच्छी बात है….एक महिला कलेक्टर ने उस संस्थान की सुध ली है, जहां 70 से 80 फीसदी दुखी-पीड़ित लोग पहुंचते हैं।

मंत्री की भड़ास

सीएम के साथ 5 दिसंबर को सरगुजा और जशपुर गए पीडब्लूडी मिनिस्टर राजेश मूणत वहां के एक आईएएस पर भड़क गए। हेलीपैड पर सीऑफ करने आए अफसर को मूणत यहां तक कह गए कि तुम्हारी शिकायत सौदान भाई साब तक पहुंच गई….देख लो, वरना तुम निबट जाओगे। अब लोग पता लगा रहे हैं कि माजरा क्या है। और, ये भी कि सरकार का इकबाल इतना कमजोर हो गया है कि मंत्री भी अफसरों को सौदान सिंह का नाम लेकर चमका रहे हैं।

ऐसे भी अफसर

भई! आईएफएस अफसरों का जवाब नहीं है। एक एडिशनल पीसीसीएफ के लेवल के अफसर मेडिसिनिल प्लांट बोर्ड में सीईओ रहे। जनाब ने वहां के संसाधनों का जमकर दुरु-उपयोग किया। और, वहां से हटे तो लेपटॉप, आईपैड, आईफोन और गाड़ी भी लेते गए। छह महीने बाद भी उन्होंने इसे लौटाया नहीं है। वर्तमान सीईओ शिरीष अग्रवाल ने अब परेशान होकर सरकार से दरख्वास्त किया है….अफसर से बोर्ड का सामान वापिस कराया जाए। इस एपीसोड से यह भी साफ हो गया है कि सरकारी धन को अफसर किस तरह अपना समझने लगते हैं। आखिर, आईफोन और आई पैड भी सरकारी खजाने से।

सीट आरक्षित

टीम रमन 13 को 12 दिन के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रवाना हो रही है। टीम में सीएम के साथ सीएस, पीएस टू सीएम, सिकरेट्री इंडस्ट्री और एमडी सीएसआईडीसी के साथ डीपीआर राजेश टोप्पो शामिल हैं। राजेश पिछले बार भी साथ में थे। उससे पहिले सीएम के साथ कभी डीपीआर विदेश नहीं जाते थे। लेकिन, पिछले विदेश दौरे का मीडिया में जिस तरह कवरेज हुआ उसके बाद लगता है, सरकार ने डीपीआर के लिए एक सीट आरक्षित कर दी है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एक आईएफएस अफसर का नाम बताएं, जो संपत्ति के ब्यौरा में राजधानी के मौलश्री विहार के मकान की कीमत में 20 लाख रुपए का अंतर बता दिया है?
2. छत्तीसगढ़ में हवाई सेवा शुरू करने वाली कंपनी में क्या प्रदेश के किसी कांग्रेस नेता की भी हिस्सेदारी है?